संभल में मस्जिद और दरगाह अवैध घोषित, कोर्ट ने इमाम पर लगाया 7 करोड़ का जुर्माना
संभल। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय तहसीलदार काेर्ट ने जिले के पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में सरकारी जमीन पर
बन शाही मस्जिद, मकान और दरगाह काे अवैध बताते हुए हटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही काेर्ट ने शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन पर सात कराेड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है। साेमवार काे संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा कर बनाए गए मकान, मस्जिद और दरगाह हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है।
इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। 30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल की गयी जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
इस प्रकरण में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। वर्ष 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही। उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल ने ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है। उन्हाेंने बताया कि आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाएगा और जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
जनपद संभल में शाही इमाम ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया घर, तहसीलदार कोर्ट ने खाली करने का दिया आदेश, 7 करोड़ का जुर्माना लगाया
संभल। जनपद संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यहां शाही जामा मस्जिद के शाही इमाम और उनके भाई पर ग्राम समाज की करीब दो बीघा जमीन पर मकान, मस्जिद और दरगाह बनाने का आरोप है।
संभल के तहसीलदार कोर्ट ने इस भूमि को सरकारी घोषित करते हुए अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया है। वहीं कोर्ट ने शाही इमाम पर 7 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला पंवासा ब्लॉक के सैफ खां सराय गांव का है
सैफ खां सराय गांव में गाटा संख्या 452 की 0.1340 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) ग्राम समाज की भूमि पर यह निर्माण किया गया था। इस जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 6 करोड़ 94 लाख 19 हजार रुपए बताया गया है।
आरोप है कि शाही इमाम आफताब हुसैन पुत्र खुर्शीद हुसैन और उनके भाई मेहताब हुसैन ने इस जमीन पर पक्का मकान, मस्जिद और दरगाह का निर्माण कराया।
मामले में क्षेत्रीय लेखपाल राहुल धारीवाल ने 24 जून 2025 को अपनी आख्या पेश की थी। जिसके बाद ग्राम सभा बनाम आफताब हुसैन के नाम से केस कर नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस के बाद शाही इमाम आफताब हुसैन पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिला। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने अपील के लिए समय देते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए।
30 जून को ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 18 जुलाई को आफताब हुसैन और उनके भाई की ओर से केस खारिज करने की अपील दाखिल किया गया। जबकि 7 मार्च 2026 को मामले में अंतिम बहस हुई।
प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि उन्हें 15 जून 1972 को भी बेदखली का नोटिस मिला था। जिसे बाद में प्रशासन ने वापस ले लिया था। उनका कहना है कि वर्तमान रिपोर्ट गलत है और निर्माण करीब 20 साल पुराना है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह निर्माण वक्फ संख्या 3037 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
इस विषय में तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जमीन चकबंदी के दौरान पेड़ लगाने के लिए आरक्षित की गई थी। 1972 में इसे ग्राम समाज की जमीन घोषित किया गया था। सरकार के कागज में 1359 फसली वर्ष से यह भूमि कभी भी किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं रही।
उन्होंने बताया कि करीब छह महीने पहले लेखपाल द्वारा ग्राम सभा की जमीन की रिपोर्ट पेश की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
