धर्म कर्म, 16 दिसंबर से पहले निपटा लें सभी शुभ कार्य, वरना एक महीना करना होगा इंतजार

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इस बार खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से होने जा रही है तथा समापन 16 जनवरी को होगा। खरमास आरम्भ होने के बाद अगले 30 दिनों तक मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तभी खरमास की शुरुआत होती है। दरअसल, खरमास शुरू होने में केवल 18 दिन ही शेष है तथा इस बीच कोई भी मांगलिक कार्य करना बेहद अशुभ माना जाता है। 

ज्योतिषियों के अनुसार, खरमास शुरू होने से पहले कुछ विशेष काम निपटा लें। वरना खरमास में अगले एक महीने तक अवसर नहीं प्राप्त होगा। खरमास के इस माह में किसी भी नए बिजनेस या कारोबार का आरम्भ करना बेहद अशुभ माना जाता है। इसलिए, चाहे तो खरमास से पहले ही बिजनेस की शुरुआत कर लें। दिसंबर आने से पहले ही विवाह जैसे शुभ अनुष्ठान निपटा लें तथा ये सभी अनुष्ठान किसी अच्छे मुहूर्त में ही निपटाएं। 

इसके चलते जनेऊ, गृह प्रवेश, लग्न, मुंडन और अन्य मंगल कार्यों पर भी रोक होती है। इसलिए, ये सभी मांगलिक कार्य भी अच्छे मुहूर्त में निपटा लें। खरमास के चलते पूजा करने की कोई विशेष विधि या कोई शुभ मुहूर्त नहीं होता है। इसलिए, कोई खास पूजा करवानी है तो खरमास से पहले ही करवा लें। इसके साथ ही खरमास में नया घर नहीं खरीदना चाहिए तथा ना नया घर बनवाना चाहिए। ये कार्य भी खरमास आरम्भ होने से पहले ही करवा लें। नहीं तो फिर आपको एक महीने का इंतजार करना पड़ेगा।

एमपी में मतगणना से पहले सीएम शिवराज ने बुलाई कैबिनेट की अहम बैठक, सीएस इकबाल की विदाई के कयास

एमपी में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सरकार बनने से पहले ही अपने चौथे कार्यकाल की अंतिम कैबिनेट बैठक बुला ली है। चुनाव आचार संहिता के मध्य 30 नवंबर को यह कैबिनेट बैठक होने वाली है। बैठक को सुबह 11:30 बजे बुलाई गई है। इसका कोई एजेंडा नहीं है। इस बैठक के लिए मंत्रियों के साथ ही साथ सभी CS, PS और सचिवों को भी आमंत्रण भेजा गया है। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि ACS इकबाल सिंह बैंस की विदाई हो सकती है।

 

प्रदेश में विधानसभा के चुनाव के लिए 17 नवंबर के दिन वोटिंग समाप्त हो गई है। 3 दिसंबर के दिन परिणाम आना है। इसके पूर्व 30 नवंबर के दिन सीएम ने कैबिनेट की आखिर बैठक बुला ली है। इसमें संभावना है कि पुराने चीफ सेक्रेटरी की विदाई हो सकती है साथ ही नए चीफ का चयन किया जा सकता है।

 

हो सकती है पुराने चीफ की विदाई

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विधानसभा चुनाव से पहले से ही पुराने चीफ सेक्रेटरी इकबाल सिंह बैंस के विदाई की खबरें मिल रही थी। उनके कार्यकाल के एक्सटेंशन की तारीख भी 30 नवंबर के दिन ही पूरा होने जा रहा था। इससे पहले भी उनका कार्यकाल 2 बार 6-6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। लेकिन इस बार ना तो उनके एक्सटेंशन के आदेश आए है और ना ही नए सचिव की नियुक्ति के आदेश आए भी आ चुके हगाई। ऐसे में अटकले लग रही है कि उनकी विदाई होने की बात कही जा रही है।

 

