पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के फैसले से यूपी में बिजली निजीकरण पर दबाव, संघर्ष समिति ने वापसी की मांग तेज की

लखनऊ । पुडुचेरी में बिजली निजीकरण का टेंडर निरस्त होने और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा बिजली का निजीकरण न करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश में भी बिजली के निजीकरण को लेकर विरोध तेज हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने सरकार से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

सरकार को भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि जब केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में निजीकरण का टेंडर रद्द किया जा सकता है और आंध्र प्रदेश सरकार खुले तौर पर निजीकरण के खिलाफ खड़ी हो सकती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार को भी अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।समिति ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली निजीकरण की घोषणा के बाद करीब साढ़े तीन वर्ष पहले पुडुचेरी बिजली विभाग के निजीकरण के लिए टेंडर नोटिस जारी किया गया था। निजीकरण की घोषणा के साथ ही वहां के बिजली कर्मियों ने लगातार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे।

राज्य में किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जाएगा

इस बीच अगस्त 2025 में अदानी पावर कंपनी द्वारा पुडुचेरी अदानी पावर कंपनी लिमिटेड का पंजीकरण किए जाने के बाद निजीकरण की प्रक्रिया को एक बार फिर तेज किया गया। 05 जनवरी 2026 को नई बिडिंग की अंतिम तिथि निर्धारित थी और 06 जनवरी 2026 को टेंडर खोले जाने थे। लेकिन 05 जनवरी की शाम को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पुडुचेरी बिजली विभाग का निजीकरण टेंडर निरस्त कर दिया गया।संघर्ष समिति के संयोजक और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 05 जनवरी 2026 को विजयवाड़ा में आयोजित आंध्र प्रदेश के बिजली इंजीनियरों की महासभा में राज्य के ऊर्जा मंत्री रवि कुमार ने स्पष्ट घोषणा की कि आंध्र प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण के खिलाफ है और राज्य में किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में निजीकरण को आगे बढ़ाना तर्कसंगत नहीं

संघर्ष समिति ने कहा कि पुडुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है और वहां टेंडर निरस्त करने का निर्णय केंद्र सरकार की अनुमति से लिया गया है। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हैं, जिनकी पार्टी केंद्र सरकार की एक प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में निजीकरण को आगे बढ़ाना तर्कसंगत नहीं है।समिति ने कहा कि इन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश सरकार को भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को वापस लेने की पहल करनी चाहिए।संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन आज 405वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर प्रदेश भर के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
मुख्यमंत्री योगी ने विकसित भारत जी राम जी अधिनियम का किया स्वागत

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कहा कि केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में स्थायी रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस अधिनियम का पारित हाेना ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम है। विकसित भारत जी राम जी अधिनियम का हम स्वागत करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त करते हैं। मुख्यमंत्री योगी ने इस दौरान विपक्ष पर हमला भी बोला।

उत्तर प्रदेश की एनडीए सरकार की लोकभवन में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जी राम जी योजना के माध्यम से अब 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार अनिवार्य किया गया है। सप्ताह में भुगतान होगा। भुगतान में देरी पर व्याज के साथ भुगतान करना होगा।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश को गरीबी का दंश झेलने के लिए छोड़ दिया था, वे लोग ऐसे कदम का समर्थन करेंगे तो उनकी पोल न खुल जाए। जनता भी उनसे पूछेगी कि आपने क्या किया ? देश के हित में, गांव, गरीब के हित में उठाये गए कदम का समर्थन करने के बजाए, विरोध कर रहे हैं। विकसित भारत की आधारशिला ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ होने से ही रखी जा सकती। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मैं इसका स्वागत करता हूँ और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त करता हूँ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा जी राम जी के माध्यम से रोजगार की गारंटी है। अब हाजिरी भरने की ऑनलाइल व्यवस्था की गई है। डीबीटी के माध्यम से पैसा भेजेंगे। फर्जी नामों पर भुगतान का खेल अब हमेशा के लिए बंद हो गया है। सपा के शासन को याद कीजिये सोनभद्र में मनरेगा में घोटाला हुआ था। जी राम जी योजना अधिनियम पारित करने के लिए हम प्रधानमंत्री मोदी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कैबिनेट के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इसका स्वागत करती है और समर्थन करती है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, मंत्री संजय निषाद, मंत्री आशीष पटेल, मंत्री अनिल कुमार, रालोद के नेता राजपाल बालियान मौजूद रहे।
मऊ रेलवे स्टेशन पर बम की सूचना से हड़कंप-काशी एक्सप्रेस की हर बाेगी की जांच कर खाली कराया गया स्टेशन परिसर

