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निवेश से निर्यात तक, एक मंच पर दिखेगा उत्तर प्रदेश का औद्योगिक सामर्थ्य
*निवेश प्रोत्साहन से लेकर एमएसएमई, ओडीओपी, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा तक की ताकत का होगा प्रदर्शन*
*योगी सरकार के औद्योगिक विजन को वैश्विक मंच देगा चौथा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026*
*25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में होगा भव्य आयोजन*


लखनऊ, 18 सितंबर। उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक मंच देने की तैयारी तेज हो गई है। निवेश से निर्यात तक प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को एक मंच पर प्रदर्शित करने के लिए चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में किया जाएगा। ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न विभागों, विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक क्षेत्रों, एमएसएमई, ओडीओपी उद्यमियों, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है।
योगी सरकार के औद्योगिक विजन के अनुरूप आयोजित होने वाला यह ट्रेड शो उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश संभावनाओं, स्थानीय उत्पादों की विविधता और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। आयोजन में निवेश प्रोत्साहन, आधारभूत ढांचे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सेवा क्षेत्रों को अलग-अलग हॉल में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे निवेशकों, खरीदारों और उद्यमियों के बीच संवाद तथा कारोबारी साझेदारी के अवसर उपलब्ध होंगे।

*निवेश प्रोत्साहन से औद्योगिक विस्तार तक, एक मंच पर आएंगे प्रमुख संस्थान*
चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन संस्थानों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 1 में इन्वेस्ट यूपी और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को स्थान दिया गया है। हॉल 3 में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की भागीदारी रहेगी।
हॉल 4 में ‘यूपी एट अ ग्लांस’ के माध्यम से प्रदेश की समग्र औद्योगिक एवं विकास क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा। हॉल 5 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी। हॉल 6 में सिंचाई, समाज कल्याण, नगर विकास, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग शामिल होंगे।
हॉल 7 में नोएडा विकास प्राधिकरण, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, आईटी एवं आईटीईएस तथा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 8 में श्रम विभाग, स्वास्थ्य एवं अस्पताल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा तथा बैंकिंग एवं वित्त से जुड़े क्षेत्र प्रदर्शित होंगे। इन संस्थानों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों, औद्योगिक आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी, मानव संसाधन और कारोबारी सुविधाओं की जानकारी निवेशकों एवं उद्यमियों तक पहुंचाने का मंच मिलेगा।

*ओडीओपी और एमएसएमई की ताकत से वैश्विक बाजार तक पहुंच*
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ट्रेड शो में एमएसएमई और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को विशेष स्थान दिया गया है। हॉल 9 में ओडीओपी के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि हॉल 10 में नए उद्यमियों एवं एमएसएमई को स्थान दिया गया है। हॉल 11 में पशुपालन, मत्स्य, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जीआई उत्पाद, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा आयुष से जुड़े क्षेत्र शामिल होंगे। हॉल 12 में कृषि विभाग, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यान, डेयरी विकास और चीनी उद्योग की भागीदारी प्रस्तावित है।
यह व्यवस्था प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों, ग्रामीण उद्यमिता और आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ओडीओपी एवं एमएसएमई उत्पादों की प्रदर्शनी से उद्यमियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, संभावित खरीदारों से संपर्क और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसर मिलेंगे।

*निर्यातकों, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक उद्योगों को मिलेगा मंच*
ट्रेड शो में निर्यात विस्तार से जुड़े क्षेत्रों को भी प्रमुखता दी गई है। हॉल 14, 15 और 16 में टाउन ऑफ एक्सीलेंस, निर्यातकों, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, वस्त्र एवं हथकरघा, खेल तथा मुख्यमंत्री युवा से जुड़े क्षेत्रों की भागीदारी प्रस्तावित है। हॉल 17 में ओडीओपी ओपन स्पेस, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के हितधारक, क्रेडाई और परिवहन क्षेत्र को शामिल किया गया है। निर्यातकों एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने से जुड़े कारोबारी अवसरों को प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। वहीं वस्त्र, हथकरघा, खेल, कृषि आधारित उद्योगों और अन्य क्षेत्रों के उद्यमी अपने उत्पादों तथा कारोबारी क्षमताओं को संभावित खरीदारों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।

*विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से दिखेगा क्षेत्रीय औद्योगिक सामर्थ्य*
ट्रेड शो के फोयर एरिया में प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इनमें कानपुर विकास प्राधिकरण, वाराणसी विकास प्राधिकरण, आगरा विकास प्राधिकरण, लखनऊ विकास प्राधिकरण, मेरठ विकास प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण समेत अन्य प्राधिकरण शामिल हैं। विकास प्राधिकरणों की भागीदारी से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास, औद्योगिक विस्तार और निवेश से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की कारोबारी संभावनाओं तथा विकास परियोजनाओं की जानकारी निवेशकों और उद्यमियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

*उद्योग जगत, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भेजे जा रहे आमंत्रण*
ट्रेड शो में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों, उद्योग संगठनों, चैंबरों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों एवं विभागों को पत्र तथा आमंत्रण कार्ड भेजे जा चुके हैं। उद्योग संगठनों एवं चैंबरों को डिजिटल माध्यम से आमंत्रण भेजे गए हैं तथा डाक से आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है। संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी डिजिटल आमंत्रण भेजे जा चुके हैं। बी2बी एवं बी2सी खरीदार पंजीकरण के लिए क्यूआर कोड तैयार कर प्रसारित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय पोषण माह पर विशेष : योगी सरकार के प्रयासों से यूपी के नौनिहालों की बढ़ रही कद-काठी
*प्रदेश के पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 8.2 प्रतिशत घटा*
*एनएफएचएस- 5 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, जो घटकर 31.5 प्रतिशत हो गया*


