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विधानसभा चुनाव के बीच सरकार ने क्यों बुलाया संसद का विशेष सत्र, बीजेपी ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया

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‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर मजबूती से आगे बढ़ना चाहती है, इसी वजह से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक विधेयक पर समर्थन देने की अपील की है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर दी है।

16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र

महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर विचार-विमर्श करने और उसे पारित करने के लिए अगले सप्ताह एक विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा।

बीजेपी सांसदों के लिए 3 लाइन का व्हिप जारी

बीजेपी ने ने रविवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहने को कहा है। इस दौरान किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। इसमें विशेष रूप से केंद्रीय मंत्रियों और सभी सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वे इन तीनों दिनों के दौरान सदन में उपस्थित रहें।

सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन मांगा

वहीं. प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में सभी पार्टियों के सदन के नेताओं को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए समर्थन मांगा, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि इस संशोधन को पारित कराने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। अधिक से अधिक सांसदों को इस विषय पर संसद में अपने विचार रखने चाहिए। उन्होंने इसे किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर का विषय बताया है।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़ा है मामला

पीएम मोदी ने शनिवार को लिखे गए अपने पत्र में कहा कि 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक ऐतिहासिक चर्चा शुरू होने जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने तथा सभी को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता को दोहराने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने के अवसर मिलते हैं। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए महिलाओं की पूर्ण भागीदारी को आवश्यक बताया।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने की आलोचना

प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में, मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह महिला सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक लाभ उठाने के लिए महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है। अपने जवाब में खरगे ने लिखा, "विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है और सरकार परिसीमन के संबंध में कोई भी विवरण साझा किए बिना ही एक बार फिर विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा कर रही है।" कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि अगर इस विशेष सत्र का उद्देश्य हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है, तो सरकार को सुझाव है कि 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक 'सर्वदलीय बैठक' बुलाए, ताकि परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की जा सके, जिस मुद्दे को 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम में किए जा रहे संशोधन से जोड़ा जा रहा है।

नहीं रहीं दिग्गज गायिका आशा भोसले, 92 वर्ष की आयु में निधन

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भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उन्हें थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

शनिवार को अस्पताल में कराया गया था भर्ती

करीब सात दशक तक सिनेमाई दुनिया में अपनी सुरीली आवाज का जादू चलाने वाली गायिका को कल शनिवार को तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दुनियाभर के फैंस दुआएं कर रहे थे। मगर, रविवार को गायिका ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 

गायिका की पोती जनाई ने दी थी हेल्थ अपडेट

गायिका की पोती जनाई भोसले ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए उनका हेल्थ अपडेट साझा करते हुए लिखा था, ‘अत्यधिक थकावट और सीने में संक्रमण के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि हमारी निजता का सम्मान करें। उनका इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा'।

कल होगा अंतिम संस्कार

आशा भोसले का अंतिम संस्कार कल सोमवार को होगा। गायिका का पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे लोअर परेल में उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यही वही जगह है, जहां उनकी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था। 

संगीत का एक विशाल अध्याय

आशा भोसले महज एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा थीं। उन्होंने अपने करियर में 12 हजार से भी ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। 'दम मारो दम', 'पिया तू अब तो आजा', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' और 'इन आंखों की मस्ती के' जैसे उनके हजारों गाने आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं। उन्होंने गजल, भजन, पॉप और शास्त्रीय संगीत—हर शैली में महारत हासिल की थी।

कई सर्वोच्च सम्मानों ने नवाजा गया

भारत सरकार ने उन्हें 'दादासाहेब फाल्के' और 'पद्म विभूषण' जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा था। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के बाद आशा जी का जाना संगीत प्रेमियों के लिए एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। आज हर उस शख्स की आंख नम है, जिसने कभी न कभी आशा जी की आवाज में प्यार, दर्द या खुशी को महसूस किया है।

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता टूटी, जानें कहां फंसा पेच

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जिसका डर था वहीं हुआ। ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता पहले दौर में ही दम तोड़ गई। अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटों तक चली शांति वार्ता बेनतीजा रही। इस कूटनीतिक प्रयास के विफल होने के साथ ही पश्चिम एशिया में संकट गहराने की संभावना बढ़ गई है। शांति वार्ता असफल होने के बाद से अमेरिका-इजराइल के एक बार फिर से आक्रामक रुख अपनाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से किया इनकार