नए सचिव पर हो सकता है विचार

यदि इस बैठक के उपरांत चीफ सेक्रेटरी इकबाल सिंह बैंस को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो उनकी विदाई होना तय है। जिसके साथ ही नए सचिव के नाम का एलान भी हो सकता है। प्रदेश में सीनियरटी के हिसाब से देखा जाएगा तो वीरा राणा का नाम सबसे आगे है। वर्ष 1988 बैच की आईएएस वीरा राणा 2024 को रिटायर होने वाली है। इसलिए उनका सीएस बनाए जाने की चर्चा जोरो पर है। यदि जिसके उपरांत कोई भी सरकार बने अगले 4 महीनों तक वीरा राणा ही CS रहेंगी। यदि वीरा राणा मुख्य सचिव बनी तो प्रदेश में इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला सचिव भी होने वाली है। इससे पहले स्व. निर्मला बुच थी।

 

खबरों के मुताबिक सीएम शिवराज सरकार की चौथे शासनकाल में हो रही यह कैबिनेट की बैठक की अंतिम बैठक है। भले ही इस बैठक का कोई एजेंडा नहीं है लेकिन इसमें कुछ परंपराओं को निभाया जाता है। प्रदेश मुखिया यानी सीएम शिवराज सिंह चौहान सभी मंत्रियों के अलावा सभी ACS, PS और सचिवों को बुलावा भेजा गया है। इसमें सीएम अधिकारियों को अच्छे सहयोग और प्रदेश के विकास के लिए हुए कार्यों में साथ देने के लिए बधाई और धन्यवाद देंगे।

मणिपुर में उग्रवादी समूह यूएनएलएफ ने शांति समझौते पर किया हस्ताक्षर, अमित शाह ने कहा-ऐतिहासिक उपलब्धि

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मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने केंद्र के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।केंद्र और राज्य के साथ लंबी चली वार्ता के बाद यूएनएलएफ ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये जानकारी दी है। इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट कर खुशी जाहिर की। 

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर बताया कि ‘पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने एक नया अध्याय जोड़ा है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने आज एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।मणिपुर का सबसे पुराना घाटी स्थित सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा को त्यागने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल हुआ। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

एक और पोस्ट में गृह मंत्री ने कहा, भारत सरकार और मणिपुर सरकार की ओर से यूएनएलएफ के साथ आज हस्ताक्षरित शांति समझौता छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सर्वसमावेशी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने और पूर्वोत्तर भारत में युवाओं को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक माना जा रहा समझौता यूएनएलएफ पाम्बेई समूह के सदस्यों की मौजूदगी में हुआ। समझौते के लिए सभी लोग राष्ट्रीय राजधानी में गृह मंत्रालय पहुंचे थे।

गृह मंत्रालय द्वारा कई अन्य चरमपंथी संगठनों के साथ यूएनएलएफ पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद शांति समझौता हुआ।दरअसल, मणिपुर में केंद्र सरकार ने इससे पहले पीपुल्स लिबरेशन आर्मी समेत 9 चरमपंथी मेइती संगठनों पर पाबंदी लगा दी थी। इनमें से ज्यादातर मणिपुर में सक्रिय हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन समूहों को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया गया, उनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, जिसे आम तौर पर पीएलए के नाम से जाना जाता है, और इसकी राजनीतिक शाखा, रिवॉल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र शाखा मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) शामिल हैं।

कल पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देंगे 51 हजार लोगों को सरकारी नौकरी, कर्मचारियों को करेंगे संबोधित

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 नवंबर, 2023 को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ताजा नियुक्त हुए 51,000 से ज्यादा कर्मियों को अपॉइंटमेंट लेटर बाटने वाले है। इस अवसर पर पीएम नए नियुक्त हुए सरकारी कर्मचारियों को संबोधित भी करने वाले है। इस वर्ष कई रोजगार मेला के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी कई लाख लोगों को सरकारी नौकरी दे चुके हैं।

इन मंत्रालयों और विभागों में होगी नियुक्ति

यह रोजगार मेला देश भर में 37 स्थानों पर आयोजित किया जाने वाला है। सेंट्रल गवर्नमेंट के विभागों के साथ-साथ राज्य सरकारों/केन्द्र- शासित प्रदेशों में रिक्रूटमेंट भी किए जा रहे है। देश भर से चुने गए नए कर्मचारी सरकार के गृह मंत्रालय, रेवेन्यू डिपार्टमेंट, उच्च शिक्षा विभाग, डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ लेबर मिनिस्ट्री और रोजगार मंत्रालय सहित अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारी डिपार्टमेंट में योगदान भी करने वाले है। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग में भी इन ताजा रिक्रूटर्स को भेजा जाने वाला है। सेंट्रल गवर्नमेंट की रोजगार मेला की पहल का समर्थन करने वाले राज्यों और यूनियन टैरेटरीज में ये अपॉइंटमेंट लेटर दिए जा रहे हैं।

