चेम्बर चुनाव 2025: सभी प्रत्याशियों की सूची हुई जारी, प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जीवत राम बजाज और सतीश कुमार थौरानी के बीच होगा सीधा मुकाबला

रायपुर- छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन पत्रों की सूक्ष्म जांच के बाद प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी गई है। इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दो प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला होगा, जबकि प्रदेश महामंत्री और प्रदेश कोषाध्यक्ष पद के लिए एक-एक प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल किया है। वहीं रायपुर जिला मंत्री पद के लिए 8 प्रत्याशी मैदान में हैं।

बता दें कि चेम्बर चुनाव 2025 में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जीवत राम बजाज और सतीश कुमार थौरानी के बीच सीधा मुकाबला होगा, जबकि प्रदेश महामंत्री पद के लिए अजय भसीन अकेले प्रत्याशी हैं। प्रदेश कोषाध्यक्ष पद पर निकेश बरड़िया चुनाव लड़ेंगे। रायपुर जिला उपाध्यक्ष पद के लिए लोकेश जैन, निलेश मुंदड़ा, दीपक विधानी, टी. श्रीनिवास रेड्डी, राकेश वाधवानी, प्रशांत गुप्ता, कांति पटेल और आकारा धावना के बीच मुकाबला होगा।

रायपुर जिला मंत्री पद के लिए 8 प्रत्याशियों के बीच होगा मुकाबला

रायपुर जिला मंत्री पद के लिए रविंद्र सिंह चावला, अमर बरलोटा, शेकर बजाज, भरत पमनानी, राज कुमार तारवानी, मनोज कुमार जैन, कन्हैयालाल गुप्ता और अशोक अग्रवाल चुनावी मैदान में हैं। इस बार चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा और व्यापारिक समुदाय की भूमिका अहम रहने वाली है।

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मुख्यमंत्री भिलाई में "बिहार-तिहार स्नेह मिलन" कार्यक्रम में हुए शामिल, सर्व समाज प्रमुखों का किया सम्मान

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि बिहार और छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपराएं, त्योहार और पारिवारिक मूल्य – सबकुछ एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। ये रिश्ता केवल भूगोल का नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कारों का है। वे आज भिलाई में "बिहार-तिहार स्नेह मिलन" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" अभियान के तहत बिहार स्थापना दिवस के अवसर पर हुआ।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बिहार और छत्तीसगढ़ के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता केवल कहावत नहीं, अब सामाजिक हकीकत बन चुकी है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी माता जी भी अविभाजित बिहार से थीं और उनका झारखंड से पुराना संबंध रहा है।

छठ पूजा पर बोलते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब छठ पर्व छत्तीसगढ़ में भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। राज्य भर के तालाबों और नदियों पर सुंदर छठ घाटों का निर्माण किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी जशपुर जिले के कुनकुरी में एक करोड़ की लागत से छठ घाट बनवाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बिहार के गौरवशाली इतिहास को नमन करते हुए कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बिहार से थे। नालंदा विश्वविद्यालय, जिसने भारत को विश्वगुरु बनाया, बिहार की देन है। आर्यभट्ट, जिन्होंने शून्य की खोज की, बिहार की महान विभूति हैं। कर्पूरी ठाकुर जैसे सामाजिक न्याय के पुरोधा यहीं की धरती से निकले।

मोदी की गारंटी: वादा नहीं, संकल्प है – मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी पर भरोसा किया और हमें सेवा का अवसर मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार ने बीते सवा साल में जनहित की कई योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 70 लाख से अधिक विवाहित माताओं-बहनों को हर महीने ₹1000 की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सम्मान में वृद्धि हुई है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 20 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कह कि तीर्थ यात्रा योजना को नए वित्तीय वर्ष से पुनः प्रारंभ किया जा रहा है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों और श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा का अवसर फिर से सुलभ हो सके।

"एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की संकल्पना को मिल रहा समर्थन

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से भाषायी, सामाजिक और सांस्कृतिक दूरियाँ कम होती हैं। आज का यह समारोह दो राज्यों के बीच भाईचारे और सांस्कृतिक समझ का सेतु बना है।

सर्व समाज प्रमुखों का सम्मान, नई पीढ़ी को प्रेरणा

मुख्यमंत्री श्री साय ने मंच से सर्व समाज प्रमुखों को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि समाजसेवियों का सम्मान हमारी परंपरा है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेती हैं।

लिट्टी-चोखा से लेकर तीजा-छठ तक – संस्कृति की साझी विरासत

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बिहार की लिट्टी-चोखा हो या छत्तीसगढ़ का चीला-फरा, तीजा हो या छठ – दोनों राज्यों की संस्कृति में गहरा साम्य है। खमरछठ और छठ पूजा, दोनों ही पर्व मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति आभार के प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी बिहारी भाइयों और बहनों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि हम सब मिलकर प्रधानमंत्री श्री मोदी के एक भारत-श्रेष्ठ भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएँ।यह आयोजन आपसी प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता की मिसाल है।

बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नबीन ने कहा कि बिहार दिवस का उद्देश्य हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के क्षेत्र में बिहार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

इस अवसर पर विधायक रिकेश सेन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे, नगर निगम दुर्ग की महापौर अल्का बाघमार एवं अन्य जनप्रतिनिधि, और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. देवेंद्र प्रधान को दी श्रद्धांजलि

रायपुर-   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के निवास पहुंचे और उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय देवेंद्र प्रधान जी के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय देवेंद्र प्रधान एक दूरदृष्टा राजनेता, कुशल संगठनकर्ता और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

सचिवों ने काम पर लौटने के अल्टीमेटम दिखाया ठेंगा, जलाई आदेश की कॉपी…

बलरामपुर- हड़ताल पर डटे पंचायत सचिवों ने पंचायत संचालनालय से जारी 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने के आदेश को ठेंगा दिखा दिया है. सचिवों ने सामूहिक रूप से आदेश की कॉपी को जलाकर अपना विरोध जताया. सचिव संघ बीते पांच दिनों से नियमितीकरण मांग को लेकर हड़ताल पर डटा हुआ है. 

सचिव संघ ब्लॉक अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने की गारंटी में सचिवों को नियमितीकरण करने का वादा किया गया था. मोदी की गारंटी में 100 दिन के भीतर ही वादे पूरे करने का वादा किया गया था, लेकिन 400 दिन बीत जाने के बाद भी हमारी मांगे पूरी नहीं की गई है. जिसे लेकर सचिव हड़ताल पर डटे हुए हैं.

अनिल गुप्ता ने बताया कि नियमितीकरण की मांग को लेकर 1 अप्रैल को विधानसभा घेराव करेंगे. इसके बावजूद भी मांग पूरी नहीं हुई तो सचिव संघ अलग रणनीति तय करेगी और उसी के मुताबिक प्रदर्शन जारी रहेगा.

विनोद कुमार शुक्ल ने जाहिर की ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिलने की खुशी, कहा- अपनी जिंदगी की एक किताब जरूर लिखनी चाहिए…

रायपुर-  साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को भारतीय साहित्य के सर्वोच्च पुरस्कार ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा. इस घोषणा के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पुरस्कार से मुझे बहुत खुशी हुई है. उन्होंने कहा कि पुरस्कार की जिम्मेदारी को मैंने महसूस किया. जितना मुझे लिखना चाहिए था, उतना मैं लिख नहीं पाया. मैं कोशिश करूंगा कि जो शेष रह गया, उसे आगे बढ़ाऊं. जो अभी मैं सोच रहा हूं, उसको लिख सकूं, ऐसा मेरे मन में आता है…

फोटो: साहित्यकार शुक्ल ने पत्रकारों से बातचीत में खुशी जाहिर की.

अपनी जिंदगी की एक किताब जरूर लिखनी चाहिए

उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा लगता है, खुश होता हूं, बड़ी उथल-पुथल है कि यह पुरस्कार कैसा लगा, बहुत बढ़िया लगा… मेरे पास शब्द नहीं है कहने के लिये… एक जिम्मेदारी सी महसूस होती है. परिवारिक कारणों और आस-पास के माहौल में भी लिखना बहुत मुश्किल है, लेकिन कोशिश करनी चाहिए. अपनी जिंदगी की एक किताब जरूर लिखनी चाहिए. ताकि आप दुनिया के बारे में क्या सोचते हैं लोग जान सके. 

बता दें, हिंदी के प्रख्यात कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा जाएगा. ज्ञानपीठ समिति ने आज नई दिल्ली में इसकी घोषणा की. यह सम्मान पाने वाले छत्तीसगढ़ के वह पहले साहित्यकार होंगे. प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें बधाई दी है. उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिये गौरव की बात है.

‘लगभग जयहिंद’ कविता से मिली पहचान

विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में हुआ था. फिलहाल वे रायपुर में ही रहते हैं. पिछले 50 सालों से वे लिख रहे हैं. उनकी पहली कविता “लगभग जयहिंद” 1971 में प्रकाशित हुई थी और तभी से उनकी लेखनी ने साहित्य जगत में अपना अलग स्थान बना लिया था.

कैसे कह दूं कि बहुत मीठा लगा : विनोद कुमार शुक्ल

पुरस्कार को लेकर उन्होंने आगे कहा कि अगर मैं कहूं कि बहुत मीठा लगा कहूंगा, तो मैं तो शुगर का मरीज हूं… तो मैं कैसे कह दूं, कि बहुत मीठा लगा… उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है.

सीएम साय ने दी शुभकामनाएं:


पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर दी शुभकामनाएं:


उनके द्वारा लिखी गई कविता :-

· ‘ लगभग जयहिंद ‘ वर्ष 1971.

· ‘ वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’ वर्ष 1981.

· ‘ सब कुछ होना बचा रहेगा ‘ वर्ष 1992.

· ‘ अतिरिक्त नहीं ‘ वर्ष 2000.

· ‘ कविता से लंबी कविता ‘ वर्ष 2001.

· ‘ आकाश धरती को खटखटाता है ‘ वर्ष 2006.

· ‘ पचास कविताएँ’ वर्ष 2011

· ‘ कभी के बाद अभी ‘ वर्ष 2012.

· ‘ कवि ने कहा ‘ -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.

· ‘ प्रतिनिधि कविताएँ ‘ वर्ष 2013.

उपन्यास-


· ‘ नौकर की कमीज़ ‘ वर्ष 1979.

· ‘ खिलेगा तो देखेंगे ‘ वर्ष 1996.

· ‘ दीवार में एक खिड़की रहती थी ‘ वर्ष 1997.

· ‘ हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ‘ वर्ष 2011.

· ‘ यासि रासा त ‘ वर्ष 2017.

· ‘ एक चुप्पी जगह’ वर्ष 2018.

अब तक मिल चुका है ये सम्मान

· ‘ गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप ‘ (म.प्र. शासन)

· ‘ रज़ा पुरस्कार ‘ (मध्यप्रदेश कला परिषद)

· ‘ शिखर सम्मान ‘ (म.प्र. शासन)

· ‘ राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान ‘ (म.प्र. शासन)

· ‘ दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान’ (मोदी फाउंडेशन)

· ‘ साहित्य अकादमी पुरस्कार’, (भारत सरकार)

· ‘ हिन्दी गौरव सम्मान’ (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उ.प्र. शासन)

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होंगे प्रसिद्ध कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल, CM साय बोले – छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित साहित्यकार, उपन्यासकार एवं कवि विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मान की घोषणा पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव का क्षण बताया और कहा कि शुक्ल जी ने छत्तीसगढ़ को भारत के साहित्यिक मानचित्र पर गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य विचारों और संवेदनाओं का अद्वितीय संगम है, जो जनमानस को छूता है। उनकी रचनाओं में गहराई, मौलिकता और मानवीय सरोकारों की झलक मिलती है। उनका रचना संसार छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को भारत के कोने-कोने में पहुँचाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ज्ञानपीठ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित होना न केवल उनके सृजन की पहचान है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक वैभव की भी मान्यता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है।

महिला खिलाडिय़ों के लिए महिला कोच की आवश्यकता नहीं, पुरुष ही हैं बेस्ट कोच – बृजभूषण शरण सिंह

रायपुर- महिला खिलाड़ियों के लिए महिला कोच की आवश्यकता को नकारते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि महिला के साथ महिला कोच होने की गारंटी आप नहीं दे सकते. सिर्फ महिला कोच का ऑप्शन नहीं है, क्योंकि बेस्ट कोच पुरुष ही हैं. 