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही बेनतीजा रही बातचीत को लेकर अमेरिका के मुख्य वार्ताकार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार सुबह इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्योंकि ईरान ने हमारी शर्तें मानने से मना कर दिया है। साथ ही यह भी कहा कि कोई समझौता नहीं हो पाया है।

वेंस ने कहा- ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर

वेंस ने कहा कि हमने ईरानियों के साथ कई अहम बातचीत की है, जो अच्छी खबर है। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका के नहीं बल्कि ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है।

ईरान ने क्या कहा?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि हमने कई मुद्दों पर सहमति बनाई, लेकिन 2-3 महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद थे, और अंततः वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। वार्ता का यह दौर एक साल में सबसे लंबा था। कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक साधन है। राजनयिकों को युद्ध और शांति दोनों समय में अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

पाकिस्तान ने की युद्धविराम जारी रखने की मांग

21 घंटों तक चली बातचीत के विफल होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों देशों का बातचीत की मेज पर आने के लिए धन्यवाद किया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं, युद्धविराम की समयसीमा बढ़े और दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करें।

संसद में पीएम मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात, काफी देर तक हुई बातचीत

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संवाद लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। सियासत में वैचारिक मतभेद का मतलब संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, ऐसा होता नहीं है। इसलिए तो आज देश की संसद के अंदर से आई एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई है। ये तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुलाकात की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज संसद परिसर में अचानक ही आमने-सामने आ गए। इस दौरान राहुल गांधी ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने भी हाथ जोड़कर उनके अभिवादन को स्वीकार किया। यही नहीं दोनों ही नेताओं के बीच फिर काफी देर तक बातचीत होती रही।

दरअसल, आज महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती है। इस मौके पर संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर खास आयोजन रखा गया। इसी मौके पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद और लोकसभा स्पीकर समेत सियासी दिग्गज पहुंचे थे। इसी समारोह में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुलाकात हुई।

इस मुलाकात का एक वीडियो खूब सुर्खियां बटोर रहा है। 1 मिनट 34 सेकेंड के इस वीडियो में पीएम मोदी और राहुल गांधी के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। पहले तो पीएम ने बाकी खड़े सांसदों का अभिवादन किया फिर पीछे मुड़कर राहुल गांधी के पास आए। इसके बाद काफी देर तक आपस में बातचीत करते दिखे।

पाकिस्तान में बैठी “पंचायत”, शांति वार्ता से पहले धमकी और चेतावनी, अमेरिका-ईरान के बीच हो पाएगा सुलह?

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज से शुरू होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा वक्त से जारी जंग और हालिया युद्धविराम के बीच यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। शांति वार्ता के लिए ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच गया है. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर कालिबाफ कर रहे हैं। इधर अमेरिका की ओर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारी-भरकम दल के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। हालांकि, वार्ता से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने बड़ी शर्त रखी है। वहीं, अमेरिका भी धमकी देने से नहीं चूका।

बातचीत से पहले ईरान ने रखीं दो शर्तें

वार्ता से पहले ईरान ने अपनी शर्तें भी साफ कर दी हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में युद्धविराम लागू होना चाहिए और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां रिलीज की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन शर्तों के बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

अमेरिका ने शांति वार्ता से पहले दी है चेतावनी

इससे पहले, इस्लामाबाद जाने वाले विमान में सवार होने से पहले वैंस ने मीडिया से कहा, "जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अगर ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी वार्ताकार टीम इतनी सहृदय नहीं है।"

पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को ‘मेक ऑर ब्रेक’ बताया है। इस्लामाबाद में सेरेना होटल को वार्ता के लिए पूरी तरह खाली कराकर सुरक्षा घेरे में लिया गया है। शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पाकिस्तानी एयरफोर्स और उसके एयर डिफेंस एक्टिव हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, घर पर कैश मिलने के मामले में चल रही है जांच

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कैश कांड में फंसे इलाहबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया है। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते उनके घर से जले हुए नोट मिले थे, जिसके बाद वे विवादों से घिर गए थे।

जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली वाले घर में भारी मात्रा में जले हुए नोट मिलने के मामले में उनके खिलाफ आंतरिक जांच चल रही थी। साथ ही महाभियोग की भी चर्चा थी। उनके खिलाफ महाभियोग लाने के मामले में कमेटी का गठन किया गया है। कई सांसदों ने संसद में जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए नोटिस दिया था। फिलहाल जस्टिस वर्मा के खिलाफ आतंरित जांच कमेटी जांच कर रही है। इसी बीच उन्होंने पद से त्याग पत्र दे दिया है।

पिछले साल मार्च में घर से मिले थे जले हुए नोट

पिछले साल मार्च के महीने में जस्टिस वर्मा के दिल्ली वाले घर से जले हुए नोट मिले थे। इस समय वह दिल्ली हाईकोर्ट में पदस्थ थे। घर में जले हुए कैश मिलने के बाद उनका स्थानांतरण इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया था। पांच अप्रैल 2025 को उन्होंने शपथ ग्रहण किया था। न्यायिक कार्य से उनको फिलहाल अलग किया गया था।

एक साल से चल रही जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ पिछले साल अगस्त में बहुदलीय नोटिस लोकसभा में लाया गया था। इस नोटिस में यशवंत वर्मा को न्यायाधीश के पद से हटाने की बात कही गई थी। मामले की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसमें भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी.आचार्य शामिल थे। इसी साल फरवरी में ओम बिरला ने न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर को तीन सदस्यीय समिति में शामिल किया। समिति की जांच चल रही है और जल्द ही जस्टिस वर्मा को उनके पद से हटाया जा सकता है।

नीतीश कुमार की नई संसदीय पारी, राज्यसभा सदस्य की शपथ ली

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बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा से अपनी नई सियासी पारी शुरू की। आज दोपहर 12:12 बजे उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली। संसद भवन में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह के दौरान शपथ दिलाई गई। राज्यसभा के सभापति एवं देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण ने नीतीश कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

चारों सदनों के सदस्य बने नीतीश

राज्यसभा की शपथ लेते ही नीतीश कुमार देश के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जो विधायक, एमएलसी, लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सांसद रहे हैं। नीतीश ने पहली बार 1985 में विधायक का चुनाव जीता, फिर 1989 में बाढ़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने उसके बाद 2006 में एमएलसी बने और अब राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है।

30 साल से ज्यादा समय से राजनीति में

नीतीश कुनार 30 साल से ज्यादा समय से राजनीति की मुख्य धारा में हैं। पहले बिहार की राजनीति की, फिर केंद्र की। बिहार में मंत्री कभी नहीं बने और मुख्यमंत्री बनने से पहले वह केंद्रीय मंत्री की ताकत हासिल कर चुके थे। 2005 से अब तक वह कुछ समय को छोड़ बाकी समय मुख्यमंत्री रहे। जिस समय सीएम नहीं थे, उस समय भी सारी शक्तियां उनके पास ही समाहित नजर आ रही थीं। सत्ता में कोई रहा, सीएम नीतीश कुमार ही रहे। अब वह सीएम की कुर्सी छोड़ने वाले हैं। इसके लिए उन्होंने विधान परिषद् की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

नीतीश कुमार आज लेंगे राज्यसभा सदस्य की शपथ, 2 दशक बाद दिल्ली की सियासत में वापसी

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लगभग दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी में हैं। नीतीश कुमार आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार को राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन के कक्ष में उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही नीतीश कुमार के सियासी सफर का एक नया अध्याय शुरू हो जाएगा।

चारों सदनों के सदस्य होने का बनेगा अनोखा रिकॉर्ड

नीतीश कुमार के नाम अब एक दुर्लभ संसदीय रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है। वह विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा के सदस्य बनकर भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों का हिस्सा बनने वाले नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे।

बिहार में जल्द होगा नेतृत्व परिवर्तन

इससे पहले गुरूवार को सीएम नीतीश कुमार ने नई दिल्ली पहुंचते ही साफ कर दिया कि बिहार में अब नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि 'मैंने बिहार में बहुत काम किया है। अब मुझे लगा कि मुझे यहां रहना चाहिए, और मैं यही कर रहा हूं।' नीतीश कुमार ने आगे कहा, 'मैं वहां अपने पद से हट जाऊंगा और यहां काम करूंगा। मैं तीन या चार दिनों में इस्तीफा दे दूंगा। नए लोगों को मुख्यमंत्री और मंत्री बनाया जाएगा।'

