मिर्ज़ापुर: नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोपी को पुलिस ने भेजा जेल

मिर्ज़ापुर। जिले की अदलहाट थाना पुलिस ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

बताते चलें कि थाना अदलहाट पर 15 मार्च 2025 को एक व्यक्ति द्वारा नामजद व्यक्ति के विरूद्ध अपनी नाबालिग चचेरी बहन के साथ यौन उत्पीड़न करने के सम्बन्ध में लिखित तहरीर दी गई थी। इस सम्बन्ध में प्राप्त तहरीर के आधार पर अदलहाट थाना पर बीएनएस व 9 एम/10 पाक्सो एक्ट पंजीकृत कर विवेचना प्रारम्भ की गई थी। उधर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने नाबालिग के साथ हुई घटना को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्राधिकारी चुनार के नेतृत्व में त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना से सम्बन्धित आरोपी पप्पू शर्मा पुत्र हनुमान शर्मा निवासी डोमरी थाना अदलहाट को गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्यवाही करते हुए जेल भेजा गया।

हत्या के प्रयास मामले में दो आरोपी गिरफ्तार

मिर्ज़ापुर। मिर्ज़ापुर की कोतवाली शहर पुलिस ने महिला पर किए गए जानलेवा हमला, हत्या के प्रयास के मामले में कार्रवाई करते हुए 02 आरोपीयों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। जानकारी के मुताबिक शहर कोतवाली क्षेत्र के परमानपुर टेढ़वा मोहल्ले में बीते माह 19 फरवरी 2025 को आरती सोनकर पुत्री अमृतलाल सोनकर ने अपनी माता सुनीता देवी को गाली देने तथा मना करने पर ईंट से प्रहार कर गंभीर रूप से घायल कर देने व जान से मारने की धमकी देने के सम्बन्ध में लिखित तहरीर दी गई थी। जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था।मामले की गंभीरता को देखते पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी।

मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा द्वारा उक्त घटना को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में अभियुक्तों की यथाशीघ्र गिरफ्तारी के लिए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली शहर को निर्देश दिए गए। एसपी के निर्देश के क्रम में अग्रिम विवेचनात्मक कार्यवाही करते हुए 16 मार्च 2025 को उप निरीक्षक संजय कुमार सिंह व फूलबदन यादव मय पुलिस टीम द्वारा संजय सोनकर व विनोद सोनकर पुत्रगण छ्न्नूलाल सोनकर निवासी परमानपुर टेढ़वा को धारा 115 (2), 352, 351(2), 125, 109 बीएनएस में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

*मिर्ज़ापुर: धड़ल्ले से हो रहा है बेशकीमती पेड़ों का कटान, कटाई के दौरान बिजली का पोल और बालक बाल-बाल बचे, ग्रामीणों में आक्रोश*


 मिर्ज़ापुर। गर्मी का मौसम प्रारंभ होते ही जिले के विभिन्न हिस्सों में बेशकीमती पेड़ों का कटान तेज कर दिया गया है। वन विभाग की मिली भगत से बन लकड़ी माफिया सक्रिय हो उठें हैं। बताया जा रहा है कि विंध्याचल थाना क्षेत्र के नकटा में अवैध सागौन के पेड़ की कटाई हो रही है जहां पेड़ कटाई के दौरान समीप में खेल रहे बच्चे बाल बाल बचे हैं। जिसे देख ग्रामीण आक्रोशित हो उठे ग्रामीणों ने अवैध ढंग से हो रहें पेड़ों के कटान का विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों के कट जाने से इस वर्ष पड़ने वाली प्रचंड गर्मी से उनके साथ जीव जंतुओं का बुराहाल होगा। छांव का ठौर न होने से 

मवेशियों का बुरा हाल हो उठेगा।

वहीं वन माफियाओं ने पेड़ उठाने विरोध करते हुए ग्रामीणों को ही आंख दिखाना शुरू किया है। 

ग्रामीणों के मुताबिक जिस स्थान से पेड़ों को काटा जा रहा है वहीं पेड़ के बगल से बिजली के पोल भी गुज़रे हैं, पेड़ों की कटाई के दौरान बिजली के तारों को तोड़ते हुए बच्चों के पास सागौन का पेड़ गिरने बच्चे बाल-बाल बचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बार-बार मना करने के बाद भी पेड़ों का काटने का काम थमा नहीं है।

