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डोनाल्ड ट्रंप को हर हाल में क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

#whydoesdonaldtrumpwant_greenland

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार डेनमार्क के नियंत्रण वाले इस द्वीप पर कब्जे की धमकी दे चुके हैं। वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप खेल कर चुके हैं। निकोलस मादुरो को उठवाकर अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना कब्जा जमा चुका है। अब अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर है।

रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात फिर ग्रीनलैंड पर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि अमेरिका को 'कुछ करना ही होगा', वरना रूस और चीन इस आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे। ट्रंप ने साफ कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।'

डेनमार्क के दावे पर उठाया सवाल

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता। हमने भी कई नावें भेजी थीं। लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं।'

ट्रंप को किस बात का सता रहा डर

डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो चीन या रूस वहां अपनी मजबूत मौजूदगी बना सकते हैं, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। रिपोर्टरों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। मौजूदा सैन्य समझौते अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

*इतिहास का बदला लेना होगा...', ऐसा क्यों बोले अजीत डोभाल

#wemustavengehistorythiscountrysaysajitdoval

दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित का। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने युवाओं से खास अपील की है। उन्होंने युवाओं को इतिहास से सीखने और एक मजबूत भारत के निर्माण का आग्रह किया है।

डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'मेरा कार्यक्षेत्र अलग है, मेरा अनुभव अलग है, और युवाओं के साथ उम्र का बहुत बड़ा अंतर है। आपमें से अधिकांश मुझसे 60 वर्ष से अधिक छोटे हैं, इसलिए मैं थोड़ा असमंजस में था कि आऊं या नहीं। मेरा जन्म स्वतंत्र भारत में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता-पूर्व भारत में हुआ था। मेरी जवानी तो कब की बीत चुकी है।'

भारत विकसित होगा, यह निश्चित है-जोभाल

अजीत डोभाल ने कहा, 'आज इतना कुछ बदल गया है कि मुझे सब कुछ पता नहीं है। लेकिन एक बात समान है, चाहे आप इसे महसूस करें या न करें - एक छोटी सी बात जो आपके जीवन की दिशा तय करती है: निर्णय लेने की क्षमता। आप सभी हर दिन छोटे-बड़े फैसले लेते हैं, और जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपको हर कदम पर फैसले लेने होंगे। भारत विकसित होगा, यह निश्चित है।'

युवाओं को इतिहास से प्रेरणा लेने की अपील

यंग लीडर्स डायलॉग में एनएसए ने कहा कि भारत को आजादी बहुत मुश्किल से मिली है। हमारे पूर्वजों ने बहुत कष्ट सहे, अपमान झेला और बहुत कुछ खोया। डोभाल ने युवाओं से कहा कि वे इतिहास से प्रेरणा लें और अपने देश को फिर से मजबूत बनाएं। यह भारत अपने मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों पर आधारित होना चाहिए।

‘बदला' एक शक्तिशाली ताकत- डोभाल

डोभाल ने कहा, 'यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए। ‘बदला' शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन ‘बदला' एक शक्तिशाली ताकत है। हमें अपने इतिहास का ‘बदला' लेना होगा और भारत को उसके अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनाना होगा।'

हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े- डोभाल

एनएसए ने कहा, हमारी सभ्यता बहुत विकसित थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े। हम कहीं लूटने नहीं गए। हमने किसी दूसरे देश या लोगों पर हमला नहीं किया, जबकि बाकी दुनिया बहुत पिछड़ी हुई थी। लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद को लेकर आने वाले खतरों को समझने में नाकाम रहे। इतिहास ने हमें सबक सिखाया जब हम इन खतरों के प्रति उदासीन रहे। क्या हमने वह सबक सीखा? क्या हम उस सबक को याद रखेंगे? अगर आने वाली पीढ़ियां उस सबक को भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा।

देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 8 एनसीआर के, हर दूसरे शहर में गंभीर वायु प्रदूषण

