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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज विश्व वानिकी दिवस पर संगोष्ठी का होगा आयोजन

रायपुर-  वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आज विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ विधानसभा के समिति कक्ष में दोपहर एक बजे से आयोजित होगा।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित रहेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। इसके अलावा, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, उप मुख्यमंत्री अरूण साव एवं विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और खेल मंत्री टंक राम वर्मा विशिष्ट अतिथि होंगे।

वर्ष 2025 में विश्व वानिकी दिवस की थीम ‘फारेस्ट एण्ड फूड‘ है, जो वनों की खाद्य सुरक्षा, पोषण, और आजीविकोपार्जन में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। यह कार्यक्रम वनों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वन ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव सहित वरिष्ठ वन अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2012 में वनों के महत्व के प्रति जागरूकता में वृद्धि की दृष्टिकोण से दिनांक 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में घोषित किया गया है। यह कार्यक्रम वनों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के लिए काम करने के लिए प्रेरित करेगा। इस कार्यक्रम में वनों के महत्व, उनके संरक्षण के तरीके, और वनों के साथ जुड़े लोगों के जीवन में सुधार करने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी। यह कार्यक्रम वनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधियों ने की सौजन्य भेंट, बड़े भजन रामनामी मेला के लिए दिया विशेष निमंत्रण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने सक्ती जिले के ग्राम जमगहन में 9 अप्रैल को आयोजित होने वाले बड़े भजन रामनामी मेला में मुख्यमंत्री श्री साय को आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने इस निमंत्रण के लिए महासभा के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर चंद्रपुर विधायक राम कुमार यादव सहित सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार-भाटापारा एवं रायगढ़ जिले के रामनामी संप्रदाय से जुड़े सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

नगर पंचायत अध्यक्षों और पार्षदों के शपथ ग्रहण में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर-  उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज मुंगेली जिले के बरेला और जरहागांव नगर पंचायत में नवनिर्वाचित अध्यक्षों और पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। विधायक पुन्नूलाल मोहले भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। मुंगेली की एसडीएम पार्वती पटेल ने बरेला और जरहागांव में आयोजित दो अलग-अलग समारोहों में बरेला नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नरेश पटेल और जरहागांव नगर पंचायत की अध्यक्ष रूपाली वेदप्रकाश कश्यप तथा दोनों नगर पंचायतों के पार्षदों को विधिपूर्वक शपथ दिलाई।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शपथ ग्रहण समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने कार्यों से नगरवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की अपील की। उन्होंने नवगठित नगर पंचायतों की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए कहा कि जनता ने जिन उम्मीदों के साथ जनादेश दिया है, उन पर पूरी निष्ठा से काम करना सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों का कर्तव्य है।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यक्रम में कहा कि विष्णु देव साय सरकार के नेतृत्व में नगर पंचायत बरेला एवं जरहागांव के चहुंमुखी विकास के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने दोनों नगर पंचायतों को स्वच्छ और सुंदर बनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने बिलासपुर के मोहभट्ठा में 30 मार्च को होने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में नागरिकों को शामिल होने का आग्रह किया।

मुंगेली के विधायक पुन्नूलाल मोहले ने अपने संबोधन में कहा कि नगर की जनता ने निष्पक्ष रूप से अपने मतदान का प्रयोग कर आप लोगों को जिताया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नगर पंचायत बरेला और जरहागांव के सभी नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षद नागरिकों की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं पर खरा उतरेंगे और नगर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ प्रभाकर पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय, उपाध्यक्ष शांति देवचरण भास्कर और मुंगेली जनपद पंचायत के अध्यक्ष रामकमल सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में समारोह में मौजूद थे।

विश्व वानिकी दिवस: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन संरक्षण का किया आह्वान

