आरजी कर प्रशिक्षु डॉक्टर के पिता संजय रॉय पर कोलकाता कोर्ट के फैसले के बाद रो पड़े

शनिवार को सियालदह कोर्ट में एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब कोलकाता बलात्कार और हत्या मामले में पीड़िता के पिता मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी पाए जाने पर रो पड़े। यह फैसला उस भयावह घटना के पांच महीने से अधिक समय बाद आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

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कोलकाता पुलिस के पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 के तहत बलात्कार और धारा 66 और 103 (1) के तहत हत्या का दोषी ठहराया गया था। 31 वर्षीय पीड़िता डॉक्टर पिछले साल 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की तीसरी मंजिल पर आंशिक रूप से कपड़े पहने और बेजान अवस्था में पाई गई थी। संजय रॉय को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।

जब अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने फैसला सुनाया, तो भावुक होकर पीड़िता के पिता ने न्याय प्रणाली में अपना विश्वास बनाए रखने के लिए न्यायाधीश को धन्यवाद दिया। सजा सोमवार को सुनाई जाएगी। संजय रॉय ने न्यायाधीश से अपील की कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अदालत से कहा, "मैंने ऐसा नहीं किया है। जिन्होंने ऐसा किया है, उन्हें जाने दिया जा रहा है। मुझे झूठा फंसाया गया है।" मैं हमेशा अपने गले में रुद्राक्ष की चेन पहनता हूं। अगर मैंने अपराध किया होता, तो मेरी चेन मौके पर ही टूट जाती। मैं यह अपराध नहीं कर सकता," आरोपी संजय रॉय ने कहा।

हालांकि, न्यायाधीश दास ने कहा कि आरोपी की अगली सुनवाई सोमवार को होगी। "सोमवार को आपकी सुनवाई होगी। अब मैं आपको न्यायिक हिरासत में भेज रहा हूं। सोमवार को आपकी सजा का ऐलान किया जाएगा। मैंने सुनवाई के लिए 12:30 बजे का समय तय किया है। उसके बाद सजा का ऐलान करूंगा," उन्होंने कहा।"

पिछले साल नवंबर में सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोपपत्र में आरजी कार के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष और डॉ. आशीष कुमार पांडे, बिप्लब सिंह, सुमन हाजरा और अफसर अली खान समेत अन्य लोगों को वित्तीय कदाचार में शामिल होने के लिए नामजद किया गया है। यह जांच कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुरू की गई थी। भ्रष्टाचार के मामले के अलावा, संदीप घोष से हत्या के मामले में भी पूछताछ की गई। जांच के हिस्से के रूप में, सीबीआई ने उन पर पॉलीग्राफ परीक्षण किया। आरोपपत्र दाखिल करने में देरी के कारण अभिजीत मंडल और संदीप घोष समेत आरोपियों को जमानत मिल गई।

इससे पहले शनिवार को मृतक डॉक्टर के पिता ने कहा कि जो भी सजा उचित होगी, वह अदालत तय करेगी। हालांकि, पिता ने कहा कि जो भी सजा उचित होगी, वह अदालत तय करेगी। “सीबीआई ने इस मामले में कुछ नहीं किया है। यहां संतुष्टि का कोई सवाल ही नहीं है। हमने (कलकत्ता) उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कई सवाल उठाए हैं। हमने अदालत से ही जवाब मांगा है। हमने सीबीआई से जवाब नहीं मांगा, लेकिन अदालत ने सारी जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी,” एएनआई ने पीड़िता के पिता के हवाले से कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक उन्हें मामले में न्याय नहीं मिल जाता, तब तक परिवार अदालत का दरवाजा खटखटाता रहेगा।

"सिर्फ एक नहीं, बल्कि डीएनए रिपोर्ट में चार लड़के और एक लड़की की मौजूदगी दिखाई गई है। जब आरोपियों को सजा मिलेगी, तब हमें थोड़ी राहत महसूस होगी। जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, हम अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे और देश के लोगों का समर्थन भी मांगेंगे," पिता ने कहा। उन्होंने कहा, "दो महीने में अदालत ने सभी सबूतों की समीक्षा की और जो भी सजा उचित होगी, वह अदालत तय करेगी।"

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस, तो बीजेपी ने बाता डाला 'नई मुस्लिम लीग'

