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संसद के नियम किसी भी व्यक्ति से सर्वोपरि, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों”, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद बोले ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया। इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने वापसी के बाद सदन को संबोधित किया।

सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार रखे-ओम बिरला

स्पीकर ओम बिरला ने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और उम्मीदों को लेकर सदन में आता है और उनकी कोशिश हमेशा रही है कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार खुलकर रख सकें।

स्पीकर ने बताया क्यों लेने पड़े मुश्किल फैसले

इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है। बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े।

यह आसन लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधि-ओम बिरला

उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिन में सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया। हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यही विशेषता है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है, यह लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।

भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

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लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

फारूक अब्दुल्ला पर किसने की फायरिंग? बाल-बाल बची जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम की जान

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जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित होटल रॉयल पार्क में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यक्रम में अचानक फायरिंग की घटना हो गई। हमला नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला पर किया गया था। इस समारोह में फारूक अब्दुल्ला के अलावा जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद थे।

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फारूक अब्दुल्ला के पीछे से गोली चलाई

पुलिस के मुताबिक हमलावर ने फारूक अब्दुल्ला के पीछे से पिस्तौल तानकर गोली चला दी। गनीमत रही कि गोली उन्हें नहीं लगी। फारूक अब्दुल्ला, सुरिंदर चौधरी और दूसरे बड़े नेता नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह के बेटे की शादी में शामिल हुए थे। हमलावर सुरजीत सिंह का कजिन है। वह बिजनेसमैन है और उसकी पुराने शहर में कुछ दुकानें हैं।

70 साल के हमलावर ने सिर पर तानी रिवॉल्वर

घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि 70 साल के हमलावर कमल सिंह जामवाल ने पीछे से आकर फारूक के सिर पर रिवॉल्वर तान दी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावर का हाथ हटाया जिससे फायर हवा में हो गया। आरोपी को पकड़ लिया गया है और हमले के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

कुछ ही सेकंड में सुरक्षाकर्मियों ने दबोचा आरोपी

फारूक अब्दुल्ला के ऊपर फायरिंग होते ही सुरक्षा टीम तुरंत हरकत में आ गई। जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा टीम ने हमलावर को मौके पर ही काबू कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा कर्मियों ने सबसे पहले आरोपी के हाथ से पिस्तौल छीनी, उसके बाद उसे जमीन पर लिटाकर काबू में कर लिया। साथ ही पिस्तौल से गोलियां भी निकाल ली गईं, ताकि वह दोबारा हमला न कर सके। इसके बाद फारूक अब्दुल्ला को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

पिता फारूक पर फायरिंग की कोशिश से भड़के सीएम उमर

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री और फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला का भी बड़ा बयान आया है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा कि एक आदमी लोडेड पिस्टल लेकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज में आ गया और गोली चला दी। अल्लाह का शुक्र है कि मेरे पिता बाल-बाल बचे। सवाल उठता है कि कोई Z+ NSG प्रोटेक्टेड पूर्व सीएम के इतने करीब कैसे पहुंच गया।

*दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, एक भारतीय समेत 4 लोग घायल

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुबई से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (डीएक्सबी) के पास दो ड्रोन गिराए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना में एक भारतीय नागरिक सहित कुल चार लोग घायल हो गए।

दुबई मीडिया ऑफिस ने एक्स पर एक बयान में कहा, "दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अधिकारियों ने दो ड्रोन रोके, जिसमें एक भारतीय नागरिक समेत चार लोग घायल हो गए। इसमें आगे कहा गया, “एयर ट्रैफिक नॉर्मल तरीके से चल रहा है।"

दुबई एयरपोर्ट के नजदीक पहले भी हुआ हमला

अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि ड्रोन ईरान से आए थे या किसी और वजह से गिरे, लेकिन जंग के चलते इलाके में ईरानी ड्रोन और मिसाइल अटैक्स की वजह से सिक्योरिटी अलर्ट बहुत हाई है। यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने पिछले कुछ घंटों में कई ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है। दरअसल, ईरान ने पहले भी दुबई एयरपोर्ट के नजदीक हमले किए थे। इसके अलावा शहर के रिहायशी इलाकों में हमले हुए थे।

ईरान ने गल्फ देशों में काउंटर अटैक्स

ये घटना ऐसे समय पर हुई है जब ईरान ने गल्फ देशों यानी यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और कुवैत पर काउंटर अटैक्स तेज कर दिए हैं। अबू धाबी के रुवैस रिफाइनरी में भी ड्रोन हमले से आग लगी थी और उसे बंद करना पड़ा था। ईरान ने अपने इलाके में यूएस और इजरायल के हमलों का जवाब यूनाइटेड अरब अमीरात, बहरीन, कतर और दूसरे खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार करके दिया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ है और तेल प्रोडक्शन में रुकावट आई है।

