क्या बदल गया दिल्ली के तुगलक लेन का नाम? भाजपा सांसदों ने लिखवाया स्वामी विवेकानंद मार्ग

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उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने राजधानी दिल्ली में अपने आवास का पता बदल दिया है। शर्मा के अलावा केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने भी अपने आवास का नेमप्लेट बदल दिया है। दरअसल, इन दोनों नेताओं का सरकारी आवास तुगलक लेन पर स्थित है। लेकिन अब दोनों नेताओं ने तुगलक लेन की जगह अब नेम प्लेट पर स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखवा दिया है।

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दरअसल, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री कृष्‍णपाल सिंह गुर्जर और भाजपा सांसद दिनेश शर्मा को तुगलक लेन में नया सरकारी आवास आवंटित हुआ है। इसके साथ ही दोनों नेताओं के नए सरकारी आवास में सड़क का नाम बदलकर लिखा गया है। दोनों नेताओं के घर के बाहर लगी नेम प्लेट में तुगलक लेन की बजाय विवेकानंद मार्ग पते के रूप में लिखा गया है। दोनों नेताओं के घर के बाहर शुक्रवार को नई नेमप्लेट लगाई गई।

केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने नेमप्लेट पर तुगलक लेन के बजाय विवेकानंद मार्ग लिखने की वजह भी बताई है। उन्होंने कहा, 'स्वामी विवेकानंद इस देश के युवाओं के लिए एक आदर्श हैं। देश के लोगों की उनके नाम के साथ भावनाएं जुड़ी हुई हैं, हमें ऐसे महापुरुष के नाम पर आस्था है, हमें स्वामी विवेकानंद और उनके आदर्शों में आस्था है। इसीलिए हमने वो नाम लिखवाया है। ये आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया है, लेकिन देश के लोगों की स्वामी विवेकानंद में आस्था है, हम उन्हें आदर्श मानते हैं। मुझे इसे बदलने का न अधिकार था न है। न मैंने किया है। ये देश कानून, नियम और प्रक्रियाओं का पालन करने वाला देश है। ये हमारी आस्था है इसलिए हमने यह लिखा और इसके साथ ही हमने आधिकारिक नाम भी लिखवाया है... ये राजनीति नहीं है, ये हमारी आस्था है।'

वहीं, भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ले ने कहा “यह सामान्य प्रक्रिया है कि जब कोई किसी घर में जाता है तो नाम पट्टिका लगा दी जाती है। मैं वहां नहीं गया था, मैंने नहीं देखा था, जब मुझसे उससे संबंधित लोगों ने पूछा कि किस तरह की नाम पट्टिका होनी चाहिए तो मैंने कहा कि आसपास के हिसाब से होनी चाहिए। आस-पास के घरों पर विवेकानंद मार्ग लिखा था और नीचे तुगलक लेन लिखा था, दोनों एक साथ लिखे थे। दिनेश शर्मा ने ये भी कहा, गूगल पर वह स्थान विवेकानंद रोड आता है, ऐसा इसलिए लिखा है ताकि लोगों को विवेकानंद रोड और तुगलक लेन में भ्रम न हो।

बीते दिनों दिल्ली के विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव रखा था कि नजफगढ़ का नाम बदलकर नाहरगढ़ कर दिया जाए। इसके अलावा मोहम्मदपुर गांव का नाम माधवपुरम किया जाए और मुस्तफाबाद का नाम बदलकर शिवपुरी कर दिया जाए। दिल्ली विधानसभा में उठाई गई इस मांग के इस बीच लुटियन दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और सांसद ने खुद ही अपने नेम प्लेट में नया नाम लिख दिया। हालांकि तुगलक लेन नाम भी हटाया नहीं गया है।

हमारे पीएम सिर्फ तारीफ सुनना चाहते हैं, उन्हें टैरिफ की चिंता नहीं', कांग्रेस नेता जयराम रमेश का हमला