ग्रामीणों के मुताबिक पेड़ कटवा रहे कल्लू का कहना था कि उनका अपना पुलिस और वन विभाग से पूरा सिस्टम है पेड़ यहां से जाने दो नहीं तो सबको फंसा दूंगा, जिस पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और वह कटे हुए पेड़ों को ले जाने का विरोध करते हुए मौके पर अधिकारियों के आने की मांग पर अड़ गए थे कि जब तक जिम्मेदार नहीं दिए आएंगे तब तक वह लकड़ी को उठने नहीं दिया। आखिरकार ग्रामीणों के तेवर को देख और मौके की नज़ाकत को भांपते हुए पेड़ों के कटान में जुटे कल्लू लोहार धीरे से भाग खड़ा हुआ है।

दिनदहाड़े हो रहा बेशकीमती पेड़ों का कटान वन विभाग को भनक तक नहीं 

ग्रामीण सवाल करते हैं कि आखिरकार यह कौन सा सिस्टम है कि क्षेत्र में पेड़ों की कटाई बंद नहीं हो पा रही है और ना ही जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों को इसकी कानों-कान तक खबर हो पा रही है। बताया जा रहा है कि अभी कुछ दिन पहले सड़क के बगल से शीशम का पेड़ कटवा दिया गया और आए दिन पेड़ कट ही रहे हैं ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार इस क्षेत्र में तैनात जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी किस प्रकार से वनों पेड़ों की रखवाली कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि वन विभाग एवं स्थानीय चौकी पुलिस द्वारा अवैध ढंग से पेड़ों की कटाई की खूली छूट दे दी गई है। सूत्र बताते हैं कि विंध्य पर्वतों से लेकर समतल स्थान तक बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिसमें वन विभाग के कर्मचारी, अधिकारी स्थानीय पुलिस की मिली भगत से कई जगहों पर पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है। विंध्य पर्वत क्षेत्र सहित विंध्याचल क्षेत्र व आसपास के इलाके में हो रहे धड़ल्ले से पेड़ों के कटान पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने वाले लोगों ने चिंता जताई है, जिनका कहना है कि, भूल गए लोग वह समय जब पैसे देने पर भी ऑक्सीजन नहीं मिलते थे? यदि हरे भरे पेड़ नहीं होंगे तो हमें ऑक्सीजन कहां से मिलेगा। जानकारों की मानें तो इसी प्रकार से बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई होती रही तो भीषण गर्मी के साथ साथ ऑक्सीजन की कमी से भी लोगों को जूझना पड़ जाएगा। आस-पास के लोगों ने जिले के आलाधिकारी सहित संबंधित विभाग से इस मामले में पूरी सक्रियता दिखाते हुए वन माफियाओं के ऊपर कड़ी कार्रवाई करते हुए पेड़ों का कटान रोकने की मांग की है, ताकि पेड़ों का संरक्षण हो सके। 

अल सुबह होती है कटे पेड़ों की ढुलाई 

सूत्र बताते हैं कि थाना विंध्याचल क्षेत्र अंतर्गत बघरा तिवारी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से अवैध ढंग से पेड़ों की कटाई की जा रही है वह भी पूरे दबंगई के साथ इससे साफ पता चलता है कि इन्हें इलाकाई पुलिस से लेकर संबंधित विभाग के लोगों का भी

खुला संरक्षण प्राप्त है। ग्रामीण बताते हैं कि हरे जामुन सहित बेशकीमती पेड़ों को शनिवार को तड़के भोर में डीसीएम ट्रक में कटे हुए पेड़ को लादकर ले जाया गया है। मजे की बात है कि स्थानीय लोगों सहित मीडिया के लोगों ने भी वन विभाग को सूचना देकर इस संदर्भ में जब जानकारी चाही है कि किसके आदेश निर्देश पर पेड़ काटे जा रहे हैं, जिसका जवाब देना तो दूर रहा है कोई इधर झांकने तक नहीं आया है। इससे साफ पता चलता है कि अवैध ढंग से पेड़ों के कटान में सभी की मौन सहमति-स्वीकृति और कंबल ओढ़ की घी पीने की दिलचस्पी भी है।

*Mirzapur: बंजारी जंगल में अज्ञात कारणों से लगी आग, वन विभाग की टीम बुझाने का कर रही प्रयास*

मिर्जापुर- ड्रमंडगंज वन रेंज के बंजारी कलां वनक्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर चार व पांच के जंगल में शुक्रवार की शाम अज्ञात कारणों से आग लग गई। ग्रामीणों ने जंगल में आग लगने की सूचना रात में ही वनविभाग को दी। दूसरे दिन शनिवार सुबह ग्यारह बजे के करीब वनदरोगा अभिषेक, वनरक्षक सर्वेश्वर पटेल वनविभाग की टीम के साथ बंजारी जंगल पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए।

