कम नहीं हो रहीं हैं बीजेपी सांसद बृज भूषण शरण सिंह की मुश्किलें, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने भेजा समन

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रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है।अब राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 6 बालिग महिला पहलवानों के खिलाफ यौन शोषण के मामले में दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया है।दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पहलवानों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को बीजेपी सांसद और डब्ल्यूएफआई के प्रमुख रहे बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को समन जारी किया। कोर्ट ने मामले को 18 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है और बृज भूषण सिंह को पेश होने के लिए आदेश दिए।

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क्या है मामला

जानकारी दे दें कि 6 बालिग महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, जिस पर पुलिस ने अपनी चार्जशीट दाखिल की थी। इसी चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने बीजेपी सांसद को समन जारी किया है।

बृजभूषण के खिलाफ इन धाराओं में लगे आरोप

पुलिस ने चार्जशीट में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौनशोषण से जुड़ी आईपीसी की धारा 35ए, 354-ए और 354 डी और सह आरोपी विनोद तोमर के खिलाफ आइपीसी की धारा 109, 35ए, 354 (ए), 506 के तहत आरोप लगाए हैं।धारा 354 में अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान है और ये एक गैर जमानती धारा है। 354ए के तहत अधिकतम एक साल की सजा का प्रावधान है और ये एक जमानती धारा है। वहीं, आईपीसी की धारा 354डी में 5 साल की अधिकतम सजा का प्रावधान है जबकि ये धारा जमानती धारा है।

15 जून को दायर हुई थी चार्टशीट

दिल्ली पुलिस ने छह बार के सांसद बृज भूषण के खिलाफ 15 जून को यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और पीछा करने के आरोप में चार्टशीट दायर की थी। पहलवानों ने सबसे पहले इसी साल जनवरी महीने में बृज भूषण के खिलाफ धरना शुरू किया था। इसके बाद कार्रवाई की कमी के खिलाफ अप्रैल में पहलवान भी से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए उतर गए थे। 

पहलवानों ने की थी मेडल को गंगा में बहाने की कोशिश

बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाते हुए देश के शीर्ष पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और संगीता फोगाट जंतर मंतर पर अप्रैल के महीने में दूसरी बार प्रदर्शन करने बैठे थे। नई संसद के उद्घाटन के मौके पर पहलवानों ने संसद तक मार्च करने का निर्णय लिया। दिल्‍ली पुलिस ने उन्‍हें रास्‍ते में ही रोक दिया था। जंतर-मंतर से पहलवानों का सामान भी हटा दिया गया था। इसके बाद पहलवान अपना मेडल गंगा में बहाने हरिद्वार पहुंचे थे। लेकिन किसान नेता नरेश टिकैत ने उन्हें रोक लिया था

राहुल गांधी की याचिका खारिज होने पर भड़कीं प्रियंका, कहा- अहंकारी सत्ता सच को दबाने के लिए हर हथकंडे आजमा रही

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मोदी सरनेम केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है। प्रियंका गांधी ने भी इस पूरे मामले पर रोष जताया है।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ‘‘मोदी उपनाम’’ वाली टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की याचिका गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद शुक्रवार ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी इस अहंकारी सत्ता के सामने सत्य और जनता के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं।अहंकारी सत्ता चाहती है कि उनसे सवाल न पूछे जाएं। 

प्रियंका गांधी ने ट्विटर पोस्ट में रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता का एक अंश उद्धृत करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला, ‘‘समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो, शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो, पथरीली ऊंची जमीन है तो उसको तोड़ेंगे, समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे, समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर, खंड-खंड हो गिरे विषमता की काली जंजीर।’’ 

अहंकारी सत्ता सच को दबाने के लिए हर हथकंडे आजमा रही-प्रियंका

प्रियंका ने आगे लिखा राहुल गांधी जी इस अहंकारी सत्ता के सामने सत्य और जनता के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। अहंकारी सत्ता चाहती है कि जनता के हितों के सवाल न उठें, अहंकारी सत्ता चाहती है कि देश के लोगों की जिंदगियों को बेहतर बनाने वाले सवाल न उठें, अहंकारी सत्ता चाहती है कि उनसे महंगाई पर सवाल न पूछे जाएं, युवाओं के रोजगार पर कोई बात न हो, किसानों की भलाई की आवाज न उठे, महिलाओं के हक की बात न हो, श्रमिकों के सम्मान के सवाल को न उठाया जाए। अहंकारी सत्ता सच को दबाने के लिए हर हथकंडे आजमा रही है, जनता के हितों से जुड़े सवालों से भटकाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद, छल, कपट: सब अपना रही है।लेकिन, सत्य, सत्याग्रह, जनता की ताकत के सामने न तो सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन टिकेगा और न ही सच्चाई पर झूठ का परदा। 

