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आंगनबाड़ी सहायिकों की फर्जी भर्ती का मामला : जिला स्तरीय जांच समिति ने शुरू की जांच

गरियाबंद- आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में फर्जी अंकसूची दिखाकर नियुक्ति मामले में अब जिला स्तरीय जांच समिति ने जांच शुरू कर दी है. मामले में सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना अधिकारी) और बीईओ देवभोग में हुए 16 नियुक्ति में जमा किए गए अंक सूची और मूल्यांकन पंजी को जांच समिति के समक्ष रखेगी.  

जांच में देरी, असल दोषी अब भी बाहर

देवभोग में जाली दस्तावेजों के आधार पर हुई नियुक्तियों की पहले हुई जांच अधूरी रह गई थी और कार्रवाई केवल छोटे स्तर के जिम्मेदारों पर हुई. असली दोषी अब भी कानूनी शिकंजे से बाहर हैं. हालांकि, कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने मामले की तह तक जाने के लिए जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. पंचायत चुनाव के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था, लेकिन अब इसे फिर से मामले में गंभीरता से लिया जा रहा है. 

जांच समिति का गठन और बैठकें

अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी चार सदस्यीय जांच समिति में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय, देवभोग एसडीएम तुलसी दास मरकाम, और जिला पंचायत अधिकारी अभिषेक पाठक को शामिल किया गया है. समिति की पहली बैठक 19 मार्च को हुई, जिसमें जांच के दिशा-निर्देश तय किए गए. मगंलवार यानी 20 मार्च, 2025 को सीडीपीओ और बीईओ को आदेश जारी किया गया कि वे सोमवार तक सभी भर्ती दस्तावेज जमा करें.

शिकायतकर्ता को भेजा गया था जेल

पूंजीपारा आंगनबाड़ी भर्ती में जाली अंक सूची का मामला सामने आने के बाद प्रधान पाठक और नियुक्त महिला अभ्यर्थी के खिलाफ देवभोग थाने में मामला दर्ज किया गया था. जनवरी में कोदोभाठा आंगनबाड़ी में भी 67% अंकों को 81% दिखाने का मामला उजागर हुआ. इसकी शिकायत करने वाली नीला यादव को ही विभाग ने आरोपी बनाकर जेल भेज दिया. कुम्हडई खुर्द भर्ती मामले में भी एक अभ्यर्थी पर पुलिस ने कार्रवाई की. इस दौरान जाली अंक सूची जारी करने वाले और इसे भर्ती प्रक्रिया में शामिल कराने वाले बड़े अधिकारी जांच से बाहर रहे. 

भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी

बता दें कि अगस्त 2024 में 16 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन निकाला गया था. भर्ती और नियुक्ति आदेश एक साथ जारी होने थे, लेकिन भारी लेन-देन के चलते चयन समिति ने नियम ताक पर रख दिए. एक साथ नियुक्ति आदेश जारी करने की बजाय अलग-अलग जारी किए गए. बड़ी गड़बड़ी उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही थी। जिला पंचायत सदस्य देश बंधु नायक ने कहा है कि पहले बड़े दोषियों को बचाए जा रहे थे. अब जिला स्तरीय जांच समिति पर पूरा भरोसा है,रुपए लेकर नियम तोड़ने वाले अब शिकंजे में आयेंगे.

अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय ने कहा कि समिति का गठन हो गया है. भर्ती से संबंधित सभी दस्तावेज मंगवाए गए हैं. जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

लोकसभा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की छत्तीसगढ़ को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर विशेष पैकेज देने की मांग

नई दिल्ली/रायपुर-  शुक्रवार को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ को भी कृषि क्षेत्र में विशेष पैकेज देने की मांग की।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने भाषण की शुरुवात शायरी से की

"गांव के गलियों में तब उम्मीदों के दीप जलते हैं। जब किसान सरकार मिलकर चलते हैं।"

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि कल्याण मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। जिससे किसानों के जीवन में नया सबेरा आया है।

किसानों की योजनाएं सिर्फ कागजों में नहीं यथार्थ के धरातल पर उतर रही है और उसका परिणाम है कि देश के किसान समृद्ध हो रहे है, खुशहाल हो रहे हैं और कृषि के प्रति लोगों का झुकाव लगातार बढ़ रहा है। देश के हर गरीब परिवार के लिए प्रधानमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत् अनाज व्यवस्था मोदी सरकार ने की है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने किसानों की बेहतरी और कृषि क्षेत्र के समुचित विकास के लिए छत्तीसगढ़ को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर विशेष पैकेज देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 30% आदिवासी और लगभग 12% अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं, जिनके हितों को ध्यान में रखते हुए यह अनुदान अत्यंत आवश्यक है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां लगभग 76% आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य में 40.11 लाख कृषक परिवार हैं, जिनमें से 82% कृषक लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। इन किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे नवीन कृषि तकनीकों और आवश्यक संसाधनों को अपनाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। यदि छत्तीसगढ़ को भी पूर्वोत्तर राज्यों की तरह केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में विशेष अनुदान प्रावधान मिले, तो इससे प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।

