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जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

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झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

9 अगस्त को धूमधाम से मनेगा झारखंड आदिवासी महोत्सव, शिबू सोरेन को समर्पित होगा कार्यक्रम

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झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन 9 अगस्त से किया जा रहा है। यह दो दिवसीय महोत्सव 9 अगस्त से 10 अगस्त तक रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें झारखंड के अलावा देश के 11 अलग-अलग राज्य शामिल होंगे। यह भव्य आयोजन दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित होगा।

इस आयोजन की खास बात आदिवासी कला, लोक परंपरा, हस्तशिल्प, खान-पान और जीवनशैली के साथ आधुनिक तकनीक को भी महोत्सव का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार की तैयारियों के मुताबिक, राजधानी रांची के अलावा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मोरहाबादी से बिरसा चौक तक निकलेगी आदिवासी जतरा

महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण मोरहाबादी मैदान से बिरसा चौक तक निकलने वाली भव्य आदिवासी जतरा होगी। इसमें बड़ी संख्या में कलाकार और प्रतिभागी शामिल होंगे। इस जतरा के जरिए झारखंड की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामुदायिक जीवन की झलकी दिखाई जाएगी।

देशभर के आदिवासी कलाकारों का होगा जुटान

इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से 5 हजार से अधिक आदिवासी कलाकार, लोक कलाकार और सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके जरिए अलग-अलग जनजातीय समुदायों की कला और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी।

आदिवासी सांस्कृतिक की मिलेगी झलक

कार्यक्रम में आदिवासी सांस्कृतिक के तहत प्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली, ट्राइबल फैशन शो, डांस तथा नागपुरी गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही आदिवासी पारंपरिक व्यंजन एवं ट्राइबल मेला का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान की झलक देखने को मिलेगी।

डूरंड कप: एससी दिल्ली ने शानदार वापसी कर जमशेदपुर एफसी को 2-1 से हराया

रांची:राजधानी रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में खेले गए 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप के ग्रुप-सी मुकाबले में स्पोर्टिंग क्लब (एससी) दिल्ली ने शानदार वापसी करते हुए जमशेदपुर एफसी को 2-1 से शिकस्त दी। एससी दिल्ली के लिए डेब्यू कर रहे लालरिनलियाना ह्नामटे ने दूसरे हाफ में महज पांच मिनट के भीतर दो गोल दागकर टीम को यादगार जीत दिलाई।

मैच की शुरुआत से ही जमशेदपुर एफसी ने आक्रामक खेल दिखाया और 22वें मिनट में प्रणय हलदर के लंबे पास पर सनन मोहम्मद ने शानदार लेफ्ट फुट शॉट लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ में एससी दिल्ली ने बराबरी की कई कोशिशें कीं, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी और मध्यांतर तक जमशेदपुर बढ़त बनाए रही।

दूसरे हाफ में एससी दिल्ली ने जोरदार वापसी की। 51वें मिनट में जमशेदपुर के गोलकीपर अल्बिनो गोम्स की गलती का फायदा उठाते हुए लालरिनलियाना ह्नामटे ने रिबाउंड पर गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके महज पांच मिनट बाद ऑगस्टीन लालरोचाना के सटीक पास पर ह्नामटे ने अपना दूसरा गोल दागते हुए एससी दिल्ली को 2-1 की बढ़त दिला दी।

इसके बाद दिल्ली की टीम ने मजबूत रक्षात्मक खेल का प्रदर्शन किया और जमशेदपुर एफसी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इंजरी टाइम में एससी दिल्ली के डिफेंडर आशुतोष मेहता को खतरनाक टैकल के लिए रेड कार्ड दिखाया गया, लेकिन इससे मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा।

इस जीत के साथ एससी दिल्ली ने अपने पहले मुकाबले में तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। वहीं, हार के बावजूद जमशेदपुर एफसी दो मैचों में तीन अंकों और बेहतर गोल अंतर के आधार पर ग्रुप-सी में शीर्ष स्थान पर बनी हुई है।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, अब तक 22 बच्चों की गई जान, जानें कैसे फैलता है, क्या हैं लक्षण

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बच्चों को प्रभावित करने वाले इस घातक वायरस के संदिग्ध मामलों के बीच अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है। अब तक सामने आए 184 संदिग्ध मामलों में से 35 की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हाई अलर्ट पर रखते हुए रोकथाम और इलाज के विशेष इंतजाम किए हैं।

