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रायपुर की थोक सब्जी मंडी में चला निगम का बुलडोजर…

रायपुर- नगर निगम रायपुर जोन 8 ने अवैध रूप से निर्मित 6 व्यवसायिक दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई की. यह कार्रवाई नगर निगम आयुक्त विश्वजीत के निर्देश पर जोन कमिश्नर के मार्गदर्शन में की गई.

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, रायपुरा स्थित शास्त्री बाजार सब्ज़ी एवं फल मंडी थोक व्यापारी कल्याण सोसायटी द्वारा इन दुकानों का निर्माण किया गया था. अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए संबंधित व्यक्ति ने जोन कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे छत्तीसगढ़ नियमितीकरण प्राधिकरण समिति की बैठक में रखा गया. हालांकि, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक ने 19 जुलाई 2022 की अधिसूचित तिथि के बाद निर्माण होने के कारण इस आवेदन को निरस्त कर दिया था. इसके बाद, नगर निगम जोन 8 ने निर्माणकर्ताओं को 1, 2 और 3 क्रमांक की नोटिस जारी की. सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम सूचना दी गई, जिसके पश्चात शुक्रवार को अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया.

शहर के क्षेत्रों में भी हुई कार्रवाई

इसके अलावा, नगर निगम जोन 8 के नगर निवेश विभाग ने अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई की. कोटा रोड पर सी एंड डी वेस्ट (निर्माण और ध्वस्त सामग्री) फैलाने पर ₹1000 का जुर्माना लगाया गया, वहीं रायपुरा में इसी कारण ₹2000 का जुर्माना वसूला गया.

यहां भी चला बुलडोजर

जोन क्रमांक 5 के तहत कुशालपुर पहाड़ी तालाब के पास अवैध रूप से निर्मित भवन को तोड़ने की कार्रवाई की गई. साथ ही कुशालपुर चौक रिंग रोड से भाठागांव जाने वाले मार्ग पर भी अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाई गई. इस दौरान 16 अवैध शेड, 12 पाटा और चबूतरे तोड़े गए, साथ ही 4 ठेले-गुमटियों को भी हटाया गया. अवैध निर्माण हटाने के साथ ही सड़क बाधा और गंदगी फैलाने के आरोप में 14 व्यापारियों पर जुर्माना लगाया गया. इस दौरान कुल 28,500 रुपये की राशि वसूल की गई.

पुलिस ने खोज निकाला नक्सलियों का गड़ा धन, 8 लाख नगद और हथियारों का जखीरा जब्त

गरियाबंद-  छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद मुक्त बनाने की राह में पुलिस ने आज एक और बड़ी सफलता हासिल की है. प्रदेश की गरियाबंद पुलिस ने नक्सलियों का छुपाया हुआ धन और हथियारों का जखीरा खोज निकाला है. एसपी निखिल रखचे के नेतृत्व में अब जंगलों में छुपे माओवादी और उनके धन, हथियार समेत सभी सोर्स का एक के बाद एक खात्मा हो रहा है. पुलिस ने आज मैनपुर थाना क्षेत्र से लगे पंडरी पानी से नक्सलियों का जमीन में छुपाया गया 8 लाख कैश और हथियारों समेत नक्सल साहित्य बरामद किया है. अब पुलिस नक्सलियों को कैश देने वाले सोर्स का भी पता लगाने में जुट गई है.

गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मैनपुर थाना क्षेत्र से लगे पंडरी पानी के पहाड़ी इलाके में धमतरी गरियाबंद नुआपड़ा डिविजन कमेटी के द्वारा उगाही का रकम छिपा कर रखा गया था. इसकी जानकारी मिलने पर SP के निर्देश पर जिला पुलिस, कोबरा बटालिया ,सीआरपीएफ की संयुक्त टीम बीडीएस की टीम के साथ सर्चिंग ऑपरेशन पर निकली. 20 मार्च की सुबह वे बताए गए जगह पर पहुंची और पेड़ के नीचे खुदाई कराई गई, जिसमें एक सफेद बोरी मिली. टीम ने सावधानी के साथ जांच किया, तो उसके अंदर से टिफिन डिब्बे में 8 लाख रुपए नगद और 13 नग जिलेटिन और नक्सली साहित्य समेत अन्य समाग्री बरामद हुआ.

