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दस कदम, दस का दम’, पीएम मोदी के 3 देशों के दौरे से भारत को क्या मिला? बीजेपी ने गिनाई उपलब्धियां

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलेंड की यात्रा पर गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्राओं को लेकर भाजपा सांसद संबित पात्रा ने रविवार को प्रेस वार्ता में विस्तार से जानकारी दी। पात्रा ने कहा कि इन यात्राओं से भारत को क्या हासिल हुआ, इसे आसान भाषा में समझाने के लिए उन्होंने 'दस कदम, दस का दम' के रूप में दस प्रमुख उपलब्धियां सामने रखीं।

बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तीन देशों इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा की। इससे पहले उन्होंने सेशेल्स का भी दौरा किया था। इसी दौरान जापान के राष्ट्राध्यक्ष भी भारत आए थे। कुल मिलाकर इसका क्या नतीजा निकला? भारत को क्या हासिल हुआ? मैं आसान भाषा में दस अहम नतीजों के बारे में बताऊंगा 'दस कदम, दस का दम'।

पात्रा ने गिनाए ये 10 फायदेः-

1. हिंद महासागर-भारत-प्रशांत रणनीतिक गठबंधन।

2. रक्षा और समुद्री सहयोग।

3. महत्वपूर्ण खनिजों के संबंध में सहयोग।

4. ऊर्जा सुरक्षा।

5. आर्थिक और निवेश परिणाम।

6. प्रधान मंत्री को विशेष भाव और शिष्टाचार दिया गया।

7. सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक साझेदारी।

8. डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और शैक्षिक भागीदारी।

9. खेल।

10.लोगों से लोगों के रिश्ते.

भारत की हिंद महासागर और इंडो पैसिफिक में बढ़त

संबित पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का सबसे बड़ा परिणाम हिंद महासागर और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करना रहा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में समान सोच वाले देशों के साथ भारत की साझेदारी पहले से अधिक मजबूत हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को नई दिशा मिली है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा की नई मजबूती

पात्रा ने बताया कि इन दौरों के दौरान रक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती मिली। समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे भारत की समुद्री क्षमताओं और सुरक्षा हितों को बल मिलेगा।

क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर बनी अहम सहमति

पात्रा ने कहा कि भविष्य की तकनीक और उद्योगों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी है। इससे भारत की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सकारात्मक प्रगति हुई है। इन समझौतों और सहयोग के माध्यम से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को अधिक सुरक्षित और स्थिर बना सकेगा।

निवेश के क्षेत्र में उपलब्धि

बीजेपी नेता ने कहा कि आर्थिक सहयोग और निवेश बढ़ाने को लेकर भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। विभिन्न देशों के साथ व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री को मिले विशेष सम्मान का जिक्र

उन्होंने कहा कि जिन देशों का प्रधानमंत्री ने दौरा किया, वहां उन्हें विशेष सम्मान और आत्मीयता के साथ स्वागत मिला। पात्रा के अनुसार, यह केवल प्रधानमंत्री का सम्मान नहीं बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्व मंच पर उसकी मजबूत होती साख का प्रतीक है।

सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम

पात्रा ने कहा कि भारत ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और साझा सभ्यतागत संबंधों को भी नई ऊर्जा देने का काम किया। विभिन्न देशों के साथ सांस्कृतिक सहयोग और पारंपरिक रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

डिजिटल और शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल

पात्रा ने बताया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण साझेदारियां बनी हैं। इससे तकनीकी सहयोग, नवाचार और शैक्षणिक आदान प्रदान को बढ़ावा मिलेगा तथा दोनों पक्षों के छात्रों और संस्थानों को लाभ पहुंचेगा।

खेल के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति

संबित पात्रा ने कहा कि खेल के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। खेलों के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने तथा खिलाड़ियों के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।