राज्य की प्रमुख कृषि मांगें

1. ड्रिप इरिगेशन एवं स्प्रिंकलर पर 90% अनुदान:

श्री अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Per Drop More Crop) के तहत वर्तमान में किसानों को मिलने वाले अनुदान को बढ़ाने की मांग की। वर्तमान में लघु एवं सीमांत किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% अनुदान दिया जाता है। चूंकि छत्तीसगढ़ में 83% किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं और वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, इसलिए राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में पूर्वोत्तर राज्यों की तरह 90% अनुदान स्वीकृत किया जाए।

2. नवगठित जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना:

राज्य के नवगठित छह जिलों—गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, खैरागढ़, मानपुर-मोहला, और मनेन्द्रगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना की आवश्यकता है, जिससे किसानों को नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी त्वरित रूप से मिल सके।

3. माइनर मिलेट्स (कोदो-कुटकी एवं रागी) के प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना:

छत्तीसगढ़ में माइनर मिलेट्स की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इनका प्रसंस्करण करने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी है। इन फसलों का उत्पादन मुख्य रूप से आदिवासी किसान करते हैं। यदि इन क्षेत्रों में सहकारी या निजी प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएं, तो किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और इन फसलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय निर्यात भी बढ़ेगा।

4. महिला किसानों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की योजना:

प्रदेश में अधिकांश कृषि कार्य महिलाओं द्वारा किया जाता है। यदि उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए पृथक योजनाएं चलाई जाएं, तो उनका कृषि में योगदान और भी बढ़ सकता है।

5. दूरस्थ क्षेत्रों में भंडारण सुविधाओं का विकास:

उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ में खाद्यान्न भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भंडारण की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि राज्य में वेयरहाउस निर्माण के लिए सहायता प्रदान करे, जिससे फसलों को सुरक्षित रखा जा सके और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

6. पराली जलाने की रोकथाम हेतु अनुदान:

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी पराली जलाने की समस्या बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान हेतु राज्य में क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट यंत्रों को अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना लागू की जाए।

7. बीज किस्मों की बाध्यता समाप्त करने की मांग:

वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं में केवल 5 से 10 वर्ष पुरानी विकसित प्रजातियों पर ही लाभ दिया जाता है। जबकि कई ऐसी पारंपरिक किस्में हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अधिक उत्पादन देती हैं। अतः राज्य की अनुशंसा पर विशेष किस्मों के लिए 5 से 10 वर्ष की बाध्यता समाप्त की जाए।

8. जैविक खेती को बढ़ावा एवं प्रमाणीकरण सुविधा:

जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है, लेकिन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया कठिन होने के कारण वे पूरी तरह इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। प्रमाणीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, जिससे जैविक उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके।

9. नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना में सुधार की मांग

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है, जहां 40% किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। ऑयल पाम की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर अनुमानित लागत ₹3.41 लाख आती है, जबकि भारत सरकार की ओर से मात्र ₹1.21 लाख (35%) अनुदान दिया जाता है। किसानों को बाकी ₹2.20 लाख का निवेश स्वयं करना पड़ता है, जो उनके लिए कठिन है।

श्री अग्रवाल ने सुझाव दिया कि वन अधिकार पट्टा धारक किसानों की तरह अन्य छोटे और सीमांत किसानों को भी 90% अनुदान दिया जाए, जिससे वे ऑयल पाम की खेती को अपनाने के लिए प्रेरित हों। इसके अतिरिक्त, ऑयल पाम की खेती के लिए फेसिंग (बाड़) की सुविधा बहुत आवश्यक है, लेकिन वर्तमान योजनाओं में इसके लिए कोई अनुदान प्रावधान नहीं है। इसलिए, ऑयल पाम योजना में फेसिंग हेतु अनुदान का प्रावधान भी जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम, राष्ट्रीय पुनर्गठित बांस मिशन, और सब-मिशन ऑन एग्रोफॉरेस्ट्री योजना के तहत 90% तक अनुदान प्रदान किया जाए, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

10. जल संरक्षण एवं सिंचाई व्यवस्था में सुधार की मांग

प्रदेश में पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद जल संरक्षण के अभाव में पानी व्यर्थ बह जाता है। वर्षा जल को संरक्षित करने के लिए अधिक से अधिक चेकडेम, सिंचाई तालाब आदि का निर्माण किया जाए, जिससे न केवल सिंचित क्षेत्र में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ को पूर्वोत्तर राज्यों की तरह विशेष अनुदान दिया जाए, तो यह राज्य के छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएगा और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि किसानों की इन मांगों को शीघ्रता से पूरा किया जाए, जिससे प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।

प्रदेश में हेलमेट और सीट बेल्ट अनिवार्य करने का अशासकीय संकल्प विधायक अजय चंद्राकर ने लिया वापस

रायपुर- प्रदेश में बाइक चालकों को हेलमेट एवं कार चालकों को सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य करने का अशासकीय संकल्प वापस लिया गया. विधानसभा में यह अशासकीय संकल्प भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने लाया था. इस अशासकीय संकल्प पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, यह अशासकीय संकल्प अमूल्य है. बाइक खरीदी के साथ ही हेलमेट खरीदी अनिवार्य हो, इसके लिए जो भी कानूनी प्रावधान जरूरी होगा उस पर विमर्श कर इसे लागू किया जाएगा.

