उत्तर प्रदेश में 20 आईपीएस अधिकारियों का तबादला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार काे 20 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इन तबादलाें में आईपीएस किरण एस काे पुलिस महानिरीक्षक परिक्षेत्र लखनऊ बनाया गया है। अपर्णा कुमार को संयुक्त पुलिस आयुक्त का कार्यभार सौंपा गया है।

पुलिस मुख्यालय से जारी सूची के आधार पर आईपीएस रामकुमार को अपर पुलिस महानिदेशक, मानवाधिकार लखनऊ से अपर पुलिस महानिदेशक लाजिस्टिक, अपर पुलिस महानिदेशक लाजिस्टिक राजकुमार को अपर पुलिस महानिदेशक मानवाधिकार, अपर पुलिस महानिदेशक पीटीएस जालौन ज्योति नारायन को प्रयागराज जोन, अपर पुलिस महानिदेशक डा. संजीव गुप्ता को प्रयागराज जाेन से हटाकर अपर पुलिस महानिदेशक पुलिस मुख्यालय लखनऊ, प्रशान्त कुमार को अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन बनाया गया है।

तरुण गाबा को अपर पुलिस महानिदेशक सुरक्षा, आशुतोष कुमार को पुलिस कमिश्ररेट कानपुर नगर से अपर पुलिस महानिदेशक पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड लखनऊ, मोदक राजेश डी को पुलिस महानिरीक्षक रेलवे से पुलिस महानिरीक्षक स्थापना, आरके भारद्वाज को पुलिस महानिरीक्षक भवन एवं कल्याण से पुलिस महानिरीक्षक रेलवे लखनऊ बनाया गया है।

इनके अलावा आनंद सुरेशराव कुलकर्णी को तकनीकि सेवायें से हटाकर पुलिस महानिरीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन, अमित वर्मा को पुलिस कमिश्ररेट लखनऊ से पुलिस महानिरीक्षक ईओडब्ल्यू उप्र, अखिलेश कुमार निगम को पुलिस महानिरीक्षक सीआईडी, एन कोलान्ची को पुलिस महानिरीक्षक रेलवे प्रयागराज, राजीव मल्होत्रा को पुलिस महानिरीक्षक यूपी एसआईएफएस लखनऊ, रोहन पी कनय पुलिस उपमहानिरीक्षक विशेष जांच, मो. ईमरान को पुलिस उपमहानिरीक्षक भवन एवं कल्याण, संतोष कुमार को पुलिस उपमहानिरीक्षक पीटीएस जालौन और विजय ढुल को यूपी 112 लखनऊ से हटाकर पुलिस कमिश्ररेट प्रयागराज में अपर पुलिस आयुक्त बनाया है।
लखनऊ से कानपुर का वांछित अपराधी सुरजीत कुमार गिरफ्तार
लखनऊ। एसटीएफ, उत्तर प्रदेश ने लखनऊ के सेमरा, चिनहट क्षेत्र से कानपुर कमिश्नरेट में वांछित और 50,000 रुपये का इनाम घोषित अपराधी सुरजीत कुमार को गिरफ्तार किया है।सुरजीत कुमार पर कानपुर के थाना किदवई नगर में धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने भाई दिलीप राय बलवानी और भाभी रीता राय के साथ मिलकर लोगों को फ्लैट या प्लाट दिलाने के नाम पर ठगी करता था।गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानपुर पुलिस के पास भेजा गया और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
एएनटीएफ ने तीन अंतरराज्यीय ड्रग तस्कर गिरफ्तार, भारी मात्रा में हेरोइन और कैमिकल जब्त
लखनऊ /बरेली। एएनटीएफ यूनिट बरेली ने 06 जनवरी को तीन अंतरराज्यीय सक्रिय ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 52.5 किलो Acetic Anhydide और 640 ग्राम अवैध स्मैक/हेरोइन बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.43 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पुलिस ने 1 ईनोवा कार, 3 मोबाइल फोन और 1,03,520 रुपये नकद भी जब्त किए।

गिरफ्तार तस्करों की पहचान

ओमेन्द्र, ग्राम बहोरपुरा, थाना बिनावर, जिला बदायूँ
्रमनोज, ग्राम औंध, थाना फतेहगंज पश्चिमी, जिला बरेली
शाकिर, ग्राम साहासा, थाना विसारतगंज, जिला बरेली