लखनऊ /मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ रेलवे स्टेशन पर आज सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सुबह 9:00 से 9:30 बजे के बीच एक अज्ञात नंबर से कॉल कर गोरखपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली काशी एक्सप्रेस (15018) में बम हाेने की सूचना दी गई। ये ट्रेन गोरखपुर से चलकर मुंबई लोकमान्य तिलक तक जाती है। आज मंगलवार की सुबह 5:53 बजे ट्रेन गोरखपुर से यात्रियों को लेकर रवाना हुई। बम होने की सूचना मिलते ही मऊ पुलिस की पूरी टीम, आरपीएफ, जीआरपी और मौके पर पहुंच गई और तत्काल जांच अभियान शुरू कर दिया गया।

सुरक्षा को देखते हुए स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों और आम जनता को तुरंत स्टेशन के बाहर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा ट्रेन और स्टेशन परिसर की गहन तलाशी ली गई, लेकिन जांच के दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध या विस्फोटक वस्तु बरामद नहीं हुई। वहीं बम की सूचना देने वाली अज्ञात कॉल की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कॉल इंटरनेट कॉल के माध्यम से की गई थी। पुलिस कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी हुई है।

ट्रेन अटेंडेंट लियाकत अली ने बताया कि हम लोगों को मऊ स्टेशन पर सूचना मिली कि ट्रेन को खाली करवाइए । ट्रेन में बम की सूचना है। ट्रेन गोरखपुर से लोकमान्य तिलक जा रही थी। पुलिस अधीक्षक इलामारन जी ने बताया की जीआरपी को कॉल आया था। इस कॉल पर ट्रेन को मऊ स्टेशन पर रुकवाया गया। ट्रेन की जांच में कुछ ऐसा विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला है और ट्रेन रवाना की जा रही है। कोई भी भय का माहौल नही है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे जांच में नई जानकारी सामने आएगी, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नए साल के पहले दिन पांच लाख लोगों के जाम मामले में एडीसीपी और एसपी ट्रैफिक हटाए गए
लखनऊ। नए वर्ष के पहले दिन राजधानी लखनऊ में पांच लाख से अधिक लोगों के फंसे रहने वाले जाम के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। रविवार को एडीसीपी ट्रैफिक अशोक कुमार सिंह और एसीपी ट्रैफिक सुरेंद्र कुमार शर्मा को उनके पद से हटा दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद एडीसीपी ट्रैफिक का प्रभार अब राघवेंद्र सिंह (जो पहले हाईकोर्ट सुरक्षा प्रभार संभाल रहे थे) को सौंपा गया है। वहीं, एसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी अब शशि प्रकाश मिश्र को दी गई है। एडीसीपी अशोक कुमार सिंह को अब हाईकोर्ट सुरक्षा का चार्ज मिला है।
इससे पहले शनिवार को जाम और यातायात नियंत्रण की चूक के चलते तीन चौकी प्रभारियों को लाइन हाजिर किया गया था। पुलिस आयुक्त ने एसीपी ट्रैफिक सुरेंद्र कुमार शर्मा को हटाकर उन्हें अलीगंज का चार्ज सौंपा। इसके साथ ही टीआई चौक के खिलाफ डीसीपी ट्रैफिक को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी।
जानकारी के अनुसार, नए साल के मौके पर शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी। इस वजह से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और लोगों को जाम में घंटों फंसना पड़ा। इसके अलावा रोड इंजीनियरिंग की खामियां और राजधानी में मौजूद 75 ब्लैक स्पॉट भी जाम और सड़क हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नए साल पर कहीं जाम की स्थिति उत्पन्न न हो, लेकिन इसके बावजूद शहर की सड़कों पर भारी अव्यवस्था देखने को मिली। अधिकारियों की चूक और योजना में कमी के कारण जनता को नए साल के पहले दिन ही भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
बरेली में एएनटीएफ की बड़ी सफलता: 55 लाख की अवैध अफीम के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