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कांग्रेस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को लेकर एक याचिका दायर की है।कांग्रेस ने याचिका में एक्ट 1991 का बचाव करते हुए कहा कि ये कानून भारत में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए जरूरी है। भाजपा ने कांग्रेस के ज़रिए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट जाने को 'हिंदुओं के खिलाफ खुले युद्ध' का ऐलान करार दिया है। साथ ही यह भी कहा कि अब कांग्रेस "नई मुस्लिम लीग" बन चुकी है।

बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीया ने इसे हिंदुओं के खिलाफ "खुला युद्ध" और कांग्रेस को "नई मुस्लिम लीग" करार दिया। उनका कहना था कि कांग्रेस ने इस कानून का समर्थन करके हिंदुओं को उनके ऐतिहासिक अन्यायों के खिलाफ कानूनी उपायों का अधिकार छीनने की कोशिश की है।भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर कहा,'कांग्रेस ने ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए कानूनी उपायों के हिंदुओं के मौलिक संवैधानिक अधिकार को अस्वीकार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मालवीय ने आगे कहा कि कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से 'धर्मनिरपेक्षता की रक्षा' के बहाने पूजा स्थल अधिनियम 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया है।

अमित मालवीय ने कहा,'कांग्रेस ने धार्मिक बुनियाद पर भारत के विभाजन को मंजूरी दी। इसके बाद, इसने वक्फ कानून पेश किया, जिससे मुसलमानों को अपनी मर्जी से संपत्तियों पर दावा करने और देश भर में मिनी-पाकिस्तान स्थापित करने का हक मिल गया। बाद में इसने पूजा स्थल अधिनियम लागू किया, जिससे हिंदुओं को अपने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को वापस लेने का अधिकार प्रभावी रूप से नकार दिया गया। अब, कांग्रेस ने हिंदुओं के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है।

बीजेपी ने इस कानून का विरोध पहले भी किया था जब नरसिंह राव सरकार ने राम मंदिर निर्माण के आंदोलन के दौरान इसे लागू किया था. ये कानून यह सुनिश्चित करता था कि 15 अगस्त 1947 के बाद से सभी पूजा स्थलों की स्थिति को जस का तस रखा जाए सिवाय अयोध्या के विवादित स्थल के इस कानून का उद्देश्य संघ परिवार की ओर से वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा के शाहि ईदगाह पर कब्जा करने के प्रयासों को रोकना था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की 3 मेंबर वाली बेंच ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (विशेष प्रावधानों) 1991 की कुछ धाराओं की वैधता पर दाखिल याचिकाओं पर 12 दिसंबर को सुनवाई की थी। बेंच ने कहा था, हम इस कानून के दायरे, उसकी शक्तियों और ढांचे को जांच रहे हैं। ऐसे में यही उचित होगा कि बाकी सभी अदालतें अपने हाथ रोक लें। सुनवाई के दौरान सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा- हमारे सामने 2 मामले हैं, मथुरा की शाही ईदगाह और वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद। तभी अदालत को बताया गया कि देश में ऐसे 18 से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें से 10 मस्जिदों से जुड़े हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिकाओं पर 4 हफ्ते में अपना पक्ष रखने को कहा। सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा- जब तक केंद्र जवाब नहीं दाखिल करता है हम सुनवाई नहीं कर सकते। हमारे अगले आदेश तक ऐसा कोई नया केस दाखिल ना किया जाए।

डॉक्‍टर बिटिया का कातिल दोषी करार, आरजी कर मामले में न्यायालय ने सुनाया फैसला

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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में आरोपी संजय रॉय दोषी करार दिए गए हैं। सियालदह कोर्ट की विशेष अदालत ने आज फैसला सुनाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास की अदालत में मुकदमा शुरू होने के 57 दिन बाद फैसला सुनाया गया। 11 नवंबर को इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। इस मामले में अभी सजा पर फैसला होना अभी बाकी है।

पिछले साल इस केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। दिल्‍ली से मुंबई, चेन्‍नई से बेंगलुरु, देश का ऐसा कोई हिस्‍सा नहीं था घटना के विरोध में डॉक्‍टर हड़ताल पर ना गए हों। मामले की गंभीरत को देखते हुए बाद में जांच को कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता सरकार की पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया था। इस केस में दो महीने से भी ज्‍यादा वक्‍त तक ट्रायल कोर्ट में बहस हुई। जिसके बाद सेशन कोर्ट के जज ने आरोपी संजय रॉय के खिलाफ अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया।

