शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का उपायुक्त हेमन्त सती ने किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर दिए कई निर्देश

हजारीबाग। उपायुक्त हेमन्त सती ने शनिवार को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, हजारीबाग का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फार्मेसी सेंटर, जन औषधि केंद्र, पैथोलॉजी विभाग, एमटीसी केंद्र, ओपीडी, एक्स-रे कक्ष, रेडियोलॉजिस्ट कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष सहित अस्पताल के विभिन्न विभागों एवं केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने जन औषधि केंद्र एवं फार्मेसी सेंटर में दवा लेने पहुंचे लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और मरीजों की दवा पर्चियों का भी अवलोकन किया। जन औषधि केंद्र को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया। वहीं, मरीजों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अस्पताल परिसर में फार्मेसी सेंटर के दवा वितरण केंद्र पांच अलग-अलग स्थानों पर संचालित करने का निर्देश दिया। फार्मेसी सेंटर के माध्यम से मरीजों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

एमटीसी केंद्र में व्यवस्थाओं और अभिलेखों की जांच

उपायुक्त ने एमटीसी केंद्र का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं एवं अभिलेखों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान बिना स्टाम्प एवं गैर जिम्मेदाराना तरीके से दवा लिखे जाने की बात सामने आने पर उन्होंने डीआरसीएचओ से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। साथ ही एमटीसी केंद्र के रजिस्टर एवं व्यय संबंधी विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया।

पैथोलॉजी विभाग में व्यवस्था सुधारने के निर्देश

पैथोलॉजी विभाग एवं ब्लड सैंपल कलेक्शन कक्ष के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कार्यप्रणाली और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। पैथोलॉजी विभाग में कार्यरत कर्मियों के कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर उन्होंने रजिस्ट्रेशन सेंटर में कार्यरत कर्मी को हटाकर अन्य कर्मी को ड्यूटी पर लगाने का निर्देश दिया।

मरीजों की सुविधा के लिए भुगतान की ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों व्यवस्थाएं उपलब्ध रखने तथा काउंटरों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी प्रकार की जांच के नाम क्रमवार एवं स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया। ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर के लिए उपयुक्त स्थान निर्धारित कर उसे स्थानांतरित करने का निर्देश भी संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया।

अस्पताल में साइनएज और माइकिंग सिस्टम की होगी व्यवस्था

उपायुक्त ने अस्पताल परिसर के सभी आवश्यक केंद्रों एवं विभागों की जानकारी मरीजों एवं उनके परिजनों को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त साइनएज लगाने तथा माइकिंग सिस्टम की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। उन्होंने अस्पताल परिसर को दलालों से पूरी तरह मुक्त रखने का स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी पदाधिकारी या कर्मी की दलालों के साथ संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित उपकरणों की उपलब्धता पर चर्चा

उपायुक्त ने सीआर कक्ष, एक्स-रे कक्ष, रेडियोलॉजिस्ट कक्ष एवं अल्ट्रासाउंड कक्ष का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित रजिस्टरों, आय एवं व्यय का अवलोकन किया। एक्स-रे मशीनों की आवश्यकता, उनके उपयोग, मशीनों की जिम्मेदारी, तकनीशियनों की उपलब्धता सहित अन्य तकनीकी पहलुओं पर संबंधित पदाधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने अस्पताल में नए एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड एवं सीपीआरओ मशीन उपलब्ध कराने की बात कही। साथ ही खराब एक्स-रे मशीनों को शीघ्र दुरुस्त कराने का निर्देश दिया।

जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ ड्यूटी करने का निर्देश

उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अस्पताल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं अनुशासन के साथ निर्वहन करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों, चिकित्सकों, नर्सों एवं अन्य कर्मियों को निर्धारित यूनिफॉर्म में ही ड्यूटी करने को कहा।

अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए पार्किंग को परिसर से बाहर करने तथा इसके लिए ट्रैफिक डीएसपी के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया।

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त श्रीमती रिया सिंह, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, सिविल सर्जन सहित अस्पताल के संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

