यूपी सरकार ने कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तैनाती-पट्टे में बड़ा फेरबदल किया
लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार ने 21 आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों और तैनाती में व्यापक बदलाव किया है। इसमें सचिव, प्रमुख सचिव और विशेष सचिव स्तर के कई अफसरों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
मुख्य फेरबदल के तहत अपर्णा यू, जो सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा थीं, उन्हें अब प्रमुख सचिव राजस्व विभाग का जिम्मा दिया गया है। वहीं एसवीएस रंगाराव को सदस्य न्यायिक राजस्व परिषद और निदेशक भूमि अध्याप्ति से प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, राष्ट्रीय एकीकरण और सामान्य प्रशासन विभाग बनाया गया है।
अखंड प्रताप सिंह को विशेष सचिव निर्वाचन से सचिव निर्वाचन का पद दिया गया है। नेहा शर्मा को प्रभारी महानिरीक्षक निबंधक से स्थायी महानिरीक्षक निबंधक बनाया गया है। मोनिका रानी को प्रभारी महानिदेशक स्कूल शिक्षा से स्थायी महानिदेशक स्कूल शिक्षा का पदभार सौंपा गया है। योगेश कुमार को प्रभारी आयुक्त एवं निबंधक सहकारी समितियां से आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता बनाया गया है।
डॉ. सारिका मोहन को सचिव वित्त से सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। नवीन कुमार जीएस को सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन, मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और परियोजना प्रशासक ग्रेटर शारदा क्षेत्र विकास प्राधिकरण से सदस्य न्यायिक राजस्व परिषद और निदेशक भूमि अध्याप्ति का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।
अन्य महत्वपूर्ण तैनाती में भवानी सिंह खंगारोत को विशेष सचिव राजस्व परिषद से सचिव वित्त बनाया गया है। अरुण प्रकाश को विशेष सचिव नगर विकास से विशेष सचिव राजस्व विभाग, रविंद्र कुमार को प्रथम विशेष सचिव कृषि विभाग से सचिव नगर विकास और राज्य मिशन निदेशक अमृत एवं प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) का जिम्मा मिला है।
इसके अलावा, दिव्य प्रकाश गिरी को विशेष सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति से सचिव लोक निर्माण विभाग, कृष्ण कुमार को विशेष सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग से सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन बनाया गया है। सुधा वर्मा को विशेष सचिव महिला कल्याण एवं सचिव राज्य महिला आयोग से सचिव राजस्व विभाग, रेनू तिवारी को सचिव अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग से विशेष सचिव महिला कल्याण एवं सचिव राज्य महिला आयोग बनाया गया है।
राजेंद्र सिंह द्वितीय विशेष सचिव समाज कल्याण को वर्तमान पद के साथ सचिव अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग का अतिरिक्त प्रभार मिला है। संजीव सिंह को विशेष सचिव वित्त से निदेशक समाज कल्याण एवं प्रबंध निदेशक यूपी सिडको बनाया गया। डॉ. वंदना वर्मा को निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं प्रबंध निदेशक पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम से निदेशक महिला कल्याण एवं प्रबंध निदेशक महिला कल्याण निगम बनाया गया है।
उमेश प्रताप सिंह विशेष सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण को वर्तमान पद के साथ निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण और प्रबंध निदेशक पिछड़ा वर्ग वित्त विकास निगम का अतिरिक्त दायित्व मिला है। कुमार प्रशांत को निदेशक समाज कल्याण एवं प्रबंध निदेशक यूपी सिडको से सचिव गृह विभाग और संदीप कौर को निदेशक महिला कल्याण एवं प्रबंध निदेशक महिला कल्याण निगम से सचिव वित्त विभाग का पदभार सौंपा गया है।
इस ताजा फेरबदल से विभागों में प्रशासनिक दक्षता और जिम्मेदारियों का पुनर्संतुलन करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए साल पर धूप ने दी ठंड से राहत, कोहरे का असर धीरे-धीरे होगा कम
