2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करेंगे', अमित शाह के बयान पर बढ़ा सियासी घमासान

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गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी-एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दिया जाएगा। फिलहाल देश में 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। यानी बाकी 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास हो चुका है। अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने यूसीसी का कानून तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं।

बीजेपी को तेलुगु देशम पार्टी और शिवसेना का समर्थन

राजग के प्रमुख सहयोगियों तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और शिवसेना ने गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान का समर्थन किया है कि सभी राजग-शासित राज्यों में 2029 से पहले एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। हालांकि भाजपा के सहयोगी जदयू ने सतर्क प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने कहा कि वह यूसीसी बिल का अध्ययन करेगी और बिना किसी कारण विरोध नहीं किया जाएगा।

मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाए

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इस बयान पर घमासान छिड़ गया है। अब इस पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलेगा या किसी राजनीतिक दल के वैचारिक एजेंडे से? उन्होंने यूसीसी को धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने वाला कदम बताया।

सपा अध्यक्ष ने अमित शाह पर साधा निशाना

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी लागू करने संबंधी बयान को लेकर हमला बोला है। सपा प्रमुख ने यूसीसी का फुल फार्म ‘अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी’ बताया है। गृह मंत्री ने कहा था कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के सभी एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर दी जाएगी। इसे लेकर बिना नाम लिए सपा प्रमुख ने मंगलवार को एक्स पर लिखा, जनता समझ चुकी है कि भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है, दरअसल उसका फुल फार्म कुछ और है : यूसीसी यानी अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी। इसके आगे उन्होंने ‘पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ’ शीर्षक से कविता भी साझा की, जिसमें विभिन्न मुद्दे उठाए गए हैं।

बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?

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बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।

11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी

बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।

कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।

कहां चूक गई बीजेपी?

सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।

जेन ज़ी आंदोलन से सीख

जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे*

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

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20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

अब एक ही शिवसेना बची...’, अमित शाह का उद्धव ठाकरे पर बड़ा तंज

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केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिवसेना के दो गुटों में चल रही कलह के बीच तीखा तंज कसा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ही उद्धव खेमे पर तंज कसा और कहा कि अब एक ही शिवसेना है, कोई गुट नहीं बचा है। शनिवार को उन्होंने कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला।

अब केवल एक ही 'शिवसेना'-अमित शाह

अमित शाह ने वहां महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर परिसर में विकास कार्यों की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'पहले एकनाथ शिंदे के नाम के आगे 'शिंदे गुट' लगाना पड़ता था, लेकिन अब केवल एक ही 'शिवसेना' रह गई है, अब कोई अन्य गुट बाकी नहीं रहा है।' अमित शाह ने एकनाथ शिंदे का परिचय देते हुए यह टिप्पणी की। जब शाह ने यह कहा तो मंच पर एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। 

12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की-अमित शाह

अमित शाह ने कोल्हापुर में कहा कि कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि मोदी के नेतृत्व में 12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की, विकास किया और अपनी संस्कृति को संजोकर रखा। उन्होंने महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार की तारीफ की। शाह ने कहा कि हमारे लिए पश्चिम बंगाल को बहुत मुश्किल लक्ष्य बताय जा रहा था लेकिन अंतिम चुनाव में वहां भी बीजेपी की सरकार बनी है। 

शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच कलह

बता दें कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच फिर से कलह मची हुई है। उद्धव सेना के 6 सांसदों के बारे में चर्चा है कि वे किसी भी दिन एकनाथ शिदे गुट का दामन थाम सकते हैं। इन सभी को संभालने के लिए दिल्ली में उद्धव सेना की एक मीटिंग भी हुई थी, लेकिन ये लोग नहीं पहुंचे थे। ऐसे में साफ है कि सभी 6 सांसद बागी होने को तैयार हैं। इस बीच शुक्रवार को दोनों गुटों ने शिवसेना की स्थापना के 60 सालों पर अलग-अलग आयोजन किए। कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति भी दोनों गुटों के बीच देखी गई।

2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करेंगे', अमित शाह के बयान पर बढ़ा सियासी घमासान

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गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी-एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दिया जाएगा। फिलहाल देश में 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। यानी बाकी 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास हो चुका है। अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने यूसीसी का कानून तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं।

बीजेपी को तेलुगु देशम पार्टी और शिवसेना का समर्थन

राजग के प्रमुख सहयोगियों तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और शिवसेना ने गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान का समर्थन किया है कि सभी राजग-शासित राज्यों में 2029 से पहले एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। हालांकि भाजपा के सहयोगी जदयू ने सतर्क प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने कहा कि वह यूसीसी बिल का अध्ययन करेगी और बिना किसी कारण विरोध नहीं किया जाएगा।

मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाए

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इस बयान पर घमासान छिड़ गया है। अब इस पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलेगा या किसी राजनीतिक दल के वैचारिक एजेंडे से? उन्होंने यूसीसी को धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने वाला कदम बताया।

सपा अध्यक्ष ने अमित शाह पर साधा निशाना

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी लागू करने संबंधी बयान को लेकर हमला बोला है। सपा प्रमुख ने यूसीसी का फुल फार्म ‘अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी’ बताया है। गृह मंत्री ने कहा था कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के सभी एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर दी जाएगी। इसे लेकर बिना नाम लिए सपा प्रमुख ने मंगलवार को एक्स पर लिखा, जनता समझ चुकी है कि भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है, दरअसल उसका फुल फार्म कुछ और है : यूसीसी यानी अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी। इसके आगे उन्होंने ‘पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ’ शीर्षक से कविता भी साझा की, जिसमें विभिन्न मुद्दे उठाए गए हैं।

बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?

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बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।

11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी

बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।

कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।

कहां चूक गई बीजेपी?

सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।

जेन ज़ी आंदोलन से सीख

जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे*

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20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे

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20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

अब एक ही शिवसेना बची...’, अमित शाह का उद्धव ठाकरे पर बड़ा तंज

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केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिवसेना के दो गुटों में चल रही कलह के बीच तीखा तंज कसा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ही उद्धव खेमे पर तंज कसा और कहा कि अब एक ही शिवसेना है, कोई गुट नहीं बचा है। शनिवार को उन्होंने कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला।

अब केवल एक ही 'शिवसेना'-अमित शाह

अमित शाह ने वहां महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर परिसर में विकास कार्यों की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'पहले एकनाथ शिंदे के नाम के आगे 'शिंदे गुट' लगाना पड़ता था, लेकिन अब केवल एक ही 'शिवसेना' रह गई है, अब कोई अन्य गुट बाकी नहीं रहा है।' अमित शाह ने एकनाथ शिंदे का परिचय देते हुए यह टिप्पणी की। जब शाह ने यह कहा तो मंच पर एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। 

12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की-अमित शाह

अमित शाह ने कोल्हापुर में कहा कि कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि मोदी के नेतृत्व में 12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की, विकास किया और अपनी संस्कृति को संजोकर रखा। उन्होंने महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार की तारीफ की। शाह ने कहा कि हमारे लिए पश्चिम बंगाल को बहुत मुश्किल लक्ष्य बताय जा रहा था लेकिन अंतिम चुनाव में वहां भी बीजेपी की सरकार बनी है। 

शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच कलह

बता दें कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच फिर से कलह मची हुई है। उद्धव सेना के 6 सांसदों के बारे में चर्चा है कि वे किसी भी दिन एकनाथ शिदे गुट का दामन थाम सकते हैं। इन सभी को संभालने के लिए दिल्ली में उद्धव सेना की एक मीटिंग भी हुई थी, लेकिन ये लोग नहीं पहुंचे थे। ऐसे में साफ है कि सभी 6 सांसद बागी होने को तैयार हैं। इस बीच शुक्रवार को दोनों गुटों ने शिवसेना की स्थापना के 60 सालों पर अलग-अलग आयोजन किए। कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति भी दोनों गुटों के बीच देखी गई।