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सेवलाइफ फाउंडेशन और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर कार्य क्षेत्र की सुरक्षा में सुधार के लिए इंजीनियर्स का प्रशिक्षण आयोजित क

पुणे, जनवरी, 2026: अपनी चल रही जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर (जेडएफसी) पहल के तहत, सेवलाइफ फाउंडेशन ने 20 जनवरी, 2026 को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इंजीनियर्स के लिए एक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले सड़क गलियारों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करके रोकी जा सकने वाली सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को समाप्त करना है।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत समर्थित इस प्रशिक्षण में सुरक्षित सड़क कार्यस्थल प्रबंधन के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को शामिल किया गया था, जिसका उद्देश्य सक्रिय निर्माण क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों में सुधार करना और दुर्घटना के जोखिम को कम करना था।
इस कार्यक्रम में एमएसआरडीसी की कार्यकारी अभियंता श्रीमती शैलजा पाटिल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “सड़क सुरक्षा प्रबंधन में जमीनी कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। एक्सप्रेसवे पर स्थापित एसओएस सिस्टम के अलावा, मैं पीड़ितों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं, जिससे दुर्घटनाओं का प्रभाव कम हो सके।”
94.5 किलोमीटर की दूरी में फैला मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे भारत का पहला 6-लेन वाला राजमार्ग है, जो पूरे राज्य में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास में सुधार ला रहा है। वर्ष 2016 में जब सेवलाइफ फाउंडेशन ने अपनी जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर (जेडएफसी) पहल के तहत इस कॉरिडोर पर काम शुरू किया, तब से लेकर 31 दिसंबर, 2023 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 58% की कमी आई। हाल ही में, महाराष्ट्र राज्य परिवहन विभाग द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में 26% की और कमी दर्ज की गई है: 2024 में इसी अवधि के दौरान 82 मौतों से घटकर इस वर्ष 61 रह गईं।
प्रशिक्षण के प्रमुख फोकस क्षेत्र निम्नलिखित थे:
दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए कार्य क्षेत्रों की योजना और प्रबंधन
यातायात प्रबंधन योजनाओं, अवरोधों और साइनेज का प्रभावी उपयोग
केस स्टडीज़: सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग पद्धतियाँ और दुर्घटना निवारण
सुरक्षित जमीनी प्रथाओं पर संवादात्मक सत्र
कार्य क्षेत्र प्रबंधन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा
इसके अतिरिक्त, रखरखाव और निर्माण गतिविधियों के दौरान यातायात प्रबंधन और सुरक्षित कार्य क्षेत्र स्थापित करने से संबंधित मॉड्यूल भी सत्र का हिस्सा थे।
इंजीनियर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम के बारे में बात करते हुए, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की मार्केटिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और सीएसआर प्रमुख शीना कपूर ने कहा, “आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में, न केवल जीआई श्रेणी में बल्कि मोटर बीमा में भी अग्रणी होने के नाते, हम सड़क सुरक्षा और निवारक उपायों के प्रति अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सेवलाइफ फाउंडेशन के साथ हमारा सहयोग सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और/या कम करने तथा शून्य मृत्यु दर वाले कॉरिडोर बनाने पर हमारे उद्देश्य को और मजबूत करता है। आज आयोजित प्रशिक्षण, हमारी सड़कों को सुरक्षित बनाने और बहुमूल्य जीवन बचाने में लगे सड़क इंजीनियरिंग पेशेवरों के कौशल को बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।”
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले इंजीनियर्स को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ श्री पीयूष तिवारी ने कहा, “अच्छी तरह से प्रबंधित कार्य क्षेत्र एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह प्रशिक्षण इंजीनियर्स को सुरक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक उपकरण और सर्वोत्तम पद्धतियाँ प्रदान करता है। यह गतिविधि भारतीय सड़कों पर जीवन बचाने की हमारी व्यापक प्रतिबद्धता की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे सेवलाइफ फाउंडेशन के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र रहा है। इंजीनियरिंग सुधार, प्रवर्तन प्रशिक्षण और आघात देखभाल को मजबूत करने जैसी पहलों के माध्यम से, एसएलएफ एक्सप्रेसवे पर शून्य दुर्घटनाओं का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
एक्सिस बैंक के वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के नतीजे
जमा में 15% और अग्रिमों में 14% की मजबूत वार्षिक वृद्धि; कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट में तिमाही दर तिमाही 9% और पीएटी में 28% तिमाही दर तिमाही की बढ़ोतरी, स्थिर एनआईआई और मजबूत फी आय से समर्थन
नागपुर, जनवरी 2026: भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक, एक्सिस बैंक ने आज अपने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा की। बैंक ने इस तिमाही में 6,490 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई) सालाना आधार पर 5% और तिमाही आधार पर 4% बढ़कर 14,287 करोड़ रुपए रही। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के लिए बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) 3.64% रहा। औसत तिमाही बैलेंस (क्यूएबी) के आधार पर कुल जमा राशि तिमाही आधार पर 5% और सालाना आधार पर 12% बढ़ी। एमईबी कासा अनुपात 39% रहा, जो बड़े समकक्ष बैंकों में सर्वश्रेष्ठ स्तरों में शामिल है। 31 दिसंबर, 2025 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए 1.40% और नेट एनपीए 0.42% रहा, जो 30 सितंबर, 2025 को क्रमशः 1.46% और 0.44% था।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में बैंक की फी आय सालाना आधार पर 12% बढ़कर 6,100 करोड़ रुपए हो गई। रिटेल फी आय में भी 12% की वृद्धि हुई और यह बैंक की कुल फी आय का 71% हिस्सा रही। बैंक का कुल कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (सीएआर) 16.55% रहा और सीईटी-1 अनुपात 14.50% पर पहुँच गया, जो तिमाही आधार पर 7 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी दर्शाता है।