ताजा रीक्रूटर्स को ऑनलाइन ट्रेनिंग भी मिलेगी

IGOT कर्मयोगी पोर्टल पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल कर्मयोगी प्रारंभ की सहायता से इन ताजा नियुक्ति वाले कर्मियों को खुद को ट्रेनिंग देने का अवसर भी मिलने वाला है। आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 'कहीं भी किसी भी डिवाइस पर' के लर्निंग फॉरमेट में 800 से अधिक ई-लर्निंग कोर्सेस मुहैया कराए गए हैं। ताजा रीक्रूटर्स इसकी मदद से और अपने क्रिएटिव विचारों और रोल से जुड़े अनुभवों के माध्यम से अन्य बातों के साथ-साथ देश के औद्योगिक, आर्थिक और सोशल डेवलपमेंट को मजबूत करने के लिए काम करके अपना योगदान देंगे।

प्रधानमंत्री के युवाओं को नौकरियां देने के विजन में मिलेगी मदद

PBI पर दी गई प्रेस रिलीज में कहा गया है कि ये रोजगार मेला पीएम की रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। इस रोजगार मेले से आगे और नौकरियों के अवसर पैदा करने की दिशा में सार्थक समर्थन मिलने का अनुमान भी लगाया जा रहा है।

 

तेलंगाना में कल विधानसभा चुनाव भी 

गुरुवार 30 नवंबर को तेलंगाना में विधानसभा चुनाव भी है और कल राज्य में मतदान होने वाला है जबकि कल ही 51 हजार लोगों को पीएम अपॉइंटमेंट लेटर देने वाले है। जिसके पूर्व 15 नवंबर 2023 को पीएम किसान सम्मान निधि की 15वीं किस्त का आवंटन किया गया इसके माध्यम देश के 8 करोड़ किसानों को करीब 18,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि पहुंचाई गई। उस समय कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसकी टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए थे कि जब 2 दिन बाद यानी 17 नवंबर को MP और छत्तीसगढ़ में चुनाव हुए उससे ठीक पहले ये राशि क्यों दी गई और क्या पीएम किसान की 15वीं किस्त देने में देरी जानबूझकर की गई थी।

सीएए को लेकर कोलकाता में गरजे अमित शाह, कहा-ये देश का कानून, इसे कोई नहीं रोक सकता

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नागरिकता संसोधन अधिनियम यानी सीए का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बुधवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता के धर्मतला में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित किया। इस रैली में अमित शाह ने सीएए को लेकर बड़ा बयान दिया। शाह ने पुरजोर शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार सीएए लागू करेगी और इसे कोई नहीं रोक सकता।

2024 में फिर नरेंद्र मोदी को पीएम बनाएं-शाह

रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि बंगाल की जनता भ्रष्ट तृणमूल सरकार (टीएमसी) को सत्ता से बाहर करने वाली है। उन्होंने कहा, कोलकाता में प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए मैं यह कहता हूं कि बंगाल के लोग टीएमसी सरकार को उखाड़ फेकने के लिए तैयार है। केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे कहा, अगर बंगाल में विकास चाहिए, सीमाओं की सुरक्षा चाहिए, सीएए लागू करना है तो अगले वर्ष लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाना होगा। इसके साथ ही बंगाल से भारी मतों से भाजपा के सदस्यों को जीताकर संसद भेजना होगा।

टीएमसी वाले ये पैसे गरीबों तक नहीं पहुंचने देते-शाह

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल की जनता के लिए लाखों रुपए भेजते हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस वाले ये पैसे गरीबों तक नहीं पहुंचने देते। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा बंगाल में होती है। बंगाल में घुसपैठियों को नहीं रोका जा रहा। बंगाल आज बम धमाकों से गूंज रहा है।