लखनऊ, 18 सितंबर। योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश के नौनिहालों की सेहत और पोषण की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) में जहां प्रदेश में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, वहीं एनएफएचस-6 में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। यानी करीब चार वर्षों में नाटेपन के मामलों में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है।

* बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता : डॉ. पिंकी जोवल
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में नाटेपन में कमी का उल्लेखनीय है क्योंकि बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार एक दिन में नहीं आता। यह लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। एनएफएचएस-5 से एनएफएचएस-6 के बीच नाटेपन के आंकड़ों में आई गिरावट इसलिए प्रदेश के बच्चों के स्वास्थ्य की बदलती तस्वीर का महत्वपूर्ण संकेत है। अब चुनौती इस सुधार को और गति देने तथा यह सुनिश्चित करने की है कि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण और स्वस्थ विकास का अवसर मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं को जागरुक करने के साथ उन्हे पोषण पोटली वितरित की जा रही है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 31.5 प्रतिशत का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी बड़ी संख्या में बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं इसलिए शुरुआती वर्षों में पोषण की निगरानी, गर्भवती महिलाओं के पोषण, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, संक्रमण की रोकथाम तथा बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी पर लगातार जोर देने की जरूरत है और इस पर फोकस काम किया जा रहा है।

* बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन शारीरिक, मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण की स्थिति को कम किया जा सकता है। इसी दिशा में आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के स्तर पर चलाए जा रहे पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सीएम योगी के निर्देश पर सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं।

* शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका
प्रोफेसर ने बताया कि नाटेपन को बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यह केवल बच्चे की लंबाई तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, जन्म के समय बच्चे की स्थिति, स्तनपान, छह माह बाद पूरक आहार, बार-बार होने वाले संक्रमण और शुरुआती वर्षों में मिलने वाले पोषण की अहम भूमिका होती है। ऐसे में आंकड़ों में आई गिरावट को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जा सकता है। एनएफएचएस-5 में उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 39.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसी सर्वे में 17.3 प्रतिशत बच्चे दुबलापन (वेस्टिंग) और 32.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन की श्रेणी में थे। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के पोषण से जुड़े संकेतकों में देशभर में भी सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में नाटापन 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत हुआ है।
करघे की खनक और शहद की मिठास लेकर दुनिया के बाजार में उतरेगा बागपत

यूपीआईटीएस में 20 से अधिक स्टॉलों पर दिखेगी जिले की कारोबारी ताकत

जीआई टैग वाले होम फर्निशिंग उत्पादों के साथ नवीन निर्यातक और उद्यमी भी होंगे विदेशी खरीदारों से रूबरू

बागपत, 18 सितंबर। खेकड़ा की पीढ़ियों पुरानी हथकरघा बुनाई और बागपत के शहद की मिठास अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने को तैयार है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक होने वाले चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में जिले के 20 से अधिक नवीन निर्यातक, ओडीओपी उत्पादक, एमएसएमई, महिला एवं युवा उद्यमी अपनी कारोबारी ताकत दिखाएंगे। खास आकर्षण जून 2023 में जीआई टैग प्राप्त बागपत होम फर्निशिंग उत्पाद रहेंगे। खेकड़ा स्थित मास्टर वीवर्स के माध्यम से इस पारंपरिक उत्पाद की पहचान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचेगी। इसके साथ ही अम्ब्रोसिया नेचुरल्स शहद और होम प्रोडक्ट भी प्रदर्शित करेगा।

जीआई टैग वाली बुनाई बनेगी बागपत की पहचान

बागपत होम फर्निशिंग को जून 2023 में जीआई टैग मिला था। यह पहचान खेकड़ा क्षेत्र में पीढ़ियों से हथकरघा बुनाई कर रहे कारीगरों के कौशल को मिली है। जीआई टैग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग निदेशालय और ’’मास्टर वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, आदर्श नगर, खेकड़ा’’ ने संयुक्त रूप से आवेदन किया था। मास्टर वीवर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी में सूती धागे से बेडशीट, पर्दे, मेजपोश और रनिंग फैब्रिक तैयार किए जाते हैं। ये संस्थान बुनकर फ्रेम लूम से मजबूत और आकर्षक बुनाई के लिए अपनी पहचान बनाए हुए है।

पांच नवीन निर्यातक, ओडीओपी में पांच स्टॉल

यूपीआईटीएस के हॉल 14 में बागपत के चार नवीन निर्यातकों को पांच स्टॉल मिले हैं। इनमें वीवर्स प्वाइंट व शाहिद टेक्स इंडिया, बड़ागांव, वाया होम्स, खेकड़ा के दो और विनय एक्सपोर्ट, बागपत शामिल हैं। ओडीओपी श्रेणी के हॉल नौ में शमशाद टेक्सटाइल, बड़ागांव को दो स्टॉल तथा द राइजिंग सन के नितिन जैन, बंसल टेक्सटाइल्स के राजकुमार बंसल और त्रिसव टेक्सटाइल के रविस कुमार को एक-एक स्टॉल मिला है। एमएसएमई, महिला एवं युवा उद्यमियों की श्रेणी में सिधांनम इंटरनेशनल, खेकड़ा के मनोज जैन को दो स्टॉल तथा नसरीन टेक्सटाइल्स की नसरीन, चारवेदा ऑर्गेनिक्स, प्रिंस हैंडलूम के राजकुमार जैन, बागपत ब्लूम प्रोड्यूसर कंपनी के कपिल आर्या और अंबेडकर महिला केंद्र के जगदीप कुमार को एक-एक स्टॉल मिला है। उपायुक्त उद्योग राजेंद्र सिंह का कहना है कि यूपीआईटीएस से जिले के उद्यमियों को वैश्विक पहचान मिलेगी। जिले के उद्यमियों में इस आयोजन को लेकर उत्साह बना हुआ है। इसके अतिरिक्त जिले के खेती उत्पाद भी यहां दिखाई देंगे। अम्ब्रोसिया नेचुरल्स शहद तो बागपत ब्लूम मिलेट्स के जरिए जिले की आयुर्वेदिक पहचान कराएगा। 

