अमेरिका में भारतीय मूल की नर्स पर हमला, मरीज ने की क्रूरता, कॉलरबोन टूटी, चेहरे पर फ्रैक्चर

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अमेरिका के फ्लोरिडा में भारतीय मूल की एक नर्स पर बेरहमी से हमला किया गया। ये हमला मरीज ने किया है। जिसमें नर्स को गंभीर चोटें आई हैं और मुंह पर फ्रैक्चर भी हो गया। घटना फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित पाम्स वेस्ट अस्पताल की है। नर्स को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

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अस्पताल में जिस भारतीय मूल की नर्स पर हमला किया गया, उसका नाम लीलाम्मा लाल है। लीलाम्मा लाल पर 33 साल के एक व्यक्ति ने हमला किया, जिसका नाम स्टीफन है। जो फ्लोरिडा पाम्स वेस्ट साइड अस्पताल के साइकियाट्रिक वार्ड में भर्ती था। शख्स ने नर्स पर इस कदर हमला किया कि उसके चेहरे पर कई फ्रैक्चर हो गए, कॉलरबोन टूट गई और सिर से खून बहने लगा।

उनकी पत्नी मेगन स्कैंटलबेरी ने अदालत में बयान दिया कि हमले से पहले उनके पति का व्यवहार असामान्य था। लीलम्मा लाल उसी अस्पताल में नर्स हैं। हमले के कुछ देर बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला लगभग एक से दो मिनट तक चला और अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया।

जख्मी नर्स लीलाम्मा लाल की बेटी सिंडी जोसेफ ने अपनी मां की चोटों की गंभीरता बाताई और कहा, उनके सिर से सबड्यूरल और थोड़ा रक्तस्राव हो रहा है, उनके चेहरे का दाहिना हिस्सा पूरी तरह से फ्रैक्चर हो गया था। उन्हें ट्यूब लगाई गई थी और वे बेहोश थीं, उनके चेहरे पर बहुत ज्यादा चोट के निशान हैं और उनकी आंखों में सूजन भी है।मैं उन्हें पहचान नहीं पाई।

नर्स की स्थिति को लेकर कहा जा रहा है कि अब उनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। नर्स के मस्तिष्क में ब्लीडिंग हुई थी। ब्लीडिंग के कारण उन्हें वेस्ट पाम बीच के सेंट मैरी मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मिले एस जयशंकर, जानें क्या हुई बात

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विदेश मंत्री जयशंकर इन दिनों ब्रिटेन के आधिकारिक दौर पर हैं। यहां उन्होंने मंगलवार शाम को ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से उनके आवास पर मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाकात में द्विपक्षीय सहयोग तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष पर ब्रिटेन के दृष्टिकोण संबंधी मुद्दे रहे।

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एस जयशंकर ने अपनी इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। तस्वीरों में दिख रहा था कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री खुद आगे बढ़कर जयशंकर का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि हमारे द्विपक्षीय, आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने और एक दूसरे के यहां लोगों की आवाजाही बढ़ाने पर चर्चा हुई। पीएम स्टार्मर ने यूक्रेन संघर्ष पर ब्रिटेन के नजरिए को भी साझा किया।

इस मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत हुई। जयशंकर ने भारत की स्थिति को स्पष्ट किया कि भारत किसी गुट में शामिल नहीं होगा और हमेशा शांति का पक्षधर रहेगा। सूत्रों के अनुसार भारत ने ये साफ कर दिया है कि वह अपने फैसले खुद लेता है और अपनी नीति पर चलता है।

इससे पहले, उन्होंने ब्रिटेन और आयरलैंड को कवर करते हुए अपनी छह दिवसीय यात्रा के पहले दिन मंत्रिस्तरीय वार्ता की। इस क्रम में ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ बैठक के दौरान उन्होंने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ता की प्रगति पर चर्चा की। जयशंकर ने रेनॉल्ड्स के साथ अपनी बैठक के बाद एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हमने एफटीए वार्ता की प्रगति पर चर्चा की।

