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आज का इतिहास:2003 से आज ही के दिन से दुनिया भर में हुई थी विश्व क्षय रोग दिवस मनाने की शुरुआत

नयी दिल्ली : 24 मार्च का इतिहास महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि 2003 से आज ही के दिन क्षयरोग की रोकथाम के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने और इसके नियंत्रण के प्रयासों को जारी रखने के लिए दुनिया भर में विश्व क्षय रोग दिवस मनाया गया था। 

2007 में 14 मार्च के दिन ही ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन ने विश्व कप का सबसे तेज शतक बनाया था।

2008 में आज ही के दिन भूटान लोकतांत्रिक देश बना था।

2008 में आज ही के दिन भूटान लोकतांत्रिक देश बना था।

2007 में 24 मार्च के दिन ही ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन ने विश्व कप का सबसे तेज शतक बनाया था।

2003 में आज ही के दिन से क्षयरोग की रोकथाम के लिए दुनिया भर में विश्व क्षय रोग दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी।

1990 में 24 मार्च के दिन ही भारतीय सेना ने श्रीलंका छोड़कर स्वदेश वापसी की थी।

1977 में आज ही के दिन मोरारजी देसाई भारत के चौथे प्रधानमंत्री बने और उन्होंने केंद्र में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई थी।

1959 में 24 मार्च के दिन ही इराक ने बगदाद समझौते से खुद को अलग कर लिया था।

1932 में आज ही के दिन अमेरिका में पहली बार चलती ट्रेन से रेडियो प्रसारण किया गया था।

1883 में 24 मार्च के दिन ही शिकागो और न्यूयार्क के बीच पहली बार फोन से बातचीत हुई थी।

1855 में आज ही के दिन ब्रिटिश कैबिनेट मिशन भारत पहुंचा था।

1855 में 24 मार्च के दिन ही कोलकाता से आगरा के बीच पहली बार टेलीग्राफ से लंबी दूरी का संदेश प्रेषित किया गया था।

24 मार्च को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति

1984 में आज ही के दिन भारतीय हॉकी खिलाड़ी एड्रियन डिसूजा का जन्म हुआ था।

1976 में 24 मार्च के दिन ही अमेरिकी फुटबॉल प्लेयर पेयटन मैनिंग का जन्म हुआ था।

1892 में आज ही के दिन भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा राष्ट्रसेवी हरिभाऊ उपाध्याय का जन्म हुआ था।

1863 में 24 मार्च के दिन ही प्रसिद्ध भारतीय राजनेता और अधिवक्ता सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा का जन्म हुआ था।

1775 में आज ही के दिन संगीतकार और कवि मुथुस्वामी दीक्षित का जन्म हुआ था।

24 मार्च को हुए निधन

1603 में आज ही के दिन इंग्लैंड की महारानी महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम निधन हुआ था।

24 मार्च के दिन उत्सव

विश्व टीबी दिवस।

आज है वर्ल्ड टीबी डे:इलाज मुफ्त, फिर भी भारत में हर 3 मिनट में टीबी से दो मौतें,जानिए टीबी के लक्षण,बचाव और इलाज के बारे में


नयी दिल्ली : आज दुनियाभर में वर्ल्ड ट्यूबरकुलोसिस डे यानी विश्व क्षयरोग दिवस मनाया जा रहा है। भारत दुनिया में सबसे अधिक ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) प्रभावित देशों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, भारत में हर तीन मिनट में दो लोगों की मौत टीबी के कारण होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक लक्ष्य (2030) से पांच साल पहले का है। इसे लेकर भारत सरकार द्वारा कई अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि उचित देखभाल और समय पर इलाज के साथ, टीबी के खिलाफ लड़ाई जीती जा सकती है।

WHO की 'ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2024' के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच भारत में टीबी मामलों में 17.7% की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत 8.3% की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। जानते है कि टीबी क्या है? इसके लक्षण क्या है? और बचाव के बारे में....

टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) क्या है?

आज भी ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) विश्व के सबसे संक्रामक रोगों में से एक है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार, रोजाना लगभग 3,500 लोगों की मौत टीबी के कारण होती है और लगभग 3,000 लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है, जो विश्वभर में दूसरा मौत का सबसे बड़ा कारण है। यह व्यावहारिक रूप से शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है, जिसमें सबसे सामान्य फेफड़े, आँतों, लिम्फ नोड्स, रीढ़ और मस्तिष्क इत्यादि हैं। 

टीबी रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के माध्यम से फैल सकता है। यह बैक्टीरिया टीबी से ग्रसित व्यक्ति से फैलते हैं। इस बैक्टीरिया का विकास धीमी गती से शरीर के उन भागों में होता है, जहां खून और ऑक्सीजन दोनों मौजूद होते हैं। इसलिए यह ज्यादातर फेफड़ों में पाया जाता है। टीबी को उपचार के द्वारा ठीक किया जा सकता है, जिसकी अवधी 6 से 9 महिने होती है और कुछ स्थितियों में इसे ठीक होने में 2 साल भी लग सकते हैं।

टीबी(क्षय रोग) के लक्षण क्या है?

टीबी आपके शरीर के जिस हिस्से को प्रभावित करती है, उसी के अनुसार लक्षण बढ़ते हैं। टीबी के सामान्य लक्षण निम्नलिखित है:-

लगातार खांसी होना, जो 3 या ज्यादा सप्ताह तक बनी रहती है। 

वजन घटना

खांसी के साथ बलगम में खून 

सीने में दर्द होना

बुखार आना

मांसपेशियों को नुकसान पहुंचना

भूख में कमी

रात में पसीना होना

थकान और कमजोरी महसूस होना

टीबी के कारण क्या है?

टीबी या क्षय रोग या तपेदिक रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के कारण होता है। ट्यूबरक्लोसिस के बैक्टीरिया का प्रसार हवा माध्यम से होता हैं। जब कोई व्यक्ति हवा में सांस लेता है तो वह मौजूद बैक्टीरिया को अपने अंदर खींच सकता है। टीबी किसी भी टीबी ग्रसित व्यक्ति के छींकनें, खांसने, बोलने, इत्यादि से फैल सकता है। टीबी बढ़ने के कई जोखिम कारक हैं, जिसमें अनहेल्दी डाइट, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, किडनी रोग वाले व्यक्ति, इत्यादि। 

टीबी उपचार क्या है?

क्या आप जानते हैं, टीबी का इलाज कैसे किया जाता है? टीबी का इलाज करने के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं के द्वारा बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और इसका इलाज करते हैं। यह एंटीबायोटिक दवाएं टीबी के सभी मरीजों के लिए होती हैं, जिसमें गर्भवती महिलाएं, बच्चे, शिशु और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग शामिल हैं। टीबी का इलाज करने के लिए दवाओं का एक कोर्स होता हैं, जिसे पूरा करना बहुत जरूरी होता है। यदि आप एक्टिव टीबी रोग के लक्षण को खुद महसूस करें तो तत्काल अपने पल्मोनोलॉजी डॉक्टर से परामर्श करें और उपचार कराएं। इसके इलाज की अवधी 6 महिने से लेकर 2 साल तक भी हो सकती है।

बंगलूरू में भारी बारिश से तबाही, 30 पेड़ गिरे और तीन साल की बच्ची की मौत


बेंगलुरू: बारिश ने बंगलूरू के लोगों को गर्मी से राहत दी, लेकिन शनिवार शाम को शहर के कई हिस्सों में जलभराव और यातायात जाम की समस्या भी पैदा हो गई। इस वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, बंगलूरू शहर में सुबह 8.30 बजे से शाम 8.30 बजे तक गरज के साथ 3.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।