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय वानिकी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए पर्यावरण संरक्षण और जंगलों को बचाने की अपील की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। यह न केवल प्राणवायु (ऑक्सीजन) का प्रमुख स्रोत हैं, बल्कि विभिन्न खाद्य, औषधीय और अन्य उपयोगी संसाधनों का भंडार भी हैं। पेड़ों और जंगलों के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने के लिए हर वर्ष 21 मार्च को ‘विश्व वानिकी दिवस’ मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या और आधुनिक जीवनशैली के कारण जंगल सिमटते जा रहे हैं और पर्यावरण असंतुलन बढ़ता जा रहा है। जंगलों के घटने से जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की समस्या विकराल रूप ले रही है।पर्यावरणीय असंतुलन का असर मनुष्यों, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र पर साफ दिख रहा है।

छत्तीसगढ़ – जंगलों से घिरा प्रदेश, वन प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में अग्रसर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का एक बड़ा भूभाग घने वनों से आच्छादित है और यहाँ की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था भी वनों से गहराई से जुड़ी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार वन प्रबंधन और सामुदायिक वन संरक्षण के माध्यम से वन्यजीवों और प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से न केवल वनों का संरक्षण किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी इससे जोड़ा जा रहा है, ताकि वन और आजीविका के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। प्रत्येक व्यक्ति एक पेड़ अवश्य लगाए और उसकी देखभाल करें और आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण-मुक्त वातावरण देने की जिम्मेदारी निभाएँ।

रायपुर एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिलाने की मांग, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

रायपुर-  रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू को पत्र लिखकर रायपुर हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच 2014 में हुए द्विपक्षीय समझौते में संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे रायपुर सहित अधिक भारतीय शहरों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ा जा सके।

श्री अग्रवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की 26 दिसंबर को हुई बैठक के बाद, रायपुर से यूएई, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों तक सीधी उड़ानों के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस से संपर्क किया गया। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्तमान समझौते के तहत केवल 15 भारतीय शहरों को ही यूएई से सीधी उड़ानों की अनुमति है,

यूएई के राजदूत से हुई चर्चा के दौरान यह सुझाव सामने आया कि इस समझौते का पुनरीक्षण कर 15 के स्थान पर 30 भारतीय हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अनुमति दी जाए। श्री अग्रवाल ने इस विषय को गंभीरता से लेने और आवश्यक संशोधन करने का आग्रह किया, जिससे रायपुर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिल सके।

इसके साथ ही, श्री अग्रवाल ने स्पाइसजेट के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी श्री कमल को भी पत्र लिखा है, जिसमें रायपुर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन की व्यवहार्यता की जांच करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि एयरलाइन उपयुक्त अंतरराष्ट्रीय मार्ग निर्धारित करे और राज्य सरकार से मिलने वाले सहयोग पर विचार करे, ताकि उड़ानों का संचालन शीघ्र प्रारंभ हो सके।

बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, "रायपुर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी। इससे पर्यटन, व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। मैं इस विषय पर पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा हूं और केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा करता हूं,"

रायपुर को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ने की इस पहल से पूरे राज्य में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ के नागरिकों को विदेश यात्रा के लिए अन्य हवाई अड्डों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सांसद श्री अग्रवाल ने इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

छत्तीसगढ़ में बाघों की घटती संख्या पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल चिंतित,टाइगर रिजर्व विस्तार की मांग

नई दिल्ली/रायपुर-  20 मार्च रायपुर सांसद एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या में लगातार गिरावट पर चिंता व्यक्त की है। वर्ष 2014 में जहां राज्य में 46 बाघ थे, वहीं 2018 में यह संख्या घटकर 19 रह गई और 2022 में यह केवल 17 रह गई। इसके विपरीत, देशभर में बाघों की संख्या 2014 में 2226 से बढ़कर 2022 में 3682 हो गई। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में बाघ संरक्षण को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में छत्तीसगढ़ समेत देशभर में बाघ और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री से देश में बाघ अभयारण्यों की संख्या, बाघों की जनसंख्या में हो रही वृद्धि या कमी, अवैध शिकार की घटनाओं, और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी।