बता दें, जनवरी 2025 के शुरुआत से ही गरियाबंद पुलिस को नक्सली मोर्चे में सफलता मिल रही है. जनवरी माह में 2 अलग अलग मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने सेंटर कमेटी सदस्य चलपती समेत 17 नक्सली मार गिराए. फरवरी में हथियारों को नष्ट किया गया. मार्च माह में तीन नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया. अब पुलिस गाड़े हुए धन तक पहुंच गई है. गरियाबंद जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सली गतिविधियों पर नकेल कसने में सफल हुई है.

20 गायों की मौत का मामला : विधायक रोहित साहू ने नगर पंचायत और पशु धन विभाग को ठहराया जिम्मेदार, जांच की मांग

गरियाबंद- कोपरा स्थित गौ शाला में 20 से अधिक गायों की मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही और संस्थाओं पर आरोपों का मामला अब विधानसभा तक पहुंच चुका है. राजिम के विधायक रोहित साहू ने 18 मार्च को विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे को उठाया और मामले की गहन जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि पशुधन विभाग की भारी लापरवाही के कारण शासन की छवि पर बुरा असर पड़ा है.

विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में रोहित साहू ने कहा कि कोपरा गौ शाला में गौ वंश की मौत के मामले में पशुधन विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है. उन्होंने सवाल उठाया कि बिना पंजीकरण के गौ शाला कैसे चल रही थी और विभागीय अधिकारियों को अव्यवस्थाओं का क्यों ध्यान नहीं गया. उन्होंने तत्काल जांच की मांग की और कहा कि इस मामले में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

नगरीय प्रशासन पर आरोप

उन्होंने इस घटना में नगर पंचायत को भी जिम्मेदार ठहराया गया है. संस्था ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत ने बूढ़े और बीमार गायों को गौ शाला भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि जिनके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज की गई थी, उन्हें गौ शाला संचालकों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया. लेकिन इसके बावजूद प्रशासन पर कार्रवाई के बजाय केवल एनजीओ संचालकों पर दबाव बनाया गया.

गायों की मौत से मची हलचल

कोपरा गौ शाला में हुई गायों की मौत की घटना के बाद प्रशासन में हलचल मच गई थी. इस मामले को विहिप और बजरंग दल ने भी उठाया था, जिसके बाद 9 मार्च को एसडीएम विशाल महाराणा के नेतृत्व में जांच शुरू की गई. मामले में पशुधन विभाग और एनजीओ संचालकों को नोटिस जारी किया गया. 10 मार्च को सीएमओ नगर पंचायत कोपरा के लिखित पत्र के आधार पर पाण्डुका पुलिस ने एनजीओ संचालकों मनोज साहू और हलधर गोस्वामी के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया. तीन दिन बाद दोनों को जमानत मिल गई.

संचालन में लापरवाही और अनुदान की कमी

मामले की जांच के दौरान यह सामने आया कि इस गौ शाला के संचालन के लिए कोई सरकारी अनुदान नहीं लिया गया था. गौ शाला के प्रमुख हलधर गोस्वामी और मनोज साहू ने बताया कि पहले कोपरा पंचायत के ग्रामीणों ने आवारा मवेशियों को रोकने के लिए शिवबाबा गौ शाला चलाने का फैसला लिया था, लेकिन देखभाल का अभाव होने के कारण एनजीओ शांति मैत्री ग्रामीण विकास संस्थान को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई. संस्था ने 10-12 लाख रुपये खर्च कर गौ शाला में शेड, पानी टैंक और अन्य सुविधाएं बनाई थीं, लेकिन इस पूरे मामले में संस्था और संचालकों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया.

नगर पंचायत पर आरोप: चारा नहीं पहुंचाया गया

एनजीओ संचालकों ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान गौ वंश के लिए चारा की व्यवस्था की गई थी. 76 ट्रॉली पैरा और 15 ट्रॉली कटिंग चारा भेजने की योजना बनी थी. इस पूरे कार्य के लिए रिकॉर्ड भी तैयार किया गया था. लेकिन नगर पंचायत के द्वारा आवारा गौ वंश को गौ शाला भेजा गया था, और चारा व उपचार की व्यवस्था का वादा किया गया था. इस वादे के बावजूद चारा और उपचार की कोई व्यवस्था नहीं की गई. बीमार और बूढ़े मवेशी मरते गए, लेकिन जिम्मेदारी से बचते हुए नगर पंचायत ने एनजीओ संचालकों को ही दोषी ठहरा दिया.