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने करवट ली है। प्रदेश के अधिकांश इलाकों में दिन चढ़ते ही तेज धूप निकलने से गलन और ठिठुरन से लोगों को कुछ राहत मिली। बीते कई दिनों से जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बाद धूप खिलने से कई जिलों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते आगरा और अलीगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के उत्तरी तराई और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों को छोड़कर शुक्रवार से अगले दो दिनों तक कोहरे की तीव्रता में कमी आने की संभावना है।
हालांकि राहत के बीच पूर्वी तराई क्षेत्रों में कोहरे का खतरा अभी बना हुआ है। कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और देवरिया के लिए शुक्रवार को घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के लगभग 40 जिलों में सुबह के समय कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है।
बीते 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान के मामले में बाराबंकी प्रदेश में सबसे ठंडा जिला रहा, जहां रात का तापमान 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं गोरखपुर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री और हरदोई में 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के असर से फिलहाल तापमान में गिरावट का सिलसिला थम गया है। आने वाले तीन दिनों में दिन और रात के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे ठंड से और राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने लोगों को कोहरे के दौरान सतर्क रहने, खासकर सुबह और रात के समय वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
यूपी में आज से खुलेंगे माध्यमिक विद्यालय, बदला गया स्कूलों का समय
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में शीतलहर के बीच माध्यमिक विद्यालयों के संचालन को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। प्रदेश के सभी सरकारी व सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूल 2 जनवरी (शुक्रवार) से दोबारा खुल जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 29 दिसंबर से 1 जनवरी तक अवकाश घोषित किया गया था, जो अब समाप्त हो रहा है।
सर्दी के प्रकोप को देखते हुए विद्यालयों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया है। अब माध्यमिक स्कूल सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित होंगे। पहले विद्यालयों का समय सुबह 9:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक था, जिसे एक घंटे कम कर दिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा।
वहीं, प्राथमिक विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश पहले से ही घोषित है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक कुल 15 दिनों का अवकाश रहेगा। यह अवकाश परिषद के वार्षिक अवकाश कैलेंडर में पहले से दर्ज है। निजी विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश की तिथियां अलग-अलग होती हैं, जिन्हें उनके शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार तय किया जाता है। हालांकि अत्यधिक ठंड की स्थिति में जिलाधिकारी अपने स्तर पर अवकाश घोषित कर सकते हैं, जिसका पालन निजी स्कूलों को भी करना अनिवार्य होता है।
इसी बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 के लिए विद्यालयों का अवकाश कैलेंडर भी जारी कर दिया है। विभाग के अनुसार, रविवार और ग्रीष्मकालीन अवकाश को मिलाकर कुल 112 दिन विद्यालय बंद रहेंगे। बोर्ड परीक्षाओं के लिए 15 दिन निर्धारित किए गए हैं, जबकि कुल 238 दिन विद्यालयों में पठन-पाठन एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होंगी। नए साल का पहला सार्वजनिक अवकाश 3 जनवरी को हजरत अली के जन्मदिवस के अवसर पर रहेगा।
