माफिया मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा, 5 लाख का जुर्माना भी

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माफिया मुख्तार अंसारी पर गैंगस्टर मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला आ गया। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। 

अपर सत्र न्यायाधीश दुर्गेश कुमार की अदालत में एक अप्रैल को बहस पूरी हो गई थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पहले इस मामले में 15 अप्रैल को फैसला आना था, लेकिन बाद में इसके लिए आज की तारीख निर्धारित की गई थी। 

जिस मामले में मुख्तार अंसारी को सजा सुनाई है वो 2005 में हुए तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या से जुड़ा है। इस घटना को गाजीपुर के मोम्मदाबाद थाना क्षेत्र के बसनिया चट्टी पर अंजाम दिया गया था। कहा गया कि अंसारी ने इस वारदात में पहली बार एके-47 का इस्तेमाल किया था।

29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के भांवरकोल थाना अंतर्गत सियाड़ी गांव में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों पर एके-47 जैसे अत्याधुनिक असलहों से लगभग 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी गई थी। सातों लोगों का शव पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू लाया जाने लगा तो भाजपा विधायक के समर्थक उग्र हो गए थे और जगह-जगह तोड़फोड़ व हिंसा की गई थी।

*कर्नाटक की रैली में पीएम मोदी का कांग्रेस पर जोरदार हमला, बोले- मुझे 91 बार गाली दी है, इतना समय सुशासन में लगाते तो...*

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब केवल कुछ दिन बाकी रह गए हैं। ऐसे में सत्ता वापसी की कोशिशों में जुटी भारतीय जनता पार्टी की ताबड़तोड़ रैलियों का दौर जारी है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र ने आज शनिवार को कर्नाटक में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित किया। बीदर के हुमनाबाद में एक जनसभा को संबोधितकरते हुए पीएम ने डबल इंजन सरकार का मतलब डबल बेनिफिट बताया और कांग्रेस पर जमकर हमला किया।

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कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के शुरू होते ही कांग्रेस नेताओं ने मुझे गालियां देना शुरू कर दिया है। पीएम ने कहा कि अब तक कांग्रेस ने मुझे 91 बार गालियां दी है।पीएम मोदी ने कहा कि अगर इतना ध्यान कांग्रेस के नेताओं ने गुड गवर्नेंस में लगाया होता तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के लिए किया होता तो आज कांग्रेस की इतनी दुर्दशा नहीं होती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास रहा है कि जिसने भी देश के विकास के लिए काम किया, इन्होंने उन्हें गालियां दी।

कांग्रेस की गाली का जवाब जनता वोट से देगी-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस मुझे गालियां देती है लेकिन इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है। पीएम ने कहा, कांग्रेस ने तो बाबा साहब अंबेडकर को भी गाली दी थी।पीएम मोदी ने बताया कि कांग्रेस की गाली का जवाब जनता वोट से देगी, कांग्रेस की गालियों की लिस्ट बहुत लंबी है। कांग्रेस के बड़े नेता गाली देते रहते हैं। कई महापुरुष भी कांग्रेस की गालियों के शिकार हुए हैं। गालियां देने वाले मिट्टी में मिल जाएंगे।

छत्तीसगढ़-राजस्थान में कांग्रेस ने वादा पूरा नहीं किया-पीएम मोदी

पीएम ने कहा, कांग्रेस को कभी गरीब की तकलीफ समझ ही नहीं आई, इन्होने कभी गरीबी देखी ही नहीं। कांग्रेस वो दल है जो विकास में भी राजनीति करती है, रोड़े अटकाती है। इन्होंने छत्तीसगढ़ और राजस्थान के किसानों से जो वादे किए वो अभी तक धरती पर उतरे नहीं हैं। कांग्रेस ने इस क्षेत्र के गन्ना किसानों को अपने हाल पर छोड़ दिया था जबकि हम उनकी समस्याओं को प्राथमिकता पर दूर कर रहे हैं।जब हमने पीएम किसान सम्मान निधि शुरू की थी तब कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार थी। इनको किसानों से कितनी नफरत है देखिए कि ये लाभार्थी किसानों की सूची केंद्र सरकार को भेजने में रुकावटें पैदा करते थे। उनको तकलीफ यह थी इसमें बीच में कोई कटकी नहीं थी, पैसा सीधे किसानों के खाते में जा रहा था।