आग की चपेट में आने से पूरी रात जंगल के हरे भरे पेड़ बांस,पलाश,तेंदू, सलई,अर्जुन आदि जलकर राख हो गए। तेज हवाओं के चलते पहाड़ पर लगी आग जंगल में तेजी से फैलती जा रही है आग करीब दो किलोमीटर के दायरे में जगह जगह पहाड़ के जंगलों में फैल चुकी है। बंजारी जंगल में लगी आग की लपटे रात में ग्रामीणों को दूर से ही दिखाई दे रही थी। आग से लगभग दो किलोमीटर के दायरे में जगह जगह वन क्षेत्र के पेड़ पौधे और जड़ी बूटियां जलकर राख हो चुकी है। आग की चपेट में आने से जंगल में रहने वाले जंगली जानवर मौत के मुंह में समा रहे हैं।

इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी ड्रमंडगंज विके तिवारी ने बताया कि बंजारी जंगल में लगी आग को वनविभाग की टीम के साथ बुझाया जा रहा है। तेज़ हवाओं के चलते आग को बुझाने में टीम को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टीम द्वारा जंगल में जगह-जगह फायर कट कर और पेड़ की टहनियों से आग को बुझाने का तेजी से प्रयास किया जा रहा है। जंगल में लगी आग पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा।

पर्वत त्यौहार/परंपरा: यहां रंगों से नहीं प्राकृतिक रंगों से खेली जाती है होली, जाने कैसे

संतोष देव गिरि, सोनभद्र/मिर्ज़ापुर। होली का पर्व रंगों का त्योहार कहा जाता है. इस दिन लोग एक दूसरे को रंग-बिरंगे रंगों में सरोबोर करने के साथ विविध प्रकार के अबीर-गुलाल लगाकर त्यौहार मनाते आए हैं. लेकिन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के लोग आज भी प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करते हुए होली के त्यौहार को खुशनुमा ढंग से मानते आए हैं. हालांकि बदलते कल्चर, रीति-रिवाजों के साथ यह प्रचलन भी धीरे-धीरे अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुका है, लेकिन कुछ एक इलाकों में आज भी आदिवासी समाज के लोग इस परंपरा का निर्वहन बड़े ही शिद्दत के साथ करते आए हैं.

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और मिर्जापुर जिले के कुछ इलाकों में आदिवासी समाज के लोग आज भी प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते आए हैं. जिनका प्रकृति से जुड़ाव देखते बनता है. मिर्जापुर के राजगढ़ और सोनभद्र के घोरावल, शाहगंज से लगने वाले इलाकों के आदिवासी, कोल समाज सहित अन्य लोग होली पर्व का त्यौहार अपनी पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाज के अनुसार मनाते हैं. यह केमिकल युक्त रंगों की बजाय केशु और पलाश के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हैं. आदिवासी समाज के लोग बताते हैं कि इससे शरीर पर कोई कु-प्रभाव नहीं पड़ता है,

जबकि केमिकल युक्त रंगों का कु-प्रभाव पड़ता है. प्राकृतिक रंगों के साथ-साथ कहीं-कहीं रंगों के बजाय फूलों की होली भी खेली जाती है. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कुछ हिस्सों में रहने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासी समाज के लोग आज भी प्राकृतिक रंगों और पुरातन परंपरा को लेकर अपने तीज़-त्यौहार मनाते हैं इनमें से एक होली का पर्व भी है, हालांकि इसके अलावा एक बुराई भी आदिवासी समाज के अंदर आज भी दिखाई देती है वह है नशे की प्रवृत्ति जिससे यह समाज आज भी मुक्त नहीं हो पाया है. होली जैसे रंग-बिरंगे पर्व पर यह समाज जमकर देसी दारू (शराब) का उपयोग करता है इसके लिए यह खुद ही शराब तैयार करते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार दिनेश सिंह पटेल बताते हैं कि 'वैसे अब धीरे-धीरे यह परंपरा विलुप्त भी होती जा रही है आधुनिकता की चादर ने इसे भी अपने से ढक लिया है. वह बताते हैं कि कुछ इलाकों में आदिवासी समाज के लोग कंकड़ मार होली भी खेलते हैं. एक दूसरे पर मिट्टी के कंकड़ों का प्रहार कर हंसी-ठिटौली के साथ यह अपने रीति-रिवाज के मुताबिक मिलजुल कर होली मनाते रहे हैं अब यह भी परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त हो चुकी है. गौरतलब हो कि सोनभद्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ-साथ जंगलों पहाड़ों से समृद्ध इलाका है जहां की लोक संस्कृति लोक कला देखते ही बनती है. यहां का आदिवासी लोक नृत्य विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर आज भी देखने को मिलता है. आदिवासी समाज के लोग अपनी परंपराओं की थाथी को संभाल कर चलते हैं, हालांकि आधुनिकता की दौड़ में बहुत कुछ बदलाव तेजी के साथ हुआ है फिर भी अभी भी इन इलाकों में कुछ लोक परंपराएं जीवित बची हुई है.

