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Nov 23 2021, 16:16

कृषि कानून वापस लेने के मुद्दे पर कांग्रेस में गहन मंथन नयी दिल्ली- पांच राज्यों
कृषि कानून वापस लेने के मुद्दे पर कांग्रेस में गहन मंथन नयी दिल्ली- पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद कांग्रेस का चुनावी मुद्दा हाथ से निकलने के कारण उसने नयी रणनीति पर गहन मंथन के लिए अपने ‘वार रूम’ का रुख कर दिया। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि यह बैठक पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर बुलाई गई है और संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल को बैठक की अध्यक्षता करने का कहा गया। बैठक में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा पंजाब के नेताओं को बुलाया गया। कांग्रेस जब भी किसी मुद्दे पर खुद को घिरा पाती है तो वह इस पर रणनीति बनाने के लिए यहां रकाबगंज रोड स्थित अपने ‘वार रूम’ का रुख करती है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कांग्रेस के महासचिव संगठन के सी वेणुगोपाल के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार, दिल्ली के प्रभारी महासचिव शक्तिसिंह गोहिल, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा, राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई नेता मौजूद थे। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी कि संसद में किन मुद्दों को ज्यादा प्रभावी ढंग से उठाना है ताकि उनका चुनावी लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में महंगाई को महत्वपूर्ण रूप से उठाया गया और इस बारे में दिसम्बर में एक रैली आयोजित करने की बात की गई। समझा जाता है कि कृषि कानून वापस लेने और किसानों से आंदोलन खत्म करने की श्री मोदी की अपील के बाद कांग्रेस विधानसभाओं के चुनाव के मद्देनजर नयी रणनीति पर विचार करने के लिए इस ‘वार रूम’ में पहुंची है

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Nov 23 2021, 16:14

मायावती ने कहा, यूपी चुनाव में 2007 की तरह ही आएंगे नतीजे, जारी किया उपलब्धियों का फोल्डर मायावती ने कहा, यूपी चुनाव में 2007 की तरह ही आएंगे नतीजे, जारी किया उपलब्धियों का फोल्डर लखनऊ- बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता के बीच वादों का पिटारा लेकर नहीं जाएगी, बल्कि उपलब्धियों के खजाने से लोगों को लुभाएगी। चार बार के शासन में हुए कार्यों का पत्रक (फोर्डर) तैयार कराया गया है। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती सोमवार को पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि ये पत्रक आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि लोग जान सकें कि इसी तर्ज पर बसपा विकास कार्य कराएगी। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार वर्ष 2007 की तरह ही नतीजे आएंगे। उन्होंने कहा बसपा शासनकाल की तरह किसी भी सरकार ने कार्य नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने 2007 से 2012 के दौरान सत्ता में रहते हुए जो विकास के कार्य किए। उनका प्रचार करके ही जनता से समर्थन मांगेंगे। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि चुनाव की तैयारी में जुटें। उन्होंने कहा कि पार्टी घोषणापत्र जारी नहीं करती, बल्कि करके दिखाने में विश्वास करती है। बसपा ने देश की आजादी के बाद सबसे अधिक विकास कराया है। उत्तर प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि सूबे की 86 सुरक्षित विधानसभा सीटों के अध्यक्षों को बुलाया है उनके साथ मंथन करेंगे कि 2007 की तरह सभी सीटों को कैसे जीता जाए। सभी 75 जिलों के पदाधिकारियों से वार्ता कर रही हूं, लगातार रिव्यू जारी है। उन्होंने कहा कि वह इन सभी सीटों पर तैयारियों की खुद समीक्षा करेंगी साथ ही पार्टी के महासचिव सतीश मिश्रा को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह इन सभी सीटों पर ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए समीक्षा करें और एक नया समीकरण तैयार करें। राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक फोल्डर तैयार किया गया है। जिसे कार्यकर्ता गांव-गांव तक पहुंचाएंगे। एक नई रणनीति तैयार करने को भी कहा गया है। मायावती ने कहा कि उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों को सपा और भाजपा अपना बताती रही हैं । ऐसे में लोगों तक यह जानकारी पहुंचाना बहुत जरूरी है। बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून तो वापस ले लिए हैं, लेकिन सरकार को किसान संगठनों के साथ बैठ कर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए ताकि किसान लोग खुशी-खुशी अपने घर वापस जाकर अपने काम में लग जाएं। केंद्र सरकार को इस मामले को ज्यादा नहीं लटकाना चाहिए।

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Nov 23 2021, 16:13

विकास की दशा और दिशा, जनसंख्या नियंत्रण पर अवलंबित लखनऊ- आशा और आशंका दोनों है क
विकास की दशा और दिशा, जनसंख्या नियंत्रण पर अवलंबित लखनऊ- आशा और आशंका दोनों है कि वर्ष 2050 में भारत सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला विशाल राष्ट्र बन जाएगा। तब इस विशाल जनसंख्या का सीमित संसाधन पर कितना दबाव होगा, आप ये कल्पना कर सकते हैं। बहुत अधिक जनसंख्या देश में अनेक सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक समस्याओं को जन्म देती है। वर्तमान में भारत 135 करोड़ जनसंख्या (अनुमानित) के साथ विश्व में दूसरे नंबर पर है पहले नंबर पर चाइना 145( अनुमानित)करोड़ की आबादी वाला देश है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1989 से 11 जुलाई को हर वर्ष जनसंख्या दिवस के रूप में मनाता है पर जनसंख्या नियंत्रण या जनसंख्या नियोजन पर भारत जैसे देश में कोई भी योजना नहीं बनती है। व्यापारिक दृष्टिकोण से भारत की जनसंख्या बाजार की ताकत है पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से जनसंख्या विकास के लिए बड़ी बाधक भी है। अधिक जनसंख्या के दबाव में सीमित संसाधन छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। आम जनता को उनकी मूल जरूरतों की आवश्यक वस्तुएं नहीं मिल पाती और यदि मिलती भी है तो बहुत ऊंची दरों में या बहुत महंगाई के बाद। ऐसे में देश में अनेक समस्याएं पैदा होती है। सबसे ज्यादा जनसंख्या के दबाव से विकास के लिए संकट खड़ा हो जाता है। विकास धीरे-धीरे अवरुद्ध हो जाता है। देश का आर्थिक नियोजन चरमराने लगता है। वर्ष 1951 से 81 के दशक को भारत की जनसंख्या की विस्फोटक अवधि के रूप में जाना जाता है। यह देश में मृत्यु दर के तीव्र स्खलन और जनसंख्या की उच्च प्रजनन दर के कारण हुआ है। वर्ष 1921 तक की अवधि में भारत की जनसंख्या की वृद्धि स्थिर अवस्था में रही क्योंकि इस अवधि में जनसंख्या वृद्धि की दर काफी निम्न थी। बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न समस्याओं के प्रति लोगों को होना होगा जागरूक 1981 से लगातार अभी तक जनसंख्या की दर बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा बढ़ती जनसंख्या के मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस स्लोगन 'परिवार नियोजन मानव का अधिकार' रखा गया है, ताकि बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न समस्याओं के प्रति जागरूक होकर लोगों द्वारा परिवार नियोजन पर उत्साहजनक जोर दिया जाए। यह स्लोगन यह संकेत करता है कि सुरक्षित एवं शैक्षिक परिवार नियोजन एक जिम्मेदार नागरिक का अधिकार है और यह सभी लोगों को सशक्त बनाएगा और देश में विकास की गति को तेज करने में सहायक भी होगा। भारत की जनसंख्या बढ़ने का प्रमुख कारण बढ़ती जन्म दर और कम मृत्यु दर भी है। जनसंख्या वृद्धि के कारण देश में बेरोजगारी, गरीबी, पर्यावरण, प्रदूषण जैसी समस्याएं चुनौती बनकर सामने आई। जो समाज व्यक्ति और राष्ट्र सभी के विकास को अवरुद्ध करती है। हमारे पास उपलब्ध संसाधन इतनी बड़ी आबादी के लिए कतई पर्याप्त नहीं है। विकास और देश की समृद्धि के लिए जनसंख्या नियंत्रण एक आवश्यक अंग हो सकता है। कई यूरोपीय देशों ने अपनी बढ़ती जनसंख्या एवं संसाधनों में उचित तालमेल हेतु परिवार नियंत्रण प्रणाली को का निर्णय लिया किंतु एक समय बाद वहां कार्यशील जनसंख्या की अपेक्षा वृद्धों की संख्या में वृद्धि हुई जिससे मानव संसाधन की समस्याएं उनके सामने आने लगी हैं। विकास के लिए विशाल जनसंख्या के साथ सामंजस्य बिठाने की जरूरत चीन में पहले जनसंख्या नियंत्रण किया गया था। सरकार ने वैधानिक रूप से एक या दो बच्चे पैदा करने की शर्तें लागू की थी, पर वहां बुजुर्गों, वृद्धों की संख्या में भारी वृद्धि होने के पश्चात चीन की सरकार ने ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपनी जनता से अपील की है। जापान एक छोटा सा देश होने के बावजूद अपने सीमित संसाधनों के चलते अपने नवाचार तथा तकनीकी शक्ति के बल पर विकासशील देशों के समकक्ष खड़ा है। भारत जैसे विशाल देश में जहां बहुत बड़ी जनसंख्या भी है और विकास के लिए आवश्यक संसाधन भी हैं, विकास करने के लिए केवल विशाल जनसंख्या के साथ सामंजस्य बिठाने की आवश्यकता होगी। भारत में जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ उसके अनुपात में संसाधनों का संतुलन बना कर विकास की नई दिशा दी जा सकती है। संसाधनों की उचित दोहन हेतु सही और सटीक नीति तथा उसके क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी। इसके अलावा नवाचार एवं उचित तकनीक प्रौद्योगिकी को भी अमल में लाना होगा। भारत विश्व का पहला देश जहां परिवार नियोजन कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर चला भारत विश्व का प्रथम देश है जिसने 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया। इसका परिणाम भी अच्छा हुआ कि पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या की वृद्धि में संतोषजनक गिरावट आई है। यह तो विदित है कि किसी भी राष्ट्र की संतुलित विकास की धारा तभी संभव है जब वहां के विकास में सहायक संसाधनों का संतुलन बना रहे। किसी एक घटक का संतुलन यदि गड़बड़ होता है तो विकास के लिए गंभीर समस्याएं जन्म लेना शुरू करती हैं। भारत की जनसंख्या इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो दिन दूर नहीं जब संसाधनों की कमी से भारत को जूझना होगा फिर विकास की बात बेमानी हो जाएगी। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जनसंख्या दिवस मनाने का उद्देश्य है कि व्यक्ति समाज सरकार और योजना कानों के मन में इस विषय से संबंधित समस्याओं के प्रति चेतना संवेदना जगाना ही है ताकि लोगों में बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी समस्याएं एवं अवरोधों के बारे में जागरूकता ज्यादा से ज्यादा विस्तारित हो। आम लोगों को भी ललेनी होगी जिम्मेदार भारत के पास विकास के सभी मापदंड होते हुए भी देश पिछड़ा हुआ है, भारत में तकनीकी का कम विकास, कमजोर शिक्षा ,परंपरागत स्रोत, कृषि का निम्न स्तर, आर्थिक असमानता जैसी अनेक समस्याएं हैं जो विकास मैं बाधक बनती रही है। वर्तमान में देश के पास प्राकृतिक एवं मानव संसाधन इतना है कि बढ़ती जनसंख्या की समस्याओं से आसानी से निपटा जा सके पर इस बात की अत्यंत आवश्यकता है कि संसाधनों का उचित दोहन तथा उसका सही उपयोग विकास की दिशा में भ्रष्टाचार से बचाकर किया जाए। यह अत्यंत उल्लेखनीय है कि जनसंख्या की समस्या से निपटने तथा विकास की दर को बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल शासन प्रशासन की ही नहीं है इसके लिए आम नागरिक भी जिम्मेदार है क्योंकि समस्याएं खड़ी करने में आमजन का एक बड़ा वर्ग भी है, इसीलिए हम सबको जनसंख्या नियंत्रण और विकास की धारा को सही दिशा प्रदान करने के लिए सक्रिय सहयोग देना होगा तब ही देश एक सशक्त राष्ट्र बन पाएगा।

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Nov 23 2021, 16:11

कांग्रेस तो एक परिवार की आरती और घंटी बजाओ वाली पार्टी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का विपक्ष
कांग्रेस तो एक परिवार की आरती और घंटी बजाओ वाली पार्टी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का विपक्ष पर हमला कानपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को प्रदेश के कानपुर और आठ जिलों के कार्यालयों के उद्घाटन और बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में विरोधी दलों पर तंज कसा। नाम लिए बिना कांग्रेस को एक ही परिवार की आरती और घंटी बजाने वाली पार्टी बताया तो समाजवादी पार्टी को भाई, ताऊ और चाचे की विकास वाली पार्टी बताया। कानपुर के निराला नगर मैदान में आयोजित सम्मेलन में मौजूद बूथ अध्यक्षों से उन्होंने कहा कि आप सब लोग अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझें, क्योंकि जिस कुल या परिवार में हम पैदा होते हैं इसलिए कई बार उसकी अच्छाइयों को कई बार भूल जाते हैं। हमें लगता है कि ये तो हमको ऐसे ही मिल गया है। ऐसा नहीं है, आप बहुत भाग्यशाली हैं कि आप भाजपा के कार्यकर्ता हैं। क्योंकि, भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें सामने बैठा कार्यकर्ता कल को मंच पर चाहे वो प्रदेश का नेतृत्व करे या पार्टी का नेतृत्व करे और काम करे। ये कांग्रेस पार्टी में संभव नहीं है, उसमें आगे बढ़ने के लिए एक ही परिवार में पैदा होना पड़ता है, बाकी तो सब झालमाल बजाने के लिए हैं। मैं जब उनसे पूछता हूं कि तुम्हारी आत्मा कचोटती नहीं है तो कहते हैं क्या करें नड्डा अब इसमें फंस गए हैं तो फंस गए हैं। मैंने कहा कि निकल आए क्योंकि यह वह जगह जहां अपने विचार भी रख सकते हो और तथ्यों को भी रख सकते हो। उन्होंने कहा कि अगर साधारण व्यक्तिव के नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन सकते हैं, अगर साधारण परिवार से उठकर योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन सकते हैं, अगर साधारण परिवार से उठकर स्वतंत्रदेव अध्यक्ष बन सकते हैं और मुझ जैसा व्यक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है तो ये संभव है कि आप भी यहां बैठ सकते हैं। यह सिर्फ भारतीय जनता पार्टी में संभव है, बाकी सभी पार्टियों में आरती गाओ, एक ही परिवार की आरती और वही घंटी बजाओ। कोई विचारधारा नहीं है, हम राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं और वो परिवारवाद और वंशवाद से प्रेरित हैं..। जेपी नड्डा हमारा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और उनका खुद का विकास परिवार का विकास, भाई-ताऊ और चाचे का विकास, अबतो चाचे का भी विकास छूट गया है, अबतो सिर्फ अपना विकास रह गया है। यहां संभव है सबके साथ मिलकर चलने की तम्मना है, यह मोदीजी ने हमको सिखाया है, यह मंत्र न सिर्फ पार्टी के लिए नहीं है, ये देश और विश्व के लिए भी है। सभी को परिवार समझकर विकास में जुड़ना और आगे बढ़ाना है। मैंने देखा है कि किस तरह से हमारे साथी विभिन्न विचारधारा से आए हैं, उनका क्या हश्र हुआ है सब देखा है। कालेज के समय हमारे साथी बोलते थे नड्डा यू हैव ब्राइट फ्यूचर, व्हाय आर यू इन एबीवीपी आरएसएस, यू शुड बी इन कांग्रेस..। आज हम पूछते हैं व्हाट अबाउट योर फ्यूचर तो जवाब देते हैं कि अरे हमे क्या, हमे परेशान मत करो तो हम कहते तीस साल पहले की याद दिला रहा हूं।

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Nov 23 2021, 16:09

हजारों ग्राम वासियों की खुशहाली के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने प्रदेश के पर
हजारों ग्राम वासियों की खुशहाली के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने प्रदेश के पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री को लिखा पत्र आगरा- पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता राजा अरिदमन सिंह ने हजारों स्थानीय ग्राम वासियों के खुशहाल जीवन के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी चंबल अभ्यारण सेंचुरी की सीमा 7-8 किलोमीटर से घटाकर एक किलोमीटर तक करने की माँग की है। उन्होंने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि चंबल सेंचुरी में जलचर गहरे पानी में ही सुविधा पूर्वक रहते हैं ना कि बीहड़ क्षेत्र में जलचर निवास करते हैं। ये जीव जंतु चंबल में ही विचरण और प्रजनन करते हैं। इसलिए चंबल सेंचुरी को 8 किलोमीटर बीहड़ तक निर्धारित किया जाना किसी प्रकार भी तर्कसंगत नहीं है। अरिदमन सिंह ने पत्र में लिखा है कि चंबल सेंचुरी के 8 किलोमीटर बीहड़ तक निर्धारित क्षेत्र में नदगवाँ, उमरैठा, रेहा, बरेंडा, तासौड़ एवं बासौनी सहित कई गाँवों के हजारों ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। यहाँ जीवन के लिए उपयोगी मूलभूत सुविधाएँ भी गाँव वासियों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ना ही कोई विकास कार्य हो पा रहे हैं। ये ग्राम वासी बिजली, पानी एवं सड़क आदि की जरूरी सुविधाओं से वंचित रह कर नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की चंबल अभ्यारण सेंचुरी की सीमा को एक किलोमीटर तक किए जाने से ग्राम वासियों को मूलभूत सुविधाएँ मिल सकेंगी। क्षेत्र के निवासियों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार आएगा। क्षेत्र के लोगों को विकास कार्यों का लाभ मिल सकेगा। बिजली, पानी, सड़क आदि की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और क्षेत्र की जनता खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकेगी।

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Nov 23 2021, 16:07

पालतू कुत्तों को बाहर खुला छोड़ने का विरोध करने पर धमकाने का आरोप, शिकायत पर पहुंची पुलिस पालतू कुत्तों को बाहर खुला छोड़ने का विरोध करने पर धमकाने का आरोप, शिकायत पर पहुंची पुलिस आगरा- थाना ताजगंज क्षेत्र में एक कॉलोनी में लोग सुबह शाम घूमने वाले कुत्तों से परेशान हो गए हैं। कहीं कुत्ते उनके बच्चों को काट न ले, इस डर से बच्चे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं तो वहीं पूरी कॉलोनी में गंदगी हो रही है। जब कुछ लोगों ने इसका विरोध किया तो श्वानों को पालने वाले पड़ोसी ने धमकाने की कोशिश की। यह आरोप लगाते हुए कॉलोनी में रहने वाली एक महिला ने इस संबंध में थाना ताजगंज में तहरीर दी है। दरअसल थाना प्रभारी ताजगंज ओमकार बाजपेई डिफैंस एन्क्लेव सेमरी ताल पहुँचे। यहाँ पर उन्होंने पीड़ित पूनम और उसके परिवार जनों से मुलाकात की। पीड़ित ने आवारा श्वानों के कारण होने वाली समस्या की शिकायत की थी। क्योंकि पड़ोसी के कुत्ते कई बार उनके बच्चों को अपना शिकार बना चुके थे और कई बार कहासुनी भी हुई। इस संबंध में पीड़ित पूनम ने तहरीर दी थी जिसके बाद पड़ोसी ने उन्हें धमकाया भी था। एक एनजीओ के सहारे वो उन्हें यह दर्शना चाहती है कि कॉलोनीवासी कुत्तों के विरोध में है। एनजीओ के माध्यम से नोटिस भी दिलवाए गए जबकि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता है। पीड़ितों का कहना है कि पड़ोसी कुत्तों को पाले लेकिन उन्हें अपने घर के अंदर जो रखें, उन्हें बाहर कॉलोनी में आवारा की तरह क्यों छोड़ देते हैं। ताजगंज प्रभारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात करने के बाद कॉलोनी के अन्य लोगों से भी वार्ता की। कॉलोनी वासियों ने थाना प्रभारी ताजगंज को बताया कि एक परिवार ने 10-12 आवारा कुत्तों को अपने घर में पाल रखा है जो कि उचित नहीं है। ये लोग कुत्तों को सुबह शाम घर से बहार निकाल देते है जो पूरी कॉलनी मे गंदगी करते हैं, बच्चे डर से घर के बाहर भी नहीं निकल सकते। इन लोगों से कॉलोनी वाले शिकायत करते हैं तो पूरा घर लड़ाई झगड़ा करता है और गाली गलौज भी की जाती है। इनकी शिकायत पर थाना प्रभारी द्वारा ताजगंज द्वारा कॉलनीवासियों को आश्वासन दिया गया कि इस मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर जल्द से जल्द समस्या का हल निकाल कर उचित कार्यवाही की जाएगी।

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Nov 23 2021, 16:05

रेलवे लाइन क्रेक होने से दर्जनों रेलगाड़ियां प्रभावित हुईं इटावा- बलरई रेलवे स्ट
रेलवे लाइन क्रेक होने से दर्जनों रेलगाड़ियां प्रभावित हुईं इटावा- बलरई रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से कानपुर जा रही शताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चल रही थी। ट्रेन जब पांच बजे करीब शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन से निकलकर बलरई रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, तभी अचानक ट्रैक फ्रैक्चर की जानकारी हुई। चालक ने तत्काल ही घटना से मुख्य नियंत्रण कक्ष टूंडला के अधिकारियों को अवगत कराया। आनन-फानन में अधिकारियों ने पीछे आ रहीं अभी ट्रेनों को पिछले स्टेशन पर रुकवाते हुए विभागीय कर्मचारियों की टीम को मौके पर भेजा। जहां टीम ने कार्य करते हुए लगभग ढाई घण्टे बाद फ्रैक्चर को सही किया। तब कहीं 21:20 के करीब 20840 राँची राजधानी के रूप में पहली ट्रेन को रवाना किया गया। रेल फैक्चर में शताब्दी राजधानी पूर्वा डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस सहित दर्जनों महत्वपूर्ण ट्रेनें प्रभावित रहीं। बलरई स्टेशन ट्रैक 18:53 फेलियर हुआ उसे 2034 शताब्दी के ड्राइवर ने 19:00 बजे फ्रैक्चर की सूचना कन्ट्रोल ऑफिस को दी उसके बाद 80 mm के फैक्चर से 10 किलोमीटर की स्पीड से शताब्दी एक्सप्रेस 19 बजकर 55 मिनट पर निकाली गई जिसके चलते डाउन ट्रैक बाधित रहा। ऐसे में शताब्दी सहित कई ट्रेनें प्रभावित रहीं। प्रभावित ट्रेनों के नंबर 20840, 2424, 2314, 2302, 22812, 2310 बताए गए हैं।

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Nov 23 2021, 16:04

विवेक संगल बने आगरा के जिला जज आगरा- इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक अधिका
विवेक संगल बने आगरा के जिला जज आगरा- इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। मथुरा में जनपद न्यायाधीश के पद पर कार्यरत विवेक संगल आगरा के जिला जज होंगे। वहीं, नलिन कुमार श्रीवास्तव का स्थानांतरण कर उन्हें जनपद इलाहाबाद का जिला जज बनाया गया है। मुजफ्फरनगर के रहने वाले विवेक संगल वर्ष 2008 के एच.जे.एस हैं। वह जनपद मथुरा से पूर्व हाथरस व अलीगढ़ के न्यायाधीश रहे हैं। वह वर्ष 2017 से वर्ष 2019 तक आगरा में अपर जिला जज के पद पर रह चुके हैं। वहीं, नलिन कुमार श्रीवास्तव नवंबर 2020 में आगरा के जिला जज बने थे। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने नलिन कुमार श्रीवास्तव को जिला जज इलाहाबाद के पद पर स्थानांतरित किया है।

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Nov 23 2021, 16:03

यूपी चुनाव से पहले 58 हजार ग्राम प्रधानों को बड़ा उपहार देने जा रहे सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी चुनाव से पहले 58 हजार ग्राम प्रधानों को बड़ा उपहार देने जा रहे सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के 58,189 ग्राम प्रधानों की मांग को पूरा करते हुए बड़ा उपहार देने जा रही है। राज्य सरकार प्रधानों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बढ़ाने जा रही है। इसके तहत वे गांवों के विकास के लिए फंड जारी करा सकेंगे। पिछले दिनों गांव के मुखिया का मानदेय व वित्तीय अधिकार बढ़ाने के साथ ही पंचायत प्रतिनिधि कल्याण कोष बनाने सहित छह मुद्दों पर अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास व ग्राम प्रधानों के बीच सहमति बन गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पांच दिसंबर को राजधानी में ग्राम प्रधान सम्मेलन में इस संबंध में ऐलान कर सकते हैं। ग्राम पंचायतों में 'स्थानीय सरकार' का कामकाज शुरू हो रहा है। प्रधानों को दो चरणों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार ग्राम प्रधानों की वर्षों से लंबित समस्याओं व मांगों का निस्तारण करा रही है। राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन व अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास मनोज कुमार सिंह के बीच अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह में तीन बार बैठक हो चुकी है। पिछली बैठक में आठ बिंदुओं पर चर्चा हुई। संगठन का दावा है कि छह बिंदुओं पर सहमति बन गई है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ललित शर्मा ने बताया कि गांवों में पंचायत प्रतिनिधि कल्याण कोष का गठन करने पर सहमति बनी है। इसमें ग्राम प्रधान या सदस्य आदि की किसी हादसे में निधन होता है तो कोष से उनके आश्रितों की मदद की जाएगी। प्रधानों ने सुझाव दिया कि सरकार चाहे तो राज्य वित्त के धन में कटौती करके यह कोष बना सकते हैं लेकिन, अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार इसके लिए अलग से बजट का प्रविधान करेगी। पंचायतों में ग्राम प्रधान को अभी तक दो लाख रुपये की स्वीकृति देने का अधिकार है इसे दो लाख रुपये और बढ़ाने की तैयारी है। इसी तरह से प्रधानों के प्रशासनिक अधिकार भी बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि जिला योजना में प्रधानों को सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व मिल सकता है। ग्राम प्रधानों को अब तक 3500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है इसे बढ़ाने की तैयारी है। प्रधानों का कहना है कि रोजगार सेवक को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं उसे देखते हुए बढ़ोतरी की जाए। गांवों में विकास कार्य कराने के लिए स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ की सेवा लेने की छूट मिल सकती है। अभी तक ब्लाक स्तर का तकनीकी अधिकारी ही सभी गांवों का कामकाज देखता है। मनरेगा के तहत मैटेरियल आपूर्ति ग्राम पंचायत को देने व प्रधानों को मनरेगा के भुगतान का अधिकार देने पर भी सहमति बनी है।