प्रियंका ने कहा-जनता की आवाज जीतेगी

उन्होंने कहा, राहुल गांधी जी ने इस अहंकारी सत्ता के सामने जनता के हितों से जुड़े सवालों की ज्योति जलाकर रखी है। प्रियंका गांधी ने कहा, इसके लिए राहुल गांधी हर कीमत चुकाने को तैयार हैं और तमाम हमलों व अहंकारी भाजपा सरकार के हथकंडों के बावजूद एक सच्चे देशप्रेमी की तरह जनता से जुड़े सवालों को उठाने से पीछे नहीं हटे हैं। जनता का दर्द बांटने के कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं। सत्य की जीत होगी। जनता की आवाज जीतेगी।

मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका

मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी को गुजरात हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए सूरत कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इस मामले में सूरत कोर्ट से उन्हें 2 साल की सजा मिली थी। हालांकि, उसी दिन उनको जमानत भी मिल गई थी। इसके साथ ही उनकी लोकसभा की सदस्यता भी चली गई। सूरत कोर्ट के फैसले को राहुल गांधी ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब यहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली है। इसके बाद राहुल गांधी न तो 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ सकेंगे और ना ही लोकसभा सदस्यता के निलंबन के खिलाफ अपील कर सकेंगे।

त्रिपुरा विधानसभा में सत्र के पहले ही दिन हंगामा, विधायकों ने टेबल पर चढ़कर किया प्रदर्शन, विपक्ष के पांच एमएलए निलंबित

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त्रिपुरा विधानसभा के पहले ही दिन आज सदन में जमकर हंगामा हुआ। जिसके बाद सदन में कार्यवाही को बाधित करने के लिए सदन से पांच विधायकों को निलंबित कर दिया गया। सदन से सीपीआई (एम) विधायक कांग्रेस विधायक और टिपरा मोथा के तीन विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित किया गया है। इसके बाद स्पीकर के फैसले पर विरोध जताते हुए विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। दरअसल, टिपरा मोथा के विधायक अनिमेष देबबर्मा ने भाजपा विधायक जादब लाल नाथ के विधानसभा में पोर्न देखने का मुद्दा उठाया।हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा के लिए कुछ अन्य मुद्दे उठाए। इस पर कांग्रेस और टिपरा मोथा पार्टी के विधायकों ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी।

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दरअसल, आज विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा और टिपरा मोथा पार्टी के विधायकों के बीच बहस हो गई। विपक्षी दल के नेता अनिमेष देबबर्मा ने त्रिपुरा बागबासा विधानसभा के भाजपा विधायक जादव लक नाथ द्वारा पोर्न फिल्म देखने के मुद्दे पर सवाल किया। सदन के अध्यक्ष ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के बाद उनसे बात करने की बात कही, लेकिन विपक्षी दलों के विधायकों ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। विधायक मेज पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद स्पीकर ने सदन से पांच विधायकों को निलंबित कर दिया।

त्रिपुरा सदन के अध्यक्ष विश्वबंध सेन ने सदन की कार्यवाही को बाधित करने के लिए पांच विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया था। इसमें अध्यक्ष ने सीपीआई (एम) विधायक नयन सरकार, कांग्रेस के सुदीप रॉय बर्मन और तीन टिपरा मोथा विधायकों बृस्वकेतु देबबर्मा, नंदिता रियांग और रंजीत देबबर्मा को दिन भर के लिए निलंबित कर दिया।

सीधी कांड पर नेहा सिंह राठौर की एक पोस्ट पर दर्ज हुई एफआईआर, जानें क्या है पूरा मामला

