देवेंद्र फडणवीस ने फिर दोहराई अपनी बात, कहा-बीजेपी-एनसीपी गठबंधन को थी शरद पवार की मंजूरी

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बीजेपी-एनसीपी गठबंधन को लेकर दिए अपने बयान पर कायम हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था एनसीपी के नेता अजित पवार के साथ रातोंरात जो सरकार बनाई थी, उसे एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मंजूरी मिली हुई थी। एक बार फिर फडणवीस ने अपनी बात दोहराई है और कहा है कि उनका बयान 100 फीसद सच है और वह झूठ नहीं बोल रहे।

बता दें कि महाराष्ट्र में 2019 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी के अजीत पवार ने मिलकर सरकार बनाई थी। इस गठबंधन को लेकर देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है कि इस तरह से सरकार बनाने के लिए अजीत पवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार का समर्थन मिला था लेकिन बाद में हमारे साथ विश्वासघात किया गया।

चर्चा के 80 घंटे बाद उनकी रणनीति बदल गई-फडणवीस

एक इंटरव्यू में देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एनसीपी की तरफ से हमारे पास सरकार बनाने का प्रस्ताव आया था। प्रस्ताव में कहा गया कि एनसीपी को महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार चाहिए और उनकी भाजपा के साथ मिलकर स्थिर सरकार बनानी की मंशा थी। फडणवीस ने कहा कि प्रस्ताव के बाद हम आगे बढ़े और बातचीत करने का फैसला किया। देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि 2019 में हमने सरकार बनाने खातिर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से भी चर्चा की थी। हालांकि इस चर्चा के बाद भी हमारे साथ विश्वासघात हुआ। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम फडणवीस ने कहा चर्चा के 80 घंटे बाद उनकी रणनीति बदल गई और अजीत पवार ने सरकार छोड़ने का फैसला किया।

फडणवीस ने कहा कि मेरे साथ सबसे पहले उद्धव ठाकरे ने विश्वासघात किया और फिर पवार ने किया। फडणवीस ने कहा कि मैं पूरी ईमानदारी से कहना चाहता हूं कि अजित पवार ने मेरे साथ ईमानदारी से शपथ ली लेकिन बाद में एनसीपी की रणनीति बदल गई।

महाराष्ट्र में हुआ वो सियायत नाटक

बता दें कि तीन साल पहले अक्टूबर में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 105 सीट पर जीत हासिल की थी. बीजेपी के साथ गठबंधन में रही शिवसेना ने 56 सीट पर जीत हासिल की थी। गठबंधन के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीट होने के बावजूद, दोनों सहयोगी दलों के बीच मुख्यमंत्री का पद किसे मिलेगा, इसको लेकर विवाद हो गया, जिसके परिणामस्वरूप शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिये बातचीत शुरू की।

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने से पहले 23 नवंबर की सुबह एक नाटकीय घटनाक्रम हुआ, जिसमें तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अचानक देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी थी। हालांकि शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को समर्थन देने का एलान कर दिया। आखिरकार बीजेपी को पीछे हटना पड़ा और महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार बन गई।

एप वाले एजेंट ग्राहकों को नहीं कर सकेंगे परेशान, आरबीआई ने जारी किया निर्देश, शीर्ष बैंक ने दिए 18 सवालों के जवाब


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एप के जरिये कर्ज देने वाली कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की मिल रही शिकायतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के प्रारूप में नियम जारी कर दिया है। इसके 18 सवालों के जवाब जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया कि अगर कोई ग्राहक लोन चुकाने में डिफॉल्ट करता है तो ग्राहकों को एजेंट के बारे में जरूरी जानकारी एसएमएस या ईमेल के जरिये पहले से देनी होगी।

साथ ही अब ग्राहक को लोन देते वक्त ही कंपनी को एजेंट के बारे में जरूरी जानकारी देनी होगी। आरबीआई के इस दिशा-निर्देश का मतलब एजेंटों के जरिये ग्राहकों को परेशान करना अब आसान नहीं होगा। आरबीआई ने कहा है कि ग्राहक को यह जानकारी रिकवरी एजेंट के उससे संपर्क में आने से पहले देना जरूरी होगा। नए नियम के तहत सभी तरह के कर्ज वितरण और पुनर्भुगतान, लोन लेने वाले ग्राहक के बैंक अकाउंट और बैंक या एनबीएफसी के बीच होनी जरूरी होगा। इस लेन-देन में सेवा प्रदाता या किसी तीसरी पार्टी का कोई दूसरा अकाउंट शामिल नहीं होगा।