हजारीबाग में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, प्रिंस खान गिरोह के 4 सक्रिय सदस्य गिरफ्तार

हजारीबाग। जिले में संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान हजारीबाग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बड़कागांव एवं गिद्दी थाना क्षेत्र में की गई कार्रवाई में प्रिंस खान गिरोह के 4 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बड़कागांव थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर गठित SIT टीम ने प्रिंस खान गिरोह के सक्रिय सदस्य अंकित कुमार पांडेय, पिता अरुण कुमार पांडेय, ग्राम पिपराडीह, थाना बड़कागांव, जिला हजारीबाग को पूछताछ के लिए लाया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से गैंगस्टर प्रिंस खान से कॉल एवं चैट के माध्यम से संपर्क की जानकारी सामने आई। साथ ही आरोपी के राहुल दुबे गिरोह के संपर्क में होने की बात भी पुलिस ने बताई है।

पुलिस के अनुसार, कड़ाई से पूछताछ के दौरान अंकित कुमार पांडेय ने बताया कि प्रिंस खान के निर्देश पर उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया था और प्रिंस खान संगठन के नाम से पर्चा छोड़ने का काम भी किया था। इस संबंध में बड़कागांव थाना कांड दर्ज किया गया था।

अंकित कुमार पांडेय की निशानदेही पर पुलिस ने इस घटना में शामिल प्रिंस खान गिरोह के दो अन्य सक्रिय सदस्यों ओम प्रकाश पांडेय उर्फ कौशल और कुणाल कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने पिपराडीह गांव के नजदीक बंद पड़े गैस प्लांट में घटना में इस्तेमाल हथियार एवं अन्य सामग्री छिपाकर रखने की जानकारी दी।

इसके बाद पुलिस टीम आरोपी की निशानदेही पर पिपराडीह-चंदौल सड़क किनारे बंद पड़े गैस प्लांट के पास पहुंची, जहां हथियार एवं बम की बरामदगी की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान आरोपी अंकित कुमार पांडेय भागने लगा और पुलिस बल की ओर फायर किया। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई कार्रवाई में आरोपी के बाएं पैर में गोली लगी और वह वहीं गिर गया। इसके बाद पुलिस बल ने उसे पकड़ लिया। घटनास्थल से हथियार, बम एवं पर्चे बरामद किए गए।

वहीं, गिद्दी थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करमा कुमार साहू, पिता हरी साहू, पता पतरातू बाजार, थाना पतरातू, जिला रामगढ़ को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार करमा कुमार साहू राहुल दुबे एवं प्रिंस खान गिरोह के लिए सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से संपर्क कर हथियार और बम सप्लाई करता था।

करमा कुमार साहू की निशानदेही पर 08 अगस्त 2026 को साधु कुटिया जंगल में छिपाकर रखे गए बम एवं देशी पिस्तौल का मैगजीन बरामद किया गया। इस संबंध में गिद्दी थाना कांड संख्या 22/26, दिनांक 08 अगस्त 2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस द्वारा बताई गई बरामदगी

  • देशी बम — 02
  • देशी पिस्तौल — 01
  • जिंदा गोली — 01
  • खोखा — 01
  • मिस फायर गोली — 01
  • मोबाइल — 05
  • पर्चा — 04 पीस

पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अंकित कुमार पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय उर्फ कौशल, कुणाल कुमार पांडेय और करमा कुमार साहू शामिल हैं।

JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जनहित याचिका दायर

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएमसी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने याचिका दाखिल की है। इस याचिका में नए सिरे से परीक्षा के आयोजन और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

48 सवालों के जवाब देने पर ही पास हो गया एक कैंडिडेट

बता दें कि ये मामला JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है। यह परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को हुई थी और इसका प्रारंभिक रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। रिजल्ट आने के बाद एक सफल उम्मीदवार की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर सामने आई थी। फिर आरोप लगा कि उम्मीदवार ने पहले पेपर में 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए, फिर भी वह परीक्षा में सफल घोषित हुआ।

याचिका में क्या मांग की गई?

