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दीनदयाल बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित, पंच परिवर्तन से भारत को विश्वगुरु बनाने का आह्वान
लखनऊ। दीनदयाल बस्ती स्थित सरस्वती शिशु मंदिर, अर्जुनगंज में रविवार को भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख मिथिलेश नारायण जी, इस्कॉन मंदिर लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी अपरिमेय श्याम दास जी एवं काशी धाम से पधारे प्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचक स्वामी सुधीर आनंद जी महाराज द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार जी ने की। कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्र कुमार मिश्रा जी एवं सहसंयोजिका श्रीमती शैल वाला श्रीवास्तव जी रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में व्यवसायी रविशंकर सिंह जी उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता मिथिलेश नारायण जी ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर “पंच परिवर्तन” को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके माध्यम से मानव उन्नति के शिखर पर पहुंच सकता है और भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है।
स्वामी अपरिमेय श्याम दास जी ने गीता के संदेशों को जीवन में उतारने पर बल देते हुए बताया कि मन और बुद्धि के संतुलन से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है तथा हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। काशी धाम से पधारे स्वामी सुधीर आनंद जी महाराज ने कहा कि मानव को अपने जीवन में प्रभु श्रीराम से प्रेरणा लेकर कर्तव्य पथ पर अग्रसर होना चाहिए। कार्यक्रम अध्यक्ष न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार जी ने हिंदू धर्म में वर्णित नियमों एवं कानूनों को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर संयोजक सुरेंद्र कुमार मिश्रा जी ने कहा कि हिंदू समाज को अपने बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने के लिए विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों में प्रवेश दिलाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी राष्ट्र और परिवार का नाम रोशन कर सके।

भारत माता की आरती के पश्चात कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। इसके उपरांत आयोजित समरसता भोज में लगभग 800 लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. सुभाष पांडे (प्रधानाचार्य, सरस्वती शिशु मंदिर) ने किया। इस अवसर पर सहसंयोजक विनय प्रकाश तिवारी, रुद्र कुमार तिवारी, अवधेश कुमार तिवारी, सत्येंद्र सिंह, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, चिंतामणि सिंह, रतन लाल खंडेलवाल, विनय राय, डॉ. राजेश बरनवाल, श्री श्याम त्रिपाठी, शशिकांत शुक्ला, विजय शंकर बाजपेई, शीतला प्रसाद त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में भैया-बहन स्वयंसेवक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
केंद्रीय बजट से कर्मचारी-शिक्षकों में निराशा, आठवें वेतन आयोग व पेंशन पर चुप्पी
लखनऊ। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट में कर्मचारी और शिक्षकों से जुड़ी प्रमुख मांगों की अनदेखी किए जाने पर असंतोष सामने आया है। बजट में न तो पेंशन व्यवस्था से संबंधित कोई उल्लेख किया गया और न ही आठवें वेतन आयोग को लेकर कोई प्रावधान किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि चालू वर्ष में आठवें वेतन आयोग के गठन की संभावना नहीं है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने कहा कि असंगठित क्षेत्र, मानदेय, आउटसोर्सिंग जैसे कमजोर वर्ग के कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ के अंतर्गत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को पिछले 12 वर्षों से 1000 रुपये से बढ़ाने तथा न्यूनतम वेतन में वृद्धि के लिए बजट में कोई व्यवस्था नहीं की गई, जो अत्यंत निराशाजनक है।

उन्होंने कहा कि यदि आठवां वेतन आयोग लागू किया जाना होता तो आयकर की सीमा बढ़ाने जैसे संकेत बजट में दिखाई देते, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे में दी जाने वाली रियायत, जिसे कोरोना काल में समाप्त कर दिया गया था, उसकी बहाली की मांग भी बजट में शामिल नहीं की गई।

श्री तिवारी ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट कर्मचारी-शिक्षकों और पेंशनभोगियों की दृष्टि से अच्छा नहीं कहा जा सकता है।
बिजली कर्मियों की नजर आम बजट और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पर, 30 जनवरी को लोकसभा में विवरण पेश होने से बढ़ी चिंता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए आम बजट 2026-27 और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर चिंता का माहौल है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि 01 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट पर देशभर के बिजली कर्मियों की पैनी नजर रहेगी।

संघर्ष समिति का कहना है कि उन्हें आशंका है कि बजट या बजट सत्र के दौरान बिजली क्षेत्र का निजीकरण या इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल पारित कराने का प्रयास किया जा सकता है। समिति ने याद दिलाया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स और संघर्ष समिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि यदि संसद में बिजली के निजीकरण या अमेंडमेंट बिल को पारित कराने का एकतरफा प्रयास किया गया, तो देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के “लाइटनिंग एक्शन” के तहत कार्यस्थलों से बाहर आकर वृहद विरोध प्रदर्शन करेंगे।

