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कंसीव करने में आ रही हैं परेशानी? डाइट के साथ करें ये 3 एक्सरसाइज

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण कई कपल्स को कंसीव करने में दिक्कत हो रही है। सही डाइट और नियमित एक्सरसाइज की मदद से प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। यहां हम आपको 3 ऐसी एक्सरसाइज और डाइट टिप्स बता रहे हैं, जो आपकी फर्टिलिटी बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं।

1. योगासन: प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतरीन

योगासन तनाव को कम करने और शरीर में हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं।

बद्धकोणासन (Butterfly Pose):

यह पेल्विक एरिया में रक्त संचार बढ़ाने में मदद करता है।

सेतु बंधासन (Bridge Pose): यह गर्भाशय और ओवरी को मजबूत बनाता है।

शलभासन (Locust Pose):

 यह पेल्विक क्षेत्र को सक्रिय करता है और फर्टिलिटी को बढ़ावा देता है।

2. कार्डियो वर्कआउट: शरीर को एक्टिव रखें

नियमित कार्डियो एक्सरसाइज करने से वजन नियंत्रित रहता है और हार्मोनल संतुलन बेहतर होता है।

तेज चलना या जॉगिंग करें।

30 मिनट साइकलिंग करें।

डांसिंग भी एक अच्छा विकल्प है।

3. पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज:

ओवरी और गर्भाशय को मजबूत करें

पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने से कंसीव करने की संभावना बढ़ती है।

केगेल एक्सरसाइज:

यह गर्भाशय और पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करता है।

स्क्वाट्स:

यह ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और प्रजनन अंगों को मजबूत करता है।

डाइट टिप्स: प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए सही आहार

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फूड्स:

जैसे बेरीज, पालक, और नट्स।

फोलिक एसिड युक्त आहार: यह ओव्यूलेशन को बेहतर करता है। दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, और अंडे खाएं।

प्रोटीन और हेल्दी फैट्स: मछली, एवोकाडो, और नारियल तेल का सेवन करें।

प्रोसेस्ड फूड और शुगर से बचें।

नियमित जीवनशैली अपनाएं

सही नींद, तनावमुक्त जीवन और शराब-सिगरेट से दूरी फर्टिलिटी बढ़ाने में मदद करती है। एक्सरसाइज और डाइट को मिलाकर एक संतुलित जीवनशैली अपनाएं।

सुबह करें ये 5 योगासन, शुगर और BP रहेगा नियंत्रण में,डायबिटीज मरीजों के लिए योग सेहत का रामबाण उपाय

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां आजकल आम हो गई हैं। इनसे बचने के लिए योग एक प्रभावी उपाय हो सकता है। नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि ब्लड शुगर और BP को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। यहां 5 योगासन दिए गए हैं, जिन्हें शुगर के मरीज सुबह उठकर कर सकते हैं।

1. कपालभाति प्राणायाम

कैसे करें:

आरामदायक स्थिति में बैठें।

गहरी सांस लें और नाक से सांस को बाहर छोड़ें।

पेट को अंदर खींचें और इसे 5-10 मिनट तक दोहराएं।

लाभ:

यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है।

2. भुजंगासन (कोबरा पोज़)

कैसे करें:

पेट के बल लेट जाएं।

हाथों को कंधों के नीचे रखें और शरीर को ऊपर उठाएं।

10-15 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें।

लाभ:

यह पैंक्रियास को सक्रिय करता है, जिससे इंसुलिन का उत्पादन बेहतर होता है।

3. पवनमुक्तासन (विंड-रिलिविंग पोज़)

कैसे करें:

पीठ के बल लेटें।

एक पैर को घुटने से मोड़ें और उसे छाती की ओर लाएं।

हाथों से घुटने को पकड़ें और 10 सेकंड तक रुकें।

लाभ:

यह पाचन सुधारता है और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देता है।

4. वज्रासन

कैसे करें:

घुटनों के बल बैठें और एड़ी पर शरीर का भार डालें।

रीढ़ को सीधा रखें और गहरी सांस लें।

5-10 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।

लाभ:

यह भोजन के बाद शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करता है।

5. धनुरासन (बो पोज़)

कैसे करें:

