शाहजहांपुर में हाईवे पर बड़ा हादसा, मौलाना तौकीर रजा के बेटे की कार रोडवेज बस से भिड़ी, ड्रग्स मिलने से मचा हड़कंप

लखनऊ/ शाहजहांपुर। लखनऊ–दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब तिलहर थाना क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार खड़ी रोडवेज बस से जा टकराई। हादसे में कार चालक बाल-बाल बच गया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान मामला अचानक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया।

फरमान रजा अपनी कार से बरेली की ओर जा रहा था

जानकारी के अनुसार, बरेली निवासी फरमान रजा अपनी कार से बरेली की ओर जा रहा था। शाम करीब साढ़े सात बजे हरिद्वार जा रही सीतापुर डिपो की रोडवेज बस कछियानी खेड़ा स्थित हनुमान मंदिर के सामने खड़ी थी। बताया जा रहा है कि बस चालक मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गया हुआ था, तभी पीछे से आई कार अनियंत्रित होकर बस से टकरा गई।

टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई

टक्कर इतनी तेज थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और फरमान वाहन के अंदर फंस गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला। हादसे के बाद वह काफी घबराया हुआ नजर आया, हालांकि उसे गंभीर चोटें नहीं आईं। मौके पर भीड़ जुटने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।सूचना मिलने पर तिलहर पुलिस मौके पर पहुंची और फरमान को थाने ले आई।

कार में एक बैग के एक सफेद रंग का संदिध समान मिला

पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें रखे बैग से एक पुड़िया में सफेद रंग का संदिग्ध पदार्थ बरामद हुआ। इसके साथ ही ड्रग्स के इस्तेमाल में प्रयुक्त सिरिंज भी मिलने की बात सामने आई।मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे अरुण स्वयं थाने पहुंचीं और जांच की। प्रारंभिक जांच में बरामद पदार्थ को आधा ग्राम क्रिस्टल ड्रग्स बताया गया है। पूछताछ में फरमान ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने यह नशीला पदार्थ अपने निजी उपयोग के लिए दिल्ली से खरीदा था।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरमान का मेडिकल परीक्षण कराया गया है ताकि नशे के सेवन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट और मेडिकल परीक्षण के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और हादसे के साथ-साथ नशीले पदार्थ की बरामदगी के सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
बांदा में इंसानियत को झकझोर देने वाले अपराध पर अदालत का सख्त फैसला, मासूम से दरिंदगी करने वाले को फांसी
लखनऊ /बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से न्याय व्यवस्था का एक बेहद कठोर और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने छह वर्षीय बच्ची के साथ अमानवीय दुष्कर्म के मामले में दोषी 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को समाज की आत्मा पर हमला करार देते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।

दोषी को अंतिम सांस तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश

मंगलवार सुबह विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का विस्तृत निर्णय सुनाते हुए दोषी को अंतिम सांस तक फांसी के फंदे पर लटकाए रखने का आदेश दिया। फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने कलम की निब तोड़ते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि यह अपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है।

25 जुलाई 2025 को बच्ची के साथ हुई थी बर्बरता

यह दिल दहला देने वाली घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी अमित रैकवार ने स्कूल से घर लौट रही मासूम बच्ची को गुटखा दिलाने का लालच दिया और उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं लांघ दीं।

बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए

मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए, वहीं गंभीर आंतरिक और बाहरी चोटों की पुष्टि हुई। इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देर रात मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया था। तीन दिन के भीतर उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की

मामले में कालिंजर पुलिस ने 7 अक्टूबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय नवीन दंड संहिता की कई गंभीर धाराएं शामिल की गईं। 12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद नियमित सुनवाई शुरू हुई। करीब 56 दिनों तक चली सुनवाई में अदालत ने 10 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम, फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और बीएनएसएस की धाराओं के तहत दर्ज बयान शामिल थे। इन सभी साक्ष्यों ने आरोपी की संलिप्तता को निर्विवाद रूप से साबित कर दिया।

फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार में राहत

बचाव पक्ष ने सबूतों पर सवाल उठाने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से मासूम को शिकार बनाया और अपराध की क्रूरता इस कदर थी कि केवल मौत की सजा ही न्याय के अनुरूप है।फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार में राहत और भय दोनों के भाव दिखे। बच्ची की मां ने कहा कि असली चैन तभी मिलेगा, जब सजा पर अमल होगा। वहीं आरोपी के परिजनों की ओर से कथित धमकियों के चलते परिवार अब भी दहशत में है।यह फैसला न सिर्फ एक अपराधी को सजा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी है कि मासूमों के खिलाफ दरिंदगी करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शने वाला नहीं है।
लखनऊ को मिली नई पहचान: पर्यटन मंत्री ने लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस को दिखाई हरी झंडी

* 07 जनवरी से नियमित संचालन, यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट से होगी ऑनलाइन टिकट बुकिंग

ब्यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को 1090 चौराहे से लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बस देशी-विदेशी पर्यटकों एवं शहरवासियों को लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। बस 1090 चौराहे से चलकर विधान सभा, हजरतगंज सहित अन्य प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराते हुए ऐतिहासिक रेजीडेंसी भवन तक पहुंचेगी।

पर्यटन मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लखनऊ का गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने और विदेशी पर्यटकों को लखनऊ की गौरवगाथा से परिचित कराने के लिए लखनऊ दर्शन बस सेवा की शुरुआत की गई है। यह इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस 07 जनवरी से नियमित रूप से संचालित होगी और राजधानी को एक नई पहचान देगी।

उन्होंने कहा कि बस में प्रशिक्षित टूर गाइड यात्रियों को विभिन्न स्थलों के इतिहास, कहानियों और स्थापत्य कला की जानकारी देंगे। यात्रियों के लिए यात्रा के दौरान सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था होगी तथा तुलसी का बीज भी भेंट किया जाएगा। आने वाले समय में इस सेवा को राष्ट्र प्रेरणा स्थल तक विस्तारित करने का प्रयास किया जाएगा। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में बसों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।

उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि लखनऊ दर्शन इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा प्रतिदिन दो पालियों—सुबह और शाम—में संचालित होगी। वयस्कों (12 वर्ष से अधिक) के लिए किराया 500 रुपये तथा बच्चों (5 से 12 वर्ष) के लिए 400 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से 31 जनवरी तक टिकट बुकिंग पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। टिकट की ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट www.upstdc.co.in के माध्यम से की जा सकेगी, जबकि पर्यटक यात्रा स्थल से ऑफलाइन टिकट भी ले सकेंगे।

इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ने महानिदेशक पर्यटन राजेश कुमार द्वितीय, यूपीएसटीडीसी के एमडी आशीष कुमार तथा पर्यटन विभाग के अधिकारियों की सराहना की और इस पहल को सफल बनाने में सहयोग देने वाले मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
यूपी में SIR-2026 की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी, 2.89 करोड़ नाम कटे, दावा–आपत्ति की अवधि शुरू


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ मतदाता पुनरीक्षण–2026 (SIR-2026) के तहत सभी जिलों की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा द्वारा मीडिया के समक्ष जारी की गई। इस प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 1 करोड़ 4 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इस तरह कुल आंकड़ा 3 करोड़ 93 लाख तक पहुंच गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार 04 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश के 12.55 करोड़ मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त किए गए। पुनरीक्षण के दौरान 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ स्थानांतरित अथवा अनुपस्थित मतदाता तथा 25.47 लाख से अधिक दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता चिन्हित किए गए।

निर्वाचन आयोग ने 06 जनवरी 2026 को आलेख्य मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। इसके साथ ही दावा एवं आपत्ति की अवधि 06 जनवरी से 06 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान पात्र नागरिक फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं, जबकि एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को नियमानुसार केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा।