नाली की सफाई न होने से लोग परेशान

लालगंज(मीरजापुर):स्थानीय लालगंज बाजार में सड़क के किनारे बनी नालियां विगत दो माह से साफ सफाई न होने से पूरी तरह से जाम हो गई है। और बगल में स्थित दुकानदार नाक पर रूमाल रखकर अपने कार्य को संचालित कर रहे हैं जबकि बाजार वासियों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों के यहां शिकायत दर्ज करने के बावजूद भी नाली की सफाई नहीं हो सकी।

लालगंज बाजार में सड़क के किनारे दोनों तरफ नाली बनाई गई है जिससे बाजार वासियो के पानी का निकास इसी नाली से होकर गुजरता है। विगत दो माह से दुबार रोड से विजयपुर रोड की नाली पूरी तरह से जाम होकर अवरूद्ध हो गई है। बाजार का पानी नाली में जमा हुआ है पानी जमा होने की वजह से बदबू निकल रही है बदबू से अगल-बगल की दुकानदार एवं दूर दराज से आये ग्राहकों को गंदगी से गुजरना पड़ रहा है।दुकानदार दया यादव पान बिक्रेता ने कहा कि नाली साफ कराने के लिए विकासखंड स्तरीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद भी विकासखंड के अधिकारी ब्लॉक तक अपने को सीमित कर रखा है बाहर क्या हो रहा है अधिकारियों से मतलब नहीं है। ए डी ओ पंचायत अजय शंकर से फोन से संपर्क किया गया किंतु उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

मिर्ज़ापुर: समाज को ऊंच-नीच और भेदभाव से मुक्त करना जरूरी है : राज्यपाल

मिर्ज़ापुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि समाज को ऊंच-नीच और भेदभाव से मुक्त करना जरूरी है। प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर दिया।

राज्यपाल मिर्जापुर जिले के हलिया में पंचशील महाविद्यालय में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, प्रशस्ति पत्र और स्वच्छता प्रतिष्ठा, आवास की चाबी वितरित करने पहुंचीं थी। उन्होंने बैंक सखी योजना के तहत महिलाओं को वित्तीय प्रबंधन और बैंकिंग प्रशिक्षण का महत्व बताया। उन्होंने चेताया कि धन के मामलों में सतर्क रहें और ठगी से बचें। गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने संसाधनों के बेहतर उपयोग की बात कही। नवजात की देखभाल और टीकाकरण को लेकर लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। इस दौरान

ग्रीन आर्मी की महिलाओं की प्रशंसा करते हुए उन्होंने दहेज, नशा, बाल विवाह और घरेलू हिंसा के खिलाफ उनके प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गरीबों को अब पक्के घर मिल रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में छात्राओं की बढ़ती सफलता पर खुशी जताई और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को पुरस्कृत किया। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने पोषण मिशन, जननी सुरक्षा और इंद्रधनुष अभियान की जानकारी दी। 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए उन्होंने स्वास्थ्य और कुपोषण मुक्त समाज की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा सर्वम सेवा संस्था वाराणसी की अध्यक्ष मीनाक्षी भट्टाचार्य द्वारा हलिया एवं लालगंज क्षेत्र के 51 टीबी मरीजों को पोषण पोटली भेंट करते हुए गोद लिए गए मरीजों को अपने हाथों पोषण पोटली भेंट करते हुए संस्था के टीबी उन्मूलन क्षेत्र में किए गए पहल की सराहना करते हुए मरीजों के हित में समाज के अन्य सम्मानित जनों को भी सहभागिता निभाने हेतु आगे आने आह्वान किया। सर्वम सेवा संस्था की अध्यक्ष मीनाक्षी भट्टाचार्या द्वारा राज्यपाल से कहा गया कि भविष्य में वह उनकी उपस्थिति में जनपद के 1100 टीबी रोगियों को पुनः गोद लेने के लिए सहर्ष तैयार हैं।