गृहमत्री शर्मा ने कहा, कानून के डंडे से पुलिस खड़ा कर क्या-क्या ठीक किया जाएगा? एक्सीडेंट हो जाना और सीट बेल्ट लगाकर या हेलमेट लगाकर उस घटने को कम कर लेना ये अलग विषय है. 104 ब्लैक स्पॉट में से 90 ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त किया गया है. अभी 190 और ब्लैक स्पॉट चिन्हित किया गया है. इस बार के बजट में 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिनसे ब्लैक स्पॉट दुरुस्त किए जाएंगे. यह सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है. यह हम सबकी जिम्मेदारी है.

विजय शर्मा ने कहा, हेलमेट को लेकर कानून है. केंद्रीय मोटरयान और छत्तीसगढ़ मोटरयान जैसे क़ानून है. पिछले साल प्रदेशभर में 41 हजार कार्रवाई की गई. हेलमेट नहीं लगाने पर ढाई करोड़ रुपए और सीट बेल्ट नहीं लगाने पर एक करोड़ रुपए की वसूली की गई है. इस कानून का मजबूती से पालन करना ही है. प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई कर रही है. जनजागरूकता के लिए हम सबको सामूहिक प्रयास की जरूरत है इसलिए अजय चंद्राकर इस संकल्प को वापस ले लें.

रामविचार नेताम के नाम पर बनाना पड़ जाता यूनिवर्सिटी : अजय चंद्राकरभाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मंत्री ने सारी जिम्मेदारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर छोड़ दिया है. यदि सब कुछ जनता को ही करना है तो मैं संकल्प वापस ले लेता हूं. इससे पहले सदन में अशासकीय संकल्प पेश करते हुए अजय चंद्राकर ने सड़क हादसों को राष्ट्रीय आपदा बताया. उन्होंने कहा, रामविचार नेताम गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे थे, जब उनका एक्सीडेंट हुआ था. थोड़ा सा बच गए नहीं तो उनके नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाना पड़ जाता. साइरस मिस्त्री अरबों खरबों के मालिक सिर्फ सीट बेल्ट नहीं लगाने की वजह से चले गए.

अजय चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ में 2019-2024 तक सड़क दुर्घटना में 33 हजार मौतें हुईं. हेलमेट नहीं लगाने वालों के लिए दंड का प्रावधान सिर्फ पांच सौ रुपए का जुर्माना है. एक लाख का जो मोटरसाइकिल ख़रीद सकता है वह हेलमेट भी ख़रीद सकता है. कामकाजी महिलाएं भी अब इस तरह की दुर्घटना की चपेट में आ रही हैं. हम किन कारणों से इसे अनिवार्य नहीं करना चाहते हैं? उन्होंने कहा, स्थिति भयावह होती जा रही है. इससे सरकार पर वित्तीय भार नहीं आएगा. ट्रैफ़िक के लिए कोई इंटीग्रेटेड सिस्टम नहीं है. ब्लैक स्पॉट भी इसके लिए जिम्मेदार है. इससे जो परिणाम निकल रहा है यह सिर्फ जनहानि है. इस पर किसी भी तरह का नियंत्रण नहीं है. इस वक्त हम एक ही काम कर सकते हैं कि हम ख़ुद जागरूक हो जाए. सामाजिक आंदोलन हो. कैंपेन चलाया जाए.

कर्मचारियों के लिए हेलमेट अनिवार्य, बाकी लोग कीड़े-मकोड़े हैं क्या : चंद्राकचंद्राकर ने कहा, मैं तीन महीने के लिए गृह मंत्री था. मैंने तत्कालीन डीजीपी को कहा था कि हेलमेट नहीं लगाने वालों के खिलाफ की गई रिपोर्ट की कॉपी हर दिन मेरे पास आए. हर शाम रिपोर्ट मुझ तक आ जाती थी. चीफ सेक्रेटरी ने चिट्ठी लिखी थी कि शासकीय सर्विस के लोग हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाएंगे. बाकी लोग कीड़े मकोड़े हैं क्या? सवाल एक ही है कि जिंदगी बचानी है. ये सदन तय कर ले कि कोई नेता, कोई अफसर किसी को हेलमेट नहीं लगाने की वजह से होने वाली कार्रवाई से छुड़ाने के लिए फोन नहीं करेंगे.

