ईरान ने इजरायल पर किए ताबड़तोड़ मिसाइल हमले, मिनटों में दागे 500 रॉकेट, नेतन्याहू ने कहा-कीमत चुकानी पड़ेगी

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हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में एक बड़ी जंग छिड़ गई है।ईरान ने इजराइल पर कई बैलेस्टिक मिसाइलें दाग दी।ईरान ने मंगलवार रात को इजरायल पर करीब 500 रॉकेट दागे। इससे पूरे इजरायल में रॉकेट सायरन बजने लगे। इजरायली सेना ने तुरंत सभी लोगों को बम शेल्टर में शरण लेने की सलाह दी। इस दौरान आसमान में मिसाइल इंटरसेप्शन से धमाकों की आवाजें लगातार आती रहीं।

ईरानी मीडिया ने ये भी दावा किया है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के मुख्यालय पर भी हमला किया है। ईरान ने ये भी दावा किया है कि उसने बैलिस्टिक मिसाइलों ने नेटजारिम कॉरिडोर पर इजराइली टैंकों को भी निशाना बनाया गया है। इसमें ईरान ने इजराइल के 20 एफ-35 लड़ाकू विमान को भी मार गिराया है।

जेरूशलम पोस्ट के अनुसार, उत्तरी तेल अवीव में जॉर्ज वीस स्ट्रीट पर एक इमारत पर सीधा हमला हुआ, हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। तेल अवीव के साथ-साथ डिमोना, नबातिम, होरा, होद हशरोन, बीर शेवा और रिशोन लेज़ियन में भी कई रॉकेटों के गिरने की खबर है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो में मृत सागर में मिसाइल और इंटरसेप्टर के टुकड़ों को गिरते हुए देखा गया है।

ईरान के इस हमले से बचने के लिए इजराइल का सबसे मुख्य कवच ऑयरन डोम सिस्टम ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। लेकिन इस कवच को तोड़ने के लिए ईरान ने एक के बाद एक मिसाइलें लॉन्च करके इजराइल के कवच को चकमा देने का काम किया है।

हालांकि इस हमले के लिए इजराइल पहले से ही तैयार था, इसीलिए इजराइल ने पहले ही अपने नागरिकों को शेल्टर हाउस में शिफ्ट करने के लिए आदेश जारी कर दिया था। आईडीएफ ने कहा है कि ईरान की ओर से इजराइल पर रॉकेट दागे जाने के कारण सभी नागरिक बम शेल्टर में शिफ्ट कर दिए है।

वहीं, ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि तेहरान ने ‘बड़ी गलती’ की है और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार रात को इजरायल पर किया गया ईरान का मिसाइल हमला ‘नाकाम’ रहा। पीएम नेतन्याहू ने कहा, इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम की बदौलत ईरान के हमले को विफल कर दिया गया, जो दुनिया में सबसे एडवांस है। उन्होंने अमेरिका को भी इसके लिए धन्यवाद दिया। नेतन्याहू ने यह भी याद दिलाया कि वह अपने स्थापित नियम – जो कोई हम पर हमला करेगा, हम उस पर हमला करेंगे – पर कायम रहेंगे।