कार्यक्रम के दौरान एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह, विधायक रिंकी कोल, जिला पंचायत अध्यक्ष राजू कन्नौजिया, नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी, कोऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष जगदीश सिंह पटेल, विंध्य विश्वविद्यालय की कुलपति शोभा गोड़ के साथ-साथ मंडलायुक्त, डीआईजी, डीएम, एसपी, सीडीओ, सीएमओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, प्रोबेशन अधिकारी इत्यादि मौजूद रहे हैं।

बीआरसी से हटाएं गए, लेकिन प्रभारी प्रधानाध्यापक कंम्पोजिट विद्यालय कंदवा पर रहेंगे बरकरार

मीरजापुर। पिछले एक दशक से ज्यादा समय से जिले के नारायनपुर विकास खंड क्षेत्र स्थित बीआरसी कार्यालय सहित कम्पोजिट विद्यालय कंदवा पर प्रभारी प्रधानाध्यापक पद पर कुंडली मारे बैठे धीरज कुमार सिंह के खिलाफ बढ़ती शिकायतों को देखते हुए आखिरकार ना चाहते हुए भी बीएसए ने कार्रवाई पर मोहर लगा दी है। हालांकि इस कार्रवाई को ना काफी करार दिया जा रहा है कहां जा रहा है कि इन्हें तत्काल प्रभाव से प्रभारी प्रधानाध्यापक पद से हटाते हुए बीएसए कार्यालय से अटैच कर जांच की कार्यवाही को आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि जांच को यह प्रभावित न करने पाएं। लेकिन ऐसा न कर लगता है एक सोची समझी रणनीति के तहत उन्हें सहुलियत दे दी गई है। बताते चलें कि बीआर नारायणपुर पर तैनात धीरज कुमार सिंह कंम्पोजिट वद्यालय कंदवा के प्रभारी प्रधानाध्यापक का भी पदभार संभाले हुए हैं। जिनके उपर बीआरसी नारायनपुर में महिला शिक्षिकाओं द्वारा आधार कार्ड बनाने के लिए धन उगाही सहित कई आरोप लगाते गये है। जिसे संज्ञान में लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार वर्मा ने जांच कर कार्रवाई पूर्ण होने तक धीरज कुमार सिंह को बीआरसी नारायणपुर पर उनसे आधार कार्ड बनाए जाने का कार्य न लेते हुए उन्हें तत्काल कंपोजिट विद्यालय कंदवा में शिक्षण कार्य के लिए निर्देशित किया है।

चर्चा है कि आखिरकार प्रभारी प्रधानाध्यापक कंदवा धीरज सिंह को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा बीआरसी से हटाकर उनके मूल विद्यालय में वापस भेज दिया गया, क्योंकि इनके ऊपर आधार बनाने वह टीचरों को प्रताड़ित करने का आरोप लगा था। इसके अलावा उनके कंपोजिट विद्यालय कंडवा में ₹50.000 का चेक काट कर अपने पत्नी के नाम ही निकाल लेने का भी आरोप है। इसलिए उनको विद्यालय से भी हटाकर बीएसए ऑफिस अटैच करके विभागीय कार्यवाही करके जेल भेजने का काम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए था, ताकि बेसिक शिक्षा विभाग में औरों के लिए एक संदेश हो, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा ऐसा प्रतीत होता है कि उनको बचाने का कार्य किया जा रहा है जो की अनुचित है। इसकी शिकायत बेसिक शिक्षा अधिकारी के अलावा बेसिक शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री के दरबार में भी पहुंच गई है। लोगों के मुताबिक यहां एक बहुत बड़ा घोटाला हुआ है जिसकी गहनता से जांच होगी तो मामला स्वत: ही सामने होगा।

जांच हुई तो घोटाले की मिलेगी लंबी फेहरिस्ती

इसके अलावा भी नारायणपुर ब्लॉक में कई विद्यालयों के भवनों के निर्माण व मरम्मत आदि का जो बजट जिन भी विद्यालयों में गया हो इसकी भी उच्चस्तरीय जांच कराया जाना चाहिए। इसके अलावा बीआरसी पर पैर जमाएं उन लोगों को भी वहां से तुरंत हटाकर उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजा जाना चाहिए जो ऐनकेन प्रकारेण वहां जमें हुए हैं। दूसरी ओर देखने सुनने में आया है कि एक तरफ जहां धीरज को बीआरसी से हटाए जाने को लेकर महिला अध्यापकों व कर्मचारियों में खुशी का माहौल है तो वहीं दूसरी तरफ अपने को हटाए जाने से नाराज आधार बनाने वाले शिक्षक महोदय महिला शिक्षकों से खार खाएं हुए दिखाई दे रहे हैं।