बंगलूरू में बारिश

कर्नाटक में मौसम की मार जारी है। यहां बंगलूरू में भारी बारिश ने तबाही मचा रखी है। इस बीच एक पेड़ गिरने से तीन साल की बच्ची की मौत हो गई। सिविल डिफेंस, कर्नाटक की ओर से जारी बयान में बताया गया कि शहर में करीब 30 पेड़ गिर गए हैं और कई जगहों पर जलभराव की खबर है।

गर्मी से मिली राहत, अब संकट के बादल

बारिश ने बंगलूरू के लोगों को गर्मी से राहत दी, लेकिन शनिवार शाम को शहर के कई हिस्सों में जलभराव और यातायात जाम की समस्या भी पैदा हो गई। इस वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, बंगलूरू शहर में सुबह 8.30 बजे से शाम 8.30 बजे तक गरज के साथ 3.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।

कुछ इलाकों में पेड़ और टहनियां गिरने की घटनाएं

तेज हवा के साथ हुई बारिश के कारण कुछ इलाकों में पेड़ और टहनियां गिरने की घटनाएं सामने आईं। इससे शहर के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई, जबकि बंगलूरू ग्रामीण जिले के होसाकोटे जैसे स्थानों पर ओलावृष्टि की भी खबर मिली। अधिकारियों ने बताया कि पुलकेशीनगर में पेड़ गिरने से कथित तौर पर तीन साल की बच्ची की मौत हो गई।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस आज! जानिए इस दिवस का इतिहास, महत्व और थीम

हर साल 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में मौसम, जलवायु और वातावरण के महत्व को उजागर करने के लिए समर्पित है। इस खास मौके पर मौसम विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति और पर्यावरण संरक्षण की जरूरतों पर चर्चा की जाती है। आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास, महत्व और 2025 की थीम।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस का इतिहास

विश्व मौसम विज्ञान दिवस की शुरुआत 1950 में हुई, जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की स्थापना हुई थी। यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की एक अहम एजेंसी है, जो वैश्विक स्तर पर मौसम, जलवायु और जल संसाधनों पर नजर रखता है।

WMO का मुख्य उद्देश्य देशों के बीच मौसम से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान करना और मौसम आपदाओं से निपटने में सहयोग बढ़ाना है। 1961 से हर साल 23 मार्च को इस दिवस को आधिकारिक रूप से मनाया जाने लगा।

इस दिन का महत्व

मौसम और जलवायु पर जागरूकता:

विश्व मौसम विज्ञान दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में जागरूक करना है।

आपदा प्रबंधन में मदद:

सटीक मौसम पूर्वानुमान बाढ़, चक्रवात, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में मदद करता है। इससे जान-माल की हानि को कम किया जा सकता है।

कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव:

मौसम का सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ता है। सही मौसम जानकारी से किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलती है।

पर्यावरण संरक्षण:

मौसम विज्ञान हमें वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र स्तर में बढ़ोतरी जैसी समस्याओं को समझने में मदद करता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के लिए सही कदम उठाए जा सकते हैं।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2025 की थीम

हर साल WMO एक नई थीम जारी करता है, जो जलवायु और मौसम से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित होती है। 2025 की थीम अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन पिछले सालों की थीम को देखते हुए यह पर्यावरणीय बदलावों, आपदा प्रबंधन या जलवायु संरक्षण पर आधारित हो सकती है।

2024 की थीम थी "पृथ्वी की जलवायु का भविष्य (The Future of Weather, Climate, and Water across Generations)", जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जलवायु संरक्षण पर केंद्रित थी।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस हमें याद दिलाता है कि मौसम और जलवायु का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव है। बदलते मौसम के साथ हम सभी को सतर्क और जागरूक रहना जरूरी है। इस दिन का उद्देश्य न सिर्फ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों तक सीमित है, बल्कि आम नागरिकों को भी पर्यावरण संरक्षण और मौसम से जुड़ी जानकारी का महत्व समझाने का है।

इंसान कितनी हद तक सह सकता है तनाव? जानिए इससे बचने के आसान उपाय!