सीट बेल्ट नहीं लगाने पर मंत्री, विधायक सबका कटे चालान : धर्मजीत

भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा, हेलमेट लगाए बगैर गाड़ी चलाने वाले और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. ये जनहित का मुद्दा है. इस अशासकीय संकल्प को पारित कर देना चाहिए. सभी बड़े लोगों की गाड़ियों के सीट में कवर लगा होता है. बेल्ट लगाने वाले कैसे लगाएंगे. ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. मंत्री की गाड़ी का चालान काटिये, एमएलए का चालान काटिए, अधिकारियों का चालान काटिए. थोड़ी सख्ती जरूरी है.

कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा, यह विषय जनता की सुरक्षा से जुड़ा है. ज्यादातर सड़क दुर्घटना तेज रफ़्तार में गाड़ी चलाने से होती है या फिर नशे की वजह से होती है. गांवों में ऐसा सोचा जाता है कि हेलमेट लगाने का कोई औचित्य नहीं है. सुरक्षा ज़्यादा जरूरी है. यह सभी की जिम्मेदारी है. हेलमेट की वजह से मैं दो बार बाइक एक्सीडेंट में बचा हूं. स्कूल काॅलेज के बच्चों, कार्यक्षेत्र में काम कर रहे लोगों को हेलमेट लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए.

बाइक खरीदी के साथ हेलमेट की खरीदी अनिवार्य हो : चरणदास महंत

भाजपा विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा, एक घटना परिवार के लिए दुख का कारण बन सकती है. मोटर साइकिल चलाते वक्त हेलमेट और कार चलाते वक्त सीट बेल्ट अनिवार्य करने के इस प्रस्ताव का समर्थन किया जाना चाहिए. भाजपा विधायक अनुज शर्मा ने कहा, छत्तीसगढ़ को 25 साल हो गए हैं, लेकिन राज्य की यातायात व्यवस्था आज तक नहीं सुधरी है. ट्रैफ़िक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दस महंत ने कहा, यदि मोटर साइकिल बेचने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया जाए कि उसकी बिक्री तब होगी जब हेलमेट लिया जाएगा.र

नदी में डूबकर दो युवकों की मौत, जिला प्रशासन ने दी परिजनों को 4-4 लाख की मुआवजा राशि

रायपुर-  छत्तीसगढ़ के रायपुर में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में जान गंवाने वाले जिले के चार मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा राशि मंजूर की है. मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

बता दें, ग्राम किरना, तिल्दा निवासी राकेश यादव एवं अमलीडीह, रायपुर निवासी ईश्वर पानी में डूबने से हुई थी मौत. वहीं लाभांडी, रायपुर निवासी ज्योति निषाद सर्पदंश से और अमलीडीह, रायपुर निवासी वंदना साहू की आग में झुलसने से मौत हो गई थी. इन सभी मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की मुआवजा राशि देने के लिए स्वीकृति दी गई है. 

आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा कर प्रभावित परिवारों को समय से पहले सहायता राशि प्रदान की जा रही है.

छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हो रही बारिश, मौसम विभाग ने रायपुर समेत 12 जिलों में जारी किया अलर्ट

रायपुर- छत्तीसगढ़ में बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है, जिसके कारण मौसम ने करवट ली है. कई जिलों में बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने रायपुर समेत कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है. वहीं कुछ स्थानों में अंधड़ चलने और वज्रवात के आसार है.

मौसम विभाग ने जानकारी दी क12 जिले- रायपुर, दुर्ग, महासमुंद, राजनांदगांव, बेमेतरा, बलौदाबाजार, जशपुर, कांकेर, बलरामपुर, कोरबा, सरगुजा और सूरजपुर के कुछ स्थानों में बारिश हो सकती है. इसके साथ ही तेज-आंधी, गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है. साथ ही अलर्ट जोन जारी किए गए हैं. जशपुर में रेड अलर्ट, उत्तर छत्तीसगढ़ के ज़िलों में ऑरेंज अलर्ट और मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है.

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 3 घंटे में बालोद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, दुर्ग, महासमुंद, रायपुर और राजनांदगांव में सतही हवा, गरज-चमक और बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है. यहां येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं जशपुर में ओलावृष्टि, सतही हवा, गरज-चमक और बारिश के साथ भयंकर तूफान की संभावना जताई गई है, मौसम विभाग ने यहां रेड अलर्ट जारी किया है. कांकेर में अगले तीन दिनों में ओलावृष्टि, सतही हवा और बारिश के साथ भयंकर तूफान का रेड अलर्ट जारी हुआ है. इसके अलावा बलरामपुर, कोरबा, सरगुजा और सूरजपुर में अगले तीन घंटों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है.ि 

छत्तीसगढ़ में बिहार दिवस मनाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कसा तंज, कहा- इसका उद्देश्य राजनीतिक, भाजपा को केवल चुनाव से मतलब होता है…

रायपुर-  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ में बिहार दिवस मनाए जाने पर तीखा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बिहार के बहुत सारे लोग रहते हैं. बिहार में चुनाव है, इसलिए उन्हें खुश करने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम कर रहे हैं. इसका उद्देश्य राजनीति है. पिछले साल क्यों नहीं मनाया, सरकार तो बन गई थी. बीजेपी को केवल चुनाव से मतलब होता है. 