घुसपैठ पर ममता बनर्जी खामोश- शाह

अमित शाह ने कहा कि 27 साल बंगाल में कम्युनिस्टों का शासन रहा। तीसरे टर्म में ममता बनर्जी की सरकार बनी। दोनों ने मिलकर बंगाल को बर्बाद कर दिया। पूरे देश में चुनावी हिंसा सबसे ज्यादा बंगाल में होती है।ममता बनर्जी बंगाल में घुसपैठ को रोक नहीं पाई हैं। प्रदेश में खुलेआम घुसपैठियों को वोटर कार्ड और आधार कार्ड बंट रहे हैं और ममता बनर्जी चुप बैठी हैं।

आतंकियों और अपराधियों के बीच सांठगांठ पर अमेरिका ने किया अलर्ट, भारत ने एक उच्च स्तरीय जांच पैनल का किया गठन

#conspiracy_to_kill_sikh_extremist_in_america_india_formed_high_level_committee 

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पिछले हफ्ते अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने दावा किया था कि अमेरिका की धरती पर पन्नूं को मारने के प्रयास को नाकाम किया गया है और उसने इस साजिश में शामिल होने का आरोप भारत पर लगाया था। इसके बाद खुद अमेरिका ने संगठित अपराधियों, हथियारबंद हमलावरों और आतंकियों के बीच सांठगांठ का इनपुट भी भारत सरकार को दिया था। अब भारत ने अमेरिकी धरती पर एक सिख चरमपंथी को मारने की साजिश से संबंधित आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बुधवार को कहा कि भारत ने मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं पर गौर करने के लिए 18 नवंबर को एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। पन्नू एक सिख चरमपंथी है जिसके पास अमेरिका और कनाडा की नागरिकता है। भारतीय जांच एजेंसियों को आतंकवाद के विभिन्न आरोपों में उसकी तलाश है।

बागची ने कहा, हम पहले ही कह चुके हैं कि द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर अमेरिका के साथ चर्चा के दौरान, अमेरिकी पक्ष ने संगठित अपराधियों, बंदूक चलाने वालों, आतंकवादियों और अन्य लोगों के बीच सांठगांठ से संबंधित कुछ जानकारी साझा की थी।उन्होंने कहा, हमने यह भी संकेत दिया था कि भारत ऐसी सूचनाओं को गंभीरता से लेता है क्योंकि वे हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर भी प्रभाव डालती हैं और संबंधित विभाग पहले से ही इस मुद्दे की जांच कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, इस संदर्भ में यह सूचित किया जाता है कि 18 नवंबर को भारत सरकार ने मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं पर गौर करने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

दरअसल, पिछले हफ्ते ब्रिटेन के एक दैनिक अखबार ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि अमेरिका की धरती पर पन्नूं को मारने के प्रयास को नाकाम किया गया है और उसने इस साजिश में शामिल होने का आरोप भारत पर लगाया था।रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी-कनाडाई नागरिक गुरुपतवंत सिंह पन्नू को मारने की साजिश रची गईय़ वह सिख फॉर जस्टिस का जनरल काउंसिल है और भारत ने उसे आतंकवादी नामित किया हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि जब सितंबर के महीने में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, तो उस वक्त वहां हिस्सा लेने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी पहुंचे।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 5 साल के लिए बढ़ी गरीब कल्याण अन्न योजना

#garib_kalyan_anna_yojana_extended_for_5_years 

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। मोदी सरकार ने गरीब कल्याण अन्न योजना को 5 साल के लिए बढ़ा दिया है।इसके अलावा ड्रोन सखी योजना को भी मंजूरी दी गई है।इस योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। 

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट की बैठक के दौरान लिए गए फैसले की जानकारी दी। अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले 5 साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया है। इससे 81 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। भारत सरकार इस योजना के लिए 11 लाख 80 हजार करोड़ रुपए का खर्च करेगी।उन्होंने ये भी कहा कि पिछले 5 वर्षों में करीब 13.50 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत 30 जून 2020 को की गई थी। योजना के तहत गरीब लोगों को हर महीने 5 किलो चावल या गेंहूं बिना किसी शुल्क के मिलता है। केंद्र सरकार समय-समय पर इस योजना को आगे बढ़ाती रही है। इससे पहले इस योजना को साल 2023 तक के लिए बढ़ाया गया था। हालांकि, छ्त्तीसगढ़ चुनाव प्रचार के समय पीएम मोदी ने इस योजना को आगे बढ़ाने की बात कही थी। अब इसका आधिकारिक ऐलान हो गया है।