मद्रास हाईकोर्ट का सद्गुरु से सवालः आपकी बेटी तो शादीशुदा, दूसरों की बेटियों को संन्यासी बनने के लिए क्यों कह रहे*
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मद्रास हाई कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु जग्गी वासुदेव से कड़े सवाल पूछे हैं। मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस एसएम सुब्रह्मण्यम और जस्टिस वी शिवागणनम ने एक सुनवाई के दौरान उनसे पूछा कि वो युवतियों को संन्यास के तौर-तरीके अपनाने को क्यों कह रहे हैं? कोर्ट ने पूछा कि जब उन्होंने अपनी बेटी की शादी कर दी है, तो दूसरों की बेटियों को सिर मुंडवाने और सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यासियों की तरह रहने के लिए क्यों प्रोत्साहित कर रहे हैं? जस्टिस एसएम सुब्रमण्‍यम और जस्टिस वी शिवगनम की बेंच ने जग्गी वासुदेव से यह सवाल एक रिटायर्ड प्रोफेसर की याचिका पर पूछा है। दरअसल, कोयंबटूर में तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर एस कामराज ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ याचिका लगाई है। उनका आरोप है कि उनकी दो बेटियों- गीता कामराज उर्फ मां माथी (42 साल) और लता कामराज उर्फ मां मायू (39 साल) को ईशा योग सेंटर में कैद में रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईशा फाउंडेशन ने उनकी बेटियों का ब्रेनवॉश किया, जिसके कारण वे संन्यासी बन गईं। उनकी बेटियों को कुछ खाना और दवा दी जा रही है, जिससे उनकी सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो गई है। कोयंबटूर की तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले एस कामराज ने हाइ कोर्ट में बेटियों की सशरीर पेशी की गुहार लगाई। दोनों ने अदालत में पेश होकर कहां कि वे अपनी मर्जी से कोयंबटूर स्थित सेंटर में रहती हैं। उन्हें कैद में नहीं रखा गया है। ईशा फाउंडेशन ने भी दावा किया कि महिलाएं स्वेच्छा से उनके साथ रही हैं। फाउंडेशन की दलील थी कि जब दो स्वतंत्र वयस्क जीवन में अपना रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं, तो उसे अदालत की चिंता समझ नहीं आती। हालांकि, जजों ने मामले की आगे जांच करने का फैसला किया और पुलिस को ईशा फाउंडेशन से संबंधित सभी मामलों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस सुब्रमण्यम ने जवाब दिया, आप नहीं समझेंगे क्योंकि आप एक विशेष पक्ष के लिए पेश हो रहे हैं। लेकिन यह अदालत न तो किसी के पक्ष में है और न ही किसी के खिलाफ है। हम केवल वादियों के साथ न्याय करना चाहते हैं।
ब्रिक्स में क्यों शामिल होना चाहता है तुर्की? भारत, चीन और रूस वाले आर्थिक गुट में आने की ये है वजह*
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तुर्की ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है, जानकारी के मुताबिक अंकारा ने ब्रिक्स मे शामिल होने के लिए आवेदन दिया है। हालांकि तुर्की की ओर से आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया गया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोयन की पार्टी के प्रवक्ता उमर सेलिक ने भी हाल ही में ये कहा था कि तुर्की के ब्रिक्स में शामिल होने का प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं, कुछ दिनों पहले रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने जानकारी दी थी कि तुर्की ने ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा जताई है। ब्लूमबर्ग एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की ने कई महीने पहले ही ब्रिक्स में शामिल होने की अर्ज़ी दे दी है। अब सवाल ये कि आखिर तुर्की क्यों संगठन में आना चाहता है? जानकारों की मानें तो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन एक ओर मुस्लिम देशों के बीच वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं तो वहीं दूसरी ओर अपना वैश्विक प्रभाव बढ़ाने पर भी उनका ज़ोर है। आने वाले समय में ब्रिक्स को डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन), आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक जैसे पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाले संगठन के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि तुर्की आर्थिक विकास के लिए अधिक अवसर और वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। दरअसल ज्यादातर देश पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों से परेशान हैं और वह ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक की मदद चाहते हैं। आर्थिक संकट से निकलने की कोशिश दरअसल, तुर्की को विदेशी निवेश की ज़रूरत है क्योंकि देश एक गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। अगर तुर्की की अर्थव्यवस्था धराशाई होती है तो ये यूरोपीय बैंकों के लिए भी ख़तरनाक होगा क्योंकि तुर्की की अर्थव्यवस्था उन्हीं पर निर्भर है। तुर्की का आधा कारोबार यूरोपीय संघ के देशों के साथ है।काउंसिल ऑफ़ यूरोपियन यूनियन के मुताबिक तुर्की 31.8% हिस्से के साथ यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। साल 2022 में यूरोपीय संघ और तुर्की के बीच कुल 200 बिलियन यूरो का ट्रेड हुआ था। ब्रिक्स के जरिए अपने कई हितों को साधने की तैयारी में तुर्की यूरोप से बाहर नये आर्थिक प्लेटफॉर्म की तलाश में है। उसका अपना कहना है कि ब्रिक्स के साथ जुड़कर,तुर्की का लक्ष्य पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मामलों में इसका रणनीतिक महत्व बढ़ेगा। तुर्की नाटो देशों का सदस्य है लेकिन रूस का करीबी दोस्त होने की वजह से पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध कुछ खास नहीं रहे हैं। इसके अलावा बताया जाता है कि तुर्की चीन के प्रभाव वाले संगठन एससीओ में भी शामिल होना चाहता है, लिहाज़ा रूस और चीन के प्रभाव वाले ब्रिक्स के जरिए वह अपने कई हितों को साध सकता है। माना जा रहा है कि ब्रिक्स में शामिल होने के बावजूद तुर्की नाटो से अपने संबंध तोड़ने वाला नहीं है, बल्कि वह पश्चिमी देशों से इतर नए गुटों के साथ जुड़कर अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दरअसल तुर्की अपनी विदेश नीति में बदलाव लाना चाहता है, जिससे उसकी इस इमेज में बदलाव भी आए कि वो मुस्लिम देशों का अगुवा बनना चाहता है। ब्रिक्स क्या है? शुरू में ये समूह ब्रिक कहलाता था। ये विकासशील देशों का एक समूह है जिसका गठन वर्ष 2006 में हुआ था। इसमें ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। साल 2010 में इस समूह में दक्षिण अफ़्रीका भी शामिल हो गया और तब इसका नाम ब्रिक से बदल ब्रिक्स कर दिया गया। ब्रिक्स का गठन उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के अमीर देशों की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति को चुनौती देने के लिए, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकासशील देशों को एकजुट करने के मकसद से हुआ था। इस आर्थिक अलायंस में हाल के वर्षों में कई विस्तार हुए हैं। अब इसमें ईरान, मिस्र, इथीयोपिया और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हो चुके हैं। सऊदी अरब ने भी इस समूह में शामिल होने की इच्छा ज़ाहिर की है और अज़रबैजान ने तो सदस्यता के लिए औपचारिक अर्ज़ी भी दे दी है।
पाकिस्तान पहुंचते ही भगोड़े जाकिर नाइक ने उगला जहर, भारत में गोमांस पर प्रतिबंध को लेकर कही ये बीत

