पाकिस्तान में एयरबेस पर फिदायीन हमला, सेना का दावा-4 आतंकी ढेर

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पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के मियांवाली में पाकिस्तान एयरफोर्स के बेस स्टेशन पर शनिवार सुबह आतंकी हमले की खबर सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया गया है कि कई आत्मघाती हमलावरों और हथियारबंद जिहादियों ने मियांवाली में पाकिस्तान वायु सेना के अड्डे पर हमला किया है।पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने करीब चार आतंकियों को मार गिराया है।इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन तहरीक-ए-जिहाद ने ली है।

न्यूज साइट द फ्री प्रेस जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के मियांवाली एयरबेस में घुसने के लिए आतंकियों और आत्मघातियों ने दीवार पर सीढ़ी लगाई।रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकियों ने बेस के दो परिसरों पर हमला किया है। इस दौरान बेस के अंदर खड़े कई विमानों को नष्ट कर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादियों ने एयरबेस की सुरक्षा में लगे एक टैंक को भी नष्ट कर दिया है। खबरें ये भी हैं कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने करीब चार आतंकवादियों को मार गिराया है। हालांकि अभी तक आतंकियों की संख्या को लेकर कोई अपडेट सामने नहीं आया है। 

इस घटना से जुड़ी जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें एयरबेस में भीषण गोलीबारी और बमबारी के बाद आग लगी देखी जा सकती है। हालांकि, इन वीडियोज की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, एयरबेस पर छह आतंकियों ने हमला किया था। इनमें से तीन को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया। हालांकि, तीन आतंकी अभी भी बेस पर ही छिपे हैं।

तहरीक-ए-जिहाद ने क्या कहा?

इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन तहरीक-ए-जिहाद ने ली है।तहरीक-ए-जिहाद के प्रवक्ता मुल्ला मोहम्मद कासिम पाकिस्तानी एयरफोर्स पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी ली है। प्रवक्ता ने दावा किया है कि हमले में कई हमलावर शामिल थे। मियांवली एयरफोर्स बेस पर 9 मई को इमरान खान के समर्थकों ने तब हमला कर दिया था जब उनकी गिरफ्तारी हुई थी। इमरान खान के समर्थकों ने बेस पर आगजनी की थी। गिरफ्तारी से नाराज समर्थकों ने एक एयरक्राफ्ट को भी आग के हवाले कर दिया था। तहरीक-ए-जिहाद एक आतंकी संगठन है, जिसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है। तहरीक-ए-जिहाद पहले चमन, बोलान, स्वात के क्षेत्र कबल और लकी मरूत में हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ये संगठन कई हमलों में शामिल नहीं था मगर हमले की जिम्मेदारी ले ली। 

24 घंटे में दूसरा बड़ा हमला

पाकिस्तान के मियांवाली में हुआ हमला 24 घंटे में दूसरी बड़ी वारदात है। बता दें कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान इलाके में भी बम विस्फोट किया गया था। यहां पुलिस को निशाना बनाकर हमला किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में करीब 5 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद प्रधानमंत्री अनवारुल हक कांकेर ने निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि आतंक के खिलाफ उनकी जंग जारी रहेगी।

नेपाल में भूकंप से भारी तबाही, अबतक 128 लोगों की मौत, हजारों घायल

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नेपाल में एक बार फिर तेज भूकंप से भारी तबाही मची है।6.4 की तीव्रता से आए भूकंप से नेपाल में भारी तबाही मची है। तक 128 लोगों की मौत की खबर है और 1000 से अधिक लोग घायल हो गये हैं।नेपाल की न्यूज साइट काठमांडू पोस्ट के मुताबिक मारने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप मापन केंद्र के अधिकारियों के अनुसार भूकंप का केंद्र जाजरकोट जिले के लामिडांडा क्षेत्र में था।

नेपाल में शुक्रवार रात 6.4 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया, जिसके झटके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए। रात करीब 11 बजकर 32 मिनट पर आए भूकंप के कारण लोगों को अपने घरों से बाहर निकलना पड़ा। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान (एनसीएस) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र नेपाल में अयोध्या से लगभग 227 किलोमीटर उत्तर और काठमांडू से 331 किलोमीटर पश्चिम उत्तर-पश्चिम में 10 किलोमीटर की गहराई में था