सोनभद्र: पुलिसिया दमन के बल पर सत्य व तथ्यों के बल पर आवाज उठाने पर मिल रही सजा

विकास कुमार, सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सच्चाई को उजागर करने से लेकर गरीबों, मजदूरों, शोषितों-पीड़ितों की आवाज़ उठाना, इनकी मदद के लिए बढ़ कर आगे आने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

पुलिसिया दमन के बल पर सोनभद्र के औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा ऐसे लोगों को कुचलने का कुचक्र रच उनकी जुबां बंद कराई जा रही है। पिछले दिनों शक्तिनगर थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर मिली लाश को लेकर मामले में कई दिनों तक थाने में बैठाकर पूछताछ के नाम मामला सल्टाने की कवायद में लगी पुलिस ने खोज-खबर लेने पर उल्टा पत्रकारों को ही फांस थाने में वीडियो बनाने का कहानी गढ़ दिया है। अभी यह मामला ठंडा पड़ा भी नहीं था कि रेणुकूट नगर के प्रमुख समाजसेवी विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह को एक निजी औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा संचालित अस्पताल में एक घायल को भर्ती कराने और वहां की अव्यवस्थाओं को लेकर आवाज़ उठाना उनके लिए जुर्म साबित हुआ है, जिनके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोप है कि यह सबकुछ उक्त औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा संचालित अस्पताल के जिम्मेदार मुलाजिम द्वारा कराया गया है।

ताकि कोई भी उनकी नाकामियों को दर्शाने का साहस न करने पाएं।

दरअसल, यह पूरा मामला 3 मार्च 2025 की रात्रि लगभग 1:15 का बताया जा रहा है। रेणुकूट नगर के दर्जी मार्केट के पास कूड़ा बिनकर जीवन-यापन करने वाली धरिकार बस्ती की एक महिला को बाईक सवार टक्कर मार देते हैं जिसमे उस महिला का फैक्चर हो जाता है। जिन्हें भागते समय पुलिस ने तत्परता बरतते हुए पकड़ लेती है। इधर इस दुर्घटना की जानकारी होते ही रेणुकूट नगर के समाजसेवी एवं पूर्व नपाध्यक्ष के भाई विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह अपने टोली के साथ घायल महिला का हाल जानने हिंडालको हॉस्पिटल पहुंचते हैं। जहां महिला के इलाज सहित वहां की अव्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने शिकायत करते हुए आवाज उठाई तो आनन फानन में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है।

बकौल, विजय प्रताप सिंह उस रात तकरीबन 3 बजे कुछ महिला उनके घर आईं और महिला के घायल होने की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाती हैं। जिस पर वह झटपट उनके साथ चल पड़ते हैं। विजय प्रताप सिंह के मुताबिक जब वह उक्त हॉस्पिटल में पहुंचते हैं तो वहां की अव्यवस्थाओं को देख उन्होंने मौके का वीडियो बनाकर संबंधित जिम्मेदारों से इसकी शिकायत दर्ज कराई थीं। उधर महिला की हालत बिगड़ी देख उन्होंने फौरन दिग्विजय जी के सहयोग से रात में ही एक फोन पर एम्बुलेंस की व्यवस्था कराकर घायल महिला को बैढ़न (मध्य प्रदेश) हॉस्पिटल में भिजवाया, ताकि उसे बचाया जा सके। उधर हॉस्पिटल प्रबंधन ने उनके खिलाफ स्थानीय पुलिस को उनके खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसकी जानकारी होते ही उनके पैरों तले जमीन खिसकने लगी है।