अब सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में 9 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिका में खास तौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की है।

परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

याचिका में प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ कराई जाए। इसके अलावा OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड, समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड संरक्षित किए जाने की भी मांग की गी है।

10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता

PVUNL की सामाजिक पहल को मिला सम्मान: विधायक रोशन लाल चौधरी ने शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य का किया लोकार्पण

पतरातू, 08 अगस्त 2026:

पीटीपीएस पोस्ट ऑफिस के समीप स्थित शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर में आज झारखंड के वीर सपूत एवं अमर शहीद निर्मल महतो जी का 39वां शहादत दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL) द्वारा सामुदायिक विकास कार्य के अंतर्गत शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रोशन लाल चौधरी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि श्री राधेश्याम अग्रवाल, जिला परिषद सदस्य सह सांसद प्रतिनिधि श्री राजाराम प्रजापति, पीवीयूएनएल के सीजीएम (O&M) श्री मनीष खेतरपाल, जीएम (Project Construction) श्री बी.डी. दास, HOHR श्री जियाउर रहमान, AGM (Civil Construction) श्री शिरीष कुमार बरकुल, DGM (Civil Construction) श्री अमित रंजन सहित पीवीयूएनएल के अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

लोकार्पण के अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक श्री रोशन लाल चौधरी सहित उपस्थित अतिथियों ने स्मारक परिसर में वृक्षारोपण भी किया। विद्यालय की छात्राओं द्वारा सभी अतिथियों का चंदन लगाकर एवं पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं लोगों ने शहीद निर्मल महतो जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके विचारों एवं आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर विधायक श्री रोशन लाल चौधरी ने कहा कि अमर शहीद निर्मल महतो जी झारखंड की अस्मिता, अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष करने वाले महान जननेता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड एवं समाज के हितों के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष, त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

उन्होंने कहा कि शहीद निर्मल महतो जी के सपनों का झारखंड बनाने के लिए हम सभी को उनके विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाजहित में कार्य करना होगा। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पीवीयूएनएल द्वारा सामुदायिक विकास के तहत किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य का उद्देश्य स्मारक परिसर को सुव्यवस्थित, आकर्षक एवं जनोपयोगी स्वरूप प्रदान करना तथा क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सामाजिक विरासत के संरक्षण में योगदान देना है। इस पहल के माध्यम से पीवीयूएनएल ने स्थानीय समुदाय के साथ अपने सतत जुड़ाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

रांची के मोरहाबादी स्थित गेस्ट हाउस में झारखंड सरकार और आंदोलनरत छात्रों के दूसरे गुट के बीच दूसरे दिन की वार्ता सकारात्मक और सफल रही।

Ranchi: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रांची के मोरहाबादी स्थित गेस्ट हाउस में आज लगातार दूसरे दिन राज्य सरकार और आंदोलनरत छात्रों के देवेंद्र नाथ महतो गुट के बीच अहम बैठक हुई। दोनों ही पक्षों ने इस वार्ता को बेहद सकारात्मक और सफल बताया है।

सरकार का कहना है कि छात्रों से हर सुझाव लेने के लिए एक विशेष मेल आईडी भी जारी की गई है।

झारखंड सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध दूर करने की दिशा में आज एक और बड़ा कदम उठाया गया। रांची के मोरहाबादी गेस्ट हाउस में सरकार के प्रतिनिधिमंडल और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले छात्र गुट के बीच दूसरे दिन की वार्ता संपन्न हुई.

सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई इस बैठक के बाद राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार और दीपिका पांडेय सिंह ने मीडिया से बात की। मंत्रियों ने बताया कि सरकार छात्रों की मांगों को लेकर बेहद गंभीर है। छात्रों के सुझाव सीधे सरकार तक पहुँचाने के लिए एक विशेष मेल आईडी जारी की गई है, जिस पर छात्र संगठन या कोई भी स्टेकहोल्डर अपने विचार भेज सकते हैं। सरकार ने साफ किया है कि अन्य छात्र संगठनों से वार्ता के बाद पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।

उधर सरकार के इस रुख से आंदोलनरत छात्र भी संतुष्ट नज़र आए। छात्र प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेगी।

लगातार दूसरे दिन हुई इस बैठक और बातचीत के इस दौर से साफ है कि सरकार छात्रों के मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है। अब देखना होगा कि अन्य संगठनों से वार्ता और जारी की गई ईमेल आईडी पर मिलने वाले सुझावों के बाद मुख्यमंत्री इस पर क्या अंतिम फैसला लेते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान, राहुल गांधी ने किया बिल का समर्थन तो रिजिजू का जोरदार पलटवार

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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू आमने-सामने आ गए हैं। किरेन रिजिजू ने सबसे पहले एक बयान जारी कर राहुल गांधी को बिना शर्त महिला आरक्षण कानून को समर्थन करने के लिए कहा था। जिसके तुरंत बाद राहुल गांधी ने भी पलटवार कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि हां मैं बिना शर्त के समर्थन करने को तैयार हूं लेकिन 2023 वाले महिला आरक्षण बिल को लागू कीजिए। रिजिजू ने इसे सकारात्मक संदेश बताया और तंज कहा कि क्या उनका हृदय परिवर्तन हुआ है।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

शुक्रवार के एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं को बातचीत में वापस लाना और उन्हें वह करने देना जो वे करना चाहती हैं जरूरी है। राहुल ने कहा था कि महिलाओं एनर्जी फंसी हुई है, उन्हें खुद को एक्सप्रेस करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता है जब तक महिलाओं खुद को एक्सप्रेस न करें। भारत पुरुषों द्वारा महिलाओं पर लगाए गए कड़े कंट्रोल से आजादी चाहता है।

रिजिजू का राहुल गांधी पर तंज

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण पर वीडियो संदेश पर निशाना साधा। रिजिजू ने राहुल के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी के महिलाओं को लेकर नजरिए में स्पष्ट रूप से हृदय परिवर्तन दिखाई दे रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।’

राहुल का पलटवार

रिजिजू की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने भी तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते रिजिजू से बेहतर यह कौन जान सकता है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने उस विधेयक का पूरा समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने सरकार के सामने असली सवाल रख दिया कि अगर कानून तीन साल पहले पास हो गया था तो अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया?

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का क्या रुख?

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। विपक्षी दलों की मांग रही है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने की शर्त से न जोड़ा जाए।

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।

EzeeHoney Taps India's Growing On-the-Go Wellness Trend with Convenient Premium Honey Solutions

The trend of healthy lifestyles among consumers and the time constraints has led to an increasing need for convenient, healthful and clean labeled products. In response to this change, EzeeHoney has created a new convenient and portable way to enjoy one of nature's oldest superfoods by introducing its high quality single serve honey twigs with purity, portability and convenience.

Today's consumers are looking for foods that seamlessly fit into their daily routines without compromising on quality or nutrition. From commuting to work, travelling, working out, or working in the office, they want products that are convenient to take, sanitary, and ready to eat. EzeeHoney meets this growing demand by revolutionising the traditional honey jar into a convenient and mess free single serve portion, which can be consumed anywhere, anytime.

EzeeHoney's individually sealed honey twigs are a convenient solution for the busy, modern lifestyle and unlike traditional honey packaging, they do not require spoons or special storage. The portion controlled format allows you to reduce the risk of sticky messes, product wastage and a guarantee of freshness with each portion. Consumers can just pop open a twig and eat the pure honey or pour a bit into their tea, coffee or smoothies, or add the honey to their breakfast bowls, yogurt, cereals or all their regular dishes.

The company's spokesperson said that the idea behind EzeeHoney was to make natural honey easily available and convenient for the people of today. Our honey twigs offer high quality and unbeatable convenience, while retaining the natural goodness of the honey.