हर इंसान का तनाव सहने की क्षमता अलग होती है। यह उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति, जीवन के अनुभव, और सहारा देने वाले लोगों पर निर्भर करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब हमारा दिमाग किसी स्थिति को "खतरा" मानता है, तो शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो हमें "लड़ो या भागो" मोड में डालते हैं।

हालांकि, अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे, तो यह दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2. लंबे समय तक तनाव के नुकसान

अगर तनाव का सही समय पर समाधान न किया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जैसे:

हाई ब्लड प्रेशर

डायबिटीज

डिप्रेशन और एंग्जायटी

हार्ट डिजीज

इम्यून सिस्टम कमजोर होना

3. तनाव से बचने के आसान और कारगर तरीके

✅ 1. समय प्रबंधन (Time Management)

कामों को प्राथमिकता दें और अनावश्यक चीजों से बचें।

एक ही समय में बहुत सारे काम करने से बचें।

✅ 2. मेडिटेशन और योग

रोज़ाना 10-15 मिनट मेडिटेशन करने से मन शांत रहता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ती है।

योग से शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है।

✅ 3. शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise)

रोज़ाना टहलना, दौड़ना, या जिम जाना तनाव को कम करने में मदद करता है। 

व्यायाम से "एंडॉर्फिन" हार्मोन रिलीज होता है, जो आपको खुश महसूस कराता है।

✅ 4. अच्छी नींद (Quality Sleep)

रोज़ 7-8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है।

स्क्रीन टाइम कम करें और सोने से पहले रिलैक्सिंग म्यूजिक सुनें या किताब पढ़ें।

✅ 5. अपनों से बात करें

जब भी तनाव महसूस हो, अपने परिवार या दोस्तों से खुलकर बात करें।

मन में बातें दबाने से तनाव और बढ़ सकता है।

✅ 6. खुद के लिए समय निकालें

अपनी पसंद का काम करें — संगीत सुनें, पेंटिंग करें, या घूमने जाएं।

अपनी खुशी को प्राथमिकता देना भी बेहद जरूरी है।

तनाव जीवन का हिस्सा है, लेकिन इसे सही तरीके से संभालना जरूरी है। अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना कि अपनी जिम्मेदारियों को निभाना।

न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी, मुंबई में सुरक्षित उतारा गया


नई दिल्लीः- मुंबई से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट को सोमवार को बम से उड़ाने की धमकी दी गयी. इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल विमान को मुंबई वापस लौटने का निर्देश दिया. 320 से अधिक लोगों को लेकर जा रहा यह विमान सुरक्षित रूप से मुम्बई में उतार लिया गया. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसकी अनिवार्य जांच की जा रही है. इस दौरान एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मची थी.

क्या कहा एयर इंडिया के अधिकारीः 

एयर इंडिया ने एक बयान में कहा, "आज 10 मार्च 2025 को मुंबई-न्यूयॉर्क (जेएफके) उड़ान भरने वाली एआई 119 में उड़ान के दौरान एक संभावित सुरक्षा खतरे का पता चला. आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद, विमान में सवार सभी लोगों की सुरक्षा के हित में विमान को वापस मुंबई ले जाया गया."

अब विमान फिर कब उड़ान भरेगाः

एयरलाइन के अनुसार, भारतीय समय के अनुसार विमान सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर मुम्बई में सुरक्षित उतरा. विमान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अनिवार्य जांच की जा रही है. एयर इंडिया अधिकारियों को अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं. उड़ान का समय बदल दिया गया है. अब विमान 11 मार्च की सुबह 5 बजे उड़ान भरेगा.

यात्रियों के लिए क्या व्यवस्था की गयीः

एयरलाइन ने कहा कि सभी यात्रियों को तब तक होटल में आवास, भोजन और अन्य सहायता की पेशकश की गई है. बोइंग 777-300 ईआर विमान में 19 चालक दल के सदस्यों सहित 322 लोग सवार थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विमान में बम होने की धमकी मिली थी. विमान के एक शौचालय में एक नोट मिला.