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप की इस घोषणा से भारत पर होने वाले प्रभावों की चर्चा हो रही है। अमेरिका की तरफ से लगाया जाने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ भारत के लिए भी काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। भारत के कई उद्योगों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस बीच कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी केवल अपनी तारीफ सुनना चाहते हैं। उन्हें टैरिफ की कोई परवाह नहीं है।

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पीटीआई से बात करते हुए रमेश ने कहा कि अमेरिका की धमकी पर अब पीएम मोदी 56 इंच का सीना क्यों नहीं दिखा रहे हैं? कांग्रेस नेता का कहना था कि ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा और अमेरिका की ‘धमकी’ का जवाब देने के लिए भारत को दलगत भावना से ऊपर उठकर सामूहिक संकल्प दिखाने की जरूरत है।

रमेश ने कहा, इंदिरा गांधी जी (पूर्व प्रधानमंत्री) ने उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को क्या कहा था? याद करिये! चार नवंबर, 1971 को जब निक्सन और हेनरी किसिंजर (निक्सन के समय अमेरिका के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) ने भारत को बदनाम करने का प्रयास किया तो इंदिरा जी खड़ीं होकर बोलीं कि भारतीय हित में मुझे जो कुछ करना है, वो करूंगी, लेकिन आज हमारे प्रधानमंत्री तो नमस्ते ट्रंप और गले लगाने में लगे हुए हैं।

यह पूछे जाने पर कि ‘टैरिफ’ के मुद्दे पर बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान क्या कांग्रेस प्रधानमंत्री से संसद में जवाब मांगेगी, रमेश ने कहा, 'प्रधानमंत्री तो जवाब नहीं देते, विदेश मंत्री को भेजते हैं। विदेश मंत्री तो अमेरिका के प्रवक्ता और अमेरिका के राजदूत के रूप में बात करते हैं।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बृहस्पतिवार को फिर दोहराया कि अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाने वाले देशों पर जवाबी शुल्क दो अप्रैल से लागू होंगे। ट्रंप ने कहा, सबसे बड़ी बात दो अप्रैल को होगी जब जवाबी शुल्क लागू होंगे, फिर चाहे वह भारत हो या चीन या कोई भी देश।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अल्पसंख्यकों पर मेहरबान, बजट में मिला तोहफा, भड़की बीजेपी

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को राज्य का बजट पेश कर दिया है। इस बजट में राज्य के अल्पसंख्य समुदाय के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। कर्नाटक सरकार के बजट में एक हजार करोड़ रुपये अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही 150 करोड़ रुपये वक्फ संपत्ति सुरक्षा के लिए, 100 करोड़ रुपये ऊर्दू स्कूलों के लिए और साथ ही इमामों को 6 हजार रुपये महीना देने का भी एलान किया गया है। कर्नाटक सरकार ने बजट में चार प्रतिशत सरकारी कामों के ठेके मुस्लिम ठेकेदारों के लिए आरक्षित करने का एलान किया है। कर्नाटक भाजपा ने बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए भारी आवंटन पर नाराजगी जताते हुए इसे हलाला बजट करार दिया।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज अपना रिकॉर्ड 16वां बजट पेश किया। कर्नाटक के बजट 2025-26 में अल्पसंख्यकों के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए छात्रों को एसएसएलसी परीक्षा के लिए एआईओएस के माध्यम से तैयारी करने में मदद का फैसला लिया गया है। इसके लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का फैसला किया गया है। साथ ही अल्पसंख्यक युवाओं को कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वक्फ संपत्तियों की मरम्मत और नवीकरण के लिए और मुस्लिम कब्रिस्तानों के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण

• वक्फ जमीन के संरक्षण रखरखाव और कब्रिस्तान के लिए 150 करोड़ का आवंटन।

• सीएम अल्पसंख्यक कॉलोनी डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत 1000 करोड़ का एक्शन प्लान वित्तीय वर्ष 25-26 में लागू होगा।

• आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यकों की शादी के लिए हर जोडे को 50 हजार की सहायता।