आरोपितों पर सर्किल रेट के आधार पर करीब 7 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि शाही इमाम आफताब हुसैन ने स्वयं जमीन खाली नहीं करते हैं तो प्रशासन नियमानुसार कब्जा हटाकर जुर्माने की राशि की भी वसूली करेगा।
सम्भल: श्री पी. डी. टंडन सेवा संस्थान, बहजोई द्वारा विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली के सहयोग से 06 मार्च 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम विवरण:
- दिनांक: 06 मार्च 2026
- समय: दोपहर 1:00 बजे
- स्थान: द्वारिकाधीश संकुल स्तरीय समिति कार्यालय, बनियाखेड़ा, चंदौसी, सम्भल
कार्यक्रम में उपस्थित:
- श्रीमती संगीता भार्गव (समाजसेविका) - मुख्य वक्ता
- श्रीमती अनुपमा सिंह (अध्यक्ष, द्वारिकाधीश क्लस्टर लेवल फेडरेशन, बनियाखेड़ा) - अध्यक्ष
- श्री पी. डी. टंडन सेवा संस्थान, बहजोई के प्रबंध निदेशक हेमंत बाबू
- लगभग 90 महिलाएं
कार्यक्रम के दौरान:
श्री पी. डी. टंडन सेवा संस्थान, बहजोई के प्रबंध निदेशक हेमंत बाबू ने कहा कि 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों, समान अवसरों और गरिमा को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियाँ छात्राओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
श्रीमती संगीता भार्गव जी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जब नारी सशक्त होगी तभी समाज सशक्त होगा। शिक्षा, जागरूकता और आत्मविश्वास के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने जीवन को बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।” उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विशेष सम्मान:
इस अवसर पर श्रीमती अनुपमा सिंह जी को देश में संभल का नाम रोशन करने के लिए एवं लाखपति दीदी प्रोग्राम में रिबलिक डे परेड में प्रतिभाग करने के लिए ममेंटो देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समापन:
कार्यक्रम के अंत में हेमंत बाबू ने विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली, द्वारिकाधीश संकुल स्तरीय समिति उपस्थित महिलाओं एवं समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त किया। श्रीमती संगीता भार्गव जी को भी ममेंटो देकर हेमंत बाबू द्वारा सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में महिलाओं की शक्ति, नेतृत्व और उपलब्धियों का सम्मान किया गया तथा महिला सशक्तिकरण के संकल्प को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया।
Sambhal मौलाना फ़ैज़ान अशरफ हामिदी सम्भल की मुसलमानों से अपील
रमजान की आमद - इबादत तकवा और समाजी जिम्मेदारी का मुकम्मल पैगाम
सम्भल रहमतों, बरकतों और गग़फ़िरत का पाक महीना रमजान शरीफ करीब है। यह महीना हर मुसलमान के लिए आत्म-सुधार, इबादत में इज़ाफ़ा और इंसानियत की ख़िदमत का सुनहरा मौक़ा लेकर आता है। रमजान हमें सिर्फ रोजा रखने का हुक्म नहीं देता बल्कि हमारी पूरी जिंदगी के निज़ाम को सुधारने की तालीम देता है। यह महीना सब्र, शुक्र, तक्रवा अख़लाक़ और सामाजिक हमदर्दी का जीता-जागता सबक़ है।
*मौलाना फ़ैज़ान अशरफ हामिदी* ने रमज़ान करीम की आमद पर शहर व क्षेत्र के मुसलमानों से अपील की कि वह इस महीने को सिर्फ रस्मी तौर पर न मनाएं, बल्कि इसकी असली रूह को समझें और अपने अमल से इसे जिंदा करें।
उन्होंने कहा कि रमजान कुरआन का महीना है। इस महीने में ज्यादा से ज्यादा तिलावत, तरावीह की पाबंदी, तहज्जुद, इस्तिग़फ़ार और दुआओं का एहतिमाम किया जाए। अपने घरों में दीन का माहौल बनाया जाए, बच्चों को रोज़े की अहमियत समझाऐं और घर वालों के साथ मिलकर इबादत का सिलसिला बढ़ाया जाए।
*समाजी जिम्मेदारी का एहसास* : मौलाना ने खास तौर पर समाजी जिम्मेदारी की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि रमजान का असली मक्रसद सिर्फ अपनी निजात नहीं, बल्कि समाज के कमजोर तबके को सहारा देना भी है। हमारे आसपास कई ऐसे
परिवार हैं जो आर्थिक तंगी, बीमारी या बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। कुछ लोग अपनी गुरबत को छुपाए रखते हैं, मगर उनकी जरूरतें साफ दिखाई देती हैं। ऐसे लोगों तक मदद पहुंचाना बहुत बड़ा सवाब है।