इसके अलावा आज कैबिनेट की बैठक में ड्रोन सखी योजना को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ड्रोन के माध्यम से खेतों में पेस्टिसाईट का छिड़काव किया जाएगा।अनुराग ठाकुर ने बताया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान करने की योजना को मंजूरी दी है। कृषि उपयोग के लिए किसानों को किराये की सेवाएं प्रदान करने के लिए 2023-24 से 2025-2026 के दौरान 15,000 चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान किए जाएंगे।ड्रोन उड़ाने वाली महिला को 15 हजार प्रति माह और सहयोगी को 10 हजार प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। यह योजना 2026 तक जारी रहेगी और इसमें कुल खर्च 1261 करोड़ रुपये होंगे।

इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में 16वें वित्त आयोग को मंत्रिमंडल ने टर्म ऑफ रिफ्रेंस का अनुमोदन दिया। सूचना प्रसारण मंत्री ने बताया कि 16वें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में केंद्र और राज्य सरकार के बीच करों से प्राप्त होने वाली राशि का विभाजन तय किया जाना है। राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान का भी निर्धारण किया जाएगा। नगरपालिका और पंचायत की आय बढ़ाने को भी शर्तों में शामिल किया गया है। 16वां वित्त आयोग अक्टूबर 2025 तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगा और इसकी सिफारिशें एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगा।

राहुल द्रविड़ ही रहेंगे हेड कोच, बीसीसीआई ने किया एलान, वर्ल्ड कप हारने के बावजूद बड़ा फैसला

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राहुल द्रविड़ टीम इंडिया के कोच बने रहेंगे। बीसीसीआई ने इसका ऐलान कर दिया है। यह कदम जून 2024 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिहाज से अहम माना जा रहा है।राहुल द्रविड़ की अगुवाई में टीम इंडिया वर्ल्ड कप 2023 नहीं जीत सकी। इसके बावजूद बीसीसीआई ने उन्हें दोबारा हेड कोच बना दिया है। बीसीसीआई ने उनके अलावा टीम इंडिया के दूसरे सपोर्ट स्टाफ का भी कॉन्ट्रैक्ट बढ़ा दिया है।

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वनडे विश्व कप का फाइनल 19 नवंबर को खेला गया था। इसमें टीम इंडिया का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हुआ, लेकिन वहां उसे हार का सामना करना पड़ा। बड़ी बात ये है कि उसी दिन टीम इंडिया के हेड कोच रहे राहुल द्रविड़ का भी कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि राहुल द्रविड़ आगे भी हेड कोच बने रहेंगे या फिर बीसीसीआई किसी नए दिग्गज को कोच बनाएगा। लेकिन इस पर से पर्दा हट गया है। बीसीसीआई ने अब ऐलान किया कि टीम इंडिया के हेड कोच राहुल द्रविड़ ही रहेंगे।वहीं, कोचिंग स्टाफ में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि द्रविड़ मुख्य कोच रहेंगे। विक्रम राठौर बल्लेबाजी कोच, पारस म्हाम्ब्रे गेंदबाजी और टी दिलीप फील्डिंग कोच के पद पर बने रहेंगे।

बीसीसीआई द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गाय कि हाल ही में संपन्न विश्व कप के बाद अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद बीसीसीआई ने राहुल द्रविड़ के साथ सार्थक चर्चा की और सर्वसम्मति से कार्यकाल को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। बोर्ड भारतीय टीम को तैयार करने में द्रविड़ की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करता है और उनकी असाधारण व्यावसायिकता की सराहना करता है। बोर्ड एनसीए के प्रमुख और स्टैंड-इन हेड कोच के रूप में उनकी अनुकरणीय भूमिकाओं के लिए वीवीएस लक्ष्मण की भी सराहना करता है। अपनी प्रसिद्ध ऑन-फील्ड साझेदारियों की तरह द्रविड़ और लक्ष्मण ने भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने में मिलकर काम किया है।