सीएमओ का बयान

कोपरा नगर पंचायत के सीएमओ श्याम लाल वर्मा ने इस बारे में सफाई देते हुए कहा कि बारिश के दौरान केवल 36 आवारा गौ वंश को गौ शाला में भेजा गया था और चारा का पर्याप्त बंदोबस्त भी किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि 2017 में एक समिति बनाई गई थी, जिसके तहत पैरा भेजने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कुछ ग्रामीणों ने चारा जला दिया, जिससे चारा संकट उत्पन्न हुआ.

छत्तीसगढ़ लोकतंत्र सेनानी विधेयक पारित : CM साय बोले – आपातकाल का दंश झेलने वाले सेनानियों का बढ़ेगा सम्मान, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बताया षड्यंत

रायपुर- विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ लोकतंत्र सेनानी विधेयक पारित हुआ. इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, इस विधेयक के पारित होने से आपातकाल का दंश झेलने वाले सेनानियों का सम्मान बढ़ेगा. इस विधेयक का उद्देश्य यह है कि कानून बनने के बाद सेनानियों के सम्मान में कटौती नहीं होगी. पूर्व की कांग्रेस सरकार में मीसा बंदियों का पेंशन बंद कर दिया गया. भाजपा की सरकार में इसे पुनः शुरू किया गया. 5 साल का पेंशन भी एकमुश्त दिया गया. वहीं लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक को पूर्व सीएम बघेल ने सरकार का षड्यंत्र बताया.

पूर्व सीएम बघेल ने कहा, सरकार ने षड्यंत्र कर विधेयक को पारित किया. सरकार का उद्देश्य अच्छा हो सकता है, बहुत से प्रावधान हैं. सरकार लोकतंत्र सेनानी सम्मान एक्ट बना रही है. सीएम ने अगर मध्यप्रदेश का उदाहरण दिया तो उसे पटल पर रख दें. सरकार ने कहा सामाजिक उत्थान के लिए यह एक्ट बनाया जाएगा. जब कोई कानून बनाते हैं तब उसमें वर्ग डिफाइन होता है. लोकतंत्र सेनानी किस वर्ग में आते हैं सरकार यह नहीं बता पाई.

भूपेश बघेल ने कहा, आधी रात को सरकार सूची जारी कर पारित कर दे रही है. अगर सूची पहले मिलती तो हम उसे पढ़ते. वित्तीय भार नॉमिनल आने की बात सत्तापक्ष कर रही है. बिना वित्तीय ज्ञापन के बिल कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं, इसलिए विपक्ष ने बहिर्गमन किया है. सरकार विधि विपरीत काम कर रही है.

चेम्बर चुनाव 2025: नामांकन के अंतिम दिन 75 उम्मीदवारों ने किया आवेदन

रायपुर- चेम्बर चुनाव प्रक्रिया के तहत बुधवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी. मुख्य निर्वाचन अधिकारी शिवराज भंसाली एवं निर्वाचन अधिकारी प्रकाशचंद गोलछा ने यह जानकारी दी कि आज कुल 75 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ने के लिए आवेदन जमा किए. इनमें से प्रदेश अध्यक्ष पद के 2 नामांकन, प्रदेश महामंत्री पद का 1 नामांकन, प्रदेश कोषाध्यक्ष पद का 1 नामांकन, जिला उपाध्यक्ष पद के 36 नामांकन और जिला मंत्री पद के 35 नामांकन शामिल हैं.

निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 22 मार्च को नामांकन पत्रों की सूक्ष्म जांच और वैध नामांकन की सूची का प्रकाशन किया जाएगा. 24 मार्च को आपत्तियों का निराकरण (सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक), शाम 6:00 बजे वैध प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी होगी. इसके बाद 26 मार्च को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि (दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक) होगी.

नामांकन प्रक्रिया के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी शिवराज भंसाली, निर्वाचन अधिकारी प्रकाशचंद गोलछा, बालकृष्ण दानी, के.सी. माहेश्वरी, रमेश गांधी, महावीर तालेड़ा, अनिल जैन (कुचेरिया), संजय देशमुख, संजय जोशी, अमित वर्मा, मनोज शर्मा, मुख्य निर्वाचन नियंत्रक एच.एस. कर एवं चेम्बर चुनाव कार्यालय प्रभारी एस.एम. रावते उपस्थित रहे.

मत्स्य निरीक्षक परीक्षा को लेकर प्रशासन की तैयारी पूरी, कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश…

रायपुर-  छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित मत्स्य निरीक्षक भर्ती परीक्षा के लिए प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. यह परीक्षा 23 मार्च 2025 को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक रायपुर के 54 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएगी।

परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं. परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रेड क्रॉस मीटिंग हॉल में परीक्षा के ऑब्जर्वर्स का प्रशिक्षण आयोजित किया गया.

इस दौरान कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अधिकारियों को सतर्कता बनाए रखने, अनुशासन का पालन कराने और परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए जरूरी निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में बिना वैध पहचान पत्र के या निर्धारित समय के बाद प्रवेश नहीं दिया जाएगा.

इसके अलावा, परीक्षा के सफल संचालन के लिए नवीन कुमार ठाकुर, अपर कलेक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि उत्तम प्रसाद रजक और केदारनाथ पटेल को सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने और परीक्षा के दौरान पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की अपील की.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- आपातकाल देश के इतिहास का काला अध्याय, जिन्होंने संविधान कुचला था, वो अब उसकी दुहाई देते हैं..

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 21 मार्च को भारत के लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक दिन बताया. उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय है, और 21 मार्च 1977 वह दिन है जब देश ने तानाशाही के विरुद्ध जीत दर्ज की थी. उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं था, बल्कि भारत के नागरिकों की आस्था, साहस और संघर्ष की विजय थी.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 1975 में लगाए गए आपातकाल ने संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को कुचल दिया था. न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका – जिनके संतुलन पर हमारा लोकतंत्र टिका है – उसे तोड़कर समस्त शक्ति एक परिवार के हाथों में केंद्रित कर दी गई थी. नागरिक अधिकारों का दमन, मीडिया पर सेंसरशिप, विरोध की आवाज़ों का दमन और रातों में की जाने वाली गिरफ्तारियां संविधान के चिथड़े उधेड़ते हुए उस भयावह कालखंड को उजागर करता है.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मेरे बड़े पिताजी नरहरि साय को भी 19 महीने जेल में रखा गया था. वे लाखों लोकतंत्र सेनानियों में से एक थे जिन्होंने तानाशाही के विरुद्ध खड़े होकर भारत की आत्मा की रक्षा की. कई सेनानियों को तो बेड़ियों में जकड़ा गया, और उनके परिवारों को भी अमानवीय यातनाएं झेलनी पड़ीं.

मुख्यमंत्री साय ने उस समय की राजसत्ता की क्रूरता को याद करते हुए कहा कि अखबारों पर ताले लगे थे, कलाकारों की आवाज़ बंद कर दी गई थी. किशोर कुमार जैसे गायक तक को रेडियो पर बैन कर दिया गया क्योंकि उन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया था. यह सब कुछ उस संविधान के नाम पर हो रहा था, जिसे बनाने में बाबा साहेब अंबेडकर का जीवन लगा था.

मुख्यमंत्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज वही लोग संविधान की किताब हाथ में लेकर संविधान की दुहाई देते हैं, जिन्होंने कभी उसे रौंदने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. जिन्होंने संविधान कुचला था, आजकल वही उसकी दुहाई देते हैं. 1975 में आपातकाल लगाकर पाप किया गया और उसकी पुनरावृत्ति तब हुई जब पिछली कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि रोक दी – यह उन सेनानियों के त्याग और संघर्ष का अपमान है.

मुख्यमंत्री साय ने लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत का लोकतंत्र किसी एक पार्टी या सत्ता की बपौती नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के साहस, बलिदान और संकल्प की देन है. हमें हमेशा सतर्क रहना होगा ताकि फिर कभी लोकतंत्र पर अंधकार का साया न पड़े. उन्होंने कहा कि 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी का धब्बा हट गया, लेकिन इसे लगाने वाली मानसिकता अब भी जीवित है. उन्होंने कहा कि सौभाग्य से देश की जनता अब जागरूक है और ऐसे तानाशाही इरादों को पहचानना और हराना जानती है.

आंगनबाड़ी सहायिकों की फर्जी भर्ती का मामला : जिला स्तरीय जांच समिति ने शुरू की जांच

गरियाबंद- आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में फर्जी अंकसूची दिखाकर नियुक्ति मामले में अब जिला स्तरीय जांच समिति ने जांच शुरू कर दी है. मामले में सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना अधिकारी) और बीईओ देवभोग में हुए 16 नियुक्ति में जमा किए गए अंक सूची और मूल्यांकन पंजी को जांच समिति के समक्ष रखेगी.  

जांच में देरी, असल दोषी अब भी बाहर

देवभोग में जाली दस्तावेजों के आधार पर हुई नियुक्तियों की पहले हुई जांच अधूरी रह गई थी और कार्रवाई केवल छोटे स्तर के जिम्मेदारों पर हुई. असली दोषी अब भी कानूनी शिकंजे से बाहर हैं. हालांकि, कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने मामले की तह तक जाने के लिए जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. पंचायत चुनाव के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था, लेकिन अब इसे फिर से मामले में गंभीरता से लिया जा रहा है. 

जांच समिति का गठन और बैठकें

अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी चार सदस्यीय जांच समिति में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय, देवभोग एसडीएम तुलसी दास मरकाम, और जिला पंचायत अधिकारी अभिषेक पाठक को शामिल किया गया है. समिति की पहली बैठक 19 मार्च को हुई, जिसमें जांच के दिशा-निर्देश तय किए गए. मगंलवार यानी 20 मार्च, 2025 को सीडीपीओ और बीईओ को आदेश जारी किया गया कि वे सोमवार तक सभी भर्ती दस्तावेज जमा करें.

शिकायतकर्ता को भेजा गया था जेल

पूंजीपारा आंगनबाड़ी भर्ती में जाली अंक सूची का मामला सामने आने के बाद प्रधान पाठक और नियुक्त महिला अभ्यर्थी के खिलाफ देवभोग थाने में मामला दर्ज किया गया था. जनवरी में कोदोभाठा आंगनबाड़ी में भी 67% अंकों को 81% दिखाने का मामला उजागर हुआ. इसकी शिकायत करने वाली नीला यादव को ही विभाग ने आरोपी बनाकर जेल भेज दिया. कुम्हडई खुर्द भर्ती मामले में भी एक अभ्यर्थी पर पुलिस ने कार्रवाई की. इस दौरान जाली अंक सूची जारी करने वाले और इसे भर्ती प्रक्रिया में शामिल कराने वाले बड़े अधिकारी जांच से बाहर रहे. 

भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी

बता दें कि अगस्त 2024 में 16 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन निकाला गया था. भर्ती और नियुक्ति आदेश एक साथ जारी होने थे, लेकिन भारी लेन-देन के चलते चयन समिति ने नियम ताक पर रख दिए. एक साथ नियुक्ति आदेश जारी करने की बजाय अलग-अलग जारी किए गए. बड़ी गड़बड़ी उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही थी। जिला पंचायत सदस्य देश बंधु नायक ने कहा है कि पहले बड़े दोषियों को बचाए जा रहे थे. अब जिला स्तरीय जांच समिति पर पूरा भरोसा है,रुपए लेकर नियम तोड़ने वाले अब शिकंजे में आयेंगे.

अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय ने कहा कि समिति का गठन हो गया है. भर्ती से संबंधित सभी दस्तावेज मंगवाए गए हैं. जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

लोकसभा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की छत्तीसगढ़ को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर विशेष पैकेज देने की मांग

नई दिल्ली/रायपुर-  शुक्रवार को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ को भी कृषि क्षेत्र में विशेष पैकेज देने की मांग की।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने भाषण की शुरुवात शायरी से की

"गांव के गलियों में तब उम्मीदों के दीप जलते हैं। जब किसान सरकार मिलकर चलते हैं।"

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि कल्याण मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। जिससे किसानों के जीवन में नया सबेरा आया है।