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भारत का वांटेड जाकिर नाइक पाकिस्तान पहुंचा है।जाकिर नाइक ने पाकिस्तान पहुंचते ही जहर उगलना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान में जाकिर नाइक यरुशलम स्थित अल अक्सा को इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल बताते हुए जिहाद के लिए उकसा रहा है। उसने इजरायल के खिलाफ जिहाद की वकालत करते हुए कहा कि यह तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक आखिरी यहूदी को हटा नहीं दिया जाता।

पाकिस्तान पहुंचने के बाद जाकिर नाइक ने अलग-अलग कार्यक्रमों और टीवी चैनलों से इस्लाम से लेकर हमास-इजराइल जंग और भारत न जाने को लेकर बात की है। धार्मिक और अंतरधार्मिक सद्भाव मामले के मंत्रालय के एक कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत में हमास और इजराइल के बीच जारी जंग पर बोलते हुए ज़ाकिर नाइक ने कहा, “अल्लाह का प्लान बेस्ट ऑफ़ प्लान है, जिसका इंसान को बाद में पता चलता है। मिसाल के तौर पर अल्लाह तआला फ़िलिस्तीन को अगर एक दिन में जिताना चाहता तो जिता सकता था लेकिन नहीं जिताया क्योंकि अल्लाह बेहतर प्लानर है। जाकिर नाइक ने आगे कहा कि अगर अल्लाह एक दिन में फ़िलिस्तीन को जिता देता तो एक साल तक चली जंग में हज़ारों लोग आज फ़िलिस्तीन के पक्ष में नहीं होते। सात अक्तूबर को हुई घटना के बाद 99 फ़ीसदी ग़ैर मुस्लिम इजराइल के पक्ष में थे लेकिन आज 99 फ़ीसदी लोग गाजा को सही कह रहे हैं।

