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ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

देश के दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान, केरल-असम और पुदुचेरी में वोटिंग जारी

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आज देश के दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। आज असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव है। असम की 126, केरल की 140 और पुदुचेरी की 30 सीटों पर उम्मीदवारों अपनी किस्मत आज ईवीएम में कैद हो जाएगी।

असम में कुल 2.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.25 करोड़ पुरुष, 1.25 करोड़ महिलाएं और 343 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, केरल में 140 सीटों के लिए 883 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में कुल 2.71 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल हैं। पुदुचेरी में 30 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जिनमें 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। पुदुचेरी में कुल 9.50 लाख मतदाताओं में करीब 4.46 लाख पुरुष, 5.03 लाख महिलाएं और 139 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

पीएम मोदी ने असम के लोगों से की खास अपील

पीएम मोदी ने असम के लोगों से भी खास अपील की है। आज असम की 126 विधानसभा पर वोट डाले जा रहे हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, '2026 के असम विधानसभा चुनावों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू होने के संदर्भ में, मैंने असम की जनता से बड़ी संख्या में बाहर आकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। मुझे उम्मीद है कि राज्य के युवा, पुरुष और महिला मतदाता पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लेंगे और इस चुनाव को लोकतंत्र तथा नागरिक कर्तव्य के एक उत्सव में बदल देंगे।'

पीएम मोदी की केरल के लोगों से खास अपील

केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। इस बीच पीएम मोदी ने केरल के लोगों से खास अपील की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'मैं केरल के लोगों से 2026 के विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान करने का आह्वान करता हूं। रिकॉर्ड भागीदारी केरल की लोकतांत्रिक भावना को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। मैं विशेष रूप से राज्य के युवाओं और महिलाओं से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं और बड़ी संख्या में मतदान करें।

पुडुचेरी के मतदाताओं से लिए पीएम मोदी का पोस्ट

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों पर वोटिंग हो रही है। पीएम मोदी ने पुडुचेरी के लोगों से खास अपील की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'जैसे ही पुडुचेरी विधानसभा चुनाव शुरू हो रहे हैं, मैं हर मतदाता से आग्रह करता हूं कि वे बाहर निकलें और रिकॉर्ड संख्या में मतदान में हिस्सा लें। मैं विशेष रूप से हमारे युवाओं और महिला मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करें। पुडुचेरी के भविष्य को संवारने में हर एक वोट मायने रखता है।'

बांग्लादेश के विदेश मंत्री भारत दौरे पर, क्या दूर होगी रिश्तों में आई तल्खियां ?

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शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद भारत बांग्लादेश संबंधों में तल्खियां देखने को मिली थी। दोनों देशों के बीच बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच अब रिश्तों को नए सिरे से संतुलित करने की दिशा में कोशिश होती दिखने लगी है। इसी क्रम में बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर खलीलुर रहमान 7 से 9 अप्रैल तक भारत के दौरे पर हैं।

नए सिरे से रिश्तों को संतुलित करने की कोशिश

रहमान की अगुवाई में हो रहा ये दौरा बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी की सरकार आने के बाद पहला हाई प्रोफाइल दौरा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाए जाने के बाद ढाका पर काबिज रहे युनूस प्रशासन के भारत के साथ बहुत अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। रहमान के दौरे को दिल्ली और ढाका दोनों की ओर से नए सिरे से राजनीतिक इंगेजमेंट करने की दिशा में एक कड़ी की तरह देखा जा रहा है।

एस जयशंकर के साथ एक ही विमान से मॉरीशस जाएंगे

रहमान 7 अप्रैल को दिल्ली आ चुके हैं। बीती रात उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के साथ रात्रिभोज किया। इस दौरान दोनों में देशों के संबंधों को सुधारने पर चर्चा हुई। आज रहमान दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री जयशंकर के साथ मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनका वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के साथ भी मुलाकात का भी कार्यक्रम है। 9 अप्रैल को वे जयशंकर के साथ एक ही विमान से मॉरीशस जाएंगे।

किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

भारत ने अभी तक इस दौरे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि बातचीत में गंगा जल-बंटवारे समझौते के नवीनीकरण, संपर्क परियोजनाओं की प्रगति, भारत से ऊर्जा आपूर्ति और द्विपक्षीय व्यापार सुविधाओं की बहाली जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

उठ सकता है वीजा और सीमा का मुद्दा

भारत-बांग्लादेश सीमा पर होने वाली मौतों का मामला भी बातचीत में संवेदनशील मुद्दा रहेगा। बांग्लादेश पहले भी तस्करी रोधी अभियानों के दौरान सीमा पर नागरिकों की मौतों पर चिंता जताता रहा है। बांग्लादेश छात्रों, मरीजों और व्यापारियों के लिए वीजा सुविधाओं को फिर से खोलने और विस्तार देने की मांग उठा सकता है। बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2026-27 सत्र के लिए रहमान के नामांकन पर भारत का समर्थन मांग सकता हैं।

क्या शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठेगा?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना तख्तापलट के बाद पिछले साल अगस्त से ही भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश की नई सरकार कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है। हालांकि, अब तक भारत ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि वो कानूनी प्रक्रिया के तहत हसीना के प्रत्यर्पण का समर्थन करती है। हालांकि, माना जा रहा है कि ये मुद्दा बड़ी अड़चन नहीं होगा।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव, क्या अमेरिका लिख रहा शहबाज शरीफ की X पोस्ट क्या?

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सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भारी किरकिरी हो रही है। अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच खुद को चौधरी दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पोल खुल गई है। शहबाज शरीफ के मात्र एक पोस्ट से ईरान जंग के सीजफायर पर पाकिस्तान के रोल पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे है कि क्या पाकिस्तान को अमेरिकी की तरफ से कंट्रोल किया जा रहा है?

कैसी है पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका?

दरअसल, पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट की। शहबाज शरीफ ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की समयसीमा बढ़ाने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका देने के लिए समय सीमा को दो सप्ताह तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का भी आग्रह किया था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

सारा विवाद तब शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने शहबाज शरीफ के पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर ध्यान दिया। यूजर्स का ध्यान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर चला गया, जिससे पता लगता है कि उनकी इस पोस्ट को किसी दूसरे ने तैयार किया है। स्क्रीनशॉट के अनुसार, उस पोस्ट के शुरुआती संस्करण में सबसे ऊपर लिखा था: ‘Draft – Pakistan’s PM Message on X यानी ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश।’

सिर्फ टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा संदेश

ऐसा होना यह केवल एक छोटी सी टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा इशारा? किसी देश के प्रधानमंत्री के ऑफिशियल कम्युनिकेशन में ड्राफ्ट शब्द लिखा होना बड़े सवाल पैदा करता है, लेकिन क्या ये पाकिस्तान के अधिकारियों की लापरवाही थी या फिर किसी बड़ी बात का संकेत। सवाल उठ रहें है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ड्राफ्ट पाकिस्तान को भेजा था। या फिर किसी और ने भेजा था।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव?

आलोचकों का कहना है कि यह किसी लीडर के अपनी आवाज में बोलने जैसा कम और उसके लिए तैयार किए गए टेम्पलेट जैसा अधिक लगता है। इस घटना ने जियोपॉलिटिकल सर्कल में एक लंबे समय से चली आ रही सोच को और बढ़ा दिया है कि पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक और डिप्लोमैटिक फैसले अक्सर बाहरी ताकतों से प्रभावित होते हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का निधन, देश ने खोई वरिष्ठ कांग्रेस नेता

नई दिल्ली/लखनऊ। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहीं और अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से सम्मानित की जाती थीं।
मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती थीं। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहीं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास, परिवहन और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनके प्रशासनिक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया।
मोहसिना किदवई का सहारनपुर से भी पारिवारिक संबंध रहा है। उनकी पौत्री का विवाह पूर्व सांसद मंसूर अली खान के पुत्र साद अली खान से हुआ है, जिससे उनका परिवार इस क्षेत्र से भी जुड़ा रहा।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए इसे देश की अपूरणीय क्षति बताया है।
पाकिस्तान बना मुखौटा, चीन सीजफायर का सूत्रधार, ईरान को बातचीत के लिए किया तैयार

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अमेरिका और ईरान के बीच 5 हफ्तों से ज्यादा तक चली जंग के बाद बुधवार 8 अप्रैल की सुबह राहत भरी खबर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमले रोकने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और कहा कि यह इस शर्त पर होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलेगी।

चीन ने पर्दे के पीछे रहकर किया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर के पीछे चीन की अहम भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई।

आखिरी समय में चीन के दखल आई काम

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर के फैसले के पीछे पाकिस्तान के अलावा चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के जोरदार प्रयास के साथ-साथ चीन ने आखिरी मिनट में दखल देकर ईरान को समझाया और तनाव कम किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने ईरान को साफ चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक ईरान के एनर्जी साइट्स और बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

ट्रंप बोले- चीन ने ईरान को किया तैयार

सीजफायर को लेकर ट्रंप ने कहा है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एक टेलीफोनिक बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए प्रेरित किया। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, मैंने सुना है”। हालांकि, इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

संघर्ष के बाद से ही चीन सीजफायर के लिए था प्रयासरत

वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही चीन सीजफायर और युद्ध खत्म कराने के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन हर उस प्रयास का स्वागत करता है जो शांति की दिशा में हो और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने चाहिए। चीन ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस मौके का फायदा उठाकर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करेंगे। गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने में भी अहम भूमिका निभा चुका है।

अमेरिका-ईरान में 2 हफ्ते का सीजफायर, 40वें दिन रुकी जंग

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मिडिल ईस्ट के लिए आज की सुबह एक बड़ी राहत लेकर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग पर 40 दिनों के बाद सीजफायर हो गया है। दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर दो हफ्तों के सीजफायर यानी युद्धविराम की घोषणा कर दी है।

ट्रंप ने ईरानी सभ्यता ही खत्म करने की दी थी धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि वे दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं। यह सहमति उनकी डेडलाइन की रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 5.30 बजे) की समय सीमा से दो घंटे से भी कम समय पहले बनी। ट्रंप ने डेडलाइन पूरी होने पर पूरी सभ्यता को तबाह करने की धमकी दी थी।

अमेरिका-ईरान के बीच पुराने विवादों पर सहमति

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया पर दो हफ्तों के युद्धविराम समझौते की जानकारी दी और कहा कि यह समझौता इस शर्त पर किया गया है कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने पर सहमत हो। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिका पहले ही अपने कई सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के आधार के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच पुराने विवादों के अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ सीजफायर?

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ हुई बातचीत के आधार पर- जिसमें उन्होंने मुझसे अनुरोध किया था कि मैं आज रात ईरान भेजे जा रहे विनाशकाली बल को रोक लूं- और इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो, मैं दो हफ्ते की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं। यह एक दो-तरफा युद्धविराम होगा।'

ईरान ने क्या कहा?

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान पोस्ट करके युद्ध-विराम स्वीकार करने की बात कहीय़ उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री शरीफ की ट्वीट में की गई भाईचारे वाली अपील के जवाब में, और अमेरिका द्वारा उसके 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव के आधार पर बातचीत की मांग को देखते हुए, साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के 10 बिंदुओं वाले प्रस्ताव के सामान्य ढांचे को बातचीत का आधार मानने की घोषणा को ध्यान में रखते हुए, मैं ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से यह घोषणा करता हूं: अगर ईरान पर हमले रुक जाते हैं, तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देंगी।”

उन्होंने आगे कहा, “दो हफ्तों की अवधि के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, लेकिन इसके लिए ईरान की सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय (कॉर्डिनेट) करना होगा और कुछ तकनीकी सीमाओं का भी ध्यान रखना होगा।”

ट्रंप ने दिया था 48 घंटे का अल्टीमेटम

बता दें कि, ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया चुके था, लेकिन बाद में इस समय-सीमा को कई बार बढ़ाया गया। फिर इसे बढ़ाकर 8 अप्रैल की रात तक कर दिया गया था। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि समझौते की संभावना अभी भी है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो वे 'सब कुछ खत्म कर देंगे।' उन्होंने यह भी दावा किया था कि ईरान के आम लोग अपनी सरकार से खुश नहीं हैं और वे अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन कर सकते हैं।

‘एल्युमिनियम भारत’ पहल लॉन्च: उद्योग को सस्ती ऊर्जा व कच्चे माल पर तुरंत नीति समर्थन की मांग
नई दिल्ली। एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMAI) ने मंगलवार को ‘एल्युमिनियम भारत’ पहल की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार से सस्ती और सतत ऊर्जा उपलब्ध कराने तथा कच्चे माल की कमी दूर करने के लिए त्वरित नीति समर्थन की मांग की।
इस पहल का उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने नई दिल्ली में किया। ‘एल्युमिनियम भारत’ का उद्देश्य देश के एल्युमिनियम सेक्टर को सशक्त बनाना और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग, नीति-निर्माताओं तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक मंच पर लाना है।
ALEMAI के अनुसार, इस पहल के तहत उद्योग से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर विचार-विमर्श कर एक ठोस और सतत विकास रोडमैप तैयार किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत ‘एल्युमिनियम भारत-2026’ नाम से देश की पहली और सबसे बड़ी एल्युमिनियम प्रदर्शनी 26 से 29 सितंबर 2025 तक गांधीनगर के हेलिपैड एग्ज़ीबिशन सेंटर में आयोजित की जाएगी। यह आयोजन ‘एल्युमेक्स इंडिया-2026’ के साथ होगा, जिसका उद्देश्य भारतीय एल्युमिनियम उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना है।
इस अवसर पर मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल भारत को उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
वहीं ALEMAI के अध्यक्ष जीतेन्द्र चोपड़ा ने उद्योग की मौजूदा चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है। उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जबकि देश की 4.2 मिलियन टन की कुल उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते नीतिगत सहयोग मिलने पर यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
टुकड़े-टुकड़े होगा पाकिस्तान…कोलकाता पर हमले की धमकी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का करारा जवाब

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पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता नहीं रहा। पाकिस्तानी हुक्मरान समय-समय पर बेतुके बयान से सुर्खियां बटोरते रहते हैं। ऐसी ही टिप्पणी पड़ोसी मुल्क के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में की थी। अब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी पर कड़ा जवाब दिया है। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि वे 55 साल पहले के अंजाम को न भूलें जब पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया था। 

पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को ऐसा उकसाने वाला बयान नहीं देना चाहिए था। 55 साल पहले उन्होंने जब गलती की थी, तो पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया था। अगर इस बार वे बंगाल पर नजर डालने की कोशिश करेंगे, तो भगवान ही जानते हैं कि पाकिस्तान इस बार कितने हिस्सों में बंटेगा।

1971 भारत पाकिस्तान युद्ध की दिलाई याद

राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक मंच से कहा कि पाकिस्तान को ऐसे उकसावे वाले बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत के खिलाफ कोई भी गलत कदम उठाया गया तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। राजनाथ सिंह ने अपने बयान में 1971 भारत पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को इतिहास याद दिलाया।

पाकिस्तान के साथ टीएमसी को भी जवाब

बैरकपुर में चुनावी रैली के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी और उस पर तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया था कि पाकिस्तानी धमकी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं। इस पर पलटवार करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का रक्षा मंत्री होने के नाते वह खुद इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहे हैं और यह जरूरी नहीं कि हर बात पर प्रधानमंत्री ही बोलें। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा और रक्षा मामलों पर सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट है।

ख्वाजा आसिफ ने दी थी धमकी

शनिवार को सियालकोट में पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भारत किसी फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत इस बार फॉल्स फ्लैग करने की कोशिश करता है, तो इंशाअल्लाह हम उसका जवाब कोलकाता तक ले जाएंगे। आसिफ ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान में बंद कुछ लोगों की लाशों का इस्तेमाल करके उन्हें आतंकी बताने की साजिश रची जा रही है। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का जवाब तेज, सटीक और निर्णायक होगा।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस, जानें क्या है पूरा मामला

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बवाल शुरू हो गया है। इसकी आंच दिल्ली तक महसूस की जा रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली वाले घर पर असम पुलिस की एक टीम पहुंची। असम पुलिस के साथ दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद थी।बताया जा रहा है कि असम पुलिस पवन खेड़ा को अरेस्ट करने आई है। हालांकि, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा अभी घर पर मौजूद नहीं हैं।

असम की सियासी हलचल दिल्ली तक

असम विधानसभा चुनाव के प्रचार के आखिरी दौर में सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि सरमा की पत्नी के पास एक नहीं बल्कि तीन देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या परिवार की विदेशों में संपत्ति और कंपनियां हैं। इन आरोपों के सामने आते ही राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। इसकी गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है।

हिमंत बिस्‍वा ने दिए थे बड़ी कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री सरमा ने तुरंत इन दावों को खारिज कर दिया और उन्हें पूरी तरह झूठा बताया। इसके साथ ही उनकी पत्नी ने भी मोर्चा संभाला और पवन खेड़ा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद हिमंत बिस्‍वा सरमा की पत्‍नी पर 3 विदेशी पासपोर्ट रखने के आरोप लगाने वाले पवन खेड़ा से पूछताछ के लिए असम पुलिस की टीम पहुंची। मुख्‍यमंत्री हिमंत बिस्‍वा सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के संकेत सोमवार को ही दे दिये थे।

पवन खेड़ा के घर पर रेड को लेकर भड़की कांग्रेस

असम पुलिस की पवन खेड़ा के घर पर छापेमारी को लेकर कांग्रेस का रिएक्शन सामने आया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी फौज तैनात करना यह साबित करता है कि असम के मुख्यमंत्री परेशान, हताश और डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उचित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक तरह की बदले की कार्रवाई है, एक दबंग जो राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज़ को दबा रहा है, जो उसके कई काले कारनामों को उजागर कर रहा है। जो लोग डराते-धमकाते हैं, वे असल में डरे हुए होते हैं और उनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ होता है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि मुख्यमंत्री को आसन्न हार का सामना करना पड़ रहा है।

पवन खेड़ा ने सीएम हिमंत की पत्‍नी पर लगाए बड़े आरोप

पवन खेड़ा ने कुछ दिन पहले दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। पवन खेड़ा के मुताबिक, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास UAE, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हैं। दुबई में उनकी प्रॉपर्टी हैं और व्योमिंग (अमेरिका) में उनकी एक कंपनी है।