जापानी तकनीक और यूपी के एमएसएमई का संगम बनेगा नए औद्योगिक विकास का आधार
- जापान-यूपी एमएसएमई पार्टनरशिप फोरम में निवेश, तकनीकी हस्तांतरण, निर्यात और रोजगार पर मंथन; जेवर के पास 500 एकड़ में विकसित होगी 'जापान सिटी’
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विशाल एमएसएमई नेटवर्क को जापान की अत्याधुनिक तकनीक, गुणवत्ता मानकों और औद्योगिक विशेषज्ञता से जोड़कर प्रदेश में नया औद्योगिक ग्रोथ कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मरकरी हॉल में आयोजित ‘जापान-यूपी एमएसएमई पार्टनरशिप फोरम : को-क्रिएटिंग द नेक्स्ट ग्रोथ कॉरिडोर’ में दोनों पक्षों के बीच निवेश, तकनीकी हस्तांतरण, निर्यात, स्टार्टअप, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, रोबोटिक्स और रोजगार के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील, सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव समेत जापानी प्रतिनिधिमंडल, उद्यमी, शिक्षाविद और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
- 90 लाख से अधिक एमएसएमई, जापानी तकनीक से मिलेगा विस्तार
एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 90 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो देश की कुल एमएसएमई इकाइयों का करीब 14 प्रतिशत हैं। सरकार उत्पादन और रोजगार में 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े उपभोक्ता बाजार के कारण उत्तर प्रदेश जापानी कंपनियों के लिए निवेश का आकर्षक केंद्र बन रहा है। गौतमबुद्ध नगर में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास करीब 500 एकड़ में ‘जापान सिटी’ विकसित की जा रही है। इसे ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
- Kaizen और 5S से सुधरेगी एमएसएमई की कार्यक्षमता
मंत्री ने कहा कि जापान की उत्पादन प्रणाली और गुणवत्ता सुधार की पद्धतियों Kaizen, 5S और Green Manufacturing को प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों में प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत और वेस्टेज घटाने तथा यूपी के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ODOP के जरिए प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बाजार और पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है।
- पहली तिमाही में एमएसएमई को 1.40 लाख करोड़ का ऋण
प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ही प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा करीब तीन लाख करोड़ रुपये रहा था।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात दो लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है।
सीएम युवा अभियान के तहत अब तक करीब दो लाख युवाओं को आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा चुका है। अगले 10 वर्षों में 10 लाख युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
- जापानी कंपनियों और यूपी के एमएसएमई के बीच पहले से कारोबारी संबंध
सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव ने कहा कि जापान की कई प्रमुख कंपनियां पहले से उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। कुबोटा, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और मिंडा कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों की मौजूदगी प्रदेश में जापानी उद्योगों के भरोसे को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि गाजियाबाद की अल्बर्ट पिस्टन एंड रिंग्स और रेडनिक ऑटो एक्सपोर्ट्स जैसी एमएसएमई इकाइयां ऑटो पार्ट्स का उत्पादन कर होंडा और यामाहा जैसी जापानी कंपनियों को निर्यात कर रही हैं। कई स्थानीय इकाइयां इमिटेशन ज्वेलरी और इंजीनियरिंग उत्पाद भी जापान को भेज रही हैं।
प्रांजल यादव ने कहा कि जापानी उत्पादन तकनीक और गुणवत्ता प्रणालियों को अपनाकर यूपी की एमएसएमई इकाइयां उत्पादकता, गुणवत्ता और निर्यात क्षमता को और मजबूत कर सकती हैं।
- बरेली का हुनर पहुंचा 200 से अधिक देशों में
राजगढ़िया एक्सपोर्ट्स, बरेली के सीईओ सुधीर राजगढ़िया ने बताया कि बरेली की जरी-जरदोजी कला को डिजिटल तकनीक के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा गया है। वर्ष 2018 में तीन लोगों से शुरू हुई कंपनी अब 200 से अधिक देशों में अपने उत्पाद निर्यात कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और ODOP जैसे प्रयासों ने छोटे शहरों के पारंपरिक हुनर को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- स्टार्टअप और रोबोटिक्स में भी सहयोग की संभावनाएं
एकेटीयू इनोवेशन हब के सीईओ डॉ. महिप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 20 हजार से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और 80 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर हैं। एआई, साइबर सिक्योरिटी और रोबोटिक्स के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। जापानी विश्वविद्यालयों और उद्योगों के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज, संयुक्त शोध और सेमीकंडक्टर-रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं।
आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर की एमडी यामिनी भूषण पांडे ने जापानी एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए उत्तर प्रदेश में ‘सॉफ्ट लैंडिंग प्लेटफॉर्म’ विकसित करने का सुझाव दिया। इससे जापानी उद्यमियों को भारतीय बाजार समझने और स्थानीय साझेदार तलाशने में मदद मिल सकती है।
- नोएडा से टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने पर जोर
नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने कहा कि नोएडा के गारमेंट उद्योग से करीब 10 लाख लोग जुड़े हैं और यहां से 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात होता है। उन्होंने जापान के रेडीमेड कपड़ा बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।
फोरम में इस बात पर सहमति बनी कि जेवर के पास प्रस्तावित ‘जापान सिटी’ और प्रदेश का विशाल एमएसएमई आधार मिलकर उत्तर प्रदेश-जापान औद्योगिक सहयोग को नई दिशा दे सकते हैं। जापानी तकनीक, यूपी के हुनर और मजबूत औद्योगिक ढांचे के मेल से वैश्विक सप्लाई चेन में प्रदेश की भूमिका बढ़ाने के साथ रोजगार और निर्यात के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
10 hours ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1