जाकिर नाइक ने कहा कि 'आज जो मुसलमान गाजा में कर रहे हैं, मेरे हिसाब से वह फर्ज के साथ हैं। वे दुनिया में इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल अल अक्सा की रक्षा कर रहे हैं। अगर वे नहीं करेंगे तो यह हम पर फर्ज होगा।' उसने गाजा के मुसलमानों के लिए जिहाद में शामिल होना अनिवार्य बताया। जाकिर नाइक ने पाकिस्तानी देवबंदी विद्वान तकी उस्मानी के फतवे का समर्थन किया, जिसमें इजरायली बमबारी बंद करने का आह्वान तो किया गया, लेकिन इजरायल के खिलाफ लड़ाई जारी रखने को कहा गया था। नाइक ने कहा कि जिहाद तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक आखिरी यहूदी को (इजरायल से) हटा नहीं दिया जाता।

पाकिस्तान के मशहूर न्यूज चैनल जियो न्यूज़ ने भी जाकिर नाइक से बात की है। जियो न्यूज के रिपोर्टर इरफान सिद्दीकी ने जाकिर नाइक से बातटीत का वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है।

रिपोर्टर ने पूछा कि क्या भारत के मुसलमानों को गोमांस पर प्रतिबंध का पालन करना चाहिए? इस सवाल पर नाइक ने कहा, एक निजी राय और एक इस्लामी राय होती है। इस्लामी शरीयत ये कहता है कि जिस भी मुल्क में आप रह रहे हैं, उस मुल्क के कानून का आप पालन करें जब तक कि वो मुल्क अल्लाह और रसूल के कानून के खिलाफ न जाए। 

नाइक ने आगे कहा कि गोमांस खाना इस्लाम में फर्ज नहीं है। अगर कोई पाबंदी लगाता है तो हमें इसका पालन करना चाहिए। निजी राय मुझसे पूछेंगे तो बीफ़ बैन एक राजनीतिक मुद्दा है क्योंकि करोड़ों की तादाद में हिंदू भी गोमांस खाते हैं। नई सरकार के आने के बाद कई राज्यों में गोमांस पर पाबंदी लगाई गई है। अगर आप लड़की का उत्पीड़न करते हैं तो तीन साल की सजा है और गोमांस खाने पर पांच साल की सजा है, ये कौन सा तर्क हुआ।

मानहानि केस में राहुल गांधी को समन भेजा, सावरकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का मामला

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महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को तलब किया है। नासिक की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक, दीपाली परिमल कडुस्कर ने 27 सितंबर को राहुल गांधी को एक समन जारी किया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक, दीपाली परिमल कडुस्कर ने 27 सितंबर को पेश होने के लिए राहुल गांधी को नोटिस जारी किया है। राहुल को हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले में तलब किया गया है।

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नोटिस में कहा गया कि एक देशभक्त व्यक्ति के खिलाफ दिया गया बयान प्रथम दृष्टया मानहानिकारक लगता है। मामले की अगली तारीख पर राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से या अपने कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से पेश होना होगा। इस पर अभी फैसला होना बाकी है।

मामले में शिकायतकर्ता एक एनजीओ के निदेशक हैं। उनका दावा है कि उन्होंने हिंगोली में राहुल की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और नवंबर 2022 में कांग्रेस नेता का भाषण भी देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल ने दोनों मौकों पर वीर सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया और समाज में उनकी छवि को बदनाम करने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि आरोपी के भाषण और प्रेस बयानों से शिकायतकर्ता के आदर्श स्वातंत्र्यवीर सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। इतना ही नहीं आजादी से पहले के समय में सावरकर द्वारा किए गए नेक कामों के साथ-साथ समाज के प्रति उनके योगदान को भी बदनाम किया गया है।