• हज भवन परिसर में एक और इमारत बनाई जाएगी।

सरकार के अन्य बड़े ऐलान

• कर्नाटक पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर 250 मौलाना आज़ाद मॉडल इंग्लिश मीडियम स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से प्री-प्राइमरी से लेकर पीयू तक की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इस उद्देश्य के लिए 500 करोड़ रुपये की कुल लागत वाला एक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। वर्तमान वर्ष में इस उद्देश्य के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा।"

• मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए, छात्रों को एनआईओएस के माध्यम से एसएसएलसी परीक्षा लिखने के लिए तैयार करने के लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

• कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से अल्पसंख्यक युवाओं को नए स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

• मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम के तहत 1,000 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कार्य क्रियान्वित किए जाएंगे।

• जैन पुजारियों, सिखों के मुख्य ग्रंथी और मस्जिदों के पेश-इमामों को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा। सहायक ग्रंथी और मुअज्जिन को दिया जाने वाला मानदेय बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।

• अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के आयोजन के लिए राज्य भर में बहुउद्देश्यीय हॉल बनाए जाएंगे। हॉल का निर्माण होबली और तालुक स्तर पर 50 लाख रुपये और जिला मुख्यालयों और नगर निगम क्षेत्रों में 1 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

• कलबुर्गी जिले के चित्तपुरा तालुका में प्राचीन बौद्ध केंद्र सन्नति में सन्नति विकास प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी।

• सरकार की 5 गारंटी को जारी रखने के लिए 51034 करोड़ रुपये का आवंटन

भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कांग्रेस संसाधनों के आवंटन में मुस्लिमों को प्राथमिकता दे रही है। अमित मालवीय ने लिखा कि 9 दिसंबर 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है।

वहीं, कर्नाटक सरकार के बजट पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, राज्य में कांग्रेस पार्टी ने एक मॉडर्न मुस्लिम लीग बजट पास किया है। इसमें इमामों का पैसा कांग्रेस पार्टी 6000 रुपये तक बढ़ा रही है। बजट में घोषणा की गई है कि वक्फ को 150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग का पैसा सिर्फ अल्पसंख्यक लड़कियों को दिया जा रहा है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा उर्दू स्कूल के लिए 100 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। कल ही सरकार ने हुबली दंगे का केस वापस लेने की बात कही है। भंडारी ने कहा कि साफ है, कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी उसी तरह सरकार चला रही है जिस तरह मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान में सरकार चलाई।

कैमरे के सामने ही क्यों रोने लगे जस्टिन ट्रूडो, कनाडाई पीएम के तौर पर आखिरी मीडिया ब्रीफिंग में हुए भावुक

#trudeau_pride_he_became_emotional_in_front_of_reporters

कनाडा के प्रधामंत्री जस्टिन ट्रूडो बतौर पीएम आखिरी मीडिया ब्रीफिंग में कैमरों के सामने सार्वजनिक तौर पर रो दिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ संबंधी धमकियों पर बात करते हुए ट्रूडो ने आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति टैरिफ के जरिए कनाडा की अर्थव्यवस्था को तबाह करना चाहते हैं। इसके पीछे ट्रंप का उद्देश्य यह है कि वो कनाडा को अमेरिका में शामिल करना चाहते हैं।

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ट्रूडो ने लोकप्रियता रेटिंग में गिरावट के बीच जनवरी में प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के नेता के रूप में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। रविवार (9 मार्च) को पार्टी द्वारा नया नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री के रूप में पद छोड़ देंगे। इससे पहले गुरूवार को अपने 10 साल के शासनकाल के दौरान चुनौतियों को याद करते हुए वे भावुक हो गए। ट्रूडो ने कहा कि उन्होंने हमेशा कनाडा के लोगों को सबसे पहले रखा। उनकी कोशिश रही कि आम कनाडाई के लिए वह कुछ बेहतर कर सकें। इतना कहते हुए वह भावुक हो गए और उनकी आंखें भर आईं।

