जम्मू-कश्मीर में दूसरे चरण की वोटिंग जारी, मतदान केंद्रों पर लगी कतारें
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण की वोटिंग सुबह सात बजे से शुरू हो गई है और शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।दूसरे चरण में मध्य कश्मीर के तीन जिले श्रीनगर, गांदरबल और बडगाम शामिल होंगे, जिसमें जम्मू के पीर पंजाल क्षेत्र के 79 सहित 26 विधानसभा क्षेत्रों में 239 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। सबसे ज्यादा श्रीनगर जिले में आठ सीटों पर दूसरे दौर में मतदान है। इसके बाद रियासी में छह, बडगाम में पांच, रियासी और पुंछ में तीन-तीन और गांदरबल में दो सीटों पर मतदान है।इससे पहले 18 सितंबर को हुए पहले चरण में 61.38 फीसदी मतदान हुआ था। सबसे ज्यादा 80.20 फीसदी वोटिंग किश्तवाड़ जिले में तो सबसे कम पुलवामा जिले में 46.99 फीसदी दर्ज की गई थी।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए लोग भारी संख्या में मतदान करने के लिए पहुंच रहे हैं।सभी पोलिंग बूथों पर लोगों की भीड़ दिख रही है।जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के नागम में मतदान केंद्र के बाहर कतार में लोग खड़े हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह नजर आ रहा है। बड़ी संख्या में लोग वोट करने के लिए मतदान केंद्र तक पहुंच रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में छह जिलों में 25 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
इन सीटों पर होगी वोटिंग
जिन सीटों पर वोटिंग है उनमें कंगन (एसटी), गांदरबल, हजरतबल, खानयार, हब्बाकदल, लाल चौक, चन्नपोरा, जदीबल, ईदगाह, सेंट्रल शाल्टेंग, बडगाम, बीरवाह, खानसाहिब, चरार-ए-शरीफ, चदूरा, गुलाबगढ़ (एसटी), रियासी, श्री माता वैष्णो देवी, कालाकोट – सुंदरबनी, नौशेरा, राजौरी (एसटी), बुधल (एसटी), थन्नामंडी (एसटी), सुरनकोट (एसटी), पुंछ हवेली और मेंढर (एसटी) शामिल हैं
सभी जिलों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
जम्मू-कश्मीर के सभी छह जिलों में सुरक्षा कड़ी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता सुरक्षित रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, खासकर पहाड़ी जिलों में आने वाले 11 विधानसभा क्षेत्रों में, जो पिछले कुछ वर्षों में हमलों के लिए सबसे अधिक संवेदनशील रहे हैं। इन इलाकों में 2021 से अब तक एक दर्जन से अधिक आतंकी हमले हो चुके हैं, जिनमें सबसे हालिया और क्रूर आतंकी हमला रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुआ, जिसमें नौ लोग मारे गए थे।
पीएम मोदी की वोटरों से अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आज विधानसभा चुनाव के दूसरे दौर की वोटिंग है। सभी वोटर्स से मेरी अपील है कि वे अपना वोट जरूर दें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। इस अवसर पर पहली बार वोट डालने जा रहे सभी युवा साथियों को मेरा अभिनंदन।






कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में उन्हें हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट की ओर से फैसला आने के बाद अब उन पर बीजेपी हमलावर दिख रही है। विपक्ष लगातार उनसे इस्तीफे की मांग कर रही है। *सिद्धारमैया से इस्तीफे की मांग* केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। सरकार और सिद्धारमैया ने गड़बड़ी की है। उनको सीएम पद से पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था पर वो सच जानते हैं और जांच से बचना चाहते हैं। इसलिए राज्यपाल के फैसले को चैलेंज किया। गवर्नर के फोटो को चप्पल से मारा गया। यह टेरर पैदा करने के लिए किया गया। बिना देरी किए सिद्धारमैया को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसके लिए उनको इस्तीफा देना चाहिए। *बीजेपी का कर्नाटक सरकार गिराने का इराना नहीं-प्रह्लाद जोशी* प्रह्लाद जोशी ने आगे कहा कि बिना पॉलिटिकल पावर के यह नहीं हो सकता। सीबीआई से इसकी जांच कराई जाए। बीजेपी का कर्नाटक सरकार गिराने या अस्थिर करने का न इरादा है और न कोई ऐसी कोशिश कर रहे हैं। यह कांग्रेस को तय करना है कि कौन सीएम बनेगा। किसी और को सीएम बनाए कांग्रेस। बीजेपी विपक्ष में ही बैठेगी। *सिद्धारमैया बोले- सच्चाई जल्द सामने आएगी* वहीं, कोर्ट के इस आदेश के बाद सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बीजेपी और जेडीएस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सियासी लड़ाई है। प्रदेश की जनता मेरे साथ है। मुझे विश्वास है अगले कुछ दिनों में सच्चाई सामने आएगी और जांच रद्द हो जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा, न्यायालय ने धारा 218 के तहत राज्यपाल द्वारा जारी आदेश को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने खुद को राज्यपाल के आदेश की धारा 17ए तक ही सीमित रखा। मैं विशेषज्ञों से परामर्श करूंगा कि क्या कानून के तहत ऐसी जांच की अनुमति है या नहीं। मैं कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा कर लड़ाई की रूपरेखा तय करूंगा। *सिद्दारमैया के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का है विकल्प* हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच को मंजूरी दिए जाने के गवर्नर के फैसले पर मुहर लगाकर सिद्दारमैया को भारी संकट में ला दिया है। अभी तक हाई कोर्ट से स्थगन आदेश की वजह से निचली अदालत से इस मामले में कार्रवाई शुरू नहीं हो रही थी। अब इस स्थगन आदेश से रोक हट गया है और सिद्दारमैया पर कानूनी शिकंजा कसने की आशंका है। विपक्ष पहले से ही उनपर पद छोड़ने का दबाव बना रहा है और कांग्रेस पार्टी के अंदर भी इसको लेकर काफी विवाद रहा है। फिलहाल सिद्दारमैया के सामने सबसे पहला विकल्प यही है कि वह सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस केस में फिर से स्थगन आदेश लेने की कोशिश करें। कथित मुडा भूमि घोटाला क्या है? मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। मुडा क्या है? मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण या मुडा कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी है, जिसका गठन मई 1988 में किया गया था। मुडा का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना, किफायती आवास उपलब्ध कराना, आवास आदि का निर्माण करना है। क्या है आरोप? आरोप है कि मुख्यमंत्री की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पार्वती ने आवेदन किया जिसके आधार पर, मुडा ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। यह आवंटन राज्य सरकार की 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पार्वती को मुडा द्वारा इन साइटों के आवंटन में अनियमितता बरती गई है।
Sep 25 2024, 10:43
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