30 मार्च को विधान परिषद से दिया इस्तीफा

नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद की सदस्यता से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। जनता दल (यूनाइटेड) सुप्रीमो 16 मार्च को संसद के ऊपरी सदन के लिए निर्वाचित हुए थे।

पाक रक्षा मंत्री पर भड़के नेतन्याहू, ऐसा लगाई लताड़ की डिलीट किया पोस्ट, इजरायल को बताया था 'कैंसर'

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तान और इजरायल भिड़ते दिख रहे है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरा मामल और गर्म हो गया है।

लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और ‘कैंसर’ बताया। साथ ही लेबनान में हो रही सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है। आसिफ ने आरोप लगाया कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में खूनखराबा जारी है।

ख्वाजा आसिफ के जहरीले बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को अभिशाप बताते हुए कहा, "जिन लोगों ने कैंसर जैसा देश बनाया है, वे उम्मीद करते हैं कि वो नर्क की आग में जलें।' हालांकि, बाद में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इजरायल के खिलाफ दिए गए कैंसर वाले बयान समेत उन्हें नर्क में जला देने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर क्या बोले नेतन्याहू ?

इस बयान के बाद इजरायल ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ है और किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है। इसमें कहा गया कि इजरायल के विनाश की मांग घोर आपत्तिजनक है।

इजरायली विदेश मंत्री का पलटवार

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, शांति की मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से इन खुले तौर पर यहूदी-विरोधी और भड़काऊ आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। यहूदी राष्ट्र को कैंसर कहना असल में उसे खत्म करने का ही आह्वान करना है। उन्होंने आगे कहा, इजरायल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने उसे तबाह करने की कसम खाई है।

दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार, कल राज्यसभा सदस्‍य के तौर पर लेंगे शपथ

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द‍िल्‍ली पहुंच चके हैं। नीतीश कल यानी 10 अप्रैल को राज्‍यसभा सदस्‍य के तौर पर शपथ लेंगे। राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार के पटना लौटने पर बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं। जानकारी के अनुसार पटना वापस आकर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

आज जेडीयू के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने से पहले जनता दल यूनाईटेड के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पहले से दिल्ली में मौजूद हैं। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी नेता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जदयू की भूमिका, मंत्री और डिप्टी सीएम के पद पर विचार विमर्श किया जाएगा। निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी? इस पर भी चर्चा की जाएगी।

पीएम मोदी और अमित शाह से करेंगे मुलाकात

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलकात करेंगे। बिहार में नई एनडीए सरकार के प्रारूप को लेकर सीएम नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर सकते हैं। नई सरकार का मंत्रिमंडल कैसा रहेगा? कौन रिपीट होंगे? किस नए चेहरे को मौका दिया जाएगा? इस पर सीएम नीतीश कुमार अपनी राय रखेंगे।

बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बिहार में नई सरकार के गठन के लिए कवायद तेज है लगातार बिहार में सर्गर्मिया तेज है। आज जहां नीतीश कुमार दिल्ली के लिए रवाना हुए राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। वहीं भाजपा के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी दिल्ली रवाना हुए। कल भाजपा की बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री शामिल होंगे। जिस तरह से नई सरकार के गठन की कवायद् है उसको लेकर बैठकों का दौर लगातार जारी है। 48 से 72 घंटे के अंदर नए मुख्यमंत्री के नाम से पर्दा हटने की संभावना जताई जा रही है। सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है।

अगले सीएम के नामों की चर्चा

बिहार के सियासी गलियारों में अगले सीएम के नामों की चर्चा हो रही। सबसे आगे जिन नामों को माना जा रहा है,उनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख है। सम्राट चौधरी संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी उनका नाम मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक तौर पर उन्हें आक्रामक और फैसले लेने वाला नेता माना जाता है। दूसरे नंबर पर, यानी मजबूत दावेदार के रूप में विजय कुमार सिन्हा का नाम लगातार चर्चा में है। विजय सिन्हा को संघ के करीब और अनुशासित नेता के रूप में देखा जाता है। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है, जो संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रख सकते हैं।