वायरस ने ली 22 बच्चों की जान

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि राज्य में सामने आए सभी संदिग्ध मामलों में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। अब तक कुल 184 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि हुई है। 11 सैंपल के नतीजों का अभी भी इंतजार है। मंत्री ने बताया कि अब तक सामने आए संदिग्ध मामलों में से 22 बच्चों की इस वायरस के कारण मौत हो चुकी है।

सात सक्रिय मरीजों का इलाज जारी

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, गांधीनगर, साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का खास इलाज किया जा रहा है और डॉक्टर लगातार उनकी हालत पर नजर रखे हुए हैं। वायरस की पुष्टि वाले सात मरीजों का अभी राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 6 मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस (CHPV) कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी घातकता इसे बेहद डरावना बनाती है। इस वायरस की पहली बार पहचान साल 1965 में महाराष्ट्र के 'चांदीपुरा' नाम के गांव में हुई थी, जिसकी वजह से इसका नाम चांदीपुरा पड़ा। यह एक प्रकार का आरएनए वायरस है, जो मुख्य रूप से दिमाग में गंभीर सूजन और संक्रमण पैदा करता है। यह वायरस 9 महीने के शिशु से लेकर 14 साल तक के बच्चों को सबसे जल्दी अपना शिकार बनाता है। वयस्कों के मुकाबले बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण यह उनके शरीर पर बहुत तेजी से हमला करता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस छुआछूत की बीमारी नहीं है यानी यह एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलता। इसके फैलने का असली कारण कीट-पतंगे हैं।

• सैंडफ्लाई (बालू मक्खी)- यह इस वायरस को फैलाने वाला सबसे प्रमुख कीट है। बालू मक्खियां अक्सर कच्चे घरों, मिट्टी की दीवारों की दरारों और सीलन वाली जगहों पर पाई जाती हैं।

• मच्छर और किल्लनी- सैंडफ्लाई के अलावा कुछ खास तरह के मच्छर और किल्लनी भी इस वायरस के वाहक बनते हैं।

बारिश के मौसम में जब नमी और सीलन बढ़ती है, तब इन बालू मक्खियों का प्रजनन तेजी से होता है। इसी वजह से मानसून के समय इस वायरस के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।

क्या हैं वायरस के लक्षण?

संक्रमण के शुरुआत में इसके लक्षण किसी सामान्य फ्लू या दिमागी बुखार जैसे ही लगते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में स्थिति काफी बिगड़ सकती है। प्रमुख लक्षणों इस प्रकार हैं-

• अचानक तेज बुखार आना

• उल्टी और दस्त होना

• सिर में तेज दर्द और सुस्ती महसूस होना

• दौरे पड़ना या शरीर का ऐंठना

• बेहोशी छाना या बच्चे का भ्रमित स्थिति में जाना

डॉक्टरों के अनुसार, जब यह वायरस दिमाग पर असर डालता है, जिसे मेडिकल भाषा में एन्सेफलाइटिस कहते हैं, तो बेहोशी छा जाती है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को एक साथ नाकाम कर सकता है।

भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ से घिरे डोनाल्ड ट्रंप, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका केस

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति एक बार फिर चर्चा में है। डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है। 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन 25 राज्यों ने 60 देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए नए टैरिफ के फैसले को चुनौती दी है। इन राज्यों का आरोप है कि ये नए टैरिफ फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए आयात करों को बदलने का बहाना हैं।

नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर

सोमवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों ने 60 व्यापारिक साझेदारों से आयात पर नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर यह मुकदमा 10 से 12.5 फीसदी के उन टैरिफ को निशाना बनाता है। यह टैरिफ पिछले महीने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे।

राज्यों का क्या है तर्क?