ओडीओसी पैवेलियन में घुलेगी घेवर और बालूशाही की मिठास

इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहली बार योगी सरकार की एक जिला एक व्यंजन के तहत पहली बार ओडीओसी पैवेलियन का निर्माण किया गया है। इस पैवेलियन में भी जिले के व्यंजनों की सुगंध अपना अहसास कराएगी। अमीनगर सराय से विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाला घेवर और बागपत की बालूशाही यहां विदेशियों के मुंह में मिठास घोलेंगे। इस ट्रेड शो में सिंगापुर, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान, रूस, थाईलैंड और ऑस्ट्रिया देशों की मौजूदगी रहेगी। 

 विश्व मंच पर बागपत : 

यूपीआईटीएस 25 से 29 सितंबर

स्थान- इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा

नवीन निर्यातक - पांच स्टॉल

ओडीओपी - पांच स्टॉल

जीआई उत्पाद- बागपत होम फर्निशिंग

* प्रमुख आकर्षण - खेकड़ा की हथकरघा बुनाई और अम्ब्रोसिया नेचुरल्स का शहद

भूजल स्रोतों की जांच में यूपी ने देश में पहला स्थान हासिल किया, पंजाब-आंध्र प्रदेश को भी पीछे छोड़ा
* योगी सरकार प्रदेशवासियों को भूजल की स्वच्छता सुनिश्चित कर उपलब्ध करा रही शुद्ध पेयजल
* भूजल स्रोतों की जांच में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत आगे
* 45 हजार से ज्यादा स्रोतों की जांच पूरी, यूपी जल निगम ग्रामीण ने जांच में चार राज्यों को पीछे छोड़ा

लखनऊ। योगी सरकार प्रदेशवासियों के लिए जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और हर घर तक स्वच्छ व सुरक्षित जल पहुंचाने में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भूजल स्रोतों की गुणवत्ता और स्थिति की निगरानी को लेकर किए जा रहे परीक्षण कार्य में प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जांच के अंतर्गत राज्य व जिले स्तर की प्रयोगशालाओं से प्रदेशभर में भूजल स्रोत, भूमिगत व ओवरहेड टंकी समेत पानी के अन्य स्रोतों की पड़ताल की गई है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 45,361 स्रोतों की जांच पूरी कर ली गई है। यह कुल लक्ष्य का 94.39 प्रतिशत है। 15 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश, देश के राज्यों की सूची में पहले स्थान पर है।
यूपी जल निगम ग्रामीण प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि भूजल स्रोतों का नियमित परीक्षण पेयजल की गुणवत्ता और जल स्रोतों की स्थिति की निगरानी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी जल स्रोतों की गुणवत्ता, सोर्स सस्टेनेबिलिटी और गहन निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश ने सबसे बेहतर परिणाम हासिल किए हैं और भविष्य में भी प्रदेश में सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा।
* पंजाब और आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़ शीर्ष पर यूपी
भूजल स्रोतों के परीक्षण की राज्यवार रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे स्थान पर है। पंजाब ने निर्धारित लक्ष्य का 83.46 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश ने भी 83.46 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। वहीं उत्तराखंड 82.30 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे और केरल 81.13 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है।
* राष्ट्रीय औसत से करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि
यूपी जल निगम ग्रामीण अधीक्षण अभियंता एवं राज्य प्रयोगशाला प्रमुख ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि भूजल स्रोतों के परीक्षण में उत्तर प्रदेश की 94.39 प्रतिशत उपलब्धि राष्ट्रीय औसत 50.46 प्रतिशत से काफी अधिक है। यानि यूपी ने राष्ट्रीय औसत की तुलना में करीब 44 प्रतिशत अधिक उपलब्धि दर्ज की है।
* 48 हजार से अधिक स्रोतों का निर्धारित लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में कुल 48,055 भूजल स्रोतों के परीक्षण का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष 45,361 स्रोतों का परीक्षण पूरा हो चुका है। अब निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2,694 स्रोतों का परीक्षण शेष है। इस तरह प्रदेश ने पहली छमाही में ही निर्धारित लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है।
एनसीआर की हवा को शुद्ध बनाने के लिए यूपी में बड़ा प्लान
* मुख्यमंत्री आवास पर सीएम योगी के साथ बैठक में शामिल हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
* देश के 130 शहरों के स्वच्छता सर्वे में लखनऊ ने हासिल किया है पहला स्थान, अन्य शहरों का प्रदर्शन भी रहा अच्छा: भूपेंद्र यादव
* ईवी पॉलिसी के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसों, व्हीकल पॉल्यूशन पर हुई चर्चा, डस्ट पॉल्यूशन को लेकर बनी विस्तृत कार्ययोजना
* बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशिंग मैनेजमेंट रूल को लेकर की गई चर्चा