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हर साल दिवाली के आसपास और उसके बाद दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन का लेवल बढ़ जाता है। हवा की खराब क्वॉलिटी बिगड़ती जाती है। दम घोंटू हवा में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। लेकिन, अगर आप सोचते हैं कि दिल्ली-एनसीआर देश के सबसे प्रदूषित शहर हैं तो आप गलत हैं। दरअसल, देश के 44 प्रतिशत यानी तकरीबन हर दूसरा शहर गंभीर वायु प्रदूषण से ग्रस्त है।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक नए विश्लेषण के अनुसार दिल्ली व एनसीआर के अन्य शहरों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पीएम 2.5 हो या पीएम 10 दोनों का स्तर यहां के शहरों में मानक से बहुत अधिक है।

दिल्ली देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर

वर्ष 2025 में पीएम2.5 के आकलन के अनुसार दिल्ली देश का दूसरा और गाजियाबाद तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है। 10 प्रदूषित शहरों में आठ एनसीआर के हैं। वहीं, दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में पीएम 10 का स्तर सबसे अधिक मिला है।

एनसीआर के 10 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर

एनसीआर के 10 प्रदूषित शहरों में नोएडा, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, हाजीपुर, मुज़फ्फरनगर और हापुड़ शामिल हैं। पीएम10 के मामले में, दिल्ली 197 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर वार्षिक औसत के साथ सबसे ऊपर है। यह राष्ट्रीय मानक से तीन गुना है। गाजियाबाद (190 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) और ग्रेटर नोएडा (188 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

बॉर्डर पर बसा ये शहर है सबसे ज्यादा प्रदूषित

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने सैटेलाइट डेटा की मदद से देश के 4,041 शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण को लेकर रिसर्च की है। इस रिसर्च के मुताबिक, देश के करीब 44% शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। इन शहरों में से सिर्फ 4% हिस्सा ही नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के दायरे में शामिल हैं। असम-मेघालय बॉर्डर के पास स्थित बर्नीहाट शहर देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है।

2019 से 2025 के बीच के पॉल्यूशन डेटा का हुआ एनालिसिस

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिसर्च रिपोर्ट में 2019 से 2025 के बीच के प्रदूषण के डेटा का एनालिसिस किया गया। इसमें सामने आया कि लिस्ट में शामिल 10 शहरों में हर साल कम से कम 1,787 शहरों में पीएम2.5 का स्तर तय सीमा से ज्यादा रहा। इस रिसर्च में हालांकि, कोविड से प्रभावित साल 2020 का डेटा शामिल नहीं किया गया।

ईडी की रेड पर बिफरीं ममता, बीजेपी ने पूछा-इतनी घबराहट क्यों?

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कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 जनवरी यानी शुक्रवार को राज्य की राजधानी कोलकाता में विरोध मार्च निकाला। इस बीच बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा।

ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार किया

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि गुरुवार को बंगाल में जो हुआ, वह आजाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ। सीएम ममता बनर्जी का पूरा काम न सिर्फ अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और असंवैधानिक है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है।

रविशंकर ने पूछा- ममता क्यों घबरा गई हैं

बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, रेड निजी कंपनी के दफ्तर पर थी। हमें नहीं समझ आता कि इसमें ममता क्यों घबरा गई हैं। उन्हें डर है कि उनके घोटालों के राज खुल जाएंगे। जांच को रोकना कानून का उल्लंघन है। ममता का हिसाब जनता करेगी।'

ED के अधिकारियों को धमकाने का आरोप

रविशंकर ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती हैं। उन्होंने ED के अधिकारियों को भी धमकाया है। रविशंकर ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि ये रेड न तो ममता बनर्जी के घर पर थी, न उनके दफ्तर में, न ही टीएमसी के दफ्तर में और न ही टीएमसी के किसी नेता या मंत्री के घर पर थी। ये रेड एक निजी कंसल्टेंसी फर्म पर थी, जिसके यहां करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत आई थी। ऐसे में ममता बनर्जी अपने पुलिस अधिकारियों के साथ जाती हैं और ईडी के लोगों को धमकाया जाता है। ममता बनर्जी उनसे बहस करती हैं और पेपर छीन कर चली जाती हैं। उनका आचरण न केवल अमर्यादित और शर्मनाक है, बल्कि उन्होंने इससे संवैधानिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।

बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट

बीजेपी सांसद ने आगे कहा, ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल का हाल बेहाल हो गया है। आपको मालूम है कि बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट है, जिसमें सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल हैं।

आतंकियों की हर चाल होगी नाकाम, अमित शाह ने लॉन्च किया नेशनल आईईडी डेटा मैनेजमेंट सेंटर

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हाईटेक होते दौर में अब जंग भी तकनीक के जरिए जीते जा सकते हैं। यही वजह है कि भारत सरकार भी देश की आंतरिक सुरक्ष को लेकर हाइटेक होती जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एनएसजी के मानेसर ट्रेनिंग सेंटर में नेशनल आईईडी डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NIDMS) का वर्चुअल शुभारंभ किया।

इस अत्याधुनिक सिस्टम के माध्यम से आतंकवादी घटनाओं और IED विस्फोटों से जुड़े डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण पहले से अधिक तेज और सटीक तरीके से संभव हो सकेगा। ह ना केवल पुराने धमाकों की जांच करेगा बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए यह भी बताएगा कि आतंकी भविष्य में कहां और कैसा हमला कर सकते हैं?

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड द्वारा विकसित

एनआईडीएमएस को नेशनल सिक्योरिटी गार्ड द्वारा विकसित किया गया है। डेटा सेंटर की शुरुआत करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जो धमाकों के डेटा हैं वो अब इस डेटा सेंटर के शुरू होने से आपस में बात कर पाएंगे। हमारे नागरिक चैन की नींद सोते हैं तो उसमें एनएसजी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। आईईडी के डेटा मैनेजमेंट सेंटर की जो शुरुआत हो रही है उससे सारे राज्यों की पुलिस और एनआईए को लगातार गाइडेंस मिलेगा।

डेटा का होगा केंद्रीकरण

गृह मंत्री ने बताया कि एनआईडीएमएस के माध्यम से देशभर में बिखरे हुए विभिन्न प्रकार के डेटा को केंद्रीकृत कर एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इससे आतंकवादी घटनाओं की आपसी लिंकिंग का पता लगाना आसान होगा और जांच की गुणवत्ता के साथ-साथ गति भी बढ़ेगी। उन्होंने इसे 'वन नेशन, वन डेटा टेरिटरी' की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि अब सही सूचना सही समय पर एजेंसियों को उपलब्ध हो सकेगी, जिससे किसी भी घटना पर त्वरित और बेहतर प्रतिक्रिया मिल सकेगी।

इंटर-एजेंसी समन्वय होगा बेहतर

शाह ने कहा कि इंटर-एजेंसी समन्वय भी अब और बेहतर होगा। यह सही समय और सही जगह पर सही जानकारी पहुंचाने का एक बहुत प्रभावी तरीका होगा। एनएसजी की स्थापना 1984 में हुई थी और तब से इसने दुनिया भर में हुए आतंकवादी हमलों का विश्लेषण किया है और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार किया है। आतंकवाद रोधी गतिविधियां, हाइजैकिंग विरोधी ऑपरेशन, बम निष्कासन की उन्नत प्रणाली और अब सभी एजेंसियों के साथ डेटा साझा करने के लिए प्लेटफॉर्म तैयार करना ये सभी एनएसजी के महत्वपूर्ण कार्य हैं।

देश के 700 जिला मुख्यालय जोड़े गए

यह डेटा सेंटर एक विशाल नेटवर्क की तरह काम करेगा। इसमें देश के 700 जिला मुख्यालयों को जोड़ा गया है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और सभी राज्यों की पुलिस अपनी जानकारी यहां साझा करेगी। यह एक टू वे इनपुट सिस्टम है जिसके जरिए 800 अलग-अलग सोर्सेस से डेटा का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।

26 देश इस मिशन का हिस्सा

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के 26 सहयोगी देश भी इस मिशन का हिस्सा बने हैं। ये देश अपने यहां हुए आतंकी हमलों और इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों की इंटेलिजेंस भारत के साथ साझा करेंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकी गुटों के अगले टारगेट और उनके आईईडी बनाने के नए तरीकों का प्रिडिक्शन करना संभव होगा।

दिल्ली में अमित शाह के दफ्तर के बाहर टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन, लिए गए हिरासत में, जानें पूरा मामला