एलन मस्क ने अपने 14वें बच्चे का स्वागत किया, बेटे का नाम सेल्डन लाइकर्गस रखा गया


नयी दिल्ली : टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर अपने '14वें' बच्चे का स्वागत किया है. उनकी पत्नी शिवोन जिलिस ने अपने चौथे बच्चे के नाम का बताया है. उन्होंने अपने तीसरे बेटे आर्केडिया के जन्मदिन पर दुनिया के सामने चौथे बच्चे के नाम का खुलासा किया.पिता एलन मस्क ने पत्नी की पोस्ट पर दिल वाली इमोजी भेजकर रिप्लाई किया.

दरअसल, एलन मस्क और शिवोन जिलिस के चार बच्चे हैं. उन्होंने अभी तक अपने तीसरे और चौथे बच्चे की पहचान छिपाकर रखी थी. अब दोनों ने तीसरे बच्चे के जन्मदिन पर दुनिया के सामने तीसरे और चौथे बच्चों के नाम बताने का फैसला किया है.

न्यूरालिंक की एग्जीक्यूटिव और एलन मस्क की पार्टनर शिवोन जिलिस ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे के नाम की पुष्टि की है. सेल्डन उनका चौथा बच्चा है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'एलन के साथ बात की, और खूबसूरत आर्केडिया के जन्मदिन पर हमें लगा कि हमारे अद्भुत और अविश्वसनीय बेटे, सेल्डन लाइकर्गस के बारे में सीधे बताना बेहतर होगा. वो एक ताकतवर तूफान की तरह मजबूत है, लेकिन दिल सोने सा निर्मल है. उससे बहुत प्यार है." रिपोर्टों के अनुसार, कपल ने 2024 की शुरुआत में अपने तीसरे बच्चे अर्काडिया का स्वागत किया.

दिल्ली एयरपोर्ट पर भी मिलेगी ₹10 में चाय और ₹20 में समोसा, जल्द शुरू होगी यात्री कैफे की सुविधा

नयी दिल्ली : एयरपोर्ट्स पर खाने-पीने की चीजों की कीमत बहुत ज्यादा है और इस कारण अधिकांश यात्री इन्हें खरीद नहीं पाते हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। कोलकाता के बाद अब चेन्नई में भी उड़ान यात्री कैफे की शुरुआत हो चुकी है। इसमे 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में समोसा मिल रहा है।

कोलकाता के बाद चेन्नई में भी शुरू हुआ यात्री कैफे

₹10 में चाय और पानी तथा ₹20 में मिलेगा समोसा

इसके बाद दिल्ली-मुंबई में भी हो सकती है शुरुआत.

कोलकाता के बाद अब चेन्नई एयरपोर्ट पर भी उड़ान यात्री कैफे खोला गया है।

एयरपोर्ट पर चाय और समोसे का रेट देखकर ज्यादातर यात्री दूर से देखकर रह जाते हैं। लेकिन सरकार के प्रयास से अब आम आदमी भी एयरपोर्ट पर चाय और समोसे का मजा ले सकते हैं। एयरपोर्ट पर अब 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में समोसा मिलना शुरु हुआ हो गया है। 

यात्री कैफे की शुरुआत 19 दिसंबर को कोलकाता एयरपोर्ट से हुई थी और अब चेन्नई में भी यह कैफे खुल गया है। माना जा रहा है कि कोलकाता और चेन्नई के बाद अब दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स का भी नंबर आ सकता है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि यह कैफे चेन्नई एयरपोर्ट के डोमेस्टिक टर्मिनल-1 पर चेक-इन से पहले एरिया में खोला गया है। यहां 10 रुपये में चाय, 10 रुपये में पानी की बोतल और 20 रुपये में समोसा, कॉफी और मिठाई खरीदी जा सकती है। 

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार को चेन्‍नई एयरपोर्ट पर उड़ान यात्री कैफे का उद्घाटन किया। पहला उड़ान यात्री कैफे 19 दिसंबर को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया गया था।

हिट हो गया '10 रुपये की चाय' का फॉर्मूला, इस एयरपोर्ट पर बने कैफे में लग रही ग्राहकों की भीड़, कहां है यह?