कर्नाटक को डबल इंजन सरकार की जरूरत

कर्नाटक को देश का नंबर-1 राज्य बनाने के लिए यहां डबल इंजन सरकार का होना बेहद जरूरी है। कांग्रेस की सरकार में हर साल 30 हजार करोड़ रुपये के आसपास विदेशी निवेश कर्नाटक में आता था जबकि बीजेपी की सरकार में अब हर साल करीब 90 हजार करोड़ रुपये का विदेशी निवेश कर्नाटक में आ रहा है। डबल इंजन सरकार का मतलब होता है- डबल बेनिफिट, डबल स्पीड।

कोलकाता हाई कोर्ट के जज ने दिया आदेश, रात 12 बजे तक कोर्ट खोलकर करें काम, सुप्रीम कोर्ट ने सवा आठ बजे सुनवाई करते हुए आदेश पर लगाई रोक, पढ़िए, पूरी रिपोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रावार देर रात नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। रात सवा 8 बजे सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाई कोर्ट के जज जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल जस्टिस गंगोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को आदेश दिया था कि वह शुक्रवार रात 12 बजे तक कोर्ट में रखे गए उनके इंटरव्यू का आधिकारिक अनुवाद उपलब्ध करवाएं। जस्टिस गंगोपाध्याय ने यह भी कहा था कि वह अपने चैंबर में रात के 12:15 बजे तक बैठकर इंतजार करेंगे।

इसी मामले पर देर रात सुनवाई हुई। सुनवाई के लिए बैठी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए एस बोपन्ना और हिमा कोहली की स्पेशल बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के जज जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के आदेश पर रोक लगा दी।

क्या है मामला?

बता दें कि जस्टिस गंगोपाध्याय बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले की सुनवाई कर रहे थे। लेकिन इससे पहले दिन में, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को सौंपने का निर्देश दिया था। 

लंबित मामले को लेकर दिया था इंटरव्यू

कुछ दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय ने एक टेलीविजन चैनल को दिए गए न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय के साक्षात्कार को लेकर निराशा प्रकट की थी। इंटरव्यू में जस्टिस गंगोपाध्याय ने इस (भर्ती घोटाला) विवाद पर अपनी बात रखी थी। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता की चिंताओं पर संज्ञान लिया कि इस तरह का चलन देखने को मिला है कि लोग अपने खिलाफ कोई फैसला या आदेश आते ही न्यायाधीशों को धमकाने की कोशिश करते हैं।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिन्होंने आरोप लगाया था कि एबीपी आनंदा चैनल को साक्षात्कार देने वाले न्यायाधीश इस मामले में सुनवाई के लिए सक्षम नहीं हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हम कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से कलकत्ता उच्च न्यायालय के किसी अन्य न्यायाधीश को लंबित कार्यवाही सौंपने का निर्देश देते हैं। जिस न्यायाधीश को कार्यवाही सौंपी जाएगी, उन्हें इस संबंध में दायर की गई सभी याचिकाओं पर गौर करने की आजादी होगी।’’

क्या था जस्टिस गंगोपाध्याय का इंटरव्यू?

जस्टिस गंगोपाध्याय ने टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पश्चिम बंगाल के टीचर भर्ती घोटाले में राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर कई बातें कही थीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से पहले तक गंगोपाध्याय ही इस मामले से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। उनके इंटरव्यू के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला उनके पास से हटाने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद जस्टिस गंगोपाध्याय ने भी आदेश जारी कर दिया कि उनके इंटरव्यू का वह अनुवाद उन्हें दिया जाए जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी उनके इंटरव्यू की पूरी ट्रांसक्रिप्ट मांगी थी।