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, शुक्रवार रात नेपाल में आए भूकंप के बाद शनिवार सुबह 5 बजे ताजा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, जाजरकोट के एक स्थानीय अधिकारी ने कहा कि भूकंप के कारण यहां 34 लोग मारे गए हैं। उधर, जजारकोट के पड़ोसी रुकुम पश्चिम जिले में करीब 36 लोगों की मौत की सूचना मिली है। इसके अलावा और भी इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।पश्चिमी रुकुम में भी भारी तबारी मची, जहां 62 लोगों की जान चली गई। कमोबेश 150 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. घायल लोगों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

भूकंप के झटके दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए, जिसके चलते ऊंची इमारतों में रहने वाले कई लोग बाहर निकल आए।भूकंप के झटके उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बस्ती, बाराबंकी, फिरोजाबाद, अमेठी, गोंडा, प्रतापगढ़, भदोही, बहराइच, गोरखपुर और देवरिया जिलों के अलावा बिहार के कटिहार, मोतीहारी तथा पटना में भी महसूस किए गए।

हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरुल्लाह ने हमास के समर्थन का किया एलान, कहा- हमले के सिवा कोई विकल्प नहीं था

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इजराइल-हमास युद्ध को एक महीने होने को हैं, लेकिन जंग है कि रूकने का नाम ही नहीं ले रही है।इसी बीच हिज्बुल्ला ने इजराइल के लिए परेशानी बढ़ा रखी है। इस बीच ‘हिजबुल्लाह’ के नेता हसन नसरुल्लाह ने हमास का समर्थन करने का ऐलान कर इजराइल की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन में बड़ा युद्ध हो रहा है, जो जिंदा हैं, उन्हें मारा जा रहा है। इजराइल की सरकार जालिम है।

नसरल्लाह ने कहा कि इस जंग में जो देश हमारे साथ खड़ें हैं, मैं उनका शुक्रिया करता हूं।उन्होंने कहा कि सभी को पता है कि फिलिस्तीनी लोग 75 साल से ज्यादा समय से परेशानी का सामना कर रहे हैं, लेकिन पिछले दिनों ये परेशानी काफी बढ़ गई है।इजराजल का क्रूर शासन फिलिस्तीन पर लगातार हमले कर रहा है।बहुत सारे फिलिस्तीनियों को कैद किया गया है, जो इजरायल की जेलों में कैद हैं।

हमास के पास हमले के सिवा कोई विकल्प नहीं था- नसरुल्लाह

हसन नसरुल्लाह ने लेबनान के बेरुत में बड़ी रैली की है।सभा में उन्होंने कहा कि अल अक्सा मस्जिद में शहीद हुए शहीदों के बारे में बात करेंगे। बात करना हमारा मकसद है। जंग में मारे गए लोगों के बारे में बात करूंगा। यह मारे गए लोगों के बारे में याद करने का समय है, जो मारे गए उन्होंने बड़ी कामयाबी हासिल की है। मारे गए लोगों पर बड़ा अत्यचार हुआ है। उन्होंने कहा कि हमास के पास हमले के सिवा कोई विकल्प नहीं था।

फिलिस्तीन में सबसे बड़ा युद्ध चल रहा है- नसरुल्लाह

हसन नसरुल्लाह ने कहा कि कोई भी युद्ध इसे बड़ा युद्ध नहीं है, जो इस वक्त फिलिस्तीन में चल रहा है। फिलिस्तीन में सबसे बड़ा युद्ध चल रहा है।उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन में जो हो रहा है कि वह बहुत की गलत हो रहा है। जो हो रहा है कि उस नफरत को बताने के लिए शब्द नहीं है।

कौन हैं नसरुल्लाह?

हसन नसरुल्लाह लेबनानी शिया इस्लामवादी समूह 'हिजबुल्लाह' के नेता हैं। उनका जन्म 18 अगस्त 1960 में एक शिया परिवार में हुआ था। 1975 में जब लेबनीज सिविल वॉर छिड़ा तो उनके परिवार को Bazourieh में जाकर बसना पड़ा। उस वक्त नसरुल्लाह 15 साल के थे। उन्होंने सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ही अमल मूवमेंट नाम का एक ग्रुप ज्वाइन किया जो एक लेबनानी शिया राजनीतिक समूह था। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वह शुक्रवार को अपने अनुयायियों को संबोधित कर सकते हैं, जो इज़राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद उनका पहला पब्लिक कमेंट होगा।

