'अल्पसंख्यकों के लिए विशेष आयोग, महिलाओं को 2000..', हरियाणा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया घोषणापत्र

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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस ने हाल ही में अपने घोषणापत्र को चंडीगढ़ में जारी किया। इस घोषणापत्र में 40 पृष्ठों में कई महत्वपूर्ण वादों को शामिल किया गया है, जिनमें से कुछ मुख्य वादे स्वास्थ्य सेवाओं, आर्थिक सहायता, और कृषि विकास से संबंधित हैं। कांग्रेस ने यह घोषणा की है कि वह हर नागरिक को 25 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करेगी। इसके साथ ही, महिलाओं को हर महीने 2000 रुपये देने का वादा भी किया गया है।

हालाँकि, कांग्रेस के इस तरह के वादों ने कर्नाटक और हिमाचल में उसकी सरकार को आर्थिक संकट में धकेल दिया है, हिमाचल में तो राज्य सरकार के पास अपने कर्मचारियों को वेतन-पेंशन देने के लिए भी पैसा नहीं बचा है। मुख्यमंत्री ने विधायकों से अपना 2 महीने का वेतन छोड़ने का आग्रह किया है, लेकिन उससे ज्यादा कुछ होना नहीं है। वहीं, कर्नाटक में आर्थिक संकट से निकलने के लिए कांग्रेस सरकार ने एक झटके में पेट्रोल-डीजल 3 रूपए महंगा कर दिया है, नंदिनी दूध और बिजली दरें भी बढ़ाई गईं हैं। अब कर्नाटक में बस किराया बढ़ाने की तैयारी चल रही है, क्योंकि फ्री बस यात्रा के वादे से ट्रांसपोर्ट 300 करोड़ के घाटे में चला गया है। यही नहीं, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने चुनावी वादे पूरे करने के लिए SC/ST फंड में से 14000 करोड़ रुपए भी निकाले हैं। लेकिन आर्थिक संकट जस का तस है। राज्य सरकार के आर्थिक सलाहकार बसवारज रायरेड्डी कह चुके हैं कि चुनावी गारंटियां ख़ज़ाने पर बोझ बन चुकी हैं। हालाँकि, अब वैसे ही वादे कांग्रेस हरियाणा में भी कर रही है, लेकिन पार्टी इन्हे पूरा कैसे करेगी ये एक बड़ा सवाल है।   

बहरहाल, कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर से पानी की आपूर्ति का भी वादा किया है, जो राज्य के जल संकट को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है। यह घोषणापत्र पिछले सप्ताह दिल्ली में जारी की गई सात गारंटियों का विस्तार है, जिसमें पार्टी ने हरियाणा के लोगों के लिए सात महत्वपूर्ण वादों का उल्लेख किया था। यह सभी वादे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में पेश किए गए हैं।

पार्टी ने अपने घोषणापत्र में यह दावा किया है कि उसने सभी वर्गों को ध्यान में रखकर अपनी योजनाएँ बनाई हैं। कांग्रेस ने दावा किया है कि उसने अपनी पिछली सरकार में किए गए वादों को पूरा करने में सफलता हासिल की है। घोषणापत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं के लिए रोजगार, और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ कई अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

मुख्य वादे 

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: कांग्रेस ने उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देने का वादा किया है।

युवाओं के लिए रोजगार: युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन किया जाएगा।

बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं: कांग्रेस ने 25 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने का वादा किया है।

महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता: महिलाओं को हर महीने 2000 रुपये की सहायता देने का वादा किया गया है।

किसान आयोग का गठन: कृषि विकास और किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक विशेष आयोग बनाया जाएगा।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी: किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दी जाएगी।

वंचितों को आवास: वंचित वर्ग के लोगों को 100 वर्ग गज का प्लॉट सुनिश्चित किया जाएगा।

अल्पसंख्यक आयोग का गठन: अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगा।

खेल नीति का विकास: हरियाणा में खेलों के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए एक मजबूत खेल नीति लाई जाएगी, जिससे खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा सके।

कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने घोषणापत्र जारी करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी आगामी चुनाव में जीत हासिल करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस घोषणापत्र को समय-समय पर देखा जाएगा और सभी वादों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

'आज की रात ही सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, ये नया भारत है, घर में घुसकर मारता है', जम्मू में बोले पीएम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जम्मू पहुंचे। पीएम मोदी जम्मू में जनसभा को संबोधित करते हुए खूब गरजे। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, आज की रात ही सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। साल 2016 में 28 सितंबर की रात सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। भारत ने दुनिया को बता दिया था कि ये नया भारत है घर में घुस कर मारता है।इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी जमकर हमला बोला। 

जम्मू-कश्मीर के एमए स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय संकल्प रैली के दौरान कहा कि ये चुनाव जम्मू-कश्मीर का भविष्य चुनने के लिए है। आज शहीद वीर सरदार भगत सिंह की जन्मजयंती भी है। देश के करोड़ों युवाओं की प्रेरणा, भगत सिंह जी को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू की ये सभा इस विधानसभा चुनाव की मेरी आखिरी सभा है। मुझे बीते हफ्तों में जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में जाने का अवसर मिला है। मैं जहां भी गया, वहां भाजपा को लेकर अभूतपूर्व उत्साह दिख रहा है। 

यहां के लोग आतंक नहीं, अलगाववाद चाहते हैं- पीएम

पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग आतंकवाद, अलगाववाद और हिंसा नहीं चाहते हैं। यहां के लोग शांति और समृद्धि चाहते हैं। यहां के लोग अपने बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं। और यह सुनिश्चित करने के लिए यहां के लोग भाजपा सरकार चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर के लोग कांग्रेस, एनसी और पीडीपी के तीन खानदानों से त्रस्त हैं। लोग फिर वही निजाम नहीं चाहते, जिसमें भ्रष्टाचार हो, नौकरियों में भेदभाव हो। जम्मू-कश्मीर के लोग आतंक, अलगाव और खून-खराबा अब नहीं चाहते हैं। यहां के लोग अमन-शांति चाहते हैं।

भाजपा सरकार ने गोली का जवाब गोले से दिया- पीएम

पीएम ने कहा कि ये नया भारत है, घर में घुसकर मारता है। आतंकवाद पर कांग्रेस की नीति गलत थी। बीजेपी सरकार ने गोली का जवाब गोले से दिया है। पीएम ने कहा कि याद कीजिए वो वक्त जब उधर से गोलियां चलती थीं और कांग्रेस सफेद झंडे लहराती थी। जब भाजपा सरकार ने गोली का जवाब गोले से दिया तो उस तरफ के लोगों को होश आया। आज 28 सितंबर है। साल 2016 में 28 सितंबर की रात सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था। भारत ने दुनिया को बताया था, ये नया भारत है, ये घर में घुस कर मारता है। आतंक के आकाओं को पता है अगर कुछ भी हिम्मत की तो मोदी पाताल में भी उन्हें खोज निकलेगा।

भाजपा की जो सरकार यहां बनेगी, वो आपकी पीड़ा को दूर करेगी- पीएम

पीएम ने कहा कि पिछले 2 चरणों में हुए भारी मतदान ने जम्मू-कश्मीर की जनता का मूड बता दिया है। दोनों चरणों में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त वोटिंग हुई है। अब यहां भाजपा की पूर्ण बहुमत की पहली सरकार बनना तय है। जम्मू क्षेत्र के लोगों के लिए इतिहास में पहले कभी ऐसा मौका नहीं आया है, जो इस चुनाव में आया है। अब पहली बार जम्मू क्षेत्र के लोगों की इच्छा वाली सरकार बनने जा रही है। आपको इस मौके को छोड़ना नहीं है। क्योंकि भाजपा की जो सरकार यहां बनेगी, वो आपकी पीड़ा को दूर करेगी।

'वन रैंक वन पेंशन' का किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के लिए मर मिटने वालों का कांग्रेस कभी सम्मान नहीं कर सकती। यही कांग्रेस है जिसने 4 दशक तक हमारे फौजी परिवारों को 'वन रैंक वन पेंशन' के लिए तरसाया। कांग्रेस ने हमारे फौजियों से झूठ बोला। ये कहते थे कि 'वन रैंक वन पेंशन, ओआरओपी से खजाने पर जोर पड़ेगा लेकिन मोदी ने फौजी परिवारों के हित के आगे कभी भी खजाने को नहीं देखा है और इसलिए 2014 में सरकार बनने के बाद हमने ओआरओपी लागू किया। अब तक फौजी परिवारों को एक लाख 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिल चुका है। हाल ही में हमने ओआरओपी को रिवाइव भी किया है जिससे फौजी परिवारों को और अधिक पैसा मिलना तय हुआ है।

तेलंगाना में डिप्टी सीएम के घर चोरी, सोने के बिस्कुट, गहने और नकदी साफ़, दो संदिग्धों की हुई पहचान

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू के घर में हुई चोरी के सिलसिले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इनकी पहचान बिहार के रोशन कुमार मंडल और उदय कुमार के रूप में हुई है। दोनों को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया, जब रेलवे पुलिस ने उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर ध्यान दिया।

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अधिकारियों ने आरोपियों के पास से 2.2 लाख रुपये नकद, 100 ग्राम सोने के बिस्किट, और विदेशी मुद्रा जैसे ब्रिटिश पाउंड, यूएई दिरहम और स्विस फ़्रैंक बरामद किए। बताया गया है कि चोरी तब हुई थी जब उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क आधिकारिक यात्रा पर विदेश गए थे। रेलवे पुलिस अधिकारी देबाश्री सान्याल ने बताया कि संदिग्धों के पास से चांदी के बर्तन और मोती के आभूषण जैसे अन्य चोरी के सामान भी मिले, जो यह संकेत देते हैं कि वे कई चोरियों में शामिल रहे हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने तेलंगाना पुलिस को मामले की जानकारी दी।

जांच जारी है कि क्या इस अपराध में और भी लोग शामिल थे। इस घटना ने एक गंभीर सवाल उठाया है: जब एक उपमुख्यमंत्री का घर ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता किससे अपनी सुरक्षा की उम्मीद कर सकती है? यह घटना सरकार की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की क्षमता पर भी सवाल उठाती है।

अग्निवीरों के लिए 'ब्रह्मोस' ने खोले दरवाजे, नौकरियों में देगा 50% आरक्षण, बनी पहली कंपनी
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ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड इंडो-रूस जॉइंट वेंचर के रूप में भारत की पहली ऐसी कंपनी बन गई है, जिसने अग्निवीरों के लिए नौकरियां आरक्षित करने का ऐलान किया है। कंपनी ने तकनीकी पदों के लिए 15% और प्रशासनिक व सुरक्षा भूमिकाओं के लिए 50% नौकरियों में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। यह कदम भारतीय सेना की अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए युवाओं को सिविल नौकरी के अवसर प्रदान करने के लिए उठाया गया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने कहा कि वे अपने विभिन्न कार्य केंद्रों में कम से कम 15% तकनीकी और सामान्य प्रशासनिक पदों के लिए अग्निवीरों की भर्ती करेंगे। इसके साथ ही, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए आउटसोर्स किए गए कार्य केंद्रों में 50% रिक्तियों को अग्निवीरों से भरा जाएगा। इसके अलावा, कंपनी थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रेक्ट स्टाफिंग के तहत भी अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की योजना बना रही है। यह पहल ब्रह्मोस एयरोस्पेस को अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को रोजगार प्रदान करने वाली पहली कंपनी बनाती है। इस योजना के तहत, अग्निवीरों को नियमित रोजगार के साथ-साथ आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रेक्ट्स के माध्यम से भी काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने अनुभव और स्किल्स का लाभ उठाकर सिविल करियर में आसानी से शामिल हो सकेंगे। अग्निपथ योजना का उद्देश्य चार साल के लिए युवाओं को सशस्त्र बलों में भर्ती करके भारतीय सेना की क्षमताओं को आधुनिक बनाना है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस का यह कदम प्राइवेट सेक्टर में एक मिसाल कायम करता है, जिससे यह दिखता है कि निजी कंपनियां भी सैन्य कर्मियों के कल्याण और उनके सिविल करियर में स्थानांतरण में योगदान दे सकती हैं। इससे पहले, सभी CAPFs (BSF, CRPF, CISF, और ITBP) ने भी अग्निवीरों के लिए 10% नौकरियों में आरक्षण की घोषणा की थी। साथ ही, इन बलों में फिजिकल टेस्ट और आयु सीमा में भी छूट दी गई है। यूपी पीएससी ने भी पूर्व अग्निवीरों के लिए छूट का प्रावधान किया है, जिससे वे सिविल सेवाओं में आसानी से समायोजित हो सकें।
विदेश में भी बजा वंदे भारत एक्सप्रेस का डंका, कनाडा समेत कई देशों ने दिखाई खरीदने की इच्छा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेक इन इंडिया पॉलिसी का पूरी दुनिया में डंका बज रहा है। वंदे भारत ट्रेनों की मांग विदेशों में भी बढ़ती जा रही है। चिली कनाडा और मलेशिया जैसे कई देशों ने भारत से वंदे भारत ट्रेनों के आयात में रुचि दिखाई है। बता दें कि देश में वंदे भारत एक्सप्रेस तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और कई रूट्स पर इसे चलाने की मांग बढ़ रही है।

कीमत बनी सबसे बड़ा कारण

वंदे भारत को खरीदने में इनके दिलचस्पी के कई कारण हैं, जिसके चलते वे वंदे भारत को खरीदना चाहते हैं।सबसे बड़ा कारण वंदे भारत ट्रेन की लागत है। जहां अन्य देशों में निर्मित समान सुविधाओं वाली ट्रेनों की लागत 160-180 करोड़ रुपये के बीच होती है, वहीं भारत वंदे भारत का निर्माण बहुत कम कीमत पर हुआ है। भारत की वंदे भारत ट्रेन की कीमत 120 से 130 करोड़ रुपये है।

रफ्तार जापान की बुलेट ट्रेन को दे रही मात

इसके अलावा वंदे भारत गति पकड़ने के मामले में भी दूसरे देशों को मात दे रही है। सूत्रों की मानें तो वंदे भारत को 0 से 100 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने में सिर्फ 52 सेकंड लगते हैं, जो जापान की बुलेट ट्रेन से भी अधिक है, जिसे 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में 54 सेकंड का समय लगता है। सूत्रों का कहना है कि वंदे भारत को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बेहतर डिजाइन किया गया है। इसमें विमान की तुलना में सौ गुना कम शोर का अनुभव होता है और इसकी ऊर्जा खपत बहुत कम होती है। वहीं भारतीय रेलवे भी तेजी से अपने ट्रैक नेटवर्क का विस्तार करने और पर्याप्त संख्या में ट्रेनों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

बता दें कि 2019 में दिल्ली से वाराणसी के लिए पहली वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होने के बाद से, यह सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन देश के भीतर परिवहन का एक लोकप्रिय साधन बन गई है। भारत में अन्य ट्रेनों की तुलना में यह बहुत तेज़ और हल्की है, यह न केवल यात्रा के समय को कम करती है, बल्कि वाईफाई कनेक्टिविटी, 32 इंच की मनोरंजन स्क्रीन, विशाल कांच की खिड़कियां और बहुत कुछ जैसी सुविधाओं और विशेषताओं के साथ यात्रियों की यात्रा को भी बेहतर बनाती है। वंदे भारत एक्सप्रेस अब पूरे भारत में 40 से अधिक मार्गों पर चलती है। इसके साथ ही, त्योहारी सीजन के साथ-साथ सर्दियों की यात्रा की माँगों को पूरा करने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

भारत ने कश्मीर पर शहबाज शरीफ के बयान को बताया हास्यास्पद, यूएन में यूं लगाई फटकार

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पाकिस्तान हर बार भारत से झिड़की खाने के बाद भी नहीं सुधरता। पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र महासभा ;(यूएनजीए) में अक्सर कश्मीर को लेकर जहर उगलता है। इसके जवाब में भारत से हर बार खरी-खोटी सुनता है। एक बार फिर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर पानी-पानी होना पड़ा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया था। उन्होंने भारत के खिलाफ इंटरनेशनल मंच से जहर उगला था। इसे लेकर अब भारत ने जवाब दिया है।

भारतीय डिप्लोमैट भाविका मंगलनंदन ने यूएनजीए में पाकिस्तान को जवाब देते कहा कि पाकिस्तान की वैश्विक छवि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली है, वह अपने पड़ोसी के खिलाफ सीमापार आतंकवाद को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। भारतीय डिप्लोमैट ने शाहबाज शरीफ के भाषण की आलोचना करते हुए बताया कि पाकिस्तान ने कैसे आतंकवाद का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर में चुनावों को बाधित करने की कोशिश की है।

गिनाए पाक की कारनामें

भाविका मंगलनंदन ने कहा, अफसोस के साथ आज यह असेंबली एक मजाक का गवाह बनी है। आज सुबह इस सभा में दुखद रूप से एक हास्यास्पद घटना घटी। सेना की ओर से चलाया जाने वाला एक देश जिसकी प्रतिष्ठा आतंकवाद, ड्रग्स के व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अपराध के लिए है, उसके पास दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर हमले का दुस्साहस है। उन्होंने आगे कहा, लंबे समय से दुनिया जानती है कि पाकिस्तान ने सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल अपने पड़ोसियों के खिलाफ किया है। इसने हमारी संसद, हमारी आर्थिक राजधानी मुंबई, मार्केट और तीर्थयात्रा के रास्तों पर हमले किए हैं। लिस्ट बहुत लंबी है।

आतंकवाद पर लगाई फटकार

मंगलनंदन ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि वास्तविक सच्चाई यह है कि पाकिस्तान हमारे क्षेत्र पर लालच करता है और वास्तव में भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग जम्मू और कश्मीर में चुनावों को बाधित करने के लिए लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल करता रहा है। भारत की ओर से मंगलनंदन ने कहा, रणनीतिक संयम के कुछ प्रस्तावों का संदर्भ दिया गया है। आतंकवाद के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। वास्तव में, पाकिस्तान को यह महसूस करना चाहिए कि भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद अनिवार्य रूप से परिणामों को आमंत्रित करेगा। यह हास्यास्पद है कि एक राष्ट्र जिसने 1971 में नरसंहार किया और जो आज भी अपने अल्पसंख्यकों को लगातार सताता है, असहिष्णुता और भय के बारे में बोलने की हिम्मत करता है।

क्या बोले थे शहबाज?

इससे पहले पाकिस्तान ने शुक्रवार को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया और कहा कि भारत को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के फैसले को वापस लेना चाहिए और मुद्दे के ‘शांतिपूर्ण’ समाधान के लिए उसके (पाकिस्तान) साथ बातचीत करनी चाहिए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र की आम बहस में 20 मिनट से अधिक के अपने संबोधन में जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया साथ ही अनुच्छेद 370 और आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी का संदर्भ दिया।

मोहम्मद मुइज्जू के बदले सुर, बोले-मालदीव में इंडिया आउट मेरी पॉलिसी नहीं

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मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में भारत के द्विपक्षीय दौरे पर आएंगे। वह 6 से 10 अक्टूबर के बीच भारत में रहेंगे। भारत दौरे पर आने से पहले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मुइज्जू ने कहा है कि उन्होंने कभी भी 'इंडिया आउट' नीति का पालन नहीं किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भारतीय सैनिकों को मालदीव छोड़ने का आदेश दिया क्योंकि विदेशी सेना की मौजूदगी गंभीर समस्या है और उनके देश के लोग विदेशी सैनिक अपनी जमीन पर नहीं चाहते हैं।

मुइज्जू ने मालदीव के समाचार पोर्टल adhadhu.com से बातचीत में कहा, 'हम कभी भी किसी एक देश के खिलाफ नहीं रहे हैं। हमने कभी इंडिया आउट की बात नहीं की लेकिन ये बात है कि मालदीव के लोग अपनी जमीन एक भी विदेशी सैनिक नहीं चाहते और इस भावना का हमने सम्मान किया। मोहम्मद मुइज्जू इस समय संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका में हैं।

मुइज्जू ने यह भी कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गलत कमेंट करने वाले अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। नरेंद्र मोदी पर मालदीव के कुछ नेताओं की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए मुइज्जू ने जोर देकर कहा कि किसी को भी ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। मैं इस तरह किसी का भी अपमान स्वीकार नहीं करूंगा, हर इंसान की एक प्रतिष्ठा होती है।

भारत के साथ तनाव के बाद उत्पन्न हुए हालात के बाद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के अब होश ठिकाने आते दिख रहे हैं। उन्हें यह बात समझ आ गई कि भारत के बिना उनके देश का काम नहीं चल सकता। मुज्जू के भारत दौरे को द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। 

राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने अपने देश की निर्भरता भारत पर कम करने का प्रयास किया, जिसके कारण दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई थी। मुइज्जू की सरकार ने मालदीव में तैनात 85 भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने की मांग की और भारत के साथ 2019 में किए गए संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण समझौते को समाप्त करने का निर्णय लिया, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और भी खराब हो गए।

क्या हसन नसरुल्लाह भी मारा गया? लेबनान में हिजबुल्लाह के हेडक्वार्टर पर बड़े हमले के बाद इजराइल का दावा

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इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हमले तेज हो गए हैं। इसी क्रम में इजरायल की सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दहीह क्षेत्र में बड़ा हवाई हमला किया है। इजरायली सेना ने कहा है कि उसने इस हमले में लेबनानी गुट हिजबुल्लाह के केंद्रीय सैन्य कमांड सेंटर को तबाह कर दिया है।एक इजरायली अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इजरायल से पुष्टि की कि हमलों का लक्ष्य हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह था, जो उस समय कमांड सेंटर में मौजूद था। वहीं हिजबुल्लाह से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि नसरल्लाह की मौत की बात में सच्चाई नहीं है, वह जिंदा है।

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इजराइल की खुफिया एजेंसी को शुक्रवार को पता चला कि 6 बजे नसरल्लाह हेडक्वार्टर पहुंचेगा। इसके 5 मिनट बाद इजराइल ने हिजबुल्लाह के हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। हमले में उसके भाई समेत हिजबुल्लाह के कई कमांडर मारे जाने का दावा किया गया है। इस हमले में हिजबुल्लाह के कई आतंकियों के मारे जाने की भी खबर है।

सेना के एक अधिकारी ने कहा, ऐसे हमले से उसके जीवित बच निकलने की कल्पना करना बहुत कठिन है। कई हिब्रू मीडिया रिपोर्टों में इस बढ़ते इजरायली आकलन का हवाला दिया गया है कि नसरल्लाह भूमिगत हेडक्वार्टर पर हमले में मारा गया। यह हमला हिजबुल्लाह के एक शीर्ष कमांडर के अंतिम संस्कार में हजारों लोगों के शामिल होने के एक घंटे बाद हुआ। कमांडर एक दिन पहले मारा गया था।

बेरूत में हुए विस्फोट के बाद आसमान में नारंगी और काले रंग के धुएं का गुबार छा गया। इस हमले ने लेबनान की राजधानी को हिलाकर रख दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बेरूत से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर में घरों की खिड़कियां हिल गईं और घर हिल गए।यह हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष के लगभग एक साल में बेरूत में सबसे बड़ा हमला था।

यह हमला ऐसे दिन किया गया, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया है। हिजबुल्लाह मुख्यालय पर हुए इस हमले से कुछ देर पहले ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र को बताया था कि लेबनानी के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

नेतन्‍याहू के यूएनजीए संबोधन में लगे “शर्म करो” के नारे, फिर भी जंग से पीछे हटने से इनकार

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इजराइल अभी थमने वाला नहीं है। अमेरिका और यूरोप जैसे देश लगातार इजरायल पर सीजफायर का दबाव बना रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू युद्ध से पीछे नहीं हटेंगे। उन्‍होंने बाइडेन को सीजफायर प्‍लान को रिजेक्‍ट कर दिया है।हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच जारी जंग के चलते अमेरिका, फ्रांस ने 21 दिनों का सीजफायर प्लान बनाया था। इस प्लान को मानने से इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ इनकार कर दिया है। नेतन्याहू का कहना है कि किसी भी हालत में इस जंग को नहीं रोका जाएगा और हिजबुल्लाह पर उनकी ओर से बमबारी जारी रहेगी।

न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए इजराइल के प्रधानमंत्री, बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका-फ्रांस के 21 दिनों के सीजफायर प्लान को मानने से साफ इनकार कर दिया है। जैसे ही इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने विश्व नेताओं को संबोधित करना शुरू किया, कई प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा छोड़ना शुरू कर दिया। दर्शकों ने 'शर्म करो, शर्म करो' चिल्लाना शुरू कर दिया।

इस दौरान नेतन्याहू ने कहा, "जब मैंने इस मंच पर कई वक्ताओं द्वारा अपने देश पर लगाए गए झूठ और बदनामी को सुना, तो मैंने यहां आने और रिकॉर्ड स्थापित करने का फैसला किया।" इज़रायली पीएम ने ईरान को चेतावनी भी दी कि अगर उसने उनके देश पर हमला करने की हिम्मत की, तो "हम जवाबी हमला करेंगे।" उन्होंने कहा कि ईरान में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां इजरायली एजेंसियां नहीं पहुंच सकतीं।

नेतन्याहू का कहना है कि किसी भी हालत में इस जंग को नहीं रोका जाएगा और हिजबुल्लाह पर उनकी ओर से बमबारी होती रहेगी। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम अपने सभी लक्ष्यों को पूरा नहीं कर लेते, उनमें से मुख्य है उत्तर में रहने वालों की सुरक्षित उनके घरों में वापसी।

बता दें कि, अमेरिका, फ्रांस और अन्य सहयोगी देशों ने 21 दिनों के संघर्ष विराम का संयुक्त आह्वान किया है। लेबनान के विदेश मंत्री ने संघर्ष विराम प्रयासों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उनका देश इजरायल की ओर से ‘लेबनान के सीमावर्ती गांवों में मचाई जा रही सुनियोजित तबाही’ की निंदा करता है। इस बीच इजरायली वाहनों, टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को लेबनान से सटी देश की उत्तरी सीमा पर जाते हुए देखा गया है। कमांडरों ने रिजर्व सैनिकों को बुलाने का आदेश जारी किया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर, MUDA स्कैम मामले में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) घोटाले मामले में एफआईआर दर्ज की है। कर्नाटक के एक स्पेशल कोर्ट ने लोकायुक्त टीम को जांच का जिम्मा सौंपा है। याचिकाकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए जन प्रतिनिधि कोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक लोकयुक्त से इस मामले की जांच कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद आज मैसूरु लोकयुक्त पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया।

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लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम और भूमि कब्जा निवारण अधिनियम के तहत अदालत द्वारा निर्धारित आईपीसी धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की। सीएम सिद्धारमैया पर आरोप A 1 है, पत्नी पार्वती पर आरोप A 2 है। वहीं, मुख्यमंत्री के साले मल्लिकार्जुन स्वामी को आरोपी नम्बर 3 और देवराज को आरोपी नम्बर 4 बनाया गया है। मुख्यमंत्री पर अपने अधिकारों को दुरुपयोग करके उनकी पत्नी के नाम मैसुरु में MUDA साइट आवंटित करने का आरोप लगा है।

सिद्धरमैया ने बीजेपी पर साधा निशाना

वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को दावा किया कि मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि आवंटन मामले में उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि विपक्ष उनसे डरता है। इसके साथ ही, सिद्धरमैया ने कहा कि यह उनके खिलाफ पहला राजनीतिक मामला है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मामले में अदालत द्वारा उनके खिलाफ जांच का आदेश दिये जाने के बाद भी वह इस्तीफा नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेंगे।

केंद्र सरकार पर सीबीआई, ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों और देश भर में विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपाल के कार्यालय का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में राज्यपाल के ‘हस्तक्षेप’ के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस की जरूरत है।

खरगे ने क्या कहा?

इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि MUDA के लोग जो चाहें वे कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह जरूरी नहीं है कि सरकार उसके सभी सवालों का जवाब दें, क्योंकि वह एक स्वायत्त निकाय होने के कारण कार्रवाई कर ही सकता है।

खरगे ने सीएम सिद्धारमैया का समर्थन करते हुए कहा कि उनलोगों निजी तौर पर कोई भी अपराध यदि किया हो तो इसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार हैं, लेकिन वह ऐसा मानते हैं कि उन्होंने ऐसा कोई भी अपराध नहीं किया है। उन्हें बदनाम किया जा रहा है। पार्टी को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता है।