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मध्य प्रदेश के सीधी पेशाब कांड को लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है। सियासत गरमाने के बाद शिवराज सिंह सरकार ने पेशाब कांड के आरोपी प्रवेश शुक्ला के घर पर प्रशासन का बुलडोजर भी चलावा दिया। इसके अलाव पीड़ित दशमत रावत को सरकारी आवास देने की घोषणा की गई। इसी बीच लोकगायिका नेहा सिंह राठौर के खिलाफ सीधी कांड को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है। ये एफआईआर ट्वीटर हैंडल से किए उनके पोस्ट को लेकर दर्ज हुई है।

दरअसल, नेहा सिंह राठौर ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने अपने लोकप्रिय गाने 'यूपी में का बा' की तर्ज पर जल्द ही 'एमपी में का बा' लाने की बात कही है। पोस्ट में एक मीम भी जोड़ा गया है, जिसमें आरएसएस की ड्रेस पहने एक व्यक्ति को सीधी कांड की तरह एक अन्य व्यक्ति पर पेशाब करते हुए दिखाया गया है। इस पोस्ट में अरेस्ट प्रवेश शुक्ला का हैशटैग भी जोड़ा गया है, जो सीधी कांड का आरोपी था।

क्यों दर्ज हुआ नेहा सिंह पर केस

नेहा सिंह का ये पोस्ट तुरंत वायरल हो गया। जिसके बाद भोपाल के हबीबगंज थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चे के मीडिया प्रभारी सूरज खरे ने शिकायत की थीय़जिसके आधार पर धारा 153(A) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।इस धारा में जाति, धर्म, निवास, भाषा जैसे मामलों में दो समूहों में शत्रुता पैदा करने से संबंधित मामले दर्ज किए जाते हैं। एफआईआर में गायिका पर आरएसएस और आदिवासी समुदाय में शत्रुता पैदा कराने का आरोप लगाया गया है। 

एफआईआर पर नेहा ने किया रिएक्ट

नेहा सिंह ने ट्वीट में लिखा, 'मैंने आदिवासी व्यक्ति के ऊपर पेशाब करने का विरोध किया तो बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के मीडिया प्रभारी ने मेरे खिलाफ FIR दर्ज करवा दी। गजब है इनका आदिवासी प्रेम..!'

क्या है सीधी पेशाब कांड?

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें आरोपी प्रवेश शुक्ला एक शख्स के ऊपर पेशाब करता हुआ नजर आ रहा था। मामला सामने आने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि सीएम शिवराज के निर्देश पर उसके खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा सीधी में आरोपी के घर पर बुलडोजर की कार्रवाई भी की गई थी।

राहुल गांधी की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा,

उनके खिलाफ 10 आपराधिक मामले लंबित, राजनीति में शुचिता की जरूरत, पढ़िए, और क्या की टिपण्णी


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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में गुजरात उच्च न्यायालय से भी बड़ा झटका लगा है। दरअसल, कोर्ट ने राहुल गांधी की 2 साल की जेल की सजा के खिलाफ दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। यानी राहुल गांधी की संसद सदस्यता अभी बहाल नहीं होगी और यह सजा बरकरार रहेगी। शुक्रवार (7 जुलाई) को गुजरात उच्च न्यायालय की जस्टिस हेमंत पृच्छक की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। 

यह फैसला सुनाते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि 'राहुल गांधी बिल्कुल गैर-मौजूद आधार पर दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। दोषसिद्धि पर रोक कोई नियम नहीं है। उनके (राहुल गांधी) के खिलाफ 10 आपराधिक मामले लंबित हैं। राजनीति में शुचिता की आवश्यकता है। एक मामला कैंब्रिज में राहुल द्वारा वीर सावरकर के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने के बाद वीर सावरकर के पोते द्वारा पुणे कोर्ट में (गांधी) के खिलाफ दाखिल किया गया है। राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करने से किसी भी प्रकार से आवेदक के साथ अन्याय नहीं होगा। उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नहीं है। दोषसिद्धि न्यायसंगत, उचित और कानूनी है।' 

इस तरह गुजरात हाई कोर्ट ने राहुल गांधी को लोअर कोर्ट द्वारा सुनाई गई 2 साल जेल की सजा को सही ठहराया है। हालाँकि, कांग्रेस ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। अब देखना ये है कि, सूरत कोर्ट, सेशन कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट में दोषी साबित होने के बाद क्या राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट बेकसूर ठहरती है या नहीं ? क्योंकि, यदि उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगी, तो राहुल गांधी 2024 और 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगे। 