कंगना रनौत ने दिए पॉलिटिक्स में एंट्री के संकेत, बोलीं- भगवान श्री कृष्ण की कृपा रही तो लोकसभा चुनाव लड़ेंगीं

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बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। अक्सर कंगना राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखतीं हैं। ऐसे में लोग उनके सियासत में एंट्री को लेकर सवाल करते हैं। अब बॉलीवुड की क्वीन ने खुद अपने राजनीतिक सफर को लेकर बड़ा दिया है। कंगना रनौत ने मीडिया से बातचीत में लोकसभा चुनाव लड़ने का इशारा किया है।

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हाल ही में कंगना की फिल्म तेजस रिलीज हुई है। हालांकि उम्मीद के मुताबिक तेजस की कमाई ने कंगना को कुछ खास खुश नहीं किया है। फिल्म की रिलीज के बाद कंगना गुजरात के प्रसिद्ध यात्राधाम द्वारका के जगत मंदिर पहुंचीं। जहां उन्होंने भगवान के दर्शन किए और द्वारकाधीश मंदिर में माथा भी टेका। कंगना रनौत ने इस दौरान मीडिया से बात की और बातों ही बातों में चुनाव लड़ने का संकेत भी दे दिया।

दरअसल, यहां पत्रकारों ने उनसे 2024 के लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया। जिसका जवाब देते हुए कंगना रनौत ने कहा कि अगर भगवान श्री कृष्ण की कृपा रही तो लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उनके इस बयान के बाद ये माना जा रहा है कि अगर उन्हें मौका मिलेगा तो वह चुनाव लड़ सकती हैं।

सांप के जहर से कैसे करते हैं नशा? जिस केस में एल्विश यादव पर दर्ज हुई एफआईआर

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हेरोइन, कोकीन, मॉर्फिन का नशा करने वालों के बारे में तो सभी ने सुना है। अब देश में नशा करने का एक और तरीका खोज निकाला गया है। जिसे सांप के जहर का नशा कहते हैं। ऐसा नशा करने से जुड़ा एक मामला सामने आया है। देश की राजधानी दिल्ली से नोएडा में बिग बॉस ओटीटी-2 के विनर एल्विश यादव के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन पर अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक रेव पार्टी करने और उसमें सांप के जहर का नशा करने का आरोप लगा है।

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बिग बॉस ओटीटी के विजेता और यूट्यूबर एल्विश यादव पर नोएडा की रेव पार्टी में सांप का जहर सप्लाई करने के आरोप लगे हैं।इस संबंध में पुलिस ने एल्विश समेत छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में कहा गया है कि एल्विश यादव जहरीले और जिंदा सांपों के साथ नोएडा के फार्म हाउस में वीडियो बनाते हैं और रेव पार्टी कराते हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी में विदेशी महिलाएं भी शामिल होती हैं।और सांप के जहर को ड्रग्स की तरह लिया जाता है।

अब सवाल उठता है कि आखिर सांप के काट लेने से शरीर में फैलने वाला जहर किसी की जान ले लेता है तो इसका नशा कैसे किया जा सकता है? स्नेक बाइट के बाद शरीर में कैसा बदलाव होता है?

पिछले कुछेक सालों में ऐसी रिपोर्टें सामने आती रही हैं जिसमें कहा जा रहा है कि दिल्ली की रेव पार्टियों में सांप के जहर की मांग बढ़ती जा रही हैं। द संडे गार्डियन ने कुछ समय पहले प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली की रेव पार्टियों में सांप के जहर से बनी गोलियां या फिर सीधे सांप से कटवा नशा करने का चलन बढ़ा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोबरा के जहर का नशा दुनिया का सबसे बड़ा नशा है। पूरी दुनिया में कोबरा के जहर से नशा करने का ट्रेंड बढ़ने लगा है। इंडिया में यह ट्रेंड जोर पकड़ने लगा है, जिसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। सांपों और कोबरा की तस्करी के मामले और तस्करी करने वालों का पकड़ा जाना इसका उदाहरण है। साल 2017 में बिहार से 70 करोड़ रुपये का कोबरा का जहर मिल चुका है। कोबरा के जहर को पाउडर में बदला जाता है और फिर नशा किया जाता है।कोबरा के जहर से बने पाउडर को नशे के लिए ड्रिंक्स में मिलाया जाता है।