अपनी शिकायत में राज्यों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है। इतना ही नहीं, इसके लिए पर्याप्त वजह भी नहीं बताई गई। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को दुनिया भर की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी रोकने के नाम पर लगाया, लेकिन दोनों के बीच कोई साफ संबंध नहीं है। याचिका में कहा गया है कि प्रभावित 60 देशों से आने वाले ज्यादातर सामान पर 10% या 12.5% टैरिफ लगाया गया है। इन देशों का अमेरिका के कुल आयात में करीब 99.4% हिस्सा है।

60 देशों के खिलाफ नया टैरिफ

नए टैरिफ तब प्रभावी हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अस्थायी टैरिफ की समय सीमा समाप्त हो गई। इस टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को हुई थी। ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 व्यापारिक साझेदारों के आयात पर लागू होते हैं। नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा है कि अमेरिका में एक सदी से जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है। अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा करने का समय आ गया है।

जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से लगा था झटका

इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई थी।

अब ट्रेड एक्ट की धारा 301 का रूख

अब ट्रंप 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत अधिक स्थायी टैरिफ लगा रहे हैं। यह धारा राष्ट्रपति को अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल देशों के खिलाफ आयात कर लगाने की अनुमति देती है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर बड़े टैरिफ लगाने के लिए धारा 301 का इस्तेमाल किया था, और वे अदालती चुनौतियों में भी टिके रहे थे।

आधार में जन्मतिथि बदलकर 6 साल तक हुआ शोषण, झारखंड की नाबालिग दिल्ली से रेस्क्यू

नई दिल्ली/रांची :-झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की एक 16 वर्षीय किशोरी, जो लगभग छह वर्ष पूर्व मानव तस्करी का शिकार हो गई थी, को दिल्ली में चलाए गए एक संयुक्त बचाव अभियान के दौरान सकुशल मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई चाईबासा पुलिस, दिल्ली पुलिस, मिशन मुक्ति फाउंडेशन तथा रेस्क्यू टीम के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

बचाव के बाद पीड़िता की काउंसलिंग के दौरान मानव तस्करी से जुड़े कई गंभीर तथ्य सामने आए। पीड़िता ने बताया कि उसे नाबालिग अवस्था में झारखंड से बहला-फुसलाकर दिल्ली लाया गया, जहां उससे जबरन घरेलू कार्य कराया गया। इसके बाद उसे मुंबई भेज दिया गया और अंततः एक लाख रुपये में बेचकर एक अज्ञात पंजाबी व्यक्ति से जबरन विवाह करा दिया गया। इस दौरान उसे लगातार मानसिक एवं शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी थाना में मानव तस्करी, धोखाधड़ी एवं अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़िता के आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा कर उसे बालिग दर्शाया, ताकि उसकी वास्तविक आयु छिपाई जा सके तथा मानव तस्करी एवं शोषण को वैध रूप देने का प्रयास किया जा सके। पुलिस इस दस्तावेजी फर्जीवाड़े की भी विस्तृत जांच कर रही है।

यह संपूर्ण कार्रवाई झारखंड भवन के स्थानिक आयुक्त श्री अरवा राजकमल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न की गई, जिनके समन्वय से विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल स्थापित कर पीड़िता का सफलतापूर्वक रेस्क्यू सुनिश्चित किया गया।

जांच में मानव तस्करी गिरोह में प्रतिमा गुप्ता (निवासी गुमला), हेमंत गुप्ता, विशाल गुप्ता, मनीष भारती एवं मीना देवी के नाम सामने आए हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि दिल्ली के रोहिणी स्थित राम विहार क्षेत्र से संचालित इनकी प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से पीड़िता को विभिन्न स्थानों पर भेजा गया था। पुलिस एजेंसी की भूमिका, उससे जुड़े नेटवर्क तथा इस मानव तस्करी रैकेट में शामिल अन्य व्यक्तियों की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार यह मामला संगठित मानव तस्करी नेटवर्क, दस्तावेजों में हेरफेर, बाल श्रम तथा जबरन विवाह जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा प्रतीत होता है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने में जुटी हैं।

मानव तस्करी के विरुद्ध झारखंड सरकार की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति के तहत पीड़िता को आवश्यक कानूनी सहायता, काउंसलिंग तथा पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत संबंधित विभागों के समन्वय से आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है तथा मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच जारी है।

CEO झारखण्ड का आह्वान: 5 अगस्त से शुरू होगा युवा मतदाता जोड़ने का विशेष अभियान

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिक का मतदाता सूची में शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करना है। राज्य के अधिकांश युवा मतदाता किसी न किसी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा संस्थान से जुड़े हुए हैं। इसलिए सभी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा संस्थानों की यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे पात्र विद्यार्थियों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित करें तथा भारत निर्वाचन आयोग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक सहयोग प्रदान करें। श्री के. रवि कुमार सोमवार को निर्वाचन सदन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों के साथ आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद फॉर्म-6 के माध्यम से नए पात्र मतदाताओं का नाम जोड़ने हेतु राज्यभर में व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक तक मतदाता पंजीकरण की जानकारी पहुँचाना निर्वाचन तंत्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों में विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान चलाने का आह्वान किया।