कोर्ट ने सभी दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसा लगता है कि अभियुक्त के एक देशभक्त व्यक्ति के खिलाफ दिए गए बयान प्रथम दृष्टया अपमानजनक लगते हैं। मजिस्ट्रेट ने कहा कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं। इसके बाद अदालत ने राहुल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत अपराधों के लिए मामला शुरू करने का फैसला किया।

आधी रात को नड्डा-फडणवीस से मिले उद्धव-राउत, महाराष्ट्र में फिर सियासी माहौल गर्म, हालांकि कहीं से नहीं आई कोई आधिकारिक टिप्पणी

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महाराष्ट्र में हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना (UBT) नेताओं के बीच संभावित मुलाकातों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो रहा है। वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) ने दावा किया है कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे के बीच एक गुप्त बैठक हुई है। इसके साथ ही, VBA ने यह भी आरोप लगाया है कि शिवसेना सांसद संजय राउत दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मिले थे। हालांकि, इन दावों पर न तो भाजपा और न ही शिवसेना (UBT) ने आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी की है।

VBA के मुख्य प्रवक्ता सिद्धार्थ मोकले ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि संजय राउत ने 25 जुलाई को रात 2 बजे नड्डा से दिल्ली स्थित 7 डी मोतीलाल मार्ग पर मुलाकात की थी। मोकले के अनुसार, इसके बाद 5 अगस्त को रात 12 बजे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मातोश्री बंगले पर गए थे, जहां वह अकेले ही उद्धव ठाकरे से मिले और दोनों के बीच यह बैठक करीब 2 घंटे तक चली। मोकले ने यह भी कहा कि 6 अगस्त को उद्धव ठाकरे दिल्ली गए थे, लेकिन उन्होंने यह सवाल उठाया कि ठाकरे के साथ कौन था और वहां उन्होंने किन लोगों से मुलाकात की। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा आरक्षण के विरोध में रही है, जबकि शिवसेना (UBT) को आरक्षण समर्थक मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ है। इस संदर्भ में, मोकले का दावा है कि यदि भाजपा और शिवसेना (UBT) के बीच कोई समझौता होता है, तो आरक्षण समर्थक मतदाताओं को धोखा महसूस हो सकता है।

यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, और भाजपा, शिवसेना (UBT), और एनसीपी (अजित पवार गुट) के बीच सीट बंटवारे की चर्चाएं चल रही हैं। पहले ऐसा कहा जा रहा था कि VBA विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर VBA का यह दावा सही साबित होता है और उद्धव ठाकरे वाकई भाजपा के साथ गठबंधन का मन बना रहे हैं, तो यह महाराष्ट्र चुनाव से पहले कांग्रेस और एनसीपी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को नुकसान होने के कारण चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, जिससे भाजपा और शिवसेना (UBT) को फायदा हो सकता है।

युद्ध तब शुरू नहीं होता जब आप.., इजराइली अटैक पर इंडियन आर्मी चीफ का बयान, तकनीकी और मैनुअल स्तर पर सतर्कता को बताया जरूरी

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लेबनान में हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाकर किए गए पेजर अटैक से पूरी दुनिया चौंक गई थी। इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद द्वारा किए गए इस पेजर अटैक ने लेबनान को हिला कर रख दिया। अब भारतीय सेना के प्रमुख, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, ने पेजर अटैक के बारे में अपने विचार साझा किए हैं।

एक कार्यक्रम में जनरल द्विवेदी से पेजर अटैक के बारे में सवाल पूछा गया, और भारत इस तरह के हमलों से कैसे निपट सकता है, इस पर उनका कहना था कि हंगरी की एक कंपनी ने ताइवान की कंपनी के नाम से पेजर बनाए थे, और बाद में इन पेजर्स को हिज़्बुल्लाह को सप्लाई किया गया। इज़रायल ने जिस तरह शेल कंपनी बनाकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह एक मास्टरस्ट्रोक था। जनरल ने यह भी बताया कि इस तरह की कार्रवाई के लिए सालों की योजना बनानी पड़ती है। युद्ध तभी शुरू नहीं होता जब आप हथियार उठाते हैं, बल्कि तब से शुरू हो जाता है जब आप उसकी योजना बनाते हैं। भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस तरह के हमलों से निपटने के लिए सप्लाई चेन में गड़बड़ियों से बचना आवश्यक है। तकनीकी और मैनुअल स्तर पर सतर्कता बरतनी होगी ताकि इस तरह की घटनाएं भारत में न हों।

पिछले महीने लेबनान में बड़ी संख्या में पेजर और वॉकी-टॉकी अटैक हुए थे, जिनमें लगभग 40 लोगों की मौत हुई और 3000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। लेबनान और सीरिया के सीमावर्ती इलाकों, विशेषकर बेका वैली, में सीरियल ब्लास्ट हुए थे, जिन क्षेत्रों को हिज़्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है। इसके अलावा, सोलर पैनल और हैंडहेल्ड रेडियो में भी धमाके हुए थे।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन द्वारा आर्टिफिशियल गांव बसाने के सवाल पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि चीन अपने देश में चाहे जो करे, लेकिन भारत इसके प्रति सतर्क है। उन्होंने बताया कि चीन द्वारा पहले मछुआरों और अन्य नागरिकों को आगे भेजा जाता है, और फिर उन्हें बचाने के लिए सेना आती है। भारत में पहले से ही मॉडल विलेज बनाए जा रहे हैं, और अब राज्य सरकारों को भी संसाधन लगाने का अधिकार है। सेना, राज्य सरकारें और केंद्र सरकार मिलकर बेहतर मॉडल विलेज बना रही हैं, जो भविष्य में और भी प्रभावी होंगे।

जमानत मांगने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे ममता के पूर्व-मंत्री शिक्षा पार्थ चटर्जी, घर में मिले थे करोड़ों कैश, ईडी से मांगा गया जवाब

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पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है। चटर्जी पर शिक्षक भर्ती घोटाले का आरोप है। जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई को दो हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले, कलकत्ता हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल को उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। उनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज है।

टीएमसी नेता की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि पार्थ चटर्जी पिछले दो साल और दो महीने से जेल में हैं। उन्होंने बताया कि पीएमएलए की धारा 4 के तहत अधिकतम सजा सात साल है। इसके अलावा, चटर्जी 74 साल के हैं और बीमार भी रहते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से ईडी के जवाब को जल्द से जल्द विचार करने का अनुरोध किया। ED ने जून 2022 में पार्थ चटर्जी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद सीबीआई ने भी उनके खिलाफ जांच शुरू की। उन पर आरोप है कि शिक्षक भर्ती के दौरान पैसे लेकर भर्तियां की गईं, जिसमें योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर दिया गया। यहां तक कि कुछ लोग जो परीक्षा में पास नहीं हुए थे, वे भी शिक्षक बन गए। भर्ती के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया है।

चटर्जी के ठिकानों पर छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद हुए थे। उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से 49 करोड़ से अधिक नकदी और 5 करोड़ की जूलरी मिली थी। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद हुए। फर्जी कंपनियों के भी सबूत उनके घर से मिले थे। ईडी को चटर्जी के घर से एक डिजिटल डिवाइस भी मिला, जिससे घोटाले में उनकी संलिप्तता का संकेत मिला। अर्पिता के फ्लैट से बरामद नकदी और जूलरी से चटर्जी ने खुद को दूर बताने की कोशिश की, लेकिन एजेंसियों ने उन पर अपना शिकंजा कस दिया।

'हवस का मौलवी क्यों नहीं', बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर मुस्लिम समाज में मचा बवाल

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बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने विवादास्पद बयान के कारण चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अपने बयान में यह सवाल उठाया कि क्यों सिर्फ हवस के पुजारी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, हवस के मौलवी नहीं। उनका दावा है कि मुस्लिम मौलवियों की कभी निंदा नहीं की जाती, जबकि हिंदुओं के मन में ऐसी नकारात्मक धारणाएँ जानबूझकर प्रायोजित रूप से डाली गई हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समूहों में तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना है, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के बीच।

बागेश्वर बाबा के इस बयान के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कड़ा विरोध जताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मौलाना शहाबुद्दीन ने धीरेंद्र कृष्ण के बयान को अत्यधिक नफरत फैलाने वाला बताया है। मौलाना शहाबुद्दीन ने एक वीडियो संदेश में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर ऐसे आपत्तिजनक बयान देते रहते हैं, जो समाज में नफरत फैलाने का काम करते हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन ने संदेश में कहा, "यह बयान उनके दृष्टिकोण और सोच का स्पष्ट प्रतीक है। एक धार्मिक व्यक्ति होने के बावजूद वह धर्म के प्रचारकों के खिलाफ ऐसी गलत और अनर्गल बातें कहते हैं। उन्हें अपने शब्दों पर शर्म आनी चाहिए। एक धार्मिक नेता के रूप में उन्हें हमेशा ऐसी बातें कहनी चाहिए जो समाज को सीख और प्रेरणा दे, न कि समाज में वैमनस्य और विभाजन पैदा करें। धीरेंद्र शास्त्री लगातार ऐसी बातें कहते हैं जो न सिर्फ आपत्तिजनक होती हैं, बल्कि समाज के विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने अपने हालिया बयान से न केवल हिंदू और मुस्लिम धर्म के प्रचारकों को, बल्कि सभी धर्मों के प्रचारकों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

समंदर में तैनात होंगे 22 राफेल, रेंज 3700 किलोमीटर 50 हजार फीट की ऊंचाई तक भर सकता है उड़ान

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल दो दिन के दौरे पर फ्रांस में हैं। उनका मुख्य उद्देश्य राफेल सौदे पर चर्चा करना है। कुछ दिन पहले ही फ्रांस ने राफेल डील के लिए विस्तृत प्रस्ताव भारत को सौंपा था। भारत इस साल के अंत तक इस डील को अंतिम रूप देने की योजना बना रहा है। डोभाल के दौरे से पहले, फ्रांस की कंपनी ने कीमत घटाकर अपना अंतिम प्रस्ताव भी दे दिया है।

भारतीय नौसेना के लिए यह डील बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो फ्रांस के राफेल विमानों से नौसेना के मिग-29K विमानों को बदलने की योजना है। इस सौदे में 22 सिंगल-सीट राफेल मरीन एयरक्राफ्ट और चार टू-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल हो सकते हैं। भारतीय नौसेना को आधुनिक विमानों और पनडुब्बियों की आवश्यकता है, और इस डील को उसकी ताकत बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा है। डिफेंस अक्विजिशन काउंसिल पहले ही इस डील को मंजूरी दे चुकी है।

इस सौदे की कीमत को लेकर ही अब तक चर्चा हो रही थी, लेकिन डोभाल के दौरे से पहले फ्रांस ने कीमत में कटौती कर अंतिम प्रस्ताव दिया है। हालांकि, सौदे की सही कीमत का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह अनुमान है कि सौदा 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। 2016 में भारत ने 36 राफेल विमान खरीदे थे, और भारत इसी आधार पर सौदे की कीमत रखना चाहता है। इसके अलावा, फ्रांस भारत को राफेल विमानों के साथ हथियार, सिमुलेटर, क्रू ट्रेनिंग, और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी प्रदान करेगा। साथ ही, भारतीय हथियारों को असेंबल करने में भी सहायता करेगा। इन विमानों को INS विक्रांत और INS डेगा पर तैनात किए जाने की संभावना है।

राफेल मरीन विमान की विशेषताओं में इसका शक्तिशाली इंजन, कम जगह से टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता, और उच्च गति शामिल हैं। इसका वजन 10600 किलोग्राम है और यह 1912 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है और यह विमान 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है। इसे एंटी-शिप स्ट्राइक के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। सौदे के बाद इन विमानों की पहली खेप भारत को 2-3 साल के भीतर मिल सकती है।