वित्त मंत्रालय के बीच बिजली के निजीकरण पर बैठक भी हुई

संघर्ष समिति ने बताया कि 30 जनवरी को केन्द्रीय राज्य मंत्री विद्युत,  यशोपाद नायक द्वारा लोकसभा में ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का विवरण साझा किया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि आम बजट या बजट सत्र के दौरान विधेयक पेश कर पारित कराने का प्रयास हो सकता है।इसके अलावा, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच बिजली के निजीकरण पर बैठक भी हुई है।

डिस्कॉम को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाए

इससे यह संभावना और बढ़ गई है कि आम बजट में बिजली क्षेत्र के निजीकरण से जुड़ी कोई घोषणा हो सकती है।संघर्ष समिति ने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की 10 अक्टूबर 2025 की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि उस निर्णय के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय पैकेज तभी देगी, जब राज्य अपने डिस्कॉम की 51 प्रतिशत इक्विटी बंधक रखें, या 26 प्रतिशत इक्विटी बेचें लेकिन प्रबंधन निजी हाथों में हो, या फिर डिस्कॉम को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाए।

बिजली क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र में ही रखा जाए

समिति का कहना है कि बिजली कर्मियों की यह उम्मीद है कि बजट में बिजली क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र में ही रखा जाए, लेकिन यदि कोई निजीकरण या अमेंडमेंट बिल संबंधी प्रस्ताव आता है, तो कर्मचारी पूरी तरह सतर्क हैं और लाइटनिंग एक्शन के लिए तैयार हैं।वहीं, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन का आज 430वां दिन है और प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम पर व्यापक जनजागरूकता के निर्देश
* मनरेगा लोकपाल के अधिकार बढ़े, अब पीएम आवास योजना (ग्रामीण) की शिकायतों का भी करेंगे निस्तारण
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप कराए जाएं। उन्होंने कहा कि इसके लिए विकास कार्यों की नियमित गहन समीक्षा एवं अनुश्रवण के साथ-साथ फील्ड स्तर पर सख्त निगरानी आवश्यक है।

उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यदि किसी भी स्तर पर समस्या या शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। यदि विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी सघन जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।

उन्होंने विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम एवं इसकी विशेषताओं के संबंध में व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने तथा प्रभावी प्रचार-प्रसार किए जाने के भी निर्देश दिए।मनरेगा के कार्यों की जांच के लिए पूर्व से ही जिलों में मनरेगा लोकपालों की तैनाती की गई है। अब सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत मनरेगा के अंतर्गत नियुक्त लोकपालों को पीएम आवास योजना (ग्रामीण) से संबंधित शिकायतों की सुनवाई एवं निस्तारण की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उत्तर प्रदेश के आयुक्त, ग्राम्य विकास विभाग जी.एस. प्रियदर्शी ने भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में राज्य के सभी मुख्य विकास अधिकारियों को इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि लोकपाल को प्राप्त शिकायतों का निस्तारण 30 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही लोकपालों को पीएम आवास योजना–ग्रामीण के दिशा-निर्देशों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा लाभार्थियों के बीच इस नई शिकायत निवारण व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने जाना लोकतंत्र का जीवंत स्वरूप
* डॉ. शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय के छात्रों का उत्तर प्रदेश विधानसभा का शैक्षिक भ्रमण

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन तथा प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप के निर्देशानुसार दिव्यांगजनों को शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा का शैक्षिक भ्रमण किया।

इस भ्रमण में विश्वविद्यालय के ईएमईटी पाठ्यक्रम के दृष्टिबाधित विद्यार्थी, उनके प्रशिक्षक, स्वयंसेवक तथा हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन के समन्वयक डॉ. विजय शंकर शर्मा शामिल रहे। एचटीबीएफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया एवं शासन व्यवस्था की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करना था।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को विधानसभा की कार्यवाही, कानून निर्माण की प्रक्रिया, सदन में चर्चा एवं निर्णय लेने की प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विधानसभा भवन की फोटो गैलरी के माध्यम से उन्हें प्रदेश के पूर्व एवं वर्तमान जनप्रतिनिधियों, ऐतिहासिक घटनाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं से अवगत कराया गया।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विधानसभा का स्पर्शनीय (टैक्टाइल) मॉडल भी प्रदर्शित किया गया, जिससे विद्यार्थियों ने स्पर्श के माध्यम से भवन की संरचना, आकार और आंतरिक व्यवस्था को समझा। इसके पश्चात विधानसभा कक्ष का भ्रमण कराते हुए सत्तापक्ष, विपक्ष, मीडिया दीर्घा, अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था तथा अध्यक्ष (स्पीकर) की भूमिका और सदन संचालन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को विधानसभा में प्रयुक्त आधुनिक डिजिटल प्रणालियों—डिजिटल पैनल, हेडफोन, मतदान एवं प्रश्न पूछने की प्रक्रिया—का भी प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों द्वारा सरल, सहज और संवेदनशील भाषा में उत्तर दिया गया। यह शैक्षिक भ्रमण दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र को समझने का एक अनूठा, प्रेरक और सशक्त अनुभव सिद्ध हुआ।
आगरा में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार कंटेनर ने दो ऑटो को रौंदा, जगन्नाथ यात्रा से लौट रहे 5 श्रद्धालुओं की मौत, 3 की हालत नाजुक

