विज्ञान ने भी माना भगवान की मौजूद, हार्वर्ड के वैज्ञानिक ने फॉर्मूले से किया साबित

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पूरा ब्रह्मांड एक व्यवस्थित तरीके से चलता है। दिन ढलते हैं, राते होती है। समय-समय पर मौसम करवट लेते हैं। अक्सर मन में ये सवाल उठते हैं, ये सब कैसे मुमकिन होता है। हम इंसानों में अधिकांश इसे ईश्वर का शक्ति मानते हैं। बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो “भगवान” की मौजूदगी को नहीं मानते। उनके अनुसार सब विज्ञान है। हालांकि, वैज्ञानिकों के लिए भी यह हमेशा जिज्ञासा का विषय रहा है कि कि क्या हमारे ब्रम्हांड में भगवान जैसी कोई चीज है भी या नहीं। हार्वर्ड खगोल भौतिक विज्ञानी और एयरोस्पेस इंजीनियर डॉ. विली सून ने क्रांतिकारी खुलासा किया है। सून ने दावा किया है कि एक गणितीय सूत्र भगवान के अस्तित्व का अंतिम प्रमाण हो सकता है।

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विली सून ने ईश्वर के अस्तित्व को साबित करने के लिए एक नया मैथमेटिकल फॉर्म्युला पेश किया है, जो विज्ञान और आध्यात्मिकता को जोड़ने की कोशिश करता है। उन्होंने 'फाइन ट्यूनिंग आर्गुमेंट' पर जोर दिया है और कहा है कि ब्रह्मांड के नियम इतने सटीक और व्यवस्थित हैं, तभी यहां जीवन संभव हो पाया। गुरुत्वाकर्षण की शक्ति से लेकर पदार्थ और ऊर्जा के सटीक अनुपात तक, ब्रह्मांड जीवन का समर्थन करने के लिए सटीक रूप से ट्यून किया गया लगता है।

डॉक्टर विली सून हाल ही में 'टकर कार्ल्सन नेटवर्क' पॉडकास्ट पर दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने कुछ फॉर्मूले पेश किए और सुझाव दिया कि ब्रह्मांड का रहस्य मात्र तारों में ही नहीं, लेकिन गणित के कुछ बुनियादों में भी लिखे हो सकते हैं। अपनी थ्योरी में उन्होंने 'फाइन ट्यूनिंग आर्ग्यूमेंट' को मुख्य केंद्र बनाया है, जो सुझाव देता है कि ब्रम्हांड के फिजिकल लॉ सटीक रूप से जीवन को समर्थन देने के लिए संतुलित किए गए हैं। यह संयोग तो नहीं हो सकता है।

प्रसिद्ध खगोल भौतिकीविद् और एयरोस्पेस इंजिनियर डॉ. सून ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक पॉल डिराक के कार्यों का हवाला दिया, जिन्होंने एक गणितीय समीकरण के जरिए प्रतिपदार्थ (एंटीमैटर) के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी, जिसने भी वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था। इसी तरह डॉ. सून का भी मानना है कि कुछ गणितीय समीकरण भले ही पहले समझ से बाहर लगें, लेकिन वे ब्रह्मांड की गहरी सचाई को प्रकट कर सकते हैं।

कैंब्रिज के गणितज्ञ पॉल डिराक की ओर से प्रस्तावित किया गया था कि कैसे कुछ कॉस्मिक एलाइन बिल्कुल अद्भुत सटीकता के साथ एक-दूसरे से मेल खाते हैं। इस घटना ने वैज्ञानिकों को चौंकाया। डिराक ने अनुमान लगाया है कि यूनिवर्स के फिजिकल लॉ के परफेक्ट बैलेंस को गणित के थ्योरी में महान सुंदरता और शक्ति के संदर्भ में परिभाषित किया जा सकता है। इसे समझने के लिए व्यक्ति को हाई इंटेलिजेंस की आवश्यकता पड़ेगी।

