उरई में छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म, नशीला पिलाकर बाइक पर ले जाकर अकोढ़ी गांव में पीड़ा दी, आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ /उरई। 22 वर्षीय एक छात्रा को पढ़ाई में मदद करने के बहाने युवक ने अकोढ़ी गांव ले जाकर नशीला पदार्थ पिलाया और उसके बाद अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी युवक छात्रा को राठ रोड स्थित बस स्टैंड पर अचेत हालत में छोड़कर भाग गया।मंगलवार रात छात्रा के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
कोंच कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी व्यक्ति ने एट थाना पुलिस को तहरीर दी। इसमें बताया कि उसकी 22 वर्षीय पुत्री उरई में रहकर कोचिंग कर रही थी। तीन जनवरी को उसी के साथ पहले कोचिंग करने वाले सिद्धार्थ पटेल ने उसे पढ़ाई में सहयोग करने का झांसा दिया। उसे अपने साथ बाइक से एट थाना क्षेत्र के अकोढ़ी गांव ले गया।

यहां सिद्धार्थ ने छात्रा को शीतल पेय में नशीला पदार्थ पिला दिया। इससे वह अचेत हो गई। इसके बाद सिद्धार्थ व उसके चचेरे भाई रिषी पटेल ने दुष्कर्म किया। इसके बाद अचेतावस्था में सिद्धार्थ उसे शहर के राठ रोड स्थित बस स्टैंड पर छोड़ने के लिए ले गया। इसी दौरान कुछ लोगों ने उसे देखा तो पकड़कर पूछताछ की और युवती के परिजनों को सूचना दे दी।

मौके पर पहुंचे परिजन छात्रा को घर ले आए। होश में आने पर छात्रा ने आपबीती सुनाई। पिता ने बताया कि वह भाई के देहांत हो जाने पर उसके क्रिया-कर्म के लिए बिठूर गया था। वहां से लौटने पर उसे घटना की जानकारी हुई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर आरोपी रिषी व सिद्धार्थ को गांव के पास से ही गिरफ्तार कर लिया।

बस स्टैंड पर सिद्धार्थ जब युवती को अचेत हालात में छोड़कर भाग रहा था तो लोगों ने उसे पकड़ लिया। लोगों की पूछताछ में सिद्धार्थ ने बताया था कि युवती उसे झांसी रोड पर अचेतावस्था में पड़ी मिली है, वह तो उसे बस स्टैंड तक छोड़ने आया है। इस पर युवती के पहुंचे परिजनों ने युवक का वीडियो बना लिया। छात्रा को होश आया और परिजनों ने जैसे ही उसे वीडियो दिखाया तो छात्रा रोते हुए बोली कि यही तो उसे ले गया था। इसी ने भाई के साथ उससे दुष्कर्म किया है। परिजनों ने बताया कि करीब 20 घंटे बाद युवती को होश आया था।

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस के साथ घटनास्थल पर पहुंचे परिजनों को गांव के ही एक महिला ने बताया कि आरोपी छात्रा को चार घंटे तक कमरे में बंद कर यातनाएं देते रहे। छात्रा चीखती रही, लेकिन युवकों उस पर दया नहीं आई। वह अचेतावस्था में उसे फिर से कहीं लेकर चले गए थे। घटना से खलबली मची हुई है।पुलिस ने बताया कि पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों युवकों और युवती का मेडिकल कराया गया है।
यूपी की मतदाता सूची में बड़ा अंतर उजागर, 3.62 करोड़ पात्र नागरिक अब भी बाहर
चुनाव आयोग का अलर्ट: एक महीने में 1 करोड़ नए वोटर जोड़ने का महाअभियान

लखनऊ।उत्तर प्रदेश की लोकतांत्रिक तस्वीर में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। राज्य में करीब 3 करोड़ 62 लाख ऐसे नागरिक हैं, जो उम्र के लिहाज से वोट देने के पात्र हैं, लेकिन अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो पाए हैं। यह खुलासा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की जनसंख्या रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद चुनाव आयोग ने किया है।