जयशंकर ने ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेटे कूपर से मुलाकात की और लोगों के बीच आदान-प्रदान, तस्करी और उग्रवाद से निपटने के संयुक्त प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने व्यापार विभाग के सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स से भी मुलाकात की और एफटीए वार्ता में प्रगति पर चर्चा की।

चीन ने फिर बढ़ाया अपना रक्षा बजट, भारत से तीन गुना अधिक

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पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा हुआ है। एक तरफ इजराइल-हमास युद्ध के मैदान में डटे हुए हैं। वहीं, रूस-यूक्रेन जंग लड़ रहे है, दूसरी तरफ अमेरिका ने यूक्रेन के मुद्दे पर यूरोपीय देशों को नाराज कर अलग गुट में खड़ा कर दिया। इस बीच चीन खुद को ताकतवर बनाने की होड़ में लगा हुआ है। चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ाता जा रहा है। इसी के तहत चीन ने एक बार फिर अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करने का एलान किया है। चीन ने बुधवार को अपने रक्षा बजट का एलान किया, जिसमें चीन ने रक्षा खर्च के लिए 249 अरब डॉलर का बजट रखा है। यह पिछले साल के बजट की तुलना में 7.2 प्रतिशत ज्यादा है।

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खर्च का बचाव करते हुए नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता लू किनजियान ने कहा कि शांति की रक्षा के लिए ताकत जरूरी है। उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं के साथ, चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास से जुड़े हितों की बेहतर ढंग से रक्षा कर सकता है, एक प्रमुख देश के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकता है और विश्व शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकता है। उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में चीन का रक्षा व्यय वैश्विक औसत से कम है। वर्ष 2016 से चीन के वार्षिक रक्षा खर्च में लगातार नौ वर्षों से एकल अंक में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि चीन का रक्षा खर्च जीडीपी के हिस्से के रूप में पिछले कई सालों से डेढ़ फीसदी से कम रहा है।

चीन अपने सभी सशस्त्र बलों का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण करने का काम जारी रखे हुए है। चीन के रक्षा बजट के आंकड़ों को उसके द्वारा विमानवाहक पोतों के निर्माण, उन्नत नौसैनिक जहाजों और आधुनिक स्टील्थ विमानों के तेजी से निर्माण सहित बड़े पैमाने पर सैन्य आधुनिकीकरण के मद्देनजर संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। बीते साल भी चीन ने अपने रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि की थी। पिछले साल चीन का रक्षा बजट 1.67 खरब युआन या कहें 232 अरब डॉलर था।

अमेरिका को चुनौती देने की तैयारी में ड्रैगन

चीन, अमेरिका को हर मोर्चे पर चुनौती देने की तैयारी कर रहा है और इसी के तहत वह अपनी सेना को भी मजबूत करने में जुटा है। हालांकि अभी अमेरिका की तुलना में चीन का बजट काफी कम है, लेकिन जिस तेजी से चीन अपने सैन्य खर्च को बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए जल्द ही चीन के भी अमेरिका के नजदीक पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिका का सैन्य बजट 895 अरब डॉलर है। इस मामले में कोई भी देश अमेरिका के आसपास भी नहीं फटकता।

भारत के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा बजट

एक तरफ चीन अमेरिका से मुकाबला कर रहा है, तो दूसरी तरफ उसकी नजर भारत पर भी है। भारत के साथ चीन का सीमा विवाद है। ऐसे में भारत के मुकाबले चीन का सैन्य बजट तीन गुना से भी ज्यादा होना भारत के लिए बड़ा तनाव देने वाला है। बीते दिनों पेश किए गए बजट में भारत ने अपने सैन्य खर्च के लिए 75 अरब डॉलर आवंटित किए थे। जबकि चीन का यह खर्च 249 अरब डॉलर है। इससे दोनों देशों के बीच के अंतर को साफ समझा जा सकता है। सैन्य बजट के मामले में भारत चौथे स्थान पर है।