ललित मोदी ने भारतीय पासपोर्ट जमा करने के लिए दिया आवेदन, भगोड़े की भारत वापसी मुश्किल

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पूर्व उद्योगपति और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी की भारत वापसी अब बेहद मुश्किल हो गई है। ललित मोदी ने अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए आवेदन किया है। दरअसल, ललित मोदी ने प्रशांत महासागर में मौजूद एक टापू देश वनुआतु की नागरिकता हासिल कर ली है।इसका मतलब है कि ललित मोदी को स्वदेश लाना अब और मुश्किल हो गया है। इसको लेकर विदेश मंत्रालय का भी रिएक्शन सामने आया है।

रणधीर जायसवाल ने बताया कि, ललित मोदी ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में अपना पासपोर्ट छोड़ने के लिए आवेदन किया है। इस आवेदन को नियमों और प्रक्रियाओं के तहत जांचा जाएगा। हमें यह भी पता लगा है कि उन्होंने वानुअतु की नागरिकता प्राप्त कर ली है। कानून के तहत हम उनके ख़िलाफ़ मामला आगे भी जारी रखेंगे।

ललित मोदी के वकील महमूद आब्दी ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिण प्रशांत द्वीप राष्ट्र वानुअतु की नागरिकता ली है। महमूद आब्दी ने दावा किया कि किसी भी भारतीय एजेंसी ने भारत की किसी भी कोर्ट में ललित मोदी के खिलाफ शिकायत या चार्जशीट दायर नहीं की है। उन्होंने कहा कि भारत की किसी भी कोर्ट ने ललित मोदी के ख़िलाफ आरोप भी तय नहीं किए हैं।

ललित मोदी पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए बिडिंग में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के साथ-साथ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था। ललित मोदी ने सिर्फ एक बार मुंबई में आयकर और ईडी के अधिकारियों के साथ पूछताछ में हिस्सा लिया था। मई 2010 में वह देश छोड़कर यूके भाग गए थे।

कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप के सामने भिड़े दो मंत्री, मस्क-रुबियो में जमकर हुई तकरार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद कई सख्त फैसले लिए जा रहे हैं। इनमें से कई फैसलों का अमेरिका में विरोध भी हो रहा है। ट्रंप प्रशासन का एक ऐसा ही फैसला स्टाफ कटौती का है। जिसकी आलोचना अमेरिकी राजकर्मियों के संगठन के साथ-साथ अन्य लोग भी कर चुके। अब इसी फैसले के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के प्रमुख एलन मस्क के बीच नोकझोंक की खबर सामने आ रही है।

व्हाइट हाउस में हुई कैबिनेट बैठक में उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब ट्रंप के दो मंत्री आपस में एक बात को लेकर भिड़ गए। डीओजीई विभाग के प्रमुख एलन मस्क और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच तीखी बहस हो गई। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह विवाद स्टेट डिपार्टमेंट में की गई स्टाफ कटौती को लेकर हुआ। खास बात है कि इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही कर रहे थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, तनाव कई हफ़्तों से चल रहा था, मगर कैबिनेट की बैठक में यह फूट पड़ा। रुबियो और मस्क के आक्रामक लागत-कटौती उपायों से लंबे समय से निराश थे। तभी बैठक के दौरान जब मस्क ने उन पर अपने विभाग का आकार कम करने में विफल रहने का आरोप लगाया, तो उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

बैठक के दौरान मस्क ने कहा, आपने किसी को भी नहीं निकाला है। आपका विदेश विभाग अभी भी फूला हुआ है। मस्क के तीखे सवाल को सुनते ही रुबियो भड़क उठे। उन्होंने जवाब दिया कि मस्क को 1,500 विदेश विभाग के अधिकारियों की याद दिला दी जिन्होंने बायआउट किया था। मगर मस्क प्रभावित नहीं हुए। दोनों के बीच जैसे ही बहस बढ़ी, ट्रंप, जो पहले हाथ पर हाथ धरे देख रहे थे, आखिरकार उनको हस्तक्षेप करना पड़ा।