इसी बड़े अंतर को पाटने के लिए चुनाव आयोग ने एक महीने के भीतर एक करोड़ नए मतदाता जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस अभियान में सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से सक्रिय सहयोग भी मांगा गया है।

2026 तक 16 करोड़ से अधिक होंगे वोट देने के योग्य

केंद्रीय विभाग की वर्ष 2020 में जारी उच्चस्तरीय जनसंख्या रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नागरिकों की संख्या 16 करोड़ 16 लाख 85 हजार तक पहुंच जाएगी। यानी ये सभी नागरिक संविधान के तहत मताधिकार के पात्र होंगे।इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग अपनी मतदाता सूची को दुरुस्त करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

कच्ची सूची और जनसंख्या में 3.62 करोड़ का फासला

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत 6 जनवरी को जारी कच्ची मतदाता सूची में 12 करोड़ 55 लाख मतदाता दर्ज हैं।जबकि केंद्रीय जनसंख्या अनुमान के अनुसार पात्र मतदाताओं की संख्या कहीं अधिक है।यही अंतर 3.62 करोड़ पात्र मतदाताओं के रूप में सामने आया है, जिन्हें सूची में शामिल किया जाना बाकी है।

फॉर्म-6 भरने की अपील, 6 फरवरी तक मौका

चुनाव आयोग ने ऐसे सभी पात्र नागरिकों से अपील की है, जिनका नाम कच्ची मतदाता सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर मतदाता पंजीकरण कराएं।
6 फरवरी तक फॉर्म-6 भरने पर
6 मार्च को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची में नाम जुड़ जाएगा
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक में साफ शब्दों में कहा है कि यदि एक महीने में एक करोड़ नए मतदाता नहीं जुड़ते, तो इसका मतलब होगा कि अभियान में कहीं न कहीं गंभीर कमी रह गई।

पहले भी दिखा है असर, दो चुनावों में जुड़े थे लाखों वोटर

चुनाव आयोग का भरोसा पिछले अनुभवों पर टिका है।
2022 विधानसभा चुनाव से पहले विशेष अभियान में 50 लाख से अधिक मतदाता जुड़े
2024 लोकसभा चुनाव से पहले भी करीब 50 लाख नए वोटर सूची में शामिल हुए
आयोग का मानना है कि यदि उसी स्तर की सक्रियता दोहराई गई, तो एक करोड़ नए मतदाता जोड़ना पूरी तरह संभव है।

चुनाव आयोग का स्पष्ट संदेश

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा“हम अगले एक माह में एक करोड़ नए मतदाता जोड़ने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की गई है और सहयोग की अपेक्षा है।”
चिनहट: होटल कर्मी ने की खुदकुशी, पुलिस पड़ताल में जुटी ,विकल्प खंड दो में हुई घटना का मामला

लखनऊ। हरदोई से होटल में काम करने आए 27 वर्षीय शिवम सिंह ने खुदकुशी कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उसका बुधवार सुबह होटल के बाथरूम में बेडशीट के सहारे लटकता मिला। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। आत्महत्या किए जाने की वजह साफ नहीं हो सकी है। इंस्पेक्टर के मुताबिक घरवालों को इसकी खबर दे दी गई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

पूरे घटनाक्रम पर एक नजर

हरदोई जिले के चमन भरवा क्षेत्र स्थित दुलार नगर निवासी करूणेश सिंह का 27 वर्षीय बेटा शिवम सिंह चिनहट थाना क्षेत्र के विकल्प खंड दो में स्थित बरदहिया रेस्टोरेंट में नौकरी करता था। इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा के मुताबिक साथ में काम करने वाले सीतापुर निवासी अर्जुन यादव व बीकेटी निवासी अभिनव यादव ने बताया रोज की तरह मंगलवार रात खाना खाने के बाद सो रहे थे।
बुधवार सुबह जब सोकर उठे तो देखा कि बाथरूम का दरवाजा बंद था।