पीड़िता के पिता ने सीएम पर साधा निशाना

अदालत के फैसले से पहले पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ने खुद कहा था कि वह रात के दो बजे तक जागकर मॉनिटर कर रही थीं। मैं जानना चाहता हूं कि उनका इसमें क्या हित था। सिर्फ मुख्य आरोपी ही नहीं, सभी दोषी सामने आएंगे। उन्होंने कहा, आरोपियों को सजा मिलने पर हमें कुछ राहत मिलेगी। जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हम अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे। हम देश के लोगों से भी समर्थन मागेंगे। उन्होंने आगे कहा, जो भी उचित सजा होगी वह अदालत तय करेगी।

सीबीआई पर भी भड़के

सीबीआई पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, इस मामले में सीबीआई ने कुछ नहीं किया। यहां संतुष्टि का कोई सवाल ही नहीं है। हमने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कई सवाल उठाए। हमने कोर्ट से इसका जवाब मांगा है। हमने सीबीआई से जवाब नहीं मांगा, लेकिन कोर्ट ने सारी जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी।

क्या है पूरा मामला?

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना नौ अगस्त की है। मृतक मेडिकल कॉलेज में चेस्ट मेडिसिन विभाग की स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा और प्रशिक्षु डॉक्टर थीं। आठ अगस्त को अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद रात के 12 बजे उसने अपने दोस्तों के साथ डिनर किया। इसके बाद से महिला डॉक्टर का कोई पता नहीं चला। घटना के दूसरे दिन सुबह उस वक्त मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया जब चौथी मंजिल के सेमिनार हॉल से अर्ध नग्न अवस्था में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया गया। पोस्टमॉर्टम की शुरुआती रिपोर्ट से पता चला है कि महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। जूनियर महिला डॉक्टर का शव गद्दे पर पड़ा हुआ था और गद्दे पर खून के धब्बे मिले। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक महिला डॉक्टर के मुंह और दोनों आंखों पर था। गुप्तांगों पर खून के निशान और चेहरे पर नाखून के निशान पाए गए। होठ, गर्दन, पेट, बाएं टखने और दाहिने हाथ की उंगली पर चोट के निशान थे।

अब किराएदारों पर भी केजरीवाल मेहरबान, फ्री बिजली और पानी देने की घोषणा

#kejriwalannouncedtenantswillbegivenfreeelectricityand_water

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सियासी सरगर्मी तेज है और पार्टियों के बड़े-बड़े वादे चर्चा का केंद्र बन चुके हैं। इस बार किरायेदारों को फ्री बिजली और पानी देने का मुद्दा खासा सुर्खियां बटोर रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है, तो किरायेदारों को भी मुफ्त बिजली-पानी की सुविधा दी जाएगी। दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आप सरकार दिल्ली में किराएदारों को फ्री बिजली और पानी देगी।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली के लाखों किराएदारों को भी बिजली और पानी मुफ्त में मिलेगा। केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव के बाद हमारी सरकार बनने के बाद ऐसा सिस्टम बनाएंगे कि किराएदारों को भी फ्री बिजली और पानी मिले।

केजीरावाल ने कहा कि दिल्ली में ज्यादातर किराए पर पुर्वांचल के लोग रहते हैं। एक एक मकान में 100/100 किराएदार बहुत गरीबी में रहते उनको इन चीजों का फायदा मिलना चाहिए। मैं दिल्ली में जगह जगह घूम रहा हूं लोग कह रहे हैं कि हमें आपके मोहल्ला क्लिनिक, स्कूल, अस्पताल सभी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है लेकिन मुफ्त बिजली और पानी का नहीं।

किरायेदारों के लिए बड़ा मुद्दा

दिल्ली में लगभग 40% आबादी किरायेदारों के रूप में रहती है। ऐसे में यह घोषणा चुनाव का गेम-चेंजर साबित हो सकती है। किरायेदारों का कहना है कि अगर यह वादा सच में लागू होता है, तो इससे उनके मासिक खर्च में काफी कमी आएगी।

कई बड़े वादे कर चुकी है आप

बता दें कि केजरीवाल इससे पहले दिल्ली की जनता से कई वादे कर चुके हैं। महिला सम्मान योजना के तहत महिलाओं के लिए पहले हर महीने 2100 रुपये देने का वादा किया है। महिलाओं को डीटीसी की बसों में मुफ्त यात्रा जारी रखने की बात भी कही गई है। आम आदमी पार्टी ने बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का एलान किया है। इसके तहत 60 वर्षों के ऊपर के सभी बुजुर्गों को निजी और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा का एलान। इतना ही नहीं बुजुर्गों के लिए अलग से पेंशन की व्यवस्था करने का भी वादा किया गया है। आम आदमी पार्टी ने इस क्षेत्र में संजीवनी योजना का एलान किया है। हालांकि, इसके तहत अभी फिलहाल बुजुर्गों को ही मुफ्त इलाज का लाभ देने का प्रावधान रखा गया है। संजीवनी योजना के अंतर्गत दिल्ली में 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों के इलाज के लिए खर्च की सीमा को तय नहीं की गई है। इलाज के दौरान जितना खर्चा होगा, वह पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।

20 मिनट लेट होती तो...' हसीना बोलीं- रची गई थी मेरी हत्या की साजिश

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बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने पिछले साल उनके सरकारी आवास पर हुए आंदोलनकारियों के हमले को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पहली बार अपना दर्द बयां किया है। हसीना ने एक ऑडियो टेप जारी कर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर मैं अपनी बहन के साथ उस दिन 20 मिनट पहले अपने सरकारी आवास से नहीं निकलती तो वो दिन हमारा आखिर दिन हो सकता था। बता दें कि बीते साल पांच अगस्त को समय शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़कर अपनी जान बचाकर भारत जाना पड़ा था।

शेख हसीना का ये ऑडियो बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किए गया। इस ऑडियो में शेख हसीना अल्लाह का शुक्रिया अदा करते भी दिख रही हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर उन्हें मारने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया है। शेख हसीना ने शुक्रवार रात को फेसबुक पर अपनी पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग के पेज पर एक ऑडियो संदेश में यह बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, रेहाना और मैं बच गए, हम केवल 20-25 मिनट के अंतराल से मौत से बच गए।

हसीना ने दावा किया है कि उनकी हत्या की कई बार साजिशें रची गई थीं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि 21 अगस्त को हुई हत्याओं से बचना, कोटालीपारा में हुए विशाल बम विस्फोट से बचना या पांच अगस्त 2024 को जीवित बचना अल्लाह की इच्छा है। अल्लाह का हाथ ही होगा। अगर अल्लाह की इच्छा न होती, तो मैं अब तक जिंदा नहीं बची होती। उन्होंने कहा, 'आपने बाद में देखा कि कैसे मुझे मारने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, अल्लाह की दया है कि मैं अभी भी जिंदा हूं क्योंकि अल्लाह चाहता है कि मैं कुछ और करूं।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वीजा अवधि को बड़ा दिया था। वह पिछले साल अगस्त से भारत में रह रही हैं। इस बीच खबर ये भी आई थी कि बांग्लादेश ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है। हालांकि वीजा अवधि बढ़ने से हसीना के लिए अधिक समय तक भारत में रहने का रास्ता साफ हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार, भारत से पूर्व पीएम के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।

क्या तलाक ले रहे बराक-मिशेल ओबामा?जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा के बीच तलाक की खबरें हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाहें चल रही हैं कि दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं और हालात तलाक तक पहुंच गए हैं। इन अफवाहों तब और हवा मिल गई जब मिशेल ओबामा ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया। हालांकि मिशेल ओबामा शपथ ग्रहण समारोह में क्यों शामिल नहीं हो रही हैं, इसे लेकर उनके कार्यालय ने कोई विशेष स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्‍ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं। अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगी। अमेरिकी इतिहास में बीते 150 सालों में ये पहला मौका है जब पूर्व राष्ट्रपति और उनके पति या पत्नी इस समारोह में भाग नहीं ले रहे हैं।

दरअसल, बराक और मिशेल ओबामा के ऑफिस की तरफ से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इसमें साफ किया गया है कि मिशेल ओबामा इस समारोह में शामिल नहीं होंगी। गौर करने वाली बात यह भी है कि बराक और मिशेल ने राष्ट्रपति और फर्स्ट लेडी के रूप में दो कार्यकाल व्हाइट हाउस में बिताए हैं।