श्री के रवि कुमार ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य/निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के समन्वय से अपने-अपने परिसर में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम, पंजीकरण शिविर तथा हेल्प डेस्क का आयोजन करें, ताकि 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके अथवा 1 अक्टूबर, 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सभी पात्र युवाओं का नाम मतदाता सूची में दर्ज किया जा सके।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा सभी जिलों को युवा मतदाताओं से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई है। शैक्षणिक संस्थान जिला निर्वाचन कार्यालय से समन्वय स्थापित कर इन प्रचार-प्रसार सामग्रियों का उपयोग अपने परिसर में आयोजित पंजीकरण शिविरों एवं जागरूकता कार्यक्रमों में कर सकते हैं।

श्री के. रवि कुमार ने कहा कि वर्तमान समय के अधिकांश नए मतदाता सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। इसलिए उन्हें विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो तथा कोई भी अपात्र अथवा विदेशी नागरिक मतदाता सूची में सम्मिलित न हो, इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक श्री सुधीर बाड़ा, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक श्री जॉर्ज कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, उप निर्वाचन पदाधिकारी (लोहरदगा) श्री संजय कुमार, अवर निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुनील कुमार सिंह तथा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य के विभिन्न उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, संस्थानों के प्राचार्य/निदे

शक उपस्थित थे।

पूरा सिस्टम बचाने में जुटा था...', बृजभूषण के बरी होने पर विनेश फोगाट का झलका दर्द

#vineshphogatoncourtdecisionfightagainstbrijbhushan

भारतीय जनता पार्टी के नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले पर महिला पहलवान विनेश फोगाट दुख जाहिर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू से ही पूरा प्रशासन, सरकार और व्यवस्था बृजभूषण को बचाने में लगी थी।

विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर जाताया दुख

कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट करते हुए विनेश ने लिखा कि ‘हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं, लेकिन कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ती रहीं। हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना।’

फैसले के खिलाफ जाएंगे कोर्ट- विनेश

विनेश ने लिखा कि ‘शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।’पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ जल्द से जल्द अपील दायर करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने उम्मीद नहीं खोई है और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

सारी ताकत बृज भूषण के पास- बजरंग पूनिया

इसके अलावा बजरंग पूनिया ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि 'आज के फैसले से यह साफ हो गया है कि सारी ताकत बृज भूषण के पास है। उन्होंने गवाह तोड़ दिए। हम कोर्ट के आदेश का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और हमें समझ नहीं आ रहा कि किस आधार पर उन्हें बरी किया गया।'

बृज भूषण शरण सिंह ने क्या कहा?

वहीं, कोर्ट का फैसला आने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा, 'मैंने पहले ही दिन कहा था कि अगर मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित होता है तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा।' विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रियंका गांधी से लेकर आम आदमी पार्टी और वामपंथी नेता सब जुट गए थे और उनकी फांसी की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। उन्होंने यह भी कहा कि वे जूनियर पहलवानों के हक के लिए लड़े थे और अब वही खिलाड़ी देश का परचम लहराएंगे।

जंतर-मंतर पर हुआ था लंबा आंदोलन

बता दें कि साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया सहित देश के प्रमुख पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले ने पूरे देश में तूल पकड़ा था। अब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है।

अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई पर उठे सवाल, RTI एक्टिविस्ट को ये दिया जवाब; सरकार को भी चेतावनी

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई और उनकी पार्टी की फंडिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई पर हुए खर्च पर सवाल उठाए गए और आरटीआई दायर की गई। इस पर दीपके ने अपना जवाब दिया है।

आरटीआई कार्यकर्ता ने की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग

सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने 1 अगस्त को महाराष्ट्र सरकार समेत कई सरकारी एजेंसियों को शिकायत भेजकर अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच कराने की मांग की। भगवानराव दिपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में जूनियर इंजीनियर रह चुके हैं। शिकायत में सवाल उठाया गया कि कथित तौर पर सीमित वेतन पाने वाले सरकारी कर्मचारी का परिवार अपने बच्चों को अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए कैसे भेज सका।

