/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png StreetBuzz मोदी सरकार ने ऐसा क्या कहा कि खुश हो गए बलूच? India
मोदी सरकार ने ऐसा क्या कहा कि खुश हो गए बलूच?

#balochpraiseindiaonoccasionofbalochistan_independence

पाकिस्तान के अशांत सूबे बलूचिस्तान ने आजादी का ऐलान किया है। बलूचों ने बलूचिस्तान को आजाद मुल्क घोषित कर दिया और दुनिया के तमाम देशों से अपील की है कि अब बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा न माना जाए।। बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को बलूचों ने ‘जश्न-ए-आजादी’ मनाया।

एक्स पर भारत को ‘धन्यवाद’ कहा

आजादी का ऐलान करते हुए बलूच विद्रोहियों ने भारत की जमकर तारीफ की है। बलूचों के सबसे बड़े नेता मीर यार बलूच ने एक्स पर एक पोस्ट कर भारत को धन्यवाद कहा है। उन्होंने लिखा कि भारतीय मीडिया ने आज विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस के जश्न को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने आगे कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य, पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भारत के विदेश मंत्रालय के रुख का समर्थन करता है।

मानवाधिकारों पर भारत के रुख की भी सराहना

मीर यार बलूच ने लिखा, हम मानवाधिकारों पर भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख की भी सराहना करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) और उसके नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि प्रवक्ता ने विशेष रूप से बलूचिस्तान का उल्लेख नहीं किया, लेकिन हम जवाबदेही और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए भारत की व्यापक अपील को महत्व देते हैं।

बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील

इस मौके पर बलूच नेता मीर यार बलूच ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील की। लंबे वक्त से आजादी मांग रहे बलूच नेताओं ने कहा कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर दुनिया से समर्थन हासिल करना है। अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन और यूरोपीय देशों से बलूचिस्तान की कथित स्वतंत्रता को समर्थन देने की मांग कीय़ उनका कहना है कि दुनिया को बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत कहने के बजाय एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहिए।

मोदी सरकार ने ऐसा क्या कहा कि खुश हो गए बलूच?

#balochpraiseindiaonoccasionofbalochistan_independence

पाकिस्तान के अशांत सूबे बलूचिस्तान ने आजादी का ऐलान किया है। बलूचों ने बलूचिस्तान को आजाद मुल्क घोषित कर दिया और दुनिया के तमाम देशों से अपील की है कि अब बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा न माना जाए।। बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को बलूचों ने ‘जश्न-ए-आजादी’ मनाया।

एक्स पर भारत को ‘धन्यवाद’ कहा

आजादी का ऐलान करते हुए बलूच विद्रोहियों ने भारत की जमकर तारीफ की है। बलूचों के सबसे बड़े नेता मीर यार बलूच ने एक्स पर एक पोस्ट कर भारत को धन्यवाद कहा है। उन्होंने लिखा कि भारतीय मीडिया ने आज विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस के जश्न को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने आगे कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य, पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भारत के विदेश मंत्रालय के रुख का समर्थन करता है।

मानवाधिकारों पर भारत के रुख की भी सराहना

मीर यार बलूच ने लिखा, हम मानवाधिकारों पर भारत के सैद्धांतिक और सुसंगत रुख की भी सराहना करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) और उसके नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि प्रवक्ता ने विशेष रूप से बलूचिस्तान का उल्लेख नहीं किया, लेकिन हम जवाबदेही और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए भारत की व्यापक अपील को महत्व देते हैं।

बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील

इस मौके पर बलूच नेता मीर यार बलूच ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील की। लंबे वक्त से आजादी मांग रहे बलूच नेताओं ने कहा कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर दुनिया से समर्थन हासिल करना है। अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन और यूरोपीय देशों से बलूचिस्तान की कथित स्वतंत्रता को समर्थन देने की मांग कीय़ उनका कहना है कि दुनिया को बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत कहने के बजाय एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहिए।

पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की सराहना

नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार, दीपक तंवर द्वारा आयोजित कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर लोधी रोड नई दिल्ली में भारत माता मिशन एवं चिन्मय भारत न्यास द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर विशेष चर्चा इंडिया टीवी के सीईओ पुराने साथी भाई रजत शर्मा सतीश उपाध्याय एवं भारत सरकार के गणमान्य अधिकारियों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ । चिन्मय भारत न्यास के संस्थापक अध्यक्ष पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए विशिष्ट जनों ने भारत सरकार द्वारा न्यास को पूर्ण सहयोग करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की।
पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की सराहना

नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार, दीपक तंवर द्वारा आयोजित कार्यक्रम हैबिटेट सेंटर लोधी रोड नई दिल्ली में भारत माता मिशन एवं चिन्मय भारत न्यास द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर विशेष चर्चा इंडिया टीवी के सीईओ पुराने साथी भाई रजत शर्मा सतीश उपाध्याय एवं भारत सरकार के गणमान्य अधिकारियों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ । चिन्मय भारत न्यास के संस्थापक अध्यक्ष पंडित अजीत मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए विशिष्ट जनों ने भारत सरकार द्वारा न्यास को पूर्ण सहयोग करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इंदिरा गांधी के हत्यारे का बेटा लड़ेगा चुनाव, अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब नेदिया टिकट

#punjabelection2027warispunjabdemakeindiragandhiassassinationconvictsoncandidate

पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल 2027 में होने हैं। अभी चुनाव में कई महीने का समय है लेकिन पंजाब में राजनीतिक अखाड़ा सजकर तैयार हो चुका है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने अपने पहले उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है। पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को आपना उम्मीदवार बनाया है।

अमृतपाल के पिता ने किया एलान

वारिस पंजाब दे पार्टी ने फतेहगढ़ साहिब की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की ओर से मंगलवार को अमृतसर में उनके नाम की घोषणा की गई। उम्मीदवारी का एलान पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया। इस दौरान सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी मौजूद रहे।

तरसेम सिंह ने बताया पार्टी का मकसद

पार्टी उम्मीदवार की घोषणा करते हुए तरसेम सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी का मकसद सिर्फ राजनीतिक सत्ता पाना नहीं है। यह पंथिक सिद्धांतों, पंजाब के अधिकारों और समुदाय के लिए कुर्बानी देने वाले परिवारों के योगदान और सम्मान को मान्यता देने पर केंद्रित है। हाल ही में हुई राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में कि पार्टी पुरानी कुर्बानियों से जुड़े परिवारों से दूरी बना रही है, उन्होंने कहा कि सतवंत के बेटे को उम्मीदवार बनाना इसका सीधा सबूत है कि ऐसा नहीं है।

कौन हैं सतवंत सिंह

61 साल के सतवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी केहर सिंह के बेटे है। केहर सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे और 1989 में उन्हें फांसी दी गई थी। केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं। सतवंत बस्सी पठाना के मुस्तफाबाद गांव के रहने वाले हैं।

स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण, खुदीराम का बलिदान युवाओं के लिए बड़ा संदेश

#khudirambosedeathanniversary18yearoldmartyrterrifiedthebritish_empire

आज जब हम 18 साल की उम्र के युवाओं की गलतियों को बचपना कहकर दरकिनार करने की कोशिश करते हैं। ऐसी ही छोटी उम्र में एक युवक ने कुछ ऐसा कर दिया था, जिसने पूरे अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी। अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ क्रांति को एक नई आग दी। देश के इतिहास के पन्नों में दर्ज वो युवक जो 18 साल की उम्र में हंसते-हंसते भारत माता की रक्षा के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया था। हम बात कर रहे हैं अमर शहीद खुदीराम बोस की।

आजादी का एक मतवाला अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए 15 साल की उम्र में अनुशीलन समिति से जुड़ गए। अनुशीलन समिति 20वीं सदी के शुरुआती दौर में बंगाल में बनी एक गुप्त, क्रांतिकारी और सशस्त्र संगठन था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त कर भारत को स्वतंत्र कराना था। देश को स्वतंत्र कराने और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ खड़ा हुआ ये युवक आज ही के दिन यानी 11 अगस्त को केवल 18 साल की उम्र में देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गया।