ट्रूडो ने अपने आखिरी मीडिया ब्रीफिंग में भावुक होते हुए कहा, 'मैंने इस पद पर हर रहते हुए हर दिन कनाडा के लोगों के लिए काम करना सुनिश्चित किया। मैं आप सभी को यह बताने के लिए यहां आया हूं कि मैं हमेशा आपके साथ हैं। इस सरकार के आखिरी दिनों में भी हम कनाडा के लोगों को निराश नहीं करेंगे। हम कनाडा की बेहतरी के लिए सभी कदम उठाएंगे।

ट्रूडो ने इस दौरान अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ वॉर का जिक्र करते हुए कनाडा के लोगों के बीच एकता पर जोर दिया। उन्होंने ट्रंप की टैरिफ धमकियों और कनाडा के विलय की बयानबाजी की वजह से आने वाले कठिन समय की चेतावनी भी दी। उन्होंने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अमेरिका सभी देशों से अलग तरह के रिश्ते बना रहा है।

चीन को क्यों सताने लगी भारत के साथ संबंध सुधारने की चिंता? जयशंकर के बयान के बाद बदले सुर

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हाल के दिनों में वैश्विक समीकरणों में तेजी से बदलाव आया है। यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस और अमेरिका के बीच बढ़ी नजदीकियों के बाद दुनिया के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस बीच चीन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि दोनों देशों को साझा सफलता हासिल करने के लिए मिलकर काम करने पर ध्यान देने की जरूरत है। वांग ने शुक्रवार को नई दिल्ली से रिश्ते के सवाल पर कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए, ना कि एक-दूसरे को कमजोर करने की कोशिश करनी चाहिए।

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वांग यी ने कहा, "इस साल चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है। ऐसे में चीन भारत के साथ मिलकर पिछले अनुभवों को समेटने, आगे का रास्ता बनाने और चीन-भारत संबंधों को मजबूत और स्थिर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।"

वांग यी ने कहा, "पिछले एक साल में चीन-भारत संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। पिछले अक्टूबर में कज़ान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सफल बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों के सुधार और विकास के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया। दोनों पक्षों ने हमारे नेताओं की महत्वपूर्ण आम समझ का ईमानदारी से पालन किया है। सभी स्तरों पर आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत किया है और कई सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं।"

भारत और चीन को "एक दूसरे का सबसे बड़ा पड़ोसी" बताते हुए, वांग यी ने कहा-दोनों को ऐसे साझेदार होने चाहिए जो एक दूसरे की सफलता में योगदान दें। ड्रैगन और हाथी का एक सहयोगात्मक कदम दो दोनों पक्षों के लिए एकमात्र सही विकल्प है।"उन्होंने कहा कि चीन और भारत के पास दोनों देशों के विकास और पुनरोद्धार में तेजी लाने का साझा कार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए हर कारण मौजूद है।

वांग ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन और भारत को ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आना चाहिए और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद ही उनके द्विपक्षीय संबंधों को निर्धारित करने वाला एकमात्र कारक नहीं होना चाहिए। वांग ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ सावधानी बरतने के बजाय मिलकर सहयोग करना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्री का ये बयान ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन दौरे पर गए जयशंकर ने लंदन के चैथम हाउस में एक पैनल चर्चा में चीन से रिश्ते पर बोलते हुए कहा कि एक स्थिर संतुलन बनाया जाने की जरूरत है। हम एक स्थिर रिश्ता चाहते हैं। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत चीन के साथ स्थिर संबंध चाहता है, जिसमें नई दिल्ली के हितों का सम्मान किया जाए। यही हमारे रिश्ते में मुख्य चुनौती है।

बता दें कि अमेरिका जहां रूस से दोस्ती बढ़ाकर चीन को अलग-थलग करना चाहता है तो वहीं भारत को भी अपने साथ लेकर चीन पर दबाव को बढ़ाना चाह रहा है। मगर चीन भी अमेरिका से कम नहीं है, वह उसके इस मर्म को समझ गया है। लिहाजा चीन ने भी अब अपना पाला बदलते हुए सबसे बड़ा ऐलान कर दिया है। चीन ने भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की इच्छा व्यक्त की है।

तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा शुरू कर दो...', भाषा विवाद के बीच अमित शाह का स्टालिन पर तंज