The brand caters to the consumers who are looking for authentic taste and innovative wellness products with a well-curated portfolio of products such as Himalayan Multi-Flora Honey, Lemon-Infused Honey, Lychee Blossom Honey, Vanilla-Infused Honey and functional Lakadong Turmeric Honey. Each variety is carefully developed to maintain the natural characteristics of the honey and provide unique taste and functionality.

Consumer trends show that there is an increasing demand for clean-label foods – those that contain easy-to-understand ingredients. The more people get to know about mindful eating, the more we see products that provide natural nutrition in convenient formats become a daily part of people's wellness regimes. With its versatility and natural sweetness, honey is making a comeback in the world of health-conscious consumers seeking alternatives to refined sugar.

EzeeHoney's innovative solution also resonates with the increased demand for packaging where control of servings is important for responsible consumption and to avoid further waste. Its compact design makes it ideal for professionals, students, fitness enthusiasts, travellers and families who want to get good nutrition without sacrificing convenience.

EzeeHoney not only brings a new packaging format, but also a new range of experience to the consumer culture of honey, by making it a practical everyday companion as opposed to an occasional beaker of pantry honey. Incorporating high-quality ingredients, user-friendly functionality, and contemporary amenities, the brand is developing a new category experience in keeping with today's consumers' expectations.

In a country where the wellness lifestyle and functional foods are gaining momentum, EzeeHoney is at the nexus of health, innovation and convenience, making pure honey consumption more convenient for customers than ever before.

शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का उपायुक्त हेमन्त सती ने किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर दिए कई निर्देश

हजारीबाग। उपायुक्त हेमन्त सती ने शनिवार को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, हजारीबाग का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फार्मेसी सेंटर, जन औषधि केंद्र, पैथोलॉजी विभाग, एमटीसी केंद्र, ओपीडी, एक्स-रे कक्ष, रेडियोलॉजिस्ट कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष सहित अस्पताल के विभिन्न विभागों एवं केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने जन औषधि केंद्र एवं फार्मेसी सेंटर में दवा लेने पहुंचे लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और मरीजों की दवा पर्चियों का भी अवलोकन किया। जन औषधि केंद्र को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया। वहीं, मरीजों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अस्पताल परिसर में फार्मेसी सेंटर के दवा वितरण केंद्र पांच अलग-अलग स्थानों पर संचालित करने का निर्देश दिया। फार्मेसी सेंटर के माध्यम से मरीजों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

एमटीसी केंद्र में व्यवस्थाओं और अभिलेखों की जांच

उपायुक्त ने एमटीसी केंद्र का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं एवं अभिलेखों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान बिना स्टाम्प एवं गैर जिम्मेदाराना तरीके से दवा लिखे जाने की बात सामने आने पर उन्होंने डीआरसीएचओ से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। साथ ही एमटीसी केंद्र के रजिस्टर एवं व्यय संबंधी विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया।

पैथोलॉजी विभाग में व्यवस्था सुधारने के निर्देश

पैथोलॉजी विभाग एवं ब्लड सैंपल कलेक्शन कक्ष के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कार्यप्रणाली और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। पैथोलॉजी विभाग में कार्यरत कर्मियों के कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर उन्होंने रजिस्ट्रेशन सेंटर में कार्यरत कर्मी को हटाकर अन्य कर्मी को ड्यूटी पर लगाने का निर्देश दिया।

मरीजों की सुविधा के लिए भुगतान की ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों व्यवस्थाएं उपलब्ध रखने तथा काउंटरों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया। साथ ही सभी प्रकार की जांच के नाम क्रमवार एवं स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया। ब्लड सैंपल कलेक्शन सेंटर के लिए उपयुक्त स्थान निर्धारित कर उसे स्थानांतरित करने का निर्देश भी संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया।

अस्पताल में साइनएज और माइकिंग सिस्टम की होगी व्यवस्था

उपायुक्त ने अस्पताल परिसर के सभी आवश्यक केंद्रों एवं विभागों की जानकारी मरीजों एवं उनके परिजनों को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त साइनएज लगाने तथा माइकिंग सिस्टम की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। उन्होंने अस्पताल परिसर को दलालों से पूरी तरह मुक्त रखने का स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी पदाधिकारी या कर्मी की दलालों के साथ संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित उपकरणों की उपलब्धता पर चर्चा

उपायुक्त ने सीआर कक्ष, एक्स-रे कक्ष, रेडियोलॉजिस्ट कक्ष एवं अल्ट्रासाउंड कक्ष का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित रजिस्टरों, आय एवं व्यय का अवलोकन किया। एक्स-रे मशीनों की आवश्यकता, उनके उपयोग, मशीनों की जिम्मेदारी, तकनीशियनों की उपलब्धता सहित अन्य तकनीकी पहलुओं पर संबंधित पदाधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने अस्पताल में नए एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड एवं सीपीआरओ मशीन उपलब्ध कराने की बात कही। साथ ही खराब एक्स-रे मशीनों को शीघ्र दुरुस्त कराने का निर्देश दिया।

जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ ड्यूटी करने का निर्देश

उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अस्पताल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं अनुशासन के साथ निर्वहन करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों, चिकित्सकों, नर्सों एवं अन्य कर्मियों को निर्धारित यूनिफॉर्म में ही ड्यूटी करने को कहा।

अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए पार्किंग को परिसर से बाहर करने तथा इसके लिए ट्रैफिक डीएसपी के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया।

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त श्रीमती रिया सिंह, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, सिविल सर्जन सहित अस्पताल के संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

हजारीबाग में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, प्रिंस खान गिरोह के 4 सक्रिय सदस्य गिरफ्तार

हजारीबाग। जिले में संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान हजारीबाग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बड़कागांव एवं गिद्दी थाना क्षेत्र में की गई कार्रवाई में प्रिंस खान गिरोह के 4 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बड़कागांव थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर गठित SIT टीम ने प्रिंस खान गिरोह के सक्रिय सदस्य अंकित कुमार पांडेय, पिता अरुण कुमार पांडेय, ग्राम पिपराडीह, थाना बड़कागांव, जिला हजारीबाग को पूछताछ के लिए लाया। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से गैंगस्टर प्रिंस खान से कॉल एवं चैट के माध्यम से संपर्क की जानकारी सामने आई। साथ ही आरोपी के राहुल दुबे गिरोह के संपर्क में होने की बात भी पुलिस ने बताई है।

पुलिस के अनुसार, कड़ाई से पूछताछ के दौरान अंकित कुमार पांडेय ने बताया कि प्रिंस खान के निर्देश पर उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया था और प्रिंस खान संगठन के नाम से पर्चा छोड़ने का काम भी किया था। इस संबंध में बड़कागांव थाना कांड दर्ज किया गया था।

अंकित कुमार पांडेय की निशानदेही पर पुलिस ने इस घटना में शामिल प्रिंस खान गिरोह के दो अन्य सक्रिय सदस्यों ओम प्रकाश पांडेय उर्फ कौशल और कुणाल कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने पिपराडीह गांव के नजदीक बंद पड़े गैस प्लांट में घटना में इस्तेमाल हथियार एवं अन्य सामग्री छिपाकर रखने की जानकारी दी।

इसके बाद पुलिस टीम आरोपी की निशानदेही पर पिपराडीह-चंदौल सड़क किनारे बंद पड़े गैस प्लांट के पास पहुंची, जहां हथियार एवं बम की बरामदगी की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान आरोपी अंकित कुमार पांडेय भागने लगा और पुलिस बल की ओर फायर किया। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई कार्रवाई में आरोपी के बाएं पैर में गोली लगी और वह वहीं गिर गया। इसके बाद पुलिस बल ने उसे पकड़ लिया। घटनास्थल से हथियार, बम एवं पर्चे बरामद किए गए।

वहीं, गिद्दी थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करमा कुमार साहू, पिता हरी साहू, पता पतरातू बाजार, थाना पतरातू, जिला रामगढ़ को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार करमा कुमार साहू राहुल दुबे एवं प्रिंस खान गिरोह के लिए सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से संपर्क कर हथियार और बम सप्लाई करता था।

करमा कुमार साहू की निशानदेही पर 08 अगस्त 2026 को साधु कुटिया जंगल में छिपाकर रखे गए बम एवं देशी पिस्तौल का मैगजीन बरामद किया गया। इस संबंध में गिद्दी थाना कांड संख्या 22/26, दिनांक 08 अगस्त 2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस द्वारा बताई गई बरामदगी

  • देशी बम — 02
  • देशी पिस्तौल — 01
  • जिंदा गोली — 01
  • खोखा — 01
  • मिस फायर गोली — 01
  • मोबाइल — 05
  • पर्चा — 04 पीस

पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अंकित कुमार पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय उर्फ कौशल, कुणाल कुमार पांडेय और करमा कुमार साहू शामिल हैं।

JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जनहित याचिका दायर

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएमसी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने याचिका दाखिल की है। इस याचिका में नए सिरे से परीक्षा के आयोजन और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

48 सवालों के जवाब देने पर ही पास हो गया एक कैंडिडेट

बता दें कि ये मामला JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है। यह परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को हुई थी और इसका प्रारंभिक रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। रिजल्ट आने के बाद एक सफल उम्मीदवार की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर सामने आई थी। फिर आरोप लगा कि उम्मीदवार ने पहले पेपर में 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए, फिर भी वह परीक्षा में सफल घोषित हुआ।

याचिका में क्या मांग की गई?

अब सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में 9 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिका में खास तौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की है।

परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

याचिका में प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ कराई जाए। इसके अलावा OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड, समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड संरक्षित किए जाने की भी मांग की गी है।

10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता

PVUNL की सामाजिक पहल को मिला सम्मान: विधायक रोशन लाल चौधरी ने शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य का किया लोकार्पण

पतरातू, 08 अगस्त 2026:

पीटीपीएस पोस्ट ऑफिस के समीप स्थित शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर में आज झारखंड के वीर सपूत एवं अमर शहीद निर्मल महतो जी का 39वां शहादत दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL) द्वारा सामुदायिक विकास कार्य के अंतर्गत शहीद निर्मल महतो स्मारक परिसर के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रोशन लाल चौधरी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि श्री राधेश्याम अग्रवाल, जिला परिषद सदस्य सह सांसद प्रतिनिधि श्री राजाराम प्रजापति, पीवीयूएनएल के सीजीएम (O&M) श्री मनीष खेतरपाल, जीएम (Project Construction) श्री बी.डी. दास, HOHR श्री जियाउर रहमान, AGM (Civil Construction) श्री शिरीष कुमार बरकुल, DGM (Civil Construction) श्री अमित रंजन सहित पीवीयूएनएल के अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

लोकार्पण के अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक श्री रोशन लाल चौधरी सहित उपस्थित अतिथियों ने स्मारक परिसर में वृक्षारोपण भी किया। विद्यालय की छात्राओं द्वारा सभी अतिथियों का चंदन लगाकर एवं पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों एवं लोगों ने शहीद निर्मल महतो जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके विचारों एवं आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर विधायक श्री रोशन लाल चौधरी ने कहा कि अमर शहीद निर्मल महतो जी झारखंड की अस्मिता, अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष करने वाले महान जननेता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड एवं समाज के हितों के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष, त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

उन्होंने कहा कि शहीद निर्मल महतो जी के सपनों का झारखंड बनाने के लिए हम सभी को उनके विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाजहित में कार्य करना होगा। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पीवीयूएनएल द्वारा सामुदायिक विकास के तहत किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य का उद्देश्य स्मारक परिसर को सुव्यवस्थित, आकर्षक एवं जनोपयोगी स्वरूप प्रदान करना तथा क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सामाजिक विरासत के संरक्षण में योगदान देना है। इस पहल के माध्यम से पीवीयूएनएल ने स्थानीय समुदाय के साथ अपने सतत जुड़ाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

रांची के मोरहाबादी स्थित गेस्ट हाउस में झारखंड सरकार और आंदोलनरत छात्रों के दूसरे गुट के बीच दूसरे दिन की वार्ता सकारात्मक और सफल रही।