बताया जा रहा है कि इस काफी आवाज देने के बाद भीतर से कोई आहट न मिलने पर सहपाठियों ने दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल हुए तो दंग रह गए। देखा कि शिवम सिंह का शव बाथरूम में बेडशीट के सहारे उसका शव लटक रहा था।यह माजरा देख सहपाठियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। इंस्पेक्टर के मुताबिक मामले की छानबीन कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इंस्पेक्टर का कहना है कि इसकी सूचना घरवालों को दे दी गई है। शिवम सिंह ने यह कदम क्यों उठाया इसकी वजह साफ नहीं हो सकी है।
उत्तर प्रदेश में 20 आईपीएस अधिकारियों का तबादला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार काे 20 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इन तबादलाें में आईपीएस किरण एस काे पुलिस महानिरीक्षक परिक्षेत्र लखनऊ बनाया गया है। अपर्णा कुमार को संयुक्त पुलिस आयुक्त का कार्यभार सौंपा गया है।

पुलिस मुख्यालय से जारी सूची के आधार पर आईपीएस रामकुमार को अपर पुलिस महानिदेशक, मानवाधिकार लखनऊ से अपर पुलिस महानिदेशक लाजिस्टिक, अपर पुलिस महानिदेशक लाजिस्टिक राजकुमार को अपर पुलिस महानिदेशक मानवाधिकार, अपर पुलिस महानिदेशक पीटीएस जालौन ज्योति नारायन को प्रयागराज जोन, अपर पुलिस महानिदेशक डा. संजीव गुप्ता को प्रयागराज जाेन से हटाकर अपर पुलिस महानिदेशक पुलिस मुख्यालय लखनऊ, प्रशान्त कुमार को अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन बनाया गया है।

तरुण गाबा को अपर पुलिस महानिदेशक सुरक्षा, आशुतोष कुमार को पुलिस कमिश्ररेट कानपुर नगर से अपर पुलिस महानिदेशक पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड लखनऊ, मोदक राजेश डी को पुलिस महानिरीक्षक रेलवे से पुलिस महानिरीक्षक स्थापना, आरके भारद्वाज को पुलिस महानिरीक्षक भवन एवं कल्याण से पुलिस महानिरीक्षक रेलवे लखनऊ बनाया गया है।

इनके अलावा आनंद सुरेशराव कुलकर्णी को तकनीकि सेवायें से हटाकर पुलिस महानिरीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन, अमित वर्मा को पुलिस कमिश्ररेट लखनऊ से पुलिस महानिरीक्षक ईओडब्ल्यू उप्र, अखिलेश कुमार निगम को पुलिस महानिरीक्षक सीआईडी, एन कोलान्ची को पुलिस महानिरीक्षक रेलवे प्रयागराज, राजीव मल्होत्रा को पुलिस महानिरीक्षक यूपी एसआईएफएस लखनऊ, रोहन पी कनय पुलिस उपमहानिरीक्षक विशेष जांच, मो. ईमरान को पुलिस उपमहानिरीक्षक भवन एवं कल्याण, संतोष कुमार को पुलिस उपमहानिरीक्षक पीटीएस जालौन और विजय ढुल को यूपी 112 लखनऊ से हटाकर पुलिस कमिश्ररेट प्रयागराज में अपर पुलिस आयुक्त बनाया है।
लखनऊ से कानपुर का वांछित अपराधी सुरजीत कुमार गिरफ्तार
लखनऊ। एसटीएफ, उत्तर प्रदेश ने लखनऊ के सेमरा, चिनहट क्षेत्र से कानपुर कमिश्नरेट में वांछित और 50,000 रुपये का इनाम घोषित अपराधी सुरजीत कुमार को गिरफ्तार किया है।सुरजीत कुमार पर कानपुर के थाना किदवई नगर में धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने भाई दिलीप राय बलवानी और भाभी रीता राय के साथ मिलकर लोगों को फ्लैट या प्लाट दिलाने के नाम पर ठगी करता था।गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानपुर पुलिस के पास भेजा गया और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
एएनटीएफ ने तीन अंतरराज्यीय ड्रग तस्कर गिरफ्तार, भारी मात्रा में हेरोइन और कैमिकल जब्त
लखनऊ /बरेली। एएनटीएफ यूनिट बरेली ने 06 जनवरी को तीन अंतरराज्यीय सक्रिय ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 52.5 किलो Acetic Anhydide और 640 ग्राम अवैध स्मैक/हेरोइन बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.43 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पुलिस ने 1 ईनोवा कार, 3 मोबाइल फोन और 1,03,520 रुपये नकद भी जब्त किए।