रात में हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के जज को इस तरह का आदेश नहीं पारित करना चाहिए था। इसके बाद, जस्टिस बोपन्ना और हिमा कोहली की बेंच ने भी सहमति जताई और हाई कोर्ट के सिंगल जज के आदेश पर रोक लगा दी। जजों ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से कहा कि वह इस आदेश की जानकारी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को दे दें और रजिस्ट्रार जनरल उसे संबंधित जज (जस्टिस गंगोपाध्याय) को बता दें।

आरोपों में घिरे बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही उठाया सवाल, कहा- ये मेरे खिलाफ साजिश, अपराधी बनकर नहीं दूंगा इस्तीफा

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के शीर्ष पहलवानों का “दंगल” जारी है। भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ देश के दिग्गज पहलवान धरने पर बैठे हैं। इस बीच शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। बृजभूषण शरण सिंह ने अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कहा कि इस्तीफा कोई इतनी बड़ी चीज़ नहीं है। उनका दावा है कि वह पूरी तरह से निर्दोष हैं।बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। विनेश फोगाट सहित कई पहलवान दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन पहुंचे।

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अपना मुंह खोला है। उन्होंने न्यायपालिका और दिल्ली पुलिस पर पूरा भरोसा जताया है। साथ ही धरने के पीछे कांग्रेस का हाथ होने के आरोप लगाए हैं। बृजभूषण ने कहा एफआईआर करने की बात आई है। अभी एफआईआर की कॉपी मेरे पास नहीं है। लेकिन एफआईआर तो हो ही गई होगी। दिल्ली पुलिस पर मुझे पूरा भरोसा है। मुझे कोई शिकायत नहीं है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं। मैं इन आरोपों का सामना करने के लिए तैयार हूं। जांच एजेंसी जहां भी उचित समझेगी, मैं जांच में सहयोग के लिए तैयार हूं। मुझे पहले भी भरोसा था, आज भी भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट से ऊपर कोई नहीं है। मुझे इस पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आगे कहा “मुझे देश की न्याय प्रक्रिया पर भरोसा है। अगर इनके पुराने बयान सुनेंगे तो आपको पता चलेगा कि इन्होंने पद से इस्तीफा देने की मांग की थी। मेरा कार्यकाल पूरा हो चुका है। सरकार ने तीन लोगों की कमेटी गठित की है। 40-45 दिन में ही चुनाव होना है। मेरा कार्यकाल वैसे भी समाप्त हो जाएगा। लेकिन इस्तीफे की बात नहीं। मेरा इस्तीफा वैसे ही हो जाएगा, लेकिन अपराधी की तरह नहीं। इन्हीं के कहने पर जांच कमेटी बनी।

नाबालिग को जांच कमेटी के सामने क्यों नहीं पेश किया जा रहा-बृजभूषण

बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा, इन आरोपों में एक मामला नाबालिग से भी जुड़ा हुआ है। मैं पूछता हूं उस नाबालिग को जांच कमेटी के सामने क्यों नहीं पेश किया जा रहा? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, मैंने एक आरडीओ दिया है... धरने पर बैठा खिलाड़ी एक लड़की से कहता है कि किसी भी एक लड़की का इंतजाम करा दो। किसी भी तरह से कर दो... मतलब ये कि ये लोग 4-4 महीने मेरे खिलाफ सबूत इकठ्ठा करेंगे और उनको पेश कर देंगे।

इनकी मांग भी लगातार बढ़ती जा रही-बृजभूषण

बृजभूषण ने पहलवानों पर आरोप लगाते हुए कहा इनकी मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है। पहले एफआईआर की मांग की। फिर इस्तीफे की मांग की। जेल में डालने की मांग की है। तो ये लोकसभा सांसदी मुझे विनेश फोगाट की तरफ से नहीं मिला है। मुझे उनकी कृपा से कुश्ती संघ का अध्यक्ष पद नहीं मिला है। मुझे यह पद चुनाव लड़कर मिला है। 12 साल तक सिर्फ इनके साथ यौन उत्पीड़न होता है, बाकी खिलाड़ियों के साथ क्यों नहीं। हरियाणा का एक ही परिवार क्यों। एक अखाड़ा, एक फैमिली। हरियाणा, हिमाचल बाकी राज्यों के खिलाड़ी क्यों नहीं। क्यों- क्योंकि मैंने काम किया है।