हेरोइन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कैमिकल खरीदते थे

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे स्मैक/हेरोइन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कैमिकल खरीदते थे और आसपास के जिलों में सप्लाई करते थे।इस संबंध में थाना मीरगंज, बरेली में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और विधिक कार्रवाई जारी है।एएनटीएफ टीम और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से इस अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
उत्तर प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी, 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने राज्य की अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को जारी करने की तैयारी पूरी कर ली है। सीईओ नवदीप रिणवा के अनुसार, इस बार लगभग 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा, क्योंकि उनके रिकॉर्ड का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है।

12 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा

नोटिस प्राप्त मतदाताओं को अपने नाम की पुष्टि के लिए मान्य 12 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत करना होगा। जिन लोग दस्तावेज पेश नहीं कर पाएंगे, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे।
राज्य की अंतिम मतदाता सूची में सभी 75 जिले और 403 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस प्रक्रिया में कुल 1,72,486 बूथ और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 5,76,611 बूथ स्तरीय एजेंटों की मदद ली गई।
यदि किसी मतदाता का नाम मसौदा सूची में नहीं है या परिवार के किसी गैर-मौजूद सदस्य का नाम दर्ज है, तो वे चुनाव आयोग के समक्ष दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस कार्य के लिए समयसीमा 6 फरवरी 2026 तय की गई है। दावों और आपत्तियों का निपटारा आयोग 27 फरवरी तक करेगा।

मतदाता बनने या नाम जोड़ने/सुधारने के लिए निम्न फॉर्म उपलब्ध

फॉर्म 6: नए मतदाताओं के लिए आवेदन
फॉर्म 6क: विदेश में रहने वाले नागरिकों के लिए, यदि उन्होंने वहां की नागरिकता नहीं ली है
फॉर्म 7: सूची में नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने के लिए
फॉर्म 8: पता परिवर्तन, प्रविष्टियों में सुधार, EPIC प्रतिस्थापन और दिव्यांग चिह्नांकन के लिए
इन फॉर्म को स्थानीय निर्वाचन कार्यालय या वेबसाइट ceouttarpradesh.nic.inसे प्राप्त किया जा सकता है।

ऑनलाइन इस प्रकार से करें जांच

मतदाता अपनी स्थिति ऑनलाइन भी जांच सकते हैं। इसके लिए voters.eci.gov.in
पोर्टल पर जाकर “Search in Electoral Roll” में नाम, पिता का नाम या वोटर आईडी (EPIC) दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा, वोटर हेल्पलाइन एप और स्थानीय बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।नोटिस प्राप्त मतदाताओं के नाम गृह विभाग को नहीं भेजे जाएंगे, लेकिन आयोग इनका विवरण सार्वजनिक करेगा।
यूपी SIR: 75 जिलों में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटे, लखनऊ में सबसे अधिक 30.04% वोट डिलीट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश के 75 जिलों में बड़ी संख्या में वोट कटे हैं। राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

एनसीआर और बड़े शहरी जिलों में कटौती का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा। गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत, कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत, बलरामपुर में 25.98 प्रतिशत, मेरठ में 24.65 प्रतिशत, प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत और आगरा में 23.25 प्रतिशत वोट कटे हैं।

पश्चिमी यूपी की बात करें तो सहारनपुर में 16.37 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत, बुलंदशहर में 15.14 प्रतिशत, बागपत में 18.15 प्रतिशत, हापुड़ में 22.30 प्रतिशत, शामली में 16.75 प्रतिशत और संभल में 20.29 प्रतिशत वोट काटे गए हैं।

बुंदेलखंड क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम कटौती दर्ज की गई। ललितपुर में सबसे कम 9.95 प्रतिशत, हमीरपुर में 10.78 प्रतिशत, महोबा में 12.42 प्रतिशत, बांदा में 13 प्रतिशत और झांसी में 13.92 प्रतिशत वोट कटे।

पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में भी कई जिलों में 15 से 20 प्रतिशत तक नाम हटाए गए हैं। वाराणसी में 18.18 प्रतिशत, गोरखपुर में 17.61 प्रतिशत, बलिया में 18.16 प्रतिशत, आजमगढ़ में 15.25 प्रतिशत, जौनपुर में 16.51 प्रतिशत, बस्ती में 15.70 प्रतिशत, सिद्धार्थनगर में 20.33 प्रतिशत, संत कबीर नगर में 19.96 प्रतिशत, सीतापुर में 19.55 प्रतिशत, बहराइच में 20.44 प्रतिशत और गोंडा में 18.40 प्रतिशत वोट कटे हैं।

मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया फर्जी, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए की गई है।
कुल मिलाकर, यूपी SIR के आंकड़े आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।
केजीएमयू प्रकरण में नया मोड़, धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े तार, फरार डॉक्टर के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच तेज
लखनऊ। केजीएमयू की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस प्रकरण में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक के परिवार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क की ओर बढ़ती दिख रही है।

आरोपी डॉक्टर के माता-पिता को हिरासत में

सोमवार को चौक पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के माता-पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें कई अहम जानकारियां सामने आईं। पूछताछ में बताया गया कि रमीज, बलरामपुर निवासी छांगुर नामक व्यक्ति के संपर्क में था, जिसे पुलिस धर्मांतरण गिरोह का प्रमुख मान रही है। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद से ही रमीज तनाव में था और लगातार सतर्क रहने लगा था।

सूत्रों के अनुसार, रमीज की मुलाकात छांगुर से एक मौलवी के जरिए कराई गई थी। यही मौलवी कथित तौर पर पीड़िता पर धर्म बदलने का दबाव भी बना रहा था। इस एंगल को गंभीरता से लेते हुए चौक पुलिस ने खुफिया एजेंसियों को भी पूरे मामले की जानकारी साझा की है।

रमीज की गतिविधियों की परत-दर-परत पड़ताल कर रही

जांच एजेंसियां बीते एक वर्ष में रमीज की गतिविधियों की परत-दर-परत पड़ताल कर रही हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण में सामने आया है कि आरोपी न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशों में भी कई संदिग्ध संपर्कों में था। पुलिस को आशंका है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद रमीज देश छोड़कर फरार हो गया है। हालांकि, उसकी अंतिम लोकेशन लखनऊ की ही मिली थी, जिसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।

पहले भी एक महिला का धर्मांतरण कराया था

पुलिस को यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी ने साजिश के तहत पहले भी एक महिला का धर्मांतरण कराया था। इसी सिलसिले में रमीज के पिता सलीमुद्दीन और मां खदीजा की गिरफ्तारी की गई है। अब पुलिस की नजर पीलीभीत निवासी काजी सैय्यद जाहिद हसन पर है, जिसने कथित तौर पर निकाह और धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि काजी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क की तस्वीर और साफ होगी।इसके साथ ही पुलिस धर्मांतरण के गवाह बताए जा रहे शारिक खान की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। यह भी जांच का विषय है कि काजी ने अब तक कितनी महिलाओं का धर्मांतरण कराया और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन का क्या ढांचा था।

माता-पिता को भी धर्मांतरण के आरोप में जेल भेजा जा चुका

इस मामले में आरोपी के अब तक गिरफ्त में न आने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद रमीज को समय रहते हिरासत में नहीं लिया गया, जबकि वह उस दौरान केजीएमयू परिसर में मौजूद था। इसी चूक का फायदा उठाकर आरोपी कथित तौर पर भूमिगत हो गया। डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ शादी से पहले धर्म बदलने का दबाव बनाने का मुकदमा दर्ज है। उसकी पहली पत्नी के बयान के आधार पर माता-पिता को भी धर्मांतरण के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब केजीएमयू की एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर ने उस पर गंभीर आरोप लगाए।

अन्य धर्म की करीब 15 रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डॉक्टर अन्य धर्म की करीब 15 रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था। पुलिस को संदेह है कि इसके पीछे संगठित तरीके से धर्मांतरण कराने और उसके बदले मोटी रकम लेने की योजना थी।सूत्रों के मुताबिक, केजीएमयू में चर्चा है कि दिल्ली की एक डॉक्टर के धर्मांतरण के बदले करीब 15 लाख रुपये दिए गए थे, जबकि गैर-चिकित्सकों के लिए यह राशि करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है। कॉल डिटेल्स में यह भी सामने आया है कि आरोपी सामान्य ड्यूटी समय के बाद भी रेजिडेंट डॉक्टरों से लंबी बातचीत करता था।फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस संवेदनशील मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
शाहजहांपुर में हाईवे पर बड़ा हादसा, मौलाना तौकीर रजा के बेटे की कार रोडवेज बस से भिड़ी, ड्रग्स मिलने से मचा हड़कंप

लखनऊ/ शाहजहांपुर। लखनऊ–दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब तिलहर थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार खड़ी रोडवेज बस से जा टकराई। हादसे में कार चालक बाल-बाल बच गया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान मामला अचानक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया।

