ओवैसी ने की सीईसी की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द करने की मांग, बोले- एसआईआर भी खत्म किया जाए

#owaisisayslawregardingappointmentofcecshouldbestruckdown

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के दबाव के कारण देश का सिसायी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग की है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर एतराज

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तभी उन्होंने सरकार को आगाह किया था कि इसके प्रावधानों से आम जनता के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता कम होगी। उन्होंने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि इस कानून में सेवानिवृत्ति के बाद चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है, जो बिल्कुल सही नहीं है। ओवैसी ने मांग की कि नियुक्ति प्रक्रिया में फिर से बदलाव किया जाना चाहिए और चयन समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ-साथ देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एसआईआर पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने एसआईआर पर भी सवाल उठाया है। एसआईआर के मुद्दे पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि आखिर यह प्रक्रिया कहां से आई। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद फॉर्म-6 के आवेदनों की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों की मैपिंग पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने एसआईआर को भी बंद करने की मांग की। उन्होंने मांग की कि इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।

‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं-ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और देश की सर्वोच्च अदालत भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह खुद ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे इस गठबंधन के आंतरिक कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

मस्जिद को बुलडोज नहीं कर सकते क्योंकि आपको खुजली हो रही है’, सहारनपुर मामले में ओवैसी का हमला

#asaduddinowaisiquestionssaharanpurmosque_demolition

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। करीब 115 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को ढहाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी थी और यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई के तरीके और मस्जिद की जमीन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी ने पूछे तीखे सवाल

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर की मस्जिद गिराए जाने पर सवाल उठाए। ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीखा हमला किया। ओवैसी ने एक्स पर लिखा, सुबह 5 बजे सहारनपु कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को गिराया गया। हाईकोर्ट जाने के पहले ही एक्शन ले लिया गया। क्या धर्म की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी मुसलमानों पर लागू नहीं होती? ऐसा क्यों है कि हमारी इबादतगाहों को छोटी-छोटी वजहों से बुलडोजर चलाकर गिराया जाता है?

जमीन पर सरकार के दावे को लेकर किया सवाल

ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई थी कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। ओवैसी ने मस्जिद की जमीन पर सरकार के दावे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को किसी जमीन पर अपना दावा करने के लिए असीमित समय नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि अगर किसी जमीन पर एक सदी से ज्यादा समय से खुले तौर पर लगातार कब्जा रहा है तो सरकार अचानक यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय तक कब्जे की स्थिति में एडवर्स पजेशन का सवाल भी उठता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद पहले बनी थी और उसके बाद कलेक्ट्रेट का निर्माण हुआ।

मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं-ओवैसी

ओवैसी ने अपने पोस्ट में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, कुछ लोगों को शायद मस्जिद को देखना बुरा लगता है। यह उनकी परेशानी है, हमारी नहीं। अगर चाहें तो नजरें फेर लें। इसलिए कि आपको कोई खुजली है। आप हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं है।

ओवैसी ने की सीईसी की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द करने की मांग, बोले- एसआईआर भी खत्म किया जाए

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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के दबाव के कारण देश का सिसायी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग की है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर एतराज

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तभी उन्होंने सरकार को आगाह किया था कि इसके प्रावधानों से आम जनता के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता कम होगी। उन्होंने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि इस कानून में सेवानिवृत्ति के बाद चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है, जो बिल्कुल सही नहीं है। ओवैसी ने मांग की कि नियुक्ति प्रक्रिया में फिर से बदलाव किया जाना चाहिए और चयन समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ-साथ देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एसआईआर पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने एसआईआर पर भी सवाल उठाया है। एसआईआर के मुद्दे पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि आखिर यह प्रक्रिया कहां से आई। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद फॉर्म-6 के आवेदनों की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों की मैपिंग पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने एसआईआर को भी बंद करने की मांग की। उन्होंने मांग की कि इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।

‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं-ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और देश की सर्वोच्च अदालत भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह खुद ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे इस गठबंधन के आंतरिक कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

मस्जिद को बुलडोज नहीं कर सकते क्योंकि आपको खुजली हो रही है’, सहारनपुर मामले में ओवैसी का हमला

#asaduddinowaisiquestionssaharanpurmosque_demolition

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। करीब 115 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को ढहाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी थी और यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई के तरीके और मस्जिद की जमीन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी ने पूछे तीखे सवाल

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर की मस्जिद गिराए जाने पर सवाल उठाए। ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीखा हमला किया। ओवैसी ने एक्स पर लिखा, सुबह 5 बजे सहारनपु कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को गिराया गया। हाईकोर्ट जाने के पहले ही एक्शन ले लिया गया। क्या धर्म की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी मुसलमानों पर लागू नहीं होती? ऐसा क्यों है कि हमारी इबादतगाहों को छोटी-छोटी वजहों से बुलडोजर चलाकर गिराया जाता है?

जमीन पर सरकार के दावे को लेकर किया सवाल

ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई थी कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। ओवैसी ने मस्जिद की जमीन पर सरकार के दावे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को किसी जमीन पर अपना दावा करने के लिए असीमित समय नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि अगर किसी जमीन पर एक सदी से ज्यादा समय से खुले तौर पर लगातार कब्जा रहा है तो सरकार अचानक यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय तक कब्जे की स्थिति में एडवर्स पजेशन का सवाल भी उठता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद पहले बनी थी और उसके बाद कलेक्ट्रेट का निर्माण हुआ।

मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं-ओवैसी

ओवैसी ने अपने पोस्ट में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, कुछ लोगों को शायद मस्जिद को देखना बुरा लगता है। यह उनकी परेशानी है, हमारी नहीं। अगर चाहें तो नजरें फेर लें। इसलिए कि आपको कोई खुजली है। आप हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं है।