लोगों के बीच रिश्ते हे मजबूत

उन्होंने कहा कि इन विदेश यात्राओं का सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ाना है। पर्यटन, शिक्षा, व्यापार, सांस्कृतिक आदान प्रदान और सामाजिक संबंधों के माध्यम से भारत तथा साझेदार देशों के नागरिकों के बीच भरोसा और सहयोग पहले से अधिक मजबूत होगा। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं ने भारत की वैश्विक भागीदारी को नई गति देने का काम किया है।

6 दिन की यात्रा के बाद लौटे दिल्ली

बता दें कि पीएम मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की 6 दिन की यात्रा के बाद दिल्ली लौट आए हैं। तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर इस महीने की 6 से 8 तारीख तक इंडोनेशिया का दौरा किया है। इस दौरान, प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय चर्चा की और साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की।

चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में किया बदलाव, मांगी गई SIR से जुड़ी जानकारी

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चुनाव आयोग ने नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। फॉर्म-6 में एक नया सेक्शन जोड़ा गया है, जिसके तहत उनके मां-बाप की जानकारी मांगी गई है। इस सेक्शन में यह जानकारी मांगी गई है कि वोटर के माता-पिता और कुछ मामलों में दादा-दादी या नाना-नानी का नाम पिछली स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।

फॉर्म में क्या हुए बदलाव?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, फॉर्म 6 में एक 'डिक्लेरेशन' है, जिसमें आवेदक से SIR की जानकारी मांगी गई है। यहां 3 विकल्प हैं। पहला- मेरा नाम पिछले SIR इलेक्टोरल रोल में है। दूसरा- मेरे माता-पिता (दादा, दादी) का नाम पिछले SIR में है। तीसरा- न तो मेरा और न ही मेरे माता-पिता का नाम पिछले SIR में है। पहले 2 विकल्प चुनने पर आवेदक से विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और अपने या अपने माता-पिता के नाम का सीरियल नंबर देना होता है। अगर यह जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो केवल तीसरा विकल्प चुनने का रास्ता बचता है।

डाउनलोडेड फॉर्म में उपलब्ध नहीं है ये बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि यह नया कॉलम आधिकारिक तौर पर अनिवार्य नहीं बताया गया है, लेकिन जब तक इसे भरा नहीं जाता, ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ता। खास बात यह है कि यह बदलाव केवल ऑनलाइन फॉर्म में दिखाई दे रहा है, जबकि डाउनलोड के लिए उपलब्ध फॉर्म-6 में अभी तक ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया है।

फॉर्म में बदलाव की क्या है वजह?

चुनाव आयोग के द्वारा SIR प्रक्रिया के बीच में यह बदलाव इसलिए किया है, क्योंकि पिछले साल 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR होने के बाद करीब 5.58 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे, लेकिन इन लोगों के बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए गए। खासकर पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2026 मे हुए विधानसभा चुनाव से पहले ही करीब 27 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम लिस्ट से हट गए और वे मतदान नहीं कर पाए, जबकि उनकी शिकायतें लंबित हैं।

एक साल से खाली है देश के वित्त सचिव का पद, सरकार ने अब तक नहीं की नियुक्ति
-  30 जून 2025 को अजय सेठ के सेवानिवृत्त होने के बाद से पद रिक्त; वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति की परंपरा पर भी उठ रहे सवाल