Ranchi: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रांची के मोरहाबादी स्थित गेस्ट हाउस में आज लगातार दूसरे दिन राज्य सरकार और आंदोलनरत छात्रों के देवेंद्र नाथ महतो गुट के बीच अहम बैठक हुई। दोनों ही पक्षों ने इस वार्ता को बेहद सकारात्मक और सफल बताया है।

सरकार का कहना है कि छात्रों से हर सुझाव लेने के लिए एक विशेष मेल आईडी भी जारी की गई है।

झारखंड सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध दूर करने की दिशा में आज एक और बड़ा कदम उठाया गया। रांची के मोरहाबादी गेस्ट हाउस में सरकार के प्रतिनिधिमंडल और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले छात्र गुट के बीच दूसरे दिन की वार्ता संपन्न हुई.

सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई इस बैठक के बाद राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार और दीपिका पांडेय सिंह ने मीडिया से बात की। मंत्रियों ने बताया कि सरकार छात्रों की मांगों को लेकर बेहद गंभीर है। छात्रों के सुझाव सीधे सरकार तक पहुँचाने के लिए एक विशेष मेल आईडी जारी की गई है, जिस पर छात्र संगठन या कोई भी स्टेकहोल्डर अपने विचार भेज सकते हैं। सरकार ने साफ किया है कि अन्य छात्र संगठनों से वार्ता के बाद पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।

उधर सरकार के इस रुख से आंदोलनरत छात्र भी संतुष्ट नज़र आए। छात्र प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेगी।

लगातार दूसरे दिन हुई इस बैठक और बातचीत के इस दौर से साफ है कि सरकार छात्रों के मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है। अब देखना होगा कि अन्य संगठनों से वार्ता और जारी की गई ईमेल आईडी पर मिलने वाले सुझावों के बाद मुख्यमंत्री इस पर क्या अंतिम फैसला लेते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान, राहुल गांधी ने किया बिल का समर्थन तो रिजिजू का जोरदार पलटवार

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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू आमने-सामने आ गए हैं। किरेन रिजिजू ने सबसे पहले एक बयान जारी कर राहुल गांधी को बिना शर्त महिला आरक्षण कानून को समर्थन करने के लिए कहा था। जिसके तुरंत बाद राहुल गांधी ने भी पलटवार कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि हां मैं बिना शर्त के समर्थन करने को तैयार हूं लेकिन 2023 वाले महिला आरक्षण बिल को लागू कीजिए। रिजिजू ने इसे सकारात्मक संदेश बताया और तंज कहा कि क्या उनका हृदय परिवर्तन हुआ है।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

शुक्रवार के एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा था कि महिलाओं को बातचीत में वापस लाना और उन्हें वह करने देना जो वे करना चाहती हैं जरूरी है। राहुल ने कहा था कि महिलाओं एनर्जी फंसी हुई है, उन्हें खुद को एक्सप्रेस करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता है जब तक महिलाओं खुद को एक्सप्रेस न करें। भारत पुरुषों द्वारा महिलाओं पर लगाए गए कड़े कंट्रोल से आजादी चाहता है।

रिजिजू का राहुल गांधी पर तंज

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण पर वीडियो संदेश पर निशाना साधा। रिजिजू ने राहुल के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी के महिलाओं को लेकर नजरिए में स्पष्ट रूप से हृदय परिवर्तन दिखाई दे रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।’

राहुल का पलटवार

रिजिजू की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने भी तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते रिजिजू से बेहतर यह कौन जान सकता है कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने उस विधेयक का पूरा समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने सरकार के सामने असली सवाल रख दिया कि अगर कानून तीन साल पहले पास हो गया था तो अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया?

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का क्या रुख?

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। विपक्षी दलों की मांग रही है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने की शर्त से न जोड़ा जाए।

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।

EzeeHoney Taps India's Growing On-the-Go Wellness Trend with Convenient Premium Honey Solutions

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