इससे पहले कार्टर के अंतिम संस्कार में भी मिशेल ओबामा अपने पति बराक के साथ नहीं पहुंची थीं। इस तरह एक ही महीने में 2 बार मिशेल की इतने महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम में अपने पति के साथ ना होने से इन अफवाहों को और हवा मिल रही है। जबकि नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति के शपथ ग्रहण में पूर्व राष्‍ट्रपति और पूर्व फर्स्‍ट लेडी का आना परंपरा का हिस्‍सा रहा है। इस समारोह में आमतौर पर पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी शामिल होते ही हैं। हालांकि इन मिशेल के इन समारोहों में शामिल न होने को तलाक की तरह नहीं देखा जा सकता लेकिन इनसे सोशल मीडिया पर तलाक की चर्चा शुरू हो गई है।

हिंद महासागर में मजबूत नौसेना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता”, राजनाथ सिंह ने कहा- चीन की बढ़ती मौजूदगी चिंताजनक

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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारत के लिए चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक समृद्धि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी हुई है। साथ ही कहा कि नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। रक्षमंत्री ने कहा, हम दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और युद्ध देख रहे हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, हमें अपनी सुरक्षा के लिए योजना, संसाधन और बजट की आवश्यकता है।

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हिंद महासागर महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की आर्थिक समृद्धि सीधे तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा से जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत जरूरी है कि हम अपने समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखें और अपने समुद्र तटों की रक्षा करें।

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रमुख नौसैनिक शक्तियों ने हाल के सालों में हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति कम कर दी है, जबकि भारतीय नौसेना ने इसे बढ़ाया है। उन्होंने कहा, अदन की खाड़ी, लाल सागर और पूर्वी अफ्रीकी देशों से लगे समुद्री क्षेत्रों में खतरे बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए भारतीय नौसेना अपनी उपस्थिति को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 2024 को नौसेना नागरिक वर्ष के रूप में मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान सिंह ने आगे कहा कि दुनियाभर में हो रही उथल-पुथल और संघर्षों के मद्देनजर भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आक्रामक और रक्षा संबंधी प्रक्रियाओं पर बल देने की आवश्यकता है। उन्होंने सशस्त्र बलों के सामने बढ़ती जटिलताओं का जिक्र करते हुए देश की रक्षा क्षमता को जल्द बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तनावपूर्ण भू-राजनीतिक सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर सशस्त्र बलों के लिए बढ़ती जटिलताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, अगर हम रक्षा और सुरक्षा के नजरिए से पूरे दशक का आकलन करें तो हम कह सकते हैं कि यह एक उतार-चढ़ाव भरा दशक रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हिंद महासागर में जल की रक्षा करना, नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।

गाजा संघर्ष विराम को इजराइली कैबिनेट की मंजूरी, नेतन्याहू ने की घोषणा, अगवा बंधक होंगे रिहा

#israel_cabinet_approves_deal_with_hamasfor_ceasefire_gaza_conflict

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इजरायल-हमास युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान गाजा को हुआ। यहां पूरे युद्ध के समय मौत का तांडव होता रहा। अब युद्धविराम को लेकर इजरायल और हमास में डील हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने इस डील पर मुहर लगा दी है। यह घोषणा नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा यह कहे जाने के एक दिन बाद की गई कि गाजा में युद्ध विराम और फलस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले बंधकों को मुक्त करने के लिए वार्ता में अंतिम समय में रुकावटें आईं।

इजरायल के प्रधानमंत्री के एक्स अकाउंट पर लिखा गया, 'वार्ता दल ने प्रधानमंत्री को बताया है कि बंधकों की रिहाई के लिए समझौते पर सहमति बन गई है। बंधकों और लापता लोगों के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के प्राधिकरण ने बंधकों के परिवारों को इस बारे में जानकारी दे दी है। बंधकों की रिहाई के लिए रूपरेखा रविवार, 19 जनवरी, 2025 को लागू होगी।

इससे पहले मध्यस्थ कतर और अमेरिका ने बुधवार को युद्ध विराम की घोषणा की। यह समझौता एक दिन से अधिक समय तक अधर में लटका रहा। क्योंकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि अंतिम समय में कुछ जटिलताएं थीं। इसके लिए उन्होंने हमास आतंकवादी समूह को जिम्मेदार ठहराया। नेतन्याहू के इस तरह की प्रतिक्रिया से साफ समझा जा सकता है कि गाजा में तो युद्धविराम हो गया है लेकिन हमास और इजरायल के बीच तकरार बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने समझौता मंजूरी में देरी के लिए हमास के साथ अंतिम समय में हुए विवाद को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि नेतन्याहू की सरकार के गठबंधन में बढ़ते तनाव ने समझौते के कार्यान्वयन में संकट पैदा कर दिया था। एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रमुख मध्यस्थ कतर ने घोषणा की थी कि समझौता पूरा हो गया है।