नई दिल्ली। देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में शामिल वित्त मंत्रालय में वित्त सचिव का पद पिछले एक वर्ष से रिक्त है। तत्कालीन वित्त सचिव अजय सेठ 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनके बाद से अब तक सरकार ने इस पद पर किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है।
वित्त मंत्रालय में राजस्व, व्यय, आर्थिक मामलों, वित्तीय सेवाओं, निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन (DIPAM) तथा सार्वजनिक उद्यम जैसे विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग सचिव नियुक्त होते हैं। हालांकि, इन सभी के बीच वित्त सचिव का पद सर्वोच्च प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी निभाता है और परंपरागत रूप से मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ सचिव को यह दायित्व सौंपा जाता रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अजय सेठ के सेवानिवृत्त होने के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में आए, लेकिन सरकार ने अब तक किसी की नियुक्ति नहीं की। इस बीच, जिन अधिकारियों को वरिष्ठता के आधार पर संभावित दावेदार माना जा रहा था, उनमें से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं या सेवानिवृत्ति के करीब हैं।
जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार वित्त सचिव की नियुक्ति से जुड़ी वरिष्ठता आधारित परंपरा में बदलाव की दिशा में काम कर रही है। यही वजह मानी जा रही है कि पिछले एक वर्ष से यह पद खाली है। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या नियुक्ति की घोषणा अभी तक नहीं की गई है।
वित्त सचिव की नियुक्ति कब होगी और सरकार किस अधिकारी को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपेगी, इस पर प्रशासनिक और आर्थिक हलकों की नजर बनी हुई है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच 18 समझौतों पर बनी सहमति, पीएम मोदी बोले-एफटीए मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे पर हैं। न्यूजीलैंड के ऐतिहासिक दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑकलैंड में अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड को स्वाभाविक साझेदार बताया और दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच अहम समझौतौं पर आदान-प्रदान हुआ, जिसका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है।

रक्षा और व्यापार समेत 18 समझौतों पर हस्ताक्षर

पीएम मोदी और कीवी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को औपचारिक रूप से सामरिक साझेदारी में बदलने का फैसला किया और इसके लिए ‘भारत-न्यूजीलैंड सामरिक साझेदारी: रोडमैप 2030’ को मंजूरी दी। इसके साथ ही रक्षा, व्यापार, खेल, पशुपालन, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग समेत कुल 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत-न्यूजीलैंड के बीच इन समझौतों पर सहमति

1- भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं की बैठक में भारत-न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिए 2030 तक एक रोडमैप पर सहमति जताई। इसमें संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। इससे भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को दिशा देने के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप मिलता है।

2- भारत के रक्षा मंत्रालय और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच समुद्री सहयोग पर मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट पर सहमति बनी। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।

3- भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी के मामलों में सहगोय के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर सहमति बनी है।

4- भारतीय नेवी और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के आपसी लॉजिस्टिक्स सहायता पर सहमति बनी है। यह दोनों बलों के बीच रसद सहायता को आसान बनाता है।

5- भारत और न्यूजीलैंड के बीच आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी। इससे दोनों देश आतंकवाद रोधी बातचीत और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

6- भारत के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच सहयोग का समझौता। यह आपदा की तैयारी, उससे निपटने और उबरने की क्षमता में सहयोग को बढ़ावा देगा।

7- पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में भी समझौता हुआ है, जो तकनीकी सहयोग, जानकारी का आदान-प्रदान और बेहतरीन तौर-तरीकों को बढ़ावा देगा। इसका लक्ष्य किसानों को फायदा पहुंचाना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

8- पर्यटन क्षेत्र में मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट के तहत दोनों तरफ से पर्यटन और लोगों के बीच आपसी मेलजोल को बढ़ावा दिया जाएगा।

9- भारत-न्यूजीलैंड ने खेल पर संयुक्त कार्य योजना पर सहमति जताई है, जिसमें खेलों को बढावा दिया जाएगा। इसमें हाई-परफॉर्मेंस खेल, खेल विज्ञान और खेल चिकिस्ता शामिल है।

10- गुजरात के लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NMHC) के विकास के लिए NMHC और न्यूजीलैंड मैरीटाइम म्यूजिमय के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति।

11- भारत के संस्कृति मंत्रालय और न्यूजीलैंड के संस्कृति और विरासत मंत्रालय के बीच सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता हुआ है। इसके तहत कला, विरासत और सांस्कृतिक पहलों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

12- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 35000 करोड़ रुपये या 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही व्यवसायों के लिए नए अवसर, निर्यात को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा की जाएंगी।

13- दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा पर बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके तहत समुद्री क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और जानकारी के आदान-प्रदान को मजबूत करना शामिल है।

14- न्यूजीलैंड ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव के तहत समुद्री सुरक्षा को एक प्राथमिकता वाले स्तंभ के रूप में चुना है। इसके तहत अवैध, बिना रिपोर्ट की गई और अनियमित मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों से निपटने जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा सकेगा।

15- न्यूजीलैंड ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल हुआ। यह बायोफ्यूल पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करेगा।

16- कीवी फ्रूट एक्शन प्लान की स्थापना। इसके तहत नागालैंड व उत्तराखंड में कीवी के उत्पादन के लिए 2 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगें।

17- नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च, गोवा और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी, न्यूजीलैंड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। इससे अंटार्कटिक क्षेत्र की समझ विकसित करने में संयुक्त शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

18- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट, कुंडली और मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड के बीच MoU पर हस्ताक्षर। इसके तहत शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान में सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार किए जाएगा।

शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान, बोलीं-मेरी हत्‍या हो सकती है, फ‍िर भी वापस जा रही

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बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल दिसंबर में अपने देश वापस लौटने की योजना बनाई है। वह अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ आत्मसमर्पण कर सकती हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार शेख हसीन के साथ-साथ उनकी पार्टी अवामी लीग के बड़े नेता भी वापस लौटेंगे और सरेंडर करेंगे।

शेख हसीना ने किया अपने देश लौटने का ऐलान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का ऐलान करते हुए कहा कि वह दिसंबर-2026 के आसपास बांग्लादेश वापस जाएंगी और अदालत में सरेंडर करेंगी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोन इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा पता है, लेकिन यह भी पता है कि अब अपने देश लौटने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, ‘वे मेरे लौटते ही मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं। लेकिन मुझे जाना ही होगा।’

किसी विदेशी सरकार से नहीं किया परामर्श

हसीना ने दिल्ली स्थित निर्वासन आवास से कहा कि उन्होंने किसी विदेशी सरकार से परामर्श नहीं किया कि वह कब और कैसे बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा, ढाका के अधिकारी मुझे वापस बुलाना चाहते हैं, वे बार-बार भारत को पत्र भेजकर मुझे वापस भेजने की गुहार लगा रहे हैं। मैं खुद जाऊंगी।

देश की मिट्टी में मौत की तमन्ना

शेख हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनकी मौत होती है तो वह अपने देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं। उन्होंने कहा, मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरदस्त दमन हो रहा है। अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी धरती पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।

हसीना को मिली है मौत की सजा

शेख हसीना करीब 20 साल से सत्ता पर काबिज थीं। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश में हिंसा शुरू हो गई, जिसके बाद हसीना को ढाका छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से हसीना यही हैं। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आदेश देने के कारण बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराधों को दोषी मानते हुए उनको और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा दी है। वहीं शेख हसीना की अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस साल हुए संसदीय चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को चुनाव लड़े से रोक दिया गया था।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की SIR की समीक्षा, 14 जुलाई को सभी बूथों पर 'चुनाव पाठशाला' के निर्देश

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने कहा कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत बीएलओ द्वारा मतदाताओं तक इन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया है कि बीएलओ द्वारा दिए गए इन्यूमरेशन फॉर्म को यथाशीघ्र भरकर एवं हस्ताक्षर कर लौटा दें । श्री के रवि कुमार शुक्रवार को जूम मीट के माध्यम से सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी, ईआरओ, एईआरओ, उप निर्वाचन पदाधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बीएलओ सुपरवाईजर से जूम मीट के माध्यम से की समीक्षा बैठक कर रहे थे।

श्री के रवि कुमार ने कहा कि जिन क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन का काम धीमी गति से चल रहा है, वहां विशेष कैंप लगाकर कार्य में तेजी लाई जाए ताकि इसे समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन्यूमरेशन फॉर्म केवल पात्र भारतीय नागरिकों द्वारा ही भरा जाना है अपात्र व्यक्ति/व्यक्ति के लिए एवं गैर भारतीय/गैर भारतीय के लिए इन्यूमरेशन फॉर्म नहीं भरे जाने हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत किसी भी विदेशी नागरिक द्वारा अवैध रूप से फॉर्म भरना, गलत या भ्रामक जानकारी देना, अथवा बिना हस्ताक्षर किए फॉर्म जमा न करना एक दंडनीय अपराध है। ऐसा करने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ ERO द्वारा सीधे FIR दर्ज की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया एक सहभागी एवं पारदर्शी प्रक्रिया है। प्रत्येक स्तर पर इससे सम्बन्धी जानकारियों एवं वस्तु स्थितियों से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों एवं जनसाधारण को अवगत कराना अनिवार्य है। उन्हों कहा कि एएसडीडी सूची के सत्यापन हेतु आगामी 14 जुलाई को सभी जिलों में बीएलओ एवं बीएलए-2 की एक संयुक्त बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने 14 जुलाई को ही राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर अनिवार्य रूप से 'चुनाव पाठशाला' का आयोजन हेतु भी निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि चुनाव पाठशाला में एएसडीडी की सूची को पढ़कर उपस्थित सभी लोगों को सुनाया जाए ताकि प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

श्री के. रवि कुमार ने कहा कि इन्यूमरेशन फॉर्म भरने से संबंधित किसी भी प्रकार के संशय या तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए हर स्तर पर सभी संबंधित पदाधिकारियों को ट्रेनिंग दी गई है। यदि किसी मतदाता को इन्यूमरेशन फॉर्म भरने में किसी प्रकार का संशय होता है तो अपने बीएलओ, वोलेंटियर्स से सहायता ले सकते है अथवा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किए गए एआई वीडियो ट्यूटोरियल की भी सहायता ले सकते है यह वीडियो मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है ।

श्री के रवि कुमार ने समीक्षा के क्रम में सभी पदाधिकारियों द्वारा क्षेत्र में कार्य करने के दौरान आ रहे समस्याओं एवं संशयों को सुना एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मतदाता इन्यूमरेशन फॉर्म भरते समय वर्तमान के अपनी सभी जानकारियों को सही सही भरें, वर्तमान के अन्य दस्तावेज में यदि कोई त्रुटि है तो उसे केवल मिलान करने के लिए वोटर आईडी में त्रुटि वाले जानकारी न भरें। उन्होंने कहा कि मैपिंग वाले कॉलम में जानकारियों को भरते समय उसे विगत के एसआईआर सूची में जो जानकारी दी गई है उसे ठीक वैसा ही भरें।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि झारखंड विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के घर-घर तक दो प्रतियों में इन्यूमरेशन फॉर्म पहुंचाया जा रहा है। फॉर्म के सबसे ऊपरी हिस्से पर मतदाता के क्षेत्र की बूथ लेवल अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर अंकित होता है, जिससे किसी भी समस्या के समाधान के लिए उनसे संपर्क किया जा सके। फॉर्म के सबसे ऊपरी और पहले भाग में मतदाता का नाम, एपिक नंबर, पता, भाग संख्या, विधानसभा क्षेत्र और राज्य का नाम जैसी आवश्यक जानकारियां पहले से ही प्रिंटेड होती हैं। इसके साथ ही एक यूनिक क्यूआर कोड और पुरानी मुद्रित फोटो भी दी गई होती है, जिसके ठीक बगल में मतदाता को अपनी नई रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो चिपकानी होगी या बीएलओ अपने बीएलओ ऐप में भी फोटो अपलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि फॉर्म के दूसरा भाग में पिछले SIR में दर्ज विवरण को मतदाता की जन्म तिथि के अनुसार तीन अलग-अलग स्थितियों में भरना होता है:

पहली स्थिति: यदि मतदाता का जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ है, तो प्रपत्र के बाएं हिस्से में विगत एसआईआर के मतदाता सूची के हूबहू केवल स्वयं का नाम, एपिक नंबर, पिता का नाम, संबंध, जिला, राज्य, विधानसभा क्षेत्र संख्या और भाग व क्रम संख्या दर्ज करनी होगी।

दूसरी स्थिति: यदि जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, तो फॉर्म के दाएं हिस्से में विगत एसआईआर के मतदाता सूची के हूबहू माता या पिता में से किसी एक का विवरण (नाम, एपिक संख्या, उनके पिता का नाम, संबंध, जिला, राज्य और पूर्व दर्ज विधानसभा क्षेत्र व भाग/क्रम संख्या) भरना होगा।

तीसरी स्थिति: यदि मतदाता का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद हुआ है, तो दाएं हिस्से को एक लकीर के माध्यम से दो भागों में विभाजित करके विगत एसआईआर के मतदाता सूची के हूबहू एक तरफ पिता और दूसरी तरफ माता, दोनों का विवरण स्पष्ट रूप से भरना है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि इन्यूमरेशन फॉर्म के तीसरा भाग में सामान्य व्यक्तिगत जानकारी भरनी है। इस भाग को भरते समय वर्तमान के अन्य दस्तावेज में यदि कोई त्रुटि है तो उसे केवल मिलान करने के लिए वोटर आईडी में त्रुटि वाले जानकारी न भरें। इस भाग में मतदाता को अपनी कुछ सामान्य और मूलभूत जानकारियां दर्ज करनी होती हैं। इसमें जन्म तिथि (DD/MM/YYYY प्रारूप में), उपलब्ध होने पर आधार नंबर (वैकल्पिक), मोबाइल नंबर, पिता/अभिभावक का नाम और उनकी एपिक संख्या (यदि उपलब्ध हो), माता का नाम और उनकी एपिक संख्या, तथा आवश्यकतानुसार पति/पत्नी का नाम व उनकी मतदाता क्रमांक संख्या दर्ज करनी होती है।

श्री के रवि कुमार न कहा कि इन्यूमरेशन फॉर्म के चौथा भाग में घोषणा और हस्ताक्षर करना है फॉर्म के इस अंतिम हिस्से में तीन महत्वपूर्ण कानूनी घोषणाएं दी गई हैं। इनमें यह प्रमाणित करना होता है कि मतदाता ने किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त नहीं की है, वह किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है, और दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह सत्य हैं। यदि मतदाता स्वयं फॉर्म भर रहा है या परिवार का कोई वयस्क सदस्य किसी सदस्य की अनुपस्थिति में इसे भर रहा है, तो उन्हें सबसे नीचे दाहिनी तरफ अपने हस्ताक्षर करने होंगे। यदि कोई अन्य वयस्क सदस्य हस्ताक्षर कर रहा है, तो उसे मतदाता से अपने संबंध का उल्लेख भी करना होगा।

इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, अवर निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुनील कुमार सहित सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी ईआरओ, एईआरओ, उप निर्वाचन पदाधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बीएलओ सुपरवाईजर उपस्थित थे ।

कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

₹2000 का नोट अब भी वैध, RBI ने बताया कैसे बदल सकते हैं नोट
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि ₹2000 का नोट अब भी पूरी तरह वैध (लीगल टेंडर) है। यदि किसी व्यक्ति के पास ₹2000 के नोट हैं, तो उन्हें बदलने या बैंक खाते में जमा कराने की सुविधा अभी भी उपलब्ध है।
RBI के अनुसार, लोग देशभर में स्थित RBI के 19 इश्यू ऑफिस में जाकर अपने ₹2000 के नोट बदल सकते हैं। वहीं, जो लोग किसी RBI कार्यालय तक नहीं पहुंच सकते, वे इंडिया पोस्ट के माध्यम से अपने ₹2000 के नोट किसी भी RBI इश्यू ऑफिस में भेज सकते हैं। सत्यापन के बाद नोटों की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।
RBI ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि ₹2000 का नोट अभी भी वैध मुद्रा है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे बदला जा सकता है।
ईरान-यूएस जंग में झुलसा चाबहार पोर्ट, जानें अमेरिकी हमले से क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