एक्सिस बैंक का वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार देश के सबसे बड़े कारोबारों में से एक है। 31 दिसंबर, 2025 तक इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 6,87,738 करोड़ रुपए रहा, जो तिमाही आधार पर 7% और सालाना आधार पर 8% की वृद्धि दर्शाता है। बैंक की घरेलू सहायक कंपनियों ने भी स्थिर प्रदर्शन किया और वित्त वर्ष 26 के 9 महीनों में उनका शुद्ध लाभ (पीएटी) 1,490 करोड़ रुपए रहा, जो सालाना आधार पर 6% अधिक है।
31 दिसंबर, 2025 तक बैंक का कुल वितरण नेटवर्क 6,110 घरेलू शाखाओं और एक्सटेंशन काउंटर्स तथा 281 बिजनेस करस्पॉन्डेंट बैंकिंग आउटलेट्स (बीसीबीओ) तक पहुँच गया, जो 3,315 केंद्रों में फैले हुए हैं। जबकि 31 दिसंबर, 2024 को यह नेटवर्क 5,706 शाखाओं व एक्सटेंशन काउंटर्स तथा 202 बीसीबीओ के साथ 3,122 केंद्रों तक सीमित था।
एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ अमिताभ चौधरी ने कहा, “इस तिमाही में हमारी प्रगति इस बात को दर्शाती है कि हम ऐसे समाधान तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो वास्तव में मायने रखते हैं। इसमें क्रेडिट तक पहुँच को सरल बनाना, डिजिटल बैंकिंग को नए सिरे से परिभाषित करना और ऐसे टैलेंट व विचारों में निवेश करना शामिल है, जो भविष्य को आकार देंगे। हम अपने प्लेटफॉर्म को आधुनिक बनाकर, अपनी टीमों को सशक्त करके और ग्राहकों के बदलते व्यवहार को स्मार्ट और क्राँतिकारी समाधानों के माध्यम से समझते हुए अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को और मजबूत करते रहेंगे।”
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने लॉन्च किया ईज़ी: खुदरा ग्राहकों को स्मार्ट और सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य
~ इस स्मार्ट, सरल और पर्सनलाइज़्ड प्लेटफॉर्म पर हर तरह की मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग सुविधा के लिए 200 से अधिक फीचर्स उपलब्ध हैं
भोपाल, जनवरी, 2026: उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज अपने उन्नत मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग प्लेटफॉर्म, उज्जीवन ईज़ी (ईएज़वाई) लॉन्च करने की घोषणा की। यह बैंक की डिजिटल प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की रणनीति को मज़बूत करने की दिशा में उल्लेखनीय कदम है। उज्जीवन के ईज़ी को खुदरा ग्राहकों के लिए तैयार किया गया है, जो मोबाइल और वेब चैनलों पर एकीकृत, सुरक्षित और सहज बैंकिंग का अनुभव प्रदान करता है। यह नौ भाषाओं- अंग्रेज़ी, हिंदी, कन्नड़, गुजराती, मराठी, बंगाली, उड़िया, पंजाबी और तमिल में उपलब्ध है।
इस प्लेटफॉर्म पर 200 से अधिक बैंकिंग फीचर्स उपलब्ध हैं, जिनमें 90 से अधिक नई किस्म की सुविधाएँ शामिल हैं। इन फीचर्स का उद्देश्य रोज़मर्रा की बैंकिंग को सरल बनाना और साथ ही बचत, भुगतान, ऋण और निवेश में भागीदारी बढ़ाना है। अगली पीढ़ी के माइक्रोसर्विस आर्किटेक्चर पर निर्मित, ईज़ी प्रणाली की गति, विस्तार क्षमता और इसके लचीलेपन को बढ़ाता है। इस तरह बैंक नए फीचर तेज़ी से पेश कर सकता है और ग्राहकों की बदलती जरूरतों अनुरूप अधिक प्रभावी तरीके से बदलाव कर सकता है।
ईज़ी, एक ही प्लेटफॉर्म पर खाता प्रबंधन, फंड ट्रांसफर (धन का हस्तांतरण), फिक्स्ड और रेकरिंग डिपॉज़िट (सावधि और आवर्ती जमा), बिल भुगतान, डेबिट कार्ड प्रबंधन, जीएसटी भुगतान और डीमैट और एनपीएस सहित निवेश सेवाओं जैसी मुख्य बैंकिंग सेवाएँ पेश करता है। इस उन्नत प्लेटफॉर्म ने इन इन मौजूदा सेवाओं के अलावा, ऋण सेवा, स्मार्ट स्टेटमेंट, नई डिजिटल क्षमताओं और ग्राहकों के उत्पाद संबंधों के आधार पर पर्सनलाइज़्ड इंटरफेस पेश किए हैं, जिससे सुविधा बढ़ती है और ग्राहक को बेहतर अनुभव मिलता है। इस तरह यह हर तरह के बैंकिंग अनुभव भी प्रदान करता है।
यह प्लेटफॉर्म पहुँच और समावेश ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो भौगोलिक क्षेत्रों, आयु समूहों और डिजिटल साक्षरता के विभिन्न स्तरों के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करता है। उन्नत सुरक्षा एसडीके, ऐपप्रोटेक्ट के जरिए सुरक्षा बढ़ाई गई है, जो धोखाधड़ी, उपकरण-स्तर के खतरों और उभरते साइबर जोखिमों के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के रणनीति और परिवर्तन (स्ट्रेटेजी और ट्रांसफॉर्मेशन) प्रमुख, श्री दीपक अग्रवाल, ने कहा, “ईज़ी का लॉन्च एकल डिजिटल चैनलों से एकीकृत डिजिटल परितंत्र की ओर अग्रसर होने के हमारे प्रयास को रेखांकित करता है। यह प्लेटफॉर्म तेज़ नवाचार, ग्राहक सहभागिता और वहनीय कारोबार के विकास को आगे बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही, यह विश्वास, सरलता, सुरक्षा और वित्तीय समावेश पर विशेष ध्यान देने की हमारी नीति के अनुरूप है।”
बैंक के परिचालन में डिजिटल चैनल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुल आउटवर्ड ट्रांज़ेक्शन में 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी डिजिटल पेमेंट की है, जिससे बैंक के डिजिटल परितंत्र में ग्राहकों का विश्वास और डिजिटल प्रक्रिया को अपनाने का स्तर ज़ाहिर होता है।
ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है जॉन अब्राहम की दमदार थ्रिलर ‘तेहरान’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर- शनिवार, 31 जनवरी को दोपहर 1 बजे