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें उत्तर प्रदेश के एनसीआर से जुड़े नोएडा, हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर समेत आठ जिलों में वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपायों और कार्ययोजना की समीक्षा की गई।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वाहन प्रदूषण के तहत पुराने वाहनों, नई ईवी नीति, इलेक्ट्रिक बसों, प्रदूषण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और एग्रीगेटर वाहनों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा में करीब 80 प्रतिशत उद्योगों में ओसीईएमएस (ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली) और एयर पॉल्यूशन डिवाइस लगाए जाने की जानकारी दी गई। शेष उद्योगों में भी इन्हें लागू करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बैठक में धूल प्रदूषण पर मैकेनाइज्ड और डीप क्लीनिंग की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों और हितधारकों के साथ कंसल्टेशन कार्यक्रम चलाने पर भी सहमति बनी है। एनसीएपी के तहत देश के 130 शहरों के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ ने प्रथम स्थान हासिल किया है। आगरा समेत प्रदेश के अन्य शहरों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा है। केंद्रीय मंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लक्ष्य से अधिक पौधरोपण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक हुई है। अब राजस्थान और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के साथ भी बैठक कर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा। पराली प्रबंधन को लेकर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्रालय के स्तर पर भी समन्वय किया जा रहा है। एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर पिछले दिसंबर से अब तक 30 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। 63 छोटे शहरों के स्थानीय निकायों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान को सफल बनाने में जनता के सहयोग और मीडिया की जागरूकता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागीय उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे।
पीएम मोदी के जन्मदिन पर यूपी में सेवा का महाअभियान, 354 शिविरों में 8,323 लोगों ने किया रक्तदान
* आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम के तहत 75 जिलों में 5.90 करोड़ दीये प्रज्जवलित
* लखनऊ में 21.23 लाख, गोरखपुर में 14.21 लाख, आगरा में 13.32 लाख और झांसी में 11.21 लाख दीये जले
* सभी 75 जिलों में सेवा दिवस पर रक्तदान, विश्वकर्मा श्रम सम्मान टूल किट और फल वितरण के कार्यक्रम
* प्रदेशभर में 73,959 मरीजों को वितरित किए गए फल, 12,271 लाभार्थियों को मिली टूल किट
* चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और एमएसएमई विभाग रहे विविध कार्यक्रमों के नोडल विभाग

लखनऊ, 18 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर उत्तर प्रदेश में सेवा दिवस के तहत प्रदेशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के दौरान रक्तदान शिविर, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को टूल किट और अस्पतालों में मरीजों को फल वितरित किए गए। इस मौके पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में 5.90 करोड़ दीये प्रज्ज्वलित किए गए।
प्रदेशभर में आयोजित 354 रक्तदान शिविरों में कुल 8,323 लोगों ने रक्तदान किया। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत 12,271 लाभार्थियों को टूल किट वितरित की गईं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जिलों के अस्पतालों में भर्ती 73,959 मरीजों को फल बांटे गए। कार्यक्रमों के संचालन में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग नोडल विभाग रहे।

* 75 जिलों में 5.90 करोड़ दीप प्रज्जवलित
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश में 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम के तहत 5 करोड़ 90 लाख दीये जलाए गए। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए लोगों ने प्रधानमंत्री के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं। प्रमुख जिलों में बड़ी संख्या में दीप प्रज्ज्वलित किए गए। लखनऊ में 21,23,900, सीतापुर में 21,43,140, वाराणसी में 3,28,204, रामपुर में 10,94,354, मथुरा में 5,59,277, प्रयागराज में 6,75,916, बरेली में 7,69,770, झांसी में 11,21,410, गौतमबुद्ध नगर में 2,32,529, गोरखपुर में 14,21,112, कानपुर देहात में 11,28,038, अयोध्या में 8,95,630, अमेठी में 1,91,490, आगरा में 13,32,200 और आजमगढ़ में 15,70,120 दीये जलाए गए।

* अंबेडकरनगर में 61 लोगों ने रक्तदान किया
अमरोहा में रक्तदान शिविर में 20 व्यक्तियों ने रक्तदान किया। यहां विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत 200 लाभार्थियों को टूल किट वितरित किया गया। साथ ही 210 मरीजों को फल वितरित किए गए। इसी तरह अमेठी में 4 रक्तदान शिविरों में 35 लोगों ने रक्तदान किया। 55 लाभार्थियों को टूल किट और 320 मरीजों को फल वितरित किए गए। अंबेडकरनगर में 2 रक्तदान शिविरों में 61 लोगों ने रक्तदान किया। 725 लाभार्थियों को टूल किट और 200 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* अयोध्या में 1853 मरीजों को फल वितरण
अयोध्या में 2 रक्तदान शिविरों में 71 लोगों ने रक्तदान किया। 150 लाभार्थियों को टूल किट और 1,853 मरीजों को फल वितरित किए गए। अलीगढ़ में 12 रक्तदान शिविरों में 360 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 1,349 मरीजों को फल वितरित किए गए। ऐसे ही आगरा में 4 रक्तदान शिविरों में 84 लोगों ने रक्तदान किया। 15 लाभार्थियों को टूल किट और 3,198 मरीजों को फल वितरित किए गए। आजमगढ़ में 2 रक्तदान शिविरों में 225 लोगों ने रक्तदान किया। 150 लाभार्थियों को टूल किट और 1,516 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* उन्नाव में 400 लाभार्थियों को टूल किट
इटावा में 3 रक्तदान शिविरों में 45 लोगों ने रक्तदान किया। 6 लाभार्थियों को टूल किट और 1,548 मरीजों को फल वितरित किए गए। उन्नाव में 1 रक्तदान शिविर में 8 लोगों ने रक्तदान किया। 400 लाभार्थियों को टूल किट और 1,028 मरीजों को फल वितरित किए गए। एटा में 3 रक्तदान शिविरों में 38 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 1,603 मरीजों को फल वितरित किए गए। औरैया में 1 रक्तदान शिविर में 6 लोगों ने रक्तदान किया। 25 लाभार्थियों को टूल किट और 317 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* कानपुर शहर में 2,286 मरीजों को फल वितरण
कन्नौज में 2 रक्तदान शिविरों में 42 लोगों ने रक्तदान किया। 12 लाभार्थियों को टूल किट और 632 मरीजों को फल वितरित किए गए। कानपुर देहात में 1 रक्तदान शिविर में 25 लोगों ने रक्तदान किया। 11 लाभार्थियों को टूल किट और 1,140 मरीजों को फल वितरित किए गए। इसी तरह कानपुर शहर में 23 रक्तदान शिविरों में 452 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 2,286 मरीजों को फल वितरित किए गए। कासगंज में 1 रक्तदान शिविर में 12 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 120 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* गाजियाबाद में 1572 लोगों ने रक्त दान किया
इसी क्रम में कुशीनगर में 3 रक्तदान शिविरों में 73 लोगों ने रक्तदान किया। 75 लाभार्थियों को टूल किट और 482 मरीजों को फल वितरित किए गए। कौशांबी में 3 रक्तदान शिविरों में 102 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 628 मरीजों को फल वितरित किए गए। लखीमपुर खीरी में 2 रक्तदान शिविरों में 67 लोगों ने रक्तदान किया। 105 लाभार्थियों को टूल किट और 1,455 मरीजों को फल वितरित किए गए। गाजियाबाद में 39 रक्तदान शिविरों में 1,572 लोगों ने रक्तदान किया। 450 लाभार्थियों को टूल किट और 2,215 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* गोंडा में 2 हजार से ज्यादा मरीजों को फल वितरण
गाजीपुर में 1 रक्तदान शिविर में 30 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 450 मरीजों को फल वितरित किए गए। गोंडा में 3 रक्तदान शिविरों में 72 लोगों ने रक्तदान किया। 200 लाभार्थियों को टूल किट और 2,163 मरीजों को फल वितरित किए गए। गोरखपुर में 3 रक्तदान शिविरों में 86 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 1,186 मरीजों को फल वितरित किए गए। गौतमबुद्ध नगर में 21 रक्तदान शिविरों में 246 लोगों ने रक्तदान किया। 340 लाभार्थियों को टूल किट और 1,560 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* जौनपुर में 13 रक्तदान शिविरों का आयोजन
चंदौली में 4 रक्तदान शिविरों में 35 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 405 मरीजों को फल वितरित किए गए। चित्रकूट में 1 रक्तदान शिविर में 11 लोगों ने रक्तदान किया। 128 लाभार्थियों को टूल किट और 400 मरीजों को फल वितरित किए गए। जालौन में 2 रक्तदान शिविरों में 21 लोगों ने रक्तदान किया। 40 लाभार्थियों को टूल किट और 1,060 मरीजों को फल वितरित किए गए। जौनपुर में 13 रक्तदान शिविरों में 299 लोगों ने रक्तदान किया। 200 लाभार्थियों को टूल किट और 1,450 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* देवरिया में भी रक्तदान शिविर का आयोजन
झांसी में 2 रक्तदान शिविरों में 57 लोगों ने रक्तदान किया। 20 लाभार्थियों को टूल किट और 840 मरीजों को फल वितरित किए गए। देवरिया में 2 रक्तदान शिविरों में 192 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 1,172 मरीजों को फल वितरित किए गए। इसी तरह पीलीभीत में 1 रक्तदान शिविर में 20 लोगों ने रक्तदान किया। 21 लाभार्थियों को टूल किट और 1,392 मरीजों को फल वितरित किए गए। प्रतापगढ़ में 1 रक्तदान शिविर में 16 लोगों ने रक्तदान किया। 41 लाभार्थियों को टूल किट और 795 मरीजों को फल वितरित किए गए। प्रयागराज में 3 रक्तदान शिविरों में 167 लोगों ने रक्तदान किया। 155 लाभार्थियों को टूल किट और 292 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* फर्रुखाबाद में 100 लाभार्थियों को टूल किट वितरित
फतेहपुर में 5 रक्तदान शिविरों में 16 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 799 मरीजों को फल वितरित किए गए। फर्रुखाबाद में 2 रक्तदान शिविरों में 13 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 128 मरीजों को फल वितरित किए गए। फिरोजाबाद में 7 रक्तदान शिविरों में 80 लोगों ने रक्तदान किया। 525 लाभार्थियों को टूल किट और 2,706 मरीजों को फल वितरित किए गए। बदायूं में 3 रक्तदान शिविरों में 88 लोगों ने रक्तदान किया। 165 लाभार्थियों को टूल किट और 250 मरीजों को फल वितरित किए गए। बरेली में 1 रक्तदान शिविर में 66 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 1,386 मरीजों को फल वितरित किए गए।
* बस्ती में 200 लाभार्थियों को टूल किट
बलरामपुर में 3 रक्तदान शिविरों में 53 लोगों ने रक्तदान किया। 41 लाभार्थियों को टूल किट और 1,084 मरीजों को फल वितरित किए गए। बलिया में 1 रक्तदान शिविर में 26 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 1,080 मरीजों को फल वितरित किए गए। बस्ती में 3 रक्तदान शिविरों में 55 लोगों ने रक्तदान किया। 200 लाभार्थियों को टूल किट और 3,681 मरीजों को फल वितरित किए गए। बहराइच में 1 रक्तदान शिविर में 85 लोगों ने रक्तदान किया। 37 लाभार्थियों को टूल किट और 4,740 मरीजों को फल वितरित किए गए। बांदा में 3 रक्तदान शिविरों में 22 लोगों ने रक्तदान किया। 77 लाभार्थियों को टूल किट और 473 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* बिजनौर में 359 लोगों ने किया रक्तदान
बागपत में 2 रक्तदान शिविरों में 21 लोगों ने रक्तदान किया। 358 लाभार्थियों को टूल किट और 102 मरीजों को फल वितरित किए गए। बाराबंकी में 2 रक्तदान शिविरों में 145 लोगों ने रक्तदान किया। 200 लाभार्थियों को टूल किट और 435 मरीजों को फल वितरित किए गए। बिजनौर में 12 रक्तदान शिविरों में 359 लोगों ने रक्तदान किया। 200 लाभार्थियों को टूल किट और 365 मरीजों को फल वितरित किए गए। बुलंदशहर में 8 रक्तदान शिविरों में 78 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 852 मरीजों को फल वितरित किए गए। भदोही में 7 रक्तदान शिविरों में 38 लोगों ने रक्तदान किया। 150 लाभार्थियों को टूल किट और 543 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* मथुरा में 290 लोगों ने रक्तदान किया
इसी तरह मऊ में 8 रक्तदान शिविरों में 76 लोगों ने रक्तदान किया। 17 लाभार्थियों को टूल किट और 406 मरीजों को फल वितरित किए गए। मथुरा में 7 रक्तदान शिविरों में 290 लोगों ने रक्तदान किया। 200 लाभार्थियों को टूल किट और 278 मरीजों को फल वितरित किए गए। महराजगंज में 2 रक्तदान शिविरों में 68 लोगों ने रक्तदान किया। 50 लाभार्थियों को टूल किट और 350 मरीजों को फल वितरित किए गए। महोबा में 3 रक्तदान शिविरों में 27 लोगों ने रक्तदान किया। 142 लाभार्थियों को टूल किट और 567 मरीजों को फल वितरित किए गए। मीरजापुर में 1 रक्तदान शिविर में 76 लोगों ने रक्तदान किया। 52 लाभार्थियों को टूल किट और 3,273 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* मुरादाबाद में 1000 मरीजों को फल वितरित किए गए
मुजफ्फरनगर में 11 रक्तदान शिविरों में 152 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 325 मरीजों को फल वितरित किए गए। मुरादाबाद में 3 रक्तदान शिविरों में 63 लोगों ने रक्तदान किया। 400 लाभार्थियों को टूल किट और 1,000 मरीजों को फल वितरित किए गए। मेरठ में 3 रक्तदान शिविरों में 251 लोगों ने रक्तदान किया। 575 लाभार्थियों को टूल किट और 251 मरीजों को फल वितरित किए गए। मैनपुरी में 2 रक्तदान शिविरों में 27 लोगों ने रक्तदान किया। 550 लाभार्थियों को टूल किट और 554 मरीजों को फल वितरित किए गए। रामपुर में 2 रक्तदान शिविरों में 24 लोगों ने रक्तदान किया। 35 लाभार्थियों को टूल किट और 248 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* वाराणसी में 510 लोगों ने किया रक्तदान
रायबरेली में 2 रक्तदान शिविरों में 15 लोगों ने रक्तदान किया। 150 लाभार्थियों को टूल किट और 892 मरीजों को फल वितरित किए गए। लखनऊ में 20 रक्तदान शिविरों में 263 लोगों ने रक्तदान किया। जबकि 507 मरीजों को फल वितरित किए गए। ललितपुर में 2 रक्तदान शिविरों में 18 लोगों ने रक्तदान किया। 5 लाभार्थियों को टूल किट और 200 मरीजों को फल वितरित किए गए। वाराणसी में 20 रक्तदान शिविरों में 510 लोगों ने रक्तदान किया। 542 मरीजों को फल वितरित किए गए। शामली में 2 रक्तदान शिविरों में 35 लोगों ने रक्तदान किया। 450 लाभार्थियों को टूल किट और 553 मरीजों को फल वितरित किए गए। शाहजहांपुर में 3 रक्तदान शिविरों में 30 लोगों ने रक्तदान किया। 525 लाभार्थियों को टूल किट और 30 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* संतकबीरनगर में 725 लाभार्थियों को टूल किट
श्रावस्ती में 2 रक्तदान शिविरों में 25 लोगों ने रक्तदान किया। 250 लाभार्थियों को टूल किट और 200 मरीजों को फल वितरित किए गए। संतकबीरनगर में 2 रक्तदान शिविरों में 35 लोगों ने रक्तदान किया। 725 लाभार्थियों को टूल किट और 86 मरीजों को फल वितरित किए गए। संभल में 5 रक्तदान शिविरों में 72 लोगों ने रक्तदान किया। 250 लाभार्थियों को टूल किट और 1,003 मरीजों को फल वितरित किए गए। सहारनपुर में 1 रक्तदान शिविर में 20 लोगों ने रक्तदान किया। 11 लाभार्थियों को टूल किट और 50 मरीजों को फल वितरित किए गए। सिद्धार्थनगर में 3 रक्तदान शिविरों में 105 लोगों ने रक्तदान किया। 101 लाभार्थियों को टूल किट और 1,270 मरीजों को फल वितरित किए गए।

* हमीरपुर में 400 लाभार्थियों को टूल किट
सीतापुर में 3 रक्तदान शिविरों में 138 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 831 मरीजों को फल वितरित किए गए। सुल्तानपुर में 5 रक्तदान शिविरों में 91 लोगों ने रक्तदान किया। 250 लाभार्थियों को टूल किट और 2,593 मरीजों को फल वितरित किए गए। सोनभद्र में 4 रक्तदान शिविरों में 86 लोगों ने रक्तदान किया। 115 लाभार्थियों को टूल किट और 1,263 मरीजों को फल वितरित किए गए। हमीरपुर में 2 रक्तदान शिविरों में 21 लोगों ने रक्तदान किया। 400 लाभार्थियों को टूल किट और 1,390 मरीजों को फल वितरित किए गए। हरदोई में 2 रक्तदान शिविरों में 15 लोगों ने रक्तदान किया। 130 लाभार्थियों को टूल किट और 960 मरीजों को फल वितरित किए गए। हाथरस में 4 रक्तदान शिविरों में 64 लोगों ने रक्तदान किया। 100 लाभार्थियों को टूल किट और 201 मरीजों को फल वितरित किए गए। हापुड़ में 4 रक्तदान शिविरों में 31 लोगों ने रक्तदान किया। 110 लाभार्थियों को टूल किट और 247 मरीजों को फल वितरित किए गए।
योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग ने गढ़ी सफलता की नई कहानी, यूपीपीएससी- 2025 में 74 अभ्यर्थी सफल
- तीन विभागीय कोचिंग केंद्रों के अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा में लहराया पर परचम
- भागीदारी भवन के 35, अलीगंज के 18 और हापुड़ के 21 अभ्यर्थी हुए सफल
- 6 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले पात्र छात्रों को आवासीय कोचिंग के साथ कई सुविधाएं
- मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी समाज कल्याण विभाग कराएगा मॉक इंटरव्यू
- मंत्री असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं

लखनऊ। आर्थिक संसाधनों की कमी प्रतिभाशाली युवाओं की राह में बाधा न बने, इसके लिए योगी सरकार की ओर से संचालित निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा सहारा बन रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों और भागीदारी भवन स्थित कोचिंग से निःशुल्क प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने वाले 74 अभ्यर्थियों ने यूपीपीएससी-2025 की मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल की है। मुख्य परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी अब चयन प्रक्रिया के अगले चरण साक्षात्कार में शामिल होंगे।

- मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी की जाती है संचालित
प्रदेश में समाज कल्याण विभाग की ओर से 8 आवासीय कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अधिकतम 6 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा वाले पात्र छात्रों को यहां आवासीय कोचिंग के साथ मेस, पुस्तकालय, इंटरनेट, टेस्ट सीरीज, नोट्स, मनोरंजन, खेलकूद और जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए आगे मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी संचालित की जाती है, ताकि वे साक्षात्कार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।

- मंत्री ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं
समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान युवाओं को उनकी आर्थिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय केंद्रों से 74 अभ्यर्थियों की सफलता इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

- राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल
समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि भागीदारी भवन स्थित कोचिंग के 35, अलीगंज स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र के 18 और हापुड़ स्थित राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के 21 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। तीनों केंद्रों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सफलता को विभागीय निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था के प्रभावी परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।
योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग ने गढ़ी सफलता की नई कहानी, यूपीपीएससी- 2025 में 74 अभ्यर्थी सफल
- तीन विभागीय कोचिंग केंद्रों के अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा में लहराया पर परचम
- भागीदारी भवन के 35, अलीगंज के 18 और हापुड़ के 21 अभ्यर्थी हुए सफल
- 6 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले पात्र छात्रों को आवासीय कोचिंग के साथ कई सुविधाएं
- मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी समाज कल्याण विभाग कराएगा मॉक इंटरव्यू
- मंत्री असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं

लखनऊ। आर्थिक संसाधनों की कमी प्रतिभाशाली युवाओं की राह में बाधा न बने, इसके लिए योगी सरकार की ओर से संचालित निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा सहारा बन रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों और भागीदारी भवन स्थित कोचिंग से निःशुल्क प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने वाले 74 अभ्यर्थियों ने यूपीपीएससी-2025 की मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल की है। मुख्य परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी अब चयन प्रक्रिया के अगले चरण साक्षात्कार में शामिल होंगे।

- मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी की जाती है संचालित
प्रदेश में समाज कल्याण विभाग की ओर से 8 आवासीय कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अधिकतम 6 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा वाले पात्र छात्रों को यहां आवासीय कोचिंग के साथ मेस, पुस्तकालय, इंटरनेट, टेस्ट सीरीज, नोट्स, मनोरंजन, खेलकूद और जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए आगे मॉक इंटरव्यू की सुविधा भी संचालित की जाती है, ताकि वे साक्षात्कार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।

- मंत्री ने सफल अभ्यर्थियों को दीं शुभकामनाएं
समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान युवाओं को उनकी आर्थिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय केंद्रों से 74 अभ्यर्थियों की सफलता इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

- राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल
समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि भागीदारी भवन स्थित कोचिंग के 35, अलीगंज स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र के 18 और हापुड़ स्थित राजकीय आईएएस/पीसीएस कोचिंग केंद्र के 21 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। तीनों केंद्रों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सफलता को विभागीय निःशुल्क प्रशिक्षण व्यवस्था के प्रभावी परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है।
योगी सरकार का दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने पर जोर, हर विधानसभा क्षेत्र में लगेंगे कल्याण शिविर

* दिव्यांगजनों को घर के नजदीक मिलेंगी सुविधाएं, 10 अक्टूबर तक शिविर पूरा करने का लक्ष्य
* सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और आवश्यक उपकरण
* एक ही स्थान पर पंजीकरण, पात्रता सत्यापन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की मिलेगी जानकारी
* जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को विभागों के बीच समन्वय के निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सहायक उपकरण योजना के तहत पात्र दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिव्यांग कल्याण शिविर लगाए जाएंगे, जिन्हें 10 अक्टूबर 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिव्यांगजनों तक उनके निकटतम क्षेत्र में पहुंचाना है, ताकि उन्हें आवश्यक सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। शिविरों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी, आवेदन, पात्रता सत्यापन और लाभ उपलब्ध कराने की सुविधा मिलेगी।
* एक ही स्थान पर मिलेंगी कई योजनाओं की सुविधाएं
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इन शिविरों में पात्र दिव्यांगजनों का चिन्हांकन और पंजीकरण किया जाएगा। सहायक उपकरणों के लिए आवेदन लेने के साथ आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन भी होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग और उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जाएगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों की दिव्यांगजन हितैषी योजनाओं की जानकारी भी एक ही स्थान पर दी जाएगी। जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ आवेदन प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।
* अधिकारियों को समन्वय के निर्देश
शासनादेश के अनुसार शिविरों के प्रभावी आयोजन के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से अधिकारियों को अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक शिविरों की सूचना पहुंचाने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
योगी सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों की गतिशीलता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने में सहायक होगी। लाभार्थियों को उनके नजदीकी क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने से सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। यह अभियान ‘सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थी के द्वार तक’ पहुंचाने के संकल्प को आगे बढ़ाने के साथ दिव्यांगजनों के सम्मानजनक और सुगम जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रदेश में प्रदेशव्यापी सेवा संकल्प अभियान 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जायेगा
- सेवा संकल्प महोत्सव-2026 के अन्तर्गत प्रदेश की 403 विधान सभाओं में सांस्कृतिक कार्यकम आयोजित किये जायेंगे
- इस अभियान का उद्देश्य केन्द्र एवं राज्य सरकार के विकास कार्याें से जन-जीवन में आये सकरात्मक बदलाव को जन-जन तक पहुँचाना है : जयवीर सिंह

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपक्ष्य में प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक प्रभावी आयोजन किया जायेगा। इस प्रदेशव्यापी सेवा संकल्प अभियान का मूल भाव केन्द्र सरकार  के गत 12 वर्षों एवं राज्य सरकार के 9.5 वर्षों के विकास कार्यों से जन-जीवन में आये सकरात्मक बदलाव को जन-जन तक पहुँचाना तथा प्रत्येक नगरीक को विकसित भारत-2047 के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना है। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश  जारी किये गये है।
सेवा संकल्प अभियान के क्रम में नमो सेवा-अनकही कहानिया के माध्यम से प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं एवं देश-प्रदेश में हुए सकरात्मक बदलाव की कहानी को सरल भावनात्मक एवं संगीतपूर्ण नाटक के माध्यम से गाँव-गाँव एवं शहर-शहर तक पहुचानें के लिए सम्पूर्ण प्रदेश में सेवा संकल्प महोत्सव-2026 आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में विकसित भारत-2047 के विजन के अन्तर्गत युवा, महिला, किसान और वंचित वर्ग को आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण के सामुहिक संकल्प से जोड़ते हुए 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश की 403 विधान सभाओं में नुक्कड़ नाटक एवं नाट्य मंचन का आयोजन किया जायेगा।
यह जानकारी देते हुए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रत्येक विधान सभा में कम से कम 30 स्थानों पर नुक्कड़ नाटक कराये जाने का प्रस्ताव है। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा उपलब्ध कराये गये दलों में से एक दल द्वारा प्रत्येक विधान सभा में अधिकतम 10 नुक्कड़ नाटक एवं 01 नाट्य पंचन किया जायेगा। प्रत्येक विधान सभा में अन्य 19 नुक्कड़ नाटकों हेतु टोलियों का चयन स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन द्वारा विद्यालयों/विश्वविद्यालयों, गैर सरकारी संघटनों, संास्कृतिक संगठनों आदि को आंमत्रित कर निर्धारित स्क्रिप्ट के अनुसार किया जायेगा। 
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सेवा संकल्प महोत्सव के अन्तर्गत प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की सेवा काल को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में विभिन्न स्थलों पर रंगोली का आयोजन किया जायेगा। जिसमें 10 विशिष्ट स्थलों, 98 जनपद स्तरीय स्थलों एवं 826 ब्लॉक स्तरीय स्थलों पर थीम पर आधारित रंगोली बनायी जायेगी। रंगोली बनाने हेतु स्थान का चयन स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन द्वारा किया जायेगा। 826 ब्लॉक स्तरीय रंगोली एवं 98 जिला स्तरीय रंगोली का कार्य जनपद स्तर पर जिला पंचायत राज्य अधिकारी, उपायुक्त, ग्रामीण आजीविका मिशन, परियोजना निदेशक, जिला विद्यालय निर्क्षक तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पर्यवेक्षण कराया जायेगा।
इस आयोजन पर होने वाली व्यय धनराशि रूपये 1,80,60,000/- संबंधित जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद को उपलब्ध कराई जायेगी। नुक्कड़ नाटाकों एवं नाट्य पंचन के आयोजन हेतु जिलाधिकारी द्वारा जिला एवं विधानसभावार नोडल अधिकारी नामित कर कार्यक्रम सम्पन्न कराएं जायेंगे। जनपद स्तर पर निर्धारित की गयी 19 नुक्कड़ नाटक की टोलियों के जल-पान एवं अन्य व्यय हेतु रूपये 2,29,71,000/- व्यय की जायेगी। इन समस्त कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन हेतु अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा धर्मार्थ कार्य द्वारा समस्त जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये गये है।