दरअसल, हाल के दिनों में अमेरिका में बड़े पैमाने पर सरकारी एजेंसियों में कर्मचारियों की छटनी की गई है। ट्रंप और उनके सलाहकार ने हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया है. ऐसा अमेरिकी नौकरशाही में कटौती के अभियान के तहत हुआ है। अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। सत्ता में आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक कड़े और बड़े फैसले ले रहे हैं। नौकरी में कटौती को लेकर ट्रंप का कहना है कि फेडरल गवर्नमेंट में बहुत से स्टाफ हैं। उन्होंने हाल में कहा था कि सरकार पर 36 लाख करोड़ डॉलर का कर्ज है। पिछले साल करोड़ों डॉलर का घाटा हुआ था इसलिए इसमें सुधार की जरूरत है।

चीन ने जापान को धमकायाःदिलाई हिरोशिमा-नागासाकी की याद, एटम बम गिराने की दी धमकी

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दुनिया के दो युद्ध पहले से ही जारी है। इस बीच चीन की अकड़ बढ़ती ही जा रही है। ताइवान से बढ़ते तनाव के बीच चीन ने जापान को बड़ी धमकी दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने जापान पर एटम हमले की धमकी दी है। ही नहीं, ड्रैगन ने जापान का पुराना जख्म भी कुरेदने की कोशिश भी की है। चीनी विदेश मंत्री ने जापान को हिरोशिमा और नागासाकी की तबाही की याद दिलाई है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी टैरिफ पर बात करते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि जापान जल्द ही हिरोशिमा-नागासाकी पर हुए परमाणु हमले के 80 साल पूरे करने वाला है। हम इस पर संवेदना जाहिर कर रहे हैं। लेकिन समय रहते जापान नहीं सुधरा तो हम 'हिरोशिमा-नागासाकी' से ज्यादा दर्द दे सकते हैं।

चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि ताइवान हमारा हिस्सा है। टोक्यो के शह पर उसके लोग उड़ रहे हैं। जापान जानबूझकर चीन में अस्थिरता पैदा करना चाह रहा है।दरअसल, चीन को लगता है कि जापान ताइवान का समर्थन करके उसे कमजोर करने में लगा हुआ है।

ये पहली बार नहीं है जब चीन ने जापान को धमकी दी है।पिछले दिनों चीन ने जापान को डराने के लिए उसके सीमा में फाइटर जेट और जंगी जहाज भेज दिया, जिसके बाद जापान के अधिकारी हरकत में आ गए। जापान ने चीन पर उकसावे का आरोप लगाया।

आरएसएस में होगा NRC पर मंथन, पांच साल से मोदी सरकार की चुप्पी का क्या?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कर्नाटक के बेंगलुरु में बड़ी बैठक होली के बाद होने जा रही है। आरएसएस की सर्वोच्च निर्णायक संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की वार्षिक बैठक तीन दिनों तक चलेगी। इस बैठक में आरएसएस के 100 साल के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 100 सालों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, आयोजन और अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। यही नहीं संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आगामी राज्यों के चुनाव का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा मुख्य एजेंडे में एनआरसी शामिल होने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि एबीपीएस पूरे भारत में एनआरसी के लागू करने पर चर्चा कर सकती है। साथ ही, कुछ राज्यों में इसे कैसे लागू किया जाए, इस पर भी विचार-विमर्श हो सकता है।

2019 में केन्द्र की मोदी सरकार ने संसद के दोनों सदनों से नागरिकता संशोधन बिल पास करवाया था। जिसके बाद पूरे देश में एनआरसी को लेकर विरोध शुरू हो गया था। इसके बाद विरोध को थामने के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी को आगे आना पड़ा था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर, 2019 को दिल्ली की एक जनसभा में कहा था कि उनकी सरकार ने सत्ता में वापसी के बाद से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर कोई चर्चा नहीं की है। तब से लेकर अब तक इस मुद्दे पर बात नहीं हुई है। हालांकि, यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में फिर से उभरता दिख रहा है।