जारी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में कुल 28 दिन सार्वजनिक अवकाश रहेंगे। गर्मी की छुट्टियां 21 मई से 30 जून तक निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में प्रधानाचार्य को अपने विवेक से तीन दिन का स्थानीय अवकाश घोषित करने का अधिकार होगा, जिसकी सूचना विद्यालय के सूचना पट्ट पर चस्पा करने के साथ-साथ जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को देना अनिवार्य होगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव द्वारा जारी निर्देशों में यह भी कहा गया है कि माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत विवाहित महिला शिक्षिकाओं को करवा चौथ के दिन अवकाश मिलेगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र विशेष में हरितालिका तीज/हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी, ललई छठ, जिउतिया व्रत और अहोई अष्टमी जैसे पर्वों पर महिला शिक्षिकाओं को उनके आवेदन पर किसी भी दो दिनों का अवकाश दिया जा सकेगा।
कैलेंडर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय पर्वों पर विद्यालयों में अनिवार्य रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शोक सभाएं केवल विद्यालय से जुड़े शिक्षक, कर्मचारी या छात्र-छात्रा के निधन की स्थिति में ही होंगी। स्थानीय अवकाश जिलाधिकारी द्वारा जारी अवकाश तालिका के अनुसार मान्य होंगे। इसके अलावा महापुरुषों, स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों की जयंती पर विद्यालयों में कम से कम एक घंटे की गोष्ठी या सेमिनार आयोजित किया जाएगा। यदि संबंधित दिवस पर अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस पर कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य होगा।
निजीकरण के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल, यूपी के एक लाख से अधिक बिजली कर्मी होंगे शामिल
लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में आगामी 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में उत्तर प्रदेश के एक लाख से अधिक बिजली कर्मियों के शामिल होने का ऐलान किया है। नए साल के पहले दिन, निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर प्रदेशभर में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर “विरोध दिवस” मनाया।
संघर्ष समिति ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मी 12 फरवरी को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कराने और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को वापस लेने की मांग को लेकर की जा रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज हुई कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि निजीकरण और बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
हड़ताल की तैयारी को मजबूत करने के लिए संघर्ष समिति ने जनवरी माह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छह बड़ी बिजली महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है। ये महापंचायतें वाराणसी, ओबरा/अनपरा, आगरा, केस्को, मेरठ और लखनऊ में आयोजित होंगी। इन महापंचायतों में बिजली कर्मियों के साथ-साथ किसान, आम उपभोक्ता और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जनवरी माह में निजीकरण के विरोध में प्रदेशव्यापी सघन दौरा भी करेंगे और बिजली कर्मियों व आम जनता को निजीकरण से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करेंगे।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय घोषित कर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने ऊर्जा निगमों का कार्य वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया है। समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान भी बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सेवाएं बनाए हुए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि अब समय आ गया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन निजीकरण का फैसला तत्काल निरस्त करे और आंदोलन के दौरान की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस ले। इसी मांग को लेकर आज प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
नए साल पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा

* अब घर-दुकान का नक्शा होगा मिनटों में पास, दफ्तरों के चक्कर खत्म


लखनऊ। नए साल की शुरुआत के साथ योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत दी है। अब मकान या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए लोगों को विकास प्राधिकरण और सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने नए सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और सरल बना दिया है।

नए सिस्टम के तहत भूखण्ड स्वामी खुद अपने मकान या दुकान का नक्शा ऑनलाइन आवेदन करके स्वीकृत कर सकेंगे। आवेदन करने के कुछ ही मिनटों में नक्शा पास होने की सुविधा दी गई है। यह व्यवस्था नए बिल्डिंग बायलॉज के अंतर्गत लागू की गई है।

सरकार ने इसे फास्ट ट्रैक सिस्टम नाम देते हुए  ‘फास्टपास’  लागू किया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की बचत होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था से आम नागरिकों को राहत मिलेगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और भवन निर्माण प्रक्रिया तेज होगी।

नए सॉफ्टवेयर और नियमों के लागू होने से प्रदेश में भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और डिजिटल हो गई हैं।

साइबर ठगी के खिलाफ यूपी पुलिस की बड़ी पहल,नाना पाटेकर अभिनीत जागरूकता लघु फिल्म तैयार
लखनऊ। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और आमजन को डिजिटल ठगी से बचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक विशेष जागरूकता लघु फिल्म का निर्माण किया है। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साइबर अपराध रोकथाम संबंधी निर्देशों के क्रम में की गई है।
एक लाख लोगों को साइबर अपराध के प्रति किया जागरूक
पुलिस महानिदेशक यूपी राजीव कृष्ण ने साइबर अपराध की रोकथाम और जन-जागरूकता को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उनके मार्गदर्शन में प्रदेशभर में साइबर सुरक्षा को लेकर निरंतर अभियान चलाए जा रहे हैं। डीजीपी स्वयं 11 परिक्षेत्र स्तरीय साइबर जागरूकता कार्यशालाओं में ऑनलाइन शामिल होकर 25 से अधिक जनपदों के एक लाख से ज्यादा लोगों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दे चुके हैं।
फिल्म हाल ही में कानपुर में सामने आई एक सच्ची घटना पर आधारित
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा तैयार यह लघु फिल्म हाल ही में कानपुर में सामने आई एक सच्ची घटना पर आधारित है, जहां एक सतर्क नागरिक ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की जा रही साइबर ठगी की कोशिश को अपनी सूझबूझ से नाकाम कर दिया था।फिल्म में नाना पाटेकर ने जागरूक नागरिक की भूमिका निभाई है, जबकि उनकी पत्नी के किरदार में अभिनेत्री लीना शर्मा नजर आई हैं। साइबर ठग बने फर्जी इंस्पेक्टर की भूमिका अभिनेता किशोर सोनी ने निभाई है, वहीं असली पुलिस अधिकारी के रूप में अभिनेता आदिल ईरानी दिखाई देते हैं।
“डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं होती
इस फिल्म का निर्देशन मशहूर निर्देशक राज शांडिल्य ने किया है, जो ड्रीम गर्ल और ड्रीम गर्ल-2 जैसी सफल फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।लघु फिल्म के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं होती और किसी भी प्रकार की धमकी भरी कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन पैसों की मांग साइबर ठगी का संकेत हो सकती है।उत्तर प्रदेश पुलिस की यह पहल नागरिकों को सतर्क, जागरूक और डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। यह साइबर जागरूकता लघु फिल्म उत्तर प्रदेश पुलिस के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की जा रही है।
नए साल में यूपी प्रशासनिक महकमे में बदलाव की सुगबुगाहट तेज

*प्रमोशन के बाद IAS–IPS अधिकारियों के व्यापक तबादलों की तैयारी, प्रदर्शन के आधार पर मिलेगी नई जिम्मेदारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक महकमे में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दिसंबर माह में प्रमोशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार IAS और IPS अधिकारियों के व्यापक तबादलों की तैयारी कर रही है। प्रमोशन के बाद रैंक और स्केल में बदलाव होने से अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल होना तय माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक कई जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ-साथ रेंज और जोन स्तर पर भी जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं। पुलिस विभाग के अलावा IAS अधिकारियों के तबादलों की भी तैयारी चल रही है। प्रमोशन और वार्षिक मूल्यांकन के बाद जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और सचिव स्तर के कई अधिकारियों को नई तैनाती मिल सकती है।

बताया जा रहा है कि शासन विकास योजनाओं की प्रगति, कानून-व्यवस्था की स्थिति और आगामी प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल करेगा। इस बार तबादलों में केवल रूटीन प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी, बल्कि कार्य प्रदर्शन, क्षेत्रीय अनुभव और प्रशासनिक संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जिन अधिकारियों ने अपने वर्तमान पद पर बेहतर परिणाम दिए हैं, उन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन लेना हुआ बेहद आसान, स्मार्ट मीटर और शुल्क में बड़ी राहत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब नया बिजली कनेक्शन लेना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि पहले की तुलना में काफी सस्ता भी पड़ेगा। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने नई कॉस्ट डाटा बुक-2025 जारी कर दी है, जिसके तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमतों में भारी कटौती की गई है और कनेक्शन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।

नई व्यवस्था के तहत सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 6016 रुपये से घटाकर मात्र 2800 रुपये कर दी गई है। वहीं, थ्री फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर अब 11342 रुपये की जगह सिर्फ 4100 रुपये में उपलब्ध होगा। इसके साथ ही आयोग ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए नए बिजली कनेक्शन के लिए एस्टीमेट बनाने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।अब 300 मीटर तक की दूरी और 150 किलोवाट तक के लोड (निजी नलकूप को छोड़कर) पर फिक्स शुल्क के आधार पर कनेक्शन मिलेगा। यानी खंभा, तार और ट्रांसफार्मर के नाम पर अलग-अलग रकम वसूलने की प्रक्रिया खत्म हो गई है।