सीईओ कार्यालय ने बताया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण का उद्देश्य सभी पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और अपात्र मतदाताओं को हटाना है। इस अभियान में राज्य के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, 2042 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा 1,62,486 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा 5,76,611 बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने भी सक्रिय सहयोग दिया।

पुनरीक्षण के दौरान व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए गए और राजनीतिक दलों के साथ 1,546 बैठकें आयोजित की गईं। बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए, जबकि बीएलए को अधिकतम 50 प्रपत्र जमा करने की अनुमति दी गई। हाशिए पर स्थित वर्गों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष शिविर भी लगाए गए।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि 01 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 15,78,483 फॉर्म-6 प्राप्त हो चुके हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की सूचियां बीएलओ द्वारा बीएलए के साथ साझा की गई हैं।

मतदाता अपने नाम की जांच बीएलओ, ECINet मोबाइल ऐप, ceouttarpradesh.nic.in अथवा voters.eci.gov.in के माध्यम से कर सकते हैं। नाम न होने की स्थिति में नए मतदाता के लिए फॉर्म-6, विदेश में रहने वाले नागरिकों के लिए फॉर्म-6क, नाम हटाने या आपत्ति के लिए फॉर्म-7 और सुधार के लिए फॉर्म-8 भरे जा सकते हैं।

दावा–आपत्तियों का निस्तारण 06 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक किया जाएगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 06 मार्च 2026 को प्रकाशित होगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं तथा कोई भी अपात्र मतदाता सूची में न रहे।
पारिवारिक विवाद निवारण क्लिनिक महिलाओं और परिवार की गरिमा की रक्षा की दिशा में प्रभावी पहल: बबिता सिंह


लखनऊ। राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष श्रीमती बबिता सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित पारिवारिक विवाद निवारण क्लिनिक (फैमिली डिस्प्यूट रेजोल्यूशन क्लिनिक–FDRC) को महिलाओं, बच्चों एवं परिवार की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय, जन-केंद्रित और दूरदर्शी पहल बताया है।

उन्होंने कहा कि FDRC का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक कलह, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न एवं वैवाहिक विवादों का समाधान दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संवेदनशील परामर्श, मध्यस्थता और आपसी संवाद के माध्यम से करना है। इससे पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया, सामाजिक कलंक और मानसिक उत्पीड़न से बचाया जा सकता है। यह पहल कानून और करुणा के बीच संतुलन स्थापित करते हुए न्याय को अधिक मानवीय बनाती है।

श्रीमती चौहान ने बताया कि वर्ष 2019 में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और शारदा विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू से प्रारंभ हुई यह प्रयोगात्मक पहल आज एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है। 10 जुलाई 2020 को औपचारिक रूप से उद्घाटित इस क्लिनिक ने पारिवारिक विवादों के समाधान का एक वैकल्पिक मार्ग प्रस्तुत किया है, जिससे न्यायालयों और पुलिस तंत्र पर बढ़ते बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित परिवार परामर्श केंद्रों एवं FDRC इकाइयों के माध्यम से सैकड़ों मामलों में सुलह, पुनर्मिलन और शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया गया है।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इन क्लिनिकों में पुलिस अधिकारियों, प्रशिक्षित काउंसलरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आवश्यकता अनुसार विधिक विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम कार्य करती है। इससे मामलों का निष्पक्ष, गोपनीय और दबाव-मुक्त समाधान संभव हो पाता है। विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति से महिलाओं को अपनी बात निर्भीकता से रखने का सुरक्षित वातावरण मिलता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां परामर्श और मध्यस्थता से समाधान संभव नहीं होता अथवा गंभीर अपराध के तथ्य सामने आते हैं, वहां कानून के अनुसार कठोर और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। महिला आयोग इस बात के प्रति पूरी तरह सजग है कि किसी भी स्थिति में महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के अधिकारों से समझौता न हो।