यूएई में भारतीयों के लिए एडवाइजरी

भारत सरकार ने यूएई में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। दुबई और अबू धाबी में रहने वाले भारतीयों को अलर्ट रहने और लोकल अथॉरिटीज के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। अगर कोई भारतीय नागरिक प्रभावित हुआ है, तो भारतीय दूतावास दुबई (+971-4-3971222) या अबू धाबी (+971-2-4492700) से संपर्क करें।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच गहराया LPG का संकट, देशभर से सिलेंडर सप्‍लाई प्रभावित

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अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत में एलपीजी और गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं।

कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण राजधानी दिल्ली, यूपी और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत होने लगी है। गैस सिलेंडर भरवाने को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। लखनऊ समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे लोग

कई जगह घरेलू आपूर्ति तो अभी सामान्य है, लेकिन वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों को लेकर परेशानी बढ़ रही है। यह स्थिति इसलिए भी है कि लोग आशंका में पहले से ही गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे हैं। व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित होने से दिल्ली में 50 हजार से अधिक रेस्तरां, पब, बार और होटलों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं।

गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लेकर अधिसूचना

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारत की एक-तिहाई गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस प्रमुख उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन में बदलाव किया है। इसके तहत एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी।

गैस की परेशानी से रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को करोड़ों का नुकसान

देश में एलपीजी की किल्लत के कारण रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को जबरदस्त नुकसान हो रहा है। कई रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और रेस्टोरेंट कारोबारी जोरावर कालरा ने कहा कि अगर एलपीजी सिलेंडरआपूर्ति में कमी जारी रही तो रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को रोजाना 1200 से 1300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

भारत में एलपीजी की कितनी खपत?

बता दें कि भारत एलपीजी का बड़ा उपभोक्ता है। देश में हर साल लगभग 31.2 मिलियन टन (करीब 3.13 करोड़ टन) एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 60 प्रतिशत गैस का आयात किया जाता है, जबकि करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 12.4 मिलियन टन एलपीजी का उत्पादन देश में ही किया जाता है। घरेलू उपयोग में 14 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सेक्टर में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है।

किन देशों से आता है एलपीजी?

भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। कुल आयात में लगभग 80 प्रतिशत गैस इसी क्षेत्र से मिलती है। यूएई से लगभग 26 प्रतिशत, कतर से 22 प्रतिशत और सउदी अबर से करीब 22 प्रतिशत एलपीजी आती है, जबकि बाकी 33 प्रतिशत अन्य देशों से आयात की जाती है। भारत में कितने उपभोक्ता मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं।

ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित

ईरान युद्ध की वजह से भारत में पेट्रोलियम पदार्थों का सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है। केंद्र सरकार घरेलू गैस और ईंधन की सप्लाई चेन बरकरार रखने के लिए कई तरह के सकारात्मक और सख्त कदम उठा रही है। आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े इसके लिए वह आवश्यत वस्तु अधिनियन (ईसीए) भी लागू कर चुकी है। फिर भी एलएनजी और एलपीजी की किल्लत से देश में ऑद्योगिक क्षेत्र प्रभावित होने लगे हैं।

31 वर्षीय मरीज को सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति, 13 साल से कोमा में है युवक

#supremecourtallowspassiveeuthanasia31yearoldman

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सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को अपने एक फैसले के तहत 31 साल के आदमी को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, जो करीब 13 साल से कोमा में है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल के हरीण राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु यानी पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा की जीवनरक्षक प्रणाली यानी आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी। यह व्यक्ति 13 वर्ष पहले एक इमारत से गिरने के बाद से स्थायी और अपरिवर्तनीय विजिटेटिव अवस्था में था। अदालत ने यह आदेश उसके पिता द्वारा दायर एक मिसलेनियस आवेदन पर दिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे से सभी जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति मांगी थी।

‘ईश्वर नहीं पूछता कि कौन जीना चाहता है’

इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है। इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन ‘To be, or not to be ‘ यानी ‘जीना या न जीना’ भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है।”

पिछले 13 वर्षों में स्थिति में कोई सुधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “हरीश राणा, जो वर्तमान में 32 वर्ष के हैं, कभी एक उज्ज्वल और प्रतिभाशाली युवा थे। वे अपने पेइंग गेस्ट आवास की चौथी मंजिल से गिरने के बाद एक दुखद दुर्घटना का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में उनके मस्तिष्क को गंभीर चोट लगी, जिससे वे स्थायी विजिटेटिव अवस्था (PVS) और 100% क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों का लकवा) की स्थिति में चले गए… पिछले 13 वर्षों में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