ऐसे मामलों से जुड़े लोगों का कहना है कि सांपों का जहर निकालने के बाद उसे अन्य तत्वों के साथ मिलाकर नशे के असर को हलक्का कर दिया है, ताकि यह जानलेवा न बन जाए। ये शराब, ड्रग्स जैसे दूसरे नशीले पदार्थों से भी ज्यादा प्रभाव डालने वाला होता है। जहर का इस्तेमाल करने वालों में तीन से चार हफ्तों तक अजीब सी खुशी, खुद को दुनिया से ऊपर समझने और अच्छी नींद आने जैसे लक्षण दिखते हैं।

चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन ऐंड रीसर्च के शोधकर्ताओं ने हाल ही में स्नेक बाइट लेने वाले लोगों पर एक अध्ययन किया था। इसमें उन्होंने दो लड़कों पर नजर रखी और देखा कि स्नेक बाइट लेने वाले इन लड़कों के शरीर में इसका क्या प्रभाव होता है। खबरों की मानें तो जब कोई स्नेक बाइट का नशा करता है तो सांप के काटते ही सबसे पहले उसे एक झटका महसूस होता है। इसके बाद धीरे-धीरे सब धुंधला हो जाता है। इसका नशा करने वाले बताते हैं कि स्नेक बाइट लेने के बाद एक घंटे तक वह पूरी तरह से सुन्न रहते हैं। आपको बता दें, कई बार लोगों की इस नशे के चक्कर में मौत भी हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने निलंबन मामले में आप सांसद राघव चड्ढा को दी सलाह, कहा-आप राज्यसभा चेयरमैन से माफी मांग लीजिए

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आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा के निलंबन मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनसे बिना शर्त माफी मांगने को कहा।शीर्ष अदालत ने कहा कि कथित तौर पर सदन में व्यवधान फैलाने के आरोप पर आप चेयरमैन से बिना शर्त माफी मांग लें।बता दें कि सदन में शोरशराबे के लिए चड्ढा को सभापति धनखड़ ने निलंबित कर दिया था।अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आप सासंद को आसान रास्ता अपनाने की सलाह दी है।मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को मुकर्रर की गई है।

सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि चड्ढा पहली बार के सांसद हैं और राज्यसभा के युवा सदस्य हैं। चेयरपर्सन उनकी माफी को गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव पर एटॉर्नी जनरल वेंकटस्वामी ने कहा कि चूंकि मामला सदन का है तो चड्ढा को माफी राज्यसभा में ही मांगनी होगी। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें लगता है कि इस मामले का सौहार्दपूर्वक समाधान हो जाएगा।

बता दें कि राज्यसभा से निलंबित सांसद राघव चड्ढा की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।पिछली सुनवाई में सीजेआई ने एजी से पूछा था कि इस तरह के अनिश्चितकालीन निलंबन का असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनके निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है। विशेषाधिकार समिति के पास सदस्य को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करने की शक्ति कहां है? क्या इससे विशेषाधिकार का उल्लंघन होता है?

अगस्त में 5 सांसदों की बिना मंजूरी के बिना उनका नाम सिलेक्ट कमिटी के लिए प्रस्तावित करने के कारण राज्यसभा चेयरमैन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके अलावा राज्यसभा ने इस मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है, जहां अभी इसकी सुनवाई होनी है।

“हम नहीं चाहते कि सुप्रीम कोर्ट तारीख-पे-तारीख अदालत बने”, फिल्म ‘दामिनी’ के डायलॉग के जरिए वकीलों पर खूब बरसे सीजेआई

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भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बार-बार स्थगन की वजह से अदालतों की कार्यवाही प्रभावित होने को लेकर नाराजगी जाहिर की है।मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को वकीलों से स्थगन का अनुरोध न करने की अपील की और ये तक कह दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट को ‘तारीख-पे-तारीख’ अदालत नहीं बनने देना चाहते।सीजेआई चंद्रचूड़ ने वकीलों से कहा है कि जब तक बहुत जरूरी न हो तब तक कृपया स्थगन का अनुरोध नहीं करें।

चीफ जस्टिस ने सनी देओल की बॉलीवुड फिल्म “दामिनी” के एक मशहूर डायलॉग का जिक्र किया, जिसमें अदालतों में स्थगन के इस चलन की आलोचना की गई थी।सीजेआई ने कहा कि हम ये नहीं चाहते कि ये अदालत तारीख पे तारीख कोर्ट बनकर रह जाए। उन्होंने वकीलों से कहा है कि जब जरूरी हो तो ही सुनवाई टालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने कुछ डेटा जुटाए हैं। इनके मुताबिक अगर सिर्फ आज की बात करें तो अभी तक 178 मुकदमों की सुनवाई को टालने की मांग की गई है। जबकि इसी साल सितंबर और अक्टूबर में कुल 3688 मामलों की सुनवाई टालने की मांग की गई थी।