ट्रंप ने फिर लिया भारत का नाम, बोले-जो जितना टैक्स लगाएगा, उस पर वैसे ही टैरिफ लगाएंगे, 2 अप्रैल तय की डेडलाइन

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को यूएस कांग्रेस को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने टैरिफ को लेकर एक बार फिर भारत का नाम लिया। वहीं, चीन को भी घेरा।इस दौरान उन्होंने अपने 44 दिनों के कार्यकाल की उपलब्धिया गिनाई। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को अमेरिका का सबसे खराब राष्ट्रपति करार दिया।

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डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए भारत, चीन, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों को अमेरिकी आयात पर उच्च शुल्क लगाने वाले देशों में रखा। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश हम पर जितना टैरिफ लगाएगा, हम उसके खिलाफ उतना ही टैरिफ लगाने जा रहे हैं। हमने इसके लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है। ट्रंप ने कहा कि शुल्क अमेरिका को फिर से अमीर और महान बनाने के लिए हैं।

भारत हम पर ज्यादा टैरिफ चार्ज करता है-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है। अब उन अन्य देशों के खिलाफ उनके हथियार का ही इस्तेमाल करने की हमारी बारी है। औसतन यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत... और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत अधिक टैरिफ वसूलते हैं। उनकी तुलना में हम उनसे कम टैरिफ लेते हैं। यह बहुत अनुचित है। उन्होंने भारत का नाम लेकर कहा कि भारत हम पर ज्यादा टैरिफ चार्ज करता है। वह कई चीजों पर 100 फीसदी से अधिक टैरिफ चार्ज करता है। चीन हमसे दोगुना टैरिफ वसूलता है, दक्षिण कोरिया चार गुना टैरिफ लगाता है।

2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ लागू होंगे-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 2 अप्रैल से जो देश जितना टैरिफ लगाएगा हम उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं चाहता था एक अप्रैल से करूं, लेकिन एक अप्रैल से नहीं किया क्यों एक अप्रैल ‘अप्रैल फूल’ डे है। हम नई ट्रेड पॉलिसी लाएंगे, जो अमेरिका के किसानों के लिए शानदार होगी। मैं किसानों से प्यार करता हूं। गंदा और घटिया विदेशी सामान अमेरिका में आ रहा है, जो अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी एल्युमिनियम, कॉपर, लंबर और स्टील पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। यह सिर्फ अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए नहीं हैं, ये हमारे देश की आत्मा की रक्षा करने के लिए हैं।

राहुल गांधी ने सरकार को लिखा पत्र, उठाया एनसीएससी-एनसीबीसी में खाली पदों का मुद्दा


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#rahul_gandhi_letter_to_bjp_government 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) में रिक्त पदों का मुद्दा उठाया है। इसको लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार को एक पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इन संस्थाओं को उनके सांविधानिक कार्यों को पूरा करन के लिए जल्द से जल्द इन रिक्तियों को भरा जाए। 

इस पत्र में राहुल गांधी ने कहा है कि पूरे देश में हजारों दलित-पिछड़े न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। हर जगह जातिगत जनगणना की मांग गूंज रही है। ऐसे वक्त में भाजपा सरकार द्वारा जानबूझकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने वाली संवैधानिक संस्थाओं में अहम पदों को खाली रखना उनकी दलित-पिछड़ा विरोधी मानसिकता को दिखाता है। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वो एनसीएससी और एनसीबीसी में रिक्तियों को जल्द से जल्द भरकर संस्थानों को उनके संवैधानिक जनादेश को पूरा करने के लिए सशक्त बनाए।