क्रेडिट कार्ड वाले ग्राहकों के लिए पहले से नियम तय

आरबीआई ने यह भी कहा है कि क्रेडिट कार्ड के जरिए किस्त चुकाने वाले ग्राहक इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे। उसके लिए पहले से ही अलग नियम और शर्तें तय हैं। कर्ज देने वाले (एलएसपी ) के रूप में भी काम करने वाले पेमेंट एग्रीगेटर्स का इस्तेमाल कर्ज को चुकाने के लिए किया जा सकेगा।

त्रिपुरा विस चुनावः दोपहर 1 बजे तक 51.35 फीसदी मतदान

#tripura_elections_2023 

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त्रिपुरा में 60 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। सभी सीटों पर शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग हो रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, त्रिपुरा में दोपहर एक बजे तक कुल 51.35 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है। 

कहां-कितने लोगों ने डाला वोट

जिला      वोटिंग प्रतिशत

धलाई       54.17%

गोमती      49.69%

खोवाई       49.67%

नॉर्थ त्रिपुरा      47.57%

सिपाहीजिला    48.95%

साउथ त्रिपुरा    53.67%

ऊनाकोटी      50.64%

वेस्ट त्रिपुरा      51.33%

पूर्व सीएम का बीजेपी पर आरोप

इधर वोटिंग के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ने बड़ा आरोप लगाया है। सीपीआई(एम) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने कहा कि कहीं-कहीं भाजपा की ओर से असामाजिक तत्व मतदान के बीच परेशानी खड़ी कर रहे हैं और लोगों को वोट डालने से रोक रहे हैं, लेकिन जनता वोट डालने की पूरी कोशिश कर रही है।

आरएसएस की पत्रिका पांच्यजन्य का गंभीर आरोप, कहा- भारत विरोधी तत्व सुप्रीम कोर्ट का औजार की तरह कर रही इस्तेमाल

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इन दिनों देश में बीबीसी का मुद्दा छाया हुआ है। बीबीसी सुर्खियों में उस वक्त आया, जब साल 2002 के गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री मोदी की कथित भूमिका को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की गई।जिसे केंद्र सरकार ने प्रोपेगेंडा बताते हुए भारत में दिखाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने भारत में बीबीसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अनुरोध वाली इस याचिका को खारिज कर दिया था। अब इस फैसले के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने सुप्रीम कोर्ट को ही ‘कटघरे’ में खड़ा कर दिया है।

दरअसल, आरएसएस से जुड़ी पत्रिका पांच्यजन्य ने अपने संपादकीय में सुप्रीम कोर्ट पर बड़ा आरोप लगाया गया है।पांच्यजन्य ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट को भारत विरोधी तत्व अपने औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।पत्रिका के एक एडिटोरियल में कहा गया है कि, सर्वोच्च न्यायालय भारत का है, जो भारत के करदाताओं की राशि से चलता है; उसका काम उस भारतीय विधान और विधियों के अनुरूप काम करना है जो भारत के हैं, भारत के लिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय नामक सुविधा का सृजन और उसका रखरखाव हमने अपने देश के हितों के लिए किया है। लेकिन वह भारत विरोधियों के अपना मार्ग साफ करने के प्रयासों में एक औजार की तरह प्रयुक्त हो रहा है।