फरमान रजा अपनी कार से बरेली की ओर जा रहा था

जानकारी के अनुसार, बरेली निवासी फरमान रजा अपनी कार से बरेली की ओर जा रहा था। शाम करीब साढ़े सात बजे हरिद्वार जा रही सीतापुर डिपो की रोडवेज बस कछियानी खेड़ा स्थित हनुमान मंदिर के सामने खड़ी थी। बताया जा रहा है कि बस चालक मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गया हुआ था, तभी पीछे से आई कार अनियंत्रित होकर बस से टकरा गई।

टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई

टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और फरमान वाहन के अंदर फंस गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला। हादसे के बाद वह काफी घबराया हुआ नजर आया, हालांकि उसे गंभीर चोटें नहीं आईं। मौके पर भीड़ जुटने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।सूचना मिलने पर तिलहर पुलिस मौके पर पहुंची और फरमान को थाने ले आई।

कार में एक बैग के एक सफेद रंग का संदिध समान मिला

पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें रखे बैग से एक पुड़िया में सफेद रंग का संदिग्ध पदार्थ बरामद हुआ। इसके साथ ही ड्रग्स के इस्तेमाल में प्रयुक्त सिरिंज भी मिलने की बात सामने आई।मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे अरुण स्वयं थाने पहुंचीं और जांच की। प्रारंभिक जांच में बरामद पदार्थ को आधा ग्राम क्रिस्टल ड्रग्स बताया गया है। पूछताछ में फरमान ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने यह नशीला पदार्थ अपने निजी उपयोग के लिए दिल्ली से खरीदा था।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरमान का मेडिकल परीक्षण कराया गया है ताकि नशे के सेवन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट और मेडिकल परीक्षण के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और हादसे के साथ-साथ नशीले पदार्थ की बरामदगी के सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
बांदा में इंसानियत को झकझोर देने वाले अपराध पर अदालत का सख्त फैसला, मासूम से दरिंदगी करने वाले को फांसी
लखनऊ /बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से न्याय व्यवस्था का एक बेहद कठोर और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने छह वर्षीय बच्ची के साथ अमानवीय दुष्कर्म के मामले में दोषी 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को समाज की आत्मा पर हमला करार देते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।

दोषी को अंतिम सांस तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश

मंगलवार सुबह विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का विस्तृत निर्णय सुनाते हुए दोषी को अंतिम सांस तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश दिया। फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने कलम की निब तोड़ते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि यह अपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है।

25 जुलाई 2025 को बच्ची के साथ हुई थी बर्बरता

यह दिल दहला देने वाली घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी अमित रैकवार ने स्कूल से घर लौट रही मासूम बच्ची को गुटखा दिलाने का लालच दिया और उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं लांघ दीं।

बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए

मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए, वहीं गंभीर आंतरिक और बाहरी चोटों की पुष्टि हुई। इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देर रात मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया था। तीन दिन के भीतर उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की

मामले में कालिंजर पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय नवीन दंड संहिता की कई गंभीर धाराएं शामिल की गईं। 12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद नियमित सुनवाई शुरू हुई। करीब 56 दिनों तक चली सुनवाई में अदालत ने 10 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम, फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और बीएनएसएस की धाराओं के तहत दर्ज बयान शामिल थे। इन सभी साक्ष्यों ने आरोपी की संलिप्तता को निर्विवाद रूप से साबित कर दिया।

फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार में राहत

बचाव पक्ष ने सबूतों पर सवाल उठाने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से मासूम को शिकार बनाया और अपराध की क्रूरता इस कदर थी कि केवल मौत की सजा ही न्याय के अनुरूप है।फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार में राहत और भय दोनों के भाव दिखे। बच्ची की मां ने कहा कि असली चैन तभी मिलेगा, जब सजा पर अमल होगा। वहीं आरोपी के परिजनों की ओर से कथित धमकियों के चलते परिवार अब भी दहशत में है।यह फैसला न सिर्फ एक अपराधी को सजा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी है कि मासूमों के खिलाफ दरिंदगी करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शने वाला नहीं है।
लखनऊ को मिली नई पहचान: पर्यटन मंत्री ने लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस को दिखाई हरी झंडी

* 07 जनवरी से नियमित संचालन, यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट से होगी ऑनलाइन टिकट बुकिंग

