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मिडिल ईस्ट जंग के बीच लगा महंगाई का झटका, घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़े

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मिडिल-ईस्ट में जंग की आग फैलती जा रही है। ईरान-इजरायल जंग का असर भारत में भी दिखने लगा है। ईरान जंग के कारण देश में महंगाई का जोरदार झटका लगा है। ईरान-इजरायल जंग बीच घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं।

घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी

घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार, 7 मार्च से वृद्धि कर दी गई है। देश भर में 14.2 किलोग्राम के घरेलू खाना पकाने वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि नए रेट में अब दिल्ली में 14.2 kg सिलेंडर की कीमत 913 रुपए होगी, जबकि पहले यह 853 रुपए थी। एक साल से भी कम समय में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी काटेगी जेब

वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जो आज 7 मार्च से प्रभावी हो गई है। दिल्ली में अब 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1883 रुपये हो गई है। सिलेंडर की कीमतों में यह नया बदलाव अप्रैल 2025 की कीमतों के बाद हुआ है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर 1835 रुपये मिलेगा। सिलेंडर की कीमतों में उछाल के बाद लोगों में हड़कंप मच गया है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर

बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात होने वाली तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद घरेलू सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। होर्मुज के जरिये एलएनजी की आपूर्ति 28 फरवरी से ही रुक गई है। इससे लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक एलएनजी आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है और एशियाई आयात बाजारों में चिंता बढ़ गई है। भारत की एलएनजी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है।

सरकार ने कहा था-देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं

यह वृद्धि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन उपलब्धता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले आश्वासन दिया था कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को आपूर्ति में व्यवधान की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हमारी प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए किफायती और टिकाऊ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है और हम इसे बखूबी कर रहे हैं। भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, और हमारे ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कोई कारण नहीं है।

खत्म हुआ इंतजार! नीतीश के बेटे निशांत करेंगे सियासी शुरूआत, कल लेंगे पार्टी की सदस्यता

#nishantkumartojoinjdu_tomorrow

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक एंट्री की मांग लंबे समय से हो रही है। जनता दल यूनाइटेड का एक बड़ा हिस्सा लगातार निशांत की सियासी शुरूआत की मांग कर रहा है। उनका ये इंतजार खत्म होने वाला है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार कल यानी शनिवार को जेडीयू में शामिल होंगे।

संजय झा ने निशांत को लेकर रखा प्रस्ताव

मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग पर हुई जेडीयू नेताओं की अहम बैठक में यह ऐलान किया गया कि निशांत कुमार 7 मार्च को जेडीयू की सदस्यता लेंगे। बैठक के दौरान जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने नीतीश के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने नेताओं से पूछा कि क्या सभी लोग इस प्रस्ताव से सहमत हैं। इस पर बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने हाथ उठाकर सर्वसम्मति से समर्थन जताया।

पूरे राज्य का दौरा करेंगे निशांत

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार शनिवार को जेडीयू में शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि खुद निशांत कुमार ने भी पार्टी के लिए काम करने को लेकर सहमति दे दी है। राजनीति में आने के बाद निशांत कुमार बिहार का व्यापक दौरा करेंगे। पूरे राज्य में घूमकर जेडीयू के काम को आगे बढ़ाएंगे।

नीतीश बोले- चिंता की कोई बात नहीं

जदयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने विधायकों को भरोसा दिलाया है कि चिंता की कोई बात नहीं है। सीएम नीतीश कुमार ने स्पष्ट कहा कि मैं अब भी सक्रिय रहूंगा। मैं आगे भी उनका मार्गदर्शन करते रहेंगे। वह लगातार पार्टी के नेताओं और विधायकों के साथ संवाद में रहेंगे। जिस तरह से वह पहले भी पार्टी के सभी नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ सुख-दुख में खड़े रहे हैं। आगे भी उनके साथ खड़े रहेंगे।

कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, सिद्धरमैया सरकार की बड़ी घोषणा

#cmsiddaramaiahsaysbanonsocialmediauseforbelow16

कर्नाटक में सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। कर्नाटक में बच्चे अब फेसबुक-इंस्टाग्राम नहीं चला पाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण के दौरान की।

सोशल मीडिया बैन का क्या मकसद

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने आज 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा, बच्चों पर बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को रोकने के मकसद से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बैन का मकसद मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर पड़ने वाले बुरे असर को रोकना है।

सिद्धारमैया ने कुलपतियों से मांगी थी राय

पिछले महीने सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कुलपति सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कुलपतियों से राय मांगी थी। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की शिक्षा और शारीरिक फिटनेस पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