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के बीच टकराव शुक्रवार को और बढ़ गया। कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी के बाद तृणमूल के आठ सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर धरना दिया। जिसके बाद पुलिस ने महुआ मोइत्रा सहित अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया है।

कोलकाता में कई ठिकानों पर गुरुवार को ईडी ने रेड मारी थी। इनमें से दो रेड IPAC कंपनी के खिलाफ भी थीं। यह कंपनी टीएमसी के चुनावी मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल रही है। इस रेड के बाद बंगाल का सियासी पारा चढ़ गया है, जिसका असर दिल्ली तक दिख रहा है। शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के 8 सांसदों ने दिल्ली में होम मिनिस्टर, अमित शाह के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन के लिए डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आजाद और डॉ. शर्मिला सरकार पहुंचे थे। सांसदों ने केंद्र सरकार पर चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और नारे लगाए। इस दौरान वहां पुलिस पहुंची और टीएमसी सांसदों को हिरासत में ले लिया। प्रोटेस्ट का जो वीडियो आया है, उसमें पुलिस, टीएमसी सांसदों को पकड़ती दिख रही है। उन्हें जबरन अपने साथ गाड़ी में बैठाती नजर आ रही है।

महुआ मोइत्रा ने जताई नाराजगी

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'हम भाजपा को हराएंगे, देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस एक चुने हुए सांसद के साथ कैसा बर्ताव कर रही है।' वहीं टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने कहा, 'अमित शाह ने ईडी के अधिकारियों का इस्तेमाल किया और वे हमारे राजनीतिक दस्तावेज छीनने के लिए वहां गए। वे (भाजपा) पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं जीत सकते, इसीलिए वे ऐसा घटिया काम कर रहे हैं।'

यह विवाद गुरुवार को शुरू हुआ था, जब ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े मामले में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और संगठन के कार्यालय पर छापे मारे। छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँचीं और एजेंसी पर तृणमूल से जुड़े अहम दस्तावेज ले जाने का आरोप लगाया।

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

फिर जल रहा ईरानः बवाल के बाद इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद, सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी

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ईरान में पिछले 12 दिनों से भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। ईरान में महंगाई और गिरती करेंसी को लेकर दो हफ्ते से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। गुरुवार की रात एक बार फिर ईरान धधक उठा। प्रदर्शन की आंच इतनी तेज हो गई कि खामेनेई सरकार सकते में आ गई। आनन-फानन में सरकार ने इंटरनेट और फोन लाइन्स काट दी।

रेजा पहलवी की अपील के बाद उग्र हुई भीड़

गुरुवार की रात प्रदर्शन और उग्र हो गए, जब ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की। रेजा पहलवी की अपील के बाद बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर उतरे। इसी बीच ईरानी सरकार ने सड़कें खाली कराने के लिए सुरक्षाबलों को उतार दिया है।

50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

सबसे खास बात ये है कि प्रदर्शनों के दौरान रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि अब तक यहां शाह के समर्थन में नारेबाजी करने पर मौत की सजा मिलती थी। बताया जा रहा है कि ईरान के कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर निकलकर ईरानी शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों पर 45 प्रदर्शनकारियों की हत्या का आरोप

ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होने के बाद से देश में सुरक्षाबलों ने 45 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार का दिन अब तक का सबसे बड़ा जानलेवा दिन रहा, जिसमें 13 प्रदर्शनकारी मारे गए। वहीं, सैकड़ों लोग घायल हुए। इसके अलावा, 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान की अर्थव्यवस्था संकट में

रअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। महंगाई से आवाम त्रस्त है। रियाल मुद्रा का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया। 28 दिसंबर 2025 को ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। ये विरोध प्रदर्शन पहले तेहरान बाजार की हड़ताल से चले, मगर जल्दी ही पूरे देश में फैल गए। सरकारी डेटा में 21 मौतें हुई हैं, मगर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसी ने 45 लोगों के मरने का दावा किया है। खामेनेई सरकार ने इसे विदेशी साजिश बता रही है, जबकि प्रदर्शनकारी महंगाई, भ्रष्टाचार और दमन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में IPAC कार्यालय पर ईडी का छापा, रेड वाली जगह पहुंचीं ममता बनर्जी