ब्यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को 1090 चौराहे से लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बस देशी-विदेशी पर्यटकों एवं शहरवासियों को लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। बस 1090 चौराहे से चलकर विधान सभा, हजरतगंज सहित अन्य प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराते हुए ऐतिहासिक रेजीडेंसी भवन तक पहुंचेगी।

पर्यटन मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लखनऊ का गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने और विदेशी पर्यटकों को लखनऊ की गौरवगाथा से परिचित कराने के लिए लखनऊ दर्शन बस सेवा की शुरुआत की गई है। यह इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस 07 जनवरी से नियमित रूप से संचालित होगी और राजधानी को एक नई पहचान देगी।

उन्होंने कहा कि बस में प्रशिक्षित टूर गाइड यात्रियों को विभिन्न स्थलों के इतिहास, कहानियों और स्थापत्य कला की जानकारी देंगे। यात्रियों के लिए यात्रा के दौरान सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था होगी तथा तुलसी का बीज भी भेंट किया जाएगा। आने वाले समय में इस सेवा को राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक विस्तारित करने का प्रयास किया जाएगा। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में बसों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।

उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा प्रतिदिन दो पालियों—सुबह और शाम—में संचालित होगी। वयस्कों (12 वर्ष से अधिक) के लिए किराया 500 रुपये तथा बच्चों (5 से 12 वर्ष) के लिए 400 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से 31 जनवरी तक टिकट बुकिंग पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। टिकट की ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट www.upstdc.co.in के माध्यम से की जा सकेगी, जबकि पर्यटक यात्रा स्थल से ऑफलाइन टिकट भी ले सकेंगे।

इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ने महानिदेशक पर्यटन राजेश कुमार द्वितीय, यूपीएसटीडीसी के एमडी आशीष कुमार तथा पर्यटन विभाग के अधिकारियों की सराहना की और इस पहल को सफल बनाने में सहयोग देने वाले मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
यूपी में SIR-2026 की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी, 2.89 करोड़ नाम कटे, दावा–आपत्ति की अवधि शुरू


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ मतदाता पुनरीक्षण–2026 (SIR-2026) के तहत सभी जिलों की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा द्वारा मीडिया के समक्ष जारी की गई। इस प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 1 करोड़ 4 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इस तरह कुल आंकड़ा 3 करोड़ 93 लाख तक पहुंच गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार 04 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश के 12.55 करोड़ मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त किए गए। पुनरीक्षण के दौरान 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ स्थानांतरित अथवा अनुपस्थित मतदाता तथा 25.47 लाख से अधिक दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता चिन्हित किए गए।

निर्वाचन आयोग ने 06 जनवरी 2026 को आलेख्य मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। इसके साथ ही दावा एवं आपत्ति की अवधि 06 जनवरी से 06 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान पात्र नागरिक फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं, जबकि एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को नियमानुसार केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा।

सीईओ कार्यालय ने बताया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण का उद्देश्य सभी पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और अपात्र मतदाताओं को हटाना है। इस अभियान में राज्य के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, 2042 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा 1,62,486 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा 5,76,611 बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने भी सक्रिय सहयोग दिया।

पुनरीक्षण के दौरान व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए गए और राजनीतिक दलों के साथ 1,546 बैठकें आयोजित की गईं। बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए, जबकि बीएलए को अधिकतम 50 प्रपत्र जमा करने की अनुमति दी गई। हाशिए पर स्थित वर्गों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष शिविर भी लगाए गए।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि 01 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 15,78,483 फॉर्म-6 प्राप्त हो चुके हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की सूचियां बीएलओ द्वारा बीएलए के साथ साझा की गई हैं।

मतदाता अपने नाम की जांच बीएलओ, ECINet मोबाइल ऐप, ceouttarpradesh.nic.in अथवा voters.eci.gov.in के माध्यम से कर सकते हैं। नाम न होने की स्थिति में नए मतदाता के लिए फॉर्म-6, विदेश में रहने वाले नागरिकों के लिए फॉर्म-6क, नाम हटाने या आपत्ति के लिए फॉर्म-7 और सुधार के लिए फॉर्म-8 भरे जा सकते हैं।

दावा–आपत्तियों का निस्तारण 06 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक किया जाएगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 06 मार्च 2026 को प्रकाशित होगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं तथा कोई भी अपात्र मतदाता सूची में न रहे।