गिरफ्तार तस्करों की पहचान

ओमेन्द्र, ग्राम बहोरपुरा, थाना बिनावर, जिला बदायूँ
्रमनोज, ग्राम औंध, थाना फतेहगंज पश्चिमी, जिला बरेली
शाकिर, ग्राम साहासा, थाना विसारतगंज, जिला बरेली

हेरोइन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कैमिकल खरीदते थे

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे स्मैक/हेरोइन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कैमिकल खरीदते थे और आसपास के जिलों में सप्लाई करते थे।इस संबंध में थाना मीरगंज, बरेली में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और विधिक कार्रवाई जारी है।एएनटीएफ टीम और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से इस अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
उत्तर प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी, 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने राज्य की अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को जारी करने की तैयारी पूरी कर ली है। सीईओ नवदीप रिणवा के अनुसार, इस बार लगभग 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा, क्योंकि उनके रिकॉर्ड का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है।

12 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा

नोटिस प्राप्त मतदाताओं को अपने नाम की पुष्टि के लिए मान्य 12 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा। जिन लोग दस्तावेज पेश नहीं कर पाएंगे, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे।
राज्य की अंतिम मतदाता सूची में सभी 75 जिले और 403 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस प्रक्रिया में कुल 1,72,486 बूथ और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 5,76,611 बूथ स्तरीय एजेंटों की मदद ली गई।
यदि किसी मतदाता का नाम मसौदा सूची में नहीं है या परिवार के किसी गैर-मौजूद सदस्य का नाम दर्ज है, तो वे चुनाव आयोग के समक्ष दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस कार्य के लिए समयसीमा 6 फरवरी 2026 तय की गई है। दावों और आपत्तियों का निपटारा आयोग 27 फरवरी तक करेगा।

मतदाता बनने या नाम जोड़ने/सुधारने के लिए निम्न फॉर्म उपलब्ध

फॉर्म 6: नए मतदाताओं के लिए आवेदन
फॉर्म 6क: विदेश में रहने वाले नागरिकों के लिए, यदि उन्होंने वहां की नागरिकता नहीं ली है
फॉर्म 7: सूची में नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने के लिए
फॉर्म 8: पता परिवर्तन, प्रविष्टियों में सुधार, EPIC प्रतिस्थापन और दिव्यांग चिह्नांकन के लिए
इन फॉर्म को स्थानीय निर्वाचन कार्यालय या वेबसाइट ceouttarpradesh.nic.inसे प्राप्त किया जा सकता है।

ऑनलाइन इस प्रकार से करें जांच

मतदाता अपनी स्थिति ऑनलाइन भी जांच सकते हैं। इसके लिए voters.eci.gov.in
पोर्टल पर जाकर “Search in Electoral Roll” में नाम, पिता का नाम या वोटर आईडी (EPIC) दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा, वोटर हेल्पलाइन एप और स्थानीय बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।नोटिस प्राप्त मतदाताओं के नाम गृह विभाग को नहीं भेजे जाएंगे, लेकिन आयोग इनका विवरण सार्वजनिक करेगा।
यूपी SIR: 75 जिलों में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटे, लखनऊ में सबसे अधिक 30.04% वोट डिलीट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश के 75 जिलों में बड़ी संख्या में वोट कटे हैं। राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