कहां खुला था पहला यात्री कैफे

एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कोलकाता एयरपोर्ट की 100वीं वर्षगांठ पर यात्रियों को देश के पहले उड़ान यात्री कैफे का गिफ्ट दिया था।

 कोलकाता एयरपोर्ट के डिपार्चर एरिया में यात्री उड़ान कैफे खोला गया है। इसमें चाय, कॉफी, स्नैक्स और पानी जैसी चीजें सस्ती कीमत पर बेची जा रही है। 

इस योजना का मकसद हवाई यात्रा को अधिक किफायती बनाना है, क्योंकि भारत में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। कोलकाता एयरपोर्ट पर देश के पहले उड़ान यात्री कैफे को मिली सफलता के बाद अब देश के दूसरे हवाई अड्डों पर भी उड़ान यात्री कैफे खोले जा सकते हैं।

पिछले साल सितंबर में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने एयरपोर्ट्स में सामान की महंगाई पर चिंता जताई थी। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'कोलकाता हवाई अड्डे पर गर्म पानी और टी बैग से बनी चाय की कीमत 340 रुपये है। कुछ साल पहले चेन्नई हवाई अड्डे पर गर्म पानी और टी बैग की कीमत 80 रुपये है।' 

दिल्ली एयरपोर्ट पर पानी की बोतल की कीमत 50 रुपये है जबकि समोसा 150 रुपये में मिलता है। इसी तरह डोसे की कीमत 300 रुपये और पाव भाजी की कीमत 250 रुपये है।

डिप्रेशन और एंग्जायटी को एक न समझें,जानिए क्या हैं इनमें अंतर


डिप्रेशन (अवसाद) और एंग्जायटी (चिंता) दो मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो अक्सर एक साथ देखी जाती हैं। लेकिन दोनों में महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। कई लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो सकती है। इस लेख में हम डॉक्टरों की राय के आधार पर इन दोनों मानसिक स्थितियों के बीच अंतर को समझने की कोशिश करेंगे।

1. डिप्रेशन और एंग्जायटी: क्या हैं ये मानसिक स्थितियां?

डिप्रेशन (अवसाद) क्या है?

डिप्रेशन एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदासी, निराशा और रुचिहीनता महसूस करता है। यह सिर्फ कुछ दिनों की उदासी नहीं होती, बल्कि हफ्तों, महीनों या सालों तक बनी रह सकती है।

लक्षण:

हर समय उदासी या खालीपन का अनुभव

आत्मग्लानि और निराशा

किसी भी चीज़ में रुचि न होना

ऊर्जा की कमी और थकान

नींद की समस्या या ज्यादा सोना

आत्महत्या के विचार आना

एंग्जायटी (चिंता) क्या है?

एंग्जायटी एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक चिंता और भय महसूस करता है। यह चिंता सामान्य नहीं होती, बल्कि हद से ज्यादा होती है और व्यक्ति को सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होने लगती है।

लक्षण:

हर समय घबराहट और बेचैनी

बिना कारण डर और घबराहट महसूस करना

हृदय की धड़कन तेज होना

अत्यधिक पसीना आना

नींद न आना या बार-बार डर के साथ जागना

मांसपेशियों में तनाव और कंपकंपी

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में 3 अंतर जान लें

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में 3 बड़े अंतर होते हैं। 

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में पहला अंतर

एंग्जाइटी में इंसान बहुत ज्यादा ओवरथिंकिग करता है। ऐसे इंसान लगातार सोचते रहते हैं। हर छोटी-बड़ी चीज के बारे में उनके मन में थॉट प्रोसेस होता रहता है।