लखनऊ। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) बरेली यूनिट लखनऊ यूनिट की संयुक्त टीम ने रविवार को बरेली जिले के अलीगंज क्षेत्र से दो अफीम तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में अवैध अफीम बरामद की है। एएनटीएफ टीम को इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं उनकी तलाश में जुट गई है। एएनटीएफ टीम को इनके पास से 11 किलो ग्राम अवैध अफीम, एक कार, एक आधार कार्ड, दो मोबाइल फोन व 9,200 रूपए की नकदी बरामद हुई है।

एएनटीएफ यूनिट बरेली को सूचना मिली थी कि बरेली जिले के भमोरा थाना क्षेत्र के रमपुरा बुजुर्ग के पास कुछ तस्कर आने वाले हैं, जो माल लेकर बरेली के ही एक सप्लायर के हाथों सप्लाई करने जा रहे हैं।
इस सूचना पर एएनटीएफ के प्रभारी उपनिरीक्षक विकास यादव एएनटीएफ मुख्यालय लखनऊ एस आई एम सर्विलांस प्रभारी राजेश मिश्रा की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और घेरेबंदी कर दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एएनटीएफ प्रभारी विकास यादव के मुताबिक पकड़े गए दोनों तस्करों ने पूछताछ में अपना नाम कंडे मुंडा व बल्का मुंडा बताया।

उन्होंने बताया कि दोनों तस्कर झारखंड के जिला रांची के रहने वाले हैं। एएनटीएफ टीम को इनके पास से 11 किलो ग्राम अवैध अफीम, एक आधार कार्ड, दो मोबाइल फोन, एक कार व 9,200 रूपए की नकदी बरामद हुई है। बरामद अवैध अफीम की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 55 लाख रुपए बताई जा रही है। एएनटीएफ टीम ने बताया कि इनका एक संगठित गिरोह है जो यूपी के अलग-अलग जिलों में अवैध मादक पदार्थ की सप्लाई करने की बात स्वीकार किया है।
बाबूजी ने सत्ता नहीं, संकल्प चुना”: योगी आदित्यनाथ ने 94वीं जयंती पर किया कल्याण सिंह को नमन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ‘पद्म विभूषण’ कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। 2 माल एवेन्यू स्थित उनके आवास पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि बाबूजी ने हमेशा सत्ता को लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि संकल्प, सिद्धांत और समाजसेवा को सर्वोपरि रखा। यही उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान रही।
आवश्यकता पड़ने पर सत्ता त्यागने से पीछे नहीं हटे
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1991 में उत्तर प्रदेश के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने के समय प्रदेश अराजकता, अपराध और प्रशासनिक कमजोरी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था। बाबूजी ने ऐसे कठिन समय में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर सुशासन और विकास की दिशा में विश्वास जगाया। उन्होंने कहा कि बाबूजी का कार्यकाल श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के निर्णायक दौर से जुड़ा रहा। सत्ता की परवाह किए बिना उन्होंने नैतिकता, सिद्धांत और कर्तव्य के अनुरूप निर्णय लिए और आवश्यकता पड़ने पर सत्ता त्यागने से पीछे नहीं हटे।
उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की राजनीति को स्पष्ट दिशा मिली
योगी ने बाबूजी के राष्ट्रवाद और समाजसेवा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा से प्रेरणा लेकर इसे अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की राजनीति को स्पष्ट दिशा मिली और सामाजिक न्याय को व्यवहार और नीति के रूप में स्थापित किया गया।कार्यक्रम संयोजक और पूर्व सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ ने कहा कि बाबूजी एक विचार और एक युग थे। उन्होंने सिखाया कि पद बड़ा नहीं होता, प्रतिबद्धता बड़ी होती है; सत्ता अस्थायी होती है, संकल्प स्थायी होता है।
कल्याण सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी
अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बाबूजी के त्याग, साहस और आत्मबलिदान का सजीव प्रमाण है।इस अवसर पर डॉ. संजय निषाद, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह चौधरी, सांसद सतीश गौतम, मुकेश राजपूत, कई विधायकों और गणमान्य नागरिकों ने बाबूजी कल्याण सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
ग्वालियर हाईवे पर कोहरे ने मचाई तबाही, 2 की मौत, 6 घायल
लखनऊ /आगरा। ग्वालियर हाईवे पर सोमवार सुबह घने कोहरे ने सड़क पर कहर बरपा दिया। थाना इरादतनगर क्षेत्र के गांव नगला इमली के पास लगभग आधा दर्जन वाहन एक-दूसरे से टकरा गए। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई जबकि आधा दर्जन से अधिक गंभीर रूप से घायल हुए। घटना तड़के करीब छह बजे हुई स्थानीय लोगों और पुलिस के अनुसार घटना तड़के करीब छह बजे हुई। कोहरे के कारण दृश्यता लगभग शून्य थी। वाहन चालक कुछ दिखाई न देने की वजह से अनियंत्रित होकर आपस में टकरा गए। पीछे से आने वाले वाहन भी पहले वाहन से टकराने के बाद नियंत्रण खो बैठे।स्थानीय ग्रामीण सत्येंद्र सिंह चाहर ने बताया, “कोहरा इतना घना था कि सामने का वाहन दिखाई ही नहीं दे रहा था। इसी कारण एक के बाद एक कई वाहन आपस में भिड़ गए। हादसा अत्यंत दर्दनाक था।” हाईवे पर यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को फंसे वाहन से बाहर निकाला और उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा। हाईवे पर यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा, जिसे बाद में सामान्य किया गया। अधिकारियों ने वाहन चालकों को घने कोहरे में अतिरिक्त सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। ट्रेलर की टक्कर से बाइक सवार पूर्व ग्राम प्रधान समेत दो की मौत आजमगढ़ के गंभीरपुर थाना क्षेत्र के बिंद्राबाजार कस्बे में रविवार रात एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने बाइक सवार दो व्यक्तियों को कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतकों में पूर्व ग्राम प्रधान संतोष यादव (38) और संदीप यादव (32) शामिल हैं।सूत्रों के अनुसार दोनों युवक अपने घर लौट रहे थे कि ट्रेलर ने पीछे से उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। घटना के बाद ट्रेलर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने उसे और खलासी को पीछा कर हिरासत में ले लिया।
UP पुलिस भर्ती में आयु छूट पर घमासान, 32,679 पदों पर अटका लाखों युवाओं का भविष्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की बहुप्रतीक्षित भर्ती एक बार फिर विवादों में घिर गई है। 32,679 सिपाही और समकक्ष पदों पर होने वाली सीधी भर्ती में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट मिलेगी या नहीं, इसे लेकर प्रदेशभर में बेचैनी बढ़ती जा रही है। लाखों युवाओं की उम्मीदें फिलहाल सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं, लेकिन संकेत राहत के नहीं बल्कि निराशा के नजर आ रहे हैं।