कांग्रेस नेता ने एक मार्च को कुमार को लिखे पत्र में बताया कि 3 मार्च और 2024 को एनसीएससी के सातवें अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति की गई, लेकिन उपाध्यक्ष का पद करीब एक साल से खाली पड़ी है। उन्होंने कहा कि दलित भाई-बहनों के अधिकारों की रक्षा करने में एनसीएससी की अहम भूमिका है और हजारों लोग न्याय के लिए इस आयोग के पास जाते हैं। उन्होंने कहा, आयोग ने दलितों के सामाजिक और आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले मुद्दों को सक्रियता से उठाया है, जिनमें सार्वजनिक रोजगार, शिक्षा तक पहुंच और अत्याचारों की रोकथाम शामिल हैं। 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस आयोग को कमजोर करने की जानबूझकर कोशिश सरकार के दलित विरोधी मानसिकता को उजागर करती है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में एनसीबीसी उपाध्यक्ष के पद के बारे में भी चिंता व्यक्त की, जो तीन साल से खाली पड़ा है। उन्होंने कहा कि एनसीबीसी वर्तमान में केवल अध्यक्ष और एक सदस्य के साथ कार्य कर रहा है। 1993 में अपनी स्थापना के बाद से, एनसीबीसी में हमेशा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष/सदस्य सचिव के अलावा कम से कम तीन सदस्य होते थे। इस महत्वपूर्ण समय में जब देशभर में जाति जनगणना की मांग तेज हो रही है, इस पद का रिक्त रहना अत्यंत चौंकाने वाला है।

बोफोर्स घोटाले से बचने के लिए राजीव गांधी को अफसरों ने सुझाया था तरीका, हुई थी सीक्रेट मीटिंग


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#boforsscamsecretmeetingsforsaverajivgandhiexposed 

1987 में भारत के चर्चित बोफोर्स घोटाले को लेकर अहम खुलासा हुआ है। बोफोर्स कांड को लेकर एक किताब में दावा किया गया है कि इस मामले से राजीव गांधी को बचाने के लिए वरिष्ठ भारतीय नौकरशाहों और बोफोर्स अधिकारियों के बीच गुप्त बैठकें हुईं। खोजी पत्रकार चित्रा सुब्रमण्यम की नई किताब में दावा किया गया है कि भारतीय नौकरशाहों ने स्वीडिश कंपनी बोफोर्स के अधिकारियों को यह बताया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को घोटाले से मुक्त करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।

सुब्रमण्यम की यह किताब ‘बोफोर्सगेट’ स्वीडिश पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम (जिन्हें किताब में ‘स्टिंग’ के रूप में दर्शाया गया है) से मिली जानकारियों पर आधारित है। लिंडस्ट्रोम स्वीडन में बोफोर्स मामले की जांच कर रहे थे। उन्होंने ही पत्रकार को स्टॉकहोम में 22 अगस्त 1989 को कुछ दस्तावेज सौंपे थे, जिसमें बोफोर्स और भारतीय अधिकारियों के बीच हुई बैठक का 15 पृष्ठों का एक ‘सहमति-आधारित सारांश’ शामिल था। भारत सरकार ने स्वीडन की तोप निर्माता कंपनी बोफोर्स के साथ 1,437 करोड़ रुपये का सौदा किया था। इस सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत दिए जाने के आरोप लगे थे।

सुब्रमण्यम ने यूरोप से इस मामले को कवर किया था। उनकी किताब 320 पृष्ठों की है और इसमें उनकी जांच के बारे में विस्तार से बताया गया है। किताब के अनुसार, 22 अगस्त 1989 को स्टिंग ने सुब्रमण्यम को स्टॉकहोम में कुछ दस्तावेज दिए। इन दस्तावेजों में बोफोर्स और भारतीय अधिकारियों के बीच हुई बैठकों का 15 पृष्ठों का 'सहमति से तैयार सारांश' भी शामिल था। इस सारांश ने ही कथित तौर पर मामले को दबाने का आधार तैयार किया।