मुंबई, जनवरी 2026: दमदार कहानी, हाई क्वालिटी एक्शन और रोमांचक सस्पेंस के साथ ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है फिल्म ‘तेहरान’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर, शनिवार, 31 जनवरी को दोपहर 1 बजे। इस फिल्म में जॉन अब्राहम अपने अब तक के सबसे इंटेंस और ताकतवर किरदारों में से एक में नज़र आएँगे। तेज़ रफ्तार घटनाओं और लगातार बदलते हालातों के बीच आगे बढ़ती यह थ्रिलर दर्शकों को शुरुआत से लेकर अंत तक बाँधे रखने वाली है।


फिल्म की कहानी एक खौफनाक बम धमाके से शुरू होती है, जिसके पीछे छिपे आतंकियों तक पहुँचने के लिए जॉन अब्राहम एक खतरनाक और चुनौतीपूर्ण मिशन पर निकलते हैं। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ती है, साजिशें और गहरी होती जाती हैं और हर नया मोड़ कहानी में सस्पेंस की परतें जोड़ देता है, जो फिल्म की पकड़ को और मजबूत बनाता है।


अरुण गोपालन के निर्देशन में बनी ‘तेहरान’ में जॉन अब्राहम के साथ मानुषी छिल्लर और नीरू बाजवा भी अहम् भूमिकाओं में नज़र आएँगी। सभी कलाकारों की परफॉर्मेंस कहानी को मजबूती देती है और फिल्म के जज़्बात और रोमांच को और असरदार बनाती है।


फिल्म में जॉन अब्राहम एसीपी राजीव कुमार के रूप में दिखते हैं, जो दिल्ली में विदेशी अधिकारियों पर हुए एक जानलेवा बम धमाके के बाद एक खतरनाक गुप्त मिशन की जिम्मेदारी संभालते हैं। एसीपी राजीव कुमार का मिशन जो शुरुआत में हमले के पीछे मौजूद लोगों की तलाश होती है, वह जल्द ही उसे छिपे हुए मकसदों, बदलती वफादारियों और सीमाओं के पार सक्रिय रहस्यमय ताकतों के खतरनाक जाल में खींच ले जाती है। जैसे-जैसे वह सच्चाई के करीब पहुँचता है, हालात उसे अकेला कर देते हैं और उसी वक्त कहानी ऐसा मोड़ लेती है, जो पूरी जाँच की दिशा ही बदल देती है।


दमदार कहानी, हाई क्वालिटी एक्शन और जबर्दस्त सस्पेंस के साथ ‘तेहरान’ दर्शकों को एक यादगार अनुभव देने का वादा करती है। ‘तेहरान’ का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर देखना न भूलें, शनिवार 31 जनवरी को दोपहर 1 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर।
केआईडब्ल्यूजी 2026: आर्मी ने बरकरार रखा आइस हॉकी स्वर्ण, चंडीगढ़ ने जीता दिल; हरियाणा ओवरऑल चैंपियन, मेज़बान लद्दाख दूसरे स्थान पर


* लद्दाख के स्केटर स्कारमा त्सुल्टिम ने सर्वाधिक चार पदक (2 स्वर्ण) जीते; महाराष्ट्र के ईशान दरवेकर, तेलंगाना की नयना श्री तलुरी और हरियाणा के सचिन सिंह ने दो-दो स्वर्ण अपने नाम किए

लेह (लद्दाख), जनवरी, 2026: गणतंत्र दिवस के मौके पर एनडीएस स्टेडियम में खेले गए रोमांचक फाइनल में भारतीय सेना की अनुभवी टीम को पुरुष वर्ग के आइस हॉकी स्वर्ण पदक को बरकरार रखने के लिए जुझारू चंडीगढ़ के खिलाफ अपनी पूरी क्षमता झोंकनी पड़ी। सेना की टीम ने चंडीगढ़ को 3-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया। मैच का निर्णायक गोल अंतिम हूटर से महज़ तीन मिनट पहले आया और केआईडब्ल्यूजी 2026 के लद्दाख चरण का इससे बेहतर और रोमांचक समापन हो ही नहीं सकता था।

हरियाणा ने अपने फिगर स्केटिंग और आइस स्केटिंग खिलाड़ियों द्वारा जीते गए चार स्वर्ण पदकों की बदौलत केआईडब्ल्यूजी 2026 के लद्दाख चरण की टीम चैंपियनशिप ट्रॉफी अपने नाम की। लद्दाख, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने दो-दो स्वर्ण पदक जीते, लेकिन रजत पदकों की संख्या के आधार पर उनका स्थान तय हुआ। लद्दाख (5 रजत), महाराष्ट्र (3 रजत) और तेलंगाना (2 रजत) इसी क्रम में पदक तालिका में रहे।

पदक तालिका के लिए देखें: https://www.winter.kheloindia.gov.in/medal-tally

चंडीगढ़ की पुरुष आइस हॉकी टीम उस समय पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई, जब उसने शनिवार को सेमीफाइनल में मेज़बान लद्दाख को 3-2 से हराकर सभी को चौंका दिया। केआईडब्ल्यूजी 2025 से आइस हॉकी खेलना शुरू करने वाली इस टीम का फाइनल में पहुँचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि रही। फाइनल में आर्मी के खिलाफ चंडीगढ़ ने साबित कर दिया कि लद्दाख के खिलाफ मिली जीत कोई संयोग नहीं थी। दो गोल से पिछड़ने के बाद जोरदार वापसी करते हुए लगभग मैच को अतिरिक्त समय तक ले जाना काबिले-तारीफ रहा। दिलचस्प बात यह रही कि लीग चरण में चंडीगढ़ को आर्मी के खिलाफ 10-1 से हार का सामना करना पड़ा था।
माल ढुलाई और नदी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी

कोच्चि, केरल, 23 जनवरी, 2026: अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) की तीसरी बैठक भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क के विस्तार, प्रमुख अवसंरचना निवेशों को मंजूरी देने और देश की नदियों की पूरी आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप के साथ संपन्न हुई। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई इस पूर्ण दिवसीय बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री; बिहार सरकार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार; नागालैंड सरकार के विद्युत और संसदीय कार्य मंत्री के. जी. केन्ये; अरुणाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ओजिंग तासिंग; और पंजाब सरकार के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल; उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी उपस्थित थे। यह बैठक सतत और कुशल लॉजिस्टिक के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में अंतर्देशीय जल परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। आईडब्ल्यूडीसी 3.0 ने हरित परिवहन को गति देने, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और नदी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की पहचान की। केरल, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना में नदी क्रूज जेटियों सहित 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जो देश भर में क्रूज पर्यटन सर्किट के विस्तार में सहायक होंगी। परिषद ने आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी (रा.ज.-4) पर स्थित मुक्त्याला और हरिश्चंद्रपुरम में रो-रो और कार्गो टर्मिनलों के विकास की घोषणा की जिससे 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ कम दूरी के कार्गो परिवहन को मजबूती मिलेगी। जम्मू और कश्मीर में झेलम नदी (रा.ज.49) पर तटवर्ती सुविधाओं को भी यात्री परिवहन और पर्यटन अवसंरचना को समर्थन देने के लिए मंजूरी दी गई। नौगम्यता, सुरक्षा और साल भर परिचालन को बेहतर बनाने के लिए ₹465 करोड़सेअधिककीपरिसंपत्तिखरीदकोमंजूरीदीगई।इनमेंकेरलमेंसर्वेक्षणजलयान; बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रो-पैक्स बर्थिंग जेट्टी; उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में फ्लोटिंग पोंटून और क्विक पोटून ओपनिंग सिस्टम; हाइब्रिड सर्वेक्षण जलयान; उभयचर और कटर सक्शन ड्रेजर; और टग-बार्ज इकाइयां शामिल हैं। परिषद ने 900 करोड़ रुपये से अधिक की कई बड़ी नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी, जिनमें कोच्चि में स्लिपवे सुविधा का विकास, ओडिशा (25) और पूर्वोत्तर (85) में 110 जेट्टी का निर्माण, जम्मू-कश्मीर में 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक जलयानों की तैनाती और महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नदी यातायात और नौवहन प्रणाली (एनआरटीएनएस) का कार्यान्वयन शामिल है। असम के लिए, आईडब्ल्यूडीसी ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल के विकास और बोगीबील तक 144 करोड़ रुपये की एप्रोच रोड संपर्क परियोजना  ब्रह्मपुत्र नदी (रा.ज.-2) पर डिब्रूगढ़ में नदी बंदरगाह का निर्माण असम के अंतर्देशीय जलमार्ग अवरंचना ढांचे और पर्यटन क्षमता को और मजबूत करेगा। परिषद को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक परिवर्तन के एक कार्यनीतिक स्तंभ के रूप में उभरे हैं। हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अंतर्देशीय जलमार्गों को विशेष प्रोत्साहन दिया है, जिससे सड़कों पर भीड़ कम हुई है, लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है और व्यापार करने में सुगमता बढ़ी है। इस दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, नदियों को अब केवल प्राकृतिक संसाधन के रूप में नहीं बल्कि विकास, स्थिरता और संपर्क को गति देने वाली आर्थिक जीवनरेखा के रूप में देखा जाता है। बैठक में पिछले दशक में इस क्षेत्र के तीव्र विस्तार की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 में 18 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.84 मिलियन टन हो गई है, जबकि परिचालन में मौजूद राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या तीन से बढ़कर 32 हो गई है, यानी दस गुना वृद्धि हुई है। लक्जरी नदी क्रूज जलयानों की संख्या पांच से बढ़कर 25 हो गई है, जो उद्योग, निवेशकों और राज्य सरकारों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। केरल के विशाल बैकवाटर और नहर नेटवर्क को अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक प्रमुख अवसर के रूप में उजागर किया गया। परिषद ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर, डिब्रूगढ़ सहित 18 शहरों मेंशहरी जल परिवहन के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। बैठक में इस बात पर फिर से जोर दिया गया कि अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का सबसे अधिक ईंधन-कुशल, लागत-प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल साधन बने हुए हैं, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़कों और रेलवे पर भीड़भाड़ कम करने और समग्र लॉजिस्टिक लागत को घटाने में सहायक हैं। नदी क्रूज पर्यटन को समुद्री अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना गया, जिसके लिए सरकार आधुनिक क्रूज टर्मिनल, उन्नत नौवहन प्रणाली और समर्पित क्रूज सर्किट विकसित कर रही है। "हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग हरित विकास, डिजिटल परिवर्तन और पर्यटन आधारित विकास के शक्तिशाली कारक के रूप में उभर रहे हैं। माल ढुलाई, यात्री सेवाओं और क्रूज पर्यटन में तीव्र विस्तार के साथ, हमारी नदियाँ सतत गतिशीलता और आर्थिक अवसरों का इंजन बन रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले जलयानों, स्मार्ट नेविगेशन प्रणालियों और विश्व स्तरीय यात्री अवसंरचना को एकीकृत करके, हम लॉजिस्टिक लागत को कम करने, उत्सर्जन में कटौती करने और नई आजीविका सृजित करने के लिए जलमार्गों की पूरी क्षमता का उपयोग कर रहे हैं। कोच्चि वाटर मेट्रो जैसी पहलों की सफलता दर्शाती है कि नदियाँ शहरी गतिशीलता को कैसे बदल सकती हैं, और हम गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर और डिब्रूगढ़ सहित अन्य शहरों में इस मॉडल को दोहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत के जलमार्ग विकसित भारत के पथ पर समावेशी विकास को गति प्रदान करें," सोनोवाल ने कहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया, जहां जलमार्ग परियोजनाओं से संपर्क, व्यापार, पर्यटन और नदी किनारे बसे समुदायों की आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। सरकार ने पूर्वोत्तर में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 घाटों का विकास करने की योजना बनाई है, जिससे क्षेत्रीय लॉजिस्टिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी।  “भारतकीअंतर्देशीयजलमार्गयोजनामेंपूर्वोत्तरकाकेंद्रीयस्थानहै।अपनेविशालनदीनेटवर्ककेसाथ, यह क्षेत्र सतत परिवहन, व्यापार और पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 जेटियों का विकास संपर्क को काफी मजबूत करेगा, क्षेत्रीय लॉजिस्टिक को एकीकृत करेगा और नदी किनारे बसे समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा। अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय बाजारों के करीब लाएगा बल्कि विकास, समृद्धि और क्षेत्रीय एकीकरण के प्रवेश द्वार के रूप में इसकी भूमिका को भी उजागर करेगा,” सर्वानंदा सोनोवाल। असम के लिए, परिषद ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल और डिब्रूगढ़ के बोगीबील नदी बंदरगाह तक 144 करोड़ रुपये की पहुंच मार्ग संपर्क परियोजना को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं राज्य के अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगी, नदी क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देंगी और अंतिम-मील संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार करेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर को विकास के अष्ट लक्ष्मी इंजन के रूप में देखने के दृष्टिकोण से प्रेरित ये पहल ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे व्यापार, रोजगार और सतत विकास के नए अवसर पैदा करेंगी। (असम के लिए) परिषद ने सरकार की दूरदर्शी प्राथमिकताओं की पुष्टि की, जिनमें हरित और संकर जहाजों की तैनाती, डिजिटल नेविगेशन और यातायात प्रबंधन प्रणालियों का विस्तार, आधुनिक अंतर्देशीय टर्मिनलों का विकास, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत सुविधाओं को सुदृढ़ करना और समुद्री कौशल विकास को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में सरल शहरी जल परिवहन प्रणालियों के निर्माण, माल परिवहन दक्षता में सुधार, यात्री आवागमन के लिए हरित और संकर जहाजों को बढ़ावा देने, नदी क्रूज पर्यटन का विस्तार करने और डिजिटल और टिकाऊ प्रथाओं को सुदृढ़ करने पर विस्तृत विचार-विमर्श भी हुआ। राज्यों द्वारा चल रही और प्रस्तावित अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं के संबंध में उठाई गई चिंताओं की समीक्षा की गई, जिसमें समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया गया। आइडब्ल्यूडीसी3.0, 2024 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी1.0 और 2025 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी2.0 के दौरान रखी गई नींव पर आधारित है, जिसमें स्थिरता, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान और परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बैठक में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आइडब्ल्यूएआइ) के अध्यक्ष सुनील पालीवाल, उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह सहित केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आइडब्ल्यूडीसी) 1.0 और 2.0 के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की गई। दिन भर चली इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों की समीक्षा की गई, प्रमुख निवेशों और परियोजनाओं की घोषणा की गई और देश भर में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया गया। अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने, स्वच्छ परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने और नदियों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्गों को माल और यात्रियों दोनों के लिए परिवहन के एक रुचिकर, भविष्य के लिए तैयार साधन के रूप में पुनः स्थापित किया गया, जो स्वच्छ परिवहन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और एक मजबूत भारत में योगदान देगा। भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग ईंधन-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन उपलब्ध कराकर सड़क और रेल नेटवर्क पर भीड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 111 राष्ट्रीय जलमार्गों के साथ, अंतर्देशीय जलमार्ग रो-रो वाहन तथा, क्रूज पर्यटन जैसी पहलों को तेजी से समर्थन दे रहे हैं।पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन आइडब्ल्यूएआइ, राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, रखरखाव और विनियमन के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी बनी हुई है।
*कैसे करोड़ों भारतीयों के सुरक्षा कवच बन गए मोदी!*

- डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

भारतीय राजनीति के वर्तमान युग को यदि किसी एक शब्द में समझा जाए, तो वह शब्द है – मोदी मैजिक। यह शब्द केवल किसी नेता की लोकप्रियता को नहीं दर्शाता, बल्कि उस गहरे भावनात्मक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन को भी बयान करता है जो पिछले एक दशक में भारत के मतदाता के भीतर घटित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह राजनीति, नेतृत्व और जनता के रिश्ते को पुनर्परिभाषित किया है, उसने भारत के लोकतांत्रिक व्यवहार को एक नई दिशा दी है।

मोदी की लोकप्रियता किसी एक चुनाव या किसी एक योजना का परिणाम नहीं है। यह वर्षों की सुनियोजित छवि- निर्माण, निरंतर संवाद, मजबूत संगठनात्मक शक्ति और सबसे बढ़कर जनता की भावनाओं को समझने की कला का संयुक्त परिणाम है। मोदी आज सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं हैं, वे करोड़ों भारतीयों के लिए एक उम्मीद, एक पहचान और एक सुरक्षा कवच बन चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें पहले यह समझना होगा कि भारतीय राजनीति केवल नीतियों से नहीं चलती, वह भावनाओं से चलती है। भारत का मतदाता जब वोट डालता है, तो वह केवल सरकार नहीं चुनता, वह अपने भविष्य, अपनी पहचान और अपने सम्मान पर निर्णय करता है। मोदी इस मनोविज्ञान को गहराई से समझते हैं।

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा साधारण नहीं है। एक चाय बेचने वाले से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर एक ऐसी कहानी है जिसमें संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश छिपा है। यह कहानी करोड़ों गरीब, निम्न मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के दिल को छूती है। उन्हें लगता है कि मोदी उनमें से एक हैं। यही भावनात्मक रिश्ता मोदी को बाकी नेताओं से अलग बनाता है। मोदी ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया है जो सत्ता से नहीं, बल्कि सेवा से जुड़ा है। उनका सादा जीवन या लगातार काम करना, यह सब मिलकर उन्हें एक त्यागी और समर्पित नेता के रूप में दर्शाता है। यह छवि उस आम नागरिक के लिए बहुत आकर्षक है जो लंबे समय से नेताओं को सुविधा और भ्रष्टाचार में डूबा देखता आया है।

इस भावनात्मक जुड़ाव को मोदी ने निरंतर संवाद के माध्यम से और मजबूत किया। *"मन की बात"* जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री पद को एक दूर की कुर्सी से निकालकर घर की बैठक तक पहुंचा दिया। लोग रेडियो पर उनकी आवाज सुनते हैं, अपने जैसे लोगों की कहानियां सुनते हैं और महसूस करते हैं कि देश का नेता उनकी दुनिया को समझता है। सोशल मीडिया ने इस जुड़ाव को और गहरा किया है। मोदी आज भारत के सबसे बड़े डिजिटल रूप से सक्रीय राजनेता हैं। वे ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अपने मोबाइल ऐप के जरिए हर दिन करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं। इस निरंतर उपस्थिति ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है जो हमेशा जनता के साथ और उनसे घिरा हुआ नजर आता है।

