सार्वजनिक रामलीला समिति नगरा में हुआ सीता हरण की लीला का मंचन,कलाकारों ने एक से बढ़कर एक दी प्रस्तुति
संजीव सिंह बलिया।नगरा:सार्वजनिक रामलीला समिति के तत्वाधान में जनता इंटर कॉलेज के प्रांगण नगरा में चल रही ऐतिहासिक रामलीला के आठवें दिन रामलीला प्रसंग- सीताहरण रामलीला महोत्सव मे रावण ने निश्चय किया कि वह अपने जन्म जन्म के बंधनों से छुटकारा पाने के लिए वह प्रभु श्री राम से बैर का नाता अपनाएगा तथा उनके हाथों मौत पाकर मोक्ष प्राप्त करेगा।सीता का हरण करने के लिए रावण ने अपने मायावी मामा मारीच की मदद ली जो विभिन्न रूप धरने करने में माहिर था। रामलीला मे सीता हरण व जटायु वध, सीता खोज का मंचन कलाकारों के द्वारा दिखाया गया।
नगरा के सार्वजनिक रामलीला मिति में वृहस्पतिवार को सीता हरण का आकर्षक मंचन कर कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध दिया। दिखाया गया कि सोने का मृग देख सीता जी ने उसे पाने की जिद की। भगवान राम ने मृग का पीछा किया। माया रूपी मृग भगवान राम को जंगल की ओर दूर लेकर चला गया। हाय राम-हाय राम की आवाज सुन सीता जी परेशान हो गईं। कहा कि मेरे राम संकट में हैं। उनकी मदद के लिए लक्ष्मण को भेजा। लक्ष्मण ने जाते समय उन्होंने कुटी के चारों ओर तीर से रेखा खींच दी और माता सीता से उसके पार न जाने को कहा। लक्ष्मण को जाते ही रावण अपने पुष्पक विमान से एक ऋषि का वेश बनाकर आश्रम पर पहुंच जाता है और द्वार पर खड़े होकर भिक्षा मांगने लगता है।
सीता के भिक्षा देने पर रावण लक्ष्मण रेखा पार करने का आग्रह करता है, लेकिन सीता रेखा पार करने से मना कर देतीं है। तभी ऋषि (रावण) भिक्षा लेने से मना कर देता है। ऋषि (रावण) के वापस लौटने के डर से सीता रेख पार कर देतीं है और रावण अपने असली रूप में आते ही सीता का हरण कर लेता है।जब रावण माता सीता का हरण कर लंका की ओर जाता है तो रास्ते में रावण का सामना जटायु से होता है। जिससे रावण को युद्ध करना पड़ता है। अखिर में रावण जटायु को लहुलुहान कर नीचे गिरा देता है और माता सीता को लंका लेकर पहुंच जाता है। जब राम और लक्ष्मण दोनो भाई वापस कुटी पहुंचते ही तो देखते ही सीता कुटी में नहीं है और राम व लक्ष्मण सीता की खोज में वन-वन भटकते व विलाप करते है। जिसे देख दर्शक भावविभोर हो जाते हैं।
वृहस्पतिवार की रात्री पंडाल में महिला दर्शकों की भारी भीड़ नजर आई लीला का शुभारम्भ देवेंद्र पीजी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर समरजीत बहादुर सिंह, शहबान ग्रुप के चेयरमैन इश्तियाक अहमद,रसड़ा नगरपालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन बशिष्ठ नारायण सोनी,नगरा नगर पंचायत के चेयरमैन प्रतिनिधि उमाशंकर,ब्लूमबर्ग बर्ड्स पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अभिषेक यादव, प्रिंसिपल मुकेश यादव को सार्वजनिक रामलीला समिति के द्वारा सभी अतिथिगण का स्वागत कर अंगवस्त्रम भेंट स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया ।पुलिस प्रशासन को राम भक्तों की व्यवस्था में सहयोग करने के लिए धन्यवाद दिया गया।इसके साथ ही अतिथि गण ने भगवान की झांकी की आरती का पूजन किया। इस दौरान राम लीला समिति के संयोजक हरेराम गुप्ता, पूर्व प्रमुख निर्भय प्रकाश, अध्यक्ष-राजेश गुप्ता, डा शशि प्रकाश कुशवाहा, रामायण ठाकुर,,बबलू कसेरा, ,जयप्रकाश जायसवाल, गणपति प्रसाद मुन्ना,उदयनारायण वर्मा, संजय सोनी, राहुल ठाकुर विक्की, रामप्रवेश मौर्य,मंजय कुमार, अमन कसेरा,एलाउंसर राजू रामा चौहान आदि लोगों की भुमिका सराहनीय रही।





बलिया।नगरा नगर पंचायत में नगरा सार्वजनीक रामलीला समिति के तत्वाधान में जनता इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन 5 तारिख- *नगरा रामलीला प्रसंग- पृथ्वी पुकार रामजन्म*का किया गया भारतीय सांस्कृत राम कृष्ण लीला संस्थान वृंदावन से आए कलाकारो ने पृथ्वी पुकार व श्रीराम जन्म लीला का मंचन कर उपस्थित दर्शको का मन मोह लिया। राम जन्म होते ही पूरा पांडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। कलाकारो द्वारा मंचित लीला के अनुसार रावण के अत्याचारों से पीडि़त पृथ्वी जब गो रूप धारण कर देवताओं की शरण में पहुंचती है तो उसकी पीड़ा सुनकर देवतागण व्यथित हो जाते हैं। इसके बाद सारे देवता एकत्रित होकर धरती को लेकर भगवान विष्णु के पास जाते है। देवता कहते हैं कि रावण का अत्याचार इतना बढ़ गया है कि चारों ओर त्राहि-त्राहि मची है। भगवान विष्णु उन्हें आश्वासन देते है कि रावण का अत्याचार खत्म करने के लिए वे स्वयं मानव रूप में धरती पर जन्म लेंगे। इसके बाद कोई संतान न होने से दुखित राजा दशरथ संतान प्राप्ति के लिए गुरु वशिष्ठ से सलाह मांगते है। गुरु वशिष्ठ दशरथ को श्रृंगी ऋषि के पास भेजते हैं। श्रृंगी ऋषि राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ कराने के लिए कहते है। दशरथ जी ऋषि की बात मानकर यज्ञ करते है, और यज्ञ में अग्निदेव प्रकट होते हैं यथा राजा को हवि देते हुए कहते है कि यह तीनों रानियों को खिला देना। आपको पुत्र प्राप्ति होगी। इसके बाद माता कौशल्या के कोख से बाल्य रूप में भगवान राम का जन्म होता है साथ ही माता कैकई के भरत एवं माता सुमित्रा के लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है। जैसे ही राजा दशरथ को एक साथ चार पुत्रों के जन्म की सुचना मिलती है, वे प्रसन्न होकर हीरे जवाहरात आदि लुटाते है। रामजन्म होते ही पुरा पांडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। सखियां सोहर गाती है, जिससे दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। लीला का शुभारम्भ पूर्व प्रधान मनोज कुमार पांडेय ने भगवान की झांकी की आरती पुजन कर किया। पूर्व प्रमुख निर्भय प्रकाश, राजेश गुप्ता, डा शशि प्रकाश कुशवाहा, रामायण ठाकुर, सुनील गुप्ता, राम प्रसाद गुप्ता,अनिल, बबलू कसेरा, राजू चौहान, रियांशू जायसवाल, राहुल ठाकुर, अमन कुमार आदि की भुमिका सराहनीय रही।
Oct 11 2024, 17:13
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