गुप्त बैठक की तारीखों का जिक्र

सुब्रमण्यम की किताब इसी महीने की 17 तारीख को बाजार में आ रही है। किताब में लिखा है, 'यह 15 पृष्ठों का एक सहमति-आधारित सारांश था, जिसमें बताया गया था कि भ्रष्टाचार को कैसे छिपाया जाए। मेरी जांच में प्रगति से कैसे निपटा जाए और सबसे बढ़कर, प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सभी दोषों से कैसे मुक्त किया जाए।' किताब के मुताबिक, ये बैठकें रक्षा मंत्रालय में 15, 16 और 17 सितंबर 1987 को हुई थीं, जो रेडियो पर खुलासे के ठीक पांच महीने बाद की बात है।

कौन-कौन था बैठक में शामिल

चित्रा सुब्रमण्यम लिखती हैं कि इन गुप्त बैठकों के लिए बोफोर्स अधिकारियों को दिल्ली के सरदार पटेल मार्ग स्थित एक उच्च सुरक्षा वाले पांच सितारा होटल में ठहराया गया था। उनके ठहरने की व्यवस्था इस तरह की गई थी कि कोई बाहरी व्यक्ति उनसे संपर्क न कर सके। इस बैठक में बोफोर्स अधिकारियों का नेतृत्व पेर ओवे मोरबर्ग और लार्स गोहलिन कर रहे थे, जबकि भारतीय पक्ष से रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एसके भटनागर, पीके कार्था, गोपी अरोड़ा और एनएन वोहरा शामिल थे। इन्हें तत्कालीन संयुक्त सचिव के बनर्जी ने सहयोग दिया था।

किसी को 'मियां-तियां' या पाकिस्तानी कहना अपराध नहीं', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी


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#calling_someone_miyan_tian_and_pakistani_is_not_crime_supreme_court 

सुप्रीम कोर्ट ने 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहने के आरोपी को राहत दी है। कोर्ट ने धार्मिक भावना आहत करने के आरोप में दर्ज केस निरस्त कर दिया है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने इस तरह की बात कहने को असभ्यता कहा है, लेकिन उसके चलते मुकदमा चलाने को सही नहीं माना।

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 298 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना) के तहत आरोप से एक व्यक्ति को मुक्त कर दिया।कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता पर उसे 'मियां-तियां' और 'पाकिस्तानी' कहकर उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि निस्संदेह, दिए गए कथन गलत है। हालाँकि, इससे याचिकाकर्ता की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुचती है।

जस्टिस बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच झारखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामला उप-विभागीय कार्यालय, चास में एक उर्दू अनुवादक और कार्यवाहक क्लर्क (सूचना का अधिकार) की तरफ से दर्ज एफआईआर से जुड़ा था।

यह मामला उस समय शुरू हुआ जब एक सरकारी कर्मचारी, जो कि उर्दू अनुवादक और सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कार्यरत था, ने एक आदेश के तहत हरी नंदन सिंह को कुछ दस्तावेज सौंपे। आरोप के मुताबिक सिंह ने दस्तावेज स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई और इसके बाद कर्मचारी के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया। यह भी कहा गया कि उन्होंने सरकारी कर्मचारी को 'पाकिस्तानी' कहकर संबोधित किया और उसे डराने का प्रयास किया।

इस घटना के बाद सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। हरी नंदन सिंह ने इस मामले में पहले सेशन कोर्ट और फिर राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दोनों अदालतों ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। आखिर में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस बीवी नागरत्ना और सतिश चंद्र शर्मा की बेंच ने फैसला सुनाया कि इस मामले में धारा 298 लागू नहीं होती क्योंकि आरोपी की टिप्पणियां भले ही अनुचित थीं, लेकिन वे किसी विशेष धर्म के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से नहीं कही गई थीं।

इजराइल ने भारत से की हमास को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग, दिलाई पीओके वाली घटना की याद