किसानों की योजनाएं सिर्फ कागजों में नहीं यथार्थ के धरातल पर उतर रही है और उसका परिणाम है कि देश के किसान समृद्ध हो रहे है, खुशहाल हो रहे हैं और कृषि के प्रति लोगों का झुकाव लगातार बढ़ रहा है। देश के हर गरीब परिवार के लिए प्रधानमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत् अनाज व्यवस्था मोदी सरकार ने की है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने किसानों की बेहतरी और कृषि क्षेत्र के समुचित विकास के लिए छत्तीसगढ़ को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर विशेष पैकेज देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 30% आदिवासी और लगभग 12% अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं, जिनके हितों को ध्यान में रखते हुए यह अनुदान अत्यंत आवश्यक है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां लगभग 76% आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य में 40.11 लाख कृषक परिवार हैं, जिनमें से 82% कृषक लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। इन किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे नवीन कृषि तकनीकों और आवश्यक संसाधनों को अपनाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। यदि छत्तीसगढ़ को भी पूर्वोत्तर राज्यों की तरह केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में विशेष अनुदान प्रावधान मिले, तो इससे प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।

राज्य की प्रमुख कृषि मांगें

1. ड्रिप इरिगेशन एवं स्प्रिंकलर पर 90% अनुदान:

श्री अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Per Drop More Crop) के तहत वर्तमान में किसानों को मिलने वाले अनुदान को बढ़ाने की मांग की। वर्तमान में लघु एवं सीमांत किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% अनुदान दिया जाता है। चूंकि छत्तीसगढ़ में 83% किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं और वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, इसलिए राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में पूर्वोत्तर राज्यों की तरह 90% अनुदान स्वीकृत किया जाए।

2. नवगठित जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना:

राज्य के नवगठित छह जिलों—गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, खैरागढ़, मानपुर-मोहला, और मनेन्द्रगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना की आवश्यकता है, जिससे किसानों को नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी त्वरित रूप से मिल सके।

3. माइनर मिलेट्स (कोदो-कुटकी एवं रागी) के प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना:

छत्तीसगढ़ में माइनर मिलेट्स की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इनका प्रसंस्करण करने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी है। इन फसलों का उत्पादन मुख्य रूप से आदिवासी किसान करते हैं। यदि इन क्षेत्रों में सहकारी या निजी प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएं, तो किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और इन फसलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय निर्यात भी बढ़ेगा।

4. महिला किसानों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की योजना:

प्रदेश में अधिकांश कृषि कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है। यदि उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए पृथक योजनाएं चलाई जाएं, तो उनका कृषि में योगदान और भी बढ़ सकता है।

5. दूरस्थ क्षेत्रों में भंडारण सुविधाओं का विकास:

उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ में खाद्यान्न भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भंडारण की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि राज्य में वेयरहाउस निर्माण के लिए सहायता प्रदान करे, जिससे फसलों को सुरक्षित रखा जा सके और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

6. पराली जलाने की रोकथाम हेतु अनुदान:

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी पराली जलाने की समस्या बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान हेतु राज्य में क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट यंत्रों को अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाए।

7. बीज किस्मों की बाध्यता समाप्त करने की मांग:

वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं में केवल 5 से 10 वर्ष पुरानी विकसित प्रजातियों पर ही लाभ दिया जाता है। जबकि कई ऐसी पारंपरिक किस्में हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अधिक उत्पादन देती हैं। अतः राज्य की अनुशंसा पर विशेष किस्मों के लिए 5 से 10 वर्ष की बाध्यता समाप्त की जाए।

8. जैविक खेती को बढ़ावा एवं प्रमाणीकरण सुविधा:

जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है, लेकिन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया कठिन होने के कारण वे पूरी तरह इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। प्रमाणीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, जिससे जैविक उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके।

9. नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना में सुधार की मांग

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है, जहां 40% किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। ऑयल पाम की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर अनुमानित लागत ₹3.41 लाख आती है, जबकि भारत सरकार की ओर से मात्र ₹1.21 लाख (35%) अनुदान दिया जाता है। किसानों को बाकी ₹2.20 लाख का निवेश स्वयं करना पड़ता है, जो उनके लिए कठिन है।