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भाषा को लेकर तमिलनाडु और केन्द्र सरकार आमने-सामने हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पिछले कुछ दिनों से लगातार केंद्र सरकार पर नेशनल एजूकेशन पॉलिसी के जरिए तमिलनाडु में हिंदी को अनिवार्य करने और तमिल भाषा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं। अब तक शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने स्टालिन के हमले को लेकर मोर्टा समभाल रखा था। ब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पर पलटवार किया। उन्होंने स्टालिन से राज्य में तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल की शिक्षा शुरू करने की बात कही है।

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भाषा के मुद्दे विशेष रूप से स्टालिन के हिंदी विरोध को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बदलाव किए और अब यह सुनिश्चित किया है कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के उम्मीदवार अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा दे सकें।

शाह ने दावा किया कि एमके स्टालिन ने तमिल भाषा के विकास के संबंध में पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए अपनी भर्ती नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। शाह ने कहा, अभी तक सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) भर्ती में मातृभाषा के लिए कोई जगह नहीं थी। पीएम मोदी ने फैसला किया है कि हमारे युवा अब तमिल सहित आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में सीएपीएफ परीक्षा दे सकेंगे। मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से भी आग्रह करना चाहता हूं कि वे जल्द से जल्द तमिल भाषा में मेडिकल और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में कदम उठाएं।

क्या है केंद्र और राज्य के बीच विवाद?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बीच पिछले कई दिनों से जुबानी जंग चल रही है। बीते दिनों राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तमिलनाडु में लागू करने से स्टालिन के इनकार पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नाराजगी जाहिर की थी। वहीं स्टालिन, केंद्र सरकार पर जबरन राज्य में इसे लागू करने का आरोप लगा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा था कि जब तक तमिलनाडु राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और तीन भाषा फार्मूले को स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक केंद्र सरकार की तरफ से उसे फंड नहीं दिया जाएगा।

स्टालिन ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार जबरन तमिलनाडु पर हिंदी थोपना चाह रही है। इसके कारण कई क्षेत्रीय भाषाएं पहले ही खत्म हो चुकी हैं, हम अपने यहां की भाषाएं खत्म नहीं होने देंगे।

राहुल गांधी का गुजरात दौराः 9 घंटे में करेंगे 5 बैठकें, आखिर क्या है कांग्रेस की रणनीति?

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2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले लगातार हार का झेल रही कांग्रेस वे एक बार फिर खुद को नए सिरे से तैयार किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के सीनियर लीडर राहुल गांधी दो दिन के दौरे पर गुजरात पहुंच गए हैं। वे 7 और 8 मार्च को यहां रहेंगे। इस दौरान वे अहमदाबाद में पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। दिलचस्प यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक हफ्ते में दूसरी बार आज गुजरात पहुंच रहे हैं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा के लिए जिला और राज्य स्तरीय पार्टी कार्यकर्ताओं और राज्य के नेताओं से मिलेंगे। सुबह अहमदाबाद पहुंचने के बाद यहां पूर्व पीसीसी अध्यक्षों और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करेंगेष इसके बाद राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक होगी। दोपहर में आराम के बाद वह 2 बजे फिर से जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठेंगे। 3 बजे से राहुल गांधी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के साथ चर्चा करने वाले हैं।

गुजरात में 8-9 अप्रैल को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक होने वाली है। 64 साल बाद ऐसी बैठक गुजरात में होने जा रही है। इससे पहले 1961 में भावनगर, सौराष्ट्र में बैठक की गई थी। इस तरह गुजरात में 64 साल बाद कांग्रेस का अधिवेशन होने जा रहा है। इसलिए अधिवेशन से पहले राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को गुजरात कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी की समीक्षा करेंगे। अधिवेशन से पहले राहुल गांधी का दो दिनी अहमदाबाद दौरा साफ संदेश देता है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी अभी से एक्टिव मोड में है।

