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FCRA संशोधन विधेयक जेपीसी भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पास

#parliamentrefferedfcraamendmentbilltojpc

केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) भेजने का निर्णय लिया है। लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया।

जेपीसी संसद के शीतकालीन सत्र तक देगी अपनी रिपोर्ट

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को जेपीसी को सौंपने का यह प्रस्ताव रखा। जिसे सदन ने ध्वनिमत से पास किया। इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। इस समिति में लोकसभा के माननीय अध्यक्ष द्वारा नामित किए जाने वाले इस सदन के 21 सदस्य और राज्यसभा के माननीय सभापति द्वारा नामित किए जाने वाले राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति को विधेयक की जांच करने और शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा गया है।

विपक्ष ने किया सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध

हालांकि, विपक्ष ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया। कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने कहा, 'सरकार अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। हमारी मांग है कि सरकार इस बिल को वापस ले।' विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'केसी वेणुगोपाल ने गलत बोला है। कई दिनों से कांग्रेस और अन्य दलों ने मांग की कि एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी में भेजा जाए। जब इस महत्वपूर्ण बिल को जेपीसी में भेज रहे हैं तो विपक्ष को इस पर आपत्ति हो रही है।'

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

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रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे*

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

मोदी सरकार ने ऐसा क्या कहा कि खुश हो गए बलूच?

#balochpraiseindiaonoccasionofbalochistan_independence

पाकिस्तान के अशांत सूबे बलूचिस्तान ने आजादी का ऐलान किया है। बलूचों ने बलूचिस्तान को आजाद मुल्क घोषित कर दिया और दुनिया के तमाम देशों से अपील की है कि अब बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा न माना जाए।। बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को बलूचों ने ‘जश्न-ए-आजादी’ मनाया।

एक्स पर भारत को ‘धन्यवाद’ कहा

आजादी का ऐलान करते हुए बलूच विद्रोहियों ने भारत की जमकर तारीफ की है। बलूचों के सबसे बड़े नेता मीर यार बलूच ने एक्स पर एक पोस्ट कर भारत को धन्यवाद कहा है। उन्होंने लिखा कि भारतीय मीडिया ने आज विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस के जश्न को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने आगे कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य, पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भारत के विदेश मंत्रालय के रुख का समर्थन करता है।

मानवाधिकारों पर भारत के रुख की भी सराहना

मीर यार बलूच ने लिखा, हम मानवाधिकारों पर भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख की भी सराहना करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) और उसके नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि प्रवक्ता ने विशेष रूप से बलूचिस्तान का उल्लेख नहीं किया, लेकिन हम जवाबदेही और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए भारत की व्यापक अपील को महत्व देते हैं।

बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील

इस मौके पर बलूच नेता मीर यार बलूच ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील की। लंबे वक्त से आजादी मांग रहे बलूच नेताओं ने कहा कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर दुनिया से समर्थन हासिल करना है। अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन और यूरोपीय देशों से बलूचिस्तान की कथित स्वतंत्रता को समर्थन देने की मांग कीय़ उनका कहना है कि दुनिया को बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत कहने के बजाय एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहिए।

मोदी सरकार ने ऐसा क्या कहा कि खुश हो गए बलूच?

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पाकिस्तान के अशांत सूबे बलूचिस्तान ने आजादी का ऐलान किया है। बलूचों ने बलूचिस्तान को आजाद मुल्क घोषित कर दिया और दुनिया के तमाम देशों से अपील की है कि अब बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा न माना जाए।। बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को बलूचों ने ‘जश्न-ए-आजादी’ मनाया।

एक्स पर भारत को ‘धन्यवाद’ कहा

आजादी का ऐलान करते हुए बलूच विद्रोहियों ने भारत की जमकर तारीफ की है। बलूचों के सबसे बड़े नेता मीर यार बलूच ने एक्स पर एक पोस्ट कर भारत को धन्यवाद कहा है। उन्होंने लिखा कि भारतीय मीडिया ने आज विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस के जश्न को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने आगे कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य, पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भारत के विदेश मंत्रालय के रुख का समर्थन करता है।