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा में धान खरीदी मे गड़बड़ी को लेकर कहा कि खरीदी में गड़बड़ी हुई है. एक तरफ 110 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ है, वहीं सरकार 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की बात कह रही है. दोनों आंकड़ों में से कौन सा सही है. दोनों सरकारी आंकड़े हैं.

वहीं भू-जल स्तर में गिरावट पर विधान सभाअध्यक्ष की ओर सरकार को निर्देश दिए जाने पर कहा कि आसंदी से इस प्रकार के निर्देश आए तो त्रासदी से कम नहीं है. गर्मी शुरू हुआ नहीं है, और पेयजल का संकट शुरू हो गया है. सरकार नल जल योजना शुरू नहीं कर पाई है. पाइपलाइन बिछ गया, टंकी बन गई, लेकिन पानी नहीं है. पानी की खपत बढ़ने वाला है.

उन्होंने कहा कि भाजपा हमारी नरवा योजना का मजाक उड़ाती थी. पानी की समस्या से ग्रामीण क्षेत्र में जल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है. शहरी क्षेत्र में तो पानी मिलता ही नहीं. औद्योगिक क्षेत्र की अलग समस्या, वहां पानी पीने लायक नहीं है. भूमिगत जल भी दूषित हो गया. सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए.

हमारी जीत इस बात की प्रतीक है कि हमारी पहचान कमल का निशान हैं - नितिन नबीन

रायपुर- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की जीत इस बात की प्रतीक है कि हमारी पहचान कमल का निशान हैं। आज ऐतिहासिक सफलता के बाद निर्वाचित प्रतिनिधि अपनी जवाबदेही को नहीं भूलें। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को देते हुए श्री नबीन ने कहा कि जनप्रतिनिधि के नाते जनता की बात सुनें, उनकी समस्याओं के निदान में प्रामाणिकता का परिचय दें। श्री नबीन शुक्रवार को कुशाभाऊ परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में प्रदेश कार्यसमिमि सदस्य, संभाग प्रभारी, सह प्रभारी, जिला संगठन प्रभारी, सह प्रभारी, जिलाध्यक्ष, निवृत्तमान जिलाध्यक्ष, सभी मोर्चों के प्रदेश पदाधिकारी, सभी मोर्चों के प्रदेश संयोजक, सह संयोजक, सभी महापौर, सभापति, नपा-नपं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

भाजपा प्रदेश प्रभारी श्री नबीन ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में पंचायत से लेकर सांसद तक है। जन प्रतिनधि यह बात हमेशा ध्यान रखें कि हमें अनुशासन पर ध्यान देना होगा। पार्टी के निर्णय को सहज स्वीकार करें। इसमें उनका ही लाभ है। आप सभी जनप्रतिनिधियों के समक्ष अब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रध्देय अटलजी के सपनों का छत्तीसगढ़ बनाने व संवारने की गहन जिम्मेदारी है। श्री नबीन ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के 30 मार्च को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास में सबकी सहभागिता हो और यह कार्यक्रम भव्य हो इसके लिए कार्यकर्ताओं का आवाहन किया।

जितनी बड़ी सफलता उतनी बड़ी जिम्मेदारी इस बात को ध्यान में रखकर जनहित में हम अपनी भूमिका का निर्वहन करें - किरण सिंह देव

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि लगातार सवा साल से विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, उप चुनाव, के बाद निकाय और पंचायत चुनावों में ऐतिहासिक जीत हमारे लिए महत्वपूर्ण अवसर है। यह अभूतपूर्व विजय है। विधानसभा चुनाव में हमारा वोट प्रतिशत 46 था जो लोकसभा में बढ़कर 51 प्रतिशत हुआ और निकाय व पंचायत चुनाव में हमारा वोट प्रतिशत 55 हुआ है। श्री देव ने कहा कि यह बड़ा जनादेश है। पंचायत से पार्लियामेंट तक भाजपा का परचम फहराने का लक्ष्य पूर्ण हुआ। इतने बड़े जनादेश के पीछे बहुत से समीकरण और कार्यकर्ताओं के परिश्रम के साथ ही केन्द्र और प्रदेश के विष्णुदेव सरकार के कार्यों पर जनता ने विश्वास किया है। केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का क्रियांवयन पंचायत व वार्ड स्तर पर होना है इसलिए अब हमें और अधिक सचेष्ट होना होगा। जितनी बड़ी सफलता उतनी बड़ी जिम्मेदारी इस बात को ध्यान में रखकर जनहित में हम अपनी भूमिका का निर्वहन करें। जनता का भाजपा पर विश्वास बढ़ रहा है। श्री देव ने निर्वाचित जन प्रतिनिधियों से विनम्रतापूर्वक जनसेवा में जुटने का आह्वान किया।