उन्होंने कहा कि जकात, सदका और फ़ितरा का सही इस्तेमाल किया जाए। पहले अपने मोहल्ले और बस्ती के गरीबों की पहचान की जाए। अगर हर शख़्स अपने आसपास के दो-चार जरूरतमंद परिवारों की जिम्मेदारी ले ले, तो पूरा समाज खुशहाल हो सकता है। रमजान में इफ्तार का सामान, राशन किट, दवाइयां, बच्चों के कपड़े और ईद की बुनियादी जरूरतें मुहैया कराना बेहद नेक काम है।
*रोजाः सिर्फ भूख नहीं बल्कि एहसास* : उन्होंने कहा कि रोज़ा हमें भूख और प्यास का एहसास कराता है, ताकि हम उन लोगों के दर्द को महसूस कर सकें जो साल भर तंगी में जीते हैं। अगर हमारे रोज़े हमें गरीबों के करीब नहीं लाते, तो हमें अपने इखलास का जायजा लेना चाहिए। रमजान आत्म मूल्यांकन का महीना है अपने गुनाहों से तौबा करने, रिश्तों को सुधारने और दिलों में मोहब्बत पैदा करने का वक्त है।
*नौजवानों के लिए पैग़ाम*:
मौलाना ने नौजवानों से अपील की कि वह रमजान को मोबाइल, टीवी,फिल्म और वेकार मशागिल में गंवाने के बजाय मस्जिदों में जुड़ें, तरावीह में हिस्सा लें और अपने बुजुर्गों की खिदमत करें। बच्चों को भी छोटी उम्र में रोज़े और नमाज की आदत डालना चाहिए ताकि उनमें दीन की मोहब्बत पैदा हो।
*मौहल्ला स्तर पर पहल की जरूरत*:
उन्होंन सुझाव दिया कि हर मौहल्ले में
एक छोटी कमेटी बनाई जाए जो खामोश तरीक़े से जरूरतमंदों की सूची तैयार करे और इज़्ज़त के साथ उनको मदद पहुंचाए। मदद देते वक्त उनके आत्मसम्मान का भी ख़्याल
जरूरी है। इस तरह की सामूहिक कोशिश से समाज में भाईचार ,भरोसा और एकता मजबूत होती है ।
आख़िर में मौलाना फ़ैज़ान अशरफ़ हामिदी ने दुआ की ,कि अल्लाह तआला इस रमजान शरीफ़ को हम सबके लिए हिदायत, बरकत और मग़फ़िरत का जरिया बनाए। हमें सच्चे दिल से इबादत करने अपने गुनाहों से तौबा करने और अपने आसपास के गरीब, मजलूम और यतीम लोगों की मदद करने की तौफीक आता फरमाए।
आइए, इस रमजान को सिर्फ एक धार्मिक परंपरा न रहने दें,इसे समाज की इस्लाह,इंसानियत की खिदमत और आपसी मोहब्बत का मजबूत आधार बनाऐं ताके हमारे शहर व मुल्क में अमन, रहमत,और ख़ुशहाली का माहौल कायम हो सके।
Sambhal मिशन स्कूल में जी.के. प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, छात्रों में दिखा ज्ञान और आत्मविश्वास
संभल।मिशन स्कूल से एक प्रेरणादायक और सकारात्मक खबर सामने आई है, जहाँ आज जनरल नॉलेज (जी.के.) प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस शैक्षिक प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों में ज्ञान की रुचि बढ़ाना, प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित करना और उनके आत्मविश्वास को सशक्त करना रहा।
इस प्रतियोगिता में कक्षा 6 से 12 तक के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया, ताकि जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके। पहले सत्र में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों ने भाग लिया, जबकि दूसरे सत्र में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों ने अपनी सामान्य ज्ञान की क्षमता का प्रदर्शन किया। दोनों ही सत्रों में विद्यार्थियों का उत्साह और सहभागिता सराहनीय रही।
प्रतियोगिता में स्कूल के चारों हाउस — फ्लेमिंग, आइंस्टीन, अरिस्टोटल और न्यूटन — ने भाग लिया। छात्रों ने विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी समझ, स्मरण शक्ति और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और अनुशासन का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार, ट्रॉफी और सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया। स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कुल मिलाकर, यह आयोजन बच्चों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने वाला साबित हुआ।
Sambhal तालाब में डूबे मजदूर का शव 24 घंटे बाद बरामद, गांव में मचा कोहराम
सम्भल। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मोहम्मदपुर टांडा में तालाब में डूबे मजदूर का शव कड़ी मशक्कत के बाद बरामद कर लिया गया। मृतक की पहचान आनंदा (उम्र लगभग 38 वर्ष) पुत्र रामकुमार के रूप में हुई है, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को आनंदा गांव के ही राजीव के खेत में गन्ना छीलने गया था। इसी दौरान दोपहर करीब 2 बजे खेत के पास स्थित तालाब में उसके डूबने की सूचना सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। जेसीबी से तालाब का पानी निकलवाया गया और रस्सियों की मदद से तालाब में उतरकर काफी तलाश की गई, लेकिन अत्यधिक घास और गंदगी के कारण शव नहीं मिल सका।