डॉक्टर बिटिया को मिलेगा इंसाफ, कोलकाता आरजी कर रेप और मर्डर केस में कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

#kolkata_rg_kar_case_verdict_today

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज कोलकाता मामले में फैसला शनिवार को सुनाया जाएगा। सीबीआई ने संजय रॉय के लिए मृत्युदंड की मांग की है। अदालत में सीबीआई ने यह भी कहा कि रॉय इस अपराध का एकमात्र गुनाहगार है। वहीं, अदालत का फैसला आने से एक दिन मृत ट्रेनी महिला डॉक्टर के माता-पिता ने जांच को आधा-अधूरा बताया। उनका आरोप है कि इस अपराध में शामिल अन्य लोग खुलेआम घूम रहे हैं। माता-पिता ने कहा कि जब तक उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक वे लड़ाई जारी रखेंगे।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले वर्ष अगस्त महीने में ड्यूटी पर तैनात एक महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सियालदह अदालत के न्यायाधीश 18 जनवरी यानी आज फैसला सुनाएंगे। ऑन-ड्यूटी पीजीटी इंटर्न के साथ 9 अगस्त को अस्पताल परिसर में बेरहमी से बलात्कार और हत्या कर दी गई थी। पहले डॉक्टर के आत्महत्या करने की सूचना बाहर आई। कुछ देर बाद पता चला कि ट्रेनी डॉक्टर की लाश अस्पताल के सेमिनार हॉल की तीसरी मंजिल पर अर्ध-नग्न मिली है। मामले में रेप के बाद हत्या किए जाने का ऐंगल सामने आया

13 अगस्त को कोलकाता पुलिस से मामला संभालना। घटना के अगले दिन 10 अगस्त कोलकाता पुलिस ने आरोपी संजय रॉय को हिरासत में ले लिया। संजय रॉय घटना की रात को मेडिकल कॉलेज परिसर में जाते हुए नजर आया और कुछ घंटे बाद वह घबराहट में बाहर निकला। संजय राउत का हेडफोन भी डॉक्टर की लाश के पास मिला था। कहा गया कि संजय रॉय ने नशे की हालत में डॉक्टर का रेप किया और पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या कर दी।

सीबीआई के वकील ने इस घटना को अमानवीयता की सीमा को पार करना बताया है। जांच के दौरान, एक बहु-संस्थागत मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि पीड़िता की मौत हाथ से गला घोंटने के बाद हुई थी। ट्रेनी डॉक्टर ने जब खुद को बचाने की कोशिश की तो उसका चश्मा टूट गया था। पीड़िता के साथ निर्दयता इतनी गंभीर थी कि उसकी आंख, मुंह और गुप्तांगों से लगातार खून बह रहा था। पीड़िता की गर्दन और होठों पर चोट के निशान पाए गए थे।

केंद्रीय एजेंसी ने 120 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए। 66 दिनों तक इस केस में कैमरा ट्रायल चला। सीबीआई के वकील ने संजय रॉय को इस घटना के अपराधी साबित करने के लिए (एलवीए) के अलावा जैविक साक्ष्य भी पेश किए, जिनमें डीएनए नमूने, विसरा आदि शामिल हैं। एजेंसी ने दावा किया कि पीड़िता ने रेप और उसे जान से मारने के समय खुद को बचाने के लिए काफी देर तक संघर्ष किया था। इसी में उसने संजय रॉय के शरीर पर पांच बार घाव किए थे, जो रिपोर्ट में सामने आए हैं।

*8वें वेतन आयोग की मंजूरी का दांव, दिल्ली विधानसभा चुनाव पर कितना होगा असर?

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी तीसरी बार सत्ता वापसी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। वहीं, बीजेपी 26 साल के सियासी सूखे को खत्म करने की जद्दोजहद में है। इस सियासी तपिश के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को साधने के लिए बड़ा दांव चला है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को आठवें वेतन आयोग के गठन को अपनी मंजूरी दे दी। नए वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों के आने के बाद सरकारी कर्मचारियों तथा पेशनरों को वेतन में सीधा लाभ मिलेगा। इसे दिल्ली चुनाव के लिए पीएम मोदी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि दिल्ली में लाखों की संख्या में सरकारी कर्मचारी हैं और यहां की सियासत में अहम भूमिका भी तय करते हैं?