इस तरह नाम पड़ा खुदीराम बोस

खुदीराम बोस का जन्म पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में 3 दिसंबर 1889 को त्रिलोक्यपुरी बोस और लक्ष्मीप्रिया के घर हुआ। खुदीराम के जन्म से पहले उनके माता-पिता ने दो बेटों को बीमारी के चलते खोया था। इस बार खुदीराम के रूप में तीसरी संतान हुई तो डर स्वाभाविक था। तब मां-बाप ने एक देसी टोटका आजमाया। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी को तीन मुट्ठी 'खुदी' (बंगाल में टूटे हुए चावल को खुदी कहते हैं) देकर इस बच्चे को प्रतीकात्मक रूप से बेच दिया, ताकि मौत की नजर इस पर न पड़े। तीन मुट्ठी खुदी के बदले बचे इस बच्चे का नाम पड़ गया- खुदीराम।

15 साल की उम्र में पहली गिरफ्तारी

जिस उम्र में लड़के किताबों की दुनिया स्कूली जीवन में मस्त रहते हैं उस उम्र में खुदीराम बोस अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने उतर गए। उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ पर्चे बांटने में लगा दिया गया। यह बात थी साल 1906 की। एक और क्रांतिकारी सत्येंद्रनाथ बोस ने वंदे मातरम लिखकर अंग्रेजी शासन के विरोध में पर्चे बंटवाने की जिम्मेदारी दी। मिदनापुर में आयोजित एक मेले में इस पर्चे को बंटवाने का प्लान था। अंग्रेजों को इस बात का पता चल गया। अंग्रेजों के पिट्ठुओं ने इसकी खबर दे दी। खुदीराम बोस को देखते ही उन्हें पकड़ने का प्रयास हुआ। लेकिन, खुदीराम ने अंग्रेज अफसर के मुंह पर घूंसा जड़ दिया। हालांकि कई अंग्रेज सिपाही होने के चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। और पहली बार देश के लिए खुदीराम गिरफ्तार हुए। उन दिनों जिला जज हुआ करते थे डगलस किंग्सफोर्ड। इस जज को भारतीयों को सख्त नफरत थी। सजा के नाम पर भारतीयों पर कोडे़ बरसाने की सजा दी जाती थी। 15 साल के खुदीराम को जज ने 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। इस जज ने भारतीयों पर अत्याचार मचा रखा था। आखिर में इस जज को मारने का प्लान बनाया गया।

किंग्सफोर्ड को मारने का प्लान

क्रांतिकारियों ने तय किया कि इस किंग्सफोर्ड का काम तमाम करना होगा। खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल कुमार चाकी को यह जिम्मेदारी दी गई। किंग्सफोर्ड का ट्रांसफर बिहार के मुजफ्फरपुर हो गया था। ये दोनों लड़के अप्रैल 1908 में मुजफ्फरपुर पहुंचे। कई दिनों तक किंग्सफोर्ड की रेकी की गई। शाम का वक्त था। खुदीराम और प्रफुल्ल किंग्सफोर्ड के घर के बाहर एक पेड़ के अंधेरे में घात लगाए बैठे थे। तभी एक बग्गी बाहर निकली। खुदीराम को लगा शिकार सामने हैय़ उन्होंने दौड़कर उस बग्गी पर बम मार दिया। जोरदार धमाका हुआ। दोनों को लगा कि उन्होंने अपना मिशन पूरा कर लिया है। लेकिन उस बग्गी में किंग्सफोर्ड नहीं था। उसमें लोकल बैरिस्टर प्रिंगल कैनेडी की पत्नी और बेटी सवार थीं, जिनकी इस हमले में जान चली गई।

18 साल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

दोनों करीब 25 मील भागने के बाद एक रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। बोस पर पुलिस को शक हो गया और पूसा रोड रेलवे स्टेशन (अब यह स्टेशन खुदीराम बोस के नाम पर है) पर उन्हें घेर लिया गया। खुद को घिरा देख प्रफुल्ल चंद ने स्वयं को गोली मार ली पर खुदीराम पकड़े गए। खुदीराम बोस पर हत्या का मुकदमा चला और सिर्फ पांच दिन में मुकदमे का फैसला हो गया। 8 जून, 1908 को उन्हें अदालत में पेश किया गया और 13 जून को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। खुदीराम बोस ने मात्र 18 साल, 8 महीने और 8 दिन की उम्र में 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में हँसते-हँसते फाँसी को गले लगा लिया था। उन्हें किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंकने के आरोप में यह सजा दी गई थी। उनका यह बलिदान देश के युवाओं में आज भी देशभक्ति की एक अनोखी मिसाल है।

खुदीराम का बलिदान आज की युवा पीढ़ी के लिए संदेश

खुदीराम बोस का बलिदान आज की युवा पीढ़ी को देशप्रेम, निस्वार्थ त्याग और अन्याय के खिलाफ अदम्य साहस का पाठ पढ़ाता है। मात्र 18 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़कर उन्होंने यह सिखाया कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान व्यक्तिगत जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। बिना किसी स्वार्थ के देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देना। व्यक्तिगत सुखों से ऊपर राष्ट्रहित को रखना। देश की संस्कृति और स्वतंत्रता के प्रति हमेशा जागरूक रहना। आज की आज़ादी को हल्के में न लेकर इसके पीछे के संघर्षों को याद रखना।

एनडीए के 'मंगल मिलन' में पीएम नरेंद्र मोदी ने लहाराया तिरंगा, एकजुटता का दिया संदेश

#ndamangalmilanpmnarendramodivandemataramwave_tiranga

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों की मंगल बैठक 'वंदे मातरम' नारे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते नजर आए।

नई दिल्ली में मंगलवार को संसद पुस्तकालय में ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एनडीए की मंगल मिलन बैठक में अलग ही नजारा देखने को मिला। पीएम मोदी की अगुवाई में वहां मौजूद सभी सांसदों ने तिरंगा लहराया। गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, नितिन गडकरी समेत तमाम नेता तिरंगा लहराते नजर आए।

वंदे मातरम् के नारे लगाए गए

इस दौरान वहां वंदे मातरम् के नारे लगाए गए। 15 अगस्त से पहले आखिरी मंगलवार को हुई बैठक में सभी सांसदों ने एक साथ तिरंगा लहराया और वंदे मातरम् के नारे लगाए। पूरा हॉल देशभक्ति से सराबोर दिखाई दे रहा था। बता दें कि देशभर में दस से सत्रह अगस्त तक तिरंगा यात्रा का आयोजन हो रहा है। इस दौरान मंगल मिलन बैठक में भी अनोखा नजारा देखने को मिला।

'मंगल मिलन' बैठक का मकसद क्या है?

'मंगल मिलन' बैठक वास्तव में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक का बदला हुआ नाम है। इसका मकसद रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देना और गठबंधन के सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना है। संसद सत्र के दौरान रोजाना सदन की रणनीति तैयार करने और अलग-अलग दलों के बीच सहमति बनाने के अलावा, 'मंगल मिलन' बैठक एनडीए के सहयोगी दलों के साथ समन्वय बढ़ाने का माध्यम भी है।

भारत ने नक्शे पर दिखाए अरूणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम, चीन की बौखलाहट आई सामने

#chinacriticizedindiaovertherenamingofplacesinarunachalpradesh

भारत और चीन सीमा पर सालों से चले आ रहे तनाव के बाद अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच भारत ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन को एक बार फिर साफ संदेश दिया है। भारत सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे को अपडेट करते हुए चीन की सीमा से जुड़े 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्ज किया है। अरूणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के आधिकारिक नामकरण किए जाने पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

चीन ने कहा-गैर-कानूनी और अमान्य

बीजिंग में विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि भारत का 'चीन द्वारा लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे नामों को बदलने का प्रयास गैर-कानूनी और अमान्य है और इससे यह सच्चाई नहीं बदल सकती कि जंगनान चीन का हिस्सा है।'

चीन ने कहा-संबंधों को सुधारने का प्रयासों होगा जटिल

वहीं, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारत के इस कदम को "आत्मधोखा" करार दिया गया है। चीन का दावा है कि भारत का यह एकतरफा फैसला दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने और द्विपक्षीय राजनीतिक संबंधों को सुधारने के प्रयासों को जटिल बना सकता है।