बता दें कि, राहुल गांधी को सजा सुनाते हुए लोअर कोर्ट ने भी कहा था कि, एक सांसद होने के नाते उन्हें जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए, क्योंकि उनके बयान बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करते हैं। इस पूरे मामले पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का तिरस्कार किया है। ऐसे में उन्हें ओबीसी समाज से माफी मांगनी चाहिए। हालाँकि, राहुल गांधी ने माफ़ी मांगने से साफ इंकार कर दिया था, माना जाता है कि, उन्हें सजा मिलने के पीछे भी यही कारण रहा, क्योंकि मानहानि के अधिकतर मामले माफ़ी के साथ ख़त्म हो जाते हैं, मगर राहुल माफ़ी मांगने से बार-बार इंकार कर रहे थे।

रायपुर में कांग्रेस पर बरसे पीएम मोदी, कहा-जो डर जाए वो मोदी नहीं हो सकता, कांग्रेस को जमकर सुनाई खरी-खोटी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार राज्यों की यात्रा पर निकले हुए हैं। इस यात्रा की शुरुआत उन्होंने छत्तीसगढ़ से की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रायपुर में रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर, 4 लेन रायपुर-कोड़ेबोड़े खंड समेत कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके बाद पीएम मोदी ने विजय संकल्प रैली को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये लोग मेरे पीछे पड़ेंगे, मेरी कब्र खोदने की धमकी देंगे, मेरे खिलाफ साजिशें रचेंगे। लेकिन उन्हें पता नहीं है, जो डर जाए वह मोदी नहीं हो सकता है।

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प्रधानमंत्री ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज एक अहम दिन है। आज छत्तीसगढ़ को 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उपहार मिल रहा है। सड़क विकास के तहत नया कॉरिडोर, नई पाइपलाइन बनेगी जिसके जरिए हजारों किमी का सफर आधा हो जाएगा।

भ्रष्टाचार के बगैर कांग्रेस सांस तक नहीं ले सकती-पीएम मोदी

भाजपा ही छत्तीसगढ़ के लोगों को समझती है, उनकी जरूरतों को जानती है। लेकिन एक बहुत बड़ा पंजा छत्तीसगढ़ के विकास के सामने दीवार बनकर खड़ा है। ये पंजा कांग्रेस का है। कांग्रेस के रग-रग में करप्शन है। भ्रष्टाचार के बगैर कांग्रेस सांस तक नहीं ले सकती है। कांग्रेस की सबसे बड़ी विचारधारा है करप्शन। छत्तीसगढ़ से 36 वादे जो कांग्रेस ने किए थे, उसमें एक ये था कि राज्य में शराब बंदी की जाएगी। 5 वर्ष बीत गए, लेकिन सच ये है कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ का शराब घोटाला कर दिया है और इसकी पूरी जानकारी अखबारों में भरी पड़ी है।

कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ एक एटीएम की तरह-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी के लिए छत्तीसगढ़ एक एटीएम की तरह है। यहां पर कोयला माफिया, रेत माफिया, भूमि माफिया... न जाने कैसे-कैसे माफिया यहां फल-फूल रहे हैं। यहां सूबे के मुखिया से लेकर तमाम मंत्रियों और अधिकारियों तक पर घोटाले के गंभीर से गंभीर आरोप लगते रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ सरकार कांग्रेस के भ्रष्टाचार और कुशासन का मॉडल बन चुकी है इसलिए आज एक ही आवाज सुनाई दे रही है कि इस बार कांग्रेस की सरकार बदली जाएगी।

जिनके दामन में दाग है, वेसाथ आने की कोशिश में-पीएम मोदी

विपक्षी महागठबंधन पर भी पीएम मोदी ने कहड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिनके दामन में दाग है, वे सब आज एक साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग एक दूसरे को पीनी पी-पीकर कोसते थे। आज वे एक साथ आने के बहाने खोज रहे हैं।

पिछले नौ वर्षों में हजारों आदिवासी गांवों में पहंची सड़कें-पीएम मोदी

पिछले 9 वर्षों में छत्तीसगढ़ के हजारों आदिवासी गांवों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कें पहुंची हैं। भारत सरकार ने यहां करीब साढ़े 3 हजार किमी लंबी नेशनल हाईवे की परियोजनाएं स्वीकृत की है। इसमें सबसे लगभग तीन हजार किमी की परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी है।

मोदी मतलब भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की गारंटी-पीएम मोदी

कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अपने कुशासन और भ्रष्टाचार के दाग को कांग्रेस पार्टी अब झूठी गारंटियों के जरिए छिपाने की कोशिश में लगी है। आपको इस तरह की झूठी गारंटियों से बहुत ही सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। बीजेपी ही वो पार्टी है जो असली गारंटी देती है, साथ में जो वादा करती है, उसे पूरा करके दिखाती है। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वो मेरी कब्र खोद रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि जो डर जाए वो मोदी नहीं। मोदी मतलब भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की गारंटी है। जिसने भी गलत किया है वो बचेगा नहीं।

किसी निजी स्वार्थ में जाति गणना एवं आर्थिक सर्वे नहीं हो रहा, जनमानस के हित को ध्यान में रखकर राज्य सरकार करा रही सर्वे, हाई कोर्ट में नीतीश सरकार ने दी दलील



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जाति गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को भी पटना हाइकोर्ट में सुनवाई अधूरी रही। मामले पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही और अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार दलीले पेश कर रहे हैं। पीके शाही का कहना था कि किसी निजी स्वार्थ में जाति गणना एवं आर्थिक सर्वे नहीं कराया जा रहा है। जनमानस के हित को ध्यान में रखकर राज्य सरकार सर्वे करा रही है।

उनका कहना था कि यह एक सर्वे है, जिसका उद्देश्य जनमानस के हित में आंकड़ा एकत्रित करना है। इसका उपयोग उनके कल्याण और हितों में किया जाना है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जाति संबंधी सूचना शिक्षण संस्थाओं में नामांकन के समय स्वेच्छा से दी जाती है। जातियां समाज का हिस्सा हैं। 

उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग-अलग जातियां हैं। सर्वे के दौरान किसी को भी सूचना देने की अनिवार्यता नहीं है। सर्वेक्षण से किसी की निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है। बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक हैं। मामले पर मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सुनवाई की। शुक्रवार को भी सुनवाई होगी।

मोदी सरनेम केस में राहुल गांधी को बड़ा झटका, गुजरात हाई कोर्ट ने सजा पर रोक की अपील खारिज की

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मोदी सरनेम मानहानि केस में बड़ा झटका लगा है। गुजरात हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक की अपील को खारिज कर दिया है। जस्टिस एम एम प्राच्छक ने सुबह 11 बजे सबसे पहले फैसला सुनाया और कहा कि कोर्ट उनकी सजा की मांग की याचिका को खारिज करती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के कई मामले चल रहे हैं। ऐसे में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती है।बता दें कि इससे पहले 23 मार्च 2023 को सूरत की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, इसके बाद उन्हें जमानत भी मिल गई थी।हालांकि, इसके अगले दिन उनकी सांसदी चली गई थी।

2 मई को हुई थी आखिरी सुनवाई

राहुल गांधी की अपील पर हाई कोर्ट में 2 मई को आखिरी सुनवाई हुई थी। इस सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसले को आर्डर पर रख लिया था और समर वेकेशन के बाद फैसला सुनाने को कहा था। न्यायमूर्ति प्रच्छक ने मई में राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद अंतिम आदेश पारित करेंगे। इसके बाद से फैसले का इंतजार हो रहा था। राहुल गांधी ने 25 अप्रैल को गुजरात हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन लगाई थी।

सूरत कोर्ट ने दी थी दो साल सजा

बता दें कि सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राहुल गांधी 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। 

राहुल ने क्या कहा था

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, 'कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?' इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

BIG BREAKING राहुल गांधी को मिली दो साल की सजा

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मोदी सरनेम केस में गुजरात हाई कोर्ट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लगा झटका। गुजरात हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक की अपील को खारिज कर दिया। राहुल गांधी को मिली दो साल की सजा को गुजरात हाई कोर्ट ने रखा बरकरार।

BIG BREAKING मोदी सरनेम केस में गुजरात हाई कोर्ट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लगा झटका।

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गुजरात हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक की अपील को खारिज कर दिया। राहुल गांधी को मिली दो साल की सजा को गुजरात हाई कोर्ट ने रखा बरकरार।