व्यवस्था में बदलाव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को लाना है इसके लिए जनता ने हमें चुना है - अजय जम्वाल

क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की अपील करते हुए कहा कि सभी जनप्रतिनिधि इस कार्यक्रम में अवश्य सम्मिलित हो। श्री जम्वाल ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए समर्पित रहना है। 2047 तक पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक भाजपा की सरकार होगी तो देश में सुशासन आएगा। देश ने कांग्रेस के विकल्प के रूप में भाजपा पर भरोसा किया है। इस भरोसे पर खरा उतरकर हम सुशासन ला सकते हैं। श्री जम्वाल ने कहा कि आज शासन बदला है व्यवस्था व प्रशासन नहीं। व्यवस्था में बदलाव आपको लाना है इसके लिए जनता ने आपको चुना है। श्री जम्वाल ने कहा कि आज देश के हर व्यक्ति के हाथ में पूरी दुनिया है। वह हर क्षण हमें परख रहा है। सत्ता हमारा साध्य नहीं व्यवस्था में परिवर्तन का साधन बने। इसके लिए हर स्तर पर डिजिटाइजेशन करना होगा। कभी छत्तीसगढ़ को कांग्रेस का गढ़ बताया जाता था जिसे आप सबने बहुत मेहनत करके जन समर्थन दिलाकर भाजपा का गढ़ बनाया है उस समर्थन को बनाए रखने के लिए हमें सचेष्ट रहना होगा।

बदली तो सिर्फ सत्ता है अब व्यवस्था को बदलने की जिम्मेदारी हमें निभाना है - अरुण साव

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि यह परिवर्तन छत्तीसगढ़ की फिजा बदल दी है। चहुंओर केसरिया और भगवा फहरा रहा है। लेकिन बदली तो सिर्फ सत्ता है अब व्यवस्था को बदलने की जिम्मेदारी हमें निभाना है। व्यवस्था में परिवर्तन लाकर हम छत्तीसगढ़ को एक आदर्श राज्य बनाएं। निकाय व पंचायत चुनाव में जीत हासिल ऐतिहासिक है उस बड़ी जीत को विनम्रता से स्वीकार कर अब व्यवस्था और प्रशासनिक कार्य संस्कृति में बदलाव लाना हमारी जिम्मेदारी है। भाजपा विचारधारा आधारित पार्टी है और जनता ने हमें हमारी विचारधारा के आधार पर चुना है। हम सत्ता के लिए नहीं जन सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। श्री साव ने कहा कि निकाय और पंचायत में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ी है। श्री साव ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जन अपेक्षाओं पर कायम काम कर रही है। अब जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वह छत्तीसगढ़ को भाजपा का स्थाई गढ़ बनाएं। श्री साव ने 30 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को भव्यता व सफलता प्रदान करने की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐतिहासिक जीत को उत्साह ऊर्जा की झलक किस कार्यक्रम में दिखाई दे।

भाजपा की ऐतिहासिक जीत की पूरे देश में चर्चा हो रही है - पवन साय

प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने पार्टी के आगामी कार्यक्रमों व कार्ययोजनाओं की रूपरेखा रखी। श्री साय ने बताया विधानसभा से लेकर हाल के निकाय व पंचायत चुनाव तक भाजपा की ऐतिहासिक जीत की पूरे देश में चर्चा हो रही है और कहा जा रहा है कि भाजपा ने छत्तीसगढ़ में इतिहास बदल दिया हे। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगामी 30 मार्च को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास में सभी जनप्रतिनिधियों से उपस्थिति के साथ ही भारी संख्या में आम जन की भागीदारी हो।

संजय श्रीवास्तव ने दी बिहार दिवस कार्यक्रम की जानकारी

भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने भाजपा के बिहार दिवस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 22 मार्च को बिहार स्थापना दिवस है और इस निमित्त 2 से 30 मार्च तक बिहार राज्य के प्रवासी बंधुओं के साथ स्नेह मिलन के कार्यक्रम होंगे। सभा कार्यक्रम में स्थानीय और प्रवासी बिहारी समाज के सफल व्यक्तियों का सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सहभोज शामिल होंगे। सहभोज में स्थानीय और बिहारी व्यंजन शामिल किए जाएंगे। कार्यक्रमों एवं भाषणों में भारतीय संस्कृति एवं इतिहास में बिहार के योगदान, बिहार में एनडीए सरकार की उपलब्धियों और आगामी विधानसभा चुनावों में प्रवासियों के सहयोग पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बिहार भाजपा के नेता इन कार्यक्रमों में भाग लेंगे, स्थानीय नेता और समाज के वरिष्ठ लोग इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। बिहार की संस्कृति, इतिहास, दर्शनीय स्थलों और विकासात्मक पहलुओं के बारे में एक प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रदेश प्रवक्ता दीपक म्हस्के ने निकाय और पंचायत चुनावों के नतीजों का आंकड़ेवार प्रजेंटेशन दिया। इस मौके पर दीपकमल के विजय अंक का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने दीपकमल के अंक की प्रशंसा की और कहा कि सदैव हर अंक संग्रहणीय होता है।

इस अवसर पर प्रभारी नितिन नबीन, उप मुख्यमंत्री अरूण साव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, बिहार के क्षेत्रीय पदाधिकारी आशुतोष, प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव, भरत वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी, दीपकमल के संपादक पंकज झा, प्रबंध संपादक हेमंत पाणिग्रही सहित पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने किया एवं आभार प्रदेश महामंत्री भरत लाल वर्मा ने माना।

राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ द्वारा मानिटरिंग एवं इवैल्यूएशन पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन

रायपुर-  राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ द्वारा नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। अटल नगर, नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के सभाकक्ष में 20 और 21 मार्च को आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को सुदृढ़ करना, नीति-निर्माण को डेटा आधारित बनाना और योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना था। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिकारियों के लिए मूल्यांकन, क्यों, कब और कैसे विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में राज्य शासन के अधिकारियों को मानिटरिंग और इवैल्यूएशन के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी गयी। योजनाओं की प्रगति प्रभाविता को ट्रैक करने और परिणामों का विश्लेषण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। मूल्यांकन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, योजनाओं के प्रभाव को मापने के लिए लॉजिकल फ्रेमवर्क और थ्योरी ऑफ चेंज का उपयोग, डेटा संग्रह की पद्धतियां, प्रभावी नीति निर्माण के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यशाला में मूल्यांकन में आने वाली चुनौतियां और समाधान पर भी विस्तृत व्याख्यान दिया गया।

कार्यशाला में प्रोग्राम/स्कीम इवैल्यूएशन के महत्व, उसके विभिन्न प्रकार, तरीकों, रूपरेखा (फ्रेमवर्क) और गुणवत्ता आश्वासन (क्वालिटी एश्योरेंस) पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रभावी मूल्यांकन से न केवल योजनाओं की सफलता और विफलता का विश्लेषण किया जा सकता हैए बल्कि सुधार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा सकते हैं।

प्रशिक्षण के दौरान डेटा संग्रह, विश्लेषण तकनीक, निगरानी एवं मूल्यांकन के सर्वाेत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को प्रभाव मूल्यांकन, प्रक्रियात्मक मूल्यांकन और परिणाम मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया गया।

राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम ने बताया कि आयोग मूल्यांकन हेतु संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उपाय अपना रहा है। आने वाले समय में नीति निर्माण को डेटा संचालित और प्रभावी बनाने इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। डॉ. सुब्रमण्यम ने कहा कि सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए पारदर्शी और सटीक मूल्यांकन आवश्यक है। यह प्रशिक्षण अधिकारियों को नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगा।

कार्यशाला के समापन अवसर पर राज्य नीति आयोग की सदस्य सचिव डॉ. नीतू गोरडिया ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और डी.एम.ई.ओ. टीम को धन्यवाद देते हुए कहा, कि भविष्य में राज्य नीति आयोग और डी.एम.ई.ओ. इस तरह की और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, ताकि छत्तीसगढ़ में डेटा-संचालित शासन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

कार्यशाला में डी.एम.ई.ओ., नीति आयोग, भारत सरकार के निदेशक अबिनाश दास व उनकी एक्सपर्ट टीम द्वारा आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, डाटा गर्वनेंस क्वालिटी इंडेक्स एवं लॉजिकल फ्रेमवर्क तथा मॉनिटरिंग व इवैल्यूएशन के बारे में प्रस्तुतीकरण व परिचर्चा की गई।

उक्त कार्यशाला में सुशासन एवं अभिसरण विभाग, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, खाद्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, योजना विभाग सहित अन्य विभागों के राज्य एवं जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण शामिल हुये।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उत्कृष्टता पुरस्कार की घोषणा, उत्कृष्ट पत्रकार के रुप में सुदर्शन न्यूज़ के राज्य प्रमुख योगेश मिश्रा के नाम की हुई घोषणा

रायपुर-   छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन आज विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह ने उत्कृष्ट विधायकों और पत्रकारों के नामों की घोषणा की है।

विधानसभा में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के उत्कृष्ट पत्रकार के तौर पर सुदर्शन न्यूज के छत्तीसगढ़ ब्यूरो योगेश मिश्रा के नाम की घोषणा हुई, साथ ही प्रिंट मीडिया से दैनिक भास्कर के राकेश पांडे के नाम की घोषणा हुई । वहीं सत्ता पक्ष से भावना बोहरा और विपक्ष से लखेश्वर बघेल उत्कृष्ट विधायक चुने गए हैं। उत्कृष्टता पुरस्कार मिलने वालों को विधानसभा अध्यक्ष के साथ सभी विधायकों ने बधाई भी दी।