इस संबंध में रेणुकूट स्थित हिंडाल्को औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा संचालित अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी आशीष रंजन ने बताया कि नगर की एक महिला के घायल होने पर उसे अस्पताल लाया गया था, जिसका प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया गया था। इस मामले में एक व्यक्ति द्वारा अस्पताल का वीडियो बनाकर उसे सोशल साइट पर वायरल किया गया, जिससे लोक शांति भंग होने की संभावना बढ़ गई। वीडियो में गलत आरोप लगाते हुए कहा गया कि मरीज का समुचित इलाज नहीं किया गया, जबकि वास्तविकता में मरीज को सभी आवश्यक सेवाएं प्रदान की गई थीं। इसपर पलटवार करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता डब्लू सिंह तंज़ कसते हुए कहते हैं, हिंडाल्को हॉस्पिटल का ये हाल है की 2 घंटे से नॉर्मल ईलाज कर के स्टेचर पर लेटा कर रेफर कर दिए। जहां पीड़ित को एम्बुलेंस तक नहीं दी गई थी। कहने को तो यह सीएसआर के तहत सुविधा देते है, परंतु हकीकत तो कुछ और ही होती है जो वीडियो में साफतौर पर दिखाई दे जा रहा है। वह कहते हैं हिंडाल्को मैनेजमेंट की कथनी और करनी में काफी फर्क है। वह सवाल दागते हुए कहते हैं कि किडनी से ऑपरेशन कर के 200 से ज्यादा पथरी निकाल दिया जाता है, लेज़र ऑपरेशन, गले में पेट में सिक्का फंस जाता है तो वह यहां आसानी से निकाल दिया जाता है, लेकिन वहीं एक गरीब मजदूर का यहां ईलाज नहीं हो पाता है उसे रेफ़र कर दिया जाता है, आखिरकार ऐसा क्यों? अपने उपर दर्ज कराएं गए फर्जी मुकदमें के बाबत वह कहते हैं कि दरअसल, वह काफी समय से जिले के गरीबों पीड़ित, शोषित वंचित समाज के लोगों से लेकर श्रमिकों की आवाज़ उठाते हुए आ रहें हैं ऐसे में कई लोगों की आंखों में वह खटकने लगे थे। जिसमें से एक हिंडाल्को इंडस्ट्रीज भी है जिसके खिलाफ वह श्रमिकों की आवाज़ को, श्रमिकों के हितों को लेकर मुखर रहे हैं जिससे बौखलाए उक्त इकाई द्वारा उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जाता रहा है। यह मुकदमा मी उसी षड्यंत्र का हिस्सा है।

*घायलों, पीड़ितों की सेवा में रहते हैं आगे

सोनभद्र के रेणुकूट नगरवासियों के लिए डब्लू सिंह बिल्कुल जाना पहचाना नाम है। कोरोना काल से अब तक इनकी टीम द्वारा 5 हजार से ज्यादा लोगों की घटना दुर्घटना में घायल होने पर जान बचाई गई, डब्लू सिंह 61 बार रक्तदान करने के साथ 4 बार प्लेटलेट्स भी दान कर चुके हैं। अनगिनत कितने असहाय लोगों की आर्थिक मददत की। अपने ऊपर दर्ज हुए मुकदमें के बाबत वह कहते हैं कि "इतनी सेवा देने के बाद रेणुकूट पुलिस ने ये सम्मान मुझे एफआईआर के रूप दिया है, ऐसे सम्मान से बढ़िया है की सूबे के मुख्यमत्री एवं जिले आलाधिकारी के से निवेदन है कि किसी की जान बचाने के लिए fir नहीं मृत्यु दंड देना चाहिए।

दूसरी ओर समाजसेवी विजय प्रताप सिंह ने रेणुकूट पुलिस और चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा फर्ज़ी मुकदमें में फंसाए जाने को लेकर पुलिस अधीक्षक को पर लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। समाजसेवी विजय प्रताप सिंह ने पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में लिखा कि पीड़ित समाज के कमजोर और असहाय लोगों की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने के साथ ही उनकी हर संभव मदद करने का कार्य करता आया है। उन्होंने चिकित्सालय में लगाए गए सीसी टीवी कैमरे व अन्य स्रोतों से जांच कराकर कर दोषियों पर कार्रवाई किए जाने एवं उन पर लगे फर्ज़ी मुकदमें में न्याय दिलाए जाने की मांग की है।

Mirzapur: आखिरकार SSB के जवान ने क्यों कहां साहब, आत्महत्या के आलावा मेरे पास कुछ भी नहीं रास्ता बचा है

मिर्ज़ापुर। ''मेरा घर खाली करा दिजिए साहब ..! वरना आत्महत्या के आलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं है..यह कहते-कहते सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल का जवान फफक-फफक कर रो पड़ता है। आंखें भर आंती हैं, मन के अंदर छुपी पीड़ा, दौड़ लगाने के बाद भी त्वरित न्याय के बजाए सभी से अभी तक मिलती आईं निराशा साफ परिलक्षित हो रही थीं।

उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे बावर्दी में तथा हाथों में शिकायत दर शिक़ायत करने से लेकर दस्तावेज की पोटली लिए सेना के जवान को देख यह नहीं लगा कि वह काफी परेशान हैं, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी परेशानी बतानी शुरू की है वैसे ही मौके पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए थे।

दरअसल, यह पूरा मामला मिर्ज़ापुर के हलिया थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हलिया थाना क्षेत्र के मनिगढ़ा गांव निवासी रयूफ अंसारी पुत्र कय्यूम अंसारी केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बल सशस्त्र सुरक्षा बल (SSB) में कांस्टेबल के पद पर पोखराझार भूटान बार्डर से लगने वाले एरिया में तैनात हैं। जवान रयूफ के मुताबिक उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व हलिया के देवरी बाजार में दो बिस्वा भूमि खरीद कर दो कमरों का मकान बनवाया था। जहां घर के दीवार पर प्लास्टर होना बाकी था, कि इसी बीच उनकी छुट्टी समाप्त हो जाने पर वह ड्यूटी पर लौट गए थे।

घर खाली देख जमा लिया कब्जा, जवान लगाता आया है गुहार दर गुहार

जवान रयूफ के ड्यूटी पर जाते ही घर खाली देख संतोष कुमार पुत्र स्वर्गीय रामपति में घर पर कब्जा जमा लिया। जिसकी जानकारी होने पर पीड़ित सशस्त्र सुरक्षा बल के जवान ने हलिया थाना पुलिस से लेकर क्षेत्राधिकारी लालगंज को प्रार्थना पत्र देकर घर खाली कराने की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाई है। बाद में जवान ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से भी गुहार लगाई है, लेकिन यहां से भी निराशा ही अभी तक मिली है।

पीड़ित जवान के मुताबिक वह हर बार छुट्टी मिलने पर फरियाद दर फरियाद ही लगाता आया है लेकिन कोई उसकी सुनने को तैयार ही नहीं है, सिर्फ दिलासा ही मिलता आया है। आर्थिक, मानसिक व सामाजिक प्रताड़ना से जूझते हुए आएं जवान रयूफ एसपी आफिस पहुंचते ही फफक पड़े थें,अपना दुखड़ा सुनाने हुए उन्होंने बताया कि वह अपने बीबी बच्चों के साथ स्वयं का घर होने के बाद भी किराए के घर में रहने को विवश हैं।

मकान खाली करने के नाम पर SC-ST एक्ट में फंसाने की मिलती है धमकी

सशस्त्र सुरक्षा बल के जवान का आरोप है कि चार वर्षों से जब-जब उन्हें छुट्टी मिली है वह मकान खाली करने के लिए प्रार्थना पत्र देने के साथ कब्जा करने वाले संतोष से भी गुहार लगाते हुए आएं हैं, लेकिन मकान खाली करना तो दूर उल्टा उन्हें एससी-एसटी एक्ट में फंसाकर जेल भिजवा नौकरी खा जाने की धमकीं दी जाती रही है। जिससे वह और उनका परिवार तनाव व परेशानियों के बीच जीवन गुजारने को विवश हैं। उन्होंने बताया कि उनके उच्चाधिकारियों ने भी स्थानीय पुलिस से पत्राचार के माध्यम से उन्हें न्याय दिलाने और उनके मकान को खाली कराने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन मामला न्यायालय में होने का हवाला देते हुए उनके उच्चाधिकारियों को गुमराह किया जाता रहा है। क्यों कि मेरा न तो किसी से विवाद रहा है,ना ही मकान कब्जा करने वाले संतोष से उनका कोई ताल्लुक़ात रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे जवान ने अपनी गुहार लगाते हुए घर को कब्ज़ा मुक्त कराने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया जहां पुलिस अधीक्षक से मुलाक़ात न हो पाने की दशा में उनका प्रार्थना पत्र लेते हुए जांच कराकर कार्रवाई का उन्हें आश्वासन दिया गया है।

जवान रयूफ अंसारी दुःखी मन से कहते हैं 'वह देश के लिए जीते मरते हुए आएं हैं, हैंडग्रेनेड से पैर में गोली भी खाईं है, लेकिन सरहद की सुरक्षा की खातिर कभी भी पग पीछे नहीं हटे हैं।' लेकिन उन्हें अपने ही गांव-घर में अपने ही मकान को कब्जामुक्त कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। ''मेरा घर खाली करा दिजिए साहब ..! वरना आत्महत्या के आलावा मेरे पास कोई रास्ता नहीं होगा..यह कहते-कहते सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल का जवान फफक-फफक कर रो पड़ता है।