बृजभूषण ने कहा- कांग्रेस का हाथ

कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष ने कहा- मैं शुरू से ही कह रहा हूं कि इसमें देश के कुछ उद्योगपतियों जिनको मुझसे कष्ट है और कांग्रेस का हाथ है। आज दिख गया कि इसमें किसका हाथ है। मैंने उद्योगपति का नाम नहीं बोला है। कुछ उद्योगपतियों का हाथ है, जिन्हें मुझसे कष्ट है। आज दिखाई भी पड़ गया कि किसका हाथ है। जब इनकी मांग मान ली गई कि एफआईआर दर्ज करना है, तब यह इसको क्यों उठा रहे हैं। केजरीवाल को, सत्यपाल मलिक को, प्रियंका गांधी को बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? अरे कम से कम कांग्रेस वाले जांच रिपोर्ट का इंतजार कर लेते, तब जंतर-मंतर पहुंचते। ये खिलाड़ियों का धरना नहीं है, कुछ षड़ंयत्रकारी लोग हैं, जो मेरी पार्टी और मुझे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। दरअसल, आज पहलवानों के धरने को समर्थन देने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जंतर मंतर पहुंची थीं।

दिल्ली एयरपोर्ट पर खो गया बिल्ली का बच्चा, यात्री ने आरोप लगाया कि एयर इंडिया के कर्मचारियों की "लापरवाही" के कारण हुई घटना, ढूंढ लाने की मांग क


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एक यात्री ने कथित तौर पर एयर इंडिया की "लापरवाही" के कारण अपने बिल्ली के बच्चे को खो दिया। मामला दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल 3 का बताया जा रहा है। यात्री ने आरोप लगाया कि एयर इंडिया के कर्मचारियों की "लापरवाही" के कारण उसकी बिल्ली का एक बच्चा टर्मिनल 3 पर खो गया। सोनी एस सोमर नाम के शख्स ने ट्विटर पर अपने दोस्त की आपबीती लिखी है।  

25 अप्रैल को, सोमर ने ट्वीट करते हुए लिखा, "मेरे दोस्त का पालतू जानवर के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गायब है। यह एक दिल दहला देने वाली त्रासदी है और आपकी लापरवाही अक्षम्य है। आपको अपने कार्यों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और चीजों को तुरंत ठीक करना चाहिए। उन्होंने एयरलाइन को अपने दोस्त जांग्नेइचोंग कारोंग द्वारा भेजे गए ईमेल के कुछ स्क्रीनशॉट भी साझा किए।

रिपोर्ट के मुताबिक, करोंग 24 अप्रैल को दो पालतू बिल्लियों के साथ दिल्ली से इंफाल की यात्रा कर रही थीं। उनके ईमेल के मुताबिक, वह सुबह 9.55 बजे की फ्लाइट के लिए सुबह 6.30 बजे एयरपोर्ट पहुंचीं। हालाँकि, चेक-इन काउंटर पर, कर्मचारियों ने उन्हें सूचित किया कि यदि वह बिल्ली के बच्चे को केबिन में लाना चाहती है, तो उन्हें अपनी फ्लाइट को रीशेड्यूल करना होगा या बिजनेस क्लास में अपग्रेड करना होगा।

उन्होंने लिखा, "दुर्भाग्य से फ्लाइट रीशेड्यूल विकल्प उपलब्ध नहीं था, मैं बिजनेस क्लास में जाने के लिए सहमत हो गई क्योंकि मैं अपनी बिल्ली के बच्चे को कार्गो के माध्यम से यात्रा करने के लिए सहज नहीं थी, लेकिन उन्होंने कहा कि मुझे किसी भी प्रक्रिया के लिए सुबह के कर्मचारियों के आने तक इंतजार करना होगा। मेरे लिए कर्मचारियों के आने के लिए सुबह 7.30 बजे तक इंतजार करना व्यर्थ था क्योंकि उन्होंने मुझे बताया कि बिजनेस क्लास संभव नहीं है और एकमात्र विकल्प कार्गो है।" इस बात का एहसास होने पर कि दोनों विकल्प ही लागू नहीं थे, वह कर्मचारियों को कार्गो द्वारा बिल्ली के बच्चे ले जाने के लिए तैयार हो गई।

महिला ने लिखा कि उन्होंने एयरलाइन कर्मियों की उपस्थिति में पिंजरे को सही ढंग से बंद कर दिया था, लेकिन उनके आश्चर्य की बात यह थी कि उनमें से एक बिल्ली का बच्चा भाग निकला और गायब हो गया। उन्होंने कहा कि बोर्डिंग के लिए केवल सात मिनट बचे थे, इसलिए उन्हें केवल एक ही बिल्ली के साथ उड़ान भरनी पड़ी।

महिला ने एयरलाइन को ईमेल में लिखा, "यह दिल दहला देने वाला था और मैं अभी भी पूरी तरह से मानसिक सदमे में हूं कि मेरी एक बिल्ली का बच्चा गायब हो गया। मुझे यकीन है कि आपके स्टाफ के सदस्य उनके साथ सावधान नहीं थे, क्योंकि आगमन पर कुंडी ढीली महसूस हुई। वास्तव में यकीन नहीं है कि मुझे अपना पालतू जानवर खोना पड़ा।" उसने यह भी कहा कि स्टाफ सदस्यों की अक्षमताओं के कारण उसे "शारीरिक और मानसिक परेशानी" का सामना करना पड़ा। 

एयर इंडिया ने ट्वीट का जवाब दिया और कहा, "प्रिय महोदय, हम आपके साथ सहानुभूति रखते हैं और इस घटना पर ध्यान देने के लिए वास्तव में खेद है। हमारी टीम प्राथमिकता पर इसे संबोधित करने के लिए आपके मित्र के संपर्क में रहेगी।" उन्होंने यूजर्स को आगे की कार्रवाई के लिए टिकट विवरण साझा करने के लिए भी कहा।

WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की दो FIR, डीसीपी प्रणव तयाल ने की पुष्टि

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भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और कुछ कोच खिलाफ पहलवानों का प्रदर्शन पार्ट-2 छठे दिन भी जारी है। विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक सहित कई खिलाड़ी रविवार (23 अप्रैल) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंच गए थे। उसके बाद से वह धरने पर बैठे हैं। पहलवानों ने जनवरी में भी कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

 बृजभूषण के खिलाफ FIR दर्ज

WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस थाने में दो FIR दर्ज की है। पुलिस ने नाबालिग रेसलर से यौन शोषण के मामले में बृजभूषण पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, अन्य छह महिला पहलवानों के आरोपों पर दूसरी FIR दर्ज की गई है। दिल्ली पुलिस आरोपों के की जांच करेगी। डीसीपी प्रणव तयाल ने इसकी पुष्टि की है।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने WFI अध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज करने पर सहमति जताई थी। 21 अप्रैल को एक नाबालिग समेत सात महिला रेसलर्स ने बृजभूषण के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत की थी। केस ना दर्ज होने पर रेसलर्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 23 अप्रैल से बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक समेत कई दिग्गज रेसलर्स जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

 बृजभूषण का बयान

पहलवानों के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा- मैं कानून का पालन करूंगा, मैं पहले भी यह करता रहा हूं। मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, मैं बच नहीं पाया हूं। मैं अपने आवास पर हूं। मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है। कोर्ट ने आज जो भी फैसला किया है, मैं उसका स्वागत करता हूं। मुझे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भरोसा है। जांच में जहां भी मेरे सहयोग की जरूरत होगी, मैं सहयोग करूंगा।