संघ के एक पदाधिकारी ने कहा, 'घुसपैठ के कारण देश के कई राज्यों की जनसांख्यिकी बदल गई है। झारखंड में मुसलमानों की तुलना में ईसाई आबादी भी घट रही है। बांग्लादेश से आने वाले लोगों के कारण अरुणाचल प्रदेश जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों की जनसांख्यिकी भी तेजी से बदल रही है। हम सभी जानते हैं कि असम और पश्चिम बंगाल में क्या हुआ है। गैरकानूनी अप्रवासियों की पहचान करना और उन्हें वापस भेजना केंद्र सरकार का कर्तव्य है।'संघ पदाधिकारी के अनुसार, एबीपीएस इस बात पर चर्चा करेगा कि एनआरसी को कैसे लागू किया जाए ताकि किसी भी 'भारतीय नागरिक' को खतरा महसूस न हो।

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का शिखर सम्मेलन आरएसएस की सबसे महत्वपूर्ण बैठक है। इसमें सरसंघचालक मोहन भागवत और दूसरे नंबर के नेता दत्तात्रेय होसबले समेत सभी शीर्ष नेता उपस्थित रहेंगे। साथ ही, भाजपा अध्यक्ष और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। चर्चा किए गए मुद्दे और लिए गए फैसले न केवल अगले वर्ष के लिए संघ को दिशा देते हैं बल्कि सरकार को यह भी संकेत देते हैं कि वह नीतिगत स्तर पर क्या लागू करना चाहता है।

भाजपा समेत ये संगठन होंगे शामिल

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संघ के 45 प्रांत के साथ-साथ सभी क्षेत्र के क्षेत्र प्रमुख, प्रांत प्रमुख मौजूद रहते हैं। इसके अतिरिक्त संघ के सभी 32 सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जिसमें विश्व हिंदू परिषद, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्र सेविका समिति, जैसे सभी संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। प्रतिवर्ष ये बैठक मार्च में होती है और हर 3 साल बाद यह बैठक चुनावी वर्ष के रूप में मानी जाती है। हर तीसरे वर्ष नागपुर में बैठक संपन्न होती है। पिछले वर्ष यह बैठक नागपुर में हुई थी और इस वर्ष यह बैठक बेंगलुरु में हो रही है।

बिहार-बंगाल चुनाव पर होगी चर्चा

इस बैठक से पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बिहार दौरा काफी अहम माना जा रहा है। आरएसएस के विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में बिहार चुनाव के संबंध में भी चर्चा होगी। बिहार चुनाव से संबंधित सभी सहयोगी संगठनों को कार्य करने का दिशा निर्देश भी तय किया जाएगा। बिहार प्रवास से पहले आरएसएस के सरसंचालक मोहन भागवत पूर्वी भारत के प्रवास पर थे। 10 दिन का बंगाल प्रवास, 5 दिन का असम प्रवास, चार दिन का अरुणाचल का प्रवास, अब बिहार का प्रवास। 2026 के मार्च-अप्रैल के महीने में बंगाल का भी चुनाव होने की संभावना है। उस संबंध में भी इस बैठक में चर्चा होने की पूरी संभावना बताई जा रही है।

क्या बदल गया दिल्ली के तुगलक लेन का नाम? भाजपा सांसदों ने लिखवाया स्वामी विवेकानंद मार्ग

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उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने राजधानी दिल्ली में अपने आवास का पता बदल दिया है। शर्मा के अलावा केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने भी अपने आवास का नेमप्लेट बदल दिया है। दरअसल, इन दोनों नेताओं का सरकारी आवास तुगलक लेन पर स्थित है। लेकिन अब दोनों नेताओं ने तुगलक लेन की जगह अब नेम प्लेट पर स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखवा दिया है।

