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Oct 10 2021, 09:06

नि:सन्तानों की गोद भरनेवाली स्कन्दमाता का विशेष भोग एवं पूजा-विधि

  


माता जगतजननी, जगदम्बा भवानी दुर्गा देवी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है । इन्हें स्कन्द कुमार कार्तिकेय की जननी के वजह से स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है । कार्तिकेय को पुराणों में कुमार, शौर, शक्तिधर आदि के नाम से भी इनके शौर्य का वर्णन किया गया है । इनका वाहन मयूर है अतः इन्हें मयूरवाहन के नाम से भी जाना जाता है । इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है ।
 
नवरात्रि के नव दिनों तक व्रत और उपवास करनेवाले साधक का मन इस दिन अर्थात पांचवें दिन विशुद्ध चक्र में होता है । क्योंकि माता स्कन्दमाता की पूजा नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है । इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे रहते हैं । स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल का फुल पकड़ा हुआ है ।

माता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं । इसी वजह से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है परन्तु इनका भी वाहन सिंह ही है । स्कन्द माता की पूजा भक्तों को उनके माता के वात्सल्य से भर देता है । एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से समस्त दुःखों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति का मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है ।

रूप और सौंदर्य की अद्वितिय आभा लिए हुए माता अभय मुद्रा में कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं । पद्मासना देवी, विद्यावाहिनी दुर्गा तथा सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी यही स्कन्दमाता ही हैं । इनकी उपासना से साधक अलौकिक तेज पाता है, क्योंकि यही हिमालय की पुत्री पार्वती भी हैं । इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है जो अपने पुत्र से अत्यधिक प्रेम करती हैं ।

इनको अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है । जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान ही स्नेह लुटाती हैं । स्कंदमाता की पूजा उसी प्रकार से करना चाहिए जैसे अन्य सभी देवियों का पूजन किया जाता है । शुद्ध चित से देवी का स्मरण करना चाहिए तथा पंचोपचार, षोडशोपचार या फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार स्कन्दमाता की पूजा करने के पश्चात भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए ।

जो भक्त देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की कृपा प्राप्त होती है । देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि सदैव बनी रहती है । वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए । कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में इनकी पूजा करने से माता पूर्णत: वात्सल्य लुटाती हुई नज़र आती हैं ।

माता का पांचवा रूप शुभ्र अर्थात श्वेत है परन्तु जब-जब अत्याचारियों का अत्याचार बढ़ता है तब-तब माता संत जनों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करने चली आती हैं । शास्त्रों में कहा गया है कि आज के दिन साधकों का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है, जिससे साधक के मन में समस्त बाह्य क्रियाओं और चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है । साधक ध्यान के माध्यम से चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होने लगता है ।

सच्चा साधक अपनी साधना से समस्त लौकिक एवं सांसारिक माया के बन्धनों को त्याग कर वह पद्मासना माँ स्कन्दमाता के रूप में पूर्णतः समाहित हो जाता है । परन्तु साधक को चाहिए की अपने मन को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढे । पंचमी तिथि को स्कन्द माता सामान्य पूजा से ही अपने भक्त को पुत्र के समान स्नेह करती हैं । नि:सन्तान व्यक्ति आज माता का पूजन-अर्चन तथा मंत्र जप करके पुत्रदयिनी माता से पुत्र प्राप्त कर सकते हैं ।

स्कन्दमाता का विशेष भोग:

मारकंडेय पुराण में स्कंदमाता की आराधना का काफी महत्व बताया गया है । इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और भक्त मोक्ष की प्राप्ति करता है ।

नवरात्रि में पंचमी के दिन पूजा करके भगवती स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए । इस प्रसाद को स्वयं ग्रहण न करके किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को देना चाहिए ।

इस प्रकार अपनी परम्परा अनुसार भी यत्र-तत्र माता को भोग समर्पित करने का विधान है । लेकिन विशेष रूप से केले के भोग से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की समस्त इच्छाओं को पूर्ण करती हैं । 

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Oct 10 2021, 06:25



  

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की गुमनाम नायिका, जिसने नहीं लिया देश सेवा का कोई मूल्य

यूं तो भारतीय इतिहास में कई महिलाओं का जिक्र है जिसने अंग्रेजों से लोहा लिया। हालांकि कई नाम ऐसे है, जो उस फेहरिस्त में छूट गए हैं। उमाबाई कुंडापुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐसी ही एक गुमनाम नायिका हैं। देश जरूर उन वीरांगनाओं के बारे में जानना चाहेगा। नमक सत्याग्रह के समय काफी महिलाओं को जेल में रखा गया था। ऐसी महिलाएं जब जेल से रिहा हुईं तब उनमें से बहुतों को उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया। उमाबाई का घर ही ऐसी महिलाओं का शरणस्थल बना। 

1934 में बिहार में भूकंप के समय उमाबाई और उनकी स्वयंसेवी महिलाओं ने रिफ्यूजी कैंप में जाकर रात-दिन सेवाकार्य किया। इन्हीं दिनों वे प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी के संपर्क में भी आईं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अपने खराब स्वास्थ्य के कारण वे भाग न ले सकीं। लेकिन उनका घर स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहा। 1946 में महात्मा गांधी ने उन्हें कस्तूरबा ट्रस्ट, कर्नाटक ब्रांच का हेड बनाया। यह ट्रस्ट गांवों से महिलाओं को जोड़ने और उन्हें ग्राम सेविका बनाने के लिए प्रेरित करता था।

स्वतंत्रता मिलने के बाद उन्हें कई तरह के राजनीतिक पद और पुरस्कार देने की पेशकश हुई। उन्होंने देश की सेवा का कभी कोई मूल्य नहीं लिया। उन्होंने एवार्ड, पेंशन तक लेने से इनकार कर दिया। वे बाकी सारी जिंदगी हुबली के एक छोटे से घर ‘आनंद स्मृति’ में रहकर काम करती रहीं और 1992 को वे दुनिया छोड़ गयीं।

उमाबाई कुंडापुर ऐसी योद्धा थी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के समय न केवल एक बड़े स्वयंसेवी संगठन का गठन किया, बल्कि उन्होंने ऐसी महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा जो कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं। वे इस बात में भाग्यशाली रहीं कि उनकी शादी ऐसे परिवार में हुई, जो महिलाओं के मामले में प्रगतिशील था। इसी के कारण उन्हें ससुराल में पढ़ने-लिखने और काम करने का पूरा मौका मिला। इस अवसर को उन्होंने देश की सेवा में लगा दिया।

उमाबाई का जन्म मैंगलोर में 1892 में गोलिकेरि कृष्णराव और जुंगाबाई के घर हुआ। भवानी गोलिकेरि के नाम के साथ वे तेरह साल की अवस्था तक अपने माता-पिता के घर रहीं। उनकी शादी संजीव राव कुंडापुर से हो गई। अपने श्वसुर आनंद राव कुंडापुर के कारण वे आगे की पढ़ाई कर सकीं। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा मुंबई के अलेक्जेंडर हाईस्कूल से पास की। शिक्षा पूरी करने के बाद उमाबाई अपने श्वसुर की सहायक के रूप में महिलाओं को पढ़ाने का काम करने लगीं। गौनदेवी महिला समाज के जरिए वे सामाजिक कामों से जुड़ गई थीं। कुछ साल व्यतीत होने के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 25 वर्ष की अवस्था में ही उनके पति संजीव राव का देहांत टीबी से हो गया। अपने बेटे की मृत्यु के बाद आनंद राव अपनी पुत्रवधू सहित हुबली में आकर बस गए। यहां उन्होंने कर्नाटक प्रेस की स्थापना की। उन्होंने यहां भी बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम के तहत तिलक कन्याशाला की स्थापना की। जिसको संवारने का काम उमाबाई ने संभाला।

1924 में स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के प्रमुख नेता डॉ एनएस हार्डिकर ने युवाओं को संगठित करने के लिए हिन्दुस्तानी सेवा दल का गठन किया। इसी संगठन की महिला विंग की नेता उमाबाई को बनाया गया और उन्होंने यह काम बखूबी संभाला। वे महिलाओं के शारीरिक प्रशिक्षण और ट्रेनिंग के लिए कैम्प लगाती थीं। नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्होंने बड़ी संख्या में सभी तरह की महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का काम किया। यहां तक धारवाड़ जैसे पिछड़े इलाके की महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी का परिणाम था कि बेलगाम में 1924 के अखिल भारतीय कांग्रेस सम्मेलन में 150 महिलाओं को सेवा के लिए भेजा गया था।

1932 में नमक सत्याग्रह के लिए उमाबाई को गिरफ्तार किया गया और उन्हें चार महीने यरवदा जेल में रखा गया। इसी बीच उनकी प्रेस को गैरकानूनी बताकर बालिका स्कूल सहित सील कर दिया गया। इसी बीच उनके श्वसुर आनंदराव का देहांत हो गया। यह उमाबाई के लिए बड़ी क्षति थी। बचपन से लेकर उन्होंने जो कुछ भी किया वह आनंद राव की छत्रछाया में रहकर ही किया था, वे उनके पथ प्रदर्शक रहे। इसलिए उमाबाई ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके ही पदचिन्हों पर चलने का निर्णय लिया। 

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Oct 10 2021, 06:24



  

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की गुमनाम नायिका, जिसने नहीं लिया देश सेवा का कोई मूल्य

यूं तो भारतीय इतिहास में कई महिलाओं का जिक्र है जिसने अंग्रेजों से लोहा लिया। हालांकि कई नाम ऐसे है, जो उस फेहरिस्त में छूट गए हैं। उमाबाई कुंडापुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐसी ही एक गुमनाम नायिका हैं। देश जरूर उन वीरांगनाओं के बारे में जानना चाहेगा। नमक सत्याग्रह के समय काफी महिलाओं को जेल में रखा गया था। ऐसी महिलाएं जब जेल से रिहा हुईं तब उनमें से बहुतों को उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया। उमाबाई का घर ही ऐसी महिलाओं का शरणस्थल बना। 

1934 में बिहार में भूकंप के समय उमाबाई और उनकी स्वयंसेवी महिलाओं ने रिफ्यूजी कैंप में जाकर रात-दिन सेवाकार्य किया। इन्हीं दिनों वे प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी के संपर्क में भी आईं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अपने खराब स्वास्थ्य के कारण वे भाग न ले सकीं। लेकिन उनका घर स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहा। 1946 में महात्मा गांधी ने उन्हें कस्तूरबा ट्रस्ट, कर्नाटक ब्रांच का हेड बनाया। यह ट्रस्ट गांवों से महिलाओं को जोड़ने और उन्हें ग्राम सेविका बनाने के लिए प्रेरित करता था।

स्वतंत्रता मिलने के बाद उन्हें कई तरह के राजनीतिक पद और पुरस्कार देने की पेशकश हुई। उन्होंने देश की सेवा का कभी कोई मूल्य नहीं लिया। उन्होंने एवार्ड, पेंशन तक लेने से इनकार कर दिया। वे बाकी सारी जिंदगी हुबली के एक छोटे से घर ‘आनंद स्मृति’ में रहकर काम करती रहीं और 1992 को वे दुनिया छोड़ गयीं।

उमाबाई कुंडापुर ऐसी योद्धा थी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के समय न केवल एक बड़े स्वयंसेवी संगठन का गठन किया, बल्कि उन्होंने ऐसी महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा जो कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं। वे इस बात में भाग्यशाली रहीं कि उनकी शादी ऐसे परिवार में हुई, जो महिलाओं के मामले में प्रगतिशील था। इसी के कारण उन्हें ससुराल में पढ़ने-लिखने और काम करने का पूरा मौका मिला। इस अवसर को उन्होंने देश की सेवा में लगा दिया।

उमाबाई का जन्म मैंगलोर में 1892 में गोलिकेरि कृष्णराव और जुंगाबाई के घर हुआ। भवानी गोलिकेरि के नाम के साथ वे तेरह साल की अवस्था तक अपने माता-पिता के घर रहीं। उनकी शादी संजीव राव कुंडापुर से हो गई। अपने श्वसुर आनंद राव कुंडापुर के कारण वे आगे की पढ़ाई कर सकीं। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा मुंबई के अलेक्जेंडर हाईस्कूल से पास की। शिक्षा पूरी करने के बाद उमाबाई अपने श्वसुर की सहायक के रूप में महिलाओं को पढ़ाने का काम करने लगीं। गौनदेवी महिला समाज के जरिए वे सामाजिक कामों से जुड़ गई थीं। कुछ साल व्यतीत होने के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 25 वर्ष की अवस्था में ही उनके पति संजीव राव का देहांत टीबी से हो गया। अपने बेटे की मृत्यु के बाद आनंद राव अपनी पुत्रवधू सहित हुबली में आकर बस गए। यहां उन्होंने कर्नाटक प्रेस की स्थापना की। उन्होंने यहां भी बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम के तहत तिलक कन्याशाला की स्थापना की। जिसको संवारने का काम उमाबाई ने संभाला।

1924 में स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के प्रमुख नेता डॉ एनएस हार्डिकर ने युवाओं को संगठित करने के लिए हिन्दुस्तानी सेवा दल का गठन किया। इसी संगठन की महिला विंग की नेता उमाबाई को बनाया गया और उन्होंने यह काम बखूबी संभाला। वे महिलाओं के शारीरिक प्रशिक्षण और ट्रेनिंग के लिए कैम्प लगाती थीं। नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्होंने बड़ी संख्या में सभी तरह की महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का काम किया। यहां तक धारवाड़ जैसे पिछड़े इलाके की महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी का परिणाम था कि बेलगाम में 1924 के अखिल भारतीय कांग्रेस सम्मेलन में 150 महिलाओं को सेवा के लिए भेजा गया था।

1932 में नमक सत्याग्रह के लिए उमाबाई को गिरफ्तार किया गया और उन्हें चार महीने यरवदा जेल में रखा गया। इसी बीच उनकी प्रेस को गैरकानूनी बताकर बालिका स्कूल सहित सील कर दिया गया। इसी बीच उनके श्वसुर आनंदराव का देहांत हो गया। यह उमाबाई के लिए बड़ी क्षति थी। बचपन से लेकर उन्होंने जो कुछ भी किया वह आनंद राव की छत्रछाया में रहकर ही किया था, वे उनके पथ प्रदर्शक रहे। इसलिए उमाबाई ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके ही पदचिन्हों पर चलने का निर्णय लिया। 

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Oct 09 2021, 22:21



  


Narcotics Control Bureau summons film producer Imtiyaz Khatri to appear before it today in Mumbai. 

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Oct 09 2021, 22:20

Summoning  who is the son of a politically powerful builder  has given ripples to many in Maharashtra. He is the same Imtiaz Khatri who was seen in a video intimidating our Sushant. This is the biggest crackdown on नशेड़ी गंजेड़ी चरसी lobby till now. Well done . 

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Oct 09 2021, 22:18

According to reports, the company stopped all ads featuring Shah Rukh Khan after it faced backlash on the micro-blogging site. 

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Oct 09 2021, 22:17

 at Jantar Mantar, New Delhi. They say they won't go back to Kashmir unless proper security arrangements are done. The slogan is, "One Demand, One Voice, Homeland!" "Where is My Home?" 

  


It's time that leaders should listen to KPs. Enough now! 

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Oct 09 2021, 18:43

govtbackfootondeathtollfrom_corona

  

विपक्ष की आलोचनाओं के बाद बैकफुट पर केरल सरकार, कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या में जोड़ने जा रही 7000 और नाम

कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को लेकर आलोचना का सामना कर रही केरल सरकार अब बैकफुट पर आ गई है। विपक्ष की तीखी आलोचना के बाद राज्य सरकार कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या में और 7000 मृतकों को सूची में शामिल करने जा रही है। इन आँकड़ों को शामिल करने के बाद राज्य में कोरोना के कारण हुई मौतों की संख्या 33 हजार पहुँच जाएगी। जबकि, यह अभी 26 हजार है। बता दें कि अभी देश में केरल में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले में।

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में और मौतों को शामिल के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी न होने के कारण इन मौतों को कोविड -19 मौतों के आधिकारिक आँकड़ों में शामिल नहीं किया गया था। मंत्री ने कहा, यदि लिस्ट में चूंक के बारे में कोई शिकायतें हैं, तो स्वास्थ्य विभाग उन पर गौर करने के लिए तैयार है।

जानकारी के मुताबिक, जो 7000 मौतें राज्य की सूची में जोड़ी जाएँगी वह जून के दूसरे सप्ताह तक होंगी। अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार नए आँकड़ों को शामिल करके अंतिम सूची का आंकलन कर रही है। सही आँकड़े जल्द ही पेश किए जाएँगे। उस समय तक, राज्य मेडिकल बोर्ड मौतों की समीक्षा करता था और फाइनल लिस्ट की घोषणा करता था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना की थी। बोर्ड ने कथित तौर पर उन मरीजों को लिस्ट में शामिल नहीं किया जिनका संक्रमित होने के बाद कोविड रिजल्ट नेगेटिव आया था और फिर कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुई जटिलताओं के कारण उनकी मृत्यु हो गई। जून के दूसरे सप्ताह से, बोर्ड द्वारा मौतों की समीक्षा करने की प्रक्रिया को रोक दिया गया और अस्पतालों ने सीधे मृत्यु संख्या अपलोड करना शुरू कर दिया।

कोरोना संक्रमण से हुई मौत के मामलों में विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार मौत के आंकड़ों में हेराफेरी कर रही है और आंकड़ों को कम करके दिखाया जा रहा है।विपक्ष के दबाव के बाद अब सरकार बैकफुट पर आ गई है। 

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Oct 09 2021, 16:02



  

कांशीराम की पुण्यतिथि के बहाने बसपा का शक्ति प्रदर्शन, विपक्षी पार्टियों पर मायावती का हमला

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी ने शनिवार को अपने संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर शक्ति प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में पुरानी जेल रोड स्थित कांशीराम स्मारक स्थल में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बसपा भारी भीड़ जुटा कर अपनी ताकत का एहसास दिलाया। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस दौरान विपक्षी पार्टियों को निसाने पर लिया।

आप वोट के लिए जनता से हवा हवाई वादे कर रही- मायावती
2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बसपा प्रमुख पहले ही पार्टी कार्यकर्ताओं को इस साल कांशीराम की पुण्यतिथि को बड़े पैमाने पर मनाने के निर्देश दिए थे।मायावती ने सभी 75 जिलों के कार्यकर्ताओं को लखनऊ आने को कहा था। जिसका असर सभा में उमड़ी बीड़ के रूप में देखा गया। इस दौरान मायावती ने कहा कि विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी वोट के लिए जनता से वादे कर रही हैं जो हवा हवाई है, उनमें रत्तीभर भी दम नहीं है। विरोधी पार्टियां चुनावी घोषणापत्रों में प्रलोभन भरे चुनावी वादे करने वाली हैं।

कार्यकर्ताओं को किया सावधान
बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को सावधान करते हुए कहा कि कुछ छोटी पार्टियों और विपक्षियों के हथकंडों से सतर्क रहें। मायावती ने कहा कि कुछ छोटी पार्टियां अकेले या गठबंधन में रहकर केवल पर्दे के पीछे से सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाने की जुगत में हैं। 

गरीब-बेरोजगार को रोटी रोजी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा
वहीं कांशीराम की 10वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मायावती ने चुनावी वादे भी किए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने पर इस बार सबसे अधिक जोर यहां के गरीब और बेरोजगार नौजवानों को रोटी रोजी के साधन उपलब्ध कराने पर होगा। इस बार यही हमारी पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा होने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बसपा को कमजोर दिखाने की कोशिश में लगे हैं। आज इस भीड़ को देखकर उन सभी को यह समझ जाना चाहिए कि बसपा में कितनी ताकत है। उन्होंने कहा कि सर्वे के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।