 पहलवानों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

प्रदर्शन कर रहे पहलवानों की प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी है। इस दौरान विनेश फोगाट ने कहा कि बृजभूषण सिंह को सभी पदों से हटाया जाना चाहिए। उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और वह अब तक हुई जांच से संतुष्ट हैं। देश का भविष्य अगर स्पोर्ट्स में बचाना है तो हमें एक साथ आना होगा। अगर वह कुश्ती संघ के अध्यक्ष बने रहे तो पद का दुरुपयोग कर सकते हैं। वहीं, बजरंग पूनिया ने कहा मुझे लगता है कि बृजभूषण पर तुरंत कार्रवाई करना चाहिए और तुरंत जेल भेजना चाहिए।

पहलवानों ने कहा कि आप स्पोर्ट्स को बचाने के लिए हमारे समर्थन में आइए। ये लड़ाई सिर्फ FIR की नहीं है। FIR पहले दिन ही हो जानी चाहिए थी। खेलों को ऐसे लोगों के चंगुल से बचाना होगा। साथ ही पहलवानों ने साफ कर दिया कि किसी कमेटी को वह कोई जवाब नहीं देंगे। पहलवानों ने साफ किया है कि जब तक बृजभूषण सिंह जेल में नहीं जाते हैं, तब तक धरना जारी रहेगा।

विनेश ने कहा कमेटी जो बनाई गई थी, उसके एक आर्टिकल में हमने पढ़ा था कि एक लड़की ने यौन शोषण की शिकायत की थी। अगर एक लड़की ने भी शिकायत की है तो उसके आधार पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। हमें किसी कमेटी और किसी सदस्य पर भरोसा नहीं है। वहीं, साक्षी मलिक ने कहा कि उन्हें दिल्ली पुलिस पर भी भरोसा नहीं है। पहलवानों ने खेल मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि अनुराग ठाकुर ने उनका फोन नहीं उठाया।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बड़े उथल-पुथल के आसार, मंत्री उदय सामंत का दावा, ठाकरे ग्रुप के 13 और राकंपा के 20 विधायक शिवसेना यानी सीएम शिंदे

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महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बड़े उथल-पुथल के आसार हैं। राज्य सरकार में मंत्री उदय सामंत ने दावा कर दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के समूह और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बड़ी संख्या में विधायक सीएम एकनाथ शिंदे के साथ संपर्क में हैं। खास बात है कि यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार से लेकर राज्यसभा सांसद संजय राउत तक अलग-अलग कयास लग रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सामंत ने कहा कि ठाकरे ग्रुप के 13 विधायक और राकंपा के 20 विधायक शिवसेना यानी सीएम शिंदे के संपर्क में हैं। सामंत इससे पहले दावा कर चुके हैं कि ठाकरे और शिंदे महाबलेश्वर में गुप्त रूप से मुलाकात कर चुके हैं। बीते साल जून-जुलाई में शिंदे की ही अगुवाई में करीब 40 विधायकों ने बगावत कर दी थी, जिसके बाद राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी।

संजय राउत के दावे

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार गिरने की भविष्यवाणी कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि सरकार का 'डेथ वॉरंट' जारी हो चुका है। उन्होंने 15-20 दिनों में सरकार गिरने की बात कही थी। अब बुधवार को ही उन्होंने एक और दावा कर दिया कि सीएम शिंदे जल्दी लंबी छुट्टी पर जाने वाले हैं। उस दौरान शिंदे अपने गृहजिला सतारा पहुंचे थे।

अजित पवार बढ़ा रहे तापमान!

राकंपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित की सियासी गतिविधियों को लेकर भी महाराष्ट्र में सियासी तापमान बढ़ता नजर आ रहा है। खबरें थी कि उनका झुकाव भी भाजपा की ओर जा रहा है। कहा जा रहा था कि वह एनसीपी के कुछ विधायकों के साथ मिलकर भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। हालांकि, सीनियर पवार हमेशा इस बात के खिलाफ नजर आए।

माफिया अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में हुई हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, तीन सप्ताह में योगी सरकार से मांगी रिपोर्ट