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इजरायल ने हमास से चल रही जंग के बीच भारत से बड़ी अपील की है। इजराइल चाहता है कि भारत हमास को आतंकी संगठन घोषित करे। इसके लिए इजराइल ने हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीर एकजुटता दिवस के मौके पर हमास की मौजूदगी का हवाला देते हुए पर चिंता व्यक्त की है।

5 फरवरी को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में एक कार्यक्रम हुआ, जिसका नाम था—"कश्मीर सॉलिडेरिटी और हमास ऑपरेशन ‘अल अक्सा फ्लड’ कॉन्फ्रेंस”। इस इवेंट में हमास के नेता डॉ खालिद अल-कदूमी शामिल हुए। चौंकाने वाली बात यह थी कि इस मंच पर उनके साथ पाकिस्तानी आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नेता भी मौजूद थे। यह पहला मौका था जब हमास के किसी बड़े नेता ने पीओके में सार्वजनिक रूप से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इस इवेंट में आतंकियों ने न केवल भारत विरोधी भाषण दिए बल्कि हमास के झंडे लहराते हुए मोटरसाइकिल और घोड़ों पर सवार होकर शक्ति प्रदर्शन भी किया।

बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले को लेकर भी भारत ने कड़ी निंदा व्यक्त की थी, हालांकि भारत की ओर से अबतक हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में आधिकारिक रूप से बैन नहीं लगाया गया है। यूरोपीय यूनियन (ईयू) और अमेरिका समेत कई देश हमास को पहले ही आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं। भारतीय संसद में भी भारत के हमास को बैन करने को लेकर कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। भारत भले ही आत्मरक्षा के लिए इजरायल का आतंकवाद के खिलाफ एक्शन को समर्थन देता है, लेकिन उसने फिलिस्तीन के साथ भी अपने संबंध बनाए रखे हैं। भारत यूएन में फिलिस्तीन की सदस्यता को समर्थन देता है।

जेलेंस्की के “झुकने” के बाद भी कम नहीं हुआ ट्रंप का “गुस्सा”, अमेरिका ने यूक्रेन की सैन्य मदद पर लगाई रोक

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पर बुरी तरह भड़के हुए है। बीते दिनों राष्ट्रपति ट्रंप और जेलेंस्की के बीच नोंकझोंक के बाद स्थिति और बिगड़ गई। इस तकरार के बाद अमेरिका ने तुरंत प्रभाव से यूक्रेन की सैन्य सहायता रोक दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली सभी सैन्य सहायता को रोकने का आदेश दिया है।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने फैसला किया है कि जब तक यूक्रेन के नेता शांति के लिए साफ नीयत नहीं दिखाते, तब तक सभी सैन्य सहायता रोकी जाएगी। इसका मतलब है कि जो भी अमेरिकी सैन्य उपकरण यूक्रेन को भेजे जाने थे, उन्हें फिलहाल रोक दिया गया है। इसमें वे हथियार भी शामिल हैं जो पहले से जहाजों या विमानों में लोड हो चुके थे या पोलैंड के ट्रांजिट क्षेत्रों में थे।

ब्लूमबर्ग न्यूज ने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप तब तक सभी सहायता रोक देंगे जब तक कि कीव शांति के लिए बात करने के लिए प्रतिबद्धता न दिखाए। ट्रंप ने ये आदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ज़ेलेंस्की पर आरोप लगाने के कुछ घंटों बाद दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की जब तक अमेरिका का समर्थन उनके साथ है शांति नहीं चाहते हैं।

बताया जा रहा है कि ट्रंप रूस के साथ चल रहे युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि जेलेंस्की भी इसमें उनका साथ दें। मगर जेलेंस्की ने युद्ध समाप्त करने के लिए सुरक्षा की गारंटी मांग रहे हैं। इससे पहले जब जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ युद्ध समाप्ति का समझौता करने का समय अभी नहीं है। तो ट्रंप ने इसे यूक्रेनी नेता का सबसे खराब बयान बताया था। ट्रंप ने कहा था कि जेलेंस्की के इस बयान को अमेरिका अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा।