ग्रामीणों के अनुसार आनंदा शराब पीने का आदी था और मानसिक रूप से भी पूर्णतया स्वस्थ नहीं बताया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि वह तालाब को तैरकर पार करने का प्रयास कर रहा था, इसी दौरान गहराई में चला गया। लगातार तलाश के बाद शुक्रवार को करीब 3 बजे आनंदा का शव तालाब से बरामद कर लिया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
Sambhal डीसीएच सम्भल में ऐतिहासिक प्रसव: एक साथ जन्मे तीन बच्चे, मां और नवजात पूरी तरह स्वस्थ
संभल।शुक्रवार को डीसीएच सम्भल के प्रसव कक्ष में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने बेहतरीन कार्य करते हुए एक साथ तीन बच्चों (ट्रिपलेट) का सामान्य प्रसव सफलतापूर्वक कराया। इस विशेष प्रसव के बाद मां और तीनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रसूता सरिता पत्नी सतेंद्र, निवासी ग्राम सैंडोला, बिसौली, जनपद बदायूं को शुक्रवार को प्रसव पीड़ा के चलते डीसीएच सम्भल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान पता चला कि गर्भ में तीन शिशु हैं। इसके बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने पूरी सतर्कता और विशेषज्ञता के साथ सामान्य प्रसव कराया। इस प्रसव में दो बेटे और एक बेटी का जन्म हुआ है। खास बात यह है कि इससे पहले भी सरिता की एक बेटी है। तीनों नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में रखे गए हैं। प्रसव प्रक्रिया डॉ. स्वाति रस्तोगी एवं गीता यादव के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
डॉक्टरों ने बताया कि ट्रिपलेट का सामान्य प्रसव चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन समय पर सही देखभाल और टीमवर्क के चलते यह संभव हो सका। अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस सफल प्रसव पर खुशी जताई है और डॉक्टरों व स्टाफ के कार्य की सराहना की है। यह डीसीएच सम्भल के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
Sambhal सैयद शान अली ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि समर्पण दिवस के रूप में मनाई
संभल बूथवार को नगर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर मण्डल हयातनगर के सेक्टर मनोकामना पर सेक्टर प्रभारी एवम बुथ अध्यक्ष सय्यद शान अली सेक्टर सयोंजक खुर्शीदा बेगम गुलज़ार अंसारी निवर्तमान मण्डल अध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा बुथ अध्यक्ष सारभ खान मोहम्मद जुबेर मोहम्मद इस्लाम नक़वी परवीन जहाँ आदि कार्यकर्ताओं के साथ उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
Sambhal वार्ड-11 में AIMIM संभावित प्रत्याशी अंसार खान का जनसंपर्क तेज, ग्रामीणों ने जताया भरोसा, “विकास और ईमानदारी ही मुद्दा”
जिला पंचायत सदस्य चुनाव को लेकर वार्ड नंबर-11 में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के संभावित प्रत्याशी अंसार खान इन दिनों गांव-गांव जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं। अंसार खान का दावा है कि वे लगभग वार्ड-11 के सभी गांवों में पहुंच चुके हैं और शेष गांवों में भी लगातार संपर्क कर रहे हैं।
अंसार खान ने बताया कि क्षेत्र में विकास का घोर अभाव है। कई गांवों में न तो नालियों की व्यवस्था है और न ही पक्की सड़कों का निर्माण हुआ है। लिंक रोड तक नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व जिला पंचायत सदस्यों ने क्षेत्र के लिए कोई ठोस काम नहीं किया और जो भी विकास हुआ, वह ग्राम प्रधानों के माध्यम से हुआ। भ्रष्टाचार के सवाल पर अंसार खान ने साफ कहा कि वे किसी भी हाल में “वोट नहीं बेचेंगे” और पूरी ईमानदारी से क्षेत्र का विकास कराएंगे। उनका कहना है कि जिला पंचायत में विकास न होने का सबसे बड़ा कारण वोटों की सौदेबाजी है, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। AIMIM से