लखनऊ । आगरा के थाना खंदौली क्षेत्र में शनिवार को एक भीषण और दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कंटेनर ने सड़क पर आगे चल रहे दो ऑटो को कुचल दिया, जिससे पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।यह सभी लोग जगन्नाथ पुरी यात्रा से लौट रहे थे और ट्रेन से आगरा कैंट स्टेशन उतरने के बाद ऑटो से अपने गांव जा रहे थे। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार, अफरा-तफरी और मातम का माहौल बन गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों ऑटो एक ही दिशा में चल रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार कंटेनर ने पहले एक ऑटो में जोरदार टक्कर मारी और फिर दूसरे ऑटो को भी अपनी चपेट में ले लिया।टक्कर इतनी भीषण थी कि—दोनों ऑटो बुरी तरह पिचक गए,यात्रियों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी,कुछ लोग ऑटो के भीतर ही फंस गए।

जानकारी के मुताबिक, थाना सहपऊ क्षेत्र के गांव भादउ के रहने वाले 7 लोग 20 जनवरी को जगन्नाथ पुरी दर्शन के लिए निकले थे। दर्शन के बाद शनिवार को ये लोग जबलपुर से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे। स्टेशन से गांव लौटने के लिए इन्होंने ऑटो बुक कराया और दो ऑटो में सवार होकर निकल पड़े, लेकिन रास्ते में यह भयावह हादसा हो गया।हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार बताई गई—बीजो, लख्मीचंद, रणवीर सिंह (रिटायर्ड दारोगा), बिल्ला मिस्त्री, शाहिद (ऑटो चालक, शाहिद खान)के रूप में हुई। पांचों के शव एसएन मेडिकल कॉलेज लाए गए हैं, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है।हादसे में गंभीर रूप से घायल—धनप्रसाद को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है।

विजय सिंह और उदय सिंह को यमुना पार स्थित अम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।चिकित्सकों के अनुसार घायलों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने कंटेनर चालक को मौके पर ही दबोच लिया। गुस्साए लोगों ने उसके साथ मारपीट भी की। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और चालक को अपने कब्जे में ले लिया।सूचना मिलते ही थाना खंदौली पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। पुलिस का कहना है कि हादसे के संबंध में कानूनी कार्रवाई की जा रही है, कंटेनर को कब्जे में लिया गया है और चालक से पूछताछ जारी है।
कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई पर विवाद, बांदा जेल का कारपाल निलंबित
लखनऊ। कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। मामले में बांदा जिला जेल के कारपाल विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि नोएडा कोर्ट से जारी वारंट के बावजूद रवि काना को जेल से रिहा कर दिया गया।

हालांकि, बांदा जेल प्रशासन का दावा है कि रवि काना की रिहाई शाम 6 बजकर 39 मिनट पर हो चुकी थी, जबकि नोएडा कोर्ट का वारंट रात पौने 8 बजे प्राप्त हुआ। जेल प्रशासन का कहना है कि वारंट आने से पहले ही कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहाई की जा चुकी थी।

रवि काना नोएडा क्षेत्र का सबसे बड़ा कबाड़ी और स्क्रैप माफिया बताया जाता है। कुख्यात अपराधी सुन्दर भाटी के जेल जाने के बाद उसका गैंग पूरी तरह सक्रिय हुआ था। उल्लेखनीय है कि फिलहाल सुन्दर भाटी भी जेल से बाहर है, जिससे कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर जांच के आदेश दिए गए हैं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
लखनऊ में UGC 2026 बिल के खिलाफ ब्राह्मण परिवार ने किया विरोध प्रदर्शन
लखनऊ । केंद्र सरकार द्वारा लाए गए UGC 2026 बिल के विरोध में ब्राह्मण परिवार लखनऊ/भारत (रजि.) के नेतृत्व में राजधानी लखनऊ के GPO स्थित गांधी प्रतिमा, हज़रतगंज पर बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस विरोध में ब्राह्मण परिवार और सवर्ण समाज के सैकड़ों लोग, विशेषकर युवा, शामिल हुए।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु पांडेय ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि जो सरकार खुद को हिंदुओं की प्रतिनिधि बताती थी, वह आज समाज को बांटने का काम कर रही है। पांडेय ने कहा कि सवर्ण समाज की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर वोट दिया, और आज उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह “काला बिल” जल्द वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा और जंतर-मंतर, दिल्ली की ओर कूच किया जाएगा।

ब्राह्मण परिवार के प्रवक्ता अभिषेक अग्निहोत्री ने कहा कि UGC संशोधन से सवर्ण समाज में गहरा आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के निर्णयों से उच्च शिक्षा के संस्थानों में भय का माहौल बनाया जा रहा है। अग्निहोत्री ने सवाल उठाया कि 21वीं सदी में किसी व्यक्ति को जन्म के आधार पर अपराधी कैसे ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कानून हिंदू समाज को विभाजित करने की साजिश का हिस्सा है और सरकार को इसका जवाब देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस बिल के विरोध में खड़े सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और सवर्ण नेताओं के खिलाफ कोई द्वेषपूर्ण कार्रवाई हुई, तो ब्राह्मण परिवार और सवर्ण समाज इसे स्वीकार नहीं करेंगे और उनकी ससम्मान पदों पर वापसी सुनिश्चित कराएंगे।

प्रदेश अध्यक्ष श्याम नारायण मिश्रा ने कहा कि भाजपा यह समझती है कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल इस कानून का समर्थन करेगा, सवर्ण समाज उसे स्वीकार नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो सवर्ण समाज अपना राजनीतिक विकल्प स्वयं तैयार करेगा। मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि यह संघर्ष थमेगा नहीं और जरूरत पड़ी तो संसद का घेराव भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि UGC 2026 कानून में किसी भी प्रकार का संशोधन स्वीकार्य नहीं है; इसे पूर्ण रूप से वापस लिया जाना चाहिए, अन्यथा आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।

प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मण परिवार ने प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक मांग-पत्र भी सौंपा।
जिज्ञासा कप सीजन-1: एन जे एस तेलीबाग का शानदार प्रदर्शन, मास्टर ब्लास्टर को 8 विकेट से हराया
लखनऊ। जिज्ञासा कप सीजन-1 के तहत खेले गए मैच नंबर-9 में एन जे एस तेलीबाग और मास्टर ब्लास्टर के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। टॉस के बाद पहले गेंदबाजी करते हुए एन जे एस तेलीबाग ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और मास्टर ब्लास्टर की टीम को मात्र 59 रन पर समेट दिया।

एन जे एस तेलीबाग की ओर से गेंदबाजी में मुदित यादव और गौरव यादव ने कहर बरपाया। दोनों गेंदबाजों ने 5-5 विकेट हासिल कर विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

59 रनों के छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए एन जे एस तेलीबाग ने केवल 2 विकेट खोकर मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लिया। इस दौरान आशुतोष पांडे ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 13 गेंदों में 38 रन बनाए, जिसमें 3 छक्के और 4 चौके शामिल रहे। इस तरह एन जे एस तेलीबाग ने मास्टर ब्लास्टर को 8 विकेट से हराकर मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की।

* मैन ऑफ द मैच:
* मुदित यादव
संपत्ति पंजीकरण में फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक, 1 फरवरी से लागू होगा आधार प्रमाणीकरण: रवींद्र जायसवाल
लखनऊ। स्टाम्प तथा पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने विधान भवन में विभाग से संबंधित दस्तावेजों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी कि संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए आधार प्रमाणीकरण लागू किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 28 अगस्त 2025 को संपन्न स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में संपत्ति पंजीकरण में छद्म व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने हेतु आधार प्रमाणीकरण लागू करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-69 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 को प्रवृत्त किया गया है।

इस नियमावली के अंतर्गत आधार संख्या धारकों की पहचान e-KYC के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्थापित की जाएगी तथा इलेक्ट्रॉनिक/आधार ई-हस्ताक्षर को ई-निष्पादन की परिभाषा में सम्मिलित किया गया है। मंत्री ने बताया कि आधार प्रमाणीकरण की व्यवस्था 1 फरवरी 2026 से लागू की जाएगी, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल पक्षकारों एवं गवाहों की पहचान का प्रभावी सत्यापन सुनिश्चित हो सकेगा।

श्री जायसवाल ने कहा कि आधार प्रमाणीकरण लागू होने से छद्म व्यक्तियों द्वारा पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगेगी, पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा भूमि एवं संपत्ति से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही यह व्यवस्था डिजिटल पंजीकरण प्रणाली को सशक्त बनाएगी, विधिक विवादों एवं न्यायालयीन वादों में कमी लाएगी और राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस लक्ष्यों की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से नागरिकों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित होगा और संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित एवं आधुनिक बनेगी।