बता दें कि शुक्रवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में जेलेंस्की और ट्रंप की मीटिंग के दौरान विवाद हुआ था। जेलेंस्की वहां एक खनिज समझौते पर हस्ताक्षर करने आए थे, लेकिन जब उन्होंने अमेरिका से भविष्य में रूस के हमले के खिलाफ सुरक्षा गारंटी मांगी। जिसके बाद विवाद बढ़ता गया और यह सौदा रद्द हो गया। बैठक के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ज़लेंस्की को 'अकृतज्ञ' कहा, जबकि दूसरी तरफ ट्रंप ने उन पर 'तीसरे विश्व युद्ध के लिए आग भड़काने का आरोप लगाया। डोनाल्ड ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई तीखी बहस सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

महाराष्ट्रःधनंजय मुंडे ने छोड़ा मंत्री पद, सरपंच हत्याकांड के आरोपी से जुड़ा था नाम

#dhananjay_munde_resignation

महाराष्ट्र के मंत्री धनंजय मुंडे ने मंगलवार को महाराष्ट्र कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। बीड़ में हुए सरपंच हत्याकांड में घिरे एनसीपी नेता धनंजय मुंडे का इस्तीफा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वीकार कर लिया है।खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय संभाल रहे मुंडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर यह पद छोड़ा है। अपने एक करीबी सहयोगी को दिसंबर में बीड जिले में एक सरपंच की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किए जाने के बाद से विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था।

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धनंजय मुंडे के इस्तीफे की जानकारी खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया के साथ बात करते हुए दी है। फडणवीस ने कहा, महाराष्ट्र के मंत्री धनंजय मुंडे ने आज अपना इस्तीफा दे दिया है। मैंने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और आगे की कार्रवाई के लिए इसे राज्यपाल के पास भेज दिया है।

हत्याकांड के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल

धनंजय मुंडे के बीमार होने के कारण उनके पीएम प्रशांत जोशी ने सीएम को उनका इस्तीफा दिया। ये इस्तीफा तब हुआ है जब सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। मामले में देर रात डिप्टी सीएम अजित पवार के घर देवगिरी पर एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में धनंजय मुंडे भी मौजूद थे। इसी दौरान तय हो चुका था कि मुंडे अब मंत्री पद से इस्तीफा देंगे।

फोटो वायरल होने के बाद मचा बवाल

इस हत्याकांड की कुछ चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं है। इन तस्वीरों में साफ दिखायी दे रहा है कि सरपंच को कैसे पहले निर्वस्त्र किया गया। फिर उसे बेरहमी से पाइप और अन्य हत्यारों से पीटा गया। एक तस्वीर में दिख रहा है कि सरपंच देशमुख अधमरी हालत में पड़े हुए, तब उन पर आरोपी सुदर्शन घुले ने पेशाब भी किया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी वाल्मीकी कराड एनसीपी नेता और मंत्री धनंजय मुंडे का खास आदमी बोला जाता है। बीड़ में एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर यह हत्या हुई थी, जिसके बाद धनंजय मुंडे पर भी सवाल उठने लगे।

धनंजय मुंडे बीड जिले के परली से एनसीपी के विधायक हैं। इससे पहले वह बीड के संरक्षक मंत्री थे। वर्तमान में एनसीपी प्रमुख अजित पवार पुणे के साथ-साथ बीड जिले के संरक्षक मंत्री हैं। बीड के मासाजोग गांव के सरपंच देशमुख को पिछले साल नौ दिसंबर को कथित तौर पर जिले में एक ऊर्जा कंपनी को निशाना बनाकर की जा रही जबरन वसूली के प्रयास को रोकने की कोशिश करने पर अगवा कर लिया गया और प्रताड़ित किया गया था, इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई।