सांप्रदायिक हिंसा में बेटा खोया, बीजेपी ने बनाया था उम्मीदवार, अब सात बार के विधायक को दी मात

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राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बन रही है। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस को जीत मिली है। हर बार की तरह इस बार भी कई चौंकाने वाले रिजल्ट देखने को मिले।खासकर छत्तीसगढ़ में भाजपा ने बंपर जीत हासिल की है। चुनाव परिणाम से पहले तक कांग्रेस राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व में आसान जीत की उम्मीद लगाए बैठी थी। हालांकि, परिणाम ठीक इसके उलट आया। छत्तीसगढ़ चुनाव परिणाम में सबसे ज्यादा चर्चा साजा विधानसभा सीट की रही।छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले की साजा सीट पर काफी रोचक मुकाबला देखने को मिला। यहां के साधारण किसान ईश्वर साहू ने छह बार के विधायक और मंत्री रविंद्र चौबे को हराकर चौंका दिया।

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साजा विधानसभा सीट पर हुई दिलचस्प लड़ाई में बीजेपी उम्मीदवार ने कांग्रेस उम्मीदवार को हरा दिया। हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस पार्टी से सात बार के विधायक रहे रवींद्र चौबे का मुकाबला पहली बार चुनाव लड़ रहे ईश्वर साहू से था। दरअसल, ईश्वर साहू वो शख्स हैं, जिनके बेटे की आठ अप्रैल 2023 को हुई सांप्रदायिक हिंसा में हत्या हुई थी।उन्हें बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया था। ये अलग बात है कि उन्होंने आज तक सरपंच का भी चुनाव नहीं लड़ा है। उनके सामने 1990 से चुनाव लड़ रहे और नेता प्रतिपक्ष रह चुके रवींद्र चौबे थे। ये उनका आठवां चुनाव था। लेकिन रवींद्र चौबे का ना तो अनुभव काम आया ना पार्टी की साख। 

रविंद्र चौबे को 5297 वोटों से हराया

छत्तीगसढ़ की साजा सीट पर करीब 60 हजार साहू वोटर हैं जो कि निर्णायक साबित होते हैं। भाजपा ने इन वोटरों को ईश्वर साहू के पक्ष में करने की पूरी कोशिश की। जब चुनाव के परिणाम आए तो ईश्वर साहू को कुल 101789 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस के रविंद्र चौबे को 5297 वोटों से हराया है। 

सांप्रदायिक हिंसा में खो चुके हैं बेटा

साजा में इसी साल अप्रैल में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। स्कूली मारपीट से शुरू हुई इस घटना ने जल्द ही सांप्रदायिक दंगों का रूप धर लिया था। इस घटना में दो मुस्लिम और एक हिंदू व्यक्ति की मौत हुई थी। दोनों पक्षों की तरफ से आगजनी की घटनाएं हुईं। घर जलाए गए। इन हिंसक झड़पों में भुवनेश्वर साहू की हत्या हुई। भाजपा ने भुवनेश्वर साहू के पिता ईश्वर साहू को टिकट दिया था।ईश्वर साहू लगातार वोट के बदले अपने बेटे के लिए इंसाफ देने की बात कहते रहे। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि ईश्वर साहू भावनात्मक ढंग से यह चुनाव को लड़े।

बीजेपी बोली- लोकतांत्रिक लड़ाई में अन्याय का बदला लिया

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने भी ईश्वर साहू की जीत की चर्चा की है। उन्होंने लिखा है- "ये छत्तीसगढ़ भाजपा के विधानसभा उम्मीदवार ईश्वर साहू हैं। इन्होंने कांग्रेस के 7 बार के विधायक रविंद्र चौबे को हराया है। इनका बेटा भीड़ की हिंसा में मारा गया और हमेशा की तरह कांग्रेस दंगाइयों का समर्थन कर रही थी। आज ईश्वर ने लोकतांत्रिक लड़ाई में अन्याय का बदला लिया। बधाई हो।

मिजोरम में जेडपीएम का जलवा, रुझानों में मिला बहुमत

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मिजोरम की सभी 40 विधानसभा सीटों पर 7 नवंबर को मतदान हुआ था और आजा यानी 4 दिसंबर को चुनाव के नजीते घोषित किए जाएंगे। मिजोरम विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। सुबह 10 बजे तक सामने आए रुझानों में जेडपीएम बहुमत के आंकड़े को पार चुकी है। बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत है। हालांकि, जेडपीएम 24 सीटों पर आगे चल रही है। सत्तारूढ़ एमएनएफ 13 और कांग्रेस एक सीट पर आगे है। अन्य दल दो सीटों पर आगे चल रहे हैं।

मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की सरकार है। 2018 के विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट ने बहुमत हासिल करते हुए 26 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। बाद के उपचुनावों में दो और सीटों पर जीत दर्ज की थी। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष और मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रहेगी।

मिजोरम के मुख्यमंत्री और एमएनएफ के प्रमुख जोरमथंगा आईजोल ईस्ट से लड़ रहे हैं। बीजेपी के राज्य प्रमुख वनलालहमुका डम्पा और कांग्रेस की मिजोरम इकाई के प्रमुख लालसावता आइजोल पश्चिम-3 निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं। जेडपीएम अध्यक्ष लालदुहोमा सेरछिप सीट से फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। मिजोरम के 11 जिलों में से सबसे ज्यादा 55 उम्मीदवार आइजोल जिले की 12 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सबसे कम तीन उम्मीदवार हनाथियाल जिले की एकमात्र सीट पर चुनावी मैदान में हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र आज से, पेश होंगे 19 विधेयक

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विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। 22 दिसंबर तक चलने वाला संसद का शीतकालीन सत्र इस बार गरम रह सकता है।तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली हार से निराश विपक्ष एकजुट होकर सत्तारूढ़ भाजपा पर बेरोजगारी, महंगाई, मणिपुर हिंसा और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर हमला बोलेगी। वहीं शानदार जीत से उत्साहित भाजपा आक्रामक तरीके से विपक्ष पर पलटवार करेगी।

19 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें होंगी। इस सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं क्योंकि सत्र के पहले ही दिन ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़ी एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट में महुआ को सस्पेंड करने की सिफारिश की है।अगर लोकसभा इस रिपोर्ट को अनुमोदित कर देती है तो मोइत्रा की सदस्यता खत्म हो जाएगी।

इसके अलावा संसद के शीतकालीन सत्र में कई विधेयकों को पेश किया जा सकता है। शीतकालीन सत्र में सरकार तेलंगाना में सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी स्थापित करने और जम्मू कश्मीर और पुड्डुचेरी विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने वाले विधेयक समेत 7 नए विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है।इसके अलावा IPC, CRPC और आपराधिक प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम को रिप्लेस करने वाले प्रस्तावित कानून भी पेश किए जाएंगे। शीतकालीन सत्र में भारतीय न्याय संहिता विधेयक-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक-2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 समेत तमाम विधेयकों पर भी चर्चा कर सकती है।

विचारधारा की लड़ाई जारी रहेगी, 3 राज्यों में करारी हार के बाद बोले राहुल गांधी

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मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। वहीं कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस को चार राज्यों में सिर्फ एक तेलंगाना में ही जीत मिली है। चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्‍होंने कहा कि जनादेश को हम विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। विचारधारा की लड़ाई जारी रहेगी। तेलंगाना में कांग्रेस पहली बार सरकार बनाने जा रही है। इसपर उन्‍होंने कहा कि प्रजालु तेलंगाना बनाने का वादा हम जरूर पूरा करेंगे।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का जनादेश हम विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं - विचारधारा की लड़ाई जारी रहेगी। तेलंगाना के लोगों को मेरा बहुत धन्यवाद - प्रजालु तेलंगाना बनाने का वादा हम ज़रूर पूरा करेंगे। सभी कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत और समर्थन के लिए दिल से शुक्रिया।

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, तेलंगाना की जनता ने इतिहास रचते हुए कांग्रेस पार्टी के पक्ष में जनादेश दिया है। यह प्रजाला तेलंगाना की जीत है। यह प्रदेश की जनता और कांग्रेस पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता की जीत है।

सनातन का श्राप ले डूबा..'! कांग्रेस नेताओं ने खुलेआम स्वीकारा- हिन्दू धर्म के अपमान और जातिवादी कार्ड के कारण हारी पार्टी

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छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों से जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) खेमे में खुशी की लहर है, वहीं कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। संकेतकों के अनुसार, भाजपा तीन राज्यों में सरकार बनाने के लिए तैयार है जबकि कांग्रेस तेलंगाना में सत्तारूढ़ BRS को मात दे रही है। अब, कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन ने पार्टी के भीतर से अपनी नाराजगी व्यक्त करने और सवाल उठाने की आवाज उठाई है। प्रमुख कांग्रेस नेता और प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक सलाहकार, आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि ये आंकड़े हिंदू धर्म के विरोध और पार्टी की हिंदू विरोधी मानसिकता का परिणाम हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए एक सवाल के जवाब में प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह तय करना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस का सफाया हो गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि, 'हालाँकि जहाँ ट्रेन चली है वहाँ अंधेरा है। यह कांग्रेस पार्टी के कार्यों का परिणाम है, जो पहले महात्मा गांधी की शिक्षाओं का पालन करती थी, लेकिन अब कार्ल मार्क्स की शिक्षाओं का पालन करती है। सनातन धर्म का विरोध करके कोई भी पार्टी भारत में राजनीति नहीं चल सकती। कांग्रेस इसे ध्वस्त करने के इरादे की घोषणा करने वालों का समर्थन करती है।' इसे महात्मा गांधी का अनुकरण करने वाली पार्टी के रूप में संदर्भित नहीं किया जाएगा। वह एक सच्चे धर्मनिरपेक्षतावादी थे।” बता दें कि, तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को ख़त्म करने की बात कही थी, और कई कांग्रेस नेताओं ने उनका समर्थन किया था। इस मुद्दे पर राहुल गांधी से भी उम्मीद की गई थी कि, वे अपने नेताओं को सनातन के खिलाफ न बोलने के लिए समझाएंगे, लेकिन उन्होंने इसे तवज्जो देना ही उचित नहीं समझा। उस समय राहुल गांधी 'मोहब्बत की दूकान' का नारा दे रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने ही नेताओं को भारत की बहुसंख्यक आबादी के धर्म के खिलाफ नफरती बयान देने से नहीं रोका, इससे जनता के बीच गलत सन्देश गया। क्योंकि, किसी अन्य धर्म पर टिप्पणी होने पर राहुल फ़ौरन बयान देते दिखाई देते हैं, लेकिन सनातन पर उनकी चुप्पी कई लोगों को अखरी थी।

 

प्रमोद कृष्णम ने एक ट्वीट में भी यही भावना व्यक्त की, जिसमे उन्होंने लिखा, "सनातन का श्राप ले डूबा," क्योंकि कांग्रेस ने धर्म का अनादर किया। आध्यात्मिक गुरु और राजनेता प्रमोद कृष्णम ने बताया कि कांग्रेस ने उन्हें 2018 में स्टार प्रचारक के पद पर बिठाया था, जिसके बाद उन्होंने तीनों राज्यों में जीत हासिल की, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि, 'तब कांग्रेस ने पहली बार किसी हिंदू धार्मिक नेता को अपना प्रचार अभियान बनाया था। कांग्रेस के रणनीतिकारों की कोई मजबूरी रही होगी कि मुझे इन चुनावों में जिम्मेदारी नहीं दी गई। कुछ कांग्रेसी भगवान राम का जिक्र ही नहीं करना चाहेंगे। वे सनातन पर कोई चर्चा नहीं चाहते। जो हिंदू धर्म को गाली देता है, उसे पार्टी में सबसे बड़ा नेता बना दिया जाता है।'

उन्होंने चुनाव परिणाम पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, ''हमें उम्मीद है। हालाँकि, हर समय मैंने कहा कि सनातन का विरोध मत करो। मैंने उनसे कहा कि वे भाजपा से लड़ें, भगवान राम से नहीं। मैंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री भारत के हैं, सिर्फ भाजपा के नहीं। उनका अपमान मत करो। प्रधानमंत्री का सम्मान करें। चाहे कोई भी प्रधानमंत्री हो, लोग अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस में कुछ ऐसे नेता हैं जो हिंदुत्व से नाराज़ हैं और इसे कमज़ोर करने के लिए जाति की राजनीति को बढ़ावा देते हैं।'

कांग्रेस के एक अन्य महत्वपूर्ण समर्थक तहसीन पूनावाला, जिन्हें नियमित रूप से समाचार बहसों में पार्टी का समर्थन करते देखा जाता है, ने चुनाव परिणामों के लिए कांग्रेस के हिंदू विरोधी रुख और अन्य पिछड़ा वर्ग के मुद्दे को आगे बढ़ाने को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने "सचिन पायलट के साथ हुए अन्याय" को उठाया और कहा कि इससे राजस्थान में पार्टी को नुकसान हुआ। भाजपा चैहाटीगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस से सत्ता छीनने में सफल रही है और अगले पांच वर्षों तक मध्य प्रदेश में शासन जारी रखेगी। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व पंद्रह वर्षों से अधिक समय से मध्य भारतीय राज्य में सत्ता में है। तेलंगाना में राजनीतिक जनादेश हासिल करने के लिए कांग्रेस ने के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति को उखाड़ फेंका है।

जनता-जनार्दन को नमन, आइए मिलकर विकसित भारत बनाएं’ जानें चार राज्यों में आए चुनाव परिणाम पर और क्या बोले पीएम मोदी

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रविवार को चार राज्यों के नतीजे आ गए। इन चारों राज्यों में तीन राज्यों में बीजेपी को बड़ी जीत हासिल हुई है। इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन प्रदेशों की जनता के प्रति अपना धन्यवाद व्यक्त किया है।

पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट करके जनता का आभार जताया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, 'जनता-जनार्दन को नमन! मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि भारत की जनता का भरोसा सिर्फ और सिर्फ सुशासन और विकास की राजनीति में है, उनका भरोसा भाजपा में है। भाजपा पर अपना स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद बरसाने के लिए मैं इन सभी राज्यों के परिवारजनों का, विशेषकर माताओं-बहनों-बेटियों का, हमारे युवा वोटर्स का हृदय से धन्यवाद करता हूं। मैं उन्हें भरोसा देता हूं कि आपके कल्याण के लिए हम निरंतर अथक परिश्रम करते रहेंगे।'  

उन्होंने आगे लिखा, 'इस अवसर पर पार्टी के सभी परिश्रमी कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से आभार! आप सभी ने अद्भभुत मिसाल पेश की है। भाजपा की विकास और गरीब कल्याण की नीतियों को आपने जिस तरह लोगों के बीच पहुंचाया, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है। हम विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हमें ना रुकना है, ना थकना है। हमें भारत को विजयी बनाना है। आज इस दिशा में हमने मिलकर एक सशक्त कदम उठाया है।'

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की जनता के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना की जनता को भी अपना धन्यवाद दिया है। उन्होंने लिखा- तेलंगाना की मेरी प्यारी बहनों और भाइयों, आपके समर्थन के लिए धन्यवाद। पिछले कुछ सालों में यह समर्थन बढ़ता ही जा रहा है और आने वाले समय में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने लिखा, तेलंगाना के साथ हमारा रिश्ता अटूट है और हम लोगों के लिए काम करते रहेंगे। मैं प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के मेहनती प्रयासों की भी सराहना करता हूं।

छह दिसंबर को दिल्ली में 'इंडिया' का जुटान, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुलाई गठबंधन की बैठक

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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में आज वोटों की गिनती जारी है। इसी बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 6 दिसंबर को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक बुलाई है।बता दें कि रुझानों में मध्यप्रदेश-राजस्थान में बीजेपी बहुमत के पार पहुंच गई है।जबकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर चल रही है।

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पहले ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ किया था कि 5 राज्यों में चुनाव नतीजे आने के बाद विपक्षी गठबंधन की बैठक बुलाई जाएगी।इसमें सीटों के बंटवारे से लेकर गठबंधन के संयोजक के नाम समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा होगी।बता दें कि इंडिया गठबंधन की पहली बैठक पटना में आयोजित की गई थी। वहीं दूसरी बैठक बंगलूरू में और तीसरी बैठक मुंबई में, जबकि खरगे ने चौथी बैठक दिल्ली में बुलाई थी।

इंडिया गठबंधन में ये पार्टियां शामिल 

विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आप, जदयू, राजद, झामुमो, राकांपा (शरद पवार), शिवसेना (यूबीटी), सपा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, माकपा, भाकपा, रालोद, एमडीएमके, कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची (केएमडीके), वीसीके, आरएसपी, भाकपा-माले (लिबरेशन), फॉरवर्ड ब्लॉक, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (जोसेफ), केरल कांग्रेस (मणि), अपना दल (कमेरावाड़ी) और मणिथनेया मक्कल काची (एमएमके) शामिल हैं।

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहा चक्रवाती तूफान, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

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बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दाब का क्षेत्र बन रहा है। निम्न दाब का ये क्षेत्र शनिवार को डीप डिप्रेशन में बदल गया। भारत मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार को अगले 24 घंटे में यह चक्रवाती तूफान मिचौंग में बदल जाएगा। इस चक्रवात का प्रभाव तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश पर ज्यादा पड़ेगा। इसके साथ ही तेलंगाना, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी इस चक्रवात की वजह से बारिश हो सकती है।

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मौसम विभाग का कहना है कि 4 दिसंबर की शाम तक यह चक्रवाती तूफान मिचौंग आंध्र प्रदेश में माचिलीपत्तनम और चेन्नई के तट से टकरा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब का जो क्षेत्र बन रहा है, उसका केंद्र चेन्नई के समुद्र तट से 800 किलोमीटर, माचिलीपत्तनम से 970 किलोमीटर, आंध्र प्रदेश के ही बापातला से 990 किलोमीटर और पुडुचेरी के तट से 790 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है।

मौसम विभाग के अनुसार गहरे अवसाद के 3 दिसंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और दक्षिण आंध्र प्रदेश और आसपास के इलाकों को पार करेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 4 दिसंबर की शाम के आसपास चेन्नई और मछलीपट्टनम के बीच उत्तरी तमिलनाडु तट एक चक्रवाती तूफान के रूप में सामने आ सकता है।

भारतीय मौसम विभाग ने मिचौंग तूफान के चलते तमिलनाडु के तटीय इलाकों, पुडुचेरी और कराइकल में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 दिसंबर से लेकर 4 दिसंबर तक 204 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो सकती है। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग की इस चेतावनी को देखते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य के सभी अधिकारियों से चक्रवात से प्रभावित होने की संभावना वाले स्थानों से लोगों को निकालने समेत सभी ऐहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया है।

दक्षिण में कर्नाटक के बाद तेलंगाना में खुला कांग्रेस के लिए एक और द्वार, जानिए कांग्रेस की अच्छी बढ़त का किसे दिया जा रहा श्रेय

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मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में मतगणना जारी है।रुझानों में तेलंगाना में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है।तेलंगाना में हुए पिछले दो विधानसभा चुनावों के दौरान तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब भारत राष्ट्र समिति) को कोई सीधी टक्कर नहीं दे पाया था लेकिन साल 2023 में परिस्थितियां अलग दिखीं। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस की रैलियों में भीड़ जमकर उमड़ रही थी और इसी से अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि कांग्रेस इस बार केसीआर (बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव) के लिए कड़ी चुनौती बनने वाली है।आज आ रहे चुनाव परिणाम इसे साबित भी कर रही है।

तेलंगाना जीत से दक्षिण में एक और द्वार कांग्रेस के लिए खुल जाएगा। कहा जा रहा है कि तेलंगाना फतह से आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस बढ़त ले लेगी क्योंकि जगन मोहन रेड्डी और चन्द्रबाबू नायडू की हालत पतली है। बीजेपी के हाथ से भले आंध्र चला जाए, लेकिन केंद्र के सियासी गणित से बीजेपी छेड़छाड़ नहीं करेगी। ऐसे में आंध्र में बीजेपी जगन रेड्डी के मामले में बैकफुट पर ही रहना पसंद करेगी। इस तरह कांग्रेस दक्षिण में बेहद मजबूत हो जाएगी। कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, आंद्र प्रदेश में एक से दो पोजीशन पर ही होगी।

बता दें कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी भारत राष्ट्र समिति को सत्ता से बेदखल करने में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती थी।यही वजह है कि उसने अपने सभी बड़े नेताओं को यहां उतार दिया था।कांग्रेस ने यहां के वोटरों को अपनी तरफ खींचने के लिए कर्नाटक के सीएम, डिप्टी सीएम समेत करीब 3/4 नेताओं को यहां उतार दिया था। कर्नाटक सरकार का 75% मंत्रिमंडल तेलंगाना में चुनावी प्रचार संभाले हुए थे। कर्नाटक में कांग्रेस ने बीजेपी को बड़ी शिकस्त दी थी। इसके अलावा उसकी पांच गारंटी भी वहां काफी चर्चित रही। इसी योजना को अपनाते हुए कांग्रेस ने तेलंगाना में 6 गारंटी पेश की।

कन्हैयालाल का क़त्ल, सांप्रदायिक दंगे, हिन्दू त्योहारों पर प्रतिबंध ! क्या राजस्थान में कांग्रेस के पिछड़ने की वजह 'तुष्टिकरण' ? , पढ़िए, पूरी खबर

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चार राज्यों में मतगणना जारी है। इसमें भाजपा राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आसानी से सरकार बनाती नज़र आ रही है। वहीं, तेलंगाना में सत्ताधारी BRS के हाथ से सत्ता जाती नज़र आ रही है और कांग्रेस बढ़त में है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी और अब वहाँ भाजपा आगे चल रही है। वहीं, मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता में वापसी करती नज़र आ रही है।

इन सब चुनावों में राजस्थान के चुनाव का एक अलग ही महत्व था। यहाँ काँटे की टक्कर की उम्मीद थी, लेकिन भाजपा यहाँ सत्ता में आती दिख रही है। कुछ सियासी जानकारों का मानना था कि राज्यों में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार फिर से वापसी करेगी और हर पाँच वर्ष पर सरकार बदलने का यहाँ का पुराना रिवाज टूटेगा। हालाँकि, पीएम नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की एक रैली में कांग्रेस की सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील की थी। राजस्थान के चुनाव में आतंकी हमले के शिकार हुए दर्जी कन्हैया लाल का मुद्दा भी जमकर उठा था। 

राजस्थान कांग्रेस की सरकार में महिला उत्पीड़न और हिंदुओं पर हमलों हुए निरंतर हमलों ने कांग्रेस सरकार को बैकफुट ला दिया था। राज्य में आतंकियों के मनोबल ने इतना बढ़ गया था कि वे खुलेआम हमले कर रहे थे और सरकार भी हिंदुओं के रामनवमी और हनुमान जयंती पर्व में शोभायात्रा निकालने पर बैन लगा रही थी। कांग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की पुरानी नीति ने राजस्थान में हिंदुओं को उद्वेलित किया और एक बार फिर पुरानी सियासी दल को दोहराते हुए भाजपा की वापसी का रास्ता स्पष्ट किया। सामने आ रहे रूझानों से स्पष्ट पता चल रहा है कि राजस्थान में कन्हैयालाल के क़त्ल वाले फैक्टर ने काफी असर दिखाया है। हालाँकि, ‘लाल डायरी’, परीक्षा पत्र का आउट होना, भर्तियों में भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति हिंसा आदि ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई।

 

बता दें कि 28 जून 2022 को उदयपुर के कन्हैयालाल की ही दुकान में घुसकर कट्टरपंथी मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। उनकी अस्थियों को आज भी विसर्जन की प्रतीक्षा है, क्योंकि कातिलों को अब तक सजा नहीं हुई है। कन्हैयालाल की निर्मम हत्या के बाद कट्टरपंथियों ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने चितौड़गढ़ की एक जनसभा को संबोधित करते हुए 2 अक्टूबर को कहा था कि, “यहाँ अशोक गहलोत सोते-जागते अपनी कुर्सी बचाने में लगे थे और आधी कांग्रेस उनकी कुर्सी गिराने में लगी हुई थी। जनता को अपने हाल पर छोड़कर ये लोग आपसी जंग में व्यस्त रहे। कांग्रेस ने राजस्थान को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी।'

पीएम मोदी ने जनसभा में कहा था कि, '5 वर्षों में कांग्रेस सरकार ने राजस्थान की साख को नष्ट कर दिया है। मैं बेहद दुखी मन से कहता हूँ कि जब अपराध, दंगे, महिलाओं-दलितों पर जुल्म की बात होती है, तो राजस्थान शीर्ष पर आता है। मैं बेहद दुःख के साथ आपने पूछता हूँ कि क्या 5 वर्ष पूर्व आपने इसलिए राजस्थान को वोट दिया था?' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि उदयपुर में जो हुआ, उसकी किसी ने सोचा भी नहीं होगा था। लोग कपड़े सिलवाने के बहाने आते हैं और बगैर किसी डर या दहशत के दर्जी का गला काट देते हैं, इस मामले में भी कांग्रेस को वोट बैंक दिखाई दिया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उदयपुर दर्जी हत्याकांड में कांग्रेस पार्टी ने क्या किया, वोट बैंक की सियासत की?'

 राजस्थान में परीक्षाओं में हिजाब-बुर्के की अनुमति दी गई, लेकिन अन्य बच्चियों के सलवार-कमीज़ की आस्तीनें काटकर उनकी तलाशी ली गई, इससे भी जनता में आक्रोश पनपा। REET परीक्षा में महिलाओं के मंगलसूत्र, कान की बालियां​ तक उतरवा ली गई थीं, लेकिन हिजाब में युवतियां परीक्षा देने पहुंची थीं।​ वहीं, राजस्थान के करौली में हिन्दू नव वर्ष के अवसर पर हिंदुओं की शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला कर दिया गया था। वो अपने घरों की छतों पर हिंदुओं की प्रतीक्षा ही कर रहे थे। जैसे ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाके से निकलने लगा, तो पथराव शुरू हो गया। बाइक पर सवार हिंदुओं को पत्थर मारे गए। जुलूस में शामिल 40-50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। इस दौरान भी राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगा। करौली में दंगों से पीड़ित हिन्दू अपने घरों पर 'यह घर बिकाऊ है' के पोस्टर लगाने और पलायन करने के लिए भी मजबूर हो गए थे। इसी तरह के हमले जोधपुर और भीलवाड़ा में भी हुए थे। ये एक ट्रेंड की तरह था, कोई भी हिन्दू त्यौहार हो, लोग शोभायात्रा निकालें तो, मुस्लिम इलाके में उसपर हमला होना ही है। ये ट्रेंड देश के कई राज्यों में देखा गया, हालाँकि, कई जगह आरोपियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन कांग्रेस सरकारों पर उचित कार्रवाई न करने के आरोप लगे। अजमेर और अलवर में हज़ारों लोगों ने सड़कों पर 'सर तन से जुदा' के नारे लगाए, लेकिन गहलोत सरकार उन्हें रोकने में भी विफल दिखी। 

इन हमलों में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का नाम सामने आया था। ये संगठन 2047 तक भारत में इस्लामी शासन लागू करने के मिशन पर काम कर रहा था। लेकिन, ये PFI राजस्थान में खुलेआम रैलियां निकाल रहा था। इसे भी कांग्रेस सरकार की बड़ी भूल माना गया और पार्टी पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगे। सियासी जानकारों का मानना है कि, कन्हैयालाल की हत्या, बढ़ता कट्टरपंथ, हिन्दू त्योहारों पर प्रतिबंध, तुष्टिकरण के चलते आरोपियों पर कार्रवाई न करना, राजस्थान में कांग्रेस को पीछे रखने में इन सभी चीज़ों की भूमिका रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, राजस्थान में भाजपा 113 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस को 70 पर बढ़त है, राज्य में बहुमत का आंकड़ा 101 है, जिसे भाजपा आसानी से हासिल करती दिख रही है।