एनसीआर और बड़े शहरी जिलों में कटौती का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा। गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत, कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत, बलरामपुर में 25.98 प्रतिशत, मेरठ में 24.65 प्रतिशत, प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत और आगरा में 23.25 प्रतिशत वोट कटे हैं।

पश्चिमी यूपी की बात करें तो सहारनपुर में 16.37 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, बुलंदशहर में 15.14 प्रतिशत, बागपत में 18.15 प्रतिशत, हापुड़ में 22.30 प्रतिशत, शामली में 16.75 प्रतिशत और संभल में 20.29 प्रतिशत वोट काटे गए हैं।

बुंदेलखंड क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम कटौती दर्ज की गई। ललितपुर में सबसे कम 9.95 प्रतिशत, हमीरपुर में 10.78 प्रतिशत, महोबा में 12.42 प्रतिशत, बांदा में 13 प्रतिशत और झांसी में 13.92 प्रतिशत वोट कटे।

पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में भी कई जिलों में 15 से 20 प्रतिशत तक नाम हटाए गए हैं। वाराणसी में 18.18 प्रतिशत, गोरखपुर में 17.61 प्रतिशत, बलिया में 18.16 प्रतिशत, आजमगढ़ में 15.25 प्रतिशत, जौनपुर में 16.51 प्रतिशत, बस्ती में 15.70 प्रतिशत, सिद्धार्थनगर में 20.33 प्रतिशत, संत कबीर नगर में 19.96 प्रतिशत, सीतापुर में 19.55 प्रतिशत, बहराइच में 20.44 प्रतिशत और गोंडा में 18.40 प्रतिशत वोट कटे हैं।

मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया फर्जी, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए की गई है।
कुल मिलाकर, यूपी SIR के आंकड़े आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।
केजीएमयू प्रकरण में नया मोड़, धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े तार, फरार डॉक्टर के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच तेज
लखनऊ। केजीएमयू की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस प्रकरण में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक के परिवार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क की ओर बढ़ती दिख रही है।

आरोपी डॉक्टर के माता-पिता को हिरासत में

सोमवार को चौक पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के माता-पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें कई अहम जानकारियां सामने आईं। पूछताछ में बताया गया कि रमीज, बलरामपुर निवासी छांगुर नामक व्यक्ति के संपर्क में था, जिसे पुलिस धर्मांतरण गिरोह का प्रमुख मान रही है। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद से ही रमीज तनाव में था और लगातार सतर्क रहने लगा था।

सूत्रों के अनुसार, रमीज की मुलाकात छांगुर से एक मौलवी के जरिए कराई गई थी। यही मौलवी कथित तौर पर पीड़िता पर धर्म बदलने का दबाव भी बना रहा था। इस एंगल को गंभीरता से लेते हुए चौक पुलिस ने खुफिया एजेंसियों को भी पूरे मामले की जानकारी साझा की है।

रमीज की गतिविधियों की परत-दर-परत पड़ताल कर रही

जांच एजेंसियां बीते एक वर्ष में रमीज की गतिविधियों की परत-दर-परत पड़ताल कर रही हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण में सामने आया है कि आरोपी न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशों में भी कई संदिग्ध संपर्कों में था। पुलिस को आशंका है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद रमीज देश छोड़कर फरार हो गया है। हालांकि, उसकी अंतिम लोकेशन लखनऊ की ही मिली थी, जिसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।

पहले भी एक महिला का धर्मांतरण कराया था

पुलिस को यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी ने साजिश के तहत पहले भी एक महिला का धर्मांतरण कराया था। इसी सिलसिले में रमीज के पिता सलीमुद्दीन और मां खदीजा की गिरफ्तारी की गई है। अब पुलिस की नजर पीलीभीत निवासी काजी सैय्यद जाहिद हसन पर है, जिसने कथित तौर पर निकाह और धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि काजी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क की तस्वीर और साफ होगी।इसके साथ ही पुलिस धर्मांतरण के गवाह बताए जा रहे शारिक खान की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। यह भी जांच का विषय है कि काजी ने अब तक कितनी महिलाओं का धर्मांतरण कराया और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन का क्या ढांचा था।