जबकि जिस इंसान को डिप्रेशन होता है ऐसे इंसान के मन में किसी तरह के विचार नहीं आते। ऐसे इंसान का दिमाग पूरी तरह से खाली हो जाता है वो सोचता ही नही हैं।

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में दूसरा अंतर

एंग्जाइटी जिस इंसान को होती है ऐसे इंसान नॉर्मली बिल्कुल ठीक दिखते हैं। लेकिन जैसे ही कोई अनएक्सपेक्टेड चीज होती है या फिर कुछ घटना हो गई तो ऐसे लोग काफी घबरा जाते हैं और पैनिक हो जाते हैं।

डिप्रेशन वाले इंसान को बाहर की दुनिया में हो रहे अच्छे-बुरे किसी भी घटना से कोई फर्क नहीं पड़ता। वो हमेशा उदास और दुखी ही महसूस करता है। चाहे खुशी की सिचुएशन ही क्यों ना हो।

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में तीसरा अंतर

एंग्जाइटी जिस भी इंसान को होती है वो खुद को काफी इंपार्टेंट समझता है। उसे लगता है कि वो ही हर किसी का सेंटर है। उसके बगैर घर, परिवार, ऑफिस में कोई भी काम नहीं हो पाएगा। उसे अपने परिवार की हमेशा चिंता रहती है कि वो नहीं होगा तो उसके परिवार का क्या होगा। ऐसे इंसान खुद को हमेशा सेफ रखना चाहते हैं। इसलिए वो ठीक रहना चाहते हैं।

जबकि जिस इंसान को डिप्रेशन होता है वो खुद को यूजलेस समझता है। उसे लगता है कि वो किसी काम का नही है और वो ठीक नहीं होना चाहता। डिप्रेशन वाले इंसान को ठीक करने का मोटिवेशन देना भी जरूरी होता है।

एंग्जाइटी और डिप्रेशन के इन लक्षणों से दोनों में अंतर को अच्छी तरह से समझा जा सकता है।

क्या डिप्रेशन और एंग्जायटी एक साथ हो सकते हैं?

हाँ, कई लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी एक साथ देखी जाती हैं। एक स्थिति दूसरी को बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से डिप्रेशन में है, तो वह अपने भविष्य को लेकर चिंता करने लगेगा, जिससे एंग्जायटी बढ़ सकती है।

इलाज और समाधान

डिप्रेशन और एंग्जायटी दोनों का इलाज संभव है। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेने पर इनका प्रभावी इलाज किया जा सकता है।

चिकित्सकीय इलाज:

मनोचिकित्सक से सलाह लें – डॉक्टर सही दवाएं और थेरेपी सुझा सकते हैं।

साइकोथेरेपी (CBT) – यह एक थेरेपी है जो नकारात्मक सोच को बदलने में मदद करती है।

मेडिटेशन और एक्सरसाइज – योग और व्यायाम तनाव को कम करने में सहायक होते हैं।

अच्छी दिनचर्या अपनाएं – सोने और खाने का समय तय करें, इससे मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है।

डिप्रेशन और एंग्जायटी को एक जैसा समझने की गलती न करें। दोनों अलग-अलग मानसिक स्थितियां हैं, जिनका सही समय पर इलाज करवाना जरूरी है। यदि आप या आपके किसी करीबी को इस तरह की समस्या हो रही है, तो जल्द से जल्द मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। सही इलाज और देखभाल से व्यक्ति एक खुशहाल जीवन जी सकता है।

दिल्ली भगदड़ मामला: आरपीएफ रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, अव्यवस्था और गलत घोषणाएं बनी हादसे की वजह


नई दिल्ली: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 फरवरी की रात हुई भगदड़ की जांच रिपोर्ट रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सबमिट कर दी है. आरपीएफ ने इस रिपोर्ट में हादसे के पीछे के कई कारणों का खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे स्टेशन पर भीड़ व प्रबंधन में गंभीर चूक हुई. वहीं, ट्रेन के प्लेटफार्म बदलने की घोषणाओं ने यात्रियों में भ्रम और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ.