मानवाधिकारों पर भारत के रुख की भी सराहना

मीर यार बलूच ने लिखा, हम मानवाधिकारों पर भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख की भी सराहना करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) और उसके नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि प्रवक्ता ने विशेष रूप से बलूचिस्तान का उल्लेख नहीं किया, लेकिन हम जवाबदेही और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए भारत की व्यापक अपील को महत्व देते हैं।

बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील

इस मौके पर बलूच नेता मीर यार बलूच ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील की। लंबे वक्त से आजादी मांग रहे बलूच नेताओं ने कहा कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर दुनिया से समर्थन हासिल करना है। अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन और यूरोपीय देशों से बलूचिस्तान की कथित स्वतंत्रता को समर्थन देने की मांग कीय़ उनका कहना है कि दुनिया को बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत कहने के बजाय एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहिए।

पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की सराहना

नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार, दीपक तंवर द्वारा आयोजित कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर लोधी रोड नई दिल्ली में भारत माता मिशन एवं चिन्मय भारत न्यास द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर विशेष चर्चा इंडिया टीवी के सीईओ पुराने साथी भाई रजत शर्मा सतीश उपाध्याय एवं भारत सरकार के गणमान्य अधिकारियों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ । चिन्मय भारत न्यास के संस्थापक अध्यक्ष पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए विशिष्ट जनों ने भारत सरकार द्वारा न्यास को पूर्ण सहयोग करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की।
पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की सराहना

नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार, दीपक तंवर द्वारा आयोजित कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर लोधी रोड नई दिल्ली में भारत माता मिशन एवं चिन्मय भारत न्यास द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर विशेष चर्चा इंडिया टीवी के सीईओ पुराने साथी भाई रजत शर्मा सतीश उपाध्याय एवं भारत सरकार के गणमान्य अधिकारियों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ । चिन्मय भारत न्यास के संस्थापक अध्यक्ष पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए विशिष्ट जनों ने भारत सरकार द्वारा न्यास को पूर्ण सहयोग करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इंदिरा गांधी के हत्यारे का बेटा लड़ेगा चुनाव, अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब नेदिया टिकट

#punjabelection2027warispunjabdemakeindiragandhiassassinationconvictsoncandidate

पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल 2027 में होने हैं। अभी चुनाव में कई महीने का समय है लेकिन पंजाब में राजनीतिक अखाड़ा सजकर तैयार हो चुका है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने अपने पहले उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है। पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को आपना उम्मीदवार बनाया है।

अमृतपाल के पिता ने किया एलान

वारिस पंजाब दे पार्टी ने फतेहगढ़ साहिब की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की ओर से मंगलवार को अमृतसर में उनके नाम की घोषणा की गई। उम्मीदवारी का एलान पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया। इस दौरान सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी मौजूद रहे।

तरसेम सिंह ने बताया पार्टी का मकसद

पार्टी उम्मीदवार की घोषणा करते हुए तरसेम सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी का मकसद सिर्फ राजनीतिक सत्ता पाना नहीं है। यह पंथिक सिद्धांतों, पंजाब के अधिकारों और समुदाय के लिए कुर्बानी देने वाले परिवारों के योगदान और सम्मान को मान्यता देने पर केंद्रित है। हाल ही में हुई राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में कि पार्टी पुरानी कुर्बानियों से जुड़े परिवारों से दूरी बना रही है, उन्होंने कहा कि सतवंत के बेटे को उम्मीदवार बनाना इसका सीधा सबूत है कि ऐसा नहीं है।

कौन हैं सतवंत सिंह

61 साल के सतवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी केहर सिंह के बेटे है। केहर सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे और 1989 में उन्हें फांसी दी गई थी। केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं। सतवंत बस्सी पठाना के मुस्तफाबाद गांव के रहने वाले हैं।