श्री अग्रवाल ने सुझाव दिया कि वन अधिकार पट्टा धारक किसानों की तरह अन्य छोटे और सीमांत किसानों को भी 90% अनुदान दिया जाए, जिससे वे ऑयल पाम की खेती को अपनाने के लिए प्रेरित हों। इसके अतिरिक्त, ऑयल पाम की खेती के लिए फेसिंग (बाड़) की सुविधा बहुत आवश्यक है, लेकिन वर्तमान योजनाओं में इसके लिए कोई अनुदान प्रावधान नहीं है। इसलिए, ऑयल पाम योजना में फेसिंग हेतु अनुदान का प्रावधान भी जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम, राष्ट्रीय पुनर्गठित बांस मिशन, और सब-मिशन ऑन एग्रोफॉरेस्ट्री योजना के तहत 90% तक अनुदान प्रदान किया जाए, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

10. जल संरक्षण एवं सिंचाई व्यवस्था में सुधार की मांग

प्रदेश में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद जल संरक्षण के अभाव में पानी व्यर्थ बह जाता है। वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए अधिक से अधिक चेकडेम, सिंचाई तालाब आदि का निर्माण किया जाए, जिससे न केवल सिंचित क्षेत्र में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ को पूर्वोत्तर राज्यों की तरह विशेष अनुदान दिया जाए, तो यह राज्य के छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगा और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि किसानों की इन मांगों को शीघ्रता से पूरा किया जाए, जिससे प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।

प्रदेश में हेलमेट और सीट बेल्ट अनिवार्य करने का अशासकीय संकल्प विधायक अजय चंद्राकर ने लिया वापस

रायपुर- प्रदेश में बाइक चालकों को हेलमेट एवं कार चालकों को सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य करने का अशासकीय संकल्प वापस लिया गया. विधानसभा में यह अशासकीय संकल्प भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने लाया था. इस अशासकीय संकल्प पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, यह अशासकीय संकल्प अमूल्य है. बाइक खरीदी के साथ ही हेलमेट खरीदी अनिवार्य हो, इसके लिए जो भी कानूनी प्रावधान जरूरी होगा उस पर विमर्श कर इसे लागू किया जाएगा.

गृहमत्री शर्मा ने कहा, कानून के डंडे से पुलिस खड़ा कर क्या-क्या ठीक किया जाएगा? एक्सीडेंट हो जाना और सीट बेल्ट लगाकर या हेलमेट लगाकर उस घटने को कम कर लेना ये अलग विषय है. 104 ब्लैक स्पॉट में से 90 ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त किया गया है. अभी 190 और ब्लैक स्पॉट चिन्हित किया गया है. इस बार के बजट में 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिनसे ब्लैक स्पॉट दुरुस्त किए जाएंगे. यह सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है. यह हम सबकी जिम्मेदारी है.

विजय शर्मा ने कहा, हेलमेट को लेकर कानून है. केंद्रीय मोटरयान और छत्तीसगढ़ मोटरयान जैसे क़ानून है. पिछले साल प्रदेशभर में 41 हजार कार्रवाई की गई. हेलमेट नहीं लगाने पर ढाई करोड़ रुपए और सीट बेल्ट नहीं लगाने पर एक करोड़ रुपए की वसूली की गई है. इस कानून का मजबूती से पालन करना ही है. प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई कर रही है. जनजागरूकता के लिए हम सबको सामूहिक प्रयास की जरूरत है इसलिए अजय चंद्राकर इस संकल्प को वापस ले लें.

रामविचार नेताम के नाम पर बनाना पड़ जाता यूनिवर्सिटी : अजय चंद्राकरभाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मंत्री ने सारी जिम्मेदारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर छोड़ दिया है. यदि सब कुछ जनता को ही करना है तो मैं संकल्प वापस ले लेता हूं. इससे पहले सदन में अशासकीय संकल्प पेश करते हुए अजय चंद्राकर ने सड़क हादसों को राष्ट्रीय आपदा बताया. उन्होंने कहा, रामविचार नेताम गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे थे, जब उनका एक्सीडेंट हुआ था. थोड़ा सा बच गए नहीं तो उनके नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाना पड़ जाता. साइरस मिस्त्री अरबों खरबों के मालिक सिर्फ सीट बेल्ट नहीं लगाने की वजह से चले गए.

