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काशी में कब खेली जाएगी मसान की होली, कैसे शुरू हुई परंपरा?

भगवान शिव की नगरी काशी. कहा जाता है कि ये नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है. काशी में मसान की होली खेली जाती है. प्रयागराज में महाकुंभ के समापन के बाद नागा साधु भी मासन की खोली खेलने शिव की नगरी में पहुंचे हुए हैं. ये होली बड़ी अनोखी होती है. इस होली को मृत्यु, मोक्ष और शिव भक्ति से जोड़ा जाता है.

ये होली खासकर काशी के मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर खेली जाती है. ये दोनों ही शमशान घाट हैं. साधु और शिवजी के गण मसान होली खेलने के लिए शमशान स्थलों पर एकत्र होते हैं और चिता की राख से होली खेलते हैं. इस साल काशी में मसान की होली कब खेली जाएगी. मसान की होली खेलने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई. आइए विस्तार से जानते हैं.

कब खेली जाएगी मसान की होली ?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल रंगों की होली 14 मार्च 2025 को मनाई जाएगी. काशी में मसान की होली रंगभरी एकादशी के एक दिन बाद खेली जाती है. इस साल रंगभरी एकादशी 10 मार्च को है. ऐसे में इस साल मसान की होली 11 मार्च को खेली जाएगी.

मसान की होली खेलने की परंपरा

मसान की होली भगवान शिव और शमशान से संबंधित बताई जाती है. हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान शिव मोक्ष और संहार के देवता हैं. भगवान शिव शमशान के वासी हैं. माना जाता है कि भगवान शिव को शमशान बहुत प्रिय है. भगवान शिव शमशान में नृत्य करते हैं और अपने गणों के साथ होली खेलते हैं. मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान ने अपने गणों के साथ गुलाल से होली खेल ली थी, लेकिन उन्होंने भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व और प्रेत के साथ होली नहीं खेली. यही कारण है कि रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन मसान की होली खेली जाती है.

मणिकर्णिका घाट मोक्ष का द्वार

काशी में मणिकर्णिका घाट को मोक्ष का द्वार कहा जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव से मोक्ष प्राप्त होता है. रंगभरी एकादशी के अगले दिन यहां साधु संत चिता की राख से होली खेलते हैं. शिवालयों में विशेष पूजा की जाती है. भस्म और गुलाल उड़ाया जाता है. इस दौरान भगवान शिव के भजन गाए जाते हैं और तांडव नृत्य होता है.

क्या सच में गोविंदा-सुनीता आहूजा का 37 साल बाद हो रहा है तलाक? भतीजी आरती ने बताई सच्चाई

बॉलीवुड सुपरस्टार गोविंदा अब फिल्मों में कम नजर आते हैं लेकिन वे अपनी पर्सनल लाइफ की वजह से सुर्खियों में रहते हैं. हाल ही में एक्टर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. ऐसी अफवाह है कि वे अपनी पत्नी सुनीता आहूजा संग अपना 37 साल पुराना रिश्ता खत्म करने जा रहे हैं. इसपर तरह-तरह की बातें हो रही हैं और लोगों के रिएक्शन्स आ रहे हैं. अब इस खबर पर गोविंदा की भतीजी आरती सिंह ने भी रिएक्ट किया है और अपना पक्ष रखा है.

आरती ने क्या कहा?

माम-मामी गोविंदा और सुनीता की तलाक की अफवाहों के बारे में रिएक्ट करते हुए आरती ने कहा- मैं ईमानदारी से कहूं तो मैं अभी मुंबई नहीं हूं. तो मैं किसी के साथ भी टच में नहीं हूं. लेकिन मैं आपको ये बताना चाहती हूं कि ये पूरी तरह से गलत खबर है. ये सिर्फ अफवाह है क्योंकि उन दोनों की बॉन्डिंग बहुत स्ट्रॉन्ग है. बीते सालों में दोनों ने एक शानदार रिश्ता बनाया है. भला वे तलाक क्यों लेंगे. मुझे नहीं पता की ऐसी झूठी अफवाहें लोगों के पास कहां से पहुंचती हैं. लोगों को उनकी प्राइवेसी का बचाव करना चाहिए. यहां तक कि एक बार तो मेरे तलाक की भी खबरें फैल गई थीं. लेकिन इन सबसे कुछ नहीं होता है बस टेंशन बढ़ती है.

कैसे फैली अफवाह?

दरअसल एक साइट पर हाल ही में ये खबर बिना किसी फैक्ट चेक के छापी गई कि गोविंदा का तलाक हो रहा है. फिर बाद में वो खबर हटा भी दी गई. ऐसे में ये गलत खबर बिना फैक्ट चेक किए लोगों ने फैला दी. जबकी हाल ही में एक इंटरव्यू में सुनीता ने कहा था कि वो और गोविंदा अलग-अलग रहते हैं. दोनों का शेड्यूल मैच नहीं करता है इसलिए वे ऐसा करते हैं. लेकिन दोनों के बीच कैसा भी मनमुटाव नहीं है. गोविंदा और सुनीता की बात करें तो दोनों ने लव मैरिज की थी. दोनों की शादी के 37 साल हो चुके हैं. दोनों कई मौकों पर साथ में नजर आते हैं और अपनी पर्सनल लाइफ पर खुलकर बातें करते हैं.

भूकंप से दहलता भारत, 10 दिनों में दिल्ली, बिहार, असम में क्यों लगे झटके?

पिछले कुछ समय से देश के अलग-अलग राज्यों में भूकंप के तेज झटके महूसस किए गए. आमतौर पर इन भूकंप के झटकों को सुबह के समय महसूस किया गया. 17 फरवरी को दिल्ली में सुबह-सुबह 4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गए. इनका केंद्र दिल्ली-एनसीआर में ही था. आज भी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 फरवरी की सुबह असम में भूकंप से लोगों के बीच दहशत फैल गई.

अचानक से सोते-सोते लोग अपने-अपने घरों में उठकर बैठ गए. भूकंप के कारण लोग सहम गए. असम में ये भूकंप मोरीगांव जिले में रिक्टर पैमाने पर 5.0 तीव्रता का मापा गया. राज्य में आए इस भूकंप के झटके को कई अलग-अलग जगहों पर भी महसूस किया गया. भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक, बार-बार भूकंप आने के पीछे की वजह धरती में प्लेटों के बीच हो रही हरकत को बताया गया है.

पड़ोसी देशों में महसूस किए गए झटके

गुवाहाटी में भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए हैं. अन्य जगहों की भी निगरानी की जा रही है. यहां पर भूकंप सुबह करीब 2:25 बजे 16 किलोमीटर की गहराई पर आया. यहां पर आए भूकंप के झटकों का असर पड़ोसी देशों पर भी देखने को मिला. असम में आए भूकंप के झटके बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान और चीन में भी महसूस किए गए.

लगभग हर दिन आ रहा भूकंप

पिछले दस दिनों के भूकंप के आने के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के किसी न किसी राज्य में भूकंप झटके महसूस किए गए हैं. लद्दाख में भी बुधवार को भूकंप से सब कुछ कांप उठा. यहां शाम को 5 बजकर 36 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसकी तीव्रता रिक्टल स्केल पर 3.5 तक मापी गई. म्यामार में भी 26 फरवरी को 3.1 तीव्रता का भूकंप आया.

वहीं कोलकाता में 25 फरवरी को 5.1 तीव्रता का तेज भूकंप आया. कोलकाता में आए भूकंप का केंद्र बंगाल की खाड़ी में रहा. इस भूकंप के आने का समय भी सुबह ही रहा. 23 फरवरी को हिमाचल प्रदेश मंडी में भी भूकंप आने से लोग काफी डर गए. यहां पर भूकंप की तीव्रता 3.7 रही. 17 फरवरी को बिहार के सिवान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे.

क्यों आता है भूकंप?

भूकंप आने के पीछे यूं तो कई कारण हैं, जैसे ज्वालामुखी के उद्गार की स्थिति यानी जब ज्वालामुखी में विस्फोट होता है और गर्म मैग्मा बाहर की ओर निकलता है, इस स्थिति में भी भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं. जमीन के नीचे अगर किसी तरह का विस्फोट किया जाता है तो उस स्थिति में भी धरती में कंपन होता है और मानों ऐसा लगता है कि भूकंप आ रहा है.

भूकंप आने की सबसे आम और महत्वपूर्ण वजह है प्लेटों के बीच संचरण. टेक्टोनिक प्लेटों के बीच जब हलचल आता है तो भूकंप आता है. पृथ्वी की ऊपरी सतह कई छोटी-छोटी प्लेटों में बंटी हुई है, जिसमें यूरेशियन, भारतीय, अफ्रीकी, उत्तर अमेरिकी आदि प्लेटें शामिल हैं.

महाकुंभ का औपचारिक समापन: सीएम योगी करेंगे सफाई और मेला कर्मियों को सम्मानित

तीर्थराज प्रयाग में 45 दिनों तक चलने वाले महाकुंभ का आज औपचारिक समापन समारोह है. इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सफाई और मेला कर्मियों को सम्मानित करेंगे. इस कार्यक्रम में उनके साथ में दोनों डिप्टी सहित कई मंत्री भी शामिल होंगे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी सुबह 9 बजे प्रयागराज पहुंचेंगे. महाकुंभ में श्रेष्ठ काम करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करेंगे.

प्रयागराज में 144 साल बाद लगने वाले इस महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है. महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी. 26 फरवरी यानी महाशिवरात्रि को अंतिम अमृत स्नान था. इस दिन करीब 1.32 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया. सीएम योगी ने त्रिवेणी संगम में इस सफल आयोजन के लिए सभी साधु संतों और श्रद्धालुओं का आभार प्रकट किया.

महाशिवरात्रि के साथ ही खत्म हुआ महाकुंभ

वैसे तो महाशिवरात्रि के साथ ही महाकुंभ का समापन हो गया. मगर इसकी औपचारिक घोषणा आज की जाएगी. सीएम योगी आदित्यनाथ आज इस मौके पर सफाई और मेला कर्मियों को सम्मानित करेंगे. महाशिवरात्रि के दिनवायुसेना ने महाकुंभ और यहां आए श्रद्धालुओं को सलामी दी. इस मौके पर मेला प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से फूल भी बरसाए.

66 करोड़ लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

तीर्थराज प्रयागराज की पावन धरा त्रिवेणी की गोद में 66 करोड़ से ज्यादा लोगों ने बिना किसी भेदभाव के पवित्र स्नान किया. यह संख्या देश की लगभग आधी आबादी है. इस महाकुंभ ने प्रदेश और देश का सिर पूरे विश्व में ऊंचा किया है. महाकुंभ में इस बार 20 लाख से अधिक लोगों ने कल्पवास किया. महाकुंभ में 50 से अधिक देशों से श्रद्धालु आए थे.

नेपाल, भूटान, अमेरिका, इंग्लैंड, जापान समेत कई देशों से लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई. सरकार ने महाकुंभ में सुरक्षा के लिए चाक चौबंद इंतजाम किए थे. भगदड़ की छिटपुट घटनाएं हुईं लेकिन मेला परिसर में कोई बड़ी घटना नहीं हुई. राज्य के सभी आला अधिकारियों की देख रेख में यह महाकुंभ सफलपूर्वक संपन्न हुआ.

पंजाब से नई पारी का आगाज करेंगे केजरीवाल? राज्यसभा में हो सकती है एंट्री

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और नई दिल्ली सीट अरविंद केजरीवाल की हार के बाद अब उनके सियासी भविष्य को लेकर चर्चाएं हो रही हैं. केजरीवाल अपनी नई पारी का आगाज पंजाब से कर सकते हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि वे पंजाब से राज्यसभा जा सकते हैं. हालांकि अब तक इस बात को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है और पंजाब के ज्यादातर आम आदमी पार्टी के नेता, प्रवक्ता और सरकार के मंत्री इस बात को नकार रहे हैं.

सूत्रों के अनुसार कहा जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा की जगह ले सकते हैं. वहीं संजीव अरोड़ा उप-चुनाव के जरिए राज्य की राजनीति में एंट्री कर सकते हैं. खबरें हैं कि संजीव अरोड़ा आगामी लुधियाना पश्चिम सीट से विधानसभा उप-चुनाव लड़ सकते हैं. लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट विधायक गुरप्रीत गोगी के अकस्मात निधन की वजह से खाली हुई है. संजीव अरोड़ा पंजाब के एक बड़े बिजनेसमैन है और लुधियाना से भी संबंध रखते हैं. अरविंद केजरीवाल के साथ भी उनकी काफी नजदीकी मानी जाती है.

आम आदमी पार्टी ने दावों को नकारा

पंजाब विधानसभा का सत्र जारी है और इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति भी गरमा गई. जिसके बाद पंजाब सरकार के मंत्रियों और पार्टी के प्रवक्ताओं की फौज इस खबर का खंडन करने के लिए सामने आ गई. अरविंद केजरीवाल को पंजाब के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा की सीट खाली करवा कर राज्यसभा भेजे जाने की खबरों को आम आदमी पार्टी ने नकार दिया है.

पंजाब के माइनिंग मंत्री बरिंदर गोयल ने कहा कि ये महज अफवाह है जो कि कुछ विपक्षियों द्वारा फैलाई जा रही है ऐसी कोई बात अब तक पार्टी के पटल पर नहीं आई है और ना ही इस पर चर्चा हुई है.वहीं आम आदमी पार्टी के पंजाब के मुख्य प्रवक्ता नील गर्ग ने भी इन खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि अब तक पार्टी के लेवल पर इस तरह की कोई चर्चा ना तो हुई है और ना ही उनके पास ऐसी कोई जानकारी है.

पार्टी बोली- विपक्ष ध्यान भटकाने के लिए इस तक का मुद्दा उठा रही

पंजाब के वित्त मंत्री और पार्टी के सीनियर नेता हरपाल चीमा ने कहा कि पार्टी के स्तर पर अभी तक इस प्रकार की कोई बात नहीं हुई है. हरपाल चीमा ने कहा कि विपक्ष ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रहा है. विपक्ष के नेता विधानसभा के अंदर कोई मुद्दा उठा नहीं सकते ना ही कुछ बोल सकते हैं इसलिए इस प्रकार के मुद्दे गुमराह करने के लिए उठा रहे हैं.

वहीं पठानकोट से बीजेपी विधायक और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को पीछे के दरवाजे से पंजाब में लाने की तैयारी की जा रही है और इसी वजह से उनको राज्यसभा में पंजाब से भेजे जाने की चर्चा है, लेकिन ये पंजाब के लोगों के साथ सबसे बड़ा धोखा होगा क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी को मैंडेट भगवंत मान के चेहरे पर मिला था ना कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे लोगों के चेहरे पर जोकि दिल्ली में चुनाव हार गए हैं और अब पंजाब में राजनीति और पावर के लिए आना चाहते हैं. अश्विनी शर्मा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल पावर हंगरी आदमी है और वो सत्ता में आने के लिए ये सब कर रहे हैं.

बाजवा बोले- पिछले दरवाजे से पंजाब की सत्ता में दाखिल होना चाहते हैं

वहीं, कांग्रेस ने भी अरविंद केजरीवाल के पंजाब से राज्यसभा जाने के मामले पर कहा कि वो तो पहले से ही कह रहे हैं कि दिल्ली के नेता पंजाब को ओवरटेक करना चाहते हैं. पंजाब विधानसभा में नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि वो ये बात पहले भी कह चुके हैं कि अरविंद केजरीवाल पंजाब की सत्ता अपने हाथों में लेना चाहते हैं और अब ये बात साफ है कि केजरीवाल पिछले दरवाजे से पंजाब की सत्ता में दाखिल होना चाहते हैं.

वहीं कांग्रेस विधायक और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल पंजाब में आकर सीधे चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते जनता उन्हें मैंडेट दे देगी और पता लग जाएगा कि क्या वो पंजाब में राज कर सकते हैं या नहीं. परगट सिंह ने कहा कि भगवंत मान तो अपने किले यानी अपनी सरकारी कोठी में कैद है जबकि पूरी पंजाब सरकार तो अरविंद केजरीवाल और उनकी दिल्ली की टीम ही चल रही है.

भीम ने अपनी गदा से इस मंदिर का मोड़ दिया था द्वार, महाशिवरात्रि पर लगता है विशाल मेला, जानें पीछे की कहानी

महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. इस अवसर पर शिव मंदिरों की सजावट भी खास होती है. आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है. यह मंदिर न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि यहां की एक अनोखी परंपरा भी है.

बरसी महादेव मंदिर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बरसी गांव में स्थित है. यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है और यहां हर शिवरात्रि पर एक विशाल मेला लगता है. लाखों श्रद्धालु यहां आकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं और उनकी पूजा करते हैं. इस मंदिर का इतिहास बहुत ही दिलचस्प है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में दुर्योधन ने कराया था.

अनोखे स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध

एक रात, जब दुर्योधन सो रहे थे, तब भीम ने अपनी गदा से इस मंदिर के मुख्य द्वार को घुमा दिया. इस कारण मंदिर की दिशा पश्चिम और दक्षिण की ओर बदल गई. जब दुर्योधन सुबह उठे और मंदिर की दिशा देखी, तो वह हैरान रह गए. यह मंदिर आज भी अपने अनोखे स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसकी दिशा पश्चिम और दक्षिण में है.

देशभर से श्रद्धालु इस गांव में आते हैं

बरसी गांव का नाम भी एक रोचक कहानी से जुड़ा है. महाभारत युद्ध के दौरान श्री कृष्ण जब इस गांव में आए थे, तो उन्होंने इस गांव की तुलना बृज से की थी. इसके बाद से इस गांव का नाम बरसी पड़ा. आज भी शिवरात्रि और सावन के महीने में देशभर से श्रद्धालु इस गांव में आते हैं और भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं.

नहीं होती होलिका दहन

बरसी गांव में एक और विशेष परंपरा है, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. यहां के लोग होलिका दहन नहीं करते. इसके पीछे एक मान्यता है कि होलिका दहन करने से यहां की ज़मीन गर्म हो जाती है, और गर्म ज़मीन पर महादेव कैसे चल सकते हैं. इस कारण यहां के ग्रामीण होलिका दहन नहीं करते, जो एक अनूठी परंपरा है.

बरसी महादेव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है. यहां आने वाले श्रद्धालु इसे एक पवित्र स्थान मानते हैं, और हर साल शिवरात्रि पर यहां की रौनक और भी बढ़ जाती है.

कॉफी उद्यमी ने सरकारी स्कूल को दिया 2.18 करोड़ रुपये का दान, बनवाए 8 नए क्लासरूम और हॉल

कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले के मुदिगेरे तालुका में मौजूद एक सरकारी स्कूल को 10-20 लाख का नहीं बल्कि दो करोड़ से भी ज्यादा का डोनेशन मिला. स्कूल को ये डोनेशन एक कॉफी उद्यमी ने दिया. उन्होंने सरकारी स्कूल को 2.18 करोड़ रुपये का दान दिया. इतने बड़े उद्यमी होने के बावजूद वह अपने बेटे को भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहे हैं.

स्कूल को 2 करोड़ से ज्यादा का डोनेशन देने वाले कॉफी उद्यमी का नाम संतोष है, जो मुदरेमने कॉफी क्योरिंग यूनिट के मालिक हैं. उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और बाद में कॉफी उद्योग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. वह वर्तमान में कॉफी एक्सपोर्ट का बिजनेस कर रहे हैं. संतोष ने मुत्तिगेपुरा गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए 2.18 करोड़ रुपये डोनेट किए.

8 फर्निश्ड क्लासरूम बनाए गए

जिस स्कूल को संतोष ने पैसे डोनेट किए हैं. वह 1973 में स्थापित किया गया था, जिसमें आज 363 छात्र पढ़ते हैं. संतोष के दान की मदद से स्कूल में 8 फर्निश्ड क्लासरूम बनाए गए हैं. इस स्कूल के लिए बेहतरीन हॉल बना गया है, जिस 10 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है. दान की मदद से ‘विवेक योजना’ के तहत 56 लाख रुपये जुटाए गए.

12 कक्षाओं का उद्घाटन

इसके अलावा और क्लासरूम भी शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को इस स्कूल की कुल 12 कक्षाओं का उद्घाटन किया जाएगा. मुत्तिगेपुरा के इस स्कूल को कई लोगों से दान मिल रहा है. हाल ही में इस गांव के सऊदी अरब में रहने वाले व्यवसायी सिद्दीकी ने स्कूल को 60,000 रुपए का दान दिया और साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की शुद्ध पेयजल यूनिट भी स्कूल को दान किया.

कई जगह से आता है डोनेशन

इसके अलावा शर्लिन विलियम्स नाम की कंपनी ने स्कूल को 18 लाख रुपए और फर्नीचर दान दिया. यूथ फॉर सर्विस ने आठ कंप्यूटर और उनके इस्तेमाल के लिए टेबल मुहैया कराए. स्कूल परिसर और कक्षाओं में 20 सीसीटीवी कैमरे भी डोनेशन के जरिए लगाए गए हैं. मिड डे में बच्चों को मिलने वाले भोजन के लिए 5 लाख रुपये दान किए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 10.5 करोड़ रुपये की लागत से एक हाईटेक किचन भी स्कूल के लिए बनाने के लिए दान किए हैं. एसडीएमसी अध्यक्ष मधु कुमार ने कहा कि स्कूल राज्य में एक मॉडल बन रहा है और लोग स्कूल को मॉडल बनाने में मदद कर रहे हैं.

केरल में युवक ने की 6 लोगों की हत्या, पुलिस स्टेशन में आकर किया कबूलनामा

एक युवक पुलिस स्टेशन जाता है और कहता है कि उसने अपने परिवार के 6 लोगों की हत्या कर दी है और खुद भी चूहे मारने की दवाई खा ली है. ये मामला केरल के तिरुवनंतपुरम के वेंजारामूडू पुलिस स्टेशन से सामने आया है, जहां अफ्फान नाम के शख्स का कबूलनामा सुनकर हर कोई हैरान रह गया. उसने पुलिस स्टेशन जाकर सबके सामने कबूल किया कि उसने अपने छोटे भाई, प्रेमिका, दादी, चाचा-चाची समेत 6 लोगों को मार डाला है.

इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच की तो सामने आया कि आरोपी अफ्फान पेरूमाला का रहने वाला है. जब वह पुलिस स्टेशन पहुंचा, तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसका मुकन्नूर की रहने वाली फरजाना नाम की महिला के साथ प्रेम प्रसंग था, जिसे अफ्फान के परिवार वालों ने स्वीकार नहीं किया था. युवक इस बात से नाराज था. इसलिए उसने तीन अलग-अलग जगहों पर हत्या की वारदात को अंजाम दिया.

5 की हो गई मौत

अफ्फान ने छोटे भाई अहसान, प्रेमिका फरजाना, दादी सलमा, चाचा लतीफ, चाची शाहिदा और अपनी मां शमीना पर हमला किया. इनमें से 5 की मौत हो गई और अफ्फान की मां अस्पताल में भर्ती है. दरअसल अफ्फान और फरजाना का प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन दोनों के रिश्ते के लिए अफ्फान के घर वाले राजी नहीं थे. इसलिए एक दिन अफ्फान ने फरजाना को बुलाया और अपनी दादी के घर पहुंचा.

सबसे पहले दादी को मारा

दादी ने भी अफ्फान और फरजाना के रिश्ते को कबूल नहीं किया. अफ्फान के पास पैसे नहीं थे. उसने अपनी दादी से सोना गिरवी रखने के लिए कहा, तो उन्होंने इनकार कर दिया. इसके बाद अफ्फान ने सबसे पहले अपनी दादी को मौत के घाट उतारा. इसके बाद उसने फरजाना को भी मार डाला. इसके अलावा उसने अपने चाचा की हत्या संपत्ति को लेकर किसी विवाद के चलते की और फिर भाई को भी मार और मां पर भी हमला किया.

अफ्फान के पिता ने क्या बताया?

अफ्फान के पिता अब्दुल रहीम ने बताया कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, लेकिन यह उसके बेटे के लिए चिंता की बात नहीं थी. क्योंकि वह छह महीने के लिए विजिटिंग वीजा पर सऊदी गया था और हाल ही में खुशी-खुशी वहां से वापस लौटा था. हालांकि इन हत्याओं की असल वजह अभी तक सामने नहीं आ पाई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और अफ्फान का इलाज भी कराया जा रहा है.

महाराष्ट्र: मंत्रियों के पर्सनल स्टाफ की छुट्टी, सीएम फडणवीस ने दिए जांच के आदेश

महाराष्ट्र में महायुति सरकार में शामिल दलों के बीच फिर से मतभेद के संकेत मिल रहे हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. वे लगातार सख्त कदम उठा रहे हैं, जिसमें वे अपने मंत्रियों तक को नहीं छोड़ रहे हैं. इस बार उन्होंने मंत्रिमंडल के स्टाफ के जांच के आदेश दे दिए हैं. दूसरी तरफ स्टाफ के कई लोगों की छुट्टी भी कर दी है. एकनाथ शिंदे के कोटे से कृषि मंत्री बने माणिकराव कोकाटे के 3 निजी सचिवों को सीएम ऑफिस ने हटा दिया गया है

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद कई मंत्रियों के पर्सनल स्टाफ जैसे PA,ओएसडी,पीएस की स्क्रूटनी सीएम ऑफिस ने शुरू करवा दी है. इस कड़ी में मंत्रियों,केबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के सभी नजदीकी स्टाफ के क्रिमिनल बैकग्राउंड की जांच की जा रही है. सीएम के इस आदेश से नाराज कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने बयान दे दिया कि अब तो हमे अपने ओएसडी और निजी सचिव को अपॉइंट करने का अधिकार भी नहीं है.

कृषि मंत्री के इस बयान बयान का सीएम फडणवीस ने नसीहत देते हुए कहा है कि मंत्री जी को ये पता होना चाहिए कि सभी कैबिनेट और राज्य मंत्रियों के निजी स्टाफ को फाइनल करने का अधिकार सीएम के पास ही होता है. मंत्रीगण सिर्फ अपने स्टाफ की जानकारी सीएमओ दफ्तर में जमा करते है. उसको फाइनल करने का अधिकार सीएम के पास ही होता है.

गलत कामों में शामिल लोगों के नाम नहीं होंगे मंजूर – सीएम

मुख्यमंत्री PA और अन्य स्टाफ की नियुक्ति को लेकर कहा कि ये कोई नई बात नहीं है. मैंने कैबिनेट में साफ कहा था कि आप जो नाम चाहे भेज सकते हैं, लेकिन जिसका नाम गलत कामों में शामिल होगा उन्हें मैं मंजूरी नहीं दूंगा. अब तक मुझे 125 नाम मिले हैं, जिनमें से मैंने 109 को मंजूरी दे दी है.

बीजेपी और शिवसेना के बीच सब ठीक?

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. राजनीतिक गलियारों मे देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच चल रहे शीतयुद्ध की चर्चा जोरों पर है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में पारित हुए जालना जिले के खारपुडी के 900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की जांच के आदेश दिए हैं. सीएम बनने के बाद फडणवीस ने शिंदे सरकार के कई फैसले पलट दिए या फिर रद्द कर दिए, जिसके कारण बीजेपी और शिवसेना के बीच सबकुछ ठीक होने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.

खौफ ऐसा कि 200 साल से इस गांव में नहीं बना कोई दो-मंजिला मकान, डरावनी है वजह

देश की करीब 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. वहीं, देश में 7 लाख के लगभग गांव है. आज के आधुनिक युग में अधिकतर गांवों में पक्के और बहुमंजिला मकान देखे जा सकते हैं. लेकिन राजस्थान के जोधपुर से 30 किलोमीटर दूर एक अनोखा गांव ऐसा भी है, जहां पर एक मंजिल से ऊपर कोई मकान नहीं मिलेगा.इसके साथ ही लोक मान्यता के चलते गांव में आज से 200 साल पहले संत के कहे वचनों का पालन आज भी ग्रामीण कर रहे हैं.

गांव में आज भी ग्रामीण दो मंजिल का मकान नहीं बनाते हैं. साथ ही ऐसे कई समाज और जाति के लोग हैं, जिन्हें इस गांव में रहने की अनुमति नहीं है. इस गांव का नाम है डोली गांव और यह जोधपुर बाड़मेर हाईवे के नजदीक है. गांव में रहने वाले लोग दो मंजिल का मकान नहीं बनाते हैं. यहां ज्वेलर्स रात में नहीं रुकते. इस गांव में कच्चा तेल निकालने वाली कोई घाणी भी नहीं लगाई जाती. 200 साल पहले बैरागी महाराज की कही एक बात का यह गांव आज भी पालन कर रहा है.

गांव की 200 साल पुरानी कहानी

गांव के लोगों ने बताया कि 200 साल पहले डॉली गांव में हरिराम बैरागी महाराज तपस्या किया करते थे. उन्होंने अपनी तपस्या स्थल के समय एक सूखी लकड़ी की डंडी को लगाया, जो खेजड़ी के वृक्ष के तौर पर आज भी गांव में मौजूद है. राजा महाराजाओं के समय कविराज मुरारी लाल जी चारण, जोकि यहां के राजा के द्वारा ख्याति प्राप्त थे, उन्हें जोधपुर राजा द्वारा 12 गांव दिए हुए थे. इनमें यह डॉली गांव भी शामिल था. कवि मुरारी लाल ने बैरागी महाराज से गांव में करणी माता का मंदिर बनाए जाने की बात कही.

बैरागी महाराज ने लगाई फटकार

कवि मुरारी की बात सुनकर हरिराम बैरागी ने मंदिर बनाने से मना किया और कहा कि उन्होंने देवी को त्याग रखा है. इसके बाद बैरागी महाराज तीर्थ यात्रा के भृमण पर निकल गए. उनके जाने के बाद कविराज ने गांव में करणी माता का मंदिर बना दिया और मूर्ति का प्रतिष्ठान कर दिया. जब महाराज वापस आए और उन्होंने पूछा कि ‘आपने यह मंदिर क्यों बनाया?’ इसपर कविराज ने कहा कि ‘यह मेरी ईस्ट देवी हैं, उन्हें रोज मीठा प्रसाद चढ़ाऊंगा’ इस बात पर बैरागी महाराज को गुस्सा आ गया. उन्होंने कविराज को फटकारते हुए कहा कि ‘आपके पीछे कोई पानी देने वाला भी नहीं रहेगा.’

इसलिए नहीं बनते दो मंजिला मकान

बैरागी महाराज की फटकार के बाद कविराज के घर पर कभी बच्चों को किलकारी नहीं गूंजी और उनके वंश का अंत हो गया. 12 गांव की जागीदार को कोई संभालने वाला तक ना मिला. आज गांव में बनी सभी हवेलियां सरकार के अधीन हैं. उधर, बैरागी महाराज डोली गांव से रवाना हो गए. पूरा गांव उनसे रुकने की विनती करने लगा. लेकिन वह नहीं रुके. इस बीच लोगों की आस्था देखते हुए उन्होंने कहा कि ‘उनका समाधि स्थल ऐसे ही यहां रहेगा. मेरी समाधि के दिन पूरे गांव के आसपास दूध की धार देनी होगी, साथ ही मेरी समाधि से ऊपर किसी का घर नहीं होगा.’

दो मंजिला मकान बनाए पर आई आफत

इसके बाद गांव में केवल एक मंजिल ही मकान बनता है.कहा जाता है कि कुछ लोगों ने पौराणिक मान्यताओं को ना मानकर गांव में दो मंजिला मकान बनाए. लेकिन वे उस घर में रह नहीं पाए. किसी को अलग-अलग आवाज सुनाई देने लगीं, तो किसी के परिवार में अकाल मृत्यु होने लगी. कहीं किसी के परिवार में सभी बीमारी से ग्रसित हो गए. आखिरकार उन्हें गांव छोड़कर जाना पड़ा.