माता-पिता को भी धर्मांतरण के आरोप में जेल भेजा जा चुका

इस मामले में आरोपी के अब तक गिरफ्त में न आने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद रमीज को समय रहते हिरासत में नहीं लिया गया, जबकि वह उस दौरान केजीएमयू परिसर में मौजूद था। इसी चूक का फायदा उठाकर आरोपी कथित तौर पर भूमिगत हो गया। डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ शादी से पहले धर्म बदलने का दबाव बनाने का मुकदमा दर्ज है। उसकी पहली पत्नी के बयान के आधार पर माता-पिता को भी धर्मांतरण के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब केजीएमयू की एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर ने उस पर गंभीर आरोप लगाए।

अन्य धर्म की करीब 15 रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डॉक्टर अन्य धर्म की करीब 15 रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था। पुलिस को संदेह है कि इसके पीछे संगठित तरीके से धर्मांतरण कराने और उसके बदले मोटी रकम लेने की योजना थी।सूत्रों के मुताबिक, केजीएमयू में चर्चा है कि दिल्ली की एक डॉक्टर के धर्मांतरण के बदले करीब 15 लाख रुपये दिए गए थे, जबकि गैर-चिकित्सकों के लिए यह राशि करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है। कॉल डिटेल्स में यह भी सामने आया है कि आरोपी सामान्य ड्यूटी समय के बाद भी रेजिडेंट डॉक्टरों से लंबी बातचीत करता था।फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस संवेदनशील मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
शाहजहांपुर में हाईवे पर बड़ा हादसा, मौलाना तौकीर रजा के बेटे की कार रोडवेज बस से भिड़ी, ड्रग्स मिलने से मचा हड़कंप

लखनऊ/ शाहजहांपुर। लखनऊ–दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब तिलहर थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार खड़ी रोडवेज बस से जा टकराई। हादसे में कार चालक बाल-बाल बच गया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान मामला अचानक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया।

फरमान रजा अपनी कार से बरेली की ओर जा रहा था

जानकारी के अनुसार, बरेली निवासी फरमान रजा अपनी कार से बरेली की ओर जा रहा था। शाम करीब साढ़े सात बजे हरिद्वार जा रही सीतापुर डिपो की रोडवेज बस कछियानी खेड़ा स्थित हनुमान मंदिर के सामने खड़ी थी। बताया जा रहा है कि बस चालक मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गया हुआ था, तभी पीछे से आई कार अनियंत्रित होकर बस से टकरा गई।

टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई

टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और फरमान वाहन के अंदर फंस गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला। हादसे के बाद वह काफी घबराया हुआ नजर आया, हालांकि उसे गंभीर चोटें नहीं आईं। मौके पर भीड़ जुटने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।सूचना मिलने पर तिलहर पुलिस मौके पर पहुंची और फरमान को थाने ले आई।

कार में एक बैग के एक सफेद रंग का संदिध समान मिला

पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें रखे बैग से एक पुड़िया में सफेद रंग का संदिग्ध पदार्थ बरामद हुआ। इसके साथ ही ड्रग्स के इस्तेमाल में प्रयुक्त सिरिंज भी मिलने की बात सामने आई।मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे अरुण स्वयं थाने पहुंचीं और जांच की। प्रारंभिक जांच में बरामद पदार्थ को आधा ग्राम क्रिस्टल ड्रग्स बताया गया है। पूछताछ में फरमान ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने यह नशीला पदार्थ अपने निजी उपयोग के लिए दिल्ली से खरीदा था।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरमान का मेडिकल परीक्षण कराया गया है ताकि नशे के सेवन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट और मेडिकल परीक्षण के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और हादसे के साथ-साथ नशीले पदार्थ की बरामदगी के सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।