अजय चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ में 2019-2024 तक सड़क दुर्घटना में 33 हजार मौतें हुईं. हेलमेट नहीं लगाने वालों के लिए दंड का प्रावधान सिर्फ पांच सौ रुपए का जुर्माना है. एक लाख का जो मोटरसाइकिल ख़रीद सकता है वह हेलमेट भी ख़रीद सकता है. कामकाजी महिलाएं भी अब इस तरह की दुर्घटना की चपेट में आ रही हैं. हम किन कारणों से इसे अनिवार्य नहीं करना चाहते हैं? उन्होंने कहा, स्थिति भयावह होती जा रही है. इससे सरकार पर वित्तीय भार नहीं आएगा. ट्रैफ़िक के लिए कोई इंटीग्रेटेड सिस्टम नहीं है. ब्लैक स्पॉट भी इसके लिए जिम्मेदार है. इससे जो परिणाम निकल रहा है यह सिर्फ जनहानि है. इस पर किसी भी तरह का नियंत्रण नहीं है. इस वक्त हम एक ही काम कर सकते हैं कि हम ख़ुद जागरूक हो जाए. सामाजिक आंदोलन हो. कैंपेन चलाया जाए.

कर्मचारियों के लिए हेलमेट अनिवार्य, बाकी लोग कीड़े-मकोड़े हैं क्या : चंद्राकचंद्राकर ने कहा, मैं तीन महीने के लिए गृह मंत्री था. मैंने तत्कालीन डीजीपी को कहा था कि हेलमेट नहीं लगाने वालों के खिलाफ की गई रिपोर्ट की कॉपी हर दिन मेरे पास आए. हर शाम रिपोर्ट मुझ तक आ जाती थी. चीफ सेक्रेटरी ने चिट्ठी लिखी थी कि शासकीय सर्विस के लोग हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाएंगे. बाकी लोग कीड़े मकोड़े हैं क्या? सवाल एक ही है कि जिंदगी बचानी है. ये सदन तय कर ले कि कोई नेता, कोई अफसर किसी को हेलमेट नहीं लगाने की वजह से होने वाली कार्रवाई से छुड़ाने के लिए फोन नहीं करेंगे.

सीट बेल्ट नहीं लगाने पर मंत्री, विधायक सबका कटे चालान : धर्मजीत

भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा, हेलमेट लगाए बगैर गाड़ी चलाने वाले और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. ये जनहित का मुद्दा है. इस अशासकीय संकल्प को पारित कर देना चाहिए. सभी बड़े लोगों की गाड़ियों के सीट में कवर लगा होता है. बेल्ट लगाने वाले कैसे लगाएंगे. ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. मंत्री की गाड़ी का चालान काटिये, एमएलए का चालान काटिए, अधिकारियों का चालान काटिए. थोड़ी सख्ती जरूरी है.

कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा, यह विषय जनता की सुरक्षा से जुड़ा है. ज्यादातर सड़क दुर्घटना तेज रफ़्तार में गाड़ी चलाने से होती है या फिर नशे की वजह से होती है. गांवों में ऐसा सोचा जाता है कि हेलमेट लगाने का कोई औचित्य नहीं है. सुरक्षा ज़्यादा जरूरी है. यह सभी की जिम्मेदारी है. हेलमेट की वजह से मैं दो बार बाइक एक्सीडेंट में बचा हूं. स्कूल काॅलेज के बच्चों, कार्यक्षेत्र में काम कर रहे लोगों को हेलमेट लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए.

बाइक खरीदी के साथ हेलमेट की खरीदी अनिवार्य हो : चरणदास महंत

भाजपा विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा, एक घटना परिवार के लिए दुख का कारण बन सकती है. मोटर साइकिल चलाते वक्त हेलमेट और कार चलाते वक्त सीट बेल्ट अनिवार्य करने के इस प्रस्ताव का समर्थन किया जाना चाहिए. भाजपा विधायक अनुज शर्मा ने कहा, छत्तीसगढ़ को 25 साल हो गए हैं, लेकिन राज्य की यातायात व्यवस्था आज तक नहीं सुधरी है. ट्रैफ़िक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दस महंत ने कहा, यदि मोटर साइकिल बेचने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया जाए कि उसकी बिक्री तब होगी जब हेलमेट लिया जाएगा.र