टिकट को लेकर अंसार खान ने कहा कि पार्टी नेतृत्व से उन्हें पूरा भरोसा और समर्थन मिला है और उनका टिकट लगभग तय है। उन्होंने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को मुस्लिम समाज समेत दबे-कुचले तबकों की आवाज़ बताया। ग्रामीणों ने भी अंसार खान के समर्थन में खुलकर बयान दिए। मूसापुर-ईसापुर, हाजीपुर समेत कई गांवों के लोगों ने कहा कि पिछले पांच सालों में जिला पंचायत सदस्य गांव में नजर तक नहीं आए। ग्रामीणों की मुख्य मांग सड़क, नाली, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का समाधान है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अंसार खान जमीन से जुड़े नेता हैं, जो बुजुर्गों और गांव के लोगों की बात सुनते हैं। इसी वजह से पूरे वार्ड में उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अगर अंसार खान जीतते हैं तो वार्ड-11 में ईमानदारी के साथ वास्तविक विकास होगा।
Sambhal शाही जामा मस्जिद विवाद: काशिफ खान ने लगाए ज़फर अली पर गंभीर आरोप, कहा “जांच से नहीं डरते, सबके खाते खुलेंगे”
सम्भल की शाही जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। ज़फर अली एडवोकेट द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच काशिफ खान खुलकर सामने आए और उन्होंने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। काशिफ खान ने साफ कहा कि वे किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं और अगर वक्फ बोर्ड या किसी सरकारी एजेंसी की जांच होती है तो वे हर तरह से सहयोग करने को तैयार हैं।
काशिफ खान ने बताया कि शाही जामा मस्जिद की इंतज़ामिया कमेटी कभी भी रजिस्टर्ड नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वे 2022 से ही अपने स्वर्गीय चाचा लड्डन खां को कमेटी को पंजीकृत कराने की सलाह देते रहे, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। 24 नवंबर 2024 के दंगों के बाद खुद कमेटी के लोगों ने उन्हें बुलाकर वक्फ बोर्ड में पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा, जिसके बाद दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया गया और उसमें उन्हें सचिव के रूप में नामित किया गया। मस्जिद के दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोपों को काशिफ खान ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सभी कागजात, आईडी और शपथ पत्र उन्हें कमेटी द्वारा ही सचिव की हैसियत से सौंपे गए थे। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद से जुड़े सबसे अधिक दस्तावेज वही लेकर आए और वक्फ बोर्ड व भारतीय पुरातत्व विभाग से लगातार पत्राचार भी वही करते रहे हैं। 30 मार्च 2024 को बनाए गए “शाही जामा मस्जिद ट्रस्ट” पर सफाई देते हुए काशिफ खान ने कहा कि यह ट्रस्ट उनकी व्यक्तिगत पहल थी, ताकि भविष्य में किसी कानूनी अड़चन की स्थिति में मस्जिद और उससे जुड़ी संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट का कमेटी से कोई लेना-देना नहीं है और उसमें किसी भी कमेटी सदस्य के हस्ताक्षर या दस्तावेजों का इस्तेमाल नहीं किया गया। चंदा वसूली के आरोपों पर पलटवार करते हुए काशिफ खान ने कहा कि ट्रस्ट का केनरा बैंक में खाता है, जिसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जा सकता है। उनका दावा है कि खाता शुरू से ही माइनस बैलेंस में है। वहीं, उन्होंने ज़फर अली एडवोकेट पर आरोप लगाया कि मस्जिद की वक्फ संपत्तियों से जुड़ी 52 दुकानों के किराए को लेकर भारी अनियमितताएं हैं और कई दुकानदार महीनों से किराया नहीं दे रहे, जिनमें ज़फर अली के करीबी लोग शामिल हैं। कानूनी भूमिका पर काशिफ खान ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जामा मस्जिद से जुड़े मामलों में मुख्य पक्षकार हैं और उनके पास हर दावे से जुड़े सबूत, ईमेल, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि “जो लोग खुद जवाब नहीं दे पा रहे, वही हमें फर्जी और बाहरी बता रहे हैं।” अंत में काशिफ खान ने कहा कि समय आने पर सच्चाई सबके सामने होगी और जांच में यह साफ हो जाएगा कि मस्जिद के नाम पर कौन काम कर रहा है और कौन निजी फायदे उठा रहा है।
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