संपादकीय में आगे गया है कि मानवाधिकार के नाम पर आतंकवादियों को बचाने की कोशिशों, पर्यावरण के नाम पर भारत के विकास में बाधा डालने के बाद अब यह कोशिश की जा रही है कि देश विरोधी ताकतों को देश के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का अधिकार भी मिलना चाहिए। आगे लिका है कि, भारत में धर्मांतरण करके राष्ट्र को कमजोर करते रहने का अधिकार भी होना चाहिए। और इतना ही नहीं, इस अधिकार के प्रयोग के लिए भारत के ही कानूनों का लाभ भी उन्हें मिलना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते विवादित डॉक्यूमेंट्री के मद्देनजर भारत में बीबीसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अनुरोध वाली याचिका को खारिज कर दिया था। सोशल मीडिया मंचों पर डॉक्यूमेंट्री की पहुंच को रोकने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक और जत्थे पर अप्रैल में सुनवाई होगी। इस संबंध में कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा था। डॉक्यूमेंट्री को बैन किए जाने के खिलाफ कोर्ट में कई याचिकाएं दायर है। याचिकाकर्ताओं में वरिष्ठ पत्रकार एन राम, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा शामिल हैं।

पीएम मोदी ने दिल्ली में आदि महोत्सव का किया उद्घाटन, कहा- जो खुद को दूर समझता था उसे अब मुख्यधारा में लाया जा रहा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी दिल्ली में आदि महोत्सव का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता बिरसा मुंडा को श्रद्दांजलि दी। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि जैसे भारत की अनेकता और भव्यता आज एक साथ खड़ी हो गई हैं। यह भारत के उस अनंत आकाश की तरह है, जिसमें उसकी विविधताएं इंद्रधनुष की तरह उभर कर सामने आ जाती हैं। भारत अपने सांस्कृतिक प्रकाश से विश्व का मार्ग दर्शन करता है। 

पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान बजट का जिक्र करते हुए कहा, इस बार पारंपरिक कारीगरों के लिए पीएम-विश्वकर्मा योजना शुरू करने की घोषणा भी की गई है। पीएम-विश्वकर्मा के तहत आपको आर्थिक सहायता दी जाएगी, स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग के लिए सपोर्ट किया जाएगा। 

अब सरकार दिल्ली से उनसे मिलने जाती है जिसे दूर समझा जाता था-पीएम मोदी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर चल रहा है। अब सरकार दिल्ली से उससे मिलने जाती है जिसे दूर समझा जाता था। जो खुद को दूर समझता था उसे अब मुख्यधारा में लाया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, सरकार उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिनसे लंबे समय से संपर्क नहीं हो पाया है। मैंने देश के कोने कोने में आदिवासी समाज और परिवार के साथ अनेक सप्ताह बिताए हैं। मैंने आपकी परंपराओं को करीब से देखा भी है, उनसे सीखा भी है और उनको जिया भी है। आदिवासियों की जीवनशैली ने मुझे देश की विरासत और परंपराओं के बारे में बहुत कुछ सिखाया है। आपके बीच आकर मुझमें अपनों से जुड़ने का भाव आता है।

एक हजार जनजातीय शिल्पकार लेंगे हिस्सा

'आदि महोत्सव' जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राइफेड) की वार्षिक पहल है। इस वर्ष इसका आयोजन 16 से 27 फरवरी तक दिल्ली के मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम में किया जा रहा है। कार्यक्रम में 200 स्टॉल के माध्यम से देशभर के जनजातीय समुदायों की समृद्ध और विविधतापूर्ण धरोहर को प्रदर्शित किया जाएगा। महोत्सव में लगभग एक हजार जनजातीय शिल्पकार हिस्सा लेंगे।

बीबीसी पर आयकर सर्वे को लेकर पाक पत्रकार ने किया सवाल, अमेरिका ने यूं किया नजरअंदाज

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बीबीसी पर आयकर विभाग की कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी है। बीबीसी के दिल्ली और मुंबई के ऑफिस पर आईटी की टीम सर्वे कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये सर्वे टैक्स चोरी के आरोप में किया जा रहा है। इधर बीबीसी के दफ्तर पर आईटी सर्वे को लेकर राजनीति जोरों पर हो रही है। भारत में बीबीसी के ऑफिस में हो रही कार्रवाई पर कई देशों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इस बीच एक पाकिस्तानी पत्रकार ने मुद्दा बनाना चाहा। अमेरिकी विदेश विभाग से भारत में बीबीसी के इनकम टैक्स सर्वे पर सवाल दागा। हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने सवाल को नजरअंदाज कर दिया। 

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जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के मीडिया संस्थान एआरवाई के वॉशिंगटन में रिपोर्टर जहांजेब अली ने अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत में बीबीसी पर सर्वे का मुद्दा उठा दिया। पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा कि, बीबीसी के दिल्ली और मुंबई दफ्तरों पर इनकम टैक्स सर्वे हो रहा है, अमेरिकी सरकार क्या इस मुद्दे को लेकर चिंतित है या फिर इस पर कुछ प्रतिक्रिया देना चाहती है?

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइज ने इस सवाल के जवाब में कहा 'वे इस पर नजर रखे हुए हैं।' इससे ज्यादा कुछ जवाब नहीं दिया। तब पाकिस्तानी पत्रकार अली ने दोबारा इस पर सवाल किया, लेकिन नेड प्राइज ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा 'बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री जो 2002 के दंगों पर बनाई गई है, इस पर अमेरिकी विदेश विभाग ने कोई कमेंट तक नहीं किया।हालांकि, नेड प्राइस ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और लोगों के लोगों से संबंध हैं। साथ ही दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्य भी साझा करते हैं।

बीबीसी के ऑफिस में आयकर विभाग का सर्वे तीसरे दिन भी जारी, 45 घंटे से ज्यादा समय से जारी है ‘ऑपरेशन’

#income_tax_department_survey_on_bbc_3rd_day 

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ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के दिल्ली और मुंबई ऑफिस में इनकम टैक्स का सर्वे लगातार तीसरे दिन जारी है। दोनों ऑफिस में इनकम टैक्स की टीम मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे पहुंची थी। जिसके बाद से लगातार आईटी की टीम का ऑपरेशन जारी है।सर्वे ऑपरेशन को अब तक 45 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं।

बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों में दोनों ऑफिस के अंदर मौजूद अधिकारियों ने चुनिंदा कर्मचारियों से वित्तीय डेटा जुटाया है। अधिकारियों ने कहा है कि यह सर्वे अंतरराष्ट्रीय कराधान और बीबीसी सहायक कंपनियों के स्थानांतरण मूल्य निर्धारण से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए किया जा रहा है।

आयकर विभाग बीबीसीके दिल्ली और मुंबई ऑफिस पर 2012 से लेकर अब तक के खाते खंगाल रही है। हालांकि आईटी की टीम बीबीसी के ब्रॉडकास्ट ऑपरेशन में दखल नहीं दे रही है। बीबीसी ने कर्मचारियों से आयकर विभाग को मदद करने की अपील की है।

बीबीसी की ओर से गुजरात दंगों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर एक डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ रिलीज करने के कुछ हफ्ते बाद आईटी सर्वेक्षण किया गया है। केंद्र सरकार ने इस डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया था और इसे बैन भी कर दिया गया था।

त्रिपुरा विधानसभा चुनावः सुबह 9 बजे तक 13.23 फीसदी वोटिंग, पूर्व सीएम माणिक सरकार ने भी डाला वोट

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त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक राज्य में 13.23 फीसदी वोटिंग हो चुकी है। पूरे राज्य में 3,337 पोलिंग स्टेशनों में शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव हो रहा है। किसी भी तरह की गड़बड़ी अभी तक सुनने को नहीं मिली है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षाबलों के जवान पूरी तरह से तत्पर हैं। 

चुनाव आयोग के मुताबिक पश्चिम त्रिपुरा में सुबह 9 बजे तक 14.56 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि धलाई में 13.62 प्रतिशत, गोमती में 12.99 प्रतिशत, खोवाई में 13.08 प्रतिशत, उत्तरी त्रिपुरा में 12.79 प्रतिशत, सिपाहीजाला में 13.61 प्रतिशत मतदान हुआ। उनाकोटि 13.34 प्रतिशत और दक्षिण त्रिपुरा 14.34 प्रतिशत मतदान हुआ। 

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा चुनाव 2023 के लिए बोरडोवली विधानसभा क्षेत्र के महारानी तुलसीबती गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के बूथ नं. 16 में वोट डाला। माणिक साहा ने कहा कि जनता सुबह से ही मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मत का प्रयोग कर रही है। हमारे लिए यही चुनौती है कि हर क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हो। शांतिपूर्ण तरीके से मतदान हो रहे हैं लेकिन ये लोग(विपक्ष) कोशिश करेंगे कि ऐसा न हो। 

मतदान करने से पहले त्रिपुरा के सीएम और भाजपा के टाउन बोरडोवली उम्मीदवार माणिक साहा ने कहा कि मैंने सुबह पूजा-अर्चना की और सभी जगह शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रार्थना की। आप देख सकते हैं लोग वोट देने के लिए बाहर आ गए हैं। मुझे विश्वास है कि भाजपा यहां जरूर सरकार बनाएगी।

उत्तरप्रदेश में संविदा कर्मचारियों को भी मिलेगा सातवें वेतनमान का न्यूनतम वेतन, कैबिनेट बैठक में हुआ निर्णय

उत्तरप्रदेश राज्य सरकार के विभागों में संविदा पर तैनात ऐसे सभी कर्मचारी जो भर्ती के लिए जारी विज्ञापन के आधार पर सृजित पद के सापेक्ष सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद पारदर्शी तरीके से नियुक्त किए गए हैं, उन्हें अब सातवें वेतनमान में अपने पद के सापेक्ष न्यूनतम मिलेगा। इन संविदा कर्मचारियों को अभी तक छठवें वेतनमान में अपने स्तर का न्यूनतम वेतन मिल रहा है। ऐसे संविदा कर्मचारियों की संख्या 2150 है। संविदा कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने से राज्य सरकार पर 29 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय भार आएगा।

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मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए इस निर्णय की जानकारी वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने दी। उन्होंने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को प्रदेश में लागू करने के लिए गठित की गई वेतन समिति (2016) ने ऐसे संविदा कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का न्यूनतम वेतन देने की सिफारिश की थी। 

इन संविदा कर्मचारियों में से ज्यादातर स्वास्थ्य, सिंचाई और लोक निर्माण जैसे विभागों में कार्यरत है। इनमें अधिकांश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं तो लगभग 250 स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर तैनात डाक्टर भी हैं।

मुख्य सचिव समिति ने वेतन समिति की इस सिफारिश का परीक्षण करने के बाद शासन से इसे लागू करने की संस्तुति की थी। मुख्य सचिव समिति की संस्तुति के क्रम में कैबिनेट ने संविदा कर्मियों को सातवें वेतनमान का न्यूनतम वेतन देने का निर्णय किया है।

चीन सीमा पर बढ़ेगी चौकसीः गठित होंगी आईटीबीपी की 7 नई बटालियन, कुल 9400 पदों का होगा सृजन

#sevennewbattalionsofitbpwillbe_formed 

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भारत को सीमा पर अपने पड़ोसियों से हर वक्त खतरा है। इसे भांपते हुए मोदी सरकार ने चीन सीमा पर चौकसी बढ़ाने का फैसला लिया है। मोदी सरकार ने अब भारत-चीन सीमा पर निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करने वाली भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी ) की सात नई बटालियन और एक क्षेत्रीय हेडक्वार्टर के गठन को बुधवार को मंजूरी दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी दी।

कुल 9400 पदों का सृजन किया जाएगा

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की नई बटालियन का गठन करने और 1 सेक्टर हेडक्वार्टर स्थापित किए जाने को मंजूरी दी है। आईटीबीपी की प्रमुख भूमिका भारत-चीन सीमा की निगरानी करना है। इसके लिए वर्तमान में आईटीबीपी के 176 बीओपी हैं। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि जनवरी 2020 में मंत्रिमंडल ने आईटीबीपी की 47 सीमा चौकी और 12 कैम्प स्थापित करने को मंजूरी दी थी। इनका कार्य तेजी से प्रगति पर है। इन बटालियन और सेक्टर हेडक्वार्टर के लिए कुल 9400 पदों का सृजन किया जाएगा और इन बटालियन और सेक्टर हेडक्वार्टर की स्थापना साल 2025-26 तक पूरी कर ली जाएगी।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को भी मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को भी अपनी मंजूरी दे दी है। इस प्रोग्राम के के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के लिए 4800 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया, देश की सीमाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम लाई है। इसके तहत देश की उत्तरी सीमाओं पर बसे गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के 19 जिलों के 2966 गांवों में सड़क, बिजली जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा।