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बिग न्यूज:JPSC-JSSC विवाद पर बड़ी बैठक ,देवेन्द्रनाथ महतो गुट और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है बात चित

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों और सरकार के बीच शनिवार को एक और दौर की मह्त्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है।

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच का 8-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कड़े सुरक्षा घेरे में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है.शुक्रवार की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज की इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में JLKM नेता देवेन्द्रनाथ महतो पिछले 6 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया .

शुक्रवार को सरकार और छात्रों के दूसरे गुट के बीच हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। हालांकि, दोनों ही पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।

देवेन्द्रनाथ महतो की बिगड़ती सेहत के बीच, आज की यह बैठक बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या आज की वार्ता से अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या गतिरोध यूं ही बरकरार रहेगा।

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77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन: जल, जंगल, जमीन के संरक्षण से ही बनेगा समृद्ध झारखंड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना सोरेन आज खेलगांव, रांची स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा वृक्षारोपण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन ही सतत भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर और चिंताजनक चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसके प्रभाव अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता और समग्र विकास प्रक्रिया पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के साथ लगातार हो रहे हस्तक्षेप, अंधाधुंध दोहन तथा अनियोजित विकास गतिविधियों के कारण जलवायु में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण, खनन गतिविधियों, शहरीकरण और विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों का पर्यावरण पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक होगा, जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ से बचना होगा तथा जल, जंगल और जमीन जैसे अमूल्य संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना होगा। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने के लिए आज से ही ठोस कदम उठाने होंगे। वृक्षारोपण, वन संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जब तक आमजन इस दिशा में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा हरित एवं समृद्ध भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

हर नागरिक एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प भी ले। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखना, उनका नियमित संरक्षण करना और उन्हें विकसित कर वृक्ष के रूप में स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि राज्य का प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाले समय में झारखंड हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में विभिन्न अभियान के तहत लगाए गए पौधों की स्थिति का वे स्वयं जायजा लेंगे। साथ ही, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और समुदायों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन का असर मानव जीवन के साथ पशु-पक्षियों और वन्यजीवों पर भी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के स्वरूप में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक घटनाओं की प्रकृति और तीव्रता में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि अनियमित वर्षा, बादल फटने की घटनाएं, अत्यधिक वर्षा, भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखे की स्थिति, बिजली गिरने तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन बदलते मौसमीय हालात का सीधा प्रभाव मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों और आजीविका पर पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों को इसका गंभीर प्रभाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जन-धन की हानि के साथ-साथ फसलों, पशुधन और आधारभूत संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे लोगों के जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं को भी इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्राकृतिक आवासों में बदलाव, जल स्रोतों का प्रभावित होना तथा पर्यावरणीय असंतुलन जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।

पर्यावरण, मानव जीवन और वन्यजीवों के लिए उपयोगी वृक्षों के रोपण को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में वृक्षारोपण अभियानों के तहत ऐसे वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन, वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी प्रजातियों का चयन करना आवश्यक है जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, मिट्टी की प्रकृति तथा क्षेत्र की जैव विविधता को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा। इसके तहत फलदार, छायादार, औषधीय एवं वन्यजीवों के लिए अनुकूल वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, स्वच्छ वायु और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति के अनुकूल और दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ देने वाली वृक्षारोपण योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है, ताकि झारखंड को अधिक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संतुलित राज्य बनाया जा सके।

अंत में असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर वन्यजीवों, जैव विविधता और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ रहा है। बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा संरक्षित वन क्षेत्रों को व्यापक क्षति पहुंचती है। इससे वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं तथा उनके जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। कई बार वन्यजीवों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में अपने मूल आवास छोड़ने पड़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और अस्तित्व दोनों प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि मानव गतिविधियों के विस्तार तथा जंगलों के लगातार घटते क्षेत्रफल के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को विवश हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। यह स्थिति पर्यावरणीय असंतुलन का स्पष्ट संकेत है और हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन की सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का आधार पर्यावरण ही है। स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम या अभियान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग को जनभागीदारी के साथ बढ़ावा देना होगा। तभी हम पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए एक सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को किया सम्मानित

77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वन संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से चयनित 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मानित व्यक्तियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित झारखंड के निर्माण में इनकी भूमिका प्रेरणादायी है।

सम्मानित होने वालों में शामिल हैं

श्रीमती फुलवीन बेरनादेत कुजूर (रांची वन प्रमंडल), श्री टिकैत चन्द्र प्रधान (घाटशिला वन प्रमंडल), श्री बुधदेव चालक (दुमका वन प्रमंडल), श्री पौथीराम हांसदा (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री रमेश नायक (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री निरोज टेटे (गुमला वन प्रमंडल), श्री तारकेश्वर मुंडा (रांची वन प्रमंडल), श्रीमती सोनी देवी (झारखंड जैव-विविधता परिषद, रांची)

श्री लक्ष्मण मुर्मू (साहेबगंज वन प्रमंडल)

श्री राजीव रंजन प्रसाद (साहेबगंज वन प्रमंडल), मो० जैनुल अंसारी (सिमडेगा वन प्रमंडल), श्री कृष्ण सिंह (कोडरमा वन प्रमंडल), श्री मनोज राणा (गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल), श्री मिथिलेश कुमार (मेदिनीनगर वन प्रमंडल), श्री सुरेन्द्र पासवान (मेदिनीनगर वन प्रमंडल)

श्री मुनेश्वर महतो (हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल), श्री खुशीद आलम (चतरा उत्तरी वन प्रमंडल), श्री गुडल सिंह (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री राजु कोरवा (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री नासिर खान (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल)

इस अवसर पर विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री विश्वनाथ शाह, श्री ए. टी. मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वेंकटेश लू, श्री जब्बेर सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एस. आर. नेटेशा सहित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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#Team PRD(CMO)

आदिवासी महोत्सव 2026: रांची में फिल्म फेस्टिवल और SRFTI कोलकाता द्वारा मास्टर क्लास का आयोजन

रांची:- झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JFFDCL) द्वारा आगामी आदिवासी महोत्सव-2026 के तहत 9 अगस्त को मोराबादी मैदान, रांची में विशेष फिल्म फेस्टिवल एवं मास्टर क्लास का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण, दृश्य कथानक (विजुअल स्टोरीटेलिंग) और मीडिया उद्योग की बारीकियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

इस संबंध में झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति को पत्र भेजकर कार्यक्रम में सहभागिता का आमंत्रण दिया है। साथ ही विश्वविद्यालय से जनसंचार, पत्रकारिता, मीडिया स्टडीज, फिल्म स्टडीज, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल कम्युनिकेशन एवं संबंधित विषयों के कम से कम 50 विद्यार्थियों को नामित कर कार्यक्रम में भेजने का अनुरोध किया गया है।

फिल्म फेस्टिवल के दौरान आदिवासी जीवन, स्वदेशी संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और उत्कृष्ट सिनेमा पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं "फिल्म मेकिंग एंड करियर ऑपर्च्युनिटीज इन द फिल्म इंडस्ट्री" विषय पर विशेष मास्टर क्लास आयोजित होगी। इसका संचालन सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक करेंगे।

मास्टर क्लास में प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण की मूलभूत तकनीक, विजुअल स्टोरीटेलिंग, पटकथा लेखन, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, संपादन, साउंड डिजाइन तथा फिल्म, टेलीविजन, ओटीटी और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में उभरते करियर अवसरों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही सिनेमा एवं मीडिया के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं पर भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।

झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का मानना है कि यह कार्यक्रम युवाओं को फिल्म एवं मीडिया उद्योग की व्यावहारिक समझ विकसित करने के साथ-साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए अवसर प्रदान करेगा। आदिवासी महोत्सव के दौरान आयोजित यह पहल राज्य के युवा मीडिया एवं फिल्म विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीखने और करियर निर्माण का मंच साबित होगी। ज्ञात हो कि विगत 22 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में झारखंड राज्य फिल्म विकास निगम एवं सत्यजीत रे फिल्म इंस्टीट्यूट कोलकाता के बीच स्थानीय सूचना भवन में फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना को लेकर एमओयू (MoU) हस्ताक्षरित कि

या गया था।

रांची में बैठे प्रदर्शनकारियों से राहुल गांधी ने की बात, मांगों पर सीएम हेमंत से बात करने का दिलाया भरोसा

#jharkhand

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है। आज 14वें दिन भी स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बात की है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बता दें कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नीत गठबंधन का एक घटक दल है।

छात्रों को दिया हर संभव मदद का भरोसा

छात्र नेताओं ने दावा किया कि गुरुवार देर शाम राहुल गांदी से फोन पर बातचीत हुई। धरना दे रहे छात्र नेताओं की राहुल गांधी से बातचीत रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के माध्यम से कराई गई। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वो इस मामले को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से भी बात कर सकते हैं।

मांगों की सूची व्हाट्सएप पर मंगाई

ये बातचीत लगभग 10 मिनट तक चली। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे अपनी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन उन्हें व्हाट्सएप पर भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले पर झारखंड सरकार से बात करेंगे और छात्रों की मांगों के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।

क्या है छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए। उन्होंने जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया।

वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित

इधर, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक अधिवक्ता को शामिल किया गया। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद रहेंगे।

जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

#jpscjsccexamcontroversystudentstoholdtalkswith_government

झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

9 अगस्त को धूमधाम से मनेगा झारखंड आदिवासी महोत्सव, शिबू सोरेन को समर्पित होगा कार्यक्रम

#jharkhandtribalfestival_meetin

झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन 9 अगस्त से किया जा रहा है। यह दो दिवसीय महोत्सव 9 अगस्त से 10 अगस्त तक रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें झारखंड के अलावा देश के 11 अलग-अलग राज्य शामिल होंगे। यह भव्य आयोजन दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित होगा।

इस आयोजन की खास बात आदिवासी कला, लोक परंपरा, हस्तशिल्प, खान-पान और जीवनशैली के साथ आधुनिक तकनीक को भी महोत्सव का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार की तैयारियों के मुताबिक, राजधानी रांची के अलावा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मोरहाबादी से बिरसा चौक तक निकलेगी आदिवासी जतरा

महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण मोरहाबादी मैदान से बिरसा चौक तक निकलने वाली भव्य आदिवासी जतरा होगी। इसमें बड़ी संख्या में कलाकार और प्रतिभागी शामिल होंगे। इस जतरा के जरिए झारखंड की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामुदायिक जीवन की झलकी दिखाई जाएगी।

देशभर के आदिवासी कलाकारों का होगा जुटान

इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से 5 हजार से अधिक आदिवासी कलाकार, लोक कलाकार और सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके जरिए अलग-अलग जनजातीय समुदायों की कला और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी।

आदिवासी सांस्कृतिक की मिलेगी झलक

कार्यक्रम में आदिवासी सांस्कृतिक के तहत प्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली, ट्राइबल फैशन शो, डांस तथा नागपुरी गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही आदिवासी पारंपरिक व्यंजन एवं ट्राइबल मेला का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान की झलक देखने को मिलेगी।

डूरंड कप: एससी दिल्ली ने शानदार वापसी कर जमशेदपुर एफसी को 2-1 से हराया

रांची:राजधानी रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में खेले गए 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप के ग्रुप-सी मुकाबले में स्पोर्टिंग क्लब (एससी) दिल्ली ने शानदार वापसी करते हुए जमशेदपुर एफसी को 2-1 से शिकस्त दी। एससी दिल्ली के लिए डेब्यू कर रहे लालरिनलियाना ह्नामटे ने दूसरे हाफ में महज पांच मिनट के भीतर दो गोल दागकर टीम को यादगार जीत दिलाई।

मैच की शुरुआत से ही जमशेदपुर एफसी ने आक्रामक खेल दिखाया और 22वें मिनट में प्रणय हलदर के लंबे पास पर सनन मोहम्मद ने शानदार लेफ्ट फुट शॉट लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ में एससी दिल्ली ने बराबरी की कई कोशिशें कीं, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी और मध्यांतर तक जमशेदपुर बढ़त बनाए रही।

दूसरे हाफ में एससी दिल्ली ने जोरदार वापसी की। 51वें मिनट में जमशेदपुर के गोलकीपर अल्बिनो गोम्स की गलती का फायदा उठाते हुए लालरिनलियाना ह्नामटे ने रिबाउंड पर गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके महज पांच मिनट बाद ऑगस्टीन लालरोचाना के सटीक पास पर ह्नामटे ने अपना दूसरा गोल दागते हुए एससी दिल्ली को 2-1 की बढ़त दिला दी।

इसके बाद दिल्ली की टीम ने मजबूत रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन किया और जमशेदपुर एफसी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इंजरी टाइम में एससी दिल्ली के डिफेंडर आशुतोष मेहता को खतरनाक टैकल के लिए रेड कार्ड दिखाया गया, लेकिन इससे मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा।

इस जीत के साथ एससी दिल्ली ने अपने पहले मुकाबले में तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। वहीं, हार के बावजूद जमशेदपुर एफसी दो मैचों में तीन अंकों और बेहतर गोल अंतर के आधार पर ग्रुप-सी में शीर्ष स्थान पर बनी हुई है।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, अब तक 22 बच्चों की गई जान, जानें कैसे फैलता है, क्या हैं लक्षण

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों को प्रभावित करने वाले इस घातक वायरस के संदिग्ध मामलों के बीच अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। अब तक सामने आए 184 संदिग्ध मामलों में से 35 की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हाई अलर्ट पर रखते हुए रोकथाम और इलाज के विशेष इंतजाम किए हैं।

वायरस ने ली 22 बच्चों की जान

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि राज्य में सामने आए सभी संदिग्ध मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। अब तक कुल 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है। 11 सैंपल के नतीजों का अभी भी इंतजार है। मंत्री ने बताया कि अब तक सामने आए संदिग्ध मामलों में से 22 बच्चों की इस वायरस के कारण मौत हो चुकी है।

सात सक्रिय मरीजों का इलाज जारी

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, गांधीनगर, साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का खास इलाज किया जा रहा है और डॉक्टर लगातार उनकी हालत पर नजर रखे हुए हैं। वायरस की पुष्टि वाले सात मरीजों का अभी राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 6 मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस (CHPV) कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे बेहद डरावना बनाती है। इस वायरस की पहली बार पहचान साल 1965 में महाराष्ट्र के 'चांदीपुरा' नाम के गांव में हुई थी, जिसकी वजह से इसका नाम चांदीपुरा पड़ा। यह एक प्रकार का आरएनए वायरस है, जो मुख्य रूप से दिमाग में गंभीर सूजन और संक्रमण पैदा करता है। यह वायरस 9 महीने के शिशु से लेकर 14 साल तक के बच्चों को सबसे जल्दी अपना शिकार बनाता है। वयस्कों के मुकाबले बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण यह उनके शरीर पर बहुत तेजी से हमला करता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस छुआछूत की बीमारी नहीं है यानी यह एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलता। इसके फैलने का असली कारण कीट-पतंगे हैं।

• सैंडफ्लाई (बालू मक्खी)- यह इस वायरस को फैलाने वाला सबसे प्रमुख कीट है। बालू मक्खियां अक्सर कच्चे घरों, मिट्टी की दीवारों की दरारों और सीलन वाली जगहों पर पाई जाती हैं।

• मच्छर और किल्लनी- सैंडफ्लाई के अलावा कुछ खास तरह के मच्छर और किल्लनी भी इस वायरस के वाहक बनते हैं।

बारिश के मौसम में जब नमी और सीलन बढ़ती है, तब इन बालू मक्खियों का प्रजनन तेजी से होता है। इसी वजह से मानसून के समय इस वायरस के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।

क्या हैं वायरस के लक्षण?

संक्रमण के शुरुआत में इसके लक्षण किसी सामान्य फ्लू या दिमागी बुखार जैसे ही लगते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति काफी बिगड़ सकती है। प्रमुख लक्षणों इस प्रकार हैं-

• अचानक तेज बुखार आना

• उल्टी और दस्त होना

• सिर में तेज दर्द और सुस्ती महसूस होना

• दौरे पड़ना या शरीर का ऐंठना

• बेहोशी छाना या बच्चे का भ्रमित स्थिति में जाना

डॉक्टरों के अनुसार, जब यह वायरस दिमाग पर असर डालता है, जिसे मेडिकल भाषा में एन्सेफलाइटिस कहते हैं, तो बेहोशी छा जाती है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को एक साथ नाकाम कर सकता है।

भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ से घिरे डोनाल्ड ट्रंप, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका केस

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति एक बार फिर चर्चा में है। डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है। 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन 25 राज्यों ने 60 देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए नए टैरिफ के फैसले को चुनौती दी है। इन राज्यों का आरोप है कि ये नए टैरिफ फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए आयात करों को बदलने का बहाना हैं।

नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर

सोमवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों ने 60 व्यापारिक साझेदारों से आयात पर नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर यह मुकदमा 10 से 12.5 फीसदी के उन टैरिफ को निशाना बनाता है। यह टैरिफ पिछले महीने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे।

राज्यों का क्या है तर्क?