अध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि प्रशिक्षित काउंसलरों की कमी, सामाजिक दबाव और जागरूकता के अभाव जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इनसे निपटने के लिए उन्होंने पुलिस, महिला आयोग, गैर-सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय, निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम, व्यापक जन-जागरूकता अभियान तथा मनोवैज्ञानिक एवं कानूनी सहायता के विस्तार पर बल दिया।
पारिवारिक विवाद निवारण क्लिनिक महिलाओं और परिवार की गरिमा की रक्षा की दिशा में प्रभावी पहल: बबिता सिंह


लखनऊ। राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष श्रीमती बबिता सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित पारिवारिक विवाद निवारण क्लिनिक (फैमिली डिस्प्यूट रेजोल्यूशन क्लिनिक–FDRC) को महिलाओं, बच्चों एवं परिवार की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय, जन-केंद्रित और दूरदर्शी पहल बताया है।

उन्होंने कहा कि FDRC का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक कलह, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न एवं वैवाहिक विवादों का समाधान दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संवेदनशील परामर्श, मध्यस्थता और आपसी संवाद के माध्यम से करना है। इससे पीड़ितों को लंबी कानूनी प्रक्रिया, सामाजिक कलंक और मानसिक उत्पीड़न से बचाया जा सकता है। यह पहल कानून और करुणा के बीच संतुलन स्थापित करते हुए न्याय को अधिक मानवीय बनाती है।

श्रीमती चौहान ने बताया कि वर्ष 2019 में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और शारदा विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू से प्रारंभ हुई यह प्रयोगात्मक पहल आज एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है। 10 जुलाई 2020 को औपचारिक रूप से उद्घाटित इस क्लिनिक ने पारिवारिक विवादों के समाधान का एक वैकल्पिक मार्ग प्रस्तुत किया है, जिससे न्यायालयों और पुलिस तंत्र पर बढ़ते बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित परिवार परामर्श केंद्रों एवं FDRC इकाइयों के माध्यम से सैकड़ों मामलों में सुलह, पुनर्मिलन और शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया गया है।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इन क्लिनिकों में पुलिस अधिकारियों, प्रशिक्षित काउंसलरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आवश्यकता अनुसार विधिक विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम कार्य करती है। इससे मामलों का निष्पक्ष, गोपनीय और दबाव-मुक्त समाधान संभव हो पाता है। विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति से महिलाओं को अपनी बात निर्भीकता से रखने का सुरक्षित वातावरण मिलता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां परामर्श और मध्यस्थता से समाधान संभव नहीं होता अथवा गंभीर अपराध के तथ्य सामने आते हैं, वहां कानून के अनुसार कठोर और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। महिला आयोग इस बात के प्रति पूरी तरह सजग है कि किसी भी स्थिति में महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के अधिकारों से समझौता न हो।

अध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि प्रशिक्षित काउंसलरों की कमी, सामाजिक दबाव और जागरूकता के अभाव जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इनसे निपटने के लिए उन्होंने पुलिस, महिला आयोग, गैर-सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय, निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम, व्यापक जन-जागरूकता अभियान तथा मनोवैज्ञानिक एवं कानूनी सहायता के विस्तार पर बल दिया।
पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के फैसले से यूपी में बिजली निजीकरण पर दबाव, संघर्ष समिति ने वापसी की मांग तेज की

लखनऊ । पुडुचेरी में बिजली निजीकरण का टेंडर निरस्त होने और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा बिजली का निजीकरण न करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश में भी बिजली के निजीकरण को लेकर विरोध तेज हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने सरकार से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

सरकार को भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि जब केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में निजीकरण का टेंडर रद्द किया जा सकता है और आंध्र प्रदेश सरकार खुले तौर पर निजीकरण के खिलाफ खड़ी हो सकती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार को भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।समिति ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली निजीकरण की घोषणा के बाद करीब साढ़े तीन वर्ष पहले पुडुचेरी बिजली विभाग के निजीकरण के लिए टेंडर नोटिस जारी किया गया था। निजीकरण की घोषणा के साथ ही वहां के बिजली कर्मियों ने लगातार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे।