आंध्र प्रदेश में भी बैन की तैयारी

ऑनलाइन लत, दुरुपयोग और डिजिटल हानि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा कदम उठाए हैं। राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने कहा था कि सोशल मीडिया पर भरोसा “टूट रहा है” और “बच्चे निरंतर उपयोग में फिसलते जा रहे हैं”, इसलिए सरकार कानूनी विकल्पों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। लोकेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने मेटा, गूगल, एक्स और शेयर चैट जैसी प्रमुख कंपनियों को आमंत्रित किया है, ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा कर प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सके।

अमेरिका ने भारत को दी रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट, भड़का विपक्ष

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अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए '30 दिन की छूट दी है। अमेरिका ने ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से पैदा हो रहे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत को एक वैकल्पिक रास्ते का ऑफर दिया है। अमेरिका ने कहा है कि भारत फिलहाल 30 दिनों तक रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है।

सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। यह दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का रास्ता है। भारत अपनी 88 प्रतिशत से ज्यादा तेल जरूरत आयात करता है और इसमें से आधा से ज्यादा खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में सप्लाई में रुकावट से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत को महंगा पड़ सकता है। इस बीच अमेरिका ने रूस के समुद्र में फंसे तेल के जहाजों को भारत भेजने की इजाजत दे दी है। यह सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट है।

यूएस ने बताई 30 दिनों की अस्थाई छूट की वजह

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ''वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए अमेरिकी ट्रेज़री विभाग (वित्त मंत्रालय) भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली 30 दिनों की अस्थाई छूट जारी कर रहा है। यह जानबूझकर बहुत कम अवधि के लिए दिया गया है, इसलिए इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन तेल सौदों की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल से जुड़े हैं।''

राहुल गांधी ने विदेश नीति पर उठाया सवाल

इस अमेरिकी घोषणा पर कांग्रेस तिलमिला गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "हमारी विदेश नीति हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और हमारे मूल्यों के आधार पर तय होना चाहिए। ये सत्य और अहिंसा पर आधारित होनी चाहिए।" उन्होंने कहा, "आज जो हम देख रहे हैं, वह कोई नीति नहीं है। यह एक समझौता कर चुके व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।"

कांग्रेस बोली-भारतीय संप्रभुता पर हमला

वहीं, दूसरे कांग्रसी नेताओं ने इस छूट को न सिर्फ भारतीय संप्रभुता पर हमला कहा, बल्कि इसे ब्लैकमेलिंग बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट करके लिखा है, ''ट्रंप का नया खेल, दिल्ली दोस्त को कहा, पुतिन से ले सकते हो तेल, कबतक चलेगा ये अमेरिकी ब्लैकमेल।'' कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने तो इसे देश की संप्रभुता तक से जोड़ा। उन्होंने लिखा, 30 दिन की छूट जारी करना, दबाव की पाखंडी भाषा, नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरा है....क्या हम बनाना रिपब्लिक हैं, जो हमें अपने लिए तेल खरीदने के लिए अमेरिकी अनुमति की जरूरत है? वैसे ज्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी कुछ अधिक है। क्या इसे नहीं पता कि संप्रभुता का मतलब क्या है?''

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फ़ीसदी का टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 फ़ीसदी हो गया था।

असम में फाइटर जेट सुखोई हुआ क्रैश, वायुसेना के 2 पायलट शहीद

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इंडियन एयर फोर्स का एक सुखोई-30 MKI फाइटर जेट गुरुवार की शाम को असम के कार्बी आंगलोंग जिले में क्रैश हो गया। इस फाइटर जेट में दो पायलट थे। इस हादसे में दोनों पायलटने जान गंवा दी।

दो जवान शहीद

सुखोई-30 प्लेन क्रैश में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर को अपनी जडान गंवानी पड़ी। भारतीय वायु सेना ने स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर के निधन पर गहरा शोक जताया है। सेना ने कहा गया कि भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं और इस दुख की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

ट्रेनिंग मिशन पर था फाइटर जेट

पहले इस विमान के लापता होने की सूचना आई थी। फाइटर जेट एक ट्रेनिंग मिशन पर था। अधिकारियों ने कहा था कि विमान ने असम के जोरहाट से उड़ान भरने के बाद रडार से संपर्क खो दिया था। बृहस्पतिवार शाम को जोरहाट हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद असम के कार्बी आंगलोंग जिले के ऊपर से गुजरते समय रडार से संपर्क टूट गया था। यह फाइटर जेट जोरहाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग इलाके में क्रैश हो गया।

सबसे दमदार लड़ाकू विमान माना जाता है सुखोई

भारतीय वायु सेना के पास 260 से अधिक Su-30MKI जेट विमानों का बेड़ा है। 2000 के दशक की शुरुआत में वायु सेना में शामिल किया गया सुखोई Su-30 MKI सबसे दमदार लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है।

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब सुखोई जेट क्रैश हुआ हो। इससे पहले सुखोई-30 एमकेआई एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुका है। अगस्त 2019 में सुखोई-30 एमकेआई एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान असम में तेजपुर के पास धान के खेत में क्रैश हो गया था। उस दौरान दोनों पायलट सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे और बाद में उनकी जान बचा ली गई थी। मई 2015 में सुखोई-30 एमकेआई एयरक्राफ्ट टेक-ऑफ के तुरंत बाद तेजपुर एयर फोर्स बेस से लगभग 36 किलोमीटर दूर दक्षिण में क्रैश हो गया था, जिसमें क्रैश होने से पहले दोनों पायलट सुरक्षित निकल गए थे।

बिहार-बंगाल समेत 9 राज्यों के गवर्नर बदले, दिल्ली के नए एलजी बने तरनजीत सिंह संधू

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सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े संवैधानिक बदलावों की घोषणा की है। देश के 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल और उपराज्यपाल बदले गए हैं। दिल्ली, लद्दाख, बिहार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में नए उपराज्यपाल (एलजी) और राज्यपालों की नियुक्ति की गई है।

तरनजीत सिंह संधू दिल्ली के नए उप-राज्यपाल

दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर वी. कुमार सक्सेना को दिल्ली से हटाकर लद्दाख का नया एलजी नियुक्त किया गया है। जबकि तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उप-राज्यपाल बनाया गया है। अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत रहे तरनजीत सिंह संधू एक मंझे हुए राजनयिक हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का लंबा अनुभव है। उन्होंने वाशिंगटन डीसी और श्रीलंका जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

जनरल सैयद अता हसनैन बिहार के नए राज्यपाल

इनके अलावा बिहार में गुरुवार को दो बड़े राजनीतिक उलटफेर हुए। जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बिहार से हटाने के बाद आरिफ मोहम्मद खान को अभी कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर बने तमिलनाडु के गवर्नर

केरल के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तमिलनाडु के गवर्नर का काम संभालेंगे। लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया गया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया। तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। 

आर एन रवि पश्चिम बंगाल के गवर्नर नियुक्त

वहीं, तमिलनाडु के गवर्नर आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया। पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि का करियर उग्रवाद विरोधी अभियानों और पूर्वोत्तर भारत में शांति वार्ताओं (विशेषकर नगा शांति वार्ता) के लिए जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक उठापटक के बीच उनकी नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नंद किशोर यादव, राज्यपाल, नागालैंड

बिहार भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यादव बिहार विधानसभा में कई बार विधायक रहे हैं और उन्होंने सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है।

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन, अमित शाह की मौजूदगी में भरा पर्चा

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की सत्ता छोड़कर दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं। नीतीश कुमार ने आज राज्य सभा चुनाव के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर फाइल कर दिया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन पर्चा दाखिल किया है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचे थे।

एक ही गाड़ी से विधानसभा पहुंचे

पटना स्थित विधानमंडल परिसर में उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा नामांकन के मौके पर तीनों दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। खास बात यह रही कि अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन एक ही गाड़ी से बिहार विधानसभा पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। इस दौरान जदयू और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

नामांकन से पहले अमित शाह के साथ बैठक

राज्य सभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में पहले से ही हलचल थी। ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का पटना दौरा इस चर्चा को और तेज कर गया। गुरुवार सुबह अमित शाह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया और उन्हें शॉल भेंट किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य सभा चुनाव के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

भाजपा-जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर मंथन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एनडीए के अंदर नए सत्ता समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर विचार चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन की बैठक में बिहार की भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी बातचीत हुई है। हालांकि इस बैठक में क्या फैसला हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

नीतीश कुमार ने खुद दी राज्यसभा वाली जानकारी

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज घोषणा की कि वो राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। साथ ही उन्होंने ये बी भरोसा दिलाया कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।

यूएस हमले में डूबा 'आइरिस डेना', ईरान ने चेताया, कहा-भारतीय नौसेना का मेहमान था, पछताएगा अमेरिका

#iranisraelwaririsdenafrigateshrunk

अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई अब एक बेहद खतरनाक और खूनी मोड़ पर पहुंच गई है। हवा में छिड़ी जंग अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच गई है। युद्ध का दायरा मिडिल ईस्ट की हदों से बाहर पहुंचता जा रहा है। इस बीच हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है।

श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास हमला

अमेरिका की एक पनडुब्बी ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के ईरानी युद्धपोत 'आइरिस डेना' पर अचानक टॉरपीडो से हमला कर दिया और उसे समंदर में डुबो दिया। इस विनाशकारी हमले में जहाज पर सवार कम से कम 87 ईरानी नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई है। ये हमला उस वक्त हुआ जब, ईरानी युद्धपोत 'आइरिस डेना' श्रीलंका के दक्षिणी तट से गुजर रहा था।

श्रीलंकाई नौसेना ने बताया-जहाज से मदद के लिए संदेश आया

श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह हमला पनडुब्बी से छोड़े गए टॉरपीडो से किया गया। गुरुवार सुबह लगभग 5 बजकर 08 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट के बीच जहाज से मदद के लिए संदेश भेजा गया। संदेश में बताया गया कि समुद्र के अंदर एक बड़ा विस्फोट हुआ, जिससे जहाज को भारी नुकसान हुआ और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही मिनटों में जहाज रडार से गायब हो गया और डूब गया।

अमेरिकी सेना ने जारी किया हमले का वीडियो

यह अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के दौरान गहरे समुद्र में हुई पहली बड़ी नौसैनिक घटना मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध अब भारत के समुद्री क्षेत्र के आसपास भी फैल सकता है। अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आइरिस डेना पर हुए हमले का वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में विध्वसंक जहाज आइरिस डेना को अमेरिकी सेना ने पलक झपकते नेस्तनाबूद कर दिया।

ईरान हुआ आगबबूला

इस हमले के बाद ईरान आगबबूला हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा, "अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारतीय नौसेना के अतिथि रहे फ्रिगेट 'देना' पर बिना किसी चेतावनी के हमला हुआ।" उन्होंने बताया कि यह जहाज हाल ही में भारत की नौसेना के कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहा था और इसमें करीब 130 नाविक सवार थे। अराघची ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई का अमेरिका को "कड़ा परिणाम भुगतना पड़ेगा।"

राज्यसभा जा रहे नीतीश कुमार, खुद ट्वीट कर किया कन्फर्म, बोले- नई सरकार को मेरा सहयोग रहेगा

#nitishkumarhimselfconfirmedhisrajyasabha_candidacy

बिहार की सियासत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर हैं। पिछले दो दशक तक बिहार की सत्ता का केन्द्र रहे नीतीश कुमार ने दिल्ली रूख करने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है। इसके साथ बिहार में अब बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है।

नीतीश कुमार ने का राज्यसभा जाने का ऐलान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से राज्यसभा जाने की पुष्टि कर दी। उन्होंने कहा कि “पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।”

राज्यसभा जाने की जताई इच्छा

अपने संसदीय जीवन की शुरुआत को याद करते हुए नीतीश ने कहा, “राजनीति में आने के समय से ही उनके मन में एक इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी क्रम में इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं।”

बिहार के विकास और प्रगति का संकल्प जारी रहेगा-नीतीश

नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में यह भी भरोसा दिलाया कि राज्यसभा जाने के बाद भी जनता के साथ उनका संबंध पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि “बिहार के विकास और प्रगति के लिए उनका संकल्प पहले की तरह जारी रहेगा और राज्य की जनता के साथ मिलकर विकसित बिहार के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।”

नई सरकार में सहयोग का दिया भरोसा

नीतीश कुमार ने आगे कहा कि “बिहार में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।” उनके इस ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि उनके राज्यसभा जाने के फैसले से राज्य की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।”

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा? बिहार को मिल सकता है पहला भाजपाई सीएम

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बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। पिछले 21 वर्षों से सूबे की सत्ता के केंद्र रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का मन बना लिया है।बिहार के सीएम नीतीश कमार आज सुबह 11 बजे राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नीतीश का दिल्ली जाना लगभग तय

बुधवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कद्दावर नेता विजय चौधरी मौजूद रहे। बैठक के बाद विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है, लेकिन उनका दिल्ली जाना लगभग तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे समर्थक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैलते ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अपने नेता के दिल्ली जाने की चर्चाओं से व्याकुल और भावुक कार्यकर्ता धीरे-धीरे मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे हैं, जिसके चलते इलाके में हलचल और पुलिस की चौकसी दोनों बढ़ गई है। हुए प्रशासन ने ‘एक अणे मार्ग’ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनी रहे। 

पटना पहुंचे विधायक और बड़े नेता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने जेडीयू के भीतर भारी हलचल पैदा कर दी है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते पार्टी के तमाम विधायक और बड़े नेताओं को आपात स्थिति में पटना तलब किया गया है।

बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा?

नीतीश कुमार अगर राज्यसभा जाते हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न ये होगा कि बाहिर का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सूत्रों के मुताबिक अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है।

बदलेगी बीजेपी और जदयू की भूमिका?

बिहार में सियासी सरगर्मी के बीच वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त ही सबकुछ तय हो चुका था। लेकिन चुनाव में नीतीश कुमार के नाम पर ही एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी, इसलिए उन्हें 10वीं बार सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई। लेकिन अब पावर ट्रांसफर की तैयारी पूरी हो चुकी है।नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए जाने के बाद बिहार में बीजेपी और जदयू की भूमिका पूरी तरह से बदल सकती है। अभी नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी कोटे से दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन किसी बीजेपी नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।