#edraidinwestbengalkolkataipacprateekjainofficemamatabanerjeevisit

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयला घोटाले को लेकर कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म I-PAC के दफ्तर में छापेमारी की। I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर भी छापेमारी की गई है। रेड के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी छापे की जगह पर पहुंच गईं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी को लेकर नाराजगी जताई।

ममता बोलीं- मैं भी भाजपा के कार्यालय में छापा मारूं तो

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गृह मंत्री अमित शाह और ईडी पर उनकी पार्टी के कागजात और डेटा शीट पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। बंगाल की सीएम ने कहा कि अगर मैं भी बीजेपी की पार्टी ऑफिस में रेड मारूं तो क्या होगा?

छापेमारी बदले की भावना से प्रेरित-ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारी आईपीएसी प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी अभियान के दौरान टीएमसी की हार्ड डिस्क, आंतरिक दस्तावेज और संवेदनशील संगठनात्मक डेटा जब्त करने का कोशिश कर रहे थे। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी के आईटी प्रमुख के घर पर ईडी की छापेमारी राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित और असंवैधानिक है, यह गृह मंत्री का सबसे घिनौना काम है।

अमित शाह कहा- नॉटी और नेस्टी गृह मंत्री

ममता बनर्जी ने कहा कि क्या पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची इकट्ठा करना ईडी और अमित शाह का काम है? उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री शाह को बुरा बताते हुए कहा, "ये नॉटी और नेस्टी गृह मंत्री, जो देश की रक्षा नहीं कर सकते, मेरी पार्टी के सारे दस्तावेज ले जा रहे हैं। अगर मैं भाजपा के पार्टी कार्यालय पर छापा मारूं तो क्या होगा?"

नाबालिग शूटर से यौन शोषण, नेशनल कोच अंकुश भारद्वाज सस्पेंड, NRAI ने किया निलंबित

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नेशनल पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज पर 17 साल की नेशनल लेवल की महिला निशानेबाज खिलाड़ी के साथ यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगा है। इस खबर के सामने आते ही नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने एक नाबालिग खिलाड़ी के साथ कथित यौन दुराचार के गंभीर आरोपों के बाद नेशनल शूटिंग कोच अंकुश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद के एक होटल में 17 साल की नेशनल लेवल की महिला शूटर के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के आरोप में नेशनल शूटिंग कोच अंकुश भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अंकुश भारद्वाज पर पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई एथलीट के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई एक विस्तृत शिकायत के बाद की गई।

एफआईआर में क्या

एफआईआर के अनुसार, यह घटना नई दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में एक नेशनल लेवल की शूटिंग प्रतियोगिता के दौरान हुई। शिकायत में कहा गया है कि भारद्वाज ने कथित तौर पर फरीदाबाद के एक होटल के कमरे में शूटर के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बहाने उसके साथ दुर्व्यवहार किया। परिवार ने यह भी दावा किया कि एक और युवा शूटर के साथ भी समान व्यवहार हुआ था, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

कोच पर खिलाड़ी को धमकी देने का भी आरोप

एफआईआर में कहा गया है कि शुरुआत में खिलाड़ी को होटल की लॉबी में कोच से मिलने के लिए कहा गया था, लेकिन बाद में प्रदर्शन मूल्यांकन के बहाने उस पर कमरे में जाने का दबाव बनाया गया। कोच ने घटना के बारे में किसी को बताने पर उसका करियर बर्बाद करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। बताया गया कि खिलाड़ी सदमे की हालत में होटल से निकली और बाद में पूरी घटना अपने परिवार को बताई।

शो-कॉज नोटिस भी किया जाएगा जारी

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ सचिव राजीव भाटिया ने कहा, 'हमने उन्हें निलंबित कर दिया है और हम शो-कॉज नोटिस जारी करेंगे। उन्हें नैतिक आधार पर सस्पेंड किया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, वे किसी कोचिंग गतिविधि से जुड़े नहीं रहेंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ की सिफारिश पर भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने उन्हें राष्ट्रीय कोच बनाया था।