भारत ने मानचित्र पर तय किए 27 स्थानों के नाम

भारत ने अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले 27 स्थानों के नाम अपने आधिकारिक मानचित्र पर मानकीकृत किए हैं। इस सूची में भूमि क्षेत्र, दर्रे, एक झील और एक ऐतिहासिक स्मारक शामिल हैं। इनमें ऊपरी सुबनसिरी में स्थित लोंग जू और माजा गांव, थाग ला और दजो ला दर्रे, म्यांमार सीमा के पास जयरामपुर लॉजिस्टिक्स हब और 1962 के युद्ध नायक शहीद जसवंत सिंह रावत की याद में बना रामनगर जसवंत गढ़ स्मारक प्रमुख हैं।

चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है

बता दें कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है और उसने इसका नाम 'जांगनान' रखा हुआ है। चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। चीन के इन्हीं मनगढ़ंत और आधारहीन दावों को खारिज करते हुए और आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्टता बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने गृह मंत्रालय और अरुणाचल प्रदेश सरकार के परामर्श से 27 जगहों के सटीक भारतीय नाम आधिकारिक नक्शों और सरकारी अभिलेखों में शामिल किए हैं।

UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत, लेनदेन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

-  P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, भविष्य में MDR लागू हुआ तो सीमित मर्चेंट पर ही होगा असर

नई दिल्ली। UPI से लेनदेन करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए राहत की खबर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI के जरिए नागरिकों के लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले UPI ट्रांजैक्शन भी पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
सरकार के मुताबिक, भविष्य में यदि MDR (Merchant Discount Rate) लागू करने की जरूरत पड़ती है तो इसे सीमित संख्या में मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू किया जाएगा। तय सीमा से अधिक के ट्रांजैक्शन पर मामूली MDR लगाए जाने की व्यवस्था हो सकती है।

सरकार ने साफ किया है कि आम नागरिकों के लिए UPI लेनदेन मुफ्त रहेगा, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और आम लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़ने की उम्मीद है।
चार हाईकोर्ट को मिले 30 नए न्यायाधीश, केंद्र ने जारी की नियुक्ति अधिसूचना
-  मद्रास हाईकोर्ट में 15, कलकत्ता में 8, कर्नाटक में 6 और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक नियुक्ति

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के चार उच्च न्यायालयों में कुल 30 न्यायाधीशों और अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक मद्रास हाईकोर्ट को सबसे अधिक 15 न्यायाधीश मिले हैं। इसके अलावा कलकत्ता हाईकोर्ट में आठ, कर्नाटक हाईकोर्ट में छह और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है। नियुक्त किए गए 30 लोगों में 20 अधिवक्ता और 10 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं।

- मद्रास हाईकोर्ट में 15 नियुक्तियां :-
मद्रास हाईकोर्ट में पांच अधिवक्ताओं को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया है, जबकि 10 को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। स्थायी न्यायाधीश के रूप में गोविंदराजन कृष्णस्वामी, रजनीश पथियिल, रमेश नटराजन, के. मुथुकुमार और रामकृष्णन राजेश विवेकानन्दन की नियुक्ति हुई है।
अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर रविकुमार शंकरनारायणन, दिलीप कुमार नागराजन, एलप्पन मनोहरन, पी. मुरुगन, एमडी सुमति, एस. अली, सी. तिरुमगल, शनमुगम कार्तिकेयन, मुरुगेसन बलुचामी और गुणसेकरन को नियुक्त किया गया है।

- कलकत्ता हाईकोर्ट में आठ अतिरिक्त न्यायाधीश :-
कलकत्ता हाईकोर्ट में आर्यक दत्त, अतरूप बनर्जी, संदीप कुमार डे, पार्थ प्रतीम रॉय, सुदीप देब, अनुज सिंह, अर्जुन रे मुखर्जी और रिशाद मेडोरा को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

- कर्नाटक हाईकोर्ट में छह नियुक्तियां :-
कर्नाटक हाईकोर्ट में राघवेन्द्र सीताराम श्रीवत्स, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगाराव, विवेकानन्द थडगावडी प्रकाश, प्रमोद बक्केस्वरा और शांति भूषण होम्बे गौड़ा को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया है।

- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक नियुक्ति :-
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अमित लाहोटी को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।