भ्रष्टाचार : श्रम विभाग के खिलाफ कर करणी सेना ने खोला मोर्चा
*फर्जीवाड़ा में मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर दी आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
*फर्ज़ी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजना का हितलाभ लेने व दिलाने वाले बिचौलिए व दोषी अधिकारी व कर्मचारी के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके कार्यवाही करने की मांग
मीरजापुर। जिले के श्रम विभाग में कूटरचित सरकारी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजना का हितलाभ लेने व दिलाने वाले बिचौलिए व दोषी अधिकारी व कर्मचारी के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके कार्यवाही करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने एक बार पुनः जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया है। आरोप लगाया है कि जब जांच दर जांच के बाद मामला सही पाया गया है तो फिर दोषी अफसरों, बिचौलियों पर मुक़दमा दर्ज करने में देर क्यों? करणी सेना के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार ने जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में बताया है कि श्रम विभाग मीरजापुर कार्यालय से कुछ असंगठित गिरोह (बिचौलिए) द्वारा अपने निजी लाभ के लिए दुरभिसंधि कर निर्माण श्रमिकों, मजदूरों एवं सीधे-साधे लोगों को लुभावना प्रस्ताव देकर अपने जाल में फसातें हैं। फंसाने के बाद उनके बैंक खाते, आधार कार्ड व व्यक्तिगत दस्तावेज लेकर उनका दुरूपयोग करते हुए जान बूझकर कूटरचित दस्तावेज जैसे, बिना बच्चे के जन्मे, सरकारी अस्पताल का जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर नकल तथा बिना प्रसव के ही सरकारी अस्पताल का प्रसव प्रमाण पत्र आदि लगाकर श्रम विभाग की योजनाएं मसलन, मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना तथा पुत्री विवाह अनुदान योजना में लाभ दिलाया गया है। इस बात की पुष्टि श्रम विभाग के ही उच्चाधिकारियों की जांच टीम द्वारा की गयी है। उन्होंने बताया है कि पूर्व के दो जांचों में एक में 105 की जांच में 90 आवेदन में लगे कूटरचित दस्तावेज के आधार पर लाभ दिए गये हैं तथा इसके पूर्व की एक जांच में 12 आवेदनों की जांच में कुल 12 फर्जी पाये गये थे, जिसमें श्रम विभाग के उप श्रमायुक्त पंकज राणा ने अपने जांच रिपोर्ट और कार्यालय आदेश में विभिन्न सुसंगत धाराओं तत्कालिन भादवि की धारा-120 बी, 192, 197, 420, 464, 467, 468 तथा 471 के अन्तर्गत अभियोग पंजीकृत कराये जाने का आदेश दिया था। इस सम्बन्ध में दोषियों के विरूद्ध सर्व प्रथम प्राथमिकी दर्ज करने के लिए श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा 15 दिसंबर 2025 को ज्ञापन दिया गया था जिसपर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी। चूंकि मामले की जांच स्वयं विभाग के उच्चाधिकारी द्वारा पूर्व में की जा चुकी है, जिसमें 90 तथा 12 में 11 आवेदनों की पुनः जांच की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग किया है कि कूटरचित सरकारी दस्तावेज का दुरूपयोग कर सरकारी योजना में धनलाभ लेने व दिलाने वाले जैसे गंभीर मामले को देखते हुए सर्व प्रथम प्राथमिकी दर्ज कर मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराकर ज्ञात-अज्ञात अधिकारी, कर्मचारी एवं बिचौलिए एवं दोषी आवेदकों के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध व वैद्यानिक कार्यवाही कराई जाएं, ताकि श्रमिकों के हक अधिकार सहित सरकारी धन को हज़म कर लाखों की सम्पत्ति खड़ी करने वालों को बेनकाब करते हुए उनसे इसकी रिकवरी भी सुनिश्चित हो सके।
Jan 07 2026, 18:48
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