गौरतलब है कि योगेश मिश्रा बलौदाबाजार जिले के ग्राम कटगी के रहने वाले हैं, जो पिछले 15 वर्षों से रायपुर में पत्रकारिता कर रहे हैं। अभी वर्तमान में योगेश मिश्रा, सुदर्शन न्यूज में छत्तीसगढ़ ब्यूरो की भूमिका निभा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक सदन में पारित: सीएम साय ने कहा – पांच साल में पिछली सरकार ने युवाओं के सपनों को अंधेरे में धकेला

रायपुर-  विधानसभा में चर्चा के बाद छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक 2025 सदन में पारित हुआ. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण अटल बिहाई बाजपेयी ने जिस उद्देश्य से किया था उसे भाजपा की सरकार ने साकार किया है. आज वर्तमान में कुल 17 निजी विश्वविद्यालय खुल गए है. बीते पांच साल में पिछली सरकार ने युवाओं के सपनों को अंधेरे में धकेलने का काम किया था.

सीएम साय ने कहा, छत्तीसगढ़ को विकासशील राज्य से विकसित राज्य बनाने के लिए शिक्षा की गुणवत्ता सबसे जरूरी है. शिक्षा की पहुंच दुरस्त अंचलों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. कोहका दुर्ग में रूंगटा स्किल निजी विश्वविद्यालय शुरू किया जाना प्रस्तावित है. राज्य में युवाओं को कौशल युक्त शिक्षा दिया जाएगा. छात्रों को बेहतर करियर विकल्प मिलेगा. राज्य के सकल प्रवेश अनुपात बढ़ाने यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. यह 18 निजी विश्वविद्यालय होगा. निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग ने भी इस नए विश्वविद्यालय खोलने की अनुशंसा की है.

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, कांग्रेस सरकार के दौरान लाए गए निजी विश्वविद्यालय के कानून को सर्वोच्च न्यायालय ने अमान्य कर दिया था. उस वक्त ऐसे-ऐसे कुलपति थे जो लूना में चलते थे. पंचर की दुकान में पंचर बनाते खड़े रहते थे और उनकी गाड़ी में कुलपति लिखा होता था. छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय क़ानून इसी विधानसभा से निकला और देश के दूसरे राज्यों ने भी उसी क़ानून के आलोक में क़ानून बनाए थे. मैं उच्च शिक्षा मंत्री था तब मैंने जीआर पूछा तब विभाग को मालूम नहीं था. भाजपा के 15 सालों में कितने निजी विश्वविद्यालय बने इसे मैं आज ख़ुद नहीं गिन सकता.

शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जिसे जो पियेगा वह दहाड़ेगा : चंद्राकर

विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, दुरस्त अंचलों में भी विश्वविद्यालय खोले गए. जब मैं उच्च शिक्षा विभाग का प्रतिवेदन पढ़ रहा था तब मुझे आश्चर्य हुआ कि वहां भी शिक्षकों की कमी है. निजी विश्वविद्यालय में कोर्स को पढ़ाने वाले नहीं है. इसे ठीक करने का कोई मैकेनिज्म नहीं है. कौन-कौन सी कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आई. कितनी नौकरी लगी, इसका भी कोई मैकेनिज्म नहीं दिखता. जीआर में हम आज राष्ट्रीय स्तर पर भी पीछे हैं. बाबा साहब अंबेडकर कहते थे कि शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जिसे जो पियेगा वह दहाड़ेगा. आज अख़बारों में छपा है कि हैपीनेस इंडेक्स में हम पाकिस्तान बांग्लादेश से भी पीछे हैं. शिक्षा से ऐसे इंडेक्स बदले जा सकते हैं. बड़ी चिंता 8-9 हज़ार रिक्त पदों की है. वेलफेयर स्टेट में शिक्षा को उच्च स्थान मिले.

निजी विश्वविद्यालय खोलने से बेहतर है काॅलेज खोलें : व्यास कश्यप

कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने कहा, निजी विश्वविद्यालय खोले जाने चाहिए. छत्तीसगढ़ में छात्रों को बेहतर शिक्षा दिए जाने के प्रयास होने चाहिए. सिर्फ़ इंडेक्स बढ़ाने के लिए इतने विश्वविद्यालय नहीं खोले जाने चाहिए. निजी विश्वविद्यालय के अधिकांश छात्र बड़े घरों के होते हैं और सिर्फ डिग्री लेने के लिए प्रवेश लेते हैं. निजी विश्वविद्यालय डिग्री बेचने का काम करते हैं. निजी विश्वविद्यालय शिक्षा की हत्या है. निजी विश्वविद्यालय खोलने से बेहतर है काॅलेज खोलें.