अपनी शिकायत में राज्यों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है। इतना ही नहीं, इसके लिए पर्याप्त वजह भी नहीं बताई गई। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को दुनिया भर की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी रोकने के नाम पर लगाया, लेकिन दोनों के बीच कोई साफ संबंध नहीं है। याचिका में कहा गया है कि प्रभावित 60 देशों से आने वाले ज्यादातर सामान पर 10% या 12.5% टैरिफ लगाया गया है। इन देशों का अमेरिका के कुल आयात में करीब 99.4% हिस्सा है।

60 देशों के खिलाफ नया टैरिफ

नए टैरिफ तब प्रभावी हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अस्थायी टैरिफ की समय सीमा समाप्त हो गई। इस टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को हुई थी। ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 व्यापारिक साझेदारों के आयात पर लागू होते हैं। नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा है कि अमेरिका में एक सदी से जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है। अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा करने का समय आ गया है।

जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से लगा था झटका

इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई थी।

अब ट्रेड एक्ट की धारा 301 का रूख

अब ट्रंप 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत अधिक स्थायी टैरिफ लगा रहे हैं। यह धारा राष्ट्रपति को अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल देशों के खिलाफ आयात कर लगाने की अनुमति देती है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर बड़े टैरिफ लगाने के लिए धारा 301 का इस्तेमाल किया था, और वे अदालती चुनौतियों में भी टिके रहे थे।

आधार में जन्मतिथि बदलकर 6 साल तक हुआ शोषण, झारखंड की नाबालिग दिल्ली से रेस्क्यू

नई दिल्ली/रांची :-झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की एक 16 वर्षीय किशोरी, जो लगभग छह वर्ष पूर्व मानव तस्करी का शिकार हो गई थी, को दिल्ली में चलाए गए एक संयुक्त बचाव अभियान के दौरान सकुशल मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई चाईबासा पुलिस, दिल्ली पुलिस, मिशन मुक्ति फाउंडेशन तथा रेस्क्यू टीम के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

बचाव के बाद पीड़िता की काउंसलिंग के दौरान मानव तस्करी से जुड़े कई गंभीर तथ्य सामने आए। पीड़िता ने बताया कि उसे नाबालिग अवस्था में झारखंड से बहला-फुसलाकर दिल्ली लाया गया, जहां उससे जबरन घरेलू कार्य कराया गया। इसके बाद उसे मुंबई भेज दिया गया और अंततः एक लाख रुपये में बेचकर एक अज्ञात पंजाबी व्यक्ति से जबरन विवाह करा दिया गया। इस दौरान उसे लगातार मानसिक एवं शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी थाना में मानव तस्करी, धोखाधड़ी एवं अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़िता के आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा कर उसे बालिग दर्शाया, ताकि उसकी वास्तविक आयु छिपाई जा सके तथा मानव तस्करी एवं शोषण को वैध रूप देने का प्रयास किया जा सके। पुलिस इस दस्तावेजी फर्जीवाड़े की भी विस्तृत जांच कर रही है।

यह संपूर्ण कार्रवाई झारखंड भवन के स्थानिक आयुक्त श्री अरवा राजकमल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न की गई, जिनके समन्वय से विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल स्थापित कर पीड़िता का सफलतापूर्वक रेस्क्यू सुनिश्चित किया गया।

जांच में मानव तस्करी गिरोह में प्रतिमा गुप्ता (निवासी गुमला), हेमंत गुप्ता, विशाल गुप्ता, मनीष भारती एवं मीना देवी के नाम सामने आए हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि दिल्ली के रोहिणी स्थित राम विहार क्षेत्र से संचालित इनकी प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से पीड़िता को विभिन्न स्थानों पर भेजा गया था। पुलिस एजेंसी की भूमिका, उससे जुड़े नेटवर्क तथा इस मानव तस्करी रैकेट में शामिल अन्य व्यक्तियों की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार यह मामला संगठित मानव तस्करी नेटवर्क, दस्तावेजों में हेरफेर, बाल श्रम तथा जबरन विवाह जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा प्रतीत होता है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने में जुटी हैं।

मानव तस्करी के विरुद्ध झारखंड सरकार की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति के तहत पीड़िता को आवश्यक कानूनी सहायता, काउंसलिंग तथा पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत संबंधित विभागों के समन्वय से आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है तथा मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच जारी है।