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इंसान कितनी हद तक सह सकता है तनाव? जानिए इससे बचने के आसान उपाय!

हर इंसान का तनाव सहने की क्षमता अलग होती है। यह उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति, जीवन के अनुभव, और सहारा देने वाले लोगों पर निर्भर करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब हमारा दिमाग किसी स्थिति को "खतरा" मानता है, तो शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो हमें "लड़ो या भागो" मोड में डालते हैं।

हालांकि, अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे, तो यह दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2. लंबे समय तक तनाव के नुकसान

अगर तनाव का सही समय पर समाधान न किया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जैसे:

हाई ब्लड प्रेशर

डायबिटीज

डिप्रेशन और एंग्जायटी

हार्ट डिजीज

इम्यून सिस्टम कमजोर होना

3. तनाव से बचने के आसान और कारगर तरीके

✅ 1. समय प्रबंधन (Time Management)

कामों को प्राथमिकता दें और अनावश्यक चीजों से बचें।

एक ही समय में बहुत सारे काम करने से बचें।

✅ 2. मेडिटेशन और योग

रोज़ाना 10-15 मिनट मेडिटेशन करने से मन शांत रहता है और मानसिक ऊर्जा बढ़ती है।

योग से शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है।

✅ 3. शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise)

रोज़ाना टहलना, दौड़ना, या जिम जाना तनाव को कम करने में मदद करता है। 

व्यायाम से "एंडॉर्फिन" हार्मोन रिलीज होता है, जो आपको खुश महसूस कराता है।

✅ 4. अच्छी नींद (Quality Sleep)

रोज़ 7-8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है।

स्क्रीन टाइम कम करें और सोने से पहले रिलैक्सिंग म्यूजिक सुनें या किताब पढ़ें।

✅ 5. अपनों से बात करें

जब भी तनाव महसूस हो, अपने परिवार या दोस्तों से खुलकर बात करें।

मन में बातें दबाने से तनाव और बढ़ सकता है।

✅ 6. खुद के लिए समय निकालें

अपनी पसंद का काम करें — संगीत सुनें, पेंटिंग करें, या घूमने जाएं।

अपनी खुशी को प्राथमिकता देना भी बेहद जरूरी है।

तनाव जीवन का हिस्सा है, लेकिन इसे सही तरीके से संभालना जरूरी है। अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना कि अपनी जिम्मेदारियों को निभाना।

न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी, मुंबई में सुरक्षित उतारा गया


नई दिल्लीः- मुंबई से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट को सोमवार को बम से उड़ाने की धमकी दी गयी. इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल विमान को मुंबई वापस लौटने का निर्देश दिया. 320 से अधिक लोगों को लेकर जा रहा यह विमान सुरक्षित रूप से मुम्बई में उतार लिया गया. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इसकी अनिवार्य जांच की जा रही है. इस दौरान एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मची थी.

क्या कहा एयर इंडिया के अधिकारीः 

एयर इंडिया ने एक बयान में कहा, "आज 10 मार्च 2025 को मुंबई-न्यूयॉर्क (जेएफके) उड़ान भरने वाली एआई 119 में उड़ान के दौरान एक संभावित सुरक्षा खतरे का पता चला. आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद, विमान में सवार सभी लोगों की सुरक्षा के हित में विमान को वापस मुंबई ले जाया गया."

अब विमान फिर कब उड़ान भरेगाः

एयरलाइन के अनुसार, भारतीय समय के अनुसार विमान सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर मुम्बई में सुरक्षित उतरा. विमान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अनिवार्य जांच की जा रही है. एयर इंडिया अधिकारियों को अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं. उड़ान का समय बदल दिया गया है. अब विमान 11 मार्च की सुबह 5 बजे उड़ान भरेगा.

यात्रियों के लिए क्या व्यवस्था की गयीः

एयरलाइन ने कहा कि सभी यात्रियों को तब तक होटल में आवास, भोजन और अन्य सहायता की पेशकश की गई है. बोइंग 777-300 ईआर विमान में 19 चालक दल के सदस्यों सहित 322 लोग सवार थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विमान में बम होने की धमकी मिली थी. विमान के एक शौचालय में एक नोट मिला.

एलन मस्क ने अपने 14वें बच्चे का स्वागत किया, बेटे का नाम सेल्डन लाइकर्गस रखा गया


नयी दिल्ली : टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर अपने '14वें' बच्चे का स्वागत किया है. उनकी पत्नी शिवोन जिलिस ने अपने चौथे बच्चे के नाम का बताया है. उन्होंने अपने तीसरे बेटे आर्केडिया के जन्मदिन पर दुनिया के सामने चौथे बच्चे के नाम का खुलासा किया.पिता एलन मस्क ने पत्नी की पोस्ट पर दिल वाली इमोजी भेजकर रिप्लाई किया.

दरअसल, एलन मस्क और शिवोन जिलिस के चार बच्चे हैं. उन्होंने अभी तक अपने तीसरे और चौथे बच्चे की पहचान छिपाकर रखी थी. अब दोनों ने तीसरे बच्चे के जन्मदिन पर दुनिया के सामने तीसरे और चौथे बच्चों के नाम बताने का फैसला किया है.

न्यूरालिंक की एग्जीक्यूटिव और एलन मस्क की पार्टनर शिवोन जिलिस ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे के नाम की पुष्टि की है. सेल्डन उनका चौथा बच्चा है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'एलन के साथ बात की, और खूबसूरत आर्केडिया के जन्मदिन पर हमें लगा कि हमारे अद्भुत और अविश्वसनीय बेटे, सेल्डन लाइकर्गस के बारे में सीधे बताना बेहतर होगा. वो एक ताकतवर तूफान की तरह मजबूत है, लेकिन दिल सोने सा निर्मल है. उससे बहुत प्यार है." रिपोर्टों के अनुसार, कपल ने 2024 की शुरुआत में अपने तीसरे बच्चे अर्काडिया का स्वागत किया.

दिल्ली एयरपोर्ट पर भी मिलेगी ₹10 में चाय और ₹20 में समोसा, जल्द शुरू होगी यात्री कैफे की सुविधा

नयी दिल्ली : एयरपोर्ट्स पर खाने-पीने की चीजों की कीमत बहुत ज्यादा है और इस कारण अधिकांश यात्री इन्हें खरीद नहीं पाते हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। कोलकाता के बाद अब चेन्नई में भी उड़ान यात्री कैफे की शुरुआत हो चुकी है। इसमे 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में समोसा मिल रहा है।

कोलकाता के बाद चेन्नई में भी शुरू हुआ यात्री कैफे

₹10 में चाय और पानी तथा ₹20 में मिलेगा समोसा

इसके बाद दिल्ली-मुंबई में भी हो सकती है शुरुआत.

कोलकाता के बाद अब चेन्नई एयरपोर्ट पर भी उड़ान यात्री कैफे खोला गया है।

एयरपोर्ट पर चाय और समोसे का रेट देखकर ज्यादातर यात्री दूर से देखकर रह जाते हैं। लेकिन सरकार के प्रयास से अब आम आदमी भी एयरपोर्ट पर चाय और समोसे का मजा ले सकते हैं। एयरपोर्ट पर अब 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में समोसा मिलना शुरु हुआ हो गया है। 

यात्री कैफे की शुरुआत 19 दिसंबर को कोलकाता एयरपोर्ट से हुई थी और अब चेन्नई में भी यह कैफे खुल गया है। माना जा रहा है कि कोलकाता और चेन्नई के बाद अब दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स का भी नंबर आ सकता है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि यह कैफे चेन्नई एयरपोर्ट के डोमेस्टिक टर्मिनल-1 पर चेक-इन से पहले एरिया में खोला गया है। यहां 10 रुपये में चाय, 10 रुपये में पानी की बोतल और 20 रुपये में समोसा, कॉफी और मिठाई खरीदी जा सकती है। 

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार को चेन्‍नई एयरपोर्ट पर उड़ान यात्री कैफे का उद्घाटन किया। पहला उड़ान यात्री कैफे 19 दिसंबर को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया गया था।

हिट हो गया '10 रुपये की चाय' का फॉर्मूला, इस एयरपोर्ट पर बने कैफे में लग रही ग्राहकों की भीड़, कहां है यह?

कहां खुला था पहला यात्री कैफे

एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कोलकाता एयरपोर्ट की 100वीं वर्षगांठ पर यात्रियों को देश के पहले उड़ान यात्री कैफे का गिफ्ट दिया था।

 कोलकाता एयरपोर्ट के डिपार्चर एरिया में यात्री उड़ान कैफे खोला गया है। इसमें चाय, कॉफी, स्नैक्स और पानी जैसी चीजें सस्ती कीमत पर बेची जा रही है। 

इस योजना का मकसद हवाई यात्रा को अधिक किफायती बनाना है, क्योंकि भारत में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। कोलकाता एयरपोर्ट पर देश के पहले उड़ान यात्री कैफे को मिली सफलता के बाद अब देश के दूसरे हवाई अड्डों पर भी उड़ान यात्री कैफे खोले जा सकते हैं।

पिछले साल सितंबर में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने एयरपोर्ट्स में सामान की महंगाई पर चिंता जताई थी। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'कोलकाता हवाई अड्डे पर गर्म पानी और टी बैग से बनी चाय की कीमत 340 रुपये है। कुछ साल पहले चेन्नई हवाई अड्डे पर गर्म पानी और टी बैग की कीमत 80 रुपये है।' 

दिल्ली एयरपोर्ट पर पानी की बोतल की कीमत 50 रुपये है जबकि समोसा 150 रुपये में मिलता है। इसी तरह डोसे की कीमत 300 रुपये और पाव भाजी की कीमत 250 रुपये है।

डिप्रेशन और एंग्जायटी को एक न समझें,जानिए क्या हैं इनमें अंतर


डिप्रेशन (अवसाद) और एंग्जायटी (चिंता) दो मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो अक्सर एक साथ देखी जाती हैं। लेकिन दोनों में महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। कई लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो सकती है। इस लेख में हम डॉक्टरों की राय के आधार पर इन दोनों मानसिक स्थितियों के बीच अंतर को समझने की कोशिश करेंगे।

1. डिप्रेशन और एंग्जायटी: क्या हैं ये मानसिक स्थितियां?

डिप्रेशन (अवसाद) क्या है?

डिप्रेशन एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदासी, निराशा और रुचिहीनता महसूस करता है। यह सिर्फ कुछ दिनों की उदासी नहीं होती, बल्कि हफ्तों, महीनों या सालों तक बनी रह सकती है।

लक्षण:

हर समय उदासी या खालीपन का अनुभव

आत्मग्लानि और निराशा

किसी भी चीज़ में रुचि न होना

ऊर्जा की कमी और थकान

नींद की समस्या या ज्यादा सोना

आत्महत्या के विचार आना

एंग्जायटी (चिंता) क्या है?

एंग्जायटी एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक चिंता और भय महसूस करता है। यह चिंता सामान्य नहीं होती, बल्कि हद से ज्यादा होती है और व्यक्ति को सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होने लगती है।

लक्षण:

हर समय घबराहट और बेचैनी

बिना कारण डर और घबराहट महसूस करना

हृदय की धड़कन तेज होना

अत्यधिक पसीना आना

नींद न आना या बार-बार डर के साथ जागना

मांसपेशियों में तनाव और कंपकंपी

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में 3 अंतर जान लें

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में 3 बड़े अंतर होते हैं। 

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में पहला अंतर

एंग्जाइटी में इंसान बहुत ज्यादा ओवरथिंकिग करता है। ऐसे इंसान लगातार सोचते रहते हैं। हर छोटी-बड़ी चीज के बारे में उनके मन में थॉट प्रोसेस होता रहता है।

जबकि जिस इंसान को डिप्रेशन होता है ऐसे इंसान के मन में किसी तरह के विचार नहीं आते। ऐसे इंसान का दिमाग पूरी तरह से खाली हो जाता है वो सोचता ही नही हैं।

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में दूसरा अंतर

एंग्जाइटी जिस इंसान को होती है ऐसे इंसान नॉर्मली बिल्कुल ठीक दिखते हैं। लेकिन जैसे ही कोई अनएक्सपेक्टेड चीज होती है या फिर कुछ घटना हो गई तो ऐसे लोग काफी घबरा जाते हैं और पैनिक हो जाते हैं।

डिप्रेशन वाले इंसान को बाहर की दुनिया में हो रहे अच्छे-बुरे किसी भी घटना से कोई फर्क नहीं पड़ता। वो हमेशा उदास और दुखी ही महसूस करता है। चाहे खुशी की सिचुएशन ही क्यों ना हो।

एंग्जाइटी और डिप्रेशन में तीसरा अंतर

एंग्जाइटी जिस भी इंसान को होती है वो खुद को काफी इंपार्टेंट समझता है। उसे लगता है कि वो ही हर किसी का सेंटर है। उसके बगैर घर, परिवार, ऑफिस में कोई भी काम नहीं हो पाएगा। उसे अपने परिवार की हमेशा चिंता रहती है कि वो नहीं होगा तो उसके परिवार का क्या होगा। ऐसे इंसान खुद को हमेशा सेफ रखना चाहते हैं। इसलिए वो ठीक रहना चाहते हैं।

जबकि जिस इंसान को डिप्रेशन होता है वो खुद को यूजलेस समझता है। उसे लगता है कि वो किसी काम का नही है और वो ठीक नहीं होना चाहता। डिप्रेशन वाले इंसान को ठीक करने का मोटिवेशन देना भी जरूरी होता है।

एंग्जाइटी और डिप्रेशन के इन लक्षणों से दोनों में अंतर को अच्छी तरह से समझा जा सकता है।

क्या डिप्रेशन और एंग्जायटी एक साथ हो सकते हैं?

हाँ, कई लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी एक साथ देखी जाती हैं। एक स्थिति दूसरी को बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से डिप्रेशन में है, तो वह अपने भविष्य को लेकर चिंता करने लगेगा, जिससे एंग्जायटी बढ़ सकती है।

इलाज और समाधान

डिप्रेशन और एंग्जायटी दोनों का इलाज संभव है। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेने पर इनका प्रभावी इलाज किया जा सकता है।

चिकित्सकीय इलाज:

मनोचिकित्सक से सलाह लें – डॉक्टर सही दवाएं और थेरेपी सुझा सकते हैं।

साइकोथेरेपी (CBT) – यह एक थेरेपी है जो नकारात्मक सोच को बदलने में मदद करती है।

मेडिटेशन और एक्सरसाइज – योग और व्यायाम तनाव को कम करने में सहायक होते हैं।

अच्छी दिनचर्या अपनाएं – सोने और खाने का समय तय करें, इससे मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है।

डिप्रेशन और एंग्जायटी को एक जैसा समझने की गलती न करें। दोनों अलग-अलग मानसिक स्थितियां हैं, जिनका सही समय पर इलाज करवाना जरूरी है। यदि आप या आपके किसी करीबी को इस तरह की समस्या हो रही है, तो जल्द से जल्द मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। सही इलाज और देखभाल से व्यक्ति एक खुशहाल जीवन जी सकता है।

दिल्ली भगदड़ मामला: आरपीएफ रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, अव्यवस्था और गलत घोषणाएं बनी हादसे की वजह


नई दिल्ली: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 फरवरी की रात हुई भगदड़ की जांच रिपोर्ट रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सबमिट कर दी है. आरपीएफ ने इस रिपोर्ट में हादसे के पीछे के कई कारणों का खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे स्टेशन पर भीड़ व प्रबंधन में गंभीर चूक हुई. वहीं, ट्रेन के प्लेटफार्म बदलने की घोषणाओं ने यात्रियों में भ्रम और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ.

प्लेटफार्म बदलने की घोषणा से मची अफरा-तफरी:

आरपीएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि रात 8:45 बजे तक स्टेशन पर पहले से ही भीड़ नियंत्रण की समस्या थी. इसी दौरान अनाउंसमेंट हुई कि प्रयागराज स्पेशल ट्रेन प्लेटफार्म 12 से रवाना होगी. इस घोषणा के तीन मिनट बाद ही दूसरा अनाउंसमेंट कर दिया गया कि ट्रेन अब प्लेटफार्म नंबर 16 से रवाना होगी. इससे घबराए यात्री जल्दी से प्लेटफार्म बदलने के लिए सीढ़ियों की ओर भागे, जिससे फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) नंबर 2 और 3 पर यात्रियों की भीड़ का दबाव बढ़ गया और भगदड़ मच गई.

भारी भीड़ और अव्यवस्था: 

आरपीएफ रिपोर्ट के मुताबिक रात 8 बजे शिवगंगा एक्सप्रेस के प्लेटफार्म 12 से रवाना होने के बाद स्टेशन पर बहुत ज्यादा भीड़ हो गई थी. इसके चलते प्लेटफार्म नंबर 12, 13, 14, 15 और 16 तक जाने वाले रास्ते जाम हो गए थे. पहले से ही इन प्लेटफार्मों पर यात्रियों की भारी भीड़ थी. दरअसल, मगध एक्सप्रेस (प्लेटफार्म 14), उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (प्लेटफार्म 15) और प्रयागराज एक्सप्रेस के यात्री भी वहीं खड़े थे.

लचर प्रबंधन व्यवस्था:

आरपीएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब भीड़ बढ़ने लगी, तो स्टेशन डायरेक्टर को सुझाव दिया गया कि प्रयागराज स्पेशल ट्रेन को जल्दी रवाना किया जाए और टिकट बिक्री बंद कर दी जाए, लेकिन टिकट बिक्री देर से रोकी गई, जिससे यात्रियों की भीड़ और बढ़ गई. 

भगदड़ रात 8:48 बजे हुई. दिल्ली फायर डिपार्टमेंट को दिल्ली पुलिस से रात 9:55 बजे सूचना मिली, यानी लगभग 40 मिनट की देरी हुई. रेलवे ने अपने आधिकारिक बयान में घटना का समय 9:15 बजे बताया, जिससे इस देरी पर सवाल उठ रहे हैं.

सीसीटीवी फुटेज आया सामने:

आरपीएफ की रिपोर्ट के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि जैसे ही प्लेटफार्म बदलने की घोषणा हुई, यात्री घबराकर भागने लगे. इस दौरान एफओबी-2 और एफओबी-3 पर यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई. इसी बीच, दूसरी ट्रेनों के यात्री सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे. जब दोनों तरफ से यात्री एक-दूसरे से टकराए, जिससे धक्का-मुक्की हुई, कुछ यात्री फिसलकर गिर पड़े और भगदड़ मच गई.

रेलवे की लापरवाही पर उठ रहे सवाल:

आरपीएफ की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. अगर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले से उचित इंतजाम किए जाते और ट्रेन के प्लेटफार्म बदलने की घोषणा सोच-समझकर की जाती तो ये हादसा टल सकता था. वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस घटना के बाद 60 रेलवे स्टेशनों पर स्थायी और अस्थायी यात्री होल्डिंग क्षेत्र बनाने का ऐलान किया है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.

आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी पर सवाल:

रेलवे बोर्ड ने इस हादसे की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर केंद्र और राज्य सरकारों से विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है. यह समिति भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देगी. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुआ यह हादसा रेलवे के भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की उसकी तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हावड़ा में दिल दहला देने वाली घटना आई सामने 5 दिनों तक मां के शव के साथ रहा बेटा


हावड़ा: पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एक बेटा के अपनी मां के शव के साथ पांच दिनों तक रहने का मामला सामने आया है. घटना हावड़ा के बालटिकुरी के जेलेपारा की है.घटना के बारे में बताया जाता है कि सोमवार को घर से बदबू आने पर पड़ोसियों को शक हुआ. इस पर उन्होंने इसकी जानकारी दासनगर पुलिस स्टेशन को दी. 

इस बारे में पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान रासमनी नंदी के रूप में हुई है और उसका बेटा सूरज नंदी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है. मां और बेटा दोनों ही इसी इलाके में रहते थे वहीं रासमनी लंबे समय से बीमार चल रही थी.दुर्गंध आने के अलावा घर की खिड़कियां व दरवाजे बंद होने के बाद पड़ोसियों ने मृतक के रिश्तेदारों के साथ-साथ पुलिस को भी इसकी सूचना दी थी. 

वहीं पुलिस घर का दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची तो दंग रह गई. इस दौरान महिला रासमनी का शव बिस्तर पर पड़ा था. शव पर सड़न के निशान थे. वहीं चारपाई के पास ही सूरज पड़ा था. फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

पुलिस के मुताबिक रासमनी की मौत पांच दिन पहले हुई थी और तभी से उसका बेटा सूरत शव के साथ रह रहा था. इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि मां और बेटा कुछ दिनों से नहीं दिखे और घर पर ताला लगा हुआ था. इस वजह से हो सकता है कि बीमार मां की मौत इसी बीच हो गई हो.

आज का इतिहास:1915 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने पहली बार किया था शांति निकेतन का दौरा

नयी दिल्ली : 17 फरवरी का इतिहास महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि 1915 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने पहली बार शांतिनिकेतन का दौरा किया था।

1931 में 17 फरवरी के दिन ही वायसराय निवास में लॉर्ड इरविन ने गांधी जी का स्वागत किया था।

2014 में आज ही के दिन चुनाव आयोग ने अंतिम चरण के मतदान खत्म होने तक एग्जिट पोल के प्रसारण पर रोक लगा दी थी।

2007 में 17 फरवरी के दिन ही अमेरिका की तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इराक से सैनिकों को वापस बुलाए जाने की घोषणा की थी।

2005 में आज ही के दिन बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन ने भारतीय नागरिकता की मांग की थी।

2004 में 17 फरवरी के दिन ही फूलनदेवी हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त शमशेर सिंह राणा तिहाड़ जेल से फरार हो गया था।

1983 में आज ही के दिन नीदरलैंड ने संविधान को अंगीकार किया था।

1979 में 17 फरवरी के दिन ही चीन की सेना ने वियतनाम पर हमला किया था।

1972 में आज ही के दिन ब्रिटिश संसद ने यूरोपीय समुदाय में शामिल होने का प्रस्ताव पारित किया था।

1947 में 17 फरवरी के दिन ही सोवियत संघ में ‘वायस ऑफ अमेरिका’ का प्रसारण शुरू किया गया था।

1933 में आज ही के दिन अमेरिका की साप्ताहिक पत्रिका ‘न्यूजवीक’ प्रकाशित हुई थी।

1931 में 17 फरवरी के दिन ही वायसराय निवास में लॉर्ड इरविन ने गांधी जी का स्वागत किया था।

1915 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने पहली बार शांतिनिकेतन का दौरा किया था।

1882 में 17 फरवरी के दिन ही सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर पहला टेस्ट मैच खेला गया था।

1878 में आज ही के दिन सैन फ्रांसिस्को शहर में पहली बार टेलीफोन एक्सचेंज खोला गया था।

1867 में 17 फरवरी के दिन ही स्वेज नहर से पहला जहाज गुजरा था।

17 फरवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति

1963 में आज ही के दिन संयुक्त राज अमेरिका के उद्योगपति माइकल जॉर्डन का जन्म हुआ था।

1954 में 17 फरवरी के दिन ही प्रतिद्ध राजनीतिज्ञ व भारत के नवगठित 29वें राज्य तेलंगाना के प्रथम मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव का जन्म हुआ था।

1925 में आज ही के दिन भारतीय राजनीतिज्ञ श्यामाचरण शुक्त का जन्म हुआ था।

1899 में 17 फरवरी के दिन ही बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध कवि और लेखक जीवनानन्द दास का जन्म हुआ था।

1881 में आज ही के दिन भारत के विशिष्ठ निबंधकारों में से एक पूर्णसिंह का जन्म हुआ था।

1792 में 17 फरवरी के दिन ही प्रसिद्ध क्रांतिकारी बुधु भगत का जन्म हुआ था।

17 फरवरी को हुए निधन

2017 में आज ही के दिन हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा का निधन हुआ था।

2005 में 17 फरवरी के दिन ही प्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रकार पण्डित सीताराम चतुर्वेदी का निधन हुआ था।

1994 में आज ही के दिन गुजरात के मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल का निधन हुआ था।

1993 में 17 फरवरी के दिन ही भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिनल्यू का निधन हुआ था।

1988 में आज ही के दिन स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का निधन हुआ था।

1986 में 17 फरवरी के दिन ही भारतीय दार्शनिक जिद्दू कृष्णमूर्ति (जे कृष्णमूर्ति) का निधन हुआ था।

1943 में आज ही के दिन भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रथम उप-गवर्नर जेम्स ब्रेड टेलर का निधन हुआ था।

1883 में 17 फरवरी के दिन ही भारतीय क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फड़के का निधन हुआ था।

वाराणसी में महाकुंभ की भीड़: स्कूल 22 फरवरी तक बंद, ऑनलाइन पढ़ाई का निर्देश


वाराणसी : महाकुंभ के कारण एक तरफ प्रयागराज जाम में जकड़ा हुआ है तो दूसरी ओर प्रलट प्रवाह से वाराणसी में भी जाम की स्थिति भयावह हो गई है। इससे एक बारमहाकुंभ श्रद्धालुओं का वाराणसी में पलट प्रवाह, आठवीं तक के स्कूल 22 फरवरी तक बंद

महाकुंभ के प्रलट प्रवाह से वाराणसी में श्रद्धालुओं का रेला आना जारी है। इसे देखते हुए वाराणसी में शहरी क्षेत्र के आठवीं तक के स्कूलों को एक बार फिर बंद कर दिया गया है। 

बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन कराई जाएगी। इस बाबत वाराणसी के जिलाधिकारी ने आदेश जारी कर दिया है। डीएम के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी स्कूलों और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि डीएम के आदेश का सभी स्कूलों में कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

बीएसए अरविंद कुमार पाठक के अनुसार जिलाधिकारी ने नगर क्षेत्र के कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों को 22 फरवरी तक बंद करने और केवल ऑनलाइन क्लास चलाने का आदेश दिया है। बीएसए के अनुसार परिषदीय के साथ ही सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई बोर्ड पर भी आदेश लागू होगा। यह भी कहा गया है कि सभी खंड शिक्षा अधिकारी और सभी निजी के साथ मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापक/ प्रबंधक आदेश का पालन सुनिश्चित करेंगे।

वाराणसी में शनिवार से काशी तमिल संगमम् के शुभारंभ के मौके पर वीवीआईपी आगमन को लेकर अचानक डायवर्जन और प्रतिबंध से लगे ‘महाजाम’ में पूरा शहर और इसके इंट्री प्वाइंट वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इससे स्कूली बसें, एंबुलेंस समेत सभी वाहन सात घंटे जस के तस खड़े रहे।

सात घंटे फंसी रहीं स्कूली बसें

पड़ाव चौराहे के पास करीब 30 स्कूली बसें दोपहर 2 से लेकर रात 9 बजे तक यानी सात घंटे तक फंसी रहीं। बसों में बच्चे जाम से बिलबिला गए। शाम 7.30 बजे के बाद जैसे-तैसे रामनगर तो कुछ राजघाट से निकलनी शुरू हुईं। 

नमो घाट पर वीवीआईपी आगमन को लेकर पड़ाव चौराहे से राजघाट पुल पर आवागमन रोक दिया गया। सभी वाहनों को रामनगर के सामनेघाट पुल और विश्वसुंदरी पुल की ओर से रवाना करने का निर्देश जारी हुआ। इस बीच दोपहर बाद स्कूलों की छुट्टियां हुईं तो चौराहे के पास बसें जाम में जहां-तहां फंस गईं।

इसके बाद रात 9 बजे के बाद तक जाम लगा रहा। इसमें स्कूल बसों के अलावा सवारी वाहन, सरकारी और प्राइवेट बसें, ऑटो, ई-रिक्शा फंसे रहे। कैंट की रश्मि पाठक ने बताया कि बसों में फंसे बच्चे जाम से रोने लगे थे। सुमंत अग्रहरि का कहना था कि यह प्रशासनिक विफलता है, जिससे स्कूल की बसें 5 से 7 घंटे तक जाम में फंसी रहीं।

टेंगरा मोड़ से पड़ाव तक रेला

 ट्रैफिक रोकने से पड़ाव चौराहे से लेकर रामनगर, सामनेघाट पुल, टेंगरा मोड़ होते हुए विश्वसुंदरी पुल तक जाम लगा रहा। शाम करीब 5.30 बजे राजघाट पुल से आवागमन जारी होने के बाद भी रात 9 बजे तक जाम लगा रहा।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ने संत प्रेमानंद से पूछा - एनकाउंटर के पश्चाताप का क्या उपाय है?


वृंदावन:- पुलिस विभाग में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ने संत प्रेमानंद के दर्शन किए। उन्होंने संत से कहा, अब तक किए एनकाउंटर के पश्चाताप का उपाय पूछा। संत ने कहा थोड़ा समय निकालकर भगवान के चरणों में दें। प्रार्थना करें कि हमारी सेवाओं में जो चूक हुई तो क्षमा हो जाए। पाप मिले तो वह दूर हो जाए।

मेरठ में तैनात वरिष्ठ उपनिरीक्षक एवं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मुनेश सिंह इन दिनों मेरठ में तैनात हैं। बुधवार को वह संत प्रेमानंद के दर्शन करने उनके रमणरेती स्थित श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पर पहुंचे। संत प्रेमानंद के दर्शन के दौरान वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने कहा मैंने बहुत एनकाउंटर किए हैं, राष्ट्रपति से वीरता पदक मिला है।

पिछले साल 22 जनवरी को जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तभी बदमाश से मुठभेड़ में मेरे सीने में गोली लगी। ईश्वर की कृपा रही कि मैं बच गया। अब मुझे अपने कार्य पर पश्चाताप हो रहा है। पद पर ऐसे ही रहूं या प्रभु की शरण में जाऊं?

संत प्रेमानंद ने कहा मनुष्य जीवन का मूल कर्तव्य भगवत प्राप्ति है। सांसारिक धर्म निर्वाह के चक्कर में मूल कर्तव्य से वंचित हो जाएं तो ठीक नहीं। अगर आपका मन आपका साथ दे तो भगवत प्राप्ति के लिए समय निकालिए।

ग्वालियर से संत प्रेमानंद से मिलने आई किशोरी, स्वजन के सिपुर्द किया

वहीं दूसरी ओर, इंटरनेट मीडिया पर वृंदावन और संतों की बात सुन ग्वालियर की एक किशोरी स्वजन को बिना बताए वृंदावन संत प्रेमानंद से मिलने उनके आश्रम पहुंच गई। समाजसेविका ने उसे पुलिस के सिपुर्द कर दिया। स्वजन उसे अपने साथ ले गए।

समाजसेविका डा. लक्ष्मी गौतम ने बताया ग्वालियर के हजीरा क्षेत्र की एक किशोरी सोमवार को स्वजन को बिना बताए वृंदावन आ गई। स्वजन को यहां आकर उसने फोन कर यह जानकारी दी। स्वजन ने उन्हें इसकी जानकारी दी। मंगलवार शाम किशोरी को संत प्रेमानंद के आश्रम के बाहर बैठा पाया।

किशोरी का कहना था कि वह इंटरनेट मीडिया पर संत के प्रवचन से प्रभावित होकर यहां उनके दर्शन को आई थी। किशोरी कक्षा 10 की छात्रा है। पिता रिक्शा चलाते हैं। पुलिस ने किशोरी को उसके स्वजन को सौंप दिया।