राज्य में किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जाएगा

इस बीच अगस्त 2025 में अदानी पावर कंपनी द्वारा पुडुचेरी अदानी पावर कंपनी लिमिटेड का पंजीकरण किए जाने के बाद निजीकरण की प्रक्रिया को एक बार फिर तेज किया गया। 05 जनवरी 2026 को नई बिडिंग की अंतिम तिथि निर्धारित थी और 06 जनवरी 2026 को टेंडर खोले जाने थे। लेकिन 05 जनवरी की शाम को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पुडुचेरी बिजली विभाग का निजीकरण टेंडर निरस्त कर दिया गया।संघर्ष समिति के संयोजक और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 05 जनवरी 2026 को विजयवाड़ा में आयोजित आंध्र प्रदेश के बिजली इंजीनियरों की महासभा में राज्य के ऊर्जा मंत्री रवि कुमार ने स्पष्ट घोषणा की कि आंध्र प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण के खिलाफ है और राज्य में किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में निजीकरण को आगे बढ़ाना तर्कसंगत नहीं

संघर्ष समिति ने कहा कि पुडुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है और वहां टेंडर निरस्त करने का निर्णय केंद्र सरकार की अनुमति से लिया गया है। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हैं, जिनकी पार्टी केंद्र सरकार की एक प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में निजीकरण को आगे बढ़ाना तर्कसंगत नहीं है।समिति ने कहा कि इन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश सरकार को भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को वापस लेने की पहल करनी चाहिए।संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन आज 405वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर प्रदेश भर के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
मुख्यमंत्री योगी ने विकसित भारत जी राम जी अधिनियम का किया स्वागत

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कहा कि केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में स्थायी रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस अधिनियम का पारित हाेना ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम है। विकसित भारत जी राम जी अधिनियम का हम स्वागत करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त करते हैं। मुख्यमंत्री योगी ने इस दौरान विपक्ष पर हमला भी बोला।

उत्तर प्रदेश की एनडीए सरकार की लोकभवन में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जी राम जी योजना के माध्यम से अब 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार अनिवार्य किया गया है। सप्ताह में भुगतान होगा। भुगतान में देरी पर व्याज के साथ भुगतान करना होगा।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश को गरीबी का दंश झेलने के लिए छोड़ दिया था, वे लोग ऐसे कदम का समर्थन करेंगे तो उनकी पोल न खुल जाए। जनता भी उनसे पूछेगी कि आपने क्या किया ? देश के हित में, गांव, गरीब के हित में उठाये गए कदम का समर्थन करने के बजाए, विरोध कर रहे हैं। विकसित भारत की आधारशिला ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ होने से ही रखी जा सकती। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मैं इसका स्वागत करता हूँ और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त करता हूँ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा जी राम जी के माध्यम से रोजगार की गारंटी है। अब हाजिरी भरने की ऑनलाइल व्यवस्था की गई है। डीबीटी के माध्यम से पैसा भेजेंगे। फर्जी नामों पर भुगतान का खेल अब हमेशा के लिए बंद हो गया है। सपा के शासन को याद कीजिये सोनभद्र में मनरेगा में घोटाला हुआ था। जी राम जी योजना अधिनियम पारित करने के लिए हम प्रधानमंत्री मोदी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कैबिनेट के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इसका स्वागत करती है और समर्थन करती है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, मंत्री संजय निषाद, मंत्री आशीष पटेल, मंत्री अनिल कुमार, रालोद के नेता राजपाल बालियान मौजूद रहे।
मऊ रेलवे स्टेशन पर बम की सूचना से हड़कंप-काशी एक्सप्रेस की हर बाेगी की जांच कर खाली कराया गया स्टेशन परिसर