7वें वेतन आयोग का गठन 2016 में किया गया था और इसकी अवधि 2026 में समाप्त हो रही है। दिल्ली में 5 फरवरी को चुनाव होने वाला है। दिल्ली चुनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और पेंशनभोगियों के भत्तों में संशोधन के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8वें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया है। ऐसे में केंद्र के इस फैसले को चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

जानकारों की मानें तो केंद्र सरकार ने बीजेपी के लिए काफी अहम माने जा रहे चुनाव से पहले बड़ा फैसला लिया है। जानकारों के अनुसार दिल्ली में केंद्रीय कर्मचारियों की अच्छी खासी संख्या है। ऐसे में इस घोषणा से पार्टी चुनाव में निश्चित रूप से इस घोषणा के वोट में बदलने की उम्मीद लगा रही है।

केवल दिल्ली में 4 लाभ से ज्यादा कर्मचारियों पर निगाहें

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशें स्वीकार होने पर लगभग 49 लाख सरकारी कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों के वेतन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। एक आंकड़े के मुताबिक, अकेले दिल्ली में रक्षा और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों सहित लगभग 4 लाख ऐसे कर्मचारी है, जिन्हें सीधे तौर पर इसका फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय राजधानी में नई दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), पुलिस और डिफेंस के साथ ही लॉ एंड ऑर्डर सहित कई ऐसे डिपार्टमेंट हैं, जो केंद्र सरकार के अंतर्गत हैं। आठवां वेतन आयोग लागू होने के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

दिल्ली की तीन विधानसभा काफी अहम

केंद्रीय कर्मचारियों के लिहाज से दिल्ली की तीन विधानसभा काफी अहम है। इसमें नई दिल्ली, दिल्ली कैंट और आरके पुरम सीट शामिल हैं। इन इलाकों में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के अलग-अलग कर्मचारी रहते हैं। सरकारी कर्मचारी वाली ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी का ही कब्जा है। उदाहरण के तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न को देखें तो नई दिल्ली लोकसभा सीट के तहत 10 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से पांच सीटों पर सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में रहते हैं। बीजेपी ने नई दिल्ली लोकसभा सीट जरूर जीतने में कामयाब रही थी, लेकिन सरकारी कर्मचारियों वाली नई दिल्ली, दिल्ली कैंट और आरके पुरम जैसी अहम सीट पर आम आदमी पार्टी से पिछड़ गई थी।

बीजेपी ने बदली अपनी रणनीति

बीजेपी ने इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति बदली है। बीजेपी ने दिल्ली के मतदाताओं को सिर्फ एक प्लेटफार्म से नहीं लुभा रही है बल्कि इसके लिए अलग-अलग रणनीति भी तैयार की है। विभिन्न वर्गों के बीच कौन से केंद्रीय मंत्री और बीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्री पहुंचेंगे, इसका अलग से खाका तैयार किया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में किसी बड़े नेता के नेतृत्व में एक समूह तैयार किया गया। इसी तर्ज पर बीजेपी ने दिल्ली के रह रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों को साधने के लिए रणनीति बनाई है। मोदी सरकार के द्वारा आठवें वेतन आयोग की घोषणा, इसी दिशा में एक कदम बताया जा रहा है।

क्या खत्म होगा बीजेपी का वनवास?

दिल्ली की सियासत में बीजेपी सिर्फ एक बार ही सत्ता पर विराजमान हो सकी है और पिछले 27 साल से वनवास झेल रही है। बीजेपी सिर्फ 1993 में ही दिल्ली को फतह करने में कामयाब रही थी. 1998 में उसके हाथों से सत्ता चली गई तो फिर वापसी नहीं हो सकी। पहले 15 साल तक शीला दीक्षित की अगुवाई में कांग्रेस के सामने खड़ी नहीं हो सकी। शीला दीक्षित के बाद से 11 साल से आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के आगे पस्त नजर आई है। बीजेपी 2025 में होने वाले विधानसभा में हर हाल में दिल्ली में कमल खिलाना चाहती है, जिसके लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।