राजधानी पहुँचे भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने चर्चा में महिला खिलाड़ियों के लिए महिला कोच की आवश्यकता के पत्रकारों के सवाल को ही गलत बताते हुए कहा कि इस बात की गारंटी नहीं दे सकते. हां, पांच में से दो कोच महिलाएं होना अनिवार्य है. हर गेम में महिला कोच भी अनिवार्य है, लेकिन आज भी बेस्ट कोच पुरुष ही है.

उन्होंने कहा कि एक तरफ बराबरी के दर्जे की बात चल रही है और दूसरी ओर इस तरह की बात हो रही है. पुरुष वर्ग को उठाकर फेंकने की आप बात कर रहे हैं. ऐसा है तो फिर घर में भी कमरा अलग कर दिया जाए. पुरुषों को अलग ही रख देना चाहिए. वहीं क्रिकेट की तरह रेसलिंग में भी महिलाओं की अलग बॉडी बनाने को लेकर कहा कि वर्ल्ड बॉडी ही ये कर सकती है. खेल इंडिपेंडेंट बॉडी है, इसकी इंटरनेशनल बॉडी जो लागू करेगी वहीं मान्य होगा.

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने वहीं छत्तीसगढ़ में रेसलिंग के खिलाड़ियों को सपोर्ट न मिलने को लेकर कहा कि आप मेडल लेकर आएंगे, तब सरकार का ध्यान जाएगा. डिस्ट्रिक्ट लेवल, नेशनल लेवल पर मेडल लाइए. किसी के घर जाकर कोई सपोर्ट नहीं करता.

भारत में स्पोर्ट्स को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार अच्छा काम कर रही है. मोदी के कार्यकाल में भारत का स्पोर्ट्स बढ़ रहा है. खेल का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा है, खेलों इंडिया कार्यक्रम से भी बढ़ा है. कुश्ती में मेडल गारंटी है, ओलंपिक मेडल आ रहे है. वहीं दौरे को लेकर कहा कि शिवरीनारायण मंदिर जाकर दर्शन करेंगे. रितेश्वर महाराज से मुलाकात करेंगे.

कांग्रेस ने की 11 जिलों में जिला अध्यक्ष की नियुक्ति, जानिए किसे मिली कहां की जिम्मेदारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है. AICC ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.

  

तस्करी की आशंका: एक महीने पहले जलाशय में मिला भालू का शव, बिना पोस्टमार्टम के दफनाया, फॉरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर को शो कॉज नोटिस जारी…

बालोद- छत्तीसगढ़ के बालोद से आज एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है. बीते महीने जिले के हर्राठेमा वन परिक्षेत्र में 24 फरवरी को तांदुला जलाशय के किनारे एक भालू का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था. इसकी जानकारी नियमानुसार DFO कार्यालय को दिया जाना था, लेकिन वनकर्मी और विभागीय अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को सूचित न करते हुए गोपनीय तरीके से मृत भालू के शव को दफना दिया. इस घटना का खुलासा होते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया. 

मामले के खुलासे के बाद DFO के निर्देशानुसार बालोद वन विभाग और वेटनारी डॉक्टर तांदुला जलाशय के किनारे घटना स्थल पहुंचे और खुदाई कर भालू के शव को बाहर निकाले. वहीं बालोद DFO ने इस मामले में तत्काल फॉरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है. साथ ही देर होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.

इस मामले के उजागर होने के बाद वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के जानवरों के अंगों की तस्करी में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि भालू के शव के पोस्टमॉर्टम और जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी.