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दरअसल, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री कृष्‍णपाल सिंह गुर्जर और भाजपा सांसद दिनेश शर्मा को तुगलक लेन में नया सरकारी आवास आवंटित हुआ है। इसके साथ ही दोनों नेताओं के नए सरकारी आवास में सड़क का नाम बदलकर लिखा गया है। दोनों नेताओं के घर के बाहर लगी नेम प्लेट में तुगलक लेन की बजाय विवेकानंद मार्ग पते के रूप में लिखा गया है। दोनों नेताओं के घर के बाहर शुक्रवार को नई नेमप्लेट लगाई गई।

केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने नेमप्लेट पर तुगलक लेन के बजाय विवेकानंद मार्ग लिखने की वजह भी बताई है। उन्होंने कहा, 'स्वामी विवेकानंद इस देश के युवाओं के लिए एक आदर्श हैं। देश के लोगों की उनके नाम के साथ भावनाएं जुड़ी हुई हैं, हमें ऐसे महापुरुष के नाम पर आस्था है, हमें स्वामी विवेकानंद और उनके आदर्शों में आस्था है। इसीलिए हमने वो नाम लिखवाया है। ये आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया है, लेकिन देश के लोगों की स्वामी विवेकानंद में आस्था है, हम उन्हें आदर्श मानते हैं। मुझे इसे बदलने का न अधिकार था न है। न मैंने किया है। ये देश कानून, नियम और प्रक्रियाओं का पालन करने वाला देश है। ये हमारी आस्था है इसलिए हमने यह लिखा और इसके साथ ही हमने आधिकारिक नाम भी लिखवाया है... ये राजनीति नहीं है, ये हमारी आस्था है।'

वहीं, भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ले ने कहा “यह सामान्य प्रक्रिया है कि जब कोई किसी घर में जाता है तो नाम पट्टिका लगा दी जाती है। मैं वहां नहीं गया था, मैंने नहीं देखा था, जब मुझसे उससे संबंधित लोगों ने पूछा कि किस तरह की नाम पट्टिका होनी चाहिए तो मैंने कहा कि आसपास के हिसाब से होनी चाहिए। आस-पास के घरों पर विवेकानंद मार्ग लिखा था और नीचे तुगलक लेन लिखा था, दोनों एक साथ लिखे थे। दिनेश शर्मा ने ये भी कहा, गूगल पर वह स्थान विवेकानंद रोड आता है, ऐसा इसलिए लिखा है ताकि लोगों को विवेकानंद रोड और तुगलक लेन में भ्रम न हो।

बीते दिनों दिल्ली के विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव रखा था कि नजफगढ़ का नाम बदलकर नाहरगढ़ कर दिया जाए। इसके अलावा मोहम्मदपुर गांव का नाम माधवपुरम किया जाए और मुस्तफाबाद का नाम बदलकर शिवपुरी कर दिया जाए। दिल्ली विधानसभा में उठाई गई इस मांग के इस बीच लुटियन दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और सांसद ने खुद ही अपने नेम प्लेट में नया नाम लिख दिया। हालांकि तुगलक लेन नाम भी हटाया नहीं गया है।

हमारे पीएम सिर्फ तारीफ सुनना चाहते हैं, उन्हें टैरिफ की चिंता नहीं', कांग्रेस नेता जयराम रमेश का हमला

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप की इस घोषणा से भारत पर होने वाले प्रभावों की चर्चा हो रही है। अमेरिका की तरफ से लगाया जाने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ भारत के लिए भी काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। भारत के कई उद्योगों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस बीच कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी केवल अपनी तारीफ सुनना चाहते हैं। उन्हें टैरिफ की कोई परवाह नहीं है।