यह केवल प्रचार नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जुड़ाव है। जब कोई व्यक्ति रोज आपके सामने आता है, आप उसकी बातें सुनते हैं, तो वह आपके जीवन का हिस्सा बन जाता है। मोदी इस मनोविज्ञान को बहुत अच्छे से समझते हैं। मोदी मैजिक के एक और बड़े आधार के रूप में तकनीक व डेटा के उपयोग को समझा जा सकता है। 2014 के बाद से भारतीय राजनीति में एक नई शैली आई है जिसे डिजिटल राजनीति कहा जा सकता है। भाजपा ने लोगों की पसंद, उनकी जरूरतों और उनकी सोच को समझने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा का इस्तेमाल किया। इसके आधार पर अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग संदेश तैयार किए गए। किसी युवा से नौकरी और स्टार्टअप की बात की गई, तो किसी किसान से सम्मान निधि और फसल बीमा की। महिलाओं के लिए उज्ज्वला और शौचालय जैसी योजनाओं को सामने रखा गया। इससे हर वर्ग को लगा कि सरकार सीधे उससे बात कर रही है।

व्हाट्सएप जैसे माध्यमों ने इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाया। पारंपरिक मीडिया पर निर्भर रहने के बजाय भाजपा ने अपने समर्थकों के नेटवर्क को ही एक बड़ा संचार तंत्र बना दिया। इससे मोदी का संदेश बिना रुके, बिना बदले, सीधे लोगों तक पहुंचा। मोदी मैजिक का एक बहुत बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। मोदी ने भारत की प्राचीन संस्कृति, परंपरा और इतिहास को गर्व का विषय बनाया। राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक न्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया। सेना के साहसिक कदमों और सीमा पर की गई कार्रवाइयों को *"मजबूत भारत"*  की पहचान के रूप में दिखाया गया। इससे लोगों को लगा कि अब देश कमजोर नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास से भरा हुआ है। मोदी ने भारत को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया है जो दुनिया में सम्मान चाहता है और सम्मान पाता भी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी सक्रियता ने इस छवि को और मजबूत किया है।

हालाँकि इन सबके पीछे एक मजबूत संगठन भी काम करता है। भाजपा और उससे जुड़े संगठन गांव से लेकर महानगर तक फैले हुए हैं। हर कार्यकर्ता मोदी के संदेश को आगे बढ़ाने का काम करता है। पार्टी में अनुशासन और नेतृत्व की स्पष्टता है, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनती है। मोदी की राजनीति ने विपक्ष को भी एक तरह से परिभाषित कर दिया है।
उन्होंने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया है जो देश को खतरों से बचा सकता है। ऐसे में जो भी उनकी आलोचना करता है, वह कई बार जनता की नजर में देश के खिलाफ खड़ा दिखने लगता है। सही मायने में देखें तो इस पूरी प्रक्रिया में मोदी एक ऐसे केंद्र बन गए हैं जिसके चारों ओर राजनीति घूमती है। चुनाव अब केवल पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि मोदी बनाम बाकी सब के रूप में देखे जाने लगे हैं। मोदी ने राजनीति को एक भावनात्मक अनुभव में बदल दिया है, जहां नेता केवल सरकार नहीं चलाता, बल्कि लोगों की उम्मीदों और सपनों का प्रतिनिधि बन जाता है। जब तक मोदी इस भावनात्मक जुड़ाव, राष्ट्रीय गर्व और निरंतर संवाद को बनाए रखेंगे, तब तक मोदी मैजिक भारतीय राजनीति की सबसे शक्तिशाली ताकत बना रहेगा।
*आज के युवाओं के, कल के लक्ष्यों को ध्यान में रखेगा आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस*
*आज के युवाओं के लिए, कल के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस*

*नई दिल्ली, जनवरी 2026* : भारत आज एक अहम् मोड़ पर खड़ा है। आने वाले दस वर्ष देश के युवाओं को समर्पित हैं, जो सपने देखने वाले भी हैं और उन्हें पूरा करने वाले भी और साथ ही जो देश की आर्थिक दिशा तय कर रहे हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अनुसार, करीब 65% भारतीयों की उम्र 35 वर्ष से कम है। चाहे पहला घर खरीदना हो या जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाना, सपनों को हकीकत में बदलने के लिए लंबे समय तक अनुशासित वित्तीय योजना और बचत बेहद जरूरी है।
इसी सोच के साथ तैयार किया गया, आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस एक ऐसा मार्केट-लिंक्ड जीवन बीमा उत्पाद है, जो कमाने वाले युवाओं की सुविधाओं को ध्यान में रखता है। यह न सिर्फ लंबे समय में संपत्ति बनाने में मदद करता है, बल्कि परिवार को वित्तीय सुरक्षा भी देता है। सिर्फ 1,000 रुपए प्रति माह से शुरू होने वाला यह किफायती प्लान युवा प्रोफेशनल्स और पहली बार निवेश करने वालों को जल्दी शुरुआत करने, निवेश बनाए रखने और भारत की विकास कहानी का लाभ लेने का मौका देता है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर श्री विकास गुप्ता ने कहा, "आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस एक किफायती उत्पाद है, जिसमें ग्राहक द्वारा चुने गए एसेट एलोकेशन के अनुसार पूरा प्रीमियम निवेश किया जाता है। इसमें ग्राहकों के लिए 25 अलग-अलग फंड और चार पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजीस का विकल्प शामिल है। यह आंशिक निकासी की सुविधा भी देता है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत वित्तीय जरुरत पूरी हो सके। इसके अलावा इसमें 'वेवर ऑफ प्रीमियम' का अतिरिक्त लाभ की सुविधा भी मिलती है, जिससे जीवन में किसी अनचाही स्थिति में भी परिवार के वित्तीय लक्ष्य सुरक्षित रहते हैं।"
यूलिप की संरचना ऐसी होती है कि यह लंबे समय तक निवेश करने और एसेट बनाने की आदत को बढ़ावा देती है। यह ग्राहकों के लिए इसलिए भी फायदेमंद है, क्योंकि मॉर्गन स्टैनली के अनुसार भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर है। यूलिप में ग्राहकों को एसेट क्लास चुनने की आज़ादी मिलती है और वे बिना किसी अतिरिक्त लागत या टैक्स के एक एसेट से दूसरे एसेट में स्विच भी कर सकते हैं।
*केविनकेयर का चिक क्रेम हेयर कलर कैटेगरी में प्रवेश; पटना में  लॉन्च किया चिक क्विक क्रेम हेयर कलर*
* गुणवत्ता  के प्रति जागरूक और किफायती विकल्प चाहने वाले उपभोक्ताओं के लिए तैयार किया गया यह उत्पाद सिर्फ 10 मिनट में आसान और बेहतर हेयर कलरिंग अनुभव देता है, वह भी मात्र 10 रुपए में।
* यह तीन लोकप्रिय शेड्स- नेचुरल ब्लैक, नेचुरल ब्राउन और बरगंडी में उपलब्ध है। यह सिंगल-यूज़ सैशे में आता है और राज्य भर के जनरल ट्रेड दुकान पर आसानी से मिलेगा।
* टीवी की मशहूर हस्ती श्वेता तिवारी को ब्रांड एंबेसडर लेकर, चिक ने एक व्यापक 360° मार्केटिंग कैंपेन भी शुरू किया है, जिसमें प्रिंट, डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
*पटना, जनवरी 2026:* केविनकेयर का चिक ब्रांड, पटना के बाजार में हेयर कलर कैटेगरी में एक क्राँतिकारी उत्पाद- चिक क्विक क्रेम हेयर कलर लेकर आया है। इस घोषणा के साथ चिक ने क्रेम हेयर कलर कैटेगरी में अपनी एंट्री दर्ज की है। यह उत्पाद एक अनोखे 10-मिनट के फास्ट एक्शन फॉर्मूले से लैस है, जो क्रेम हेयर कलरिंग को और आसान और समय-बचाने वाला बनाता है। इसमें आंवला और भृंगराज जैसे प्राकृतिक तत्वों की अच्छाई शामिल है, जिससे यह गहरे, नैचुरल दिखने वाले रंग का अनुभव देता है। यह लॉन्च चिक के उस मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें हर घर तक इनोवेटिव और आसान हेयर कलरिंग सॉल्यूशंस पहुँचाना शामिल है। ब्रांड ने लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी को ब्रांड एंबेसडर बनाया है और राज्य में एक व्यापक मार्केटिंग कैंपेन शुरू किया है, जिसमें प्रिंट, ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम शामिल हैं।
चिक क्विक क्रेम हेयर कलर एक सिंगल-यूज़ सैशे में उपलब्ध है, जो अन्य क्रेम हेयर कलर्स से अलग एक सुविधाजनक पैक है। यह उपभोक्ताओं की मुख्य समस्याओं- लंबे समय तक लगने वाली एप्लीकेशन, रूखापन और पाउडर फॉर्मेट में होने वाली गंदगी को दूर करता है। यह प्रोडक्ट कम तैयारी के साथ एक स्मूद कलरिंग अनुभव सुनिश्चित करता है। तीन आकर्षक शेड्स- नेचुरल ब्लैक, नेचुरल ब्राउन और बरगंडी में उपलब्ध यह रेंज उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मात्र 10 रुपए की कीमत में यह क्रेम फॉर्मेट पटना के किफायती उपभोक्ताओं के लिए हेयर कलरिंग को और सुलभ और समावेशी बनाता है। 10 मिनट की फास्ट एक्शन टेक्नोलॉजी के साथ, चिक क्विक क्रेम हेयर कलर गहरे रंग और चमकदार फिनिश के साथ हेयर कलरिंग अनुभव को नया रूप देता है, बिना इंतजार, बिना झंझट।
लॉन्च पर बोलते हुए, केविनकेयर के बिजनेस हेड- पर्सनल केयर, श्री रजत नंदा ने कहा, “पटना में हेयर कलर बाजार तेजी से बदल रहा है। उपभोक्ता अब ऐसे समाधान चाहते हैं, जो गुणवत्ता, सुविधा और किफायत को एक साथ लाएं। अब तक कई उपभोक्ता पारंपरिक हेयर कलर फॉर्मेट पर निर्भर रहे हैं, जिनमें उपयोग की आसानी और अनुभव की कमी रहती है। चिक क्विक क्रेम हेयर कलर के साथ, हम गर्व से कह सकते हैं कि हम इस अंतर को दूर कर रहे हैं। यह सच में एक ऐसा क्रेम फॉर्मेट है, जो केवल 10 मिनट में गहरे और शानदार परिणाम देता है। पटना के सबसे भरोसेमंद हेयर केयर ब्रांड्स में से एक होने के नाते, चिक हमेशा ब्यूटी को सबके लिए सुलभ बनाने के लिए खड़ा रहा है, और यह लॉन्च हमारे इनोवेशन और वैल्यू-ड्रिवन समाधानों की दिशा में एक और कदम है।”
चिक क्विक क्रेम हेयर कलर पटना के सभी रिटेल आउटलेट्स और किराना स्टोर्स पर सिंगल-यूज़ सैशे पैक में उपलब्ध होगा। उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार तीन लोकप्रिय शेड्स- नेचुरल ब्लैक, नेचुरल ब्राउन और बरगंडी में से चुन सकते हैं। इस लॉन्च के साथ केविनकेयर पर्सनल केयर श्रेणी में चिक की उपस्थिति को और मजबूत करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि गुणवत्तापूर्ण हेयर कलरिंग अब हर घर तक पहुँचे।

चिक के विषय में: चिक शैम्पू केविनकेयर की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। इस ब्रांड ने एफएमसीजी उद्योग में सैशे रिवॉल्यूशन लाया और आज यह केविनकेयर का प्रमुख ब्रांड है। इनोवेटिव सैशे पैकेजिंग, रणनीतिक मूल्य निर्धारण, व्यापक वितरण नेटवर्क और तेजी से बदलती उपभोक्ता जरूरतों को समझने की क्षमता ने चिक को आज देश के सफलतम ब्रांड्स में शामिल किया है।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक तिमाही एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए

* वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में वितरण रिकॉर्ड स्तर 8,293 करोड़ रुपए
* जमा 7.7% तिमाही दर तिमाही बढ़ी, ऋण पुस्तिका वृद्धि 7.1% तिमाही दर तिमाही से आगे
* सकल ऋण पुस्तिका (दिसंबर’25) 37,057 करोड़ रुपए, 21.6% सालाना वृद्धि; जमा 42,223 करोड़ रुपए, 22.4% सालाना वृद्धि
* सुरक्षित ऋण पुस्तिका 17,825 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 48.7% सालाना वृद्धि; कुल ऋण में सुरक्षित ऋण का हिस्सा 48.1%
* माइक्रो बैंकिंग सकल ऋण पुस्तिका 19,372 करोड़ रुपए (दिसंबर’25); 4.1% सालाना वृद्धि
*मुंबई, , जनवरी, 2026* :उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड [BSE: 542904; NSE: UJJIVANSFB] ने आज 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक- व्यवसाय प्रदर्शन सारांश
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही एवं वित्त वर्ष 26 के 9 महीने
❖ परिसंपत्तियाँ
सकल ऋण पुस्तिका 37,057* करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 21.6% सालाना / 7.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
सुरक्षित ऋण पुस्तिका का हिस्सा 48.1% (दिसंबर’25) बनाम 39.3% (दिसंबर’24) और 46.8% (सितंबर’25)
अब तक का सर्वाधिक तिमाही वितरण 8,293 करोड़ रुपए; 54.7% सालाना / 4.5% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
माइक्रो बैंकिंग वितरण 4,688 करोड़ रुपए; 62.4% सालाना / 10.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
❖ संग्रह एवं परिसंपत्ति गुणवत्ता
समूह एवं व्यक्तिगत ऋण बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता में सुधार; दिसंबर’25 में 99.7%
जोखिमग्रस्त पोर्टफोलियो*/जीएनपीए*/एनएनपीए* क्रमशः 3.98% / 2.39% / 0.58% (दिसंबर’25); जबकि दिसंबर’24 में 5.36% / 2.68% / 0.66%
प्रोविजन कवरेज रेशियो दिसंबर’25 में बढ़कर 76%
❖ जमा
जमा 42,223 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 22.4% सालाना / 7.7% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
कासा 11,535 करोड़ रुपए; 33.2% सालाना वृद्धि, कासा अनुपात 27.3% (दिसंबर’25)
रिटेल टर्म डिपॉजिट^ + कासा 29,395 करोड़ रुपए; 16.3% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में फंड की लागत (सीओएफ) 7.09%, वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही की तुलना में 25 बीपीएस कम

❖ वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए; 12.8% सालाना वृद्धि
एनआईएम 33 बीपीएस बढ़कर वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 8.23%
कॉस्ट-टू-इनकम अनुपात तिमाही के लिए 66% पर स्थिर; हालाँकि नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च समायोजन के बाद 65% से नीचे
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में पीएटी 186 करोड़ रुपए; 70.8% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में आरओए 1.5% (सालाना 45 बीपीएस वृद्धि); आरओई 11.5% (सालाना 423 बीपीएस वृद्धि)
❖ पूँजी एवं तरलता
पूँजी पर्याप्तता अनुपात 21.6%
मजबूत तरलता; दिसंबर’25 के लिए औसत दैनिक एलसीआर 165.6%
* जहाँ लागू हो, शर्तें/परिभाषाएँ बैंक की रिपोर्टिंग के अनुसार।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ श्री संजीव नौटियाल ने कहा, “भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 8.2% की मजबूत जीडीपी वृद्धि ने ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के लिए सहायक माहौल तैयार किया है।
उज्जीवन एसएफबी में जमा वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 7.7% तिमाही दर तिमाही और 22.4% सालाना बढ़कर 42,223 करोड़ रुपए हो गई, जबकि दिसंबर’25 के अंत में क्रेडिट–डिपॉजिट अनुपात 88% रहा। गुणवत्ता वाले ‘न्यू-टू-बैंक’ ग्राहकों को जोड़ने तथा ‘एग्ज़िस्टिंग-टू-बैंक’ ग्राहकों से बेहतर जुड़ाव के लिए समर्पित चैनलों पर स्पष्ट फोकस के चलते कासा अनुपात लगातार दो तिमाहियों से 27% से ऊपर बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में किए गए जमा दरों में कटौती और बेहतर तरलता प्रबंधन के कारण फंड की लागत में गिरावट का रुझान जारी रहा। तिमाही के लिए सीआईएफ 7.08% रहा, जो सालाना आधार पर 49 बीपीएस कम है।
तिमाही के दौरान सकल ऋण पुस्तिका 7.1% तिमाही दर तिमाही और 21.6% सालाना बढ़कर 37,057 करोड़ रुपए हो गई, जिसे 8,293 करोड़ रुपए के अब तक के सर्वाधिक तिमाही वितरण का सहारा मिला। यह असुरक्षित और सुरक्षित, दोनों श्रेणियों के उत्पादों में सर्वांगीण प्रदर्शन का परिणाम रहा। आवास, एमएसएमई, गोल्ड, वाहन और कृषि ऋण जैसे सुरक्षित पोर्टफोलियो हमारी दीर्घकालिक विविधीकरण रणनीति के अनुरूप विस्तार करते रहे, जिससे दिसंबर’25 तक सुरक्षित ऋण का हिस्सा बढ़कर 48% हो गया।
बैंक का पीएआर 4% से नीचे रहा। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में स्लिपेज घटकर 221 करोड़ रुपए रहा, जबकि दिसंबर’25 के अंत में जीएनपीए 2.39% और एनएनपीए 0.58% रहा। तिमाही के लिए क्रेडिट लागत ₹195 करोड़ रही और हमें मौजूदा परिचालन तिमाही में इसमें और कमी की उम्मीद है। दिसंबर’25 तक पीसीआर बढ़कर 76% हो गया। माइक्रोफाइनेंस बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता दिसंबर’25 में 99.7% तक पहुँचने के साथ प्रावधान आवश्यकताएं घटने लगी हैं।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में हमारी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एमआईएम) 33 bps तिमाही दर तिमाही बढ़कर 8.23% हो गई, जिसे कम CoF, अनुकूल उत्पाद मिश्रण, कम ब्याज रिवर्सल और सीआरआर में ढील का समर्थन मिला। हमने तिमाही में ₹1,000 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक एनआईआई दर्ज किया। इसके परिणामस्वरूप लाभप्रदता मजबूत हुई और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में कर पश्चात लाभ (पीएटी) ₹186 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 70.8% की स्वस्थ वृद्धि दर्शाता है। नवंबर’25 से लागू नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च को समायोजित करने पर हमारा पीएटी लगभग ₹200 करोड़ होता। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 1.5% का आरओए और 11.5% का आरओई हमारे रिटर्न मेट्रिक्स में निरंतर सुधार को रेखांकित करता है।
21.6% की स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता, मजबूत तरलता बफर और वृद्धि के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण के साथ बैंक आने वाली तिमाहियों में टिकाऊ और लाभकारी वृद्धि देने के लिए सुदृढ़ स्थिति में है।”