देखें शो कॉज लेटर की कॉपी:

सतत् सीखने से ही जनप्रतिनिधियों की भूमिका होगी प्रभावी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- हम सभी के बीच मतभेद हो सकते है लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए और छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्यों में यह बात हमेशा से कायम है। छत्तीसगढ़ का विकास हमारा मूल उद्देश्य है और जनप्रतिनिधि के रूप में हमें प्रदेशवासियों के हित में सदैव समर्पित होकर काम करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्यों के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर में आज आयोजित दो दिवसीय पब्लिक लीडरशिप प्रोग्राम के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।

सीखने की कोई उम्र नहीं होती, नेतृत्व क्षमता में निरंतर निखार जरूरी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में हमेशा सीखते रहने की बात करते है और निश्चित रूप से सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। यहां कई ऐसे विधायक मौजूद है, जिनका जनप्रतिनिधि के रूप में लंबा अनुभव है, लेकिन वे भी इस कार्यक्रम को लेकर बहुत अधिक उत्साहित है। श्री साय ने कहा कि आप सभी सदस्यों की मौजूदगी यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर आप कितने चिंतित भी है और उत्साहित भी है।

श्री साय ने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में आमजनों से आपका व्यवहार सबसे बड़ी पूंजी है और यह लोगों के मन में आपके और संसदीय व्यवस्था के प्रति विश्वास को अधिक मजबूत करेगा।

नवीन समाधानों को साझा करने और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को पाने में प्रशिक्षण कार्यक्रम उपयोगी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पब्लिक लीडरशिप प्रोग्राम नवीन समाधानों को साझा करने का मजबूत मंच है और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को पाने में यह उपयोगी और सार्थक सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सुशासन की संकल्पना को स्थापित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि ई ऑफिस की व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हमें प्रदेश को आगे ले जाना है तो सभी प्रकार की चुनौतियों से निपटने के लिए समान रूप से तैयार रहना होगा। उन्होंने सार्वजनिक हित में तकनीक के सदुपयोग पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय प्रबंध संस्थान में पिछले वर्ष आयोजित चिंतन शिविर को भी अत्यधिक उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर में हमने जो कुछ सीखा था, छत्तीसगढ़ के नीति निर्माण में हमने इसका भरपूर उपयोग किया है। विजन डॉक्यूमेंट से लेकर बजट तैयार करने में भी हमें इससे बड़ी मदद मिली। मुख्यमंत्री ने विधानसभा के सभी सदस्यों से दो दिवसीय सत्र का भरपूर लाभ लेने को कहा और प्रबंध संस्थान को सफल आयोजन की शुभकामनाएं दी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लीडरशिप प्रोग्राम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सभी सदस्य लगभग 1 महीने तक सक्रियता के साथ शामिल रहे और इसके तुरंत बाद इस दो दिवसीय आयोजन में आप सभी की उपस्थिति प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा आप लोग सोच रहे होंगे कि जीतने के बाद हमारा प्रशिक्षण क्यों? जीतने के बाद हमारी जिम्मेदारी और भूमिका बढ़ जाती है, इसलिए हमें लगातार सीखते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें केवल अपने क्षेत्र के लिए नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की बेहतरी के लिए कार्य करना है।

डॉ. सिंह ने कहा कि हम अपने आसपास के परिवेश और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के प्रति कितने सजग है, जनप्रतिनिधि के रूप में आपको सफल बनाने में यह तथ्य महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि आपके पास अपने विधानसभा क्षेत्र की छोटी से छोटी जानकारी होनी चाहिए। डॉ. सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल से जुड़े कई अनुभव साझा किए और जनता से व्यवहार, जुड़ाव और उनका भरोसा जीतने को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास मंहत ने कहा विधायक बनते ही हम लीडर बन गये, ऐसा सोचना गलत धारण होगी। लीडर बनना एक प्रक्रिया है और हमें यह सीखना होगा। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों से निकलकर जशपुर का एक आदिवासी बेटा आज मुख्यमंत्री बना है, यह हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती और ताकत है। हम सभी का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की उन्नति है और इसी को लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्यगण, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम, आईआईएम रायपुर के निदेशक राम कुमार, आईआईएम के प्रोफेसर सुमीत गुप्ता, प्रोफेसर संजीव पराशर, प्रोफेसर अर्चना पराशर उपस्थित थे।