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पीटीआई से बात करते हुए रमेश ने कहा कि अमेरिका की धमकी पर अब पीएम मोदी 56 इंच का सीना क्यों नहीं दिखा रहे हैं? कांग्रेस नेता का कहना था कि ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा और अमेरिका की ‘धमकी’ का जवाब देने के लिए भारत को दलगत भावना से ऊपर उठकर सामूहिक संकल्प दिखाने की जरूरत है।

रमेश ने कहा, इंदिरा गांधी जी (पूर्व प्रधानमंत्री) ने उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को क्या कहा था? याद करिये! चार नवंबर, 1971 को जब निक्सन और हेनरी किसिंजर (निक्सन के समय अमेरिका के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) ने भारत को बदनाम करने का प्रयास किया तो इंदिरा जी खड़ीं होकर बोलीं कि भारतीय हित में मुझे जो कुछ करना है, वो करूंगी, लेकिन आज हमारे प्रधानमंत्री तो नमस्ते ट्रंप और गले लगाने में लगे हुए हैं।

यह पूछे जाने पर कि ‘टैरिफ’ के मुद्दे पर बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान क्या कांग्रेस प्रधानमंत्री से संसद में जवाब मांगेगी, रमेश ने कहा, 'प्रधानमंत्री तो जवाब नहीं देते, विदेश मंत्री को भेजते हैं। विदेश मंत्री तो अमेरिका के प्रवक्ता और अमेरिका के राजदूत के रूप में बात करते हैं।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बृहस्पतिवार को फिर दोहराया कि अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाने वाले देशों पर जवाबी शुल्क दो अप्रैल से लागू होंगे। ट्रंप ने कहा, सबसे बड़ी बात दो अप्रैल को होगी जब जवाबी शुल्क लागू होंगे, फिर चाहे वह भारत हो या चीन या कोई भी देश।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अल्पसंख्यकों पर मेहरबान, बजट में मिला तोहफा, भड़की बीजेपी

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को राज्य का बजट पेश कर दिया है। इस बजट में राज्य के अल्पसंख्य समुदाय के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। कर्नाटक सरकार के बजट में एक हजार करोड़ रुपये अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही 150 करोड़ रुपये वक्फ संपत्ति सुरक्षा के लिए, 100 करोड़ रुपये ऊर्दू स्कूलों के लिए और साथ ही इमामों को 6 हजार रुपये महीना देने का भी एलान किया गया है। कर्नाटक सरकार ने बजट में चार प्रतिशत सरकारी कामों के ठेके मुस्लिम ठेकेदारों के लिए आरक्षित करने का एलान किया है। कर्नाटक भाजपा ने बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए भारी आवंटन पर नाराजगी जताते हुए इसे हलाला बजट करार दिया।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज अपना रिकॉर्ड 16वां बजट पेश किया। कर्नाटक के बजट 2025-26 में अल्पसंख्यकों के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए छात्रों को एसएसएलसी परीक्षा के लिए एआईओएस के माध्यम से तैयारी करने में मदद का फैसला लिया गया है। इसके लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का फैसला किया गया है। साथ ही अल्पसंख्यक युवाओं को कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वक्फ संपत्तियों की मरम्मत और नवीकरण के लिए और मुस्लिम कब्रिस्तानों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण

• वक्फ जमीन के संरक्षण रखरखाव और कब्रिस्तान के लिए 150 करोड़ का आवंटन।

• सीएम अल्पसंख्यक कॉलोनी डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत 1000 करोड़ का एक्शन प्लान वित्तीय वर्ष 25-26 में लागू होगा।

• आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यकों की शादी के लिए हर जोडे को 50 हजार की सहायता।

• हज भवन परिसर में एक और इमारत बनाई जाएगी।

सरकार के अन्य बड़े ऐलान

• कर्नाटक पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर 250 मौलाना आज़ाद मॉडल इंग्लिश मीडियम स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से प्री-प्राइमरी से लेकर पीयू तक की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इस उद्देश्य के लिए 500 करोड़ रुपये की कुल लागत वाला एक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। वर्तमान वर्ष में इस उद्देश्य के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा।"

• मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए, छात्रों को एनआईओएस के माध्यम से एसएसएलसी परीक्षा लिखने के लिए तैयार करने के लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

• कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से अल्पसंख्यक युवाओं को नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

• मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम के तहत 1,000 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कार्य क्रियान्वित किए जाएंगे।

• जैन पुजारियों, सिखों के मुख्य ग्रंथी और मस्जिदों के पेश-इमामों को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा। सहायक ग्रंथी और मुअज्जिन को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।

• अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन के लिए राज्य भर में बहुउद्देश्यीय हॉल बनाए जाएंगे। हॉल का निर्माण होबली और तालुक स्तर पर 50 लाख रुपये और जिला मुख्यालयों और नगर निगम क्षेत्रों में 1 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

• कलबुर्गी जिले के चित्तपुरा तालुका में प्राचीन बौद्ध केंद्र सन्नति में सन्नति विकास प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी।

• सरकार की 5 गारंटी को जारी रखने के लिए 51034 करोड़ रुपये का आवंटन

भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कांग्रेस संसाधनों के आवंटन में मुस्लिमों को प्राथमिकता दे रही है। अमित मालवीय ने लिखा कि 9 दिसंबर 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है।

वहीं, कर्नाटक सरकार के बजट पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, राज्य में कांग्रेस पार्टी ने एक मॉडर्न मुस्लिम लीग बजट पास किया है। इसमें इमामों का पैसा कांग्रेस पार्टी 6000 रुपये तक बढ़ा रही है। बजट में घोषणा की गई है कि वक्फ को 150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग का पैसा सिर्फ अल्पसंख्यक लड़कियों को दिया जा रहा है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा उर्दू स्कूल के लिए 100 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। कल ही सरकार ने हुबली दंगे का केस वापस लेने की बात कही है। भंडारी ने कहा कि साफ है, कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी उसी तरह सरकार चला रही है जिस तरह मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान में सरकार चलाई।

कैमरे के सामने ही क्यों रोने लगे जस्टिन ट्रूडो, कनाडाई पीएम के तौर पर आखिरी मीडिया ब्रीफिंग में हुए भावुक

#trudeau_pride_he_became_emotional_in_front_of_reporters

कनाडा के प्रधामंत्री जस्टिन ट्रूडो बतौर पीएम आखिरी मीडिया ब्रीफिंग में कैमरों के सामने सार्वजनिक तौर पर रो दिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ संबंधी धमकियों पर बात करते हुए ट्रूडो ने आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति टैरिफ के जरिए कनाडा की अर्थव्यवस्था को तबाह करना चाहते हैं। इसके पीछे ट्रंप का उद्देश्य यह है कि वो कनाडा को अमेरिका में शामिल करना चाहते हैं।

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ट्रूडो ने लोकप्रियता रेटिंग में गिरावट के बीच जनवरी में प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के रूप में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। रविवार (9 मार्च) को पार्टी द्वारा नया नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री के रूप में पद छोड़ देंगे। इससे पहले गुरूवार को अपने 10 साल के शासनकाल के दौरान चुनौतियों को याद करते हुए वे भावुक हो गए। ट्रूडो ने कहा कि उन्होंने हमेशा कनाडा के लोगों को सबसे पहले रखा। उनकी कोशिश रही कि आम कनाडाई के लिए वह कुछ बेहतर कर सकें। इतना कहते हुए वह भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं।

ट्रूडो ने अपने आखिरी मीडिया ब्रीफिंग में भावुक होते हुए कहा, 'मैंने इस पद पर हर रहते हुए हर दिन कनाडा के लोगों के लिए काम करना सुनिश्चित किया। मैं आप सभी को यह बताने के लिए यहां आया हूं कि मैं हमेशा आपके साथ हैं। इस सरकार के आखिरी दिनों में भी हम कनाडा के लोगों को निराश नहीं करेंगे। हम कनाडा की बेहतरी के लिए सभी कदम उठाएंगे।