लखनऊ /मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ रेलवे स्टेशन पर आज सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सुबह 9:00 से 9:30 बजे के बीच एक अज्ञात नंबर से कॉल कर गोरखपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली काशी एक्सप्रेस (15018) में बम हाेने की सूचना दी गई। ये ट्रेन गोरखपुर से चलकर मुंबई लोकमान्य तिलक तक जाती है। आज मंगलवार की सुबह 5:53 बजे ट्रेन गोरखपुर से यात्रियों को लेकर रवाना हुई। बम होने की सूचना मिलते ही मऊ पुलिस की पूरी टीम, आरपीएफ, जीआरपी और मौके पर पहुंच गई और तत्काल जांच अभियान शुरू कर दिया गया।

सुरक्षा को देखते हुए स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों और आम जनता को तुरंत स्टेशन के बाहर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा ट्रेन और स्टेशन परिसर की गहन तलाशी ली गई, लेकिन जांच के दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध या विस्फोटक वस्तु बरामद नहीं हुई। वहीं बम की सूचना देने वाली अज्ञात कॉल की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कॉल इंटरनेट कॉल के माध्यम से की गई थी। पुलिस कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी हुई है।

ट्रेन अटेंडेंट लियाकत अली ने बताया कि हम लोगों को मऊ स्टेशन पर सूचना मिली कि ट्रेन को खाली करवाइए । ट्रेन में बम की सूचना है। ट्रेन गोरखपुर से लोकमान्य तिलक जा रही थी। पुलिस अधीक्षक इलामारन जी ने बताया की जीआरपी को कॉल आया था। इस कॉल पर ट्रेन को मऊ स्टेशन पर रुकवाया गया। ट्रेन की जांच में कुछ ऐसा विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला है और ट्रेन रवाना की जा रही है। कोई भी भय का माहौल नही है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे जांच में नई जानकारी सामने आएगी, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नए साल के पहले दिन पांच लाख लोगों के जाम मामले में एडीसीपी और एसपी ट्रैफिक हटाए गए
लखनऊ। नए वर्ष के पहले दिन राजधानी लखनऊ में पांच लाख से अधिक लोगों के फंसे रहने वाले जाम के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। रविवार को एडीसीपी ट्रैफिक अशोक कुमार सिंह और एसीपी ट्रैफिक सुरेंद्र कुमार शर्मा को उनके पद से हटा दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद एडीसीपी ट्रैफिक का प्रभार अब राघवेंद्र सिंह (जो पहले हाईकोर्ट सुरक्षा प्रभार संभाल रहे थे) को सौंपा गया है। वहीं, एसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी अब शशि प्रकाश मिश्र को दी गई है। एडीसीपी अशोक कुमार सिंह को अब हाईकोर्ट सुरक्षा का चार्ज मिला है।
इससे पहले शनिवार को जाम और यातायात नियंत्रण की चूक के चलते तीन चौकी प्रभारियों को लाइन हाजिर किया गया था। पुलिस आयुक्त ने एसीपी ट्रैफिक सुरेंद्र कुमार शर्मा को हटाकर उन्हें अलीगंज का चार्ज सौंपा। इसके साथ ही टीआई चौक के खिलाफ डीसीपी ट्रैफिक को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी।
जानकारी के अनुसार, नए साल के मौके पर शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी। इस वजह से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और लोगों को जाम में घंटों फंसना पड़ा। इसके अलावा रोड इंजीनियरिंग की खामियां और राजधानी में मौजूद 75 ब्लैक स्पॉट भी जाम और सड़क हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नए साल पर कहीं जाम की स्थिति उत्पन्न न हो, लेकिन इसके बावजूद शहर की सड़कों पर भारी अव्यवस्था देखने को मिली। अधिकारियों की चूक और योजना में कमी के कारण जनता को नए साल के पहले दिन ही भारी परेशानी झेलनी पड़ी।