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अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर खत्म करने का ऐलान कर चुके हैं। ट्रंप के ईरान से सीजफायर खत्म होने का ऐलान करने के बाद लड़ाई तेज हो गई है। अमेरिका ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ईरान में हवाई हमले किए हैं। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी बमबारी की है। जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, ईरान के इस पोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के सहयोग से विकसित हुआ है।

90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले

अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।

चाबहार में विस्फोटों के बाद बिजली आपूर्ति बाधित

ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है।

हमले को लेकर अमेरिकी सेना ने क्या कहा?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।

भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय

यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। चाबहार में हमले से भारत के इस पोर्ट पर अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावना को जबरदस्त झटका लगा है। चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर है। यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के पश्चिम में सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है। ऐसे में चाबहार भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता देता है। ईरान-अमेरिका में शांति समझौते से भारत की चाबहार पोर्ट पर फिर से कामकाज की उम्मीद बंधी थी लेकिन नए हमलों ने चीजों को पटरी से उतार दिया है। हालांकि फिलहाल भारत चाबहार में सीधेतौर पर सक्रिय नहीं है।

गर्भावस्था में नौकरी से हटाना अनुचित: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संविदा शिक्षिका की बहाली के दिए निर्देश


-  मेडिकल कारणों से अवकाश लेने पर सेवा समाप्त करने पर कोर्ट सख्त; 4 सप्ताह में नियुक्ति पत्र और 2 सप्ताह में जॉइनिंग कराने का आदेश

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लेने वाली एक संविदा टीजीटी (साइंस) शिक्षिका को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षिका को चार सप्ताह के भीतर नया नियुक्ति पत्र जारी किया जाए तथा उसके बाद दो सप्ताह के भीतर उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाए।

यह अंतरिम आदेश न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

-  मेडिकल मजबूरी में लिया था अवकाश
याचिका के अनुसार शिक्षिका की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के माध्यम से महेंद्रगढ़ जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के पद पर हुई थी। नौकरी के दौरान गर्भावस्था संबंधी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण डॉक्टरों ने उन्हें नौ महीने के पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने 9 अक्टूबर 2025 को मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। बाद में 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया।

-  अन्य शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ा, सिर्फ याचिकाकर्ता हटाई गई
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चतरथ ने अदालत को बताया कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा टीजीटी शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ा दी गई, जबकि केवल मेडिकल अवकाश लेने वाली शिक्षिका की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। शिक्षिका ने अदालत को बताया कि वह उस अवधि का वेतन नहीं चाहतीं, जब वह ड्यूटी पर नहीं थीं। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और दोबारा सेवा देने के लिए तैयार हैं।

-  मातृत्व लाभ और वित्तीय अधिकारों की भी मांग
याचिका में शिक्षिका ने सेवा बहाली के साथ संविदा अवधि बढ़ाने, मातृत्व अवकाश का वेतन, मेडिकल बोनस, अन्य वित्तीय लाभ, ब्याज तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें भी मातृत्व संबंधी अधिकार मिलने चाहिए और उनके मेडिकल रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि उन्होंने वास्तविक चिकित्सकीय कारणों से अवकाश मांगा था।

-  हाईकोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि शिक्षिका ने मजबूरी में चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लिया था और बाद में उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। अदालत ने यह भी माना कि जब अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई गईं, तब केवल मेडिकल अवकाश लेने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना प्रथम दृष्टया भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। कोर्ट के अंतरिम आदेश ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि गर्भावस्था और मातृत्व जैसे संवेदनशील मामलों में कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है, चाहे नियुक्ति संविदा आधार पर ही क्यों न हो।