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माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में हुई हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने मामले में योगी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने सरकार से कहा है कि वह हत्याकांड की जांच से जुड़े रिकॉर्ड को कोर्ट में जमा कराए। इसके लिए सरकार को तीन सप्ताह का वक्त दिया गया है। इसके बाद मामले की सुनवाई होगी। बता दें कि अतीक हत्याकांड पर अधिवक्ता विशाल तिवारी ने जनहित याचिका दायर की थी। कहा था कि यूपी में पिछले कुछ सालों से इस तरह के हत्याकांड में इजाफा हुआ है। मामले में जांच की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल को प्रयागराज के अस्पताल में हुई हत्या के मामले में रिपोर्ट मांगी है। वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर अदालत का आदेश आया जिसमें न्यायिक जांच की मांग की गई थी। जनहित याचिका वकील ने राज्य में हत्याओं और इसी तरह की हत्याओं की जांच की मांग की थी।

तीन सप्ताह में रिपोर्ट 

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि वह घटना से पहले हुई मौतों और उसके बेटे के एनकाउंटर की जांच के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दे। मामले की सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।

एडवोकेट विशाल तिवारी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। तिवारी ने अदालत में कहा कि उनकी याचिका में उत्तर प्रदेश में न्यायेतर हत्याओं की जांच की मांग की गई है। अपनी याचिका में, तिवारी ने अतीक और अशरफ की हत्या की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की थी।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की जिसमें उत्तर प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) के अनुसार 2017 के बाद से हुई 183 मुठभेड़ों की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने और पुलिस की जांच करने की भी मांग की गई है।

गौरतलब है कि बीते 15 अप्रैल को यूपी के प्रयागराज में माफिया किंग अतीक अहमद और उसके भाई खालिम अजीम उर्फ अशरफ की तीन लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। तीनों हमलावर मीडिया के वेश में पहुंचे थे और मौका पाकर 18 राउंड की फायरिंग करके अतीक और अशरफ को मौत के घाट उतार दिया था। बदमाशों ने वारदात को अंजाम तब दिया था जब अतीक और अशरफ को पुलिस टीम रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए ले जा रही थी। डबल मर्डर की यह वारदात मीडिया के कैमरों में कैद भी हुई थी।

*परीक्षा में नाकामी नहीं झेल सके, आंध्र-प्रदेश में नौ छात्रों ने की खुदकुशी, रिजल्ट जारी होने के 48 घंटे के भीतर दी जान*

#andhrapradeshninestudentssuicideafterfailinboard_exam

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हाल के सालों में परीक्षा को लेकर छात्रों मे प्रेशर बढ़ता जा रहा है, जो कई बार दमघोंटू साबित हुआ है। कई विद्यार्थी इसका सामना तक नहीं कर पा रहे और खुदकुशी करने जैसा बड़ा कदम तक उठा लेते हैं। परिक्षा का परिणाम एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। आंध्र प्रदेश में नौ स्कूली छात्रों ने रिजल्ट आने के 48 घंटे के भीतर अपनी जान दे दी। स्कूली छात्राओं द्वारा आत्महत्या की यह घटनाएं आंध्र प्रदेश के बोर्ड रिजल्ट आने के बाद की है। 

आंध्र प्रदेश बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एग्जामिनेशन की ओर से बुधवार को कक्षा 11 और 12 की परीक्षा के रिजल्ट घोषित किए गए, लेकिन इसके बाद राज्य में 9 छात्रों ने खुदकुशी कर अपनी जिंगगी खत्म कर ली। स्थानीय खबरों के मुताबिक 17 साल के बी तरुण ने श्रीकाकुलम जिले में एक ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। तरुण जिले के डांडू गोपालपुरम गांव का रहने वाला था और इंटरमीडिएट के पहले साल की परीक्षा में ज्यादातर पेपर में फेल हो गया था, फेल होने के बाद वह अपने रिजल्ट से बहुत मायूस था और फिर उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी।