राहुल का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर कांग्रेस नेतृत्व पर यह सवाल उठते रहते हैं कि वह राज्य को इग्नोर करता रहता है और भाजपा की लगातार सफलता की वजह यही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इवेंट पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस तीन दशक से भी ज्यादा समय से राज्य की सत्ता से दूर है। उसे भाजपा का काउंटर करने के लिए रणनीति पर काम करना होगा और मजबूत चुनौती देनी होगी।

तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं सुनी गुहार

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मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपी आतंकी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। राणा ने अपनी अर्जी में कहा था कि पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम होने के कारण भारत में उसे यातना दी जाएगी।

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तहव्वुर राणा को अमेरिकी सरकार ने भारत को सौंपने का फैसला लिया है। राणा इस फैसले रोक के लिए अदालत से स्टे चाहता था। तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पित किए जाने से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके प्रत्यर्पण पर इमरजेंसी स्टे लगा दिया जाए। तहव्वुर ने कहा था कि अगर मुझे भारत प्रत्यर्पित किया गया तो मुझे प्रताड़ित किया जाएगा और मैं वहां ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाऊंगा।

आतंकवादी तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में अपने बिगड़ते स्वास्थ्य का भी हवाला दिया है। उसने दावा किया है कि उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हैं। उसके पेट में बीमारी है, जिसके फटने का खतरा है। इसके साथ ही उसने बताया है कि उसे पार्किंसंस नाम की बीमारी है, जिसकी वजह से वो चीजों को भूल जाता है। इसके अलावा उसने कहा है कि उसे कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, कि उसके मूत्राशय में कैंसर होने का खतरा है। तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में आगे कहा है कि "उसे उस देश में नहीं भेजा जा सकता है, जहां उसे उसकी राष्ट्रीयता, उसके धर्म, उसकी संस्कृति और उसके मूल देश (पाकिस्तान) से दुश्मनी की वजह से उसे निशाना बनाया जाएगा।

राणा की याचिका खारिज होने के बाद अब उसके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अभी उसकी वापसी की तारीख निश्चित नहीं है। उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही वह भारत आ सकता है। भारत सरकार लंबे समय से राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रही थी। भारत आने के बाद उस पर मुकदमा चलाया जाएगा।

अमेरिकी यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में बोलते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया था कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे लोगों और मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक को भारत में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने को मंजूरी दे दी है। इसलिए भारत वापस जा रहा है।

26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकियों के एक समूह ने अरब सागर में समुद्री मार्ग के जरिए भारत की वित्तीय राजधानी में घुसने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था। लगभग 60 घंटे तक चले इस हमले में 166 लोग मारे गए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हमले के बाद आतंकी अजमल आमिर कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। नवंबर 2012 में अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।

एस जयशंकर की सुरक्षा में चूक की गूंज ब्रिटिश संसद में, विपक्षी सांसद बॉब ब्लैकमैन ने उठाया मुद्दा

#uk_mp_raises_alarm_over_s_jaishankar_london_security_breach

विदेश मंत्री एस जयशंकर की लंदन यात्रा के दौरान सुरक्षा में चूक का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा में चूक का मुद्दा ब्रिटिश पार्लियामेंट में भी गूंजा। ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने हाउस ऑफ कॉमन्स में इस मामले को उठाया। ब्लैकमैन ने इसे ‘खालिस्तानी गुंडों’ की ओर से हमला बताया। बता दें कि 6 मार्च यानी बुधवार की शाम को सेंट्रल लंदन में चैथम हाउस के बाहर खालुस्तानी समर्थक ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद जयशंकर के बाहर निकलते समय उनकी कार के सामलने आने की कोशिश की थी।

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न्यूज एंजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्लैकमैन ने कहा, कल भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पर उस समय हमला हुआ, जब वो एक सार्वजनिक जगह पर भारतीय लोगों को संबोधित करने के बाद निकल रहे थे। उन पर खालिस्तानी गुंडों ने हमला किया। यह जिनेवा कन्वेंशन के खिलाफ है। ऐसा लगता है कि पुलिस और सुरक्षा बल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा दोबारा ना हो।