राहुल द्रविड़ ने हेड कोच की जिम्मेदारी दोबारा मिलने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि वो बीसीसीआई के शुक्रगुजार हैं कि उनपर दोबारा भरोसा जताया गया है। राहुल द्रविड़ ने कहा कि बीसीसीआई ने हमेशा से उनके प्लान और विजन का समर्थन किया है। राहुल द्रविड़ ने साथ ही अपने परिवार को भी शुक्रिया कहा जिन्होंने उनके लिए काफी बलिदान दिए हैं। राहुल द्रविड़ ने कहा कि वर्ल्ड कप के बाद उनके सामने नई चुनौतियां हैं और वो उनका सामना करने के लिए तैयार हैं।

इजराइल-हमास संघर्ष के बीच युद्ध विराम के फैसले का भारत ने किया स्वागत, बंधकों की बिना शर्त रिहाई की अपील

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इजराइल और हमास के बीच संघर्ष विराम चार दिन के बाद दो दिन और बढ़ गया है। भारत ने जंग के बीच युद्ध विराम के फैसले का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भारत ने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता दिवस के अवसर पर फिलिस्तीनी नागरिकों के साथ दीर्घकालिक संबंधों की पुष्टि की। बता दें, युद्ध में करीब 15 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पिछले पांच दिनों से दोनों पक्षों ने सीजफायर घोषित कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि 29 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय एकजुटता दिवस है। इस अवसर पर भारत फिलिस्तीनी लोगों के साथ दीर्घकालिक संबंधों की पुष्टि करता है। हम फिलिस्तीनी लोगों के शांति और समृद्धि का समर्थन करते हैं। मध्य-पूर्व में स्थिति तनावग्रस्त है इस्राइल-हमास युद्ध के कारण बड़ी मात्रा में नागरिक जीवन की हानि हो रही है। महिलाओं-बच्चों सहित अन्य लोग संकट में है। यह अस्वीकार्य है। हम नागरिकों की मौत की कड़ी निंदा करते हैं। हम उन तमाम फैसलों का स्वागत करते हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो सके।

कंबोज ने आगे कहा कि युद्ध के दौरान दोनों पक्षों ने सीजफायर का सम्मान किया। सीजफायर की घोषणा मानवीय संकट को कम करने के लिए स्वागत योग्य है। भारत आंतकवाद और नागरिकों को बंधक बनाने की कार्यवाही की निंदा करता है। बंधकों और उनके परिजनों के प्रति हमारी संभावनाएं हैं। बंधकों की रिहाई हो रही है, यह सुकून देता है। हालांकि, कंबोज ने शेष बंधकों की बिना शर्त रिहाई का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत आंतकवाद के खिलाफ सख्त है। युद्ध की शुरुआत होते ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शांति स्थापित करने के लिए तमाम प्रयास किए। पीएम मोदी और जयशंकर ने कूटनीति और बातचीत के लिए ढेरों कोशिशें की। हमारे नेताओं ने मानवीय सकंट पर हमेशा चिंता जाहिर की। 

भारत की मदद का किया जिक्र  

कंबोज ने महासभा में बताया कि भारत ने सिर्फ चिंता ही जाहिर नहीं की, बल्कि गाजा में राहत सामाग्री भी भिजवाई। भारत ने अपनी ओर से गाजा में 70 टन मानवीय सहायता भेजा। इसमें 16.5 टन तो सिर्फ दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा इस्राइल फलस्तीन मुद्दे पर बातचीत के माध्यम से दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है। भारत एक संप्रभु और स्वतंत्र फलस्तीन की कामना करता है, जो सुरक्षित हो और आंतकियों से मुक्त हो।

उत्तरकाशी में मजदूरों के सफल रेस्क्यू पर दुनियाभर में जय-जयकार, जानें विदेशी मीडिया में क्या-क्या कहा गया?