प्लेटफार्म बदलने की घोषणा से मची अफरा-तफरी:

आरपीएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि रात 8:45 बजे तक स्टेशन पर पहले से ही भीड़ नियंत्रण की समस्या थी. इसी दौरान अनाउंसमेंट हुई कि प्रयागराज स्पेशल ट्रेन प्लेटफार्म 12 से रवाना होगी. इस घोषणा के तीन मिनट बाद ही दूसरा अनाउंसमेंट कर दिया गया कि ट्रेन अब प्लेटफार्म नंबर 16 से रवाना होगी. इससे घबराए यात्री जल्दी से प्लेटफार्म बदलने के लिए सीढ़ियों की ओर भागे, जिससे फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) नंबर 2 और 3 पर यात्रियों की भीड़ का दबाव बढ़ गया और भगदड़ मच गई.

भारी भीड़ और अव्यवस्था: 

आरपीएफ रिपोर्ट के मुताबिक रात 8 बजे शिवगंगा एक्सप्रेस के प्लेटफार्म 12 से रवाना होने के बाद स्टेशन पर बहुत ज्यादा भीड़ हो गई थी. इसके चलते प्लेटफार्म नंबर 12, 13, 14, 15 और 16 तक जाने वाले रास्ते जाम हो गए थे. पहले से ही इन प्लेटफार्मों पर यात्रियों की भारी भीड़ थी. दरअसल, मगध एक्सप्रेस (प्लेटफार्म 14), उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (प्लेटफार्म 15) और प्रयागराज एक्सप्रेस के यात्री भी वहीं खड़े थे.

लचर प्रबंधन व्यवस्था:

आरपीएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब भीड़ बढ़ने लगी, तो स्टेशन डायरेक्टर को सुझाव दिया गया कि प्रयागराज स्पेशल ट्रेन को जल्दी रवाना किया जाए और टिकट बिक्री बंद कर दी जाए, लेकिन टिकट बिक्री देर से रोकी गई, जिससे यात्रियों की भीड़ और बढ़ गई. 

भगदड़ रात 8:48 बजे हुई. दिल्ली फायर डिपार्टमेंट को दिल्ली पुलिस से रात 9:55 बजे सूचना मिली, यानी लगभग 40 मिनट की देरी हुई. रेलवे ने अपने आधिकारिक बयान में घटना का समय 9:15 बजे बताया, जिससे इस देरी पर सवाल उठ रहे हैं.

सीसीटीवी फुटेज आया सामने:

आरपीएफ की रिपोर्ट के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि जैसे ही प्लेटफार्म बदलने की घोषणा हुई, यात्री घबराकर भागने लगे. इस दौरान एफओबी-2 और एफओबी-3 पर यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई. इसी बीच, दूसरी ट्रेनों के यात्री सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे. जब दोनों तरफ से यात्री एक-दूसरे से टकराए, जिससे धक्का-मुक्की हुई, कुछ यात्री फिसलकर गिर पड़े और भगदड़ मच गई.

रेलवे की लापरवाही पर उठ रहे सवाल:

आरपीएफ की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. अगर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले से उचित इंतजाम किए जाते और ट्रेन के प्लेटफार्म बदलने की घोषणा सोच-समझकर की जाती तो ये हादसा टल सकता था. वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस घटना के बाद 60 रेलवे स्टेशनों पर स्थायी और अस्थायी यात्री होल्डिंग क्षेत्र बनाने का ऐलान किया है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.

आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी पर सवाल:

रेलवे बोर्ड ने इस हादसे की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर केंद्र और राज्य सरकारों से विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है. यह समिति भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देगी. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुआ यह हादसा रेलवे के भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की उसकी तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।