सांसद के सवालों के जवाब में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि देश में वर्तमान में 58 टाइगर रिजर्व हैं और सरकार बाघ संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही है। इसके तहत टाइगर रिजर्व का विस्तार, आधुनिक तकनीक से निगरानी, मानव-पशु संघर्ष को कम करने के उपाय, और अवैध शिकार पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।

छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के लिए केंद्र से मिली सहायता राशि:

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ को बाघ और हाथी परियोजनाओं के तहत विभिन्न वित्तीय वर्ष 2021-22 में 355.85 लाख , 2022-23 में 165.75 लाख, 2023-24 में 292.86 लाख और 2024-25 में 181.58 लाख रुपए की राशि जारी की गई है।

सरकार द्वारा बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सीएसएस-आईडीडब्ल्यूएच योजना के तहत सहायता दी जा रही है, जिसमें वन्यजीव पर्यावासों का विकास, मानव-पशु संघर्ष की रोकथाम, और टाइगर रिजर्व में आवश्यक संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं।

बाघों के अवैध शिकार पर सख्त नजर

बाघों के अवैध शिकार पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूछे गए सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में बाघों के अवैध शिकार की घटनाओं की निगरानी की गई है और इस संबंध में राज्यवार आंकड़े संकलित किए गए हैं। हालांकि, अन्य वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी केंद्र सरकार के स्तर पर नहीं रखी जाती।

सरकार की तीन स्तरीय रणनीति:

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के माध्यम से सरकार ने मानव-पशु संघर्ष से निपटने के लिए तीन स्तरीय रणनीति बनाई है:

1. संसाधनों और बुनियादी ढांचे में सुधार – टाइगर रिजर्व में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार और संरक्षण योजनाओं को सुदृढ़ करना।

2. पर्यावास प्रबंधन– बाघों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाना और उनके विस्थापन को नियंत्रित करना।

3. मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) – मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए तीन एसओपी जारी की गई हैं, जिनमें आपातकालीन स्थितियों में बाघों को सुरक्षित बचाने, मवेशियों पर हमले की घटनाओं को नियंत्रित करने, और वन्यजीवों के पुनर्वास की योजना शामिल है।

छत्तीसगढ़ में बाघ संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में बाघों की घटती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की और केंद्र सरकार से इस दिशा में और अधिक ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिए विशेष रणनीति बनाई जानी चाहिए ताकि राज्य में बाघों की संख्या को बढ़ाया जा सके और वन्यजीवों का प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

उन्होंने सरकार से मांग की कि छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व का विस्तार किया जाए, अवैध शिकार पर सख्ती बढ़ाई जाए, और बाघों की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी तकनीकों को अपनाया जाए।

बता दें सांसद बृजमोहन अग्रवाल पहले ही भोरमदेव अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने की मांग कर चुके है, जिसपर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार को आवश्यक निर्देश भी जारी कर चुके हैं।

मतदाता पहचान पत्र में नंबरों के दोहराव की खत्म करने निर्वाचन आयोग की पहल, राजनीतिक दलों के साथ कर रहा बैठक

रायपुर-  भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में, निर्वाचन आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ, भारत निर्वाचन आयोग ने पदभार ग्रहण करने के एक महीने से भी कम समय में पूरी निर्वाचन मशीनरी को बीएलओ स्तर तक सभी मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ावा देने और मतदान केंद्रों पर उनके लिए सुखद अनुभव सुनिश्चित करने के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ाया है। राजनीतिक दलों को, जो प्रमुख हितधारक हैं, को भी जमीनी स्तर पर शामिल किया जा रहा है।