पेट के बल लेटें।

दोनों पैरों को मोड़कर हाथों से पकड़ें।

शरीर को धनुष के आकार में खींचें।

10 सेकंड तक रुकें।

लाभ:

यह पैंक्रियास और लीवर को सक्रिय करता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है।

सावधानियां:

योग करते समय अपनी क्षमताओं का ध्यान रखें।

किसी भी योगासन को खाली पेट करें।

डॉक्टर या योग प्रशिक्षक से सलाह लेना न भूलें।

नियमित योगाभ्यास और संतुलित आहार से शुगर और BP को लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

अंजीर मोटापा और कब्ज का रामबाण इलाज, लेकिन दिन में 2-4 से ज्यादा न खाएं

अंजीर (Figs) एक ऐसा फल है जिसे पोषण और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी असरदार है। मोटापा, कब्ज, और पाचन से जुड़ी समस्याओं में अंजीर का नियमित सेवन लाभदायक हो सकता है। हालांकि, इसे सही मात्रा में खाना बेहद जरूरी है।

अंजीर के पोषण तत्व

अंजीर में फाइबर, विटामिन्स (A, C, K, और B6), मिनरल्स (पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, और आयरन) और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है।

मोटापे में अंजीर का लाभ

फाइबर से भरपूर:

अंजीर में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

कम कैलोरी, अधिक पोषण:

अंजीर कम कैलोरी वाला फल है, जो वजन घटाने के लिए उपयुक्त है। यह भूख को नियंत्रित करता है और अनावश्यक स्नैकिंग से बचाता है।

मेटाबॉलिज्म बढ़ाए:

अंजीर मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया में मदद मिलती है।

कब्ज में अंजीर का लाभ

प्राकृतिक रेचक:

अंजीर में मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर कब्ज को दूर करने में मदद करते हैं।

पाचन तंत्र को सुधारे:

अंजीर आंतों की गति को सुधारता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।

पानी की कमी दूर करे:

सूखे अंजीर को भिगोकर खाने से शरीर में पानी की कमी दूर होती है, जो कब्ज को रोकने में सहायक है।

एक दिन में कितने अंजीर खाएं?

मोटापे में:

वजन घटाने के लिए दिन में 2-3 अंजीर खाना पर्याप्त है। इसे नाश्ते में या स्नैक के रूप में खाया जा सकता है।

कब्ज में:

कब्ज के लिए 2-4 सूखे अंजीर रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं।

सावधानियां

अंजीर में प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीज इसे सीमित मात्रा में खाएं।

अधिक मात्रा में अंजीर खाने से दस्त या पेट की गड़बड़ी हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बाद ही अंजीर का सेवन करना चाहिए।

निष्कर्ष

अंजीर एक सुपरफूड है जो मोटापे और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसे सही मात्रा में और सही समय पर खाने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। हालांकि, इसे संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है ताकि इसके दुष्प्रभाव से बचा जा सके।

स्वस्थ जीवन के लिए अंजीर को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं, लेकिन संयम के साथ।

ओमेगा-3 युक्त फूड्स खाएं, दिल की बीमारियां दूर भगाएं।

दिल की सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है, खासकर मिडिल एज में, जब हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सही खानपान से आप अपने दिल को स्वस्थ रख सकते हैं। यहां हम आपको चार ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो हार्ट अटैक से बचाने में मददगार हो सकती हैं।

1. ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड्स

ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की धमनियों को साफ रखने में मदद करता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है। इसे आप इन खाद्य पदार्थों से प्राप्त कर सकते हैं:

मछली (साल्मन, टूना, मैकेरल)

अखरोट

चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स

2. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, केल, और मेथी जैसी हरी सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर होती हैं। ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करती हैं और धमनियों को मजबूत बनाती हैं।

पालक में नाइट्रेट्स होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं।

ये विटामिन K से भरपूर होती हैं, जो खून को थक्का बनने से रोकती हैं।

3. साबुत अनाज

साबुत अनाज जैसे जई (ओट्स), ब्राउन राइस, और क्विनोआ में फाइबर अधिक होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है।

रोजाना 2-3 सर्विंग साबुत अनाज खाने से दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

4. बेरीज (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी)

बेरीज में एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलिफेनॉल्स होते हैं, जो दिल की सूजन को कम करते हैं।

इनमें मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट्स ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं।

रोजाना एक मुट्ठी बेरीज खाने से दिल की सेहत में सुधार होता है।

अन्य सुझाव

नमक और चीनी का सेवन कम करें।

नियमित रूप से व्यायाम करें।

तनाव को नियंत्रित करने के लिए ध्यान (मेडिटेशन) और योग का अभ्यास करें।

इन सरल उपायों को अपनाकर आप न केवल हार्ट अटैक से बच सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और सक्रिय जीवन भी जी सकते हैं।

लहसुन से कम करें बैड कोलेस्ट्रॉल,जानिए नसों की सफाई के 3 असरदार तरीके

लहसुन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में एक प्राकृतिक उपाय है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और नसों की सफाई में मदद करते हैं।

आइए जानते हैं लहसुन को खाने के 3 प्रभावी तरीके:

1. कच्चा लहसुन खाली पेट खाएं कैसे करें सेवन:

सुबह खाली पेट 1-2 कली कच्चे लहसुन को चबाकर खाएं। इसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी पिएं।

फायदा:

कच्चा लहसुन सीधे बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और खून को पतला बनाकर नसों की सफाई करता है।

2. लहसुन और शहद का मिश्रण

कैसे बनाएं:

2-3 लहसुन की कलियों को पीसकर उसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं। इसे सुबह और रात सोने से पहले खाएं।

फायदा:

यह मिश्रण कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और दिल की सेहत को बेहतर बनाता है।

3. लहसुन का पानी

कैसे बनाएं:

2-3 लहसुन की कलियों को पानी में उबालें। इसे छानकर हल्का ठंडा होने पर सुबह खाली पेट पिएं।

फायदा:

यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और नसों में जमा गंदगी को साफ करता है।

सावधानियां:

लहसुन का अधिक सेवन पेट में जलन या गैस की समस्या पैदा कर सकता है।

यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो लहसुन का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।

लहसुन का नियमित और सही तरीके से सेवन करके आप न केवल बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि दिल की बीमारियों से भी बच सकते हैं।

सर्दियों में पपीता खाना कितना फायदेमंद? जानें फायदे और नुकसान

सर्दियों में पपीता खाना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे खाने से पहले इसके लाभ और हानि के बारे में जानना जरूरी है।

पपीता खाने के फायदे

पाचन में सुधार

पपीता में मौजूद पपैन एंजाइम पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।

इम्यूनिटी बढ़ाए

पपीता विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो सर्दियों में इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

त्वचा के लिए फायदेमंद

इसमें मौजूद विटामिन ए और ई त्वचा को नमी प्रदान करते हैं और सर्दियों में त्वचा को रूखा होने से बचाते हैं।

वजन घटाने में सहायक

पपीता में कैलोरी कम होती है और फाइबर अधिक होता है, जो वजन घटाने में मदद करता है।

हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

इसमें पोटैशियम और फाइबर की प्रचुरता होती है, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और हृदय को स्वस्थ रखता है।

पपीता खाने के नुकसान

अत्यधिक सेवन से नुकसान

पपीता का अधिक सेवन पेट में एसिडिटी या डायरिया जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

एलर्जी का खतरा

कुछ लोगों को पपीते से एलर्जी हो सकती है, जिससे त्वचा पर रैशेस या खुजली हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी

कच्चे पपीते में लेटेक्स होता है, जो गर्भाशय को उत्तेजित कर सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को कच्चा पपीता नहीं खाना चाहिए।

कैसे करें पपीते का सेवन?

पपीते को सुबह या दोपहर के समय खाएं।

ठंडे मौसम में इसे संतुलित मात्रा में ही खाएं।

ताजे और पके हुए पपीते का सेवन करें।

निष्कर्ष

सर्दियों में पपीता सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में और सही समय पर खाना चाहिए। यदि आपको किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

सर्दियों में गुड़ से बनाएं ये हेल्दी और टेस्टी चीज़ें, स्वाद के साथ बढ़ेगी सेहत

गुड़ सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्म रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। आइए जानते हैं, गुड़ से बनने वाली कुछ हेल्दी और स्वादिष्ट चीज़ों के बारे में।

1. गुड़ और तिल के लड्डू

गुड़ और तिल के लड्डू सर्दियों में सबसे लोकप्रिय मिठाई है।

सामग्री:

तिल: 1 कप

गुड़: 1/2 कप

घी: 2 चम्मच

विधि:

तिल को हल्का भून लें।

गुड़ को पिघलाकर उसमें तिल मिलाएं।

मिश्रण को ठंडा होने दें और लड्डू बना लें।

फायदे:

तिल और गुड़ शरीर को गर्म रखते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।

2. गुड़ की चाय

गुड़ की चाय स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होती है।

सामग्री:

पानी: 2 कप

गुड़: स्वादानुसार

चाय पत्ती: 1 चम्मच

अदरक: 1 टुकड़ा

विधि:

पानी में अदरक और चाय पत्ती डालकर उबालें।

गुड़ डालें और 2 मिनट तक पकाएं।

छानकर गर्मागर्म परोसें।

फायदे:

यह चाय पाचन में मदद करती है और शरीर को ठंड से बचाती है।

3. गुड़ का हलवा

यह हलवा खाने में स्वादिष्ट और सेहतमंद होता है।

सामग्री:

गेहूं का आटा: 1 कप

गुड़: 1/2 कप

घी: 3 चम्मच

पानी: 2 कप

विधि:

आटे को घी में भून लें।

गुड़ को पानी में घोलकर आटे में डालें।

धीमी आंच पर पकाएं और हलवा तैयार है।

फायदे:

यह हलवा ऊर्जा प्रदान करता है और सर्दियों में कमजोरी दूर करता है।

4. गुड़ और मूंगफली की चिक्की

यह बच्चों और बड़ों के लिए एक बेहतरीन स्नैक है।

सामग्री:

मूंगफली: 1 कप

गुड़: 1/2 कप

विधि:

मूंगफली को भून लें।

गुड़ को पिघलाकर उसमें मूंगफली मिलाएं।.

मिश्रण को चिकनी प्लेट में फैलाएं और ठंडा होने पर टुकड़े काट लें।

फायदे:

यह शरीर को गर्म रखती है और पोषण से भरपूर होती है।

5. गुड़ का परांठा

गुड़ का परांठा सर्दियों में एक स्वादिष्ट विकल्प है।

सामग्री:

गेहूं का आटा: 2 कप

गुड़: 1/2 कप

घी: परांठा सेंकने के लिए

विधि:

आटे में गुड़ मिलाकर गूंथ लें।

परांठा बेलकर घी में सेंकें।

इसे गर्मागर्म परोसें।

फायदे:

यह ऊर्जा प्रदान करता है और ठंड से बचाने में मदद करता है।

निष्कर्ष

गुड़ सर्दियों में न केवल स्वादिष्ट व्यंजन बनाने के लिए उपयोगी है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। इसे अपनी डाइट में शामिल करके आप सेहतमंद और ऊर्जावान रह सकते हैं।

Vitamin B12 की कमी से हड्डियां और मस्तिष्क होंगे कमजोर, बचाव के लिए इन खाद्य पदार्थों को करें शामिल


Vitamin B12 एक जरूरी पोषक तत्वों तत्व है, जो शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जिम्मेदार है। इसकी कमी से न केवल आपकी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, बल्कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

Vitamin B12 की कमी के लक्षण:

थकान और कमजोरी.

ऊर्जा की कमी और हमेशा थका हुआ महसूस करना।

हड्डियों की कमजोरी

ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।

मस्तिष्क पर प्रभाव

याददाश्त की कमजोरी, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन।

तंत्रिका तंत्र में समस्या

हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नता।

त्वचा और बालों पर असर

त्वचा का पीला पड़ना और बाल झड़ना।

Vitamin B12 की कमी से बचने के लिए खाएं ये चीजें:

डेयरी उत्पाद

दूध, दही और पनीर Vitamin B12 के अच्छे स्रोत हैं।

अंडा और मछली

अंडे की जर्दी और मछली जैसे सैल्मन और ट्यूना में भरपूर मात्रा में Vitamin B12 होता है।

मांस और चिकन

रेड मीट और चिकन में Vitamin B12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

फोर्टिफाइड फूड्स

फोर्टिफाइड अनाज और सोया उत्पाद उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो शाकाहारी हैं।

नट्स और बीज

सूरजमुखी के बीज और बादाम Vitamin B12 की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।

शाकाहारी लोगों के लिए सुझाव:

यदि आप मांस या डेयरी उत्पाद नहीं खाते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करके Vitamin B12 सप्लीमेंट्स का उपयोग करें।

निष्कर्ष

Vitamin B12 की कमी को नजरअंदाज करना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। स्वस्थ आहार और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से इस कमी को आसानी से रोका जा सकता है।

घी और गुड़ का सेवन करेगा हड्डियों को मजबूत, खून का हर कतरा होगा साफ


आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कमजोर हड्डियां और अशुद्ध खून एक आम समस्या बन गई है। अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो घी और एक खास मीठी चीज का सेवन आपकी सेहत को चमत्कारी रूप से सुधार सकता है।

मीठी चीज: गुड़

गुड़ न केवल एक प्राकृतिक मिठास है, बल्कि यह आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों का भंडार है। यह खून को साफ करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

घी: पोषण का खजाना

घी, खासकर देसी गाय का घी, विटामिन ए, डी, ई और के से भरपूर होता है। यह हड्डियों को लचीलापन और मजबूती प्रदान करता है।

सेवन का सही तरीका

घी और गुड़ का मिश्रण:

एक छोटा चम्मच घी लें।

इसमें एक टुकड़ा गुड़ मिलाएं।

इसे भोजन के बाद खाएं।

खाली पेट सेवन:

सुबह खाली पेट गुड़ और घी का सेवन पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

लाभ

हड्डियों की मजबूती: घी और गुड़ कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में मदद करते हैं।

खून की सफाई:

गुड़ खून को शुद्ध करता है और हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है।

ऊर्जा का स्तर: 

यह मिश्रण शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है।

पाचन में सुधार: यह पेट के लिए फायदेमंद है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।

सावधानियां

मधुमेह के रोगी गुड़ का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।

घी और गुड़ की मात्रा सीमित रखें। अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है।

अगर आप नियमित रूप से इस मिश्रण का सेवन करते हैं, तो आपकी हड्डियां मजबूत होंगी और खून एकदम साफ रहेगा। यह एक सरल और प्रभावी घरेलू उपाय है, जो आपकी सेहत को नया जीवन दे सकता है।

नमक न बने मौत का कारण, जानें कितनी मात्रा है सुरक्षित


नमक हमारे भोजन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। सही मात्रा में नमक का सेवन न केवल हमारे शरीर को संतुलित रखता है, बल्कि गंभीर बीमारियों से भी बचाता है। आइए जानते हैं कि रोजाना नमक की कितनी मात्रा उपयुक्त है और इसके अधिक सेवन से क्या नुकसान हो सकते हैं।

नमक की सही मात्रा

विशेषज्ञों के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना 5 ग्राम (लगभग एक चम्मच) से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। यह मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भी अनुशंसित है।

अधिक नमक के सेवन के नुकसान

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर):

ज्यादा नमक खाने से रक्तचाप बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।

गुर्दे की समस्याएं:

अधिक नमक से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा होता है।

हड्डियों की कमजोरी:

ज्यादा नमक से कैल्शियम की कमी हो सकती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

पानी की कमी (डिहाइड्रेशन):

नमक अधिक खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है।

संतुलित नमक सेवन के उपाय

प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग करें:

ताजे फल, सब्जियां और बिना प्रोसेस किए हुए खाद्य पदार्थ खाएं।

पैकेज्ड फूड से बचें:

जंक फूड, चिप्स, और प्रोसेस्ड फूड में नमक की मात्रा अधिक होती है।

खाने में कम नमक डालें:

भोजन पकाते समय कम नमक का उपयोग करें और ऊपर से नमक डालने से बचें।

लेबल पढ़ें:

बाजार से खरीदते समय पैकेज पर लिखे नमक की मात्रा को जरूर जांचें।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए सावधानी

बच्चों और बुजुर्गों को सामान्य से भी कम नमक की आवश्यकता होती है। उनके भोजन में कम से कम नमक का उपयोग करें।

निष्कर्ष

नमक का सही मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी अधिकता जानलेवा साबित हो सकती है। अपने आहार में नमक का संतुलन बनाए रखें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचें।

याद रखें: कम नमक, ज्यादा स्वास्थ्य!