‘मरीज को दी जा रही CAN को बंद कर देना चाहिए’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा “वह केवल क्लिनिकली एडमिनिस्टरड न्यूट्रिशन (CAN) के सहारे जीवित थे, जो सर्जरी द्वारा लगाए गए PEG ट्यूब के माध्यम से दिया जा रहा था। अदालत ने कहा कि CAN भी एक चिकित्सीय उपचार है और इसे प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड के सर्वोत्तम निर्णय के आधार पर बंद किया जा सकता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि “उपचार जारी रखने से केवल उनकी जैविक जीवन प्रक्रिया ही बढ़ रही थी, लेकिन किसी भी प्रकार का चिकित्सीय सुधार नहीं हो रहा था। अदालत ने पाया कि कि मरीज के माता-पिता, प्राथमिक मेडिकल बोर्ड और दूसरी मेडिकल बोर्ड सभी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मरीज को दी जा रही CAN को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह मरीज के सर्वोत्तम हित में नहीं है।”

मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय लौटेंगे घर, आज संचालित होंगी एयर इंडिया और इंडिगो की 58 उड़ानें

#airindiawestasiaspecial_flights

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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण मध्य पूर्व के अधिकांश हवाई क्षेत्र बंद या प्रतिबंधित हैं। ऐसे में मिडिल ईस्ट के देशों में हजारों भारतीय फंसे हुए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए आज कुल 58 उड़ानें संचालित करने का फैसला लिया गया है। इनमें नियमित और अतिरिक्त विशेष उड़ानें शामिल हैं। जेद्दा, मस्कट और संयुक्त अरब अमीरात के लिए उड़ानें चलाई जाएंगी। 

आज कुल 58 उड़ानें होगी संचालित

एयर इंडिया और इंडिगो एयरलाइंस आज से दुबई, अबू धाबी और शारजाह सहित मिडिल ईस्ट के कई देशों से आने-जाने के लिए स्पेशल फ्लाइट्स का संचालन शुरू किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि कुल 58 उड़ानें संचालित करने की योजना है, जिनमें 30 उड़ानें इंडिगो और 23 उड़ानें एयर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा चलाई जाएंगी।

इन एयरपोर्ट्स पर उतरेंगी फ्लाइट्स

रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट और आकासा एयर दुबई और फुजैराह जैसे खाड़ी शहरों से कई विशेष उड़ानें संचालित करेंगी। ये उड़ानें नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोच्चि, अहमदाबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे भारतीय हवाईअड्डों पर उतरेंगी।

9 मार्च को लाए गए थे 7,047 यात्री

इससे पहले भारत के विमानन मंत्रालय के अनुसार, 9 मार्च को पश्चिम एशिया से भारतीय एयरलाइंस कंपनियों ने 45 उड़ानें संचालित कीं, जिनमें 7,047 यात्री आए थे। नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और तेज व समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों के साथ सीधे जुड़ाव बनाए हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजघाट से मेरठ तक सड़क सुरक्षा जागरूकता राइड
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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजघाट (नई दिल्ली) से मेरठ के मास्टर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (एमएसएम) तक एक विशेष 'वुमेंस डे सेलिब्रेशन राइड' आयोजित की गई। इस राइड का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा जागरूकता फैलाना, जिम्मेदार वाहन चलाने को प्रोत्साहित करना और महिलाओं के सम्मान का संदेश देना था। कार्यक्रम का आयोजन एमएसएम द्वारा एड्यूएक्स मेरठ, इन्फॉर्मेटिक्स रेटिंग्स और एस.पी.ओ.डब्ल्यू.ए.सी के सहयोग से किया गया।
राइड का शुभारंभ सुबह 6:30 बजे राजघाट से हरी झंडी दिखाकर हुआ और समापन मेरठ के लोहिया नगर स्थित एमएसएम परिसर में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में मोटरसाइकिल सवारों ने भाग लिया, जिसमें नेपाल और कनाडा जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय राइडर्स भी शामिल थे। प्रतिभागियों ने हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित सड़कों के लिए जागरूकता फैलाई। कार्यक्रम में काफिरा राइडरज़, हंटर राइडर्स क्लब जैसे कई मोटरसाइकिल क्लबों ने हिस्सा लिया और सुरक्षा व्यवस्था काफिरा मार्शल्स स्क्वाड ने संभाली।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. महेंद्र पाल सिंह (आईपीएस), कमांडेंट, 5वीं बटालियन यूपीएसएसएफ ने यातायात नियमों के सख्त पालन और महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया। एस.पी.ओ.डब्ल्यू.ए.सी की अध्यक्षा श्रीमती लक्ष्मी कृष्णन ने महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा पर विचार व्यक्त किए। राइड का नेतृत्व ए.आर.ई.आर.जी के सीईओ एंथनी देशुजा ने किया, जो वर्षों से सामाजिक जागरूकता अभियानों में सक्रिय हैं।
स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।