विपक्षी सांसद के जवाब में सरकार की ओर हाउस ऑफ कॉमन्स की नेता लूसी पॉवेल ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, मुझे यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि भारतीय संसद के सदस्य पर लंदन में हमला हुआ। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और हम अपने देश में आने वाले नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं चाहते हैं। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय की ओर से भी इसकी निंदा की गई थी, जिसमें कहा गया, सार्वजनिक कार्यक्रमों को डराने, धमकाने या बाधित करने का कोई भी प्रयास पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

भारत ने जताई आपत्ति

इससे पहले भारत ने विदेश मंत्री की सुरक्षा में चूक पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। भारत ने कहा था कि वह उम्मीद करता है कि मेजबान सरकार ऐसे मामलों में अपने राजनयिक दायित्वों का पूरी तरह से पालन करेगी।भारत ने खालिस्तानियों को जिक्र करते हुए कहा था कि वह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग की निंदा करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने विदेश मंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान सुरक्षा में सेंध की फुटेज देखी है। हम अलगाववादियों और चरमपंथियों के इस छोटे समूह की भड़काऊ गतिविधियों की निंदा करते हैं।

पहले भी हुई थी घटना

खालिस्तानी तत्वों द्वारा सुरक्षा भंग करने की यह पहली घटना नहीं थी। इसके पहले मार्च 2023 में खालिस्तानी तत्वों ने लंदन में भारतीय उच्चायोग पर राष्ट्रीय ध्वज उतार दिया था, जिस पर भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया जताई गई थी।घटना के बाद, भारत ने दिल्ली में सबसे वरिष्ठ ब्रिटिश राजनयिक को तलब किया था। भारत ब्रिटेन से ब्रिटिश धरती से सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लंबे वक्त से कह रहा है।

मायावती के बाद ममता भी भतीजे को करेंगी “आउट”, पार्टी की बैठक से अभिषेक बनर्जी ने बनाई दूरी

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बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हाल में अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ठीक ऐसे हा हालात तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में भी दिख रही है। बीते कुछ दिनों से ममता दीदी से दूरी बना चुके उनके भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी पार्टी की एक अहम बैठक भी दूर दिखे। जिसके बाद से कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की बृहस्पतिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में हुई महत्वपूर्ण मतदाता सूची सत्यापन बैठक से अनुपस्थिति रहे। मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के समाधान के लिए पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की यह पहली बैठक थी। वैसे तो इस समिति में अभिषेक बनर्जी का नाम तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के तुरंत बाद दूसरे नंबर पर था लेकिन वह बैठक में नहीं पहुंचे।

बैठक से उनकी अनुपस्थिति के बाद पार्टी के भीतरी समीकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पार्टी में पहले भी शीर्ष स्तर पर तनाव के कयास लगाए जाते रहे हैं। ममता बनर्जी की अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी से बढ़ती दूरियों की चर्चा भी होती रही है।ऐसे में अभिषेक के बैठक से दूर रहने के बाद पार्टी में हलचल तेज होती दिख रही है।

तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बैठक में अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति को मामूली बताया तो कुछ नेताओं का कहना था कि ममता बनर्जी ने पहले ही स्पष्ट तौर पर कहा था कि चुनाव से संबंधित सभी कार्य पार्टी मुख्यालय में होंगे, कहीं और नहीं। ऐसे में अभिषेक बनर्जी की बैठक में अनुपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैसे पार्टी के कुछ सूत्रों का कहना है कि अभिषेक बनर्जी अपने विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में सेवाश्रय कल्याण शिविरों के अंतिम चरण की तैयारी में व्यस्त होने के कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले सके।

वहीं दूसरी ओर कुछ जानकारों का कहना है कि गुरुवार को अभिषेक बनर्जी कोलकाता में ही थे मगर इसके बावजूद उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। गुरुवार की बैठक के दौरान टीएमसी नेताओं को विभिन्न जिलों में वोटर लिस्ट की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी को दक्षिण कोलकाता का जिम्मा सौंपा गया है तो अभिषेक बनर्जी को दक्षिण 24 परगना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।