इसी तरह मलकापुरम थाना क्षेत्र में पड़ने वाले त्रिनादपुरम की 16 साल की एक लड़की ने भी अपने घर में खुदकुशी कर ली। यह लड़की विशाखापत्तनम जिले की रहने वाली थी। इंटरमीडिएट पहले साल की परीक्षा के कुछ विषयों में नाकाम होने के बाद ही अखिलाश्री मानसिक रूप से बेहद परेशान थी।

चित्तूर जिले के 2 छात्रों ने अपना जीवन खत्म कर लिया। इन दोनों ही छात्रों की उम्र 17 साल थी। इन दोनों छात्रों ने एपी इंटरमीडिएट की परीक्षा में फेल होने के बाद खुदकुशी कर ली। एक लड़की ने झील में कूदकर अपनी जान दे दी, जबकि इसी जिले में रहने वाले एक लड़के ने कुछ जहरीली चीज खाकर अपनी जान दे दी। अनाकापल्ली में भी खुदकुशी की एक घटना सामने आई। 17 साल के एक अन्य छात्र ने यहां पर अपने घर पर ही फांसी लगाकर जान दे दी। कहा जा रहा है कि इंटरमीडिएट में पहले साल की परीक्षा में नंबर कम आने से बेहद तनाव में था और फिर उसने अपनी जान दे दी।

मुख्य न्यायाधीश भी जता चुके हैं चिंता

देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने भी बीती फरवरी में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि हमारे संस्थानों में क्या गलत हो रहा है जो छात्रों को अपनी जान देनी पड़ रही है? बता दें कि देश के सबसे बड़े तकनीकी संस्थानों आईआईटी में भी छात्रों द्वारा आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं।

जंतर मंतर पर सियासी जुटान, पहलवानों के समर्थन में प्रियंका गांधी भी पहुंची, पीएम से पूछा-खिलाड़ू नमेडल लेकर आए तो घर बुलाया, अब क्यों नहीं?

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के शीर्ष पहलवानों का धरना-प्रदर्शन जारी है। बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक जैसे ओलंपिक पदक विजेता पहलवान इस प्रदर्शन की अगुआई कर रहे हैं। पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उनकी शिकायत पर दिल्ली पुलिस एफआईआर दर्ज किया है, लेकिन पहलवान धरना खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं।

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इस बीच जंतर-मंतर पर सियासी जमावड़ा देखा जा रहा है। पहलवानों को सियासी समर्थन भी मिल रहा है। इसी क्रम में धरने पर बैठे पहलवानों से कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुलाकात की। उनके साथ ही हरियाणा कांग्रेस के नेता और सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी जंतर मंतर पहुंचे। प्रियंका ने इस दौरान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया से काफी देर तक बात की।प्रियंका गांधी सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर जंतर मंतर पहुंची और करीब 25 मिनट तक पहलवानों के बीच रहीं।

जब एफआईआर दर्ज हो गई तो अब तक पीड़ित पक्ष को इसकी कॉपी क्यों नहीं दी-प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने महिला पहलवानों से मुलाकात के बाद कहा कि किसी को अब तक एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है। अभी तक यह भी नहीं पता कि इस एफआईआर में लिखा क्या है। उन्होंने कहा आज जब ये महिला पहलवान सड़क पर बैठे है तो कोई सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एफआईआर दर्ज हो गई तो अब तक पीड़ित पक्ष को इसकी कॉपी क्यों नहीं दी? उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह के लिए कहा कि जब तक ये पद पर रहेंगे, प्रेशर बनाते रहेंगे। इसलिए पहले उनका पावर ले, इस्तीफा ले।

प्रधानमंत्री से मेरी कोई उम्मीद नहीं है-प्रियंका गांधी

प्रियंका ने आगे कहा, बहुत सारी लड़कियां है जिनके साथ ऐसा हुआ है। मैं समझना चाहती हूं ति सरकार इनको क्यों बचा रही है। प्रधानमंत्री से मेरी कोई उम्मीद नहीं है। मेडल लेकर आए तो घर बुलाया, अब क्यों नहीं बुला रहे हैं। इस आदमी (बृजभूषण शरण सिंह) को बचाने के लिए इतना क्यों किया जा रहा है।