सामान्य वर्ग को पहले ही तीन साल की विशेष आयु छूट दी जा चुकी

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2023 में 60,244 सिपाहियों की भर्ती में सामान्य वर्ग को पहले ही तीन साल की विशेष आयु छूट दी जा चुकी है। यही वजह है कि इस बार दोबारा छूट देने को लेकर शासन स्तर पर सहमति बनती नहीं दिख रही। अफसरों का कहना है कि बिना ठोस कारण के नियमों में ढील देना मुश्किल होगा।

अब वे सरकार से आखिरी उम्मीद लगाए बैठे

इस बार की भर्ती को लेकर नाराज़गी इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पीएसी, सशस्त्र पुलिस, घुड़सवार पुलिस, विशेष सुरक्षा बल और जेल वार्डर जैसे संवर्गों में करीब छह वर्षों से कोई भर्ती नहीं हुई। इतने लंबे इंतजार के चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उम्र की सीमा पार कर चुके हैं और अब वे सरकार से आखिरी उम्मीद लगाए बैठे हैं।

कई विधायक मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके

मामला अब सियासी रंग भी ले चुका है। कई विधायक मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं, वहीं आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर ने भी सीधे मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके बावजूद सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस ऐलान नहीं हुआ है, जिससे अभ्यर्थियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