आयोग ने पुनः पुष्टि की है कि लगभग 100 करोड़ मतदाता हमेशा लोकतंत्र के आधार स्तंभ हैं। यूआईडीएआई और भारत निर्वाचन आयोग के विशेषज्ञों के बीच तकनीकी परामर्श जल्द शुरू होंगे। हालांकि एक मतदाता केवल अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर ही मतदान कर सकता है, आयोग ने देश भर में मतदाता पहचान पत्र के नंबरों में दोहराव को समाप्त करने और दशकों पुरानी समस्या को 3 महीने के भीतर खत्म करने का संकल्प लिया है। जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्राधिकरणों के साथ समन्वय से मतदाता सूची का नियमित अद्यतन मजबूत किया जाएगा।

राजनीतिक दलों के साथ आयोग की बातचीत में स्पष्ट किया गया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में कोई भी नाम शामिल करना या हटाना अपीलों की प्रक्रिया द्वारा शासित होता है, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत सभी राजनीतिक दलों के लिए दावों और आपत्तियों को दर्ज करने के लिए उपलब्ध है। ऐसी अपीलों के अभाव में, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा तैयार की गई सूची मान्य होती है। यह अवगत कराया जा सकता है कि भारत निर्वाचन आयोग ने 7 मार्च, 2025 को स्पष्ट किया था कि 6-10 जनवरी, 2025 तक विशेष संक्षिप्त संशोधन (एसएसआर) अभ्यास के पूरा होने के बाद केवल 89 प्रथम अपील और केवल 1 द्वितीय अपील दायर की गई थी।

सभी पात्र नागरिकों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना, मतदान की सुगमता और सुखद मतदान अनुभव कराना भारत निर्वाचन आयोग का प्रमुख उद्देश्य है। यह सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कदम उठाए जाएंगे कि कोई भी मतदान केंद्र 1,200 से अधिक मतदाताओं वाला न हो और यह मतदाताओं से 2 किमी के दायरे में हो। सबसे दूरस्थ ग्रामीण मतदान केंद्रों में भी मूलभूत सुविधाएं (एएमएफ) सुनिश्चित की जाएंगी। शहरी उदासीनता से निपटने और अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, ऊंची इमारतों और कॉलोनियों के समूहों में भी उनके परिसर के भीतर मतदान केंद्र होंगे।

लगभग 1 करोड़ निर्वाचन कर्मियों की व्यापक और निरंतर क्षमता निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, 4 और 5 मार्च को नई दिल्ली में आईआईआईडीईएम में सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों की दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें पहली बार प्रत्येक राज्य / केंद्रशासित प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रकरण अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन ने संविधान, निर्वाचन कानूनों और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के ढांचे के अनुसार 28 हितधारकों और उनकी जिम्मेदारियों के स्पष्ट मानचित्रण के साथ पूरी निर्वाचन मशीनरी को ऊर्जा प्रदान करने पर जोर दिया।

निर्देशों के लिए निर्वाचन हैंडबुक और मैनुअल को नवीनतम परिवर्तनों के साथ समन्वित किया जाएगा। कई भारतीय भाषाओं में डिजिटल प्रशिक्षण किट तैयार की जाएंगी ताकि फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के लिए आसान आत्मसात और प्रभावी प्रशिक्षण हो सके। एनिमेटेड वीडियो और एकीकृत डैशबोर्ड प्रशिक्षण को डिजिटल बढ़ावा देंगे। बीएलओ को प्रशिक्षित करने के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है।

निर्वाचन प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं में राजनीतिक दलों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 4 मार्च को सीईओ सम्मेलन के दौरान निर्देश दिया कि सभी 36 सीईओ, 788 डीईओ, 4123 ईआरओ द्वारा नियमित सर्वदलीय बैठकें और बातचीत आयोजित की जाएं। देश भर में ऐसी बैठकें जमीनी स्तर पर ही राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए किसी भी लंबित और उभरते मुद्दों को हल करने में मदद करेंगी। यह प्रक्रिया 31 मार्च, 2025 तक पूरे भारत में पूरी हो जाएगी।

आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और उनके नियुक्त बीएलए को निर्वाचन कानूनों के अनुसार दावों और आपत्तियों सहित उचित प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव का राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से चुनाव संचालन से संबंधित किसी भी और सभी मामलों पर सुझाव आमंत्रित किए हैं और वे इन्हें 30 अप्रैल, 2025 तक भेज सकते हैं। दलों को दिल्ली में आयोग से आपसी सुविधाजनक समय पर मिलने का निमंत्रण भी दिया गया है। ये साहसिक और दूरगामी पहल चुनावों के पूरे दायरे को कवर करती हैं और सभी प्रमुख हितधारकों को भागीदारी पूर्ण तरीके से शामिल करती हैं।

खून से सीएम और मंत्रियों को लिखा पत्र, बर्खास्त बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों ने न्याय की लगाई गुहार

रायपुर- प्रदेशभर के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के चलते सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. बर्खास्त बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षक समायोजन की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. 97 दिनों से लगातार शांतिपूर्ण एवं नए तरीके से अपना विरोध दर्ज करने के बाद हताश और निराश होकर बर्खास्त सहायक शिक्षकों ने आज मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों को अपने खून से हस्तलिखित निवेदन पत्र लिखा और न्याय की गुहार लगाई.

इस ऐतिहासिक विरोध कार्यक्रम में हजारों शिक्षकों ने एक साथ धरना स्थल पर अपने अधिकारों, सेवा सुरक्षा और समायोजन की मांग को लेकर सरकार से अंतिम अपील की. शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे केवल न्याय की मांग कर रहे हैं और सरकार के पास संवैधानिक रूप से इन्हें समायोजित करने का पूरा अधिकार है. बर्खास्त सहायक शिक्षकों के समायोजन के लिए यदि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है तो शिक्षक अपने आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि शिक्षकों के भविष्य को बचाने के लिए त्वरित निर्णय लिया जाए और समायोजन की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ की जाए. हमारा संघर्ष न्याय के लिए है. जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में अनिश्चितकालीन हड़ताल में बैठे बर्खास्त सहायक शिक्षकों ने कहा, नौकरी के बदले नौकरी चाहिए. हमें समायोजन किया जाए. इसमें हमारी क्या गलती है. भर्ती प्रक्रिया राजपत्र में प्रकाशित हुआ. जो नियम क़ानून बने उसके आधार पर हम लोगों ने परीक्षा दी. परीक्षा पास होकर अच्छे अंक लाए तब जाके नौकरी मिली थी. जब भर्ती लेने वाले दोषी नहीं है तो हम कैसे दोषी हो गए ? सरकार की ओर से गठित कमेटी की अब तक रिपोर्ट नहीं आई है. जब तक नौकरी नहीं मिलेगी तब तक यहां से नहीं उठेंगे.

मानसिक रूप से हो चुके हैं परेशान

बर्खास्त शिक्षकों ने कहा, 15 महीनों तक हमने नौकरी की है. चुनाव में भी ड्यूटी लगाया गया था. नौकरी से निकाले जाने से आज मानसिक आर्थिक रूप से परेशान हो चुके हैं. समाज में तंज कसा जा रहा है. हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या परीक्षा देना हमारी गलती थी ? परीक्षा में ज़्यादा नंबर लाना क्या हमारी गलती थी ? जब तक हमें समायोजन नहीं किया जाएगा, हमारी नौकरी हमें नहीं लौटाई जाएगी तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा.

विनियोग विधेयक पर चर्चा, भूपेश बघेल ने कहा- लोग आज चिंतित हैं कि इस प्रदेश का क्या होगा?, MLA अजय चंद्राकर बोले-

रायपुर- विधानसभा में गुरुवार को विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अलग-अलग मुद्दों पर सरकार के खिलाफ तीखा हमला किया, तो वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने मोर्चा संभालते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब छत्तीसगढ़ में किसी भी आदमी को नग्न प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा.

विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा के फायरब्रांड विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जीडीपी राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है. जीएसडीपी को दोगुना करने का सरकार का लक्ष्य है. पिछली सरकार पांच साल में बेरोजगारी की परिभाषा तय नहीं कर पाई थी. प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 62 हज़ार रुपए हुई है. राजस्व वृद्धि 13.8 फीसदी अनुमानित है, जो पिछली सरकार की तुलना में ज्यादा है. 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद में 9.7 फीसदी की वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि जनसंख्या घनत्व के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है. सामाजिक सुरक्षा, पेंशन पर ध्यान दिया जाना है. विभागों में बजट में वृद्धि की गई है. बजट प्रबंधन में छत्तीसगढ़ को दिल्ली से 4 हज़ार 400 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया गया है. 5.62 लाख भूमिहीन लोगों को दस हज़ार रुपए वार्षिक की राशि दी जाएगी. पहली किस्त दे दी गई है.

नई औद्योगिक नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है. यह सेक्टर दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र है. कुपोषण की दर घटाने में पिछली सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया. बस्तर ओलंपिक का जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात में किया था. अब बस्तर में बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है.

मार्च 26 में नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य है. एक साल में तीन सौ नक्सली मारे गए. एक हज़ार नक्सलियों ने सरेंडर किया. राज्य बनने के बाद जब गीदम में नक्सली हमला हुआ तब थाने को लूटकर नारा लगाया गया था ‘अजीत जोगी जिंदाबाद’. अब कांग्रेस बताए कि नक्सलियों से क्या रिश्ता है?

पीएससी घोटाले का जिक्र करते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि टामन सोनवानी के साला-साली का नाम भी पीएससी घोटाले में आ गया. सोनवानी के दोस्तों का भी नाम आ गया. टामन सोनवानी के खिलाफ सचिव स्तरीय जांच थी जिसे खत्म किया गया. यह आरोप है. बाद में उसने राज्य के सैकड़ों युवाओं का सपना तोड़ा गया. ऐसे लोग अब कह रहे हैं कि बजट क्यों दिया जाए.

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने बयान दिया कि अगला चुनाव टी इस सिंहदेव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा. न जाने कौन सी दहशत में आ गए कि अगले दिन अपना बयान बदल दिया. दरअसल, कांग्रेस हार से उबर नहीं पाई है. ये बजट तक पहुँचे ही नहीं हैं. मेरा दल, मेरे नेता बेसब्री से इतंजार कर रहे हैं कि भारतमाला प्रोजेक्ट में वह कोर्ट कब जाएँगे?

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस पर कहा कि हम कोर्ट भी जाएँगे. प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखेंगे. अब तक मैंने ये नहीं कहा है कि आपके परिवार का नाम भी आ रहा है. इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि अब कानून का राज इस प्रदेश में चलेगा. किसी व्यक्ति की स्वेच्छाचारिता नहीं चलेगी.

उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड का बयान आया है कि उसकी जमीन पर अवैध कब्जा है. मैं उनका नाम जानता हूं, तो भूपेश बघेल भी जानते होंगे. 2019 से 2022 तक 519 किसानों ने आत्महत्या की थी. उनके ही क्षेत्र पाटन में एक किसान परिवार में पांच लोगों ने आत्महत्या कर लिया था. पिछली सरकार में कृषि भूमि का रकबा घट गया. सिंचाई क्षमता में कमी आई. किसान मरते रहे आप लोग क्या करते रहे. शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो गई.

अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसी आदमी को अब नग्न प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा. लोगों का जीवन सुगम नहीं था. अब ये बजट लोगों के जीवन को सुगम करेगा, इसलिए ही सरकार सुशासन एवं अभिसरण नाम का 58 वाँ विभाग बनाया गया है. हम बजट लेंगे, क्योंकि जनता का जनादेश हमारे पास है. नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना शुरू की गई थी, लेकिन एक रुपए भी बजट का प्रावधान नहीं किया गया था. केंद्रीय फण्ड से एक हज़ार करोड़ रुपए डायवर्ट किए गए थे.

उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि पिछली सरकार में बिजली उत्पादन में कमी आई थी. बोधघाट परियोजना को लेकर कहा गया था कि हम बनायेंगे. हम कहते थे, नहीं बन सकती. उसका क्या हुआ? बलौदाबाजार में किस समाज का कार्यक्रम था. मंच पर किन लोगों को जाना चाहिए था. किसने फंडिंग की थी? अब जेल के भीतर गए हैं तो निर्दोष कहा जा रहा है. अपराधियों के साथ राजनीति करना छत्तीसगढ़ की फितरत नहीं रही है. जो लोग प्रशासन में काम करते थे, और जेल में हैं, देश की सर्वोच्च अदालत भी उन्हें बाहर आने नहीं दे रही है.

इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले बजट में ही 50 फीसदी से भी कम खर्च किया गया है. आपको बजट क्यों चाहिए? इस साल बजट का आकार बस बढ़ गया है. इस बजट पर न मंत्रियों को विश्वास है और न ही अधिकारियों को. क्यूंकि ये बजट सिर्फ आकार बढ़ाने वाला है. खर्च तो होगा नहीं. कई योजनाओं को बंद कर दिया गया है. सरकार को आख़िर बजट क्यों दिया जाए. जब कुछ करना नहीं है.

उन्होंने कहा कि कचरू साहू के मामले में कह दिया गया कि आत्महत्या नहीं है. जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर दोबारा पोस्टमार्टम हुई तब स्पष्ट हुआ कि हत्या है. दोषी एसपी पर क्या कार्रवाई हुई? देश के इतिहास में पहली बार कलेक्ट्रेट-एसपी कार्यालय जला दिया गया. कलेक्ट्रेट जलने के बाद दो दिनों तक मलबा हटाने वाले मजदूर की ही गिरफ्तारी कर दी गई. ये कहते हुए कि उसका मोबाइल लोकेशन घटना स्थल पर मिल रहा है. जब कलेक्ट्रेट-एसपी कार्यालय जला दिया जा रहा है तो फिर सरकार को किस बात के लिए पैसा दिया जाए.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में विकास का एक काम भी नहीं हुआ है. विधायक तरस गए हैं कि उनके इलाक़ों में कम से कम एक ईट तो रख दी जाए. मुख्यमंत्री के शपथ लेने के पहले ही जंगल काटना शुरू हो गया. ये कौन सी अदृश्य शक्ति है. कोयले को लेकर हम पर 25 रुपए लेने का आरोप लगाया. सरकार में आ गए हैं. एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं हुई. अब बाजार में चर्चा है कि 50 रुपए लिया जा रहा है.

भूपेश बघेल ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में लोग चिंतित है कि इस प्रदेश का क्या होगा? बड़े बड़े विद्वान यहाँ बैठते थे. इस बात की चिंता करते थे कि प्रदेश का क्या होगा? प्रधानमंत्री आ रहे हैं. सीपत में पॉवर प्लांट का शिलान्यास करने वाले हैं. राज्य में बीस हज़ार मेगावाट के प्लांट शुरू होने वाले हैं. सिर्फ एससीईएल का कोयला काफ़ी नहीं होगा. नए खदान शुरू करने होंगे. जंगल में रहने वाले आदिवासी बेदख़ल होंगे.

उन्होंने कहा कि इतने पॉवर प्लांट लगेंगे तो यहाँ की भूमिगत जल की स्थिति क्या होगी. पूरे प्रदेश का तापमान बढ़ जाएगा. पॉवर प्लांट से निकलने वाले राखड़ का डिस्पोजल नहीं हो रहा है. यहाँ में खेत पानी की स्थिति कैसी होगी? यह बंजर हो जाएगा. जंगलों के उजड़ने का सबसे ज्यादा नुक़सान किसका होगा? सिर्फ आदिवासियों का. आदिवासी मुख्यमंत्री बना दिया गया है. सिर्फ़ ये बताने में लिए कि हमने आदिवासी मुख्यमंत्री दिया है.

भूपेश बघेल ने कहा कि ये स्थिति चिंताजनक है. राज्य की प्राकृतिक संपदा हमे अपनी पीढ़ियों के लिए बचाकर रखना चाहिए. प्रदेश में जो अदृश्य शक्ति काम कर रही है. ये बेहद चिंताजनक है. मंत्री तो मंत्री अधिकारी कह रहे हैं कि दिल्ली से फ़ोन आएगा तो काम होगा. एक नंबर, दो नंबर से बात करा दो. काम हो जाएगा. राज्य के किसी मंत्री के कहने पर कोई काम नहीं होता. पिछली सरकार की योजनाओं से सरकार बाहर नहीं निकल पा रही है.

उन्होंने अपना हमला जारी रखते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में स्थिति क्या है? 40 लाख मीट्रिक टन धान की बाज़ार में नीलामी की जा रही है. जब 3100 रुपए देने का फ़ैसला लिया गया है तो भारत सरकार की ज़िम्मेदारी है कि पूरा चावल ले. हमारी सरकार में वक्त नियम कुछ और था और आज नियम बदल दिया गया है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सदन में महानदी जल विवाद पर चर्चा हुई थी. महानदी जोड़ने की बात ओडिशा सरकार की आपत्ति की वजह से धरी की धरी रह गई. अब तो ओडिशा में भाजपा की सरकार है और दिल्ली में भी भाजपा की सरकार है. ऐसे में अब इस विवाद को समाप्त कर लिया जाना चाहिए. यदि नहीं कर पाए तो ये आपकी नाकाबिलियत है.

भूपेश बघेल ने कहा कि धान के मुद्दे पर हम आपसे साथ प्रधानमंत्री के पास चलेंगे. पूरा सदन चलेगा. 40 लाख मीट्रिक टन चावल बाजार में बेचने से साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपए का नुक़सान होगा. यदि आज आप लड़ेंगे तो आगे नतीजे आयेंगे. दलगत भावना से ऊपर उठकर हम काम करेंगे.

नक्सलियों के साथ लखमा का कनेक्शन निकालने पर भड़के बैज, कहा –

रायपुर- ईओडब्ल्यू ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा का नक्सलियों के साथ कनेक्शन निकाला है. इस पर पीसीसी चीफ दीपक बैज भड़क उठे. उन्होंने बदले की भावना से आदिवासी नेताओं को टारगेट करने का आरोप बीजेपी पर लगाया है. बैज ने कहा, शराब से पेट नहीं भरा तो भाजपा नक्सलियों से कनेक्शन खोज रही. ईडी के बाद Eow की एंट्री हुई है, ताकि उन्हें बेल न मिले.

कुंभ नहीं जाने को लेकर कांग्रेस की बैठक में चर्चा पर सियासत शुरू हो गई है. गृह मंत्री विजय शर्मा के बयानों का पीसीसी चीफ दीपक बैज ने पलटवार करते हुए गृहमंत्री को दूसरों को आईना दिखाने के बजाय अपना विभाग संभालने की हिदायत दी. बैज ने बिहार में बेची गई बच्चियों के लिए प्रदेश की महिलाओं से माफी मांगने की बात कही. उन्होंने कहा, बीजेपी मुद्दों से भटका रही. गृह मंत्री यदि खुद को ओपी चौधरी से ज्यादा ज्ञानी समझते हैं तो पहले अपना विभाग संभालें.


मुख्यमंत्री को दीपक बैज ने बताया मिट्‌ठू

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मिट्‌ठू बताते हुए पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, सीएम तोते की तरह अधिकारियों की स्क्रिप्ट रटकर बोलते हैं. बस्तर पंडुम मनाने को लेकर बैज ने कहा, सीएम बस्तर में पंडुम मना रहे. क्या सीएम को पता नहीं पंडुम क्या है? सिर्फ़ अधिकारियों की दी गई स्क्रिप्ट तोते की तरह पढ़ देते हैं.