स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए अमेरिका में पढ़ाई

अभिजीत दिपके ने आरटीआई एक्टिविस्ट के सवाल पर कहा कि उन्हें पढ़ाई के लिए बोस्टन यूनिर्सिटी ने स्कॉलरशिप दी। दीपके ने अपने दाखिले और छात्रवृत्ति के आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए बताया कि अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में उनकी पढ़ाई स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए हुई है। दीपके ने कहा कि उनके फंड के स्रोतों की जांच के लिए हर कोई पूरी तरह स्वतंत्र है।

सीजेपी का पलटवार

वहीं, इस पूरे मामले में सीजेपी की एक प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने अमित तिवारी पर आरोप लगाया है कि वो एक निजी व्यक्ति को टारगेट कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर अमित तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, 'एक निजी व्यक्ति की शिक्षा पर हुए खर्च पर आरटीआई लगाने वाले कभी पीएम केयर्स फंड की तरफ भी देखे।'

भाजपा को हेमंत सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं : विनोद कुमार पांडेय

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और वचनबद्ध हैं। राज्य के युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रत्येक छात्र को हर हाल में न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी की आड़ में सरकार के खिलाफ साजिश रचने तथा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ में संलिप्त बड़ी मछलियों के चेहरे बहुत जल्द बेनकाब होंगे। जैसे ही गड़बड़ी की शिकायत मिली, माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। सरकार ने केवल विभागीय कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्राथमिकी दर्ज कराई, जांच एजेंसी को जेपीएससी कार्यालय भेजा गया और चेयरमैन सहित संबंधित पदाधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि हेमंत सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि हेमंत सरकार युवा, किसान, मजदूर, महिला, दलित, आदिवासी, मूलवासी और अल्पसंख्यक हर वर्गों के साथ न्याय करने वाली सरकार है। सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेही और अवसरों में समानता सुनिश्चित करना है। किसी भी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि पिछली भर्तियों में काफी संख्या में गरीब और जरूरतमंद घरों के बच्चों को सरकार का अंग बनने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को हेमंत सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। झारखंड के युवा आज भी नहीं भूले हैं कि भाजपा के शासनकाल में जेपीएससी की परीक्षाएं लगातार विवादों, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रहीं। राज्य गठन के बाद बाबूलाल मरांडी की सरकार के समय पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के दौरान मूल्यांकन प्रक्रिया, उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर और चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे। बाद के वर्षों में इन मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंची और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।

उन्होंने कहा कि अर्जुन मुंडा सहित भाजपा के विभिन्न कार्यकालों में आयोजित जेपीएससी परीक्षाओं को लेकर भी कॉपियों में कथित हेरफेर, नंबर बढ़ाने, भाई-भतीजावाद तथा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठते रहे। इन मामलों ने राज्य की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचाया और लंबे समय तक अभ्यर्थियों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा।

महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि रघुवर दास सरकार के दौरान भी जेपीएससी परीक्षाओं का नियमित कैलेंडर लागू नहीं हो सका। भर्तियों में लगातार विलंब, नियमों को लेकर विवाद, कट-ऑफ, परिणाम प्रकाशन तथा विभिन्न नियुक्ति प्रक्रियाओं पर अभ्यर्थियों का असंतोष बार-बार सड़कों पर दिखाई दिया। उस दौर में हजारों युवाओं का कीमती समय अनिश्चितता और प्रतीक्षा में बीता।

उन्होंने कहा कि भाजपा आज राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं के हितैषी होने का दिखावा कर रही है, जबकि उसका अपना कार्यकाल भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विवादों और सवालों से घिरा रहा है। जो दल अपने शासनकाल की विफलताओं का जवाब नहीं दे पाया, वह आज पारदर्शिता और जवाबदेही पर उपदेश देने की स्थिति में नहीं है।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि हेमंत सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और प्रत्येक भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं मेरिट आधारित हो। सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता पर पर्दा डालने के बजाय कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही है। यही हेमंत सरकार और पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों की कार्यशैली में मूलभूत अंतर है।

उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा का मानना है कि युवाओं का विश्वास ही राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है। इस विश्वास को बनाए रखने के लिए सरकार हर आवश्यक कदम उठाती रहेगी और किसी भी दोषी को कानून से बचने का अवसर नहीं दिया जाएगा।