ट्रूडो ने इस दौरान अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ वॉर का जिक्र करते हुए कनाडा के लोगों के बीच एकता पर जोर दिया। उन्होंने ट्रंप की टैरिफ धमकियों और कनाडा के विलय की बयानबाजी की वजह से आने वाले कठिन समय की चेतावनी भी दी। उन्होंने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अमेरिका सभी देशों से अलग तरह के रिश्ते बना रहा है।

चीन को क्यों सताने लगी भारत के साथ संबंध सुधारने की चिंता? जयशंकर के बयान के बाद बदले सुर

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हाल के दिनों में वैश्विक समीकरणों में तेजी से बदलाव आया है। यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस और अमेरिका के बीच बढ़ी नजदीकियों के बाद दुनिया के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस बीच चीन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि दोनों देशों को साझा सफलता हासिल करने के लिए मिलकर काम करने पर ध्यान देने की जरूरत है। वांग ने शुक्रवार को नई दिल्ली से रिश्ते के सवाल पर कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए, ना कि एक-दूसरे को कमजोर करने की कोशिश करनी चाहिए।

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वांग यी ने कहा, "इस साल चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है। ऐसे में चीन भारत के साथ मिलकर पिछले अनुभवों को समेटने, आगे का रास्ता बनाने और चीन-भारत संबंधों को मजबूत और स्थिर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।"

वांग यी ने कहा, "पिछले एक साल में चीन-भारत संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। पिछले अक्टूबर में कज़ान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सफल बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों के सुधार और विकास के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया। दोनों पक्षों ने हमारे नेताओं की महत्वपूर्ण आम समझ का ईमानदारी से पालन किया है। सभी स्तरों पर आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत किया है और कई सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं।"

भारत और चीन को "एक दूसरे का सबसे बड़ा पड़ोसी" बताते हुए, वांग यी ने कहा-दोनों को ऐसे साझेदार होने चाहिए जो एक दूसरे की सफलता में योगदान दें। ड्रैगन और हाथी का एक सहयोगात्मक कदम दो दोनों पक्षों के लिए एकमात्र सही विकल्प है।"उन्होंने कहा कि चीन और भारत के पास दोनों देशों के विकास और पुनरोद्धार में तेजी लाने का साझा कार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए हर कारण मौजूद है।

वांग ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन और भारत को ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आना चाहिए और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद ही उनके द्विपक्षीय संबंधों को निर्धारित करने वाला एकमात्र कारक नहीं होना चाहिए। वांग ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ सावधानी बरतने के बजाय मिलकर सहयोग करना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्री का ये बयान ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन दौरे पर गए जयशंकर ने लंदन के चैथम हाउस में एक पैनल चर्चा में चीन से रिश्ते पर बोलते हुए कहा कि एक स्थिर संतुलन बनाया जाने की जरूरत है। हम एक स्थिर रिश्ता चाहते हैं। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत चीन के साथ स्थिर संबंध चाहता है, जिसमें नई दिल्ली के हितों का सम्मान किया जाए। यही हमारे रिश्ते में मुख्य चुनौती है।

बता दें कि अमेरिका जहां रूस से दोस्ती बढ़ाकर चीन को अलग-थलग करना चाहता है तो वहीं भारत को भी अपने साथ लेकर चीन पर दबाव को बढ़ाना चाह रहा है। मगर चीन भी अमेरिका से कम नहीं है, वह उसके इस मर्म को समझ गया है। लिहाजा चीन ने भी अब अपना पाला बदलते हुए सबसे बड़ा ऐलान कर दिया है। चीन ने भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की इच्छा व्यक्त की है।