नई दरों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता 2 किलोवाट का कनेक्शन 100 मीटर दूरी तक लेता है, तो उसे 5500 रुपये एकमुश्त जमा करने होंगे। वहीं 300 मीटर दूरी के लिए यह शुल्क 7555 रुपये तय किया गया है। पहले इसी कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं से 10 से 20 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। विद्युत नियामक आयोग के सचिव सुमित अग्रवाल ने बताया कि बिजली कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि 12 जनवरी 2026 तक सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव कर नई दरों को लागू किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली न हो।

पहले से मीटर लगवा चुके उपभोक्ताओं को भी राहत

आयोग ने यह भी संकेत दिए हैं कि जिन उपभोक्ताओं ने 9 सितंबर 2025 के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए पुरानी दरों पर भुगतान किया है, उन्हें धनवापसी या समायोजन का विकल्प दिया जा सकता है।

बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए विशेष छूट

नई कॉस्ट डाटा बुक में गरीब और बीपीएल उपभोक्ताओं को खास राहत दी गई है। उनके लिए प्रोसेसिंग फीस और सुरक्षा जमा राशि पूरी तरह माफ कर दी गई है। 100 मीटर दूरी तक केवल 500 रुपये जमा कर कनेक्शन दिया जाएगा, जबकि शेष राशि 12 महीनों में 45 रुपये की मासिक किस्तों में बिजली बिल के साथ वसूली जाएगी।

बीपीएल उपभोक्ताओं को सिंगल फेज मीटर की कीमत भी किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलेगी। आवेदन के समय 1000 रुपये देने के बाद कनेक्शन जारी कर दिया जाएगा और बाकी रकम 24 मासिक किस्तों में जमा की जा सकेगी।

नई कॉलोनियों और बहुमंजिला इमारतों को भी राहत

नई व्यवस्था के तहत अविकसित और गैर-विद्युतीकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों से अब केवल मीटरिंग शुल्क लिया जाएगा। बुनियादी ढांचे के नाम पर अलग से कोई शुल्क नहीं देना होगा। बहुमंजिला भवनों में मल्टी-पॉइंट कनेक्शन के लिए भी यही नियम लागू होगा।

इसके अलावा, 11 केवी वोल्टेज पर जारी होने वाले लोड की सीमा को 3 एमवीए से बढ़ाकर 4 एमवीए कर दिया गया है। एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI) से जुड़ी लागत भी नए उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी, क्योंकि इसका खर्च आरडीएसएस योजना के तहत पहले से तय है।