ने वकीलों से आगे कहा कि सितंबर में 2361 मुकदमों में आगे की तारीख मांगी गई। अगर मैं आपको बताऊं तो हर दिन औसतन 59 मामले ऐसे आ रहे हैं। एक ओर मामलों को त्वरित आधार पर सूचीबद्ध किया जाता है। दूसरी ओर, उन पर जल्द सुनवाई की मांग की जाती है, फिर उन्हें सूचीबद्ध किया जाता है और फिर उन्हें टाल दिया जाता है। मैं बार के सदस्यों से अनुरोध करता हूं कि जब तक वास्तव में आवश्यक न हो, सुनवाई टालने की मांग न करें।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि अब वकीलों की संस्थाओं की मदद से शीर्ष अदालत में मामला दायर होने के बाद नए मामलों को सूचीबद्ध करने में समय का अंतर काफी कम हो गया है। उन्होंने इस तथ्य पर अफसोस जताया कि पीठ के समक्ष मामले सूचीबद्ध होने के बाद वकील स्थगन का अनुरोध करते हैं और यह बाहरी दुनिया के लिए बहुत खराब संकेत देता है।

अपनी धार्मिक मान्यताओं को दूसरों पर थोपने के खिलाफ हैं जस्टिस चंद्रचूड़..! धर्मांतरण करने करने वालों के लिए 'नसीहत' है CJI का ये बयान

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बीते कुछ सालों से देश में धर्मान्तरण के मामले तेजी से बढ़े हैं। अब तो हालात ये है कि, ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए बच्चों के ब्रेन वाश कर धर्मान्तरण कराया जा रहा है। इसका पूरा रैकेट ग़ाज़ियाबाद से पकड़ाया था। इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड शाहनवाज़ खान उर्फ़ बद्दो को गिरफ्तार किया था, जिसने ऑनलाइन गेमिंग के जरिए 400 बच्चों का ब्रेनवाश किया था। इसके अलावा, प्यार का झांसा देकर, डरा-धमकाकर या अन्य तरीकों से भी दूसरों पर अपना विश्वास थोपने की कोशिशें होती रहती हैं। दरअसल, किसी के धर्मांतरण की पूरी सोच उस विचार से पैदा होती है, जिसमे दावा किया जाता है कि, ''मेरा ही विश्वास, या मेरा ही ईश्वर सत्य है, बाकी सब का गलत।'' एक बार को व्यक्ति ये भी मान सकता है कि, केवल मेरा ही विश्वास सही है, लेकिन फिर भी उसे अपनी इस सोच को किसी दूसरे पर थोपने की आज़ादी नहीं दी जा सकती। भारत में सदियों से यह मानना रहा है कि, सभी रास्ते ईश्वर को जाते हैं, भले ही उसको मानने वालों के पंथ अलग-अलग क्यों न हो। इसलिए भारत के प्राचीन ग्रंथों में कहीं भी 'धर्मांतरण' का जिक्र नहीं मिलता। लेकिन, अब देश में इसकी घटनाएं आम होने लगी हैं, तो इसपर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि, जब आप अपना विश्वास किसी पर थोपते हैं तो टकराव पैदा होता है, हो सकता है सामने वाले की भी अपने विश्वास में उतनी ही आस्था हो, जितनी आपकी है, इसलिए हर किसी को दूसरे की आस्था का सम्मान करना चाहिए। धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर देश के प्रमुख न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया है, जिसमे दूसरों पर अपना विश्वास थोपने वालों के लिए स्पष्ट संकेत है। 

सर्वोच्च न्यायालय के CJI वाई चंद्रचूड़ आध्यात्मिक और धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति हैं। कई बार ये सवाल उठता है कि क्या देश के सर्वोच्च न्यायालय के सबसे ऊंचे पद पर आसीन न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के काम बीच उनकी धार्मिक मान्यताएं नहीं आतीं? बतौर जज उन्हें धर्म से संबंधित कई विवादित मामलों में भी निष्पक्ष रूप से सुनवाई कर तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाना होता है, तो क्या ऐसे मामलों में उनका धर्म उन पर हावी होता है या फिर भारत का विश्वास ? जो कहता है जहां सत्य है, वहीं धर्म है। इस तरह के कई धार्मिक मामलों में वे जज रहे भी हैं और निष्पक्ष फैसला भी सुनाया है। डीवाई चंद्रचूड़ अपनी धार्मिक आस्था और काम के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं?

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने एक इंटरव्यू में इन सभी सवालों पर बात की है। जब उनसे पुछा गया कि क्या CJI चंद्रचूड़ किसी विशेष ईश्वर में आस्था रखते हैं? तो उन्होंने कहा कि, 'निःसंदेह, मेरे अपने पारिवारिक देवता हैं। मेरे पास अपना पारिवारिक पूजा कक्ष भी है, जिसमें महाराष्ट्र की विशिष्टता नज़र आती है। जब मैं प्रार्थना करता हूं, तो मुझे एक शाश्वत सर्वोच्च सत्ता की अनुभूति होती है, जो ब्रह्मांड की व्यवस्था और मानव की नियति को नियंत्रित करता है।' बता दें कि CJI चंद्रचूड़ कभी भी बिना प्रार्थना किए कभी घर से बाहर नहीं निकलते। उन्हें अपने अनुष्ठान में काफी समय भी लगता है। उनका मानना है कि ऐसा करने से उन्हें न सिर्फ आंतरिक शक्ति और शांति प्राप्त होती है, बल्कि उन्हें इसका लाभ अपने कामकाजी जीवन में भी मिलता है। उन्हें जजों और वकीलों को अदालतों की भीड़ में, तमाम तरह के तर्क और दलीलें सुनकर निष्पक्ष रहकर काम करना पड़ता है। ऐसे में CJI चंद्रचूड़ सुबह-सुबह प्रार्थना के दौरान एकांत में जो वक़्त बिताते हैं, वह उन्हें पूरे दिन शांति और ऊर्जा की अनुभूति कराता है।

CJI डीवाई चंद्रचूड़ दो टूक शब्दों में कहते हैं कि वह अपनी धार्मिक मान्यताओं को किसी दूसरे पर थोपने के पक्ष में नहीं हैं। वह कहते हैं कि, 'किन्तु मैं अपनी धार्मिक मान्यताएं किसी दूसरे पर नहीं थोपता। मेरी धार्मिक मान्यताएं मेरे लिए अत्यंत व्यक्तिगत हैं। मेरे माता-पिता ने भी अपने धार्मिक विश्वास मुझ पर नहीं थोपे, और मैं भी अपने विश्वास किसी पर नहीं थोपता।' जहां तक काम के बीच में धर्म के आने का प्रश्न है, इस पर CJI चंद्रचूड़ कहते हैं कि, “मैं संविधान और उसके मूल्यों के प्रति समर्पित होकर अपना कार्य करता हूं। जब मैं एक न्यायाधीश के तौर पर काम करता हूं, तो मैं संविधान के मूल्यों को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं। मैं आध्यात्मिकता के संबंध में अपने विचार अपने आसपास और यहाँ तक कि परिवार में भी किसी पर नहीं थोपता। उदाहरण के लिए मेरी पत्नी, पहाड़ों, नदियों, पेड़ों और पक्षियों की सुंदरता यानी 'प्रकृति' में सर्वोच्च सत्ता को देखती है। वह उस तरह की इंसान हैं, तो इसमें भी क्या हर्ज है।' बता दें कि, भारत में प्रकृति को ही मातृशक्ति मानकर पूजा जाता है, इसलिए हमारे यहाँ धरती को 'धरती माता' कहकर सम्मान देने का चलन रहा है। 

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ धार्मिक के साथ-साथ बहुत आध्यात्मिक भी हैं। उन्हें आध्यात्मिकता अपने पिता से विरासत में प्राप्त हुई है। उनके पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ को नींद न आने की समस्या थी। वह कई-कई दिनों तक सो नहीं पाते थे। ऐसे में वह ध्यान योग यानी मेडिटेशन की सहायता से ही वह शांति पाते थे। डीवाई चंद्रचूड़ तो यहां तक कहते हैं कि उनके पिता सिर्फ मेडिटेशन के कारण ही जीवित रहते थे।

'हाईकमान ने आदेश दिया तो कर्नाटक का CM बनूँगा..', कांग्रेस सुप्रीमो मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक भी 'कुर्सी' के लिए तैयार

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 कर्नाटक के IT मंत्री और कांग्रेस सुप्रीमो मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने कहा है कि अगर पार्टी आलाकमान उनसे कहेगा तो वह राज्य में मुख्यमंत्री पद लेने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री बनने को लेकर पूछे गए एक सवाल पर खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि ''आलाकमान कहे, अगर वे मुझसे मुख्यमंत्री बनने के लिए कहेंगे तो मैं हां कहूंगा।'' 

इससे पहले सोमवार को, प्रियांक खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि "हताश भाजपा नेताओं" के एक वर्ग ने राज्य में कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 1,000 करोड़ रुपये की मांग की होगी। खड़गे की टिप्पणी मांड्या के कांग्रेस MLA रविकुमार गनीगा के उस आरोप के बाद आई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा की एक टीम ने कांग्रेस के चार विधायकों से संपर्क किया था और उन्हें भाजपा में शामिल होने पर प्रत्येक को 50 करोड़ रुपये नकद और मंत्री पद की पेशकश की थी। इस बीच, कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को कहा कि वह पूरे पांच साल तक पद संभालेंगे। 

यह स्पष्टीकरण सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक वर्ग के भीतर इस सरकार के ढाई साल के कार्यकाल के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के मद्देनजर आया है। दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में कुर्सी को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी, गांधी परिवार के दखल के बाद शिवकुमार डिप्टी सीएम पद के लिए राजी हुए थे। हालाँकि, अटकलें थीं कि, ढाई साल के बाद सिद्धारमैया को हटाकर शिवकुमार को सीएम बनाया जाएगा। लेकिन, अब सिद्धारमैया ने कह दिया है कि, वे ही पूरे 5 साल कुर्सी पर रहेंगे। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खड़गे ने भी अब सीएम बनने की इच्छा जता दी है, लेकिन उन्होंने इसके लिए पार्टी हाईकमान के आदेश का हवाला दिया है। हालाँकि, गौर करने वाली बात ये है कि, हाईकमान तो प्रियंक खड़गे के पिता ही हैं, या फिर कर्नाटक में सीएम की कुर्सी का फैसला गांधी परिवार ही करेगा, यानी अध्यक्ष पद मल्लिकार्जुन के पास होने के बावजूद हाईकमान तो राहुल और सोनिया गांधी ही हैं। 

वहीं, यह स्पष्ट करने के लिए पूछे जाने पर कि क्या वह पूरे पांच साल तक सरकार का नेतृत्व करेंगे, सिद्धारमैया ने कह दिया है कि, "पांच साल तक हमारी सरकार रहेगी...मैं मुख्यमंत्री हूं, मैं बना रहूंगा।" कांग्रेस द्वारा भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के बाद इस साल 20 मई को सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में मिला ज़ीका वायरस का पहला मरीज, पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी, राज्य भर से 100 नमूनों में से छह चिक्कबल्लापुर से

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कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में जीका वायरस के एक मामले की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों में सतर्कता बढ़ गई है। केरल में इसके फैलने के बाद अगस्त में भेजे गए नमूनों की जांच के बाद चिक्काबल्लापुर जिले में मच्छरों में इस वायरस की पहचान की गई, जिससे कर्नाटक में इसके संभावित प्रसार के बारे में चिंताएं बढ़ गईं हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चिक्कबल्लापुर जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO), एसएस महेश ने बताया है कि, "राज्य भर में एकत्र किए गए कुल 100 नमूनों में से छह चिक्कबल्लापुर से थे। जबकि उनमें से पांच का परीक्षण नकारात्मक था, एक व्यक्ति में वायरस की पुष्टि हुई है।" महेश ने कहा कि 30 गर्भवती महिलाओं और बुखार के लक्षणों वाले सात लोगों के रक्त के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, जिनके परिणामों की प्रतीक्षा है। उन्होंने उन लोगों से आगे आने और रक्त के नमूने उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिन्होंने लगातार तीन दिनों तक लगातार उच्च तापमान का अनुभव किया है।

DHO ने कहा है कि जिले के उस गांव के 5 किलोमीटर के दायरे में एक सर्वेक्षण शुरू किया गया है, जहां संक्रमित एडीज मच्छर पाए गए थे। उन्होंने बताया कि, जीका के लक्षण डेंगू जैसे ही होते हैं।