आयु सीमा में किसी भी तरह की छूट देने का अधिकार बोर्ड के पास नहीं

सूत्र बताते हैं कि पुलिस भर्ती बोर्ड के हाथ भी बंधे हुए हैं। आयु सीमा में किसी भी तरह की छूट देने का अधिकार बोर्ड के पास नहीं है। वर्ष 2015 में लागू सेवा नियमावली के तहत भर्ती प्रक्रिया संचालित होती है और उसमें बदलाव केवल शासनादेश के जरिए ही संभव है।

क्या सरकार लाखों युवाओं की उम्मीदों को राहत देगी

वहीं दूसरी ओर, ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग को पिछले करीब 48 वर्षों से आयु सीमा में पांच साल की छूट मिलती आ रही है। इसी आधार पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी समान अवसर की मांग कर रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।अब बड़ा सवाल यही है क्या सरकार लाखों युवाओं की उम्मीदों को राहत देगी या फिर पुलिस भर्ती एक बार फिर विवाद और विरोध की भेंट चढ़ेगी?इसका जवाब आने वाले दिनों में तय होगा।
यूपी के पहले राज्य विश्वविद्यालय में ब्रेल पुस्तकालय का शुभारंभ, दृष्टि दिव्यांगों को मिला शिक्षा का नया संबल

* लुई ब्रेल जयंती पर 4000 ब्रेल पुस्तकों की सौगात, 150 पाठकों की क्षमता वाला आधुनिक वाचनालय तैयार


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समावेशी शिक्षा और दिव्यांग सशक्तिकरण की नीति को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्य विश्वविद्यालय डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में ब्रेल पुस्तकालय अनुभाग का भव्य शुभारंभ किया गया। यह उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा राज्य विश्वविद्यालय बन गया है, जहाँ ब्रेल पुस्तकों का सुव्यवस्थित एवं आधुनिक पुस्तकालय स्थापित किया गया है।

प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय के प्रथम तल पर स्थापित ब्रेल पुस्तकालय का उद्घाटन किया। इससे पूर्व उन्होंने ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कहा कि ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि दिव्यांग विद्यार्थियों को आधुनिक कंप्यूटर और डिजिटल प्रशिक्षण की सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँ, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने बताया कि विश्वविद्यालय के ब्रेल प्रेस द्वारा प्रकाशित स्नातक एवं परास्नातक स्तर के 54 पाठ्यक्रमों पर आधारित, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप 4000 शैक्षणिक ब्रेल पुस्तकें इस पुस्तकालय में उपलब्ध हैं। साथ ही, 150 से अधिक विद्यार्थियों की क्षमता वाला एक विशाल और शांत वाचनालय भी विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय केवल विश्वविद्यालय के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाहरी दृष्टि दिव्यांगजन भी विभिन्न सदस्यताओं के माध्यम से इसका लाभ उठा सकेंगे।

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता एवं पुस्तकालय प्रभारी प्रोफेसर यशवंत वीरोदय ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में ब्रेल पुस्तकों की संख्या 10 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शैक्षणिक पुस्तकों के साथ-साथ उपन्यास, नाटक, जीवनियाँ और साहित्यिक कृतियाँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी।

इस अवसर पर दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंत्री नरेंद्र कश्यप और विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रेल पुस्तकालय ने उनके जीवन में शिक्षा, सम्मान और आशा का नया द्वार खोला है।
KGMU में यौन शोषण व अवैध धर्मांतरण के आरोपों पर प्रशासन सख्त, परिसर में नोटिस जारी

लखनऊ । लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में यौन शोषण और अवैध धर्मांतरण के प्रयासों से जुड़े मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। KGMU के कुलपति (वीसी) के निर्देश पर परिसर के सभी विभागों के बाहर नोटिस चस्पा किए गए हैं।

नोटिस के माध्यम से विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों और संबंधित लोगों से अपील की गई है कि यदि किसी पर अवैध धर्मांतरण के लिए दबाव, प्रलोभन या किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि का सामना करना पड़े, तो उसकी तत्काल शिकायत करें।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिकायतें गुप्त रूप से की जा सकती हैं। इसके लिए कुलपति द्वारा गठित 7 सदस्यीय कमेटी को सूचना देने का अनुरोध किया गया है। नोटिस में यह भी भरोसा दिलाया गया है कि शिकायत करने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

KGMU प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी तरह की अवैध या अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शिकायत मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।