दो साल तक लागू रहेगी नई कॉस्ट डाटा बुक

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी की गई कॉस्ट डाटा बुक-2025 अगले दो वर्षों तक प्रभावी रहेगी। इसमें प्रोसेसिंग शुल्क, सुरक्षा जमा, सप्लाई चार्ज, सामग्री लागत और स्मार्ट मीटर की दरें तय की गई हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में कॉस्ट डाटा बुक में संशोधन किया गया था।
रात 12 बजते ही जश्न में डूबी राजधानी, लखनऊ ने कहा 2025 को अलविदा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने नववर्ष 2026 का स्वागत पूरे जोश, उमंग और उत्साह के साथ किया। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने रात 12 बजे का संकेत दिया, शहर खुशियों से झूम उठा। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर नए साल की बधाइयां दीं और आतिशबाजी व तालियों के साथ वर्ष 2025 को विदा किया। युवाओं में नए साल को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला, जिसकी तैयारियां पहले से ही शुरू कर दी गई थीं।
शहर की गलियों से लेकर बड़े होटलों, रेस्टोरेंट्स और क्लबों तक जश्न का माहौल छाया रहा। डीजे की धुनों पर युवक-युवतियां देर रात तक थिरकते नजर आए। डांस फ्लोर पर संगीत और रोशनी के बीच नए साल का जश्न मनाया गया। वहीं कई इलाकों में युवा सड़कों पर निकल आए और अपने-अपने अंदाज में नववर्ष का स्वागत किया।
नववर्ष के मद्देनज़र प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर रखे थे। संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की विशेष निगरानी रही। देर रात तक पुलिसकर्मी सड़कों पर गश्त करते दिखाई दिए और जहां भी अव्यवस्था या अराजकता की आशंका हुई, वहां स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया गया।
नववर्ष के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने वर्ष के अंतिम दिन मंदिरों में दर्शन कर भगवान से सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। गुरुवार सुबह भी मंदिरों में लंबी कतारें देखने को मिलीं।
नए साल की शुरुआत लखनऊवासियों ने अलग-अलग तरीकों से की। मंदिरों के साथ-साथ फूलों और गुलदस्तों की दुकानों पर भी भीड़ रही। लोग एक-दूसरे को फूल भेंट कर और शुभकामनाएं देकर नववर्ष की खुशियां साझा करते नजर आए। राजधानी में जश्न का यह सिलसिला पूरे दिन जारी रहने की उम्मीद है।
स्नातक छात्रों के लिए सुनहरा मौका, 21 हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी के लिए भर्ती
लखनऊ। स्नातक की पढ़ाई कर चुके युवाओं के लिए रोजगार का बेहतरीन अवसर सामने आया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के केंद्रीय कैंपस प्लेसमेंट सेल ने बहुराष्ट्रीय कंपनी जेनपैक्ट में भर्ती के लिए विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों के छात्रों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 200 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।इस अवसर के लिए वही अभ्यर्थी पात्र होंगे, जिन्होंने स्नातक स्तर पर कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। चयनित उम्मीदवारों को प्रतिमाह 21 हजार रुपये वेतन के साथ अतिरिक्त इंसेंटिव की सुविधा भी दी जाएगी।

इन कोर्स के छात्र कर सकते हैं आवेदन

केंद्रीय प्लेसमेंट सेल के अतिरिक्त निदेशक डॉ. हिमांशु पांडेय के अनुसार, कस्टमर सर्विस (वॉइस प्रोसेस – इंग्लिश) पद के लिए बीबीए, बीसीए, बीकॉम, बीएससी और बीए पाठ्यक्रमों के छात्र आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, पोस्टग्रेजुएट और लॉ के विद्यार्थी इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।

गुरुग्राम होगा कार्यस्थल, पांच दिन का वर्किंग सिस्टम

चयनित अभ्यर्थियों की पोस्टिंग गुरुग्राम में होगी। उम्मीदवारों से उत्कृष्ट अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और रोटेशनल शिफ्ट में काम करने की तत्परता अपेक्षित है। कंपनी की कार्यप्रणाली के अनुसार सप्ताह में केवल पांच दिन कार्य करना होगा।

डेटा और एआई के क्षेत्र में अग्रणी है कंपनी

जेनपैक्ट एक वैश्विक प्रोफेशनल सर्विसेज और सॉल्यूशंस कंपनी है, जो डेटा, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान रखती है। कैंपस प्लेसमेंट सेल के निदेशक प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि चयन प्रक्रिया में पहले कम्युनिकेशन असेसमेंट टेस्ट और उसके बाद दो चरणों में इंटरव्यू लिया जाएगा।उन्होंने कहा कि एआई और टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों का भविष्य उज्ज्वल है, ऐसे में छात्रों के लिए यह एक मजबूत करियर विकल्प साबित हो सकता है।

आवेदन की अंतिम तिथि

इच्छुक अभ्यर्थी 4 जनवरी सुबह 11 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन लिंक:https://forms.gle/FpFusophCaSvufwDA