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया है।71वें दिन सुरंग से बाहर आते ही श्रमिकों का सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जोरदार स्वागत किया।एक तरफ इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जहां भारतीय लोगों ने राहत की सांस ली और सरकार को धन्यवाद दिया। वहीं, 400 से अधिक घंटे के बाद इस रेस्क्यू पर विदेशी मीडिया की खास नजर रही।विदेशी मीडिया में इस रेस्क्यू ऑपरेशन चर्चा में है। भारतीय मजदूरों के हौसले और रेस्क्यू टीम के कौशल की जमकर तारीफ हो रही है।

मजदूरों का जीवट और रेस्क्यू टीम के समर्पण से सफल हुआ अभियान-बीबीसी

इस अभियान की वैश्विक मीडिया ने सराहना की है। साथ ही पूरी दुनिया में इसका सीधा प्रसारण देखने को मिला। बीबीसी की ओर से लगातार इससे जुड़ा अपडेट दिया जा रहा था। उसने अपनी खबर में लिखा, 'सुरंग के बाहर, पहले व्यक्ति के निकलने की खबर के साथ ही जश्न का माहौल हो गया।' बीबीसी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की सुरंग से बाहर निकले मजदूरों से मिलने की तस्वीर पोस्ट की।बीबीसी ने इस ऑपरेशन की तारीफ करते हुए लिखा कि मजदूरों का जीवट और रेस्क्यू टीम के समर्पण ने जटिल लग रहे मिशन को सफल बनाया।

सीएनएन ने ऐसे की सराहना

सीएनएन ने खबर दी है, 'घटनास्थल के वीडियो फुटेज में उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उन श्रमिकों से मिलते हुए दिखाया गया है जिन्हें खुशी के माहौल के बीच सुरंग से निकाला गया था।' सीएनएन ने कहा कि श्रमिकों को बचाने के अभियान में कई रुकावटें भी आई जब मलबे में खुदाई के लिए इस्तेमाल की जा रही भारी मशीनें खराब हो गईं और उसके बाद मलबे में आंशिक रूप से हाथों से खुदाई करनी पड़ी और अन्य जोखिमपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ा।

यह इंसानी हौसले की मशीनों पर जीत है- द गार्जियन

ब्रिटेन के प्रमुख द गार्जियन अखबार ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा कि यह इंसानी हौसले की मशीनों पर जीत है। रिपोर्ट में कहा गया कि मानव श्रम ने मशीनरी पर विजय प्राप्त की है. जब मजदूरों तक पहुंचने के लिए ऑगर मशीन खराब हो गई तब अंतिम 12 मीटर मलबे को मैन्युअल तरीके से साफ किया गया. फिर पाइप के जरिए सभी मजदूरों को बाहर निकाला गया।

भारत के हालिया इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण और जटिल बचाव अभियान- वाशिंगटन पोस्ट

वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा-बचाव अभियान केवल कुछ दिनों तक चलने की उम्मीद थी। इसके बजाय, उन 41 निर्माण श्रमिकों तक पहुंचने में 17 दिन लग गए, जो इस महीने की शुरुआत में उत्तरी भारत में भूस्खलन के कारण एक पहाड़ी सुरंग ढह जाने से फंस गए थे।कष्टदायी इंतजार आखिरकार मंगलवार रात को खत्म हुआ और सभी को जिंदा बाहर निकाला गया। लेकिन खुशी और राहत से परे, यह सवाल बना हुआ है कि जो भारत के हालिया इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण और जटिल बचाव अभियानों में से एक बन गया।

बचाए गए लोगों का हीरो के रूप में स्वागत किया गया- डॉन

पाकिस्तानी न्यूज बेवसाइट डॉन ने लिखा-मंगलवार को जब बचावकर्मियों ने हिमालयी सड़क सुरंग से सभी 41 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला तो भारतीय कामगारों का जोरदार जयकारों और फूलों की मालाओं से स्वागत किया गया। विशेष रूप से स्ट्रेचर पर 57 मीटर (187 फीट) स्टील पाइप के माध्यम से खींचे जाने के बाद बचाए गए लोगों का मुस्कुराहट के साथ हीरो के रूप में स्वागत किया गया, जहां राज्य के अधिकारियों ने उनके परिवारों को गले लगाने से पहले उनका स्वागत किया।

17 दिनों बाद आखिरकार 41 परिवारों के लिए आई खुशखबरी

बता दें कि 17 दिनों से मजदूर टनल में फंसे हुए थे और उनके परिवारों की जान सांसत में थी। लगातार कोशिश और मुश्किलों के बाद भी रेस्क्यू टीम ने ऑपरेशन पूरा कर दिखाया। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सभी मजदूरों को राज्य सरकार की ओर से एक लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है।