*भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता*
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खजनी गोरखपुर।।द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण का अवतार दुष्टों के विनाश और पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए हुआ। भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य श्री हरि विष्णु का सभी कलाओं से परिपूर्ण अवतार है।
उक्त विचार इलाके के भरोहियां गाँव में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन व्यास पीठ से अयोध्या से पधारे कथा व्यास आचार्य प्रमोद ने व्यक्त किए। भगवान श्रीकृष्ण जन्म की मनोहारी कथा सुन कर श्रोता भाव विभोर होकर झूमने लगे।
उन्होंने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने
द्वापर युग में अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था, भगवान श्रीकृष्ण चंद्रवंशी हैं तथा रोहिणी चंद्रमा की प्रिय पत्नी और नक्षत्र हैं। अष्टमी तिथि शक्ति की प्रतीक है, कृष्ण शक्तिसंपन्न, स्वयंभू परब्रह्म है इसीलिए वो अष्टमी तिथि को अवतरित हुए। उन्होंने कृष्ण जन्म की कथा का विस्तार सहित वर्णन किया। इस अवसर पर सुंदर झांकी सजाई गई नंदभवन में आयोजित सोहर और बधाई गीतों की धुनों पर भाव विह्वल लोग देर रात तक नाचते गाते रहे। आयोजन में मुख्य यजमान सच्चिदानंद शुक्ल,मुकेश शुक्ल, कमलेश शुक्ला, विमलेश शुक्ल, भुवनेश शुक्ल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Mar 20 2025, 16:48