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Nov 23 2021, 16:02

अब गोबर की ईंटों पर खड़ी होगी इमारत अलीगढ़- पुराने जमाने के घर वेदरप्रूफ थे क्यो
अब गोबर की ईंटों पर खड़ी होगी इमारत अलीगढ़- पुराने जमाने के घर वेदरप्रूफ थे क्योंकि वे गोबर से ढके होते थे। विज्ञान की प्रगति के साथ, ऐसे घर अब नहीं देखे जाते हैं। कंक्रीट के भवन बन गए हैं। इससे पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। लेकिन अब कंकरीट की जगह गोबर की ईंटों से बनी इमारतें खड़ी नजर आ रही हैं। इसकी पहल शुरू हो गई है। इगलास क्षेत्र के मोहनपुर गोशाला में गोबर से ईंटें तैयार की जा रही हैं। इन ईंटों से बनी इमारतें मौसम के अनुकूल होंगी। गोबर की ईंटों से बनी इमारतें खड़ी गौसेबा समिति के निदेशक शौशिपाल सिंह उर्फ सत्यानंद दास ने बताया कि उनकी गौशाला में 700 से ज्यादा गायें थीं. वह प्रशासन से मिले पैसों और अपने प्रयास से गौशाला चला रहे हैं. प्रशासन की पहल पर उन्होंने गोबर से गोकाष्‍ट बनाना शुरू किया। प्रशासन के सहयोग से इन गोकाष्‍ट का उपयोग श्मशान घाट में किया जा रहा है। अब वे गोबर से ईट बनाने लगे हैं। हालांकि गोबर से बनी ईंटें पर्यावरण के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन इसके भवन भी मौसम के अनुकूल होते हैं। साथ ही वह गोबर से अगरबत्ती, स्वास्तिक, ओम, वैदिक सीमेंट बनाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मथुरा से 50,000 ईंटों (रामनरेती) का पहला ऑर्डर मिला था। एक ईंट की कीमत 4.5 रुपये है शशिपाल ने कहा कि उन्होंने हरियाणा के डॉ मलिक से ईंट बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। एक ईंट को बनाने में 4.5 रुपये का खर्च आता है। बाजार भाव 50 रुपये है। यह घर को सर्दी और गर्मी दोनों के लिए उपयुक्त बनाता है। गर्मियों में न ज्यादा गर्म और न ही सर्दियों में ज्यादा ठंडा, क्योंकि गोबर गर्मी से बचाने वाला होता है। ईंट में आग नहीं है, और न पानी से गलती है। इस तरह ईंटें बनाई जाती हैं चूना और चार अन्य प्रकार के रसायनों को मिलाकर ईंटें तैयार की जाती हैं। पूरी तरह से हाथ से बनी ईंटें। धूप में सूखने के बाद ये ईंटें घर बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं। इस ईंट भट्ठे में खाना बनाने की जरूरत नहीं है। सूखने के बाद ईंटों का वजन 400 से 500 ग्